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April 05, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

 दुर्ग / शौर्यपथ / कामनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप लंदन में भारत के लिए कांस्य पदक विजेता छत्तीसगढ़ के गौरव दुर्ग शहर की बेटी वेदिका खुशी रावना के पदक जीतने उपरांत प्रथम गृह नगर दुर्ग आगमन पर विजय यात्रा दिनांक  17 जुलाई को निकाली गई जिसमें शहर के महापौर धीरज बाकलीवाल सभापति राजेश यादव पार्षद गुड्डू बबीता यादव के साथ ही साथ खेल संघ से जुड़े विभिन्न पदाधिकारी और खेल प्रेमी तथा शहर के नागरिकों ने जगह-जगह छत्तीसगढ़ के गौरव दुर्ग शहर की बेटी का आत्मीय स्वागत किया गया विजय शोभायात्रा मालवीय चौक दुर्ग से प्रारंभ होकर राजेंद्र पार्क चौक ग्रीन चौक से होते हुए स्टेशन रोड इंदिरा मार्केट पुराना बस स्टैंड से होते हुए आरटीओ ऑफिस दुर्ग के पास समापन हुआ .

 दुर्ग / शौर्यपथ / उड़ान नई दिशा  समूह की महिलाओ ने मुख्यमंत्री निवास जाकर मुख्यमंत्री श्री भुपेश बघेल को समुह की महिलाओ के द्वारा बनाये गये धान के बैच भेंट किए  जिसकी  मुख्यमंत्री श्री भुपेश बघेल ने प्रशंसा की । उन्हें बैच बहुत पसंद आया । अध्यक्ष निधि चन्द्राकर ने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में हम लोगों ने कांसेप्ट के तहत "हर सिने में सजेगा छत्तीसगढ़ के धान का बैच " बैच बनाये तथा बैच को नेवी के सैनिकों के लिए भी भेजे तथा इसका आर्डर लेकर छत्तीसगढ़ के बाहर राज्यों में भी भेजा । बैच को हमने हमारे शासन के मंत्री कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे, सांस्कृतिक मंत्री श्री भगत  एवं पूर्व विधायक श्रीमती प्रतिमा चंद्राकर  को भी भेंट किए। हमे खुशी हैं कि सभी ने हमारे बैच को पसन्द किया । कलेक्टर श्री पुष्पेन्द्र मीणा  को हमने बैच भेंट करते समय कहा था कि स्वतंत्रता दिवस पर जरूर लगाएं । उन्होंने हमारे बात का मान रखा और बैच लगाये। महापौर भिलाई श्री नीरज पाल ने भी स्वतंत्रता दिवस पर धान का बैच लगा कर हमें आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित किया ।

दुर्ग / शौर्यपथ /

   छत्तीसगढ़ प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष सांसद अरुण साहू  का संभागीय बैठक हेतु प्रथम नगर आगमन हुआ भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं ने बहुत ही उत्साह और उमंग के साथ विभिन्न स्थानों में भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष का स्वागत अभिनंदन किया भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं ने कर्मशाला चौक नेहरू नगर चौक बटालियन मालवीय नगर चौक पटेल चौक में गंजपारा सदर मंडल एवं भाजपा कार्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं महिला मोर्चा की बहनों द्वारा प्रदेश अध्यक्ष का ऐतिहासिक स्वागत किया गया
*मीडिया को संबोधित करते हुए नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष अरुण साहू जी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की दमनकारी कांग्रेस सरकार को आने वाले 2023 के चुनाव में निश्चित ही हार होगी . भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं का उत्साह यह बता रहा है कि आने वाली सरकार भारतीय जनता पार्टी की बनेगी. परदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने पर संसद अरुण साव ने कहा कि भाजपा के केन्द्रीय नेतृतव ने एक जमीनी कार्यकर्ता को इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है जिससे यह साफ है कि भाजपा अपने कार्यकर्ताओ के हमेशा साथ है . दुर्ग में चल रही गुटबाजी की राजनीती पर नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष सांसद अरुण साव ने गुटबाजी को नकारते हुए कहा कि इस बार भाजपा की दुर्ग ही नहीं समूचे प्रदेश में बड़ी जीत होगी और अगली सरकार भाजपा की ही बनेगी .
  संभागीय बैठक में क्षेत्रीय संगठन मंत्री माननीय अजय जमवाल प्रदेश संगठन महामंत्री पवन सिंह जी पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह जी सहित प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव , महामंत्री किरण देव जी दुर्ग सांसद विजय बघेल , राजनांदगांव  सांसद संतोष पांडेय ,उषा टवरी, चंद्रिका चंद्राकर, राकेश पांडे ,,जिलाध्यक्ष जितेंद्र वर्मा, महामंत्री नटवर तम्रकर, ललित चंद्राकर सहित संभाग के विधायक पूर्व विधायक पदाधिकारी गण उपस्थित थे .संभाग स्तरीय बैठक हेतु अपेक्षित श्रेणी निम्नानुसार थी राष्ट्रीय पदाधिकारी / राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य , प्रदेश भाजपा कोर ग्रुप सदस्य / प्रदेश भाजपा पदाधिकारी एवं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य , सांसद / विधायक ,  संभागीय प्रभारी / जिला प्रभारी - सह प्रभारी ,  मोर्चा के राष्ट्रीय पदाधिकारी / राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य , निवर्तमान सांसद / निवर्तमान विधायक , विधानसभा के प्रभारी ,जिला भाजपा अध्यक्ष / महामंत्री शामिल हुए और पार्टी के प्रति सभी की भागीदारी व उत्साह नजऱ आया ।

दुर्ग / शौर्यपथ / आज अहिवारा विधानसभा के विधायक एवं छत्तीसगढ़ शासन कैबिनेट मंत्री श्री गुरु रूद्र कुमार ने नगर पालिका परिषद अहिवारा के वार्ड क्रमांक 11 में यात्री प्रतिक्षालय का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण काफी सुंदर तरीके से कराया गया है। इसका निर्माण ऐसे स्थान पर करवाया गया है जहां  लोगों का  नियमित रूप से आना-जाना रहता है। यात्री प्रतीक्षालय बनने से  लोगों को काफी राहत मिलेगी जोकि प्रतिदिन एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करते हैं।यात्री प्रतिक्षालय में दूरदराज से आने वाले राहगीरों व आगंतुकों के लिए बेहतर बैठक व्यवस्था का इंतजाम किया गया है। इसके साथ ही यात्री प्रतिक्षालय गर्मी व बरसात के मौसम में यात्रियों के लिए एक आश्रय का कार्य भी करेगी। साथ ही मंत्री ने वार्ड क्रमांक 13 में मंगल भवन आहाता कार्य का भूमिपूजन भी किया।

 दुर्ग / शौर्यपथ /

   वार्ड नंबर 38 में निर्मित अमृत मिशन योजना के तहत निर्माणाधीन पानी टंकी का स्तर हीन निर्माण हो चुका है निर्माण के बाद रायपुर के एजेंसी ने भी इस टंकी को अयोग्य घोषित कर दिया वही नवनिर्मित पानी टंकी पर उद्घाटन के पहले ही रिपेयरिंग का कार्य प्रारंभ हो चुका है आप समझ सकते हैं कि दुर्ग निगम में अमृत मिशन में भ्रष्टाचार किस चरम सीमा पर पहुंच गई है नागपुर की एजेंसी द्वारा निर्मित स्तरहीन  टंकी के बारे में कई बार खबरें भी प्रकाशित हो चुकी है.
   इस तरह इस तरह निर्माण और एजेंसियों द्वारा अयोग्य घोषित किए जाने के बावजूद भी अगर कार्य के प्रभारी इंजीनियरों पर ठेकेदारों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही नहीं होती तो इसका सीधा अर्थ है कि निगम प्रशासन का जल विभाग और निगम की शहरी सरकार के साथ निगम प्रशासन की जबरदस्त मिलीभगत शामिल है और भ्रष्टाचार में सभी लिप्त नजर आ रहे हैं निगम की शहरी सरकार के महापौर धीरज बाकी वालों को चाहिए कि वार्ड नंबर 38 में निर्माणाधीन पानी टंकी के स्तर हीन निर्माण पर शामिल कार्य इंजीनियर और कार एजेंसी पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करें.
   क्योंकि यह पानी टंकी का निर्माण निगम प्रशासन के मद से सरकार के मद से नहीं आम जनता के भरे हुए टैक्स के पैसे से जनहित के लिए नियमित हो रहा है जनता के पैसे को यु स्तरहीन निर्माण कर बर्बाद वाले जिम्मेदार लोगों पर सख्त से सख्त कार्यवाही करने की अनुशंसा कर महापौर बाकलीवाल और विधायक अरुण वोरा शहर की जनता को यह संदेश दे सकते हैं कि उन्हें शहर के और शहर के विकास की चिंता है साथ ही जनता के पैसों की बर्बादी पर जनप्रतिनिधि कोई भी कोताही बर्दास्त नहीं करेंगे .
  बता दें कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से एक बार फिर से विधायक अरुण वोरा ही चुनाव मैदान में उतरेंगे जैसी की राजनीतिक चर्चा है किंतु अगर इस तरह के भ्रष्टाचार को मौन देते हुए विधायक वोरा चुनावी मैदान में उतरेंगे तो आम जनता को किस अधिकार से बोल सकेंगे उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार नहीं हुआ है और आम जनता किस धोकर और विश्वास के साथ विधायक वोरा को अपना जनप्रतिनिधि चुने ..

टेस्टिंग के लिए पानी भरने के लिए अधिकारियों को दिये निर्देश:
   शासन की महती योजना अमृत मिशन फेस 1 के तहत् नगर निगम दुर्ग क्षेत्र में पूरी आबादी को पेयजल संकट से निजात दिलाने लगातार प्रयासरत् है । शहर विधायक अरूण वोरा एवं महापौर धीरज बाकलीवाल के द्वारा अमृत मिशन योजना की लगातार मॉनिटरिंग एवं निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे के मार्ग दर्शन में सभी कार्यो को पूर्ण करने के निर्देश अधिकारियों को दिये गये है । आज निगम आयुक्त ने अमृत मिशन के तहत् निर्मित गंजमंडी पानी टंकी का निरीक्षण किया उनके द्वारा उपस्थित कार्यपालन अभियंता प्रमोद दुबे, एस.डी. शर्मा, सब इंजिनियर भीम राव को तुरंत पानी टेस्टिंग हेतु टंकी में पानी भरने के निर्देश दिये । अमृत मिशन योजना के तहत् निर्मित इस पानी टंकी से पानी सप्लाई प्रारंभ होने से शहर की शत्-प्रतिशत् आबादी को पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध होगा । शहर की गंजमंडी पानी टंकी जो सबसे बडी पानी टंकी है जिसका निर्माण अमृत मिशन योजना के तहत् किया गया है । जिसकी क्षमता 3400 किलो लीटर है इस पानी टंकी में टेस्टिंग के लिए पानी भरने के निर्देश दिये गये है । टेस्टिंग के पश्चात् इस टंकी से जल प्रदायगी प्रारंभ होने पर शहर के मध्य भाग स्थित केलाबाडी, कसारीडीह , गंजपारा, ऋषभ नगर क्षेत्र के लगभग 40000 परिवारों को अमृत मिशन योजना के तहत् लाभान्वित होंगे । अमृत मिशन योजना के तहत् जल प्रदायगी के साथ-साथ जल शुद्धिकरण कार्य में विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में 162 स्थानों में होगा पीपल, बरगद जैसे सांस्कृतिक महत्त्व के पौधो का रोपण
शहरी वातावरण को शुद्ध रखने और सांस्कृतिक महत्व के पेड़ों को सहेजने की अनोखी पहल

  रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जन्माष्टमी के अवसर पर राजधानी रायपुर के तेलीबांधा में विकसित किए जा रहे कृष्ण-कुंज में सांस्कृतिक एवं जीवनोपयोगी वृक्षों का रोपण की शुरूआत करेंगे। श्री बघेल की पहल पर छत्तीसगढ़ के सभी नगरीय क्षेत्रों में ’कृष्ण कुंज’ विकसित किए जा रहे हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर कृष्ण कुंज में बरगद, पीपल, कदंब जैसे सांस्कृतिक महत्व के एवं जीवनोपयोगी आम, इमली, बेर, गंगा इमली, जामुन, गंगा बेर, शहतूत, तेंदू ,चिरौंजी, अनार, कैथा, नीम, गुलर, पलास, अमरूद, सीताफल, बेल, आंवला के वृक्षों का रोपण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को ’कृष्ण-कुंज’ विकसित करने के लिए वन विभाग को न्यूनतम एक एकड़ भूमि का आबंटन करने के निर्देश दिए हैं। अब तक राज्य के 162 स्थलों को ’कृष्ण कुंज’ के लिए चिन्हांकित कर लिया गया है। वृक्षारोपण की तैयारी भी बड़ी उत्साह के साथ की जा रही है। इस कृष्ण जन्माष्टमी से पूरे राज्य में ’कृष्ण कुंज’ के लिए चिन्हित स्थल पर वृक्षों का रोपण प्रारंभ किया जाएगा। कृष्ण कुंज को विशिष्ट  पहचान दिलाने के लिए सभी निकायों में एकरूपता प्रदर्शित करने हेतु वन विभाग द्वारा बाउंड्रीवाल गेट पर लोगो का डिजाईन एक समान तैयार किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने ‘कृष्ण-कुंज’ योजना के उद्देश्यों को लेकर कहा है कि, “वृक्षारोपण को जन-जन से जोड़ने, अपने सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उन्हें विशिष्ट पहचान देने के लिए इसका नाम ‘कृष्ण-कुंज’ रखा गया है। विगत वर्षों में शहरीकरण की वजह से हो रही अंधाधुंध पेड़ों की कटाई से इन पेड़ों का अस्तित्व खत्म होता जा रहा है। आने वाली पीढ़ियों को इन पेड़ों के महत्व से जोड़ने के लिए ‘कृष्ण-कुंज’ की पहल की जा रही है।
     रायपुर जिले के 10 नगरीय निकाय कुर्रा, खरोरा, बिरगांव, अटारी, तेलीबांधा, आरंग, चंदखुरी, कुरुद समोदा, उरला में कृष्ण-कुंज के लिए स्थल चयनित किया गया है। गरियाबंद जिले के 3 महासमुंद के 6, गौरेला पेंड्रा जिले के 2 कोरिया जिले के 7, कोंडागांव जिले के 3,दंतेवाड़ा जिले के 4, बीजापुर जिले, सुकमा, नारायणपुर के 1-1 स्थलों के साथ कुल 162 चयनित स्थलों में जन्माष्टमी पर पौधों का रोपण किया जायेगा।
     सांस्कृतिक विविधताओं से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ का हर एक पर्व प्रकृति और आदिम   संस्कृति से जुड़ा हुआ है। इनके संरक्षण के लिए ही यहां के तीज-त्यौहारों को आम लोगों से जोड़ा गया और अब ‘कृष्ण-कुंज’ योजना के माध्यम से इन सांस्कृतिक महत्व के पेड़ों को सहेजने की अनुकरणीय पहल हो रही है। जो आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर कल की ओर ले जाएगी और एक नए छत्तीसगढ़ के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएगी।

 नई दिल्ली / शौर्यपथ  /  यूक्रेन युद्ध के बीच भारत रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। भारत के इस कदम पर अमेरिका समेत कई यूरोपीय देश पहले ही नाराजगी जता चुके हैं। हालांकि भारत ने रूस के साथ अपने संबंधों का हर मौके पर मुंहतोड़ जवाब दिया है। अब यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्री कुलेबा ने भारत और रूस के बीच कच्चे तेल की खरीद को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि रूस से भारत लाए जा रहे कच्चे तेल के हर बैरल में यूक्रेन के नागरिकों का खून मिला हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन भारत से अधिक व्यावहारिक समर्थन की उम्मीद करता है क्योंकि वह रूस से लड़ रहा है। उन्होंने यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों की वापसी में सरकार की मदद की भी याद दिलाई। दिमित्री कुलेबा ने कहा कि जब भारत रूसी कच्चा तेल खरीदता है तो उन्हें यह समझना होगा कि छूट यूक्रेन के खून से चुकानी होगी। भारत को आपूर्ति किए जाने वाले रूसी कच्चे तेल के प्रत्येक बैरल में यूक्रेन के रक्त का उचित हिस्सा होता है। हम भारत के लिए मित्रवत और खुले हैं। मैंने भारतीय छात्रों को निकालने का समर्थन किया। हमें भारत से यूक्रेन को और अधिक व्यावहारिक समर्थन की उम्मीद थी। उन्होंने भारत और यूक्रेन को दो ऐसे लोकतंत्रों के रूप में संदर्भित किया जिनमें आवश्यक समानताएं हैं और दोनों लोकतंत्रों को कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना है।
एस जयशंकर ने बताई भारत की लाचारी
भारत के विदेश मंत्री ने पहले ही कर दिया है स्पष्ट
इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि तेल और गैस की कीमतें बेवजह ऊंची हैं। उन्होंने कहा कि एशिया के पारंपरिक ऊर्जा आपूर्तिकर्ता ऐसी स्थिति से निपटने के लिए यूरोप की ओर रुख कर रहे हैं जहां हर देश कोशिश करेगा। उन्होंने कहा कि हम अपने हितों को लेकर बहुत खुले और ईमानदार रहे हैं। मेरे पास 2,000 डॉलर प्रति व्यक्ति आय वाला देश है। ये वे लोग नहीं हैं जो ऊर्जा की ऊंची कीमतों को वहन कर सकते हैं। यह मेरा दायित्व है ... नैतिक कर्तव्य वास्तव में उन्हें दुनिया से सबसे अच्छा सौदा दिलाना है।
कितने दिनों से युद्ध जारी है?
24 फरवरी को शुरू हुई रूस-यूक्रेन जंग के चलते पूरी दुनिया खाद्य संकट से जूझ रही थी। लगभग पांच महीने से चल रही इस जंग ने रूस-यूक्रेन सप्लाई को तितर-बितर कर दिया ।अब इस संकट पर विराम लग गया है। दोनों देशों की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से चरमरा गई गई है। आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने युद्ध को लेकर चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर युद्ध लंबा खिंचा और रूस, यूक्रेन से अनाज की सप्लाई सीमित रही तो करोड़ों लोगों के गरीबी के जाल में फंसने का खतरा है। वही युद्ध होने से रूस कई मल्टी नेशनल कंपनिया देश को छोड़कर भाग गई है।

 नई दिल्ली / शौर्यपथ  /आज के दौर में सोशल मीडिया की निर्भरता बढ़ी है। इसका इस्तेमाल बढ़ा है। हर कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का यूज कर रहा है। वॉट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम जैसे फलेटफॉर्म के बिना आज जीवन तक अधूरा लगता है। वैसे इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की अपनी अपनी गाइडलाइंस या दिशा निर्देश हैं। इनका पालन करते हुए आप अपने बात को पूरी आजादी के साथ रख सकते हैं। लेकिन हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें एक महिला को ट्विटर का उपयोग करने पर 34 साल की सजा दे दी गई। जानिए ये महिला कौन हैं और किस देश की हैं। साथ यह भी समझिए कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि उन्हें ट्विटर यूज करने के लिए सलाखों के पीछे भेज दिया गया।
सऊदी अरब ने दी महिला को 34 सालों की जेल की सजा
ये मामला मीडिल ईस्ट के देश सऊदी अरब का है। वहां की एक 34-वर्षीय महिला, सलमा अल-शहब के साथ ये हादसा हुआ है। सलमा यूके (UK) की यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स की एक पीएचडी की स्टूडेंट हैं, जो कि छुट्टियां मनाने के लिए अपने देश में गई हुई हैं। यहां, इस महिला को एक दो साल नहीं बल्कि 34 सालों के लिए जेल में भेज दिया गया है।
जानिए आखिर जेल में जाने के पीछे क्या है कारण
सलमा पर आरोप है कि वे ट्विटर से जुड़ी हुई हैं। साथ ही वे ट्विटर पर उन अकाउंट्स को फॉलो करती हैं, जो कि आम जनता में अशांति को बढ़ावा देने वाले होते हैं। साथ ही राष्ट्रीय व सिविल सुरक्षा को भी अस्थिर करते हैं। सऊदी अरब की खास टेररिस्ट कोर्ट ने सलमा को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस तरह से यूज करने पर तीन साल की सजा का फरमान सुनाया।इसके बाद एक पब्लिक प्रोसेक्यूटर ने अपील कोर्ट से रिक्वेस्ट की कि सलमा के 'दूसरे क्राइम्स' पर भी ध्यान दिया जाए।
सजा तीन साल से बढ़कर 34 साल हो गई
इसके बाद तो सलमा पर सजा का पहाड़ टूट गया। उसकी सजा तीन साल से बढ़ाकर 34 साल कर दी गई। यही नहीं जेल की सजा पाने के साथ ही इसी अवधि तक यानी 34 साल के लिए उस पर ट्रैवल बैन भी लगा दिया गया है। एक रिपोर्ट का कहना है कि सलमा, जो दो बच्चों की मां भी हैं, कोर्ट में एक नई अपील फाइल करेंगी और इस 'अन्याय' के खिलाफ लड़ेंगी।

 नई दिल्ली /शौर्यपथ  / 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' नारे से हिंदुस्तान के हर नागरिक में देशभक्ति की भावना जगाने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज 77वीं पुण्यतिथि है। बोस भारत के ऐसे स्वतंत्रता सेनानी थे, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम को देश की सीमाओं से बाहर ले गए थे। ये बात हैरान करने वाली है कि आजादी के 75 साल बाद भी इस महान क्रांतिकारी की अस्थितयां अभी तक भारत नहीं आई हैं। नेताजी की पुण्यतिथि पर उनकी बेटी अनीता बोस प्फॉफ ने भारत सरकार से अपील करते हुए कहा है कि अब वक्त आ गया है, जब उनकी अस्थियों को मातृभूमि में लाया जाए।
इसके साथ ही उन्होंने डीएनए टेस्टिंग की बात भी कही है। अनीता ने कहा कि ये टेस्टिंग नेताजी की रहस्यमयी मौत से जुड़े सभी सवालों के जवाब दे देगी। यहां तक कि आज भी सुभाष चंद्र बोस की अस्थियां जापान के रनकोजी मंदिर में रखी गई हैं।  
जापान की जांच रिपोर्ट में क्या पता चला
कई इतिहासकारों का मानना है कि नेताजी की मौत 18 अगस्त, 1945 को ताइवान में प्लेन क्रैश में हुई थी। विमान में बम धमाका हुआ था। नेताजी के निधन के वक्त कई जापानी लोग भी उनके साथ थे। इस मामले में 1956 में जापान में एक विस्तृत रिपोर्ट आई थी। जो 2016 में सार्वजनिक हुई। रिपोर्ट में कहा गया कि नेताजी का अंतिम संस्कार ताइहोकू प्रांत में किया गया है। ये जगह वर्तमान में ताइवान की राजधानी ताइपे में है। उस वक्त उनकी अस्थियां उनके करीबी दोस्त एसए अयैर को सौंपी गई थीं। हालांकि उस वक्त उनका निजी सामान तोक्यो में इंडियन फ्रीडम असोसिएशन के राममूर्ति को दिया गया। फिर इन चीजों को 8 सितंबर, 1945 में तोक्यो में इंपीरियल हेडक्वार्टर को सौंप दिया गया।  
रनकोजी मंदिर में रखी हैं अस्थियां
इसके बाद 14 सितंबर, 1945 में नेताजी की अस्थियां तोक्यो के रनकोजी मंदिर में रखी गईं। तभी से अस्थियां यहीं रखी हुई हैं। अस्थियों को मंदिर के पुजारी केयोई मोचिजुकि ने संभालकर रखा हुआ है। वह हैरान हैं कि अब भी इन्हें भारत क्यों नहीं ले जाया जा सका है। हर साल नेताजी की पुण्यतिथि पर मंदिर में प्रार्थना सभा आयोजित की जाती है। इसके प्रमुख मंदिर में इस सभा का आयोजन करते हैं, जिसमें जापान और भारत के कई प्रमुख लोग शामिल होते हैं। इस कार्यक्रम में भारतीय दूतावास के अधिकारी भी नेताजी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। जिस मंदिर में अस्थियां रखी गई हैं, वह एक बौद्ध मंदिर है और यहां निचिरिन बौद्ध धर्म के लोग आते हैं।
भारत ने क्या किया है?
साल 2016 में जब भारत सरकार ने नेताजी से जुड़ी फाइल सार्वजनिक कीं, तो पता चला कि नेताजी की अस्थियों की देखभाल के लिए भारत सरकार ने पैसा दिया है। 1967 से 2005 तक भारत ने मंदिर को 52,66,278 रुपये दिए। ऐसा भी नहीं है कि भारत की तरफ से अस्थियां लाने के लिए कोई कोशिशें नहीं हुईं। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1950 के दशक में इन्हें वापस लाने के लिए कोशिश की थी। लेकिन ऐसा कहा गया कि नेताजी के परिवार ने उनकी मौत की बात मानने से इनकार कर दिया था। ऐसी स्थिति में नेहारू भारत में अस्थियां नहीं ला सके थे। इसके बाद मामले में जापान की सरकार ने कई बार भारत से संपर्क किया लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
बार-बार किए गए दावे
1979 में जब मोरारजी देसाई देश के प्रधानंमत्री बने थे, तब जापान के सैन्य खुफिया अधिकारी ने उनसे संपर्क किया था। इस अधिकारी के नेताजी की आजाद हिंद फौज (आईएनए) के साथ गहरा रिश्ता था। उन्होंने देसाई से अपील करते हुए नेताजी की अस्थियां वापस ले जाने के लिए कहा था। अधिकारी को यह सुनिश्चित किया गया कि एक या दो साल के भीतर समस्या का समाधान कर दिया जाएगा। लेकिन देसाई ने अपना पद खो दिया था और ऐसे में उनका वादा भी अधूरा रह गया। साल 2000 में आखिरी बार तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने नेताजी की अस्थियों को भारत लाने की इच्छा व्यक्त की थी। लेकिन बहुत कोशिशों के बाद भी नेताजी की अस्थियां आज तक भारत नहीं लाई जा सकी हैं।

नई दिल्ली / शौर्यपथ  /रूस, चीन और अमेरिका के बीच जारी खींचतान के चलते दुनिया पर तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। रूस और यूक्रेन के बीच पिछले छह महीने से युद्ध चल रहा है। चीन और ताइवान के बीच भी युद्ध जैसे हालात बनते नजर आ रहे हैं। वही आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच संघर्ष जारी है। भारत-चीन सीमा पर शांति बनी है लेकिन दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। ऐसे में यूरोप से लेकर एशिया तक सैन्य गतिविधी देखी जा रही है। यही कारण है कि जर्मन वायु सेना भी अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो के समर्थन में अपने लड़ाकू विमान ऑस्ट्रेलिया भेज रही है। जर्मन फाइटर जेट ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण कोरिया की वायु सेना के साथ संयुक्त अभ्यास करने जा रहे हैं। ये पूरी अभ्यास एशिया के धरती पर होगा ऐसे में माना जा रहा है कि सीधे तौर पर चीन के खिलाफ अमेरिका के सहयोगियों की सैन्य ताकत का प्रदर्शन होगा।
जर्मन लड़ाकू ऑस्ट्रेलिया पहुंची
ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्रालय ने कहा कि अपनी रैपिड पैसिफिक तैनाती में जर्मनी छह यूरोफाइटर फाइटर्स, 200 एयरमैन, एक A330 मल्टी-रोल टैंकर ट्रांसपोर्ट और एक A400M ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भेजेगा। ये लड़ाकू विमान ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ युद्धाभ्यास करेंगे। यह पहली बार है जब ऑस्ट्रेलियाई और जर्मन वायु सेनाएं 17 देशों की सेनाओं को शामिल करने वाले पिच ब्लैक अभ्यास में एक साथ नजर आएंगी। इस अभ्यास में भाग लेने वाले जर्मन वायु सेना के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल इंगो गेरहार्ट्ज ने कहा कि भारत-प्रशांत का जर्मनी के लिए बहुत महत्व है। हम इस क्षेत्र में कई भागीदारों के साथ समान मूल्य साझा करते हैं।
अभ्यास में शामिल होंगे इन देशों के लड़ाकू विमान
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, जापान, मलेशिया, न्यूजीलैंड, नीदरलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका के विमान और कर्मियों ने भाग लिया। तीन सप्ताह की पिच ब्लैक एक्सरसाइज। भाग लेंगे इस युद्धाभ्यास में शामिल होने वाले कुल कर्मियों की संख्या 2,500 है, जबकि 100 विमान विभिन्न अभियानों में अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे। रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स के मुताबिक जर्मनी, जापान और दक्षिण कोरिया पहली बार इस अभ्यास में हिस्सा लेने जा रहे हैं।
इस विमान का सबसे अधिक ताकत
यूरोफाइटर टाइफून नई पीढ़ी का मल्टीरोल लड़ाकू विमान है। इसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली विमानों में से एक माना जाता है। यह एक फोरप्लेन/डेल्टा विंग एयरक्राफ्ट है जो अत्याधुनिक एवियोनिक्स और सेंसर, डिफेंसिव एड्स सब सिस्टम (डीएएसएस) और अत्याधुनिक हथियारों से लैस है। इसे 27 मिमी बंदूकें, हवा से हवा, हवा से जमीन, जहाज रोधी और सटीक निर्देशित मिसाइलों के साथ तैनात किया जा सकता है। इस विमान को ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जर्मनी समेत कई देशों ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।

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