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April 07, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

? धमतरी / शौर्यपथ
✍️ संभाग प्रमुख: कुमार नायर

धमतरी जिले के मगरलोड थाना अंतर्गत चौकी करेलीबड़ी क्षेत्र के ग्राम हरदी में नवविवाहिता की संदिग्ध मृत्यु का मामला अब सनसनीखेज हत्या में बदल गया है। पुलिस की गहन विवेचना में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि महिला की हत्या उसके ही पति ने गला घोंटकर की, जबकि सास ने सच्चाई छुपाने का प्रयास किया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 30 मार्च 2026 को ग्राम हरदी में नवविवाहिता की मृत्यु की सूचना मिलते ही करेलीबड़ी पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में मामला संदिग्ध प्रतीत होने पर मर्ग कायम कर गंभीरता से जांच शुरू की गई। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण, परिस्थितिजन्य साक्ष्य एकत्रण और गवाहों के बयान के आधार पर पुलिस ने हर पहलू की सूक्ष्म जांच की।

शव परीक्षण रिपोर्ट ने पूरे मामले का रुख बदल दिया। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि महिला की मृत्यु श्वास अवरुद्ध (गला घोंटने) से हुई है और इसकी प्रकृति हॉमीसाइडल यानी हत्या है। इसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा और तेज कर दिया।

विवेचना के दौरान एफएसएल टीम की तकनीकी जांच और लगातार पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि मृतिका और उसके पति चन्द्रशेखर यादव के बीच संतान को लेकर अक्सर विवाद होता था। घटना वाले दिन भी इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई, जो हिंसक रूप ले बैठी। गुस्से में आकर आरोपी पति ने रस्सी से गला दबाकर अपनी पत्नी की हत्या कर दी।

पुलिस की सख्त पूछताछ और निगरानी के चलते आरोपी चन्द्रशेखर यादव (26 वर्ष) ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त काले रंग की नोई रस्सी भी बरामद कर ली गई। आरोपी को 1 अप्रैल 2026 को विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी की मां रिना बाई यादव (46 वर्ष) ने घटना को छुपाने के लिए मृतिका की मौत को सीने में दर्द से होना बताया और पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। साक्ष्य छुपाने के इस प्रयास के चलते पुलिस ने उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 51/2026 के तहत धारा 103(1) और 238(क) भारतीय न्याय संहिता में मामला दर्ज कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

? आरोपीगण:

  1. चन्द्रशेखर यादव, पिता एवन लाल यादव, उम्र 26 वर्ष
  2. रिना बाई यादव, पति एवन लाल यादव, उम्र 46 वर्ष
    निवासी: ग्राम हरदी, चौकी करेलीबड़ी, थाना मगरलोड, जिला धमतरी (छत्तीसगढ़)

? यह घटना एक बार फिर पारिवारिक विवादों के भयावह परिणाम को उजागर करती है, जहां रिश्तों की नींव ही हिंसा में बदल गई।

नरेश देवांगन की खास रिपोर्ट 

जगदलपुर, शौर्यपथ। राज्य सरकार द्वारा रेत माफियाओं पर लगाम कसने के लिए लगातार सख्त निर्देश जारी किए जा रहे हैं। अवैध उत्खनन, परिवहन और पर्यावरणीय क्षति को रोकने के उद्देश्य से समय-समय पर समीक्षा और निगरानी भी की जा रही है। शासन की मंशा स्पष्ट है कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग नियमों के दायरे में हो और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इसके बावजूद ताज़ा मामला ग्राम पंचायत बेलगांव का है, जहां शासन की मंशा के विपरीत गतिविधियों के सामने आने के आरोप लग रहे हैं। प्राप्त जानकारी और सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में कथित रूप से अवैध रेत उत्खनन जारी है, जहां नियमों की अनदेखी करते हुए रेत निकासी की जा रही है।

बताया जाता है कि माइनिंग विभाग द्वारा पूर्व में कार्रवाई करते हुए एक पोकलेन मशीन को सील किया गया था, लेकिन इसके बाद भी संबंधित मशीन के उपयोग में आने की बात सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जब विभागीय टीम पुनः मौके पर पहुंची और मशीन को जब्त कर थाना ले जाने का प्रयास किया गया, तब कुछ ग्रामीणों द्वारा विरोध किए जाने की सूचना है।

सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी मिल रही है कि कुछ बाहरी प्रभावशाली लोगों द्वारा ग्रामीणों को प्रलोभन देकर अपने पक्ष में करने की कोशिश की जा रही है। कथित तौर पर ग्रामीणों से यह कहा जा रहा है कि गांव में होने वाले बाली पर्व धार्मिक आयोजन का खर्च उठाया जाएगा, जिसके बदले रेत निकालने की अनुमति दी जाए। वहीं, कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों को आगे कर यह प्रस्तुत किया जाता है कि रेत का उपयोग गांव के निजी कार्यों के लिए किया जा रहा है।

बुधवार को हुई कार्रवाई के दौरान स्थिति उस समय और जटिल हो गई, जब माइनिंग विभाग की टीम सील मशीन को अपने कब्जे में लेने पहुंची और विरोध के चलते मौके पर भीड़ एकत्रित हो गई। सूचना पर तहसीलदार, एसडीएम एवं नगरनार थाना की टीम भी मौके पर पहुंची, जहां अधिकारियों द्वारा समझाइश दी गई कि यदि ग्रामीण अपने सीमित उपयोग के लिए रेत निकालते हैं तो वह नियमों के अनुरूप हो, लेकिन किसी भी स्थिति में मशीनों का उपयोग न किया जाए।

हालांकि, सूत्रों के अनुसार, इसके बाद भी कथित रूप से रात के समय मशीनों के जरिए नदी से रेत उत्खनन और बाहरी परिवहन की गतिविधियां जारी रहने की बातें सामने आ रही हैं। यदि यह तथ्य जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन होगा बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई को भी चुनौती माना जाएगा।

 

टेंडर प्रक्रिया पर भी मंडराया संकट, राजस्व नुकसान की आशंका

इसी बीच सूत्र यह भी संकेत दे रहे हैं कि संबंधित क्षेत्र की रेत खदान को लेकर विभाग द्वारा आगामी समय में टेंडर प्रक्रिया प्रस्तावित है। ऐसे में यदि वर्तमान में कथित रूप से अवैध उत्खनन इसी प्रकार जारी रहा और रेत का अत्यधिक दोहन होता रहा, तो भविष्य में खदान का वास्तविक भंडार प्रभावित हो सकता है। इससे न केवल संभावित ठेकेदार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, बल्कि शासन को मिलने वाली रॉयल्टी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि प्रशासन पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराए और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि शासन की मंशा, पर्यावरणीय संतुलन और राजस्व हितों की प्रभावी सुरक्षा हो सके।

राजनांदगांव/शौर्यपथ / कर्तव्य न्याय भागीदारी आंदोलन भारत संगठन द्वारा राजनांदगांव में पांच दिवसीय “संविधान मंथन” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और संवैधानिक मूल्यों के समन्वय का एक अनूठा उदाहरण बनकर उभरा, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान समाज, पत्रकारिता, कला, खेल, शिक्षा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। आयोजन में संविधान कथा वाचक आचार्य सूरज राही ने गीत, संगीत और सरल भाषा के माध्यम से संविधान के मूल सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रभावशाली प्रयास किया। उनकी प्रस्तुति ने संस्कृति और संविधान के संगम को जीवंत रूप दिया।

आयोजन के संबंध में राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवशंकर सिंह एवं प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत देवांगन ने बताया कि “संविधान मंथन” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जन-जागरूकता का सशक्त अभियान बन चुका है। इसमें जटिल संवैधानिक विषयों को सहज और रोचक तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे हर वर्ग का व्यक्ति आसानी से जुड़ सके। कार्यक्रम में भगवान गौतम बुद्ध के करुणा, शांति और मानवता के संदेश तथा डॉ. भीमराव आंबेडकर के समानता, न्याय और अधिकारों पर आधारित विचारों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। इस समावेशी दृष्टिकोण ने समाज को नई सोच और समझ की दिशा प्रदान की। आयोजकों के अनुसार इस पहल का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि नागरिकों में अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। उनका मानना है कि जब तक आम जनता संविधान को नहीं समझेगी, तब तक सशक्त लोकतंत्र की परिकल्पना अधूरी रहेगी। कार्यक्रम में युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और विद्यार्थी सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

प्रभावशाली प्रस्तुतियों और प्रेरणादायक विचारों के माध्यम से यह आयोजन समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवशंकर सिंह, प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत देवांगन, प्रदेश प्रभारी रूपेश जोशी, प्रदेश महासचिव सलमान खान, प्रदेश सचिव मनीष जैन, प्रदेश उपाध्यक्ष तुलसी गौतम, उमेश साहू, बलविंदर सिंह, कोषाध्यक्ष सेवाराम, प्रयाग साहू, संगठन मंत्री राजेश तोमर, संरक्षक एस.के. ओझा, एस.के. नायक, श्याम शर्मा, एम.बी. अनोखे सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

रामावतार जग्गी हत्याकांड में बड़ा मोड़: बिलासपुर हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी ठहराया, 3 सप्ताह में सरेंडर के निर्देश

? दुर्ग/बिलासपुर | शौर्यपथ समाचार

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में आज एक अहम न्यायिक मोड़ सामने आया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अमित जोगी को दोषी करार देते हुए 3 सप्ताह के भीतर सरेंडर करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले ने प्रदेश की राजनीति और न्यायिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।

? क्या है पूरा मामला?

यह मामला 4 जून 2003 का है, जब एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में कुल 31 आरोपियों को शामिल किया गया था।

इनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे।

निचली अदालत के फैसले में अमित जोगी को दोषमुक्त कर दिया गया था, जबकि अन्य 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी।

सीबीआई द्वारा इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी, जिस पर अब यह महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है।

? हाईकोर्ट का फैसला

हाईकोर्ट ने सीबीआई की अपील को स्वीकार करते हुए अमित जोगी को दोषी माना और उन्हें 3 सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का निर्देश दिया है।

यह फैसला लंबे समय से लंबित इस मामले में निर्णायक माना जा रहा है।

? अमित जोगी की प्रतिक्रिया

फैसले के तुरंत बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा—

“माननीय उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया, बिना मुझे सुनवाई का अवसर दिए।

जिस व्यक्ति को पहले दोषमुक्त किया गया था, उसे बिना सुनवाई के दोषी ठहराया जाना अत्यंत अप्रत्याशित है।”

उन्होंने आगे कहा—

उन्हें 3 सप्ताह में सरेंडर करने का समय दिया गया है

वे इस निर्णय को ‘गंभीर अन्याय’ मानते हैं

उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से न्याय मिलने का पूर्ण विश्वास है

वे शांति, आस्था और धैर्य के साथ आगे बढ़ेंगे

अंत में उन्होंने समर्थकों से प्रार्थना और आशीर्वाद की अपील करते हुए “सत्य की जीत अवश्य होगी” का विश्वास जताया।

? राजनीतिक और कानूनी महत्व

यह फैसला न केवल एक पुराने आपराधिक मामले में बड़ा मोड़ है, बल्कि इसका राजनीतिक असर भी व्यापक हो सकता है।

जहां एक ओर यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया की दिशा को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर अब सभी की नजरें इस बात पर टिक गई हैं कि क्या मामला सुप्रीम कोर्ट में नई दिशा लेगा।

? सार 

करीब दो दशक पुराने इस हत्याकांड में आया यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया के एक अहम पड़ाव को दर्शाता है। अब आगे की कानूनी लड़ाई और संभावित अपील पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी रहेंगी।

दुर्ग / शौर्यपथ

दुर्ग शहर, जो कभी निष्पक्ष पत्रकारिता और मजबूत संवाद परंपरा के लिए जाना जाता था, इन दिनों एक अजीब विडंबना का गवाह बन रहा है। यहां अब सिर्फ राजनेता ही राजनीति नहीं कर रहे—बल्कि पत्रकारों के बीच भी सियासत अपने चरम पर है। और इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि इस ‘कलम की लड़ाई’ में अब राजनीतिक दलों के मीडिया प्रभारी भी खुलकर भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं।

? प्रेस क्लब की दीवारों के भीतर ‘दो खेमों’ की कहानी

वरिष्ठ पत्रकारों के पुराने प्रेस क्लब में लंबे समय से चल रहे आंतरिक मतभेद ने आखिरकार एक नए प्रेस क्लब के जन्म को जन्म दिया। सामान्यतः इसे लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में देखा जा सकता था, लेकिन यहां कहानी कुछ और ही है।

नए प्रेस क्लब के अस्तित्व में आते ही पुराने क्लब के कुछ सदस्यों की सक्रियता संगठन मजबूती की दिशा में नहीं, बल्कि नए मंच को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति में बदलती दिखी।

परिणाम—पत्रकारों के बीच संवाद की जगह अब अविश्वास और आरोपों की दीवार खड़ी हो गई है।

? भाजपा कार्यालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस: ‘मीडिया मैनेजमेंट’ या ‘मीडिया विभाजन’?

हाल ही में भाजपा कार्यालय में मंत्री गजेंद्र यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने इस अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक कर दिया।

बताया जाता है कि भाजपा की मीडिया टीम ने बिना स्पष्ट सूचना के पत्रकारों को दो हिस्सों में बांटकर अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर दी।

यह कोई तकनीकी चूक नहीं लगती—क्योंकि प्रेस विज्ञप्तियां तो सभी पत्रकारों तक नियमित रूप से पहुंचती हैं।

सवाल यह है कि जब सूचना भेजी जा सकती है, तो समान मंच क्यों नहीं दिया गया?

इस घटना के बाद जो बहस और विवाद सामने आए, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि यह सिर्फ ‘समन्वय की कमी’ नहीं, बल्कि सुनियोजित विभाजन भी हो सकता है।

? कांग्रेस भी पीछे नहीं: ‘भेदभाव की नीति’ सर्वदलीय?

यदि यह माना जाए कि यह समस्या केवल भाजपा तक सीमित है, तो यह अधूरी सच्चाई होगी।

कांग्रेस के मीडिया प्रबंधन पर भी ऐसे ही आरोप लगते रहे हैं—जहां प्रेस कॉन्फ्रेंस में चयनात्मक आमंत्रण और ‘पसंदीदा पत्रकारों’ को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति खुलकर सामने आती है।

इससे यह संकेत मिलता है कि पत्रकारों के बीच की दरार को राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से साधने में लगे हैं।

? ‘पत्रकार’ की परिभाषा भी विवाद में

स्थिति का एक और चिंताजनक पहलू यह है कि प्रेस क्लब की सदस्यता और ‘पत्रकार’ की पहचान भी सवालों के घेरे में है।

ऐसे कई नाम सामने आते हैं जो नियमित प्रकाशन भी नहीं कर पाते, लेकिन किसी अन्य पत्र की एजेंसी लेकर ‘पत्रकार’ कहलाने की होड़ में शामिल हैं।

इस प्रवृत्ति का असर सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं—यह वरिष्ठ और गंभीर पत्रकारों की साख पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

? ‘3-4 एकड़ जमीन’ का शिगूफा: हकीकत या हास्य?

इसी बीच एक कथित दावे ने पूरे शहर में चर्चा का विषय बना दिया—कि शासन द्वारा प्रेस क्लब के लिए 3-4 एकड़ जमीन मुफ्त में दी गई है, जहां पत्रकारों की कॉलोनी बनाई जाएगी।

हालांकि, यह दावा अब तक किसी ठोस आधार पर खरा नहीं उतरा और शहर में इसे अधिकतर लोग मजाक या ‘राजनीतिक गुब्बारा’ ही मान रहे हैं।

ऐसे बयानों ने गंभीर मुद्दों को भी हल्का बना दिया है।

? बड़े आयोजन, छोटी सोच: सरोज पांडे कार्यक्रम भी विवादों में

देश-प्रदेश की वरिष्ठ नेता सरोज पांडे के हालिया कार्यक्रम में भी यही तस्वीर दोहराई गई।

इतने बड़े आयोजन में प्रेस कॉन्फ्रेंस का दो हिस्सों में बंट जाना न केवल मीडिया प्रबंधन की विफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि क्या जानबूझकर ऐसा किया गया?

परिणाम—कार्यक्रम को वह व्यापक प्रचार नहीं मिल सका, जिसका वह हकदार था।

?  ‘कलम’ अगर बंट गई, तो सवाल कौन पूछेगा?

दुर्ग में पत्रकारों के बीच बढ़ती यह खाई केवल व्यक्तिगत या संगठनात्मक विवाद नहीं है—यह लोकतांत्रिक संवाद के लिए खतरे की घंटी है।

जब पत्रकार ही आपसी खेमेबाजी में उलझ जाएंगे,

जब राजनीतिक दल उन्हें अपने हिसाब से ‘मैनेज’ करने लगेंगे,

और जब मंच संवाद का नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन का बन जाएगा—

तब सबसे बड़ा नुकसान होगा सच्चाई और जनता के अधिकार का।

दुर्ग को यह तय करना होगा—

पत्रकारिता ‘प्रतिस्पर्धा’ रहेगी या ‘प्रतिशोध’?

 

  रायपुर / राजधानी रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत स्वामी विवेकानंद एथलेटिक्स स्टेडियम, कोटा में खेले गए पुरुष फुटबॉल के सेमीफाइनल मुकाबलों में छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल ने शानदार जीत दर्ज करते हुए फाइनल में प्रवेश किया।

खेले गए एक रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले में छत्तीसगढ़ ने अरुणाचल प्रदेश को 3-2 से हराया। मैच की शुरुआत से ही छत्तीसगढ़ टीम ने आक्रामक खेल दिखाया और पहले हाफ की समाप्ति तक 2-0 की बढ़त बना ली। दूसरे हाफ में अरुणाचल प्रदेश ने वापसी की कोशिश की, लेकिन छत्तीसगढ़ ने बढ़त कायम रखते हुए मैच 3-2 से अपने नाम किया।
इसी प्रकार पहले खेले गए सेमीफाइनल मैच में पश्चिम बंगाल ने गोवा को 5-2 से हराकर फाइनल में अपनी जगह सुनिश्चित की।

इस अवसर पर केन्द्रीय युवा कार्य एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे ने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर भारतीय खेल प्राधिकरण के उप महानिदेशक श्री मयंक श्रीवास्तव एवं खेल विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार, खेल विभाग के अधिकारी, आयोजन समिति के सदस्य, बड़ी संख्या में खिलाड़ी तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

 

श्रीमती खडसे ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 के दौरान जगदलपुर का दौरा किया और 2500 से अधिक आदिवासी एथलीटों को 'भविष्य का ओलंपियन' बताया

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में अस्मिता लीग के पूर्व छात्रों ने हॉकी, वेटलिफ्टिंग, फुटबॉल और तैराकी में पदकों पर अपना दबदबा बनाया

रायपुर / युवा मामले और खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खडसे ने 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026' के दौरान बुधवार को रायपुर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने यहां के माहौल को ऊर्जा, आशा और बदलाव से भरपूर बताया। उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) टीम के प्रयासों की सराहना की और कहा कि एथलीटों, स्थानीय समुदाय और इस क्षेत्र के लोगों की ओर से मिली प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक रही है।

देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 2,500 से ज्यादा एथलीट अलग-अलग खेलों में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में हिस्सा ले रहे हैं। श्रीमती खडसे ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026, केंद्र सरकार की उस प्रतिबद्धता को दिखाता है जिसके तहत आदिवासी युवाओं को अपना भविष्य बनाने के लिए एक मंच दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लोगों के लिए यह खेल एक नई उम्मीद हैं और यह संकेत कि उनकी काबिलियत को पहचाना जा रहा है और उस पर सबसे ऊंचे स्तर पर निवेश किया जा रहा है।

युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री ने कहा, '' एक समय था जब छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद के लिए जाना जाता था, और यहां के लोगों को एक पिछड़ा समुदाय माना जाता था। आज, मुझे लगता है कि इस क्षेत्र के लिए एक नई दिशा खुल रही है। नक्सलवाद का खात्मा हो चुका है और खेल के माध्यम से, इस धरती के युवा अब अपनी ऊर्जा और क्षमता को सामने ला सकते हैं और देश के लिए खेल सकते हैं।''

खेल राज्य मंत्री ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 को एक ऐतिहासिक पहल बनाने का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन, गृह मंत्री श्री अमित शाह (जिन्होंने पूरे देश से नक्सलवाद के खात्मे की घोषणा की है), कैबिनेट मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया और पूरी साई टीम को दिया। उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि इन खेलों में हिस्सा लेने वाले कई एथलीट आगे चलकर ओलंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे और पदक जीतेंगे।

युवा मामले और खेल राज्य मंत्री, श्रीमती रक्षा खडसे ने 'अस्मिता लीग' के परिवर्तनकारी प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। इस लीग को 2021 में प्रधानमंत्री मोदी के उस विज़न के तहत शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत की महिलाओं को प्रतिस्पर्धी खेलों में लाना और उन्हें एक पहचान व अवसर प्रदान करना है।

युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री, श्रीमती रक्षा खडसे ने कहा, '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में, नतीजे ज़बरदस्त रहे हैं। हॉकी, वेटलिफ्टिंग और फुटबॉल में हिस्सा लेने वाली लगभग 60 से 70 प्रतिशत लड़कियां ‘अस्मिता लीग’ खेल चुकी हैं और पदक जीत चुकी हैं। इनमें अंजली मुंडा जैसी बेहतरीन खिलाड़ी भी शामिल हैं। तैराकी में जीते गए सभी पांचों स्वर्ण पदक भी ‘अस्मिता लीग’ की खिलाड़ियों ने ही हासिल किए हैं। उन्होंने कहा, '' हमारा प्रयास जारी है कि हम ‘अस्मिता लीग’ को और भी निचले स्तर तक यानी के गांवों तक ले जाएं ताकि खेलों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ती रहे।''

मुख्यमंत्री से केंद्रीय राज्य मंत्री सुश्री रक्षा खडसे की सौजन्य मुलाकात, खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच देने पर जोर

बस्तर और सरगुजा ओलंपिक तथा बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों को मिल रही है देश भर में सराहना


रायपुर // मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज उनके निवास कार्यालय में केंद्रीय खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री सुश्री रक्षा निखिल खडसे ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा, भारतीय खेल प्राधिकरण के उप महानिदेशक श्री मयंक श्रीवास्तव एवं खेल विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने सुश्री खडसे का शॉल, बस्तर आर्ट से निर्मित आकर्षक प्रतिकृति तथा बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक भेंट कर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उन्हें उचित अवसर, संसाधन और सशक्त मंच उपलब्ध कराने की है। राज्य सरकार खेल एवं सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि हाल ही में आयोजित बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक ने प्रदेश को नई पहचान दिलाई है। इन आयोजनों के जरिए अनेक छिपी हुई प्रतिभाएं सामने आई हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। सरकार द्वारा उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनके कौशल को और निखारने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी करना प्रदेश के लिए गर्व की बात है और हमारे आदिवासी अंचल के युवाओं में यह नई ऊर्जा का संचार करेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर आज जब मुख्यधारा से जुड़ रहा है और वहां शांति स्थापित हुई है तो निश्चित ही आने वाले समय में खेलों में युवाओं की भागीदारी और बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने ‘बस्तर पंडुम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आयोजन में पारंपरिक खेल, गायन, वादन, वेशभूषा एवं व्यंजन सहित 12 विधाओं में लगभग 54 हजार प्रतिभागियों की भागीदारी प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और खेल विरासत का सशक्त उदाहरण है।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय राज्य मंत्री सुश्री खडसे ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ प्रवास पर हैं। जगदलपुर में आयोजित इस आयोजन को उन्होंने आदिवासी सशक्तिकरण, जमीनी स्तर पर प्रतिभा खोज और खेलों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।

 

  रायपुर / संचालनालय कोष एवं लेखा ने राज्य में वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कई नई डिजिटल सेवाओं की शुरुआत की है। इन पहलों का लक्ष्य आम नागरिकों, शासकीय विभागों एवं अन्य हितधारकों को सरल, सुलभ और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

इसी क्रम में, ई-चालान के तहत OTC प्रणाली को 01 अप्रैल 2026 से लागू किया गया है। अब सभी प्रकार की शासकीय प्राप्तियों का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकेगा। नागरिक और संस्थाएं आसानी से चालान तैयार कर राजस्व जमा कर सकेंगे, जिससे भुगतान प्रक्रिया अधिक सहज, समयबद्ध और पारदर्शी होगी।

इसके साथ ही कोषालयों में ऑनलाइन बीटीआर सुविधा भी शुरू कर दी गई है, जिससे लेखांकन कार्यों में गति और सटीकता आएगी। राज्य में एक केंद्रीय कोषालय का भी शुभारंभ किया गया है। इस व्यवस्था के तहत भारत सरकार से प्राप्त राशि के भुगतान SNA SPARSH प्रणाली के माध्यम से अब अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और केंद्रीकृत तरीके से किए जाएंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया में दक्षता सुनिश्चित होगी।

संचालनालय कोष एवं लेखा की नई वेबसाइट (dta.cg.gov.in) भी लॉन्च की गई है, जहां उपयोगकर्ताओं को विभाग से संबंधित नवीनतम जानकारी, विभिन्न ऑनलाइन सेवाएं और जरूरी सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध होंगी। यह पहल राज्य में वित्तीय प्रशासन को आधुनिक स्वरूप देने और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

  रायपुर, /विश्वविद्यालय द्वारा सत्र 2026–27 हेतु द्विवर्षीय बी.एड. एवं डी.एल.एड. (दूरवर्ती) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए प्री. बी.एड. एवं प्री. डी.एल.एड. प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस हेतु इच्छुक अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 25 मार्च 2026 से प्रारंभ हो चुकी है और 12 जून 2026 (रात्रि 12 बजे तक) जारी रहेगी।

प्री बी.एड. एवं प्री. डी.एल.एड. प्रवेश के अभ्यर्थी 13 जून से 15 जून 2026 के बीच 100 रुपए शुल्क के साथ आवेदन में आवश्यक संशोधन कर सकेंगे। प्रवेश पत्र 23 जून 2026 से डाउनलोड किए जा सकेंगे तथा प्रवेश परीक्षा 28 जून 2026 (संभावित) को आयोजित की जाएगी।

परीक्षा के पश्चात 29 जून 2026 को मॉडल उत्तर जारी किए जाएंगे, जिन पर अभ्यर्थी 29 जून से 03 जुलाई 2026 तक आपत्ति दर्ज कर सकेंगे। परीक्षा परिणाम (अनंतिम सूची) 10 जुलाई 2026 (संभावित) को घोषित किया जाएगा, जिस पर 10 से 12 जुलाई 2026 तक आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। सभी प्राप्त आपत्तियों के निराकरण के बाद अंतिम प्रावीण्यता सूची 21 जुलाई 2026 (संभावित) को प्रकाशित की जाएगी।

अभ्यर्थियों को निर्देशित किया जाता है कि वे आवेदन करने से पूर्व संबंधित नियमों एवं दिशा-निर्देशों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करें तथा ऑनलाइन आवेदन पत्र में सभी जानकारी सही एवं स्पष्ट रूप से भरें। यह आवेदन पत्र काउंसलिंग पंजीयन हेतु भी मान्य होगा, अतः अलग से काउंसलिंग फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होगी। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया (ऑनलाइन/ऑफलाइन) की जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।
दावा-आपत्ति केवल निर्धारित तिथि एवं समय के भीतर ईमेल This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it. के माध्यम से ही स्वीकार की जाएगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे नवीनतम जानकारी एवं संभावित तिथियों में किसी भी परिवर्तन के लिए नियमित रूप से विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट www.pssou.ac.in एवं www.pssou.net/portal का अवलोकन करते रहें।

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