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June 02, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

राष्ट्र हित के लिये केंद्र शासन पर जनता का दवाब जरुरी


रायपुर / शौर्यपथ / कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेश बिस्सा ने कहा की प्रधानमंत्री जी द्वारा चीन - भारत मुद्दे को लेकर 19 जून की शाम को सर्वदलीय बैठक आयोजित किये जाने का निर्णय कांग्रेस व जागृत जनता का उनके ऊपर बनाये गये दवाब का नतीजा है। राष्ट्र हित के लिये केंद्र शासन पर जनता का दवाब जरुरी होता है जिसे निरंतर कायम रखना होगा। तभी देश की व्यवस्था पुनः पटरी पर लौट सकेगी। बिस्सा ने भारत-चीन लद्दाख बॉर्डर पर शहादत को प्राप्त हुए 20 भारतीय जवानों जिसमें बस्तर का नव युवा गणेश कुंजाम भी था को श्रद्धांजली अर्पित करते हुए कहा की इन सपूतों ने तो राष्ट्र के खातिर अपनी जान न्योछावर कर दी अब हम सब भारतवासियों का लक्ष्य होना चाहिए कि इनकी शहादत व्यर्थ ना जाए। यही उन सेनानियों प्रति सच्ची श्रद्धांजली भी होगी। जवानो की शहादत पर देश ने जो एक जुटता प्रदर्शित की है वह प्रशंसनीय है, इसकी निरंतरता कायम रहनी चाहिये।

बिस्सा ने कहा की आने वाले समय में “राष्ट्र खतरे में है, राष्ट्र को एकता की जरूरत है, राष्ट्र के प्रधानमंत्री के साथ सबको खड़े होकर चलना चाहिए, राष्ट्र प्रथम” जैसी बातें हमारा मुंह बंद कराने का प्रयास करेंगी लेकिन इससे राष्ट्रीय स्वाभिमान और संप्रभुता की रक्षा नहीं की जा सकेगी यह देशवासियों को समझना होगा। बिस्सा ने कहा की देश में जनमानस के विचारों की दिशा को तय करने वाली दो शक्तियों हावी है। पहला सोशल मीडिया जो पूरी तरह विदेशी लोगों के हाथों में है। दूसरा लोकतंत्र का चौथा स्तंभ विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जिसका बहुत बड़ा भाग पूंजीपतियों के हाथों में है। यह दोनों कभी नहीं चाहेंगे कि कोई ऐसा व्यक्ति शासन करे जिसके ऊपर वे हावी ना हो सके। देशवासियों को इस बात पर गहराई से चिंतन कर अपनी जवाबदारियों का दायरा सुनुश्चित करना होगा।

बिस्सा ने कहा की जब किसी के ऊपर सत्ता में बने रहने की प्रबल इच्छा हावी हो जाती है तब राष्ट्र और जनता के प्रति उसकी प्राथमिकताएं नगण्य हो जाती है। जिस तरह पूरे देश में सत्ता में बने रहने तथा अपनी ताकत बनाए रखने के लिए खरीद-फरोख्त करती भाजपा की राजनीति को हम सब देख रहे हैं, इस बात का साक्षात प्रमाण भी है। इसकी गंभीरता को महसूस करना हम सब लोगों की प्राथमिकता होना चाहिए। बिस्सा ने कहा की हमारे प्रधानमंत्री बोलने में तो बहुत जोशीले हैं लेकिन रणनीति, कूटनीति, राष्ट्र नीति, विदेश नीति, अर्थ नीति सहित सभी नीतियों में बुरी तरह असफल साबित हुए हैं। जब राजा अक्षम निकल जाए तो जनता को अपनी सक्षमता प्रदर्शित करना चाहिए वरना राष्ट्रीय संप्रभुता खतरे में पड़ सकती है। अब वक्त आ गया है कि जनता आगे बढ़कर प्रश्न करे तथा शासक को मजबूर करे की वो उत्तर दे ना कि प्रश्न के प्रति उत्तर में प्रश्न करे या कीचड़ उछाले।

भिलाई / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग दुर्ग संभाग के पूर्व चेयरमैन मो शरीफ खान द्वारा आज न्यूज़ 18 इंडिया के एंकर व मैनेजिंग एडिटर अमीश देवगन को सुल्तान उल हिन्द हुज़ूर ख्वाजा ग़रीब नवाज़ रहमतुल्लाह अलैह को आक्रान्ता चिश्ती (हमला करने वाला चिश्ती) और लुटेरा चिश्ती विडियो में बोलकर उनकी सख्त तौहीन करते हुए देखा व सुना है जोकि न्यूज़ 18 इंडिया के वेरिफाईड ट्विटर अकाउंट पर अपलोड है जिसका लिंक नीचे दिया गया है | जिस पर अल्पसंख्यक नेता मो शरीफ खान ने कड़ी निंदा करते हुवे कहा कि, ख्वाजा गरीब नवाज चिश्ती विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हैं, उनकी दरगाह देशवासियों की आस्था का केंद्र है जहां पर हर धर्म व जाति के लोग आस्था के साथ हाज़री देते हैं | एंकर ने उनकी शान में तौहीन व गुस्ताखी करके करोड़ों मुसलमानों की आस्था व भावना को ठेस पहुंचाई है | जिससे भारत समेत दुनियाभर के मुसलमानों में रोष है और उनके करोड़ो मानने वालों के दिल आहत हुए हैं | न्यूज़ 18 इंडिया के एंकर व मैनेजिंग एडिटर अमीष देवगन व न्यूज़ 18 इण्डिया के (सी. ई. ओ.) राहुल जोशी के ख़िलाफ़ आज दुर्ग कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज की गई। जहाँ थाना प्रभारी द्वारा विवेचना कर जल्द ही कार्यवाही करने का आश्वासन दिया गया.
लिंक: https://twitter.com/News18India/status/1272538933310525441?s=20

अवधेश टंडन की रिपोर्ट -
हसौद / शौर्यपथ / जाँजगीर चापा जिला के हसौद थाना में हसौद निवासी प्रार्थी अर्जुन बर्मन ,पिता दुजराम बर्मन द्वारा 3 अप्रैल को लिखित में शिकायत स्नढ्ढक्र दर्ज कराई गई थी। की भोला कश्यप द्वारा अपने फेसबुक अकाउंट में सतनामी समाज के प्रति अभद्र टिप्पणी किया था जिससे सतनामी समाज के लोगो को आहत पहुचा था जिससे हसौद थाना भारतीय दंड सहिता 153 ए के तहत अपराध पंजीबध्द कर लिया गया था और विवेचना किया जा रहा था, जिस पर पुलिस अधीक्षक पारुल माथुर ने गंभीरता से मामला को विवेचना मे लेने को निर्देश दिया गया जिससे इनके निर्देशानुसार तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मधुलिका सिंह , तथा अनुविभागीय अधिकारी डभरा/चंद्रपुर भवानी भांकर खुंटीया के मार्गदर्शन पर प्रकारण को विवेचना किया गया और विवेचना के दौरान मामले में धारा 506 भी जोड़ी गई व आरोपी भोला कश्यप पिता जीतराम कश्यप उम्र 28 वर्ष साकिन मल्दा थाना हसौद के विरूद्द धारा सादर का अपराध घटीत करना पर्याप्त सबूत पाये जाने से दिनांक 16 जून 2020 को आरोपी भोला कश्यप पिता जीतराम कश्यप ग्राम मल्दा थाना हसौद को विधिवत गिरप्तार कर न्यायिक रिमांड में भेज दिया गया है। उक्त कार्यवाई मे निरिक्षक देवेश सिंह राठौर , सउनि चंदन सिंह आरक्षक शिवगोपाल रात्रे का विशेष योगदान रहा है।

 दुर्ग / शौर्यपथ / एल.ए.सी में शहीद हुए देश के जवान वीरों को मोदी आर्मी संगठन ने आज अग्रसेन चौक में श्रद्धांजलि दी,इस दौरान चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग का फोटो और उनके देश के झंडे को फाङते हुए अपना आक्रोश प्रकट किया,ज्ञात हो की चीन लगातार भारतीय सीमा पर अपनी ओछी हरकतों से भारतीय सीमा पर कब्जा करने की फिराक में है,जिसका मुँह तोङ जवाब देने के लिए हमारे देश के जवान तत्पर हैं ऐसे में अपनी नाकामी देख चीनी सेना भारतीय जवानों के साथ झङप पर उतारु हो गई,इसी झङप के तहत हमारे देश के बीस जवान बीती रात शहीद हो गये,प्रदेश अध्यक्ष वरुण जोशी ने कहा संपूर्ण विश्व में कोरोना जैसी महामारी का जातक चीन दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए अंतराष्ट्रीय सीमा विवाद को जन्म दे रहा ताकि कोरोना को लोग भुलें,चीन की हकीकत विश्व के सभी देश जान गये हैं,और वह यह भुल रहा है की हमारी सेना मुँहतोङ जवाब देने में सक्षम है,अब हिंदी चीनी भाई भाई का नारा नहीं बल्कि ईंट का जवाब पत्थर से दिया जायेगा,आज चीन हमारे देश से कमाकर हमारे दुश्मन देशों को सहयोग कर रहा है,हमारे पङोसी देशों की मित्रता तोङ रहा है इससे चीन की यह चाल समझ आती है कि वह इसबार नापाक इरादों के साथ भारत से दुश्मनी बढा रहा है,हम भारत सरकार से निवेदन करते हैं चीन से व्यापारीकरण के सारे संबंध खत्म करे,देश को आत्मनिर्भर बनने का मौका दें,यदी हम आज भी चीन से दोस्ती की उम्मीद करते हैं तो भविष्य में हमें और भी नुकसान उठाना पङ सकता है,इस दौरान मोदी आर्मी के टिंकल ताम्रकर,यश कसार,उमेश शासवत,प्रेिंस कसेर,तजेंदर सिंह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए उपस्थित थे!

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / कोरोना महामारी की वजह से हुए लॉकडाउन के बाद लाखों लोग अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। किसी को रोजगार खोने का डर तो किसी को सेहत बिगड़ने की चिंता। इस माहौल में लोगों के मन में निराशा घर करने लगी है और वो अपने जीवन के लक्ष्य और सपनों को पूरा करने में खुद को असफल महसूस कर रहे हैं। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है तो निराशा के इस दौर में सफल होने के लिए याद रखें बस ये 5 मंत्र।

कड़ी मेहनत-
सफलता हासिल करने का पहला मंत्र है कड़ी मेहनत। याद रखें मेहनत का कभी कोई शॉर्टकर्ट नहीं होता है। अगर आप पहले ही हर कठिनाई से निपटने के लिए खुद को तैयार रखेंगे तो आपको भविष्य में सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है।

खुश रहें-
जीवन में वही व्यक्ति अपने सपनों को हासिल करता है जो खुद को नकारात्मक विचारों से दूर रखता है। हमेशा पॉजीटिव थिकिंग रखें। आपका खुश रहने का स्वभाव आपको जीवन में सही फैसला लेना में मदद करेगा।

फोकस बनाए रखें-
जीवन में वही व्यक्ति सफलता का स्वाद चखता है जो अपने लक्ष्य के प्रति मन को एकाग्र रखकर उसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करता है। असल जीवन में भी अपनी प्राथमिकताओं को फोकस रखकर उन पर काम करें।

संघर्ष करें-
जीवन में हमेशा बड़े सपने देखें और उन्हें हासिल करने के लिए एक गोल बनाएं। जब भी आपको लगे कि आप असफल हो रहे हैं तो अपने सपनों को याद करें। खुद को यह अहसास करवाएं कि आपके लिए आपके सपने पूरे करना कितना जरूरी है।

अपनी कमी को न करें नजरअंदाज-
जीवन में कभी भी कोई व्यक्ति परफेक्ट नहीं होता है। हर किसी में कोई न कोई कमी जरूर होती है। लेकिन जो व्यक्ति अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें ही अपनी ताकत बना लेते हैं उन्हें जीवन में सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।

 

धर्म संसार / शौर्यपथ / निर्जला एकादशी के बाद और देवशयनी एकादशी से पहले आषाढ़ माह में कृष्ण पक्ष के दौरान योगिनी एकादशी आती है। इस एकादशी पर भगवान श्री हरि की श्रद्धापूर्वक आराधना करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। इस एकादशी के व्रत का उतना ही महत्व है जितना 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने का होता है। इस व्रत के प्रभाव से किसी के दिए हुए श्राप का निवारण हो जाता है। यह एकादशी रोगों को दूर कर सुंदर रूप, गुण और यश प्रदान करती है।

यह एकादशी प्रायश्चित के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन श्री हरि का ध्यान करें। प्रातः काल स्नान कर सूर्य देवता को जल अर्पित करें। भगवान विष्णु को पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें। इस व्रत में जौ, गेहूं और मूंग की दाल से बना भोजन ग्रहण न करें। नमक युक्त भोजन न करें। दशमी तिथि की रात्रि में नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। यह व्रत दशमी तिथि की रात्रि से शुरू होकर द्वादशी तिथि में प्रात: काल में दान कर्म के बाद संपन्न होता है। इस व्रत में रात्रि में जागरण अवश्य करना चाहिए। योगिनी एकादशी का व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत में पीपल के वृक्ष की पूजा अवश्य करें।

 

खेल /शौर्यपथ / ''मेरे क्रिकेट करियर में सौरव गांगुली की भूमिका सबसे बड़ी थी। एक समय में मैं ऐसे मोड़ पर था, जब मुझे समझ नहीं आता था कि कौन मेरे साथ है, क्योंकि लोग मेरे सामने कुछ कहते थे और पीछे कुछ।''

हरभजन सिंह अपने करियर में कई कप्तानों के साथ खेले हैं। दिग्गज ऑफ स्पिनर हरभजन ने मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में डेब्यू किया। वह सौरव गांगुली के नेतृत्व में टीम के नियमित सदस्य बने। हरभजन 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 के विश्व कप में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में सदस्य रहे। 2007 के वनडे विश्व कप में राहुल द्रविड़ की कप्तानी में टीम इंडिया पहले ही चरण में बाहर हो गई थी। कई कप्तानों के साथ खेलने वाले हरभजन सिंह का कहना है कु उनके करियर में सबसे ज्यादा प्रभाव सौरव गांगुली का रहा है। उन्होंने ही मुझे गेंदबाजी की छूट दी और निडर स्पिनर बनाया।

हरभजन सिंह इंडियन प्रीमियर लीग में अनिल कुंबले, विराट कोहली और रोहित शर्मा की कप्तानी में भी खेले। हरभजन पर किस कप्तान का सबसे अधिक प्रभाव पड़ा? जब उनसे यह पूछा गया तो 39 साल के भज्जी ने सौरव गांगुली का नाम लिया।

भज्जी ने आकाश चोपड़ा के साथ एक यूट्यूब चैनल पर कहा, ''मेरे क्रिकेट करियर में सौरव गांगुली की भूमिका सबसे बड़ी थी। एक समय में मैं ऐसे मोड़ पर था, जब मुझे समझ नहीं आता था कि कौन मेरे साथ है, क्योंकि लोग मेरे सामने कुछ कहते थे और पीछे कुछ।''

उन्होंने आगे कहा, ''लेकिन सौरव गांगुली ने उस वक्त मेरा समर्थन किया, जब मेरे पास किसी का समर्थन नहीं था।'' हरभजन ने आकाश चोपड़ा के आकाशवाणी प्रोग्राम में बातचीत के दौरान कहा, ''चयनकर्ता मेरे खिलाफ थे। उन्होंने बहुत-सी बातें मेरे सामने कीं, जिन्हें मैं नहीं बता सकता। मेरे लिए गांगुली की तारीफ के लिए शब्द नहीं हैं। यदि वह कप्तान न होते तो मैं कह नहीं सकता कि दूसरा कप्तान मुझे सपोर्ट करता या नहीं।''

हरभजन ने कहा, ''अगर सौरव गांगुली नहीं होते तो मैं कभी 100 टेस्ट नहीं खेल पाता।'' हरभजन ने कहा, ''गांगुली हमेशा गेंदबाजों के साथ खड़े रहे। वह गेंदबाजों को मर्जी से गेंदबाजी की छूट देती थे।'' उन्होंने कहा, ''यदि आप कैच पकड़ने के लिए 4-5 फील्डर सामने चाहते हैं तो गांगुली वही करते थे। कभी-कभी वह वनडे में 6-7 ओवर फिंकवाते। मैं उनका शुक्रिया अदा करते। उन्होंने मुझे एक अच्छे गेंदबाज के रूप में तैयार किया। उनकी वजह से ही मैं साहसी और भरोसे का निडर स्पिनर बन पाया।''

 

मनोरंजन /शौर्यपथ / सुशांत स‍िंह राजपूत की आत्‍महत्‍या के बाद बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जहां एक तरफ सुशांत ने सुसाइड से बॉलीवुड सदमे में वहीं नेपोटिज्म को लेकर करण जौहर और खान परिवार को सोशल मीडिया पर टारगेट किया जा रहा है। हाल ही में सुशांत के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए फिल्म निर्देशक अभिनव कश्यप ने सलमान खान के भाई अरबाज खान ,सोहेल खान सहित उनके परिवार पर कई संगीन आरोप लगाए थे। कश्यप ने अपने आरोप में कहा था कि खान परिवार ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दिया है। अब इस मामले पर एक्टर अरबाज खान का रिएक्शन आया है और उन्होंने अपने बयान में अभिनव कश्यप पर लीगल कार्यवाई करने की बात कही है। वहीं

बॉम्बे टाइम्स से बात करते हुए अरबाज ने कहा कि 'हम उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।' अपनी बात रखते हुए अरबाज ने कहा कि जब से हमने 'दबंग 2' पर काम शुरू किया हमारी अभिनव से कोई बातचीत नहीं हुई है और मैं नहीं जानता ये सब कहां से आ रहा है। इस वजह से अब हम उनके आरोपों का सामना कानूनी रूप से करेंगे।

जानिए क्या अभिनव ने लिखा था फेसबुक पर

फेसबुक पोस्ट में अभिनव ने सलमान खान , सोहेल, अरबाज और सलीम खान पर आरोप लगाते हुए लिखा कि 'दबंग' को डायरेक्ट करने के बाद उन्होंने इसलिए 'दबंग 2' का निर्देशन नहीं किया क्योंकि अरबाज और सोहेल खान अपने परिवार के साथ मिलकर मुझे तंग करने लगे थे। श्री अष्टविनायक फिल्म्स के साथ मेरे दूसरे प्रोजेक्ट को भी बर्बाद कर दिया गया। अरबाज ने प्रोडक्शन कंपनी के हेड राज मेहता को फोन करके धमकी दी कि अगर मेरे साथ फिल्म करने की उन्हें सजा भुगतनी पड़ सकती है। मुझे साइनिंग अमाउंट भी लौटाना पड़ा मैंने वेकॉम पिक्चर्स की ओर चल पड़ा। इस बार सोहेल खान ने बीच में तांड अड़ा दिया और वायकॉम के सीईओ विक्रम मल्होत्रा को फोन कर दिया। इसके बाद रिलायंस एंटरटेनमेंट ने ही मेरी मदद की और हमने मिलकर 'बेशरम' को रिलीज किया।

अभिनव आगे लिखते हैं कि मुझे मेरे दुश्मन ठीक से पता है जो हैं सलीम खान, सलमान खान, अरबाज खान और सोहेल खान, लेकिन इन सब में सलमान सबसे जहरीला है. ये सब अपने पैसे, राजनीतिक पॉवर और अंडरवर्ल्ड कनेक्शन की मदद से लोगों को धमकाते आए हैं। अभिनव अपनी बात को अंत पहुंचाते हुए बताते हैं कि "सुशांत सिंह राजपूत अब आगे बढ़ चुके हैं और जहां भी हैं खुश हैं, लेकिन मैं इस बात का ख्याल रखूंगा कि कोई और मासूम काम की कमी और बॉलीवुड में सम्मान की कमी के कारण इस तरह से खुद की जान न ले।

अभिनव का दूसरा पोस्ट

एक दूसरे पोस्ट में अभिनव लिखते हैं कि किसी ने अभी-अभी मेरे ईमेल अकाउंट में लॉग इन करने की कोशिश की । अब यह दिलचस्प हो रहा है... खान इतने परेशान क्यों हो रहे हैं...?? वे क्या छुपा रहे हैं..?? वे मुझे चुप करने के लिए बेताब क्यों हैं..??

 

मनोरंजन / शौर्यपथ / 'कुमकुम भाग्य' की एक्ट्रेस शिखा सिंह मां बन गई हैं। शिखा ने 16 जून को बेटी को जन्म दिया है। इस खुशखबरी के मिलने के बाद से फैन्स उन्हें बधाई दे रहे हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान शिखा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रही हैं। वह बेबी बंप के साथ अपनी फोटोज शेयर करती थीं। उनके पोस्ट से साफ पता लगता था कि वह मां बनने को लेकर काफी एक्साइटेड हैं।

बता दें कि टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ इंटरव्यू में शिखा सिंह ने बताया था कि जून में डिलिवरी होनी ड्यू है। उन्होंने कहा था, 'मैं और करण दोनों ही प्लान कर रहे थे कि परिवार को हम लोग यहां मुंबई बुला लेंगे। लेकिन नहीं पता था कि कोरोना वायरस जैसी समस्या सामने आ खड़ी होगी। मैंने प्रोडक्शन हाउस को बता दिया था कि मैं प्रेग्नेंसी के चलते अप्रैल के अंत तक ब्रेक ले लूंगी। प्रोडक्शन हाउस ने भी हामी भर दी थी। लेकिन अब कोविड-19 की वजह से मैं मार्च से ही ब्रेक पर हूं। मेरे पति पायलट हैं और लॉकडाउन की वजह से वह घर पर ही हैं। वरना तो वह ट्रैवल कर रहे होते'।

शिखा सिंह ने यह भी कहा था कि बेबी होने के बाद वह कुछ महीने सेल्फ-आइसोलेशन में रहेंगी। शिखा कहती हैं कि बेबी के आने के बाद हम लोगों के लिए पूरी तरह से सेल्फ-आइसोलेशन होने वाला है। काम पर वापस जाने से पहले मैं क्वारंटाइन होने वाली हूं। बेबी के साथ मैं बाहर जाने का सोच भी नहीं सकती हूं।

बता दें कि शिखा ने अपने करियर की शुरुआत ‘लेफ्ट राइट लेफ्ट’ सीरियल से की थी। इसके बाद इन्हें ‘न आना इस देस लाडो’, ‘ससुराल सिमर का’ और ‘लाल इश्क’ में देखा गया था।

 

नजरिया /शौर्यपथ /भारत-चीन सीमा पर जो हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद नया नहीं है। तनाव पचास के दशक में ही शुरू हो गया था। जब पंचशील की बात पंडित नेहरू ने शुरू की थी, तब भी विवाद थे। तभी चीन ने 38,000 वर्ग किलोमीटर जमीन हथिया ली थी। तभी से तनातनी है। यह स्वीकारने में कोई हर्ज नहीं कि यह हमारी कूटनीति और राजनीतिक विफलता है, जिसका नतीजा हम भुगत रहे हैं। जब 1950 के दशक में चीनी प्रधानमंत्री चाउ एन लाई आए थे, उनका भारत में सम्मान किया गया था। उन्होंने तब कहा था, सीमा विवाद सुलझा लेते हैं, लेकिन इस दिशा में भारत की ओर से कार्रवाई नहीं हुई। चाउ एन लाई निराश लौट गए। दोनों देशों के बीच केवल तनाव ही नहीं रहा है, 1962 में युद्ध भी हो चुका है। हम उस लड़ाई के लिए तैयार नहीं थे। उसके बाद चीन ज्यादा आक्रामक हुआ। उसके बाद से ही उसकी नीति भारत को दबाकर रखने की रही। उसने जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में भी अपनी जमीन होने का दावा किया है।
हम चीन के साथ अपनी सीमा को सुलझाने में कामयाब नहीं हो रहे हैं। जहां अभी विवाद हुआ है, वहां चीन के साथ हमारी अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल को लेकर अपने-अपने दावे हैं, इसलिए आपस में तनाव घटता-बढ़ता रहता है। ताजा हिंसा पीछे हटते और कब्जा लेते हुए हुई है। चीनी सैनिक किसी जगह पर अड़ गए होंगे, उसके बाद ही तनाव बढ़ा और हिंसा हुई है। ऐसा नहीं है कि उसके बाद दोनों ओर से फार्यंरग शुरू हो गई हो। अभी धुंध है। इसे ‘फॉग ऑफ वार’ या लड़ाई का कोहरा कहते हैं। मेरा मानना है कि चीन के छह से आठ जवान मारे गए होंगे, लेकिन वह मानेगा नहीं। बहुत संभव है, दोनों ओर, कुछ मीसिंग भी हुई हो, जिसका पता कुछ समय बाद ही चलेगा। अब जिस स्तर पर तनाव चला गया है, वह जल्दी नीचे नहीं आएगा। दोनों देशों को उच्च स्तर पर रणनीतिक बातचीत बढ़ाने की पहल करनी पड़ सकती है। समाधान राजनीतिक व कूटनीतिक स्तर पर ही होगा।
चीन जो कर रहा है, उसका सीधा संबंध शी जिनपिंग से है। इससे पाकिस्तान का भी संबंध है। नेपाल ने पिछले दिनों जो किया है, उससे भी चीन का संबंध है। भारत-चीन सीमा विवाद के समाधान के लिए देर-सबेर वार्ता की मेज पर पाकिस्तान और अफगानिस्तान को भी लाना पडे़गा। जहां तक युद्ध की बात है, तो यह चीन भी नहीं चाहेगा। दोनों देशों के बीच 100 अरब डॉलर का व्यापार है। युद्ध किसी के हित में नहीं है। परस्पर व्यवसाय तभी संभव है, जब तनाव सीमित रहेंगे।
अभी भारतीय सेना के मनोबल की बात करें, तो वह बहुत मजबूत है। भारतीय सैनिक 18,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर भी लड़ने में सक्षम हैं। इतनी ऊंचाई पर मुकाबला करने की क्षमता किसी और देश के सैनिकों में नहीं है। चीन भी समझता है, इस तरह की लड़ाई में अब वह भारत से पार नहीं पा सकता। भारतीय सेना बहु-प्रशिक्षित है। इसके अलावा, चीन की पीपुल लिबरेशन आर्मी को लड़ने का अनुभव नहीं है, जबकि भारत को लगातार ही लड़ना पड़ रहा है। चीन से भयभीत होने की जरूरत नहीं है। हमारी सेनाओं का मनोबल टॉप पर है। अब समय आ गया है, सैन्य बजट कम से कम पांच प्रतिशत होना चाहिए। अभी यह तीन प्रतिशत है। सेना का आधुनिकीकरण तेज कर देना चाहिए।
हमें लगता है कि चीन हमें घेर रहा है, लेकिन वास्तव में हमने उसे घेर रखा है, जिससे वह बौखलाया हुआ है। वह सोचता है कि हम अमेरिका से गठबंधन कर चुके हैं, चीन की कंपनियों को निकालना चाहते हैं। हमने ऑस्ट्रेलिया से समझौता किया है, उसके जहाजों को हम पेट्रोल देंगे। चीन को लगता है, हम उसे दक्षिणी चीनी सागर में भी घेर रहे हैं। भारतीय संसद में जब अनुच्छेद 370 को खत्म करने का फैसला लिया गया था, तब कहा गया था कि हम पीओके और कश्मीर के अपने पूरे हिस्से को हर हाल में वापस लेंगे। अब चीन को लग रहा है कि उसने अपने कब्जे वाले इलाके में जो सड़क बनाई है, वही सड़क घूमकर पाकिस्तान जा रही है, उसका क्या होगा? वह परेशान है, लेकिन पूरे तनाव के बीच हमें अपने पक्ष में समाधान निकालना होगा। यह हमारा दुर्भाग्य है कि हम अपने पड़ोसी नहीं बदल सकते।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) मोहन भंडारी, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल

 

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