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April 05, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

    शौर्यपथ /आपने अपने दोस्तों से कई ऐसी कहानियां सुनी होंंग, जिनमें उनके पेरेंट का बिहेव जिनके प्रति सही नहीं था। बचपन की बुरी घटनाएं भूलने में काफी वक्त लग जाता है। वहीं, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो पूरी उम्र चाइल्डहुड ट्रॉमा नहीं भुला पाते। खासकर जब उनकी कहानियों में हीरो दिखने वाले पिता विलेन जैसे काम करते हैं। वहीं, कुछ माएं भी ऐसी होती हैं, जिन्हें गुस्सा बहुत ज्यादा आता है और वे एक छोटी-सी गलती करने पर अपने बच्चों को खूब मारती-पीटती हैं। ऐसे में अपने बचपन से सीखते हुए हमें तय करना चाहिए कि बच्चों के लिए हम कैसे पेरेंट बनना चाहते हैं? आपका पार्टनर अगर बच्चों के साथ बहुत ही गुस्से से पेश आता है, तो आपको उन्हें समझाना चाहिए। इस सिचुएशन के लिए आप कुछ बातों का ध्यान रख सकते हैं।
पार्टनर से बात करें
सबसे पहला तरीका यह है कि पार्टनर से अकेले में बात करें कि उनका व्यवहार बच्चे के प्रति सही नहीं है। हमेशा बच्चे को मारने, डराने या धमकाने से बच्चे का आत्मविश्वास कम होगा। पार्टनर को बताएं कि उन्हें बच्चे से बात करने का तरीका सुधारना होगा।
बच्चे से बात करें
बच्चे से भी बात करना जरूरी है कि उसका अपने पापा या मम्मी के व्यवहार के बारे में क्या सोचना है। इससे आपको पता चलेगा कि बच्चे पेरेंट के व्यवहार को किस तरह से देखता है और उसके मन पर इसका क्या असर पड़ता है। इससे आपको काफी बातें क्लियर हो जाएंगी।
पार्टनर को सजेशन दें
पार्टनर को बताएंं कि उन्हें कैसे अपने गुस्से पर काबू रखते हुए बच्चे से आराम से बात करनी है। अगर वह चाहते हुए भी अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पा रहे हैं, तो उन्हें मनोचिकित्सक से मिलवाएं। इससे एंगर इश्यू की वजह साफ समझ आएगी।
अच्छी किताबें और फिल्में
पार्टनर को पेरेंटिंग से जुड़ीं अच्छी किताबे और फिल्में देखने के लिए मोटिवेट करें। इससे बच्चों के प्रति व्यवहार को लेकर उनकी भी अवेयरनेस बढ़ेगी। हो सकता है कि उन्हें पता ही न हो कि उनका बिहेव बच्चे के प्रति सही नहीं है। ऐसे में हेल्प बुक्स अच्छी दोस्त बन सकती हैं।

 टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /डिस्लेक्सिया के बारे में हम सभी ने कभी न कभी किसी से, कहीं कुछ पढ़ा या सुना होगा। शायद आपके परिवार में, पड़ोस में या रिश्तेदारी में कोई इस बीमारी से पीड़ित हो, लेकिन यह भी सच है कि आपको इस बीमारी के बारे में ज्यादा पता नहीं होगा।  ऐसा भी हो सकता है कि हममें से ज्यादातर लोगों को डिस्लेक्सिया के बारे में ज्यादा नहीं पता होता है। जानकारी की इसी कमी के कारण जब कोई हमें डिस्लेक्सिया से पीड़ित दिखता है तो हम उसे कम बुद्धि वाला व्यक्ति, बेवकूफ या मानसिक रूप से असंतुलित व्यक्ति मान लेते हैं। हालांकि इसमें से कुछ भी सच नहीं है। डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चों को अगर सही सहयोग और मदद दी जाए तो वे अपने करियर में भी बहुत तरक्की कर सकते हैं।
क्या है डिस्लेक्सिया-
डिस्लेक्सिया सीखने समझने में होने वाली कठिनाई है जो पढ़ने में दिक्कत, लिखने और वर्तनी की समस्याओं का कारण बनती है। यह बुद्धि को प्रभावित नहीं करता है। लेकिन, बच्चे सीधे अक्षर को उल्टा लिखते हैं, जो एक तरह की लर्निंग डिसेबिलिटी है।
डॉ. ज्योति कपूर, (फाउंडर और सीनियर साइकेट्रिस्ट- मन:स्थली वेलनेस) के अनुसार डिस्लेक्सिया बोलचाल और सीखने से सम्बंधित एक बीमारी है, इससे बच्चे किसी चीज का उच्चारण करने में, पढ़ने में, लिखने में और सामने अक्षरों को देखकर सीखने और शब्दों को बोलने में परेशानी महसूस करते हैं। दरअसल इस बीमारी से पीड़ित बच्चे को उन अक्षरों और शब्दों की ध्वनि को किसी पुस्तक, ब्लैकबोर्ड या डिजिटल सतह पर लिखा हुआ देख कर खुद समझने में समस्या होती है।
डिस्लेक्सिया के लक्षण-
-स्पेलिंग को पढ़ने में दिक्कत
-राइमिंग सीखने या उसका खेल खेलने में मुश्किल
-समस्याओं को हल करने, चीजों को याद रखने या समझने में दिक्कत जो वो सुनते है
-शब्दों या अक्षरों में समानता और अंतर करने में कठिनाई
-एक विदेशी भाषा सीखने में कठिनाई
-पढ़ाई में अच्छा परफॉर्म न कर पाना
-सुनाई देने पर भी बातों को समझने में देरी होना
-सवालों के जवाब देते समय सही शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर पाना
-एक जैसे शब्दों या पर्यावाची शब्दों में फर्क नहीं बता पाना
-नए शब्दों को बोलने व सीखने में दिक्कत आना
-पढ़ने वाली गतिविधियों से परहेज करना
डिस्लेक्सिया  के लिए जिम्मेदार कारण-
डिस्लेक्सिया  का कारण पर्सनल इंटेलिजेंस या बुद्धिमत्ता नहीं है। इसका संबंध कुछ ऐसे जीन्स से है जो मस्तिष्क के विकास को नियंत्रित करते हैं। यह एक विरासत में मिली हुई स्थिति है जो ब्रेन की अक्षरों और शब्दों को समझने की क्षमता को प्रभावित करते हैं।
डिस्लेक्सिया का मतलब कम बुद्धि वाला होना नहीं है-
यहां यह जान लेना जरूरी है कि डिस्लेक्सिया का मतलब कम बुद्धि से नही होता है। इसके विपरीत डिस्लेक्सिया और शब्दों के माध्यम से जानकारी को सोचने और प्रोसेस करने में असमर्थ रहने वाले डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चे विज्युवल इमेजरी और स्टोरीटेलिंग फ़ॉर्मेट का उपयोग करके बहुत मजबूत विज्युवल इन्फोर्मेशन प्रोसेसिंग स्किल विकसित कर सकते हैं। अगर सरल शब्दों में कहा जाए तो डिस्लेक्सिया से जो बच्चे पीड़ित होते हैं अगर उनको सही सलाह और मदद दी जाए तो उनकी रचनात्मक सोच एक अलग स्तर तक पहुंच सकती है। इसके लिए बस उन्हें सही से प्रोत्साहन मिलना चाहिए। उन्हें उनके कामों में मदद करनी चाहिए। घर और स्कूल दोनों जगहों पर एक खुशनुमा, और अनुकूल भावनात्मक वातावरण प्रदान किया जाना चाहिए इससे उनके सोचने की क्षमता काफी मदद हो सकती है।
डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चों को माता-पिता और शिक्षक कैसे करें डील-
अगर बच्चा डिस्लेक्सिया से पीड़ित है और इसका पता जल्दी चल जाए तो काफी मदद मिल सकती है। माता-पिता और शिक्षकों को सबसे पहले से इस बीमारी के बारे में अच्छे से रिसर्च करनी चाहिए और इसे अच्छे से समझना चाहिए। उन्हें यह समझना चाहिए कि डिस्लेक्सिया कोई मानसिक बीमारी या साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर नहीं है। यह सीखने से सम्बंधित समस्या है जिसे ठीक किया जा सकता है, सुधार किया जा सकता है और इसे बच्चे के लिए एक एडवांटेज के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि बच्चे के डिस्लेक्सिया से पीड़ित होने पर जितना जल्दी हो सके लक्षणों की पहचान जल्दी कर लेनी चाहिए और इसके निवारण के लिए बेहतर तरीके से रणनीति बनानी चाहिए। डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चों के माता-पिता को ध्यान रखनी चाहिए ये बातें-
चूंकि बच्चे घर के अलावा स्कूल में सबसे ज्यादा समय बिताते हैं इसलिए माता-पिता को बच्चों के शिक्षकों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखना चाहिए और बच्चे की गतिविधि और परेशानी की सारी जानकारी रखनी चाहिए। डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चे के लिए विशेष रूप से योजना बनाने से उनके सीखने के तरीके में सुधार किया जा सकता है। माता-पिता को बच्चों के साथ बात करनी चाहिए, उनके साथ रीडिंग करनी चाहिए और उनसे मौखिक रूप से बात करनी चाहिए ताकि उनके शब्दों के समझने की ताकत मजबूत हो सके और भाषा में तथा शब्दकोश में भी सुधार हो सके। अगर बच्चों के साथ रीडिंग ऊंची आवाज में की जाए और बार-बार इसका अभ्यास किया जाए तो इससे बच्चे को मदद मिल सकती है। हर बच्चे में कुछ न कुछ स्पेशल टैलेंट होता है, अगर इस बात को माता-पिता समझते हैं तो वे बच्चे के उस विशेष गुण की पहचान कर सकते हैं और उसमे सकारात्मक सोच और सम्मान के साथ आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि यह ध्यान रखना चाहिए कि माता-पिता को अपने बच्चे का होमवर्क या सवाल खुद से हल नहीं करना चाहिए। बल्कि उन्हें कुछ हिंट और क्लू देने से वे अपने दिमाग का इस्तेमाल करके सवालों को हल करने में सक्षम हो सकते हैं। डिस्लेक्सिया का सम्पूर्ण समाधान करने के बजाय बच्चे की सोच में लगातार वृद्धि बहुत जरूरी होती है, इससे बच्चे को बीमारी से उबरने में काफी मदद मिलती है।
संक्षेप में कहा जाए तो बच्चे के माता-पिता और शिक्षक डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चे की सीखने की क्षमता में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

KONDAGAON / SHOURYAPATH / जिला कोंडागांव में समर्थन सेंटर फॉर डेवलपमेंट सपोर्ट रायपुर के द्वारा राखी त्योहार में टीका राखी अभियान के अंतर्गत जागरूकता रथ चलाया गया जिसे कांग्रेस जिला अध्यक्ष झुमुकलाल दिवान ने हरी झंडी दिखा कर अभियान की शुरुआत की । साथ ही   अभियान के शुरुआत में ही बहन ने अ जिला अध्यक्ष को राखी बांधा।
आप को बतादे की इस रथ के द्वारा अगले 7 दिनों तक जिले के समस्त गांव में घूमते हुए कोराना टीकाकरण के जागरूकता के लिए प्रचार किया जाएगा।
 
इस अभियान कार्यक्रम में कोंडागांव जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष झुमुक लाल दिवान, नगर पालिका नेताप्रतिपक्ष व नगर अध्यक्ष तरुण गोलछा ,फरसगांव नगर पंचायत नेताप्रतिपक्ष विजय लांगड़े व अन्य पदाधिकारी व समर्थन संस्था से द्वारका प्रसाद, पंकज दास, रामप्रकाश मर्रावी एवं यूनिसेफ़ से कु. सिमरन धनजल जिला समन्वयक कोंडागांव व अन्य मौजूद रहे।

जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के शुभारंभ, 02 सितम्बर 2022 एवं जिला खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई के लिए 04 सितम्बर 2022 की तिथि प्रस्तावित

     DURG / SHOURYAPATH / श्री महादेव कावरे, संभागायुक्त ने  आज नवीन सृजित जिले मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी एवं खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई के गठन के संबंध में विडियो कान्फ्रेन्सिंग के माध्यम से समीक्षा की। समीक्षा बैठक में  श्री डोमन सिंह, कलेक्टर राजनांदगांव, जिला खैरागढ़ के ओ.एस.डी. डॉ. जगदीश सोनकर, ओ.एस.डी. पुलिस सुश्री अंकिता शर्मा, इसी प्रकार जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के  ओ.एस.डी. श्री एस. जयवर्धन एवं ओ.एस.डी. पुलिस श्री येदुवल्ली अक्षय कुमार उपस्थित थे।

    श्री कावरे ने अवगत कराया गया कि नवगठित जिले मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी का उद्घाटन 02 सितंबर 2022 को एवं खैरागढ़-छुईखदान-अंबागढ़ चौकी जिले का  शुभारंभ 04 सितंबर 2022 को मुख्यमंत्री के द्वारा किया जावेगा, जिसके लिए तैयारी की जावे। संभागायुक्त दुर्ग द्वारा कलेक्टर कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय हेतु शासकीय भवन के चयन के संबंध में कलेक्टर राजनांदगांव एवं संबंधित विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारियों से जानकारी ली गई। इसके साथ ही कार्यालयीन स्टॉफ हेतु अधिकारियों द्वारा पदभार ग्रहण करने के संबंध में एवं कार्यालयीन कर्मचारियों की व्यवस्था के संबंध में समीक्षा की गई एवं नवीन जिले के विभन्न विभागो में कार्य करने हेतु इच्छुक कर्मचारियो की सूची शासन की ओर अग्रिम कार्यवाही हेतु भेजी गई है।

अधिकारियों को दायित्व सौपने के दिए निर्देश-     संभागायुक्त श्री कावरे ने कलेक्टर कार्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम हेतु तैयारियों की समीक्षा की गई। उद्घाटन दिवस में स्थल पर लोकार्पण, भूमि पूजन एवं सामग्री वितरण की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए साथ ही अधिकारियों को भी दायित्व सौंपने के निर्देश दिए।

DURG / SHOURYAPATH / देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री राजीव गांधी के जन्म दिवस, 20 अगस्त को इस साल भी राज्य में सद्भावना दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। इसका उद्देश्य सभी धर्मों, भाषाओं और क्षेत्र के लोगों के बीच राष्ट्रीय एकीकरण की भावना जागृत करना और हिंसा के विचार को छोड़ते हुए लोगों के बीच सद्भाव को बढ़ावा देना है। शासन द्वारा दिए गए निर्देशानुसार 19 एवं 20 अगस्त को शासकीय अवकाश होने की वजह से आज 18 अगस्त को शाम 4.30 बजे कलेक्टोरेट कक्ष में अपर कलेक्टर श्री अरविंद एक्का, संयुक्त कलेक्टर श्री प्रवीण वर्मा, एसडीएम श्री मुकेश रावटे, डिप्टी कलेक्टर श्री जागेश्वर कौशल सहित उपस्थित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारियों ने ’सद्भावना दिवस’ की शपथ ली।

DURG / SHOURYAPATH / छत्तीसगढ़ शासन कल कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जिले को हरा-भरा करने के लिए कृष्ण कुंज के माध्यम से एक अनुठी शुरुआत करने जा रहा है। दुर्ग जिले के अंतर्गत कुल 9 नगरीय निकायों में कृष्ण कुंज विकसित किया गया है, जहां पर बरगद, पीपल, नीम, कदम्ब तथा अन्य सांस्कृतिक महत्व के वृक्षों का रोपण किया जाएगा।  इस अवसर पर दुर्ग वनमण्डल ने जिले वासियों से अपील की है कि वो ज्यादा से ज्यादा कृष्ण कुंज  से जुड़े  और वृक्षों की अमूल्य विरासत का संरक्षण करें। इस अवसर पर बड़े पैमाने में वृक्षा रोपण करने के लिए छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग कल प्रातः 11.00 बजे जिले में चिन्हीत किये गये स्थानों पर कृष्ण कुंज योजना का शुभारंभ करेंगे। 

DURG / SHOURYAPATH / एकीकृत बाल विकास परियोजना दुर्ग ग्रामीण के जेवरा, ढाबा व अंजोरा आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका के रिक्त पद के लिए अंतिम वरीयता सूची जारी की गई है जिसमें जेवरा में प्रथम वरीयता श्रीमती माण्डवी साहू, द्वितीय वरीयता श्रीमती चमेली यादव, तृतीय वरीयता श्रीमती कुसुम देशमुख हैं। इसी प्रकार ढाबा में प्रथम वरीयता श्रीमती योगेश्वरी विश्वकर्मा, द्वितीय वरीयता श्रीमती पूजा यादव, तृतीय वरीयता श्रीमती निरूपमा हैं। इसी प्रकार अंजोरा में श्रीमती लीला डहरे, द्वितीय वरीयता श्रीमती हेमलता देशमुख, तृतीय वरीयता श्रीमती त्रिवेणी देशमुख हैं। इसके संबंध में दावा आपत्ति/अभ्ययावेदन (दावा-आपत्ति प्रस्तुत करने की अवधि में किसी भी प्रकार के नवीन दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जावेंगे) कार्यालयीन समय में दिनांक 27 अगस्त तक कार्यालय परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास परियोजना दुर्ग (ग्रामीण) में जमा कर सकते हैं।

DURG / SHOURYAPATH / कलेक्टर श्री पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने शुक्रवार 19 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जिले के क्षेत्रांतर्गत सभी प्रकार के पशुवध एवं मांस विक्रय दुकानों पर पूर्णतः प्रतिबंध रहेगा। कलेक्टर ने आदेश जारी कर सभी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं जिले के सभी मुख्य नगर पालिका अधिकारी एवं जनपद पंचायत के सीईओ को इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

durg / shouryapath / कलेक्टर श्री पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने शुक्रवार 19 अगस्त को श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व होने पर जिले में शुष्क दिवस घोषित किया गया है। उन्होंने जारी आदेश में कहा है कि जिले में स्थित सभी देशी एवं विदेशी मदिरा दुकानें, रेस्टोरेंट बार, होटल-बार, क्लब आदि को बंद रखा जाए। तदनुसार मदिरा की कोई भी दुकान, होटल, रेस्टोरेंट, क्लब आदि में मदिरा बेचने, परोसने वाले अन्य प्रतिष्ठान/व्यक्ति को अनुमति नहीं होगी। इस अवधि के दौरान मदिरा के व्यक्तिगत भण्डारण एवं गैर लायसेंस प्राप्त परिसरों में मदिरा के भण्डारण पर सख्ती से रोक लगाए जाने और उन्हें जब्त कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश कलेक्टर ने दिए हैं। साथ ही उड़नदस्ता के द्वारा अवैध मदिरा परिवहन और विक्रय की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने व दोषियों के विरूद्ध नियमानुसार अपराध कायम करने के लिए जिला आबकारी अधिकारी को निर्देशित किया गया है।

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