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मूलभूत सुविधाएं पहली प्राथमिकता; लंबित मामलों और निगम की बदहाल व्यवस्थाओं पर अब नई आयुक्त की नजर
शौर्यपथ विशेष
दुर्ग/3 सितंबर। नगर पालिक निगम दुर्ग को गुरुवार को नई आयुक्त के रूप में वर्ष 2020 बैच की आईएएस अधिकारी लीना कोसम मिलीं। दोपहर 1.30 बजे निवर्तमान आयुक्त मोहेंद्र साहू ने उन्हें विधिवत प्रभार सौंपा। कार्यभार संभालते ही लीना कोसम ने निगम के अधिकारियों-कर्मचारियों से परिचय प्राप्त किया और विभागवार संचालित योजनाओं, निर्माण कार्यों तथा लंबित प्रकरणों की स्थिति की जानकारी ली।
आयुक्त ने स्पष्ट किया कि शहरवासियों तक मूलभूत सुविधाओं की बेहतर उपलब्धता उनकी पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि निगम के कामकाज को समझने के साथ शहर की जरूरतों और नागरिकों की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्यों को गति दी जाएगी। उन्होंने कर्मचारियों के वेतन भुगतान, ट्रांसफर, ग्रेच्युटी एवं पेंशन प्रकरणों की स्थिति की जानकारी लेने के साथ स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की। विभागवार लंबित कार्यों पर चर्चा करते हुए उन्होंने अधिकारियों से समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने पर जोर दिया। सोमवार को विभागवार विस्तृत समीक्षा बैठक लेने की बात भी उन्होंने कही।
नई आयुक्त के सामने चुनौतियों की लंबी फेहरिस्त
लीना कोसम के सामने दुर्ग निगम की जिम्मेदारी ऐसे समय आई है, जब निगम से जुड़े कई संवेदनशील और विवादित मामले जांच तथा कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इनमें निगम की जमीन आवंटन के नाम पर लाखों रुपये की कथित नगद वसूली, विस्थापित वेंडरों को बाजार विभाग के संज्ञान के बिना दोबारा गुमठी आवंटन करने वाले पूर्व प्लेसमेंट अधिकारी मुक्तेश की कार्यप्रणाली की जांच और बुजुर्ग दंपत्ति के मुख्य द्वार पर कब्जा कर खुले शौचालय के मामले की जांच प्रमुख हैं।
इसके अलावा शासकीय कर्मचारियों और प्लेसमेंट कर्मचारियों को गुमठी आवंटन, बिना निविदा लगातार एक ही संस्था को आश्रय स्थल संचालन दिए जाने, इंदिरा मार्केट की बदहाल व्यवस्था, सुराना कॉलेज के सामने कचरा डंपिंग स्थल, धमधा नाका शासकीय अस्पताल के सामने कचरा स्थल तथा शहर के चौक-चौराहों पर अतिक्रमण जैसे मुद्दे भी नई आयुक्त के लिए बड़ी चुनौती हैं।
सड़क पर कब्जा कर संचालित राम रसोई को हटाने तथा बस स्टैंड की बेशकीमती शासकीय जमीन पर राम रसोई के कथित नियम विरुद्ध अनुबंध को समाप्त कर जमीन को कब्जामुक्त कराने का मुद्दा भी निगम प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में मौजूद है।
पदभार के साथ बना नया रिकॉर्ड
लीना कोसम के दुर्ग नगर निगम आयुक्त का पद संभालते ही निगम के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। वह दुर्ग नगर निगम के इतिहास में पहली महिला आईएएस अधिकारी हैं, जिन्होंने आयुक्त के रूप में जिम्मेदारी संभाली है। ऐसे में शहर की मूलभूत सुविधाओं से लेकर निगम की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और लंबे समय से लंबित विवादित मामलों के निराकरण तक उनकी कार्यशैली पर शहरवासियों की नजर रहेगी।
महापौर अलका बाघमार से की सौजन्य मुलाकात
पदभार ग्रहण करने के बाद आयुक्त लीना कोसम ने महापौर अलका बाघमार से सौजन्य मुलाकात की। महापौर कक्ष में पहुंचने पर उनका स्वागत किया गया। इस दौरान एमआईसी सदस्य, पार्षद एवं एल्डरमेन मौजूद रहे।
नए आयुक्त के स्वागत के अवसर पर निवर्तमान आयुक्त मोहेंद्र साहू, कार्यपालन अभियंता विनीता वर्मा, मोहम्मद सलीम सिद्दीकी, सहायक अभियंता गिरीश दिवान, हरिशंकर साहू, पंकज साहू, आर.के. बोरकर, दुर्गेश गुप्ता, संजय मिश्रा, अनिल सिंह सहित निगम के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
गदा चौक–सुपेला चौक पर विकास की बहस में उलझा जनहित; संडे मार्केट हटाने के बजाय फ्लाईओवर का सवाल क्यों?
भिलाई। वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र में गदा चौक से सुपेला चौक के बीच प्रस्तावित फ्लाईओवर अब महज सड़क और यातायात का मुद्दा नहीं रह गया है। करीब 72 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को लेकर जनप्रतिनिधियों के बीच राजनीतिक बहस और सोशल मीडिया पर समर्थकों की खींचतान ने इसे एक बड़े सवाल में बदल दिया है—क्या फ्लाईओवर वास्तव में क्षेत्र की यातायात समस्या का स्थायी समाधान है या फिर मौजूदा समस्या के मूल कारण को नजरअंदाज कर महंगा समाधान तलाशा जा रहा है?
विधायक रिकेश सेन की ओर से फ्लाईओवर को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, इसे लेकर विरोध करने वालों का तर्क है कि इतने बड़े सरकारी निवेश से पहले यह देखा जाना चाहिए कि जिस मार्ग पर यातायात का दबाव पैदा हो रहा है, उसकी बड़ी वजह क्या है।
एक रास्ता, कई इलाकों की परेशानी
गदा चौक–सुपेला चौक के बीच का मार्ग हाउसिंग बोर्ड, वैशाली नगर, शांति नगर, कोहका, कुरुद और कैलाश नगर सहित कई इलाकों के लोगों के आवागमन का महत्वपूर्ण रास्ता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मार्ग पर लगने वाले संडे मार्केट के कारण कई बार यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होती है।
सबसे गंभीर सवाल आपातकालीन सेवाओं को लेकर उठता है। स्थानीय दावों के मुताबिक बाजार के दौरान फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और शव वाहन तक के लिए रास्ता बाधित हो जाता है। यदि ऐसा है तो यह केवल ट्रैफिक जाम का विषय नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है।
फ्लाईओवर से सवाल खत्म होगा या समस्या का स्वरूप बदलेगा?
फ्लाईओवर बनने से निश्चित रूप से मुख्य मार्ग पर यातायात को सुगमता मिल सकती है। लेकिन करीब एक किलोमीटर के इस मार्ग पर वर्षों से कारोबार कर रहे व्यापारियों की चिंता भी कम महत्वपूर्ण नहीं है।
फ्लाईओवर निर्माण और उसके बाद यातायात के स्वरूप में बदलाव से स्थानीय दुकानदारों के व्यापार पर असर पड़ सकता है। सवाल यह है कि यदि किसी बड़े प्रोजेक्ट के कारण स्थानीय व्यापार प्रभावित होता है तो उसकी भरपाई कौन करेगा?
यही वह बिंदु है जहां कुम्हारी और सोमनी जैसे क्षेत्रों का उदाहरण चर्चा में आता है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर फ्लाईओवर और सड़क संरचना में बदलाव के बाद इन क्षेत्रों के पुराने व्यापारिक स्वरूप पर असर पड़ने की बात स्थानीय स्तर पर कही जाती रही है। हालांकि वहां बेहतर यातायात के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की सीमाएं अलग थीं, लेकिन गदा चौक–सुपेला चौक की परिस्थितियां उससे अलग होने का तर्क दिया जा रहा है।
‘सस्ती लोकप्रियता’ के आरोप पर भी सवाल
फ्लाईओवर को लेकर यदि किसी राजनीतिक नेता ने इसे ‘सस्ती लोकप्रियता’ बताया है, तो यह सवाल भी स्वाभाविक है कि क्या 72 करोड़ रुपये के प्रस्तावित प्रोजेक्ट का मूल्यांकन केवल राजनीतिक चश्मे से होना चाहिए?
वास्तविक सवाल यह होना चाहिए कि—
क्या इस फ्लाईओवर की जरूरत वैज्ञानिक यातायात अध्ययन से साबित होती है?
क्या संडे मार्केट को स्थानांतरित कर यातायात समस्या कम की जा सकती है?
क्या स्थानीय व्यापारियों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का सर्वे हुआ है?
और क्या 72 करोड़ रुपये खर्च करने से पहले कम लागत वाले विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया गया है?
अगर बाजार अवैध है तो कार्रवाई कौन करेगा?
पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है।
यदि संडे मार्केट वास्तव में अनधिकृत या अवैध रूप से संचालित हो रहा है, तो सवाल केवल फ्लाईओवर का नहीं रह जाता। तब सवाल यह है कि प्रशासन उस बाजार को नियमित क्यों नहीं करता अथवा उसे किसी उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित क्यों नहीं करता?
एक ओर आपातकालीन वाहनों के रास्ते बाधित होने की शिकायतें हों और दूसरी ओर उसी बाजार के कारण करोड़ों रुपये की स्थायी सड़क परियोजना की आवश्यकता बताई जाए, तो प्रशासन से जवाबदेही तय होना स्वाभाविक है।
एक दिन लगने वाले बाजार की समस्या का समाधान बाजार को व्यवस्थित करना है या करोड़ों रुपये की स्थायी संरचना खड़ी करना—इस पर खुली और तथ्य आधारित बहस जरूरी है।
व्यापारियों की खुशी ने भी दिया अलग संदेश
फ्लाईओवर प्रोजेक्ट को हटाए जाने अथवा आगे न बढ़ने की खबर के बाद स्थानीय व्यापारियों द्वारा खुशी जताए जाने और सांसद विजय बघेल के प्रति आभार व्यक्त किए जाने की बात भी सामने आई है।
यह घटनाक्रम इस बात का संकेत माना जा सकता है कि स्थानीय व्यापारियों का एक वर्ग फ्लाईओवर को अपने व्यापार के लिए संभावित खतरे के रूप में देख रहा था।
यहीं से राजनीतिक बहस और तीखी हो गई है। एक ओर विधायक समर्थक इसे क्षेत्र की यातायात समस्या का समाधान मान रहे हैं, तो दूसरी ओर सांसद समर्थक व्यापारियों के हित और वैकल्पिक समाधान को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं।
सोशल मीडिया बना राजनीतिक अखाड़ा
फिलहाल इस मुद्दे पर सबसे ज्यादा गर्मी सोशल मीडिया पर दिखाई दे रही है। विधायक रिकेश सेन के समर्थक फ्लाईओवर को विकास और यातायात समाधान से जोड़ रहे हैं, जबकि सांसद विजय बघेल के समर्थक इसे स्थानीय व्यापारियों के हित से जोड़कर देख रहे हैं।
लेकिन सवाल यह है कि क्या वैशाली नगर की जनता को दो जनप्रतिनिधियों के समर्थकों की सोशल मीडिया लड़ाई चाहिए या फिर समस्या का व्यावहारिक समाधान?
जनता के सामने विकल्प स्पष्ट होना चाहिए—
संडे मार्केट को व्यवस्थित किया जाए, उसका स्थान बदला जाए, यातायात व्यवस्था सुधारी जाए और यदि इसके बाद भी फ्लाईओवर आवश्यक साबित हो तो उसके निर्माण पर गंभीरता से विचार किया जाए।
जनप्रतिनिधियों से जनता का सीधा सवाल
राजनीति का उद्देश्य किसी प्रोजेक्ट को केवल अपनी उपलब्धि बताना या किसी दूसरे के प्रयास को ‘सस्ती लोकप्रियता’ बताना नहीं होना चाहिए।
यदि 72 करोड़ रुपये खर्च होने हैं तो उसका लाभ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचना चाहिए। वहीं यदि उसी समस्या का समाधान कम खर्च में बाजार को स्थानांतरित कर, सड़क को व्यवस्थित कर और यातायात प्रबंधन सुधारकर हो सकता है तो करोड़ों रुपये खर्च करने से पहले उस विकल्प को भी परखा जाना चाहिए।
वैशाली नगर की जनता को फ्लाईओवर चाहिए या बेहतर यातायात व्यवस्था—यह सवाल अब सोशल मीडिया की बहस से आगे निकलकर विशेषज्ञों, व्यापारियों, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने रखा जाना चाहिए।
क्योंकि सवाल किसी एक नेता की लोकप्रियता का नहीं, 72 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन और हजारों नागरिकों के भविष्य का है।
अब फैसला राजनीति नहीं, तथ्य करें—फ्लाईओवर जरूरी है तो कारण सामने आएं, और अगर संडे मार्केट समस्या की जड़ है तो पहले उस पर कार्रवाई क्यों नहीं?
भिलाई / शौर्यपथ / सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र की प्लेट मिल और यूनिवर्सल रेल मिल (यूआरएम) ने अगस्त 2026 में उत्पादन एवं प्रेषण के क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। प्लेट मिल ने पांच नए रिकॉर्ड बनाए, जबकि यूआरएम ने पहली बार एक माह में 100 से अधिक श्वक्र (लॉन्ग रेल) रेक का प्रेषण कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
प्लेट मिल ने अगस्त में 1,25,214 टन उत्पादन किया, जो अगस्त 2025 के 1,20,448 टन के पिछले रिकॉर्ड से अधिक है। मिल ने डायरेक्ट प्रेषण में 85,101 टन,हाई टेंसाइल प्रेषण में 40,050 टन, दैनिक रोड प्रेषण में 1,699 टन एवं 52 ट्रॉलियों तथा कुल 1,28,159 टन प्रेषण का नया रिकॉर्ड बनाया।
यूआरएम ने पहली बार भेजे 102 लॉन्ग रेल रेक
यूआरएम ने अगस्त 2026 में 260 मीटर रेल पैनल के 102 श्वक्र रेक का प्रेषण कर पहली बार 100 रेक का आंकड़ा पार किया। इससे पहले जून और जुलाई 2026 में 94 श्वक्र रेक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया गया था। मई 2026 से यूआरएम लगातार चौथे माह निर्धारित क्षमता के अनुरूप प्राइम उत्पादन कर रहा है।
लॉन्ग रेल के कुल प्रेषण में भी बीएसपी ने सर्वकालिक रिकॉर्ड बनाया। अगस्त में संयंत्र से कुल 119 श्वक्र रेक भेजे गए, जो जून 2026 के 111 रेक के पिछले रिकॉर्ड से अधिक है। खास बात यह है कि अब केवल यूआरएम से ही एक माह में 100 से अधिक लॉन्ग रेल रेक का प्रेषण संभव हुआ है।
टीम भावना और परिचालन उत्कृष्टता को मिली सराहना
उपलब्धियों के अवसर पर निदेशक प्रभारी, बीएसपी चित्तरंजन महापात्र ने प्लेट मिल एवं यूआरएम का दौरा कर दोनों टीमों को बधाई दी। उन्होंने अधिकारियों एवं कार्मिकों के समर्पण, टीम भावना और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए भविष्य में भी नए कीर्तिमान स्थापित करने का विश्वास जताया।
प्लेट मिल और यूआरएम की उपलब्धियां संयंत्र में उच्च उत्पादकता, परिचालन दक्षता, मूल्यवर्धित उत्पादों, डिजिटलीकरण एवं ऑटोमेशन को बढ़ावा देने के प्रयासों को मजबूती देती हैं। साथ ही यह प्रदर्शन सेल के महत्वाकांक्षी 'रूद्बह्यह्यद्बशठ्ठ 10्य ष्टह्म् क्कक्चञ्जÓ लक्ष्य की दिशा में भिलाई इस्पात संयंत्र के योगदान को भी सुदृढ़ करता है।
सत्यनारायण राठौर ने ली समीक्षा बैठक,
निर्माण कार्य समय पर पूर्ण करने के दिए निर्देश
दुर्ग / शौर्यपथ / संभाग आयुक्त सत्यनारायण राठौर ने संभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर शिक्षा व्यवस्था, नशा विरोधी अभियान, निर्माण कार्य, जलाशयों में जलभराव और प्राथमिक सहकारी समितियों के गठन की समीक्षा की।
उन्होंने स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने और विद्यार्थियों की शिकायतों का निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निलंबित शिक्षकों को आरोप पत्र जारी कर विभागीय जांच शुरू करने तथा नियमानुसार सेवा में बहाल शिक्षकों की विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर स्कूलों में पदस्थापना करने कहा। शिक्षकों को विद्यार्थियों और ग्रामीणों के साथ अनुशासित एवं बेहतर व्यवहार के लिए समझाइश देने के निर्देश भी दिए।
उच्च शिक्षा विभाग को स्कूलों एवं कॉलेजों में नशे के खिलाफ जनजागरूकता अभियान लगातार जारी रखने तथा युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने कहा गया। सीजीएमएससी एवं अन्य निर्माण एजेंसियों को स्वीकृत और प्रगतिरत कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कर संबंधित विभागों को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए गए।
समीक्षा में क्रेडा ने बताया कि सौर सुजला योजना का लक्ष्य पूर्ण हो चुका है और विभिन्न स्थानों पर 1300 सौर लैम्प लगाए गए हैं। जल संसाधन विभाग के अनुसार खपरी और मटियामोती जलाशय 100 प्रतिशत, जबकि तांदुला, खरखरा और मोहड़ सहित अन्य जलाशयों में 80 से 85 प्रतिशत जलभराव है।
संयुक्त आयुक्त सहकारिता ने बताया कि शासन की मंशा के अनुरूप ग्राम पंचायतों में प्राथमिक सहकारी समितियां गठित की जा रही हैं। अब तक मत्स्य, दुग्ध एवं वनोपज से संबंधित 1330 नवीन समितियां गठित हो चुकी हैं। बैठक में उपायुक्त (राजस्व) पदुम लाल यादव, उपायुक्त (विकास) संतोष ठाकुर सहित विभिन्न विभागों के संभाग स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
जांजगीर-चांपा / शौर्यपथ / नैला स्थित मेसर्स बालाजी कृषि के खिलाफ कृषि विभाग ने कार्रवाई करते हुए उसका कीटनाशी अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) आगामी आदेश तक निलंबित कर दिया है। 20 अगस्त 2026 को राज्य एवं जिला स्तरीय कीटनाशक निरीक्षकों द्वारा प्रतिष्ठान के विक्रय एवं भंडार परिसर का औचक निरीक्षण किया गया था।
निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान में बिना स्रोत प्रमाण पत्र की अनुमति के विभिन्न कीटनाशक कंपनियों के उत्पादों का विक्रय किया जाना पाया गया। विभाग ने संबंधित कंपनियों के उत्पादों की बिक्री तत्काल प्रतिबंधित करते हुए उन्हें जब्त करने की कार्रवाई की। निरीक्षण के बाद जारी नोटिस के जवाब में भी प्रतिष्ठान द्वारा सभी बिंदुओं पर पूर्ण दस्तावेजों के साथ जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।
निर्धारित समयावधि में समाधानकारक जवाब प्राप्त नहीं होने पर उप संचालक कृषि द्वारा कीटनाशक अधिनियम 1968, कीटनाशक नियम 1971 एवं कीटनाशक आदेश 1986 के प्रावधानों के तहत बालाजी कृषि का कीटनाशी लाइसेंस आगामी आदेश तक निलंबित कर दिया गया।
उप संचालक कृषि ने स्पष्ट किया कि जिले के सभी निजी कृषि केंद्रों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। बिना लाइसेंस अथवा बिना वैध स्रोत प्रमाण पत्र के कीटनाशकों की बिक्री तथा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आगे भी नियमानुसार कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
महापौर अलका बाघमार और मंत्री गजेंद्र यादव के नेतृत्व वाले सत्ता तंत्र पर उठे सवाल—कर्मचारियों को वेतन के लिए इंतजार, ठेकेदार भुगतान के लिए परेशान, विकास का पहिया आखिर कैसे चले?
दुर्ग। दुर्ग नगर निगम में प्रशासनिक व्यवस्था इन दिनों ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहां आयुक्त की नियुक्ति हो चुकी है, लेकिन आयुक्त की कुर्सी अब भी खाली है। लगभग डेढ़ महीने से अधिक समय से निगम में स्थायी प्रशासनिक मुखिया का अभाव और करीब 10 दिन पहले आईएएस अधिकारी सुश्री लीना कोसम की आयुक्त के रूप में नियुक्ति के बावजूद उनका अब तक पदभार ग्रहण न करना, निगम की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
निगम में फिलहाल प्रभारी आयुक्त के रूप में मोहन्द्र साहू जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, लेकिन महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं नीतिगत निर्णयों के मामले में उनके स्तर पर भी स्वाभाविक रूप से सीमाएं दिखाई दे रही हैं। परिणाम यह है कि निगम के कई काम उस गति से आगे नहीं बढ़ पा रहे, जिसकी उम्मीद शहरवासियों को ‘सुशासन’ और विकास के दावों के बीच है।
त्योहार आया, वेतन के लिए इंतजार करना पड़ा
पिछले माह त्योहारों के दौरान निगम कर्मचारियों को वेतन भुगतान में परेशानी का सामना करना पड़ा। कर्मचारियों को वेतन दिलाने के लिए प्रभारी आयुक्त को निर्देशित किया गया, जिसके बाद देर से ही सही, भुगतान किया गया। लेकिन सवाल यह है कि त्योहारों के समय निगम के कर्मचारियों को अपने ही वेतन के लिए इंतजार क्यों करना पड़े?
एक तरफ कर्मचारी समय पर वेतन की उम्मीद लगाए बैठे हैं, दूसरी तरफ निगम के विकास कार्यों की रीढ़ माने जाने वाले ठेकेदारों के भुगतान को लेकर भी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है।
ठेकेदारों का भुगतान अटका तो विकास की रफ्तार पर भी असर
शहर में सड़क, नाली, भवन, सफाई, प्रकाश व्यवस्था और अन्य विकास कार्यों को जमीन पर उतारने में ठेकेदारों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि पिछले डेढ़-दो महीने से ठेकेदारों के भुगतान लंबित हैं, तो इसका सीधा असर उनके आर्थिक संचालन और नए कामों की गति पर पड़ना स्वाभाविक है।
कागजों में विकास की योजनाएं और दावे भले ही लगातार दर्ज होते रहें, लेकिन जब भुगतान का पहिया रुक जाए तो जमीन पर विकास की रफ्तार आखिर कैसे तेज होगी?
खास बात यह है कि अब फिर त्योहारों का दौर सामने है। तीज-पोरा और गणेश चतुर्थी जैसे महत्वपूर्ण पर्व नजदीक हैं। ऐसे समय में यदि निगम के ठेकेदारों के लंबित भुगतान का समाधान नहीं होता, तो एक बार फिर त्योहारी सीजन उनके लिए आर्थिक दबाव लेकर आ सकता है।
जनप्रतिनिधियों के त्योहारों में रंग, कर्मचारी-ठेकेदारों के हिस्से में इंतजार?
यही वह बिंदु है जहां निगम की राजनीतिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं। दुर्ग नगर निगम में भाजपा की सरकार है और महापौर अलका बाघमार हैं। दुर्ग विधानसभा क्षेत्र के विधायक गजेंद्र यादव प्रदेश सरकार में स्कूल शिक्षा मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर हैं। प्रदेश और केंद्र में भी भाजपा की सरकार है।
अर्थात दुर्ग निगम क्षेत्र में सत्ता का ‘ट्रिपल इंजन’ मौजूद है।
फिर सवाल यही है कि जब वार्ड से लेकर प्रदेश और केंद्र तक सत्ता एक ही दल की है, तो दुर्ग नगर निगम में प्रशासनिक मुखिया की कुर्सी डेढ़-दो महीने से अस्थिर क्यों दिखाई दे रही है?
जनता ने जिन जनप्रतिनिधियों को अपने सुख-दुख में साथ खड़े रहने की उम्मीद से चुना है, क्या उनकी प्राथमिकता में निगम कर्मचारियों का समय पर वेतन और ठेकेदारों का लंबित भुगतान भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना राजनीतिक प्रोटोकॉल और सार्वजनिक कार्यक्रम?
‘मेरी पसंद का अधिकारी’ या शहर के हित का अधिकारी?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी सुनाई दे रही है कि आयुक्त की नियुक्ति को लेकर पसंद-नापसंद और राजनीतिक समीकरणों को महत्व दिया जा रहा है। हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि ऐसी कोई स्थिति है तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि व्यक्तिगत पसंद से ऊपर शहर का प्रशासनिक हित कब आएगा?
जनप्रतिनिधियों को यह नहीं भूलना चाहिए कि उन्हें इस पद तक पहुंचाने वाला वोट किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि दुर्ग शहर की आम जनता का जनादेश है।
चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन जनता की समस्याएं चुनावी कैलेंडर देखकर पैदा नहीं होतीं। वेतन, भुगतान, सड़क, सफाई, नाली, प्रकाश और विकास के काम हर दिन जनता से जुड़े हैं।
विपक्ष भी खामोश, सत्ता को मिला खुला मैदान
इस पूरे मामले में विपक्ष की भूमिका भी सवालों से परे नहीं है। निगम में नेता प्रतिपक्ष संजय कोहले की सक्रियता को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा है। जिस मजबूती से विपक्ष को कर्मचारियों के वेतन, ठेकेदारों के लंबित भुगतान और निगम की प्रशासनिक स्थिति को लेकर आवाज उठानी चाहिए थी, वह प्रभाव फिलहाल नजर नहीं आ रहा।
सत्ता पक्ष की चुप्पी और विपक्ष की निष्क्रियता—दोनों के बीच नुकसान आखिर किसका हो रहा है? जवाब साफ है—दुर्ग शहर का।
1906 में जिला मुख्यालय बना दुर्ग, लेकिन आज प्रशासनिक मुखिया की प्रतीक्षा
दुर्ग लंबे समय से प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर रहा है। ऐसे शहर के नगर निगम में आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर नियुक्ति के बावजूद पदभार ग्रहण में देरी होना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे का विषय बनता जा रहा है।
नियुक्ति हो चुकी है, आदेश हो चुका है, नाम तय हो चुका है—फिर कुर्सी खाली क्यों है?
यही सवाल अब निगम के कर्मचारियों, ठेकेदारों और शहर के नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
महापौर अलका बाघमार और मंत्री गजेंद्र यादव के नेतृत्व में शहर को विकास और सुशासन की दिशा में आगे बढ़ाने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन इन दावों की असली परीक्षा कागजों में नहीं, बल्कि निगम की रोजमर्रा की प्रशासनिक व्यवस्था में होगी।
क्योंकि प्रोटोकॉल का सम्मान सत्ता के लिए सुविधाजनक हो सकता है, लेकिन कर्मचारी का समय पर वेतन और ठेकेदार का समय पर भुगतान—यही सुशासन की असली कसौटी है।
अब देखना यह होगा कि आईएएस सुश्री लीना कोसम आखिर कब दुर्ग नगर निगम की आयुक्त की कुर्सी संभालती हैं और क्या उनके पदभार ग्रहण के बाद निगम की वर्तमान प्रशासनिक अनिश्चितता खत्म होकर विकास और भुगतान का पहिया वास्तव में गति पकड़ता है?
फिलहाल स्थिति यही है—आयुक्त की नियुक्ति हो चुकी है, लेकिन कुर्सी अब भी खाली है और दुर्ग नगर निगम की प्रशासनिक दिशा पर सवाल कायम हैं।
33/11 केवी के 5 एमवीए क्षमता वाले सबस्टेशन का मंत्री लखनलाल देवांगन ने किया भूमिपूजन, शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में सुधरेगी बिजली आपूर्ति
रायपुर / शौर्यपथ / कोरबा जिले के बालको क्षेत्र से लगे ग्राम पंचायत जामबहार में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। उद्योग, वाणिज्य, श्रम एवं आबकारी मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने मंगलवार को 3.40 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 33/11 केवी, 5 एमवीए क्षमता के विद्युत सबस्टेशन का विधिवत भूमिपूजन किया। नए सबस्टेशन के अस्तित्व में आने से क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता बेहतर होगी और आसपास के मौजूदा सबस्टेशनों पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा।
रूमगरा से जामबहार तक सुधरेगी विद्युत व्यवस्था
मंत्री देवांगन ने कहा कि नए सबस्टेशन का लाभ कोरबा के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को मिलेगा। शहरी क्षेत्र में रूमगरा, बेलगिरी बस्ती, मदरसा मोहल्ला, हवाई पट्टी, खान मोहल्ला और जोगियाडेरा सहित अन्य बस्तियों में विद्युत आपूर्ति अधिक सुचारू होगी।
वहीं ग्रामीण क्षेत्र के जामबहार, रोकबहरी, सोनपुरी, परसाबातेल और चुहिया में भी बिजली की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था में सुधार आएगा। इस परियोजना से 4,500 से अधिक बिजली उपभोक्ता सीधे लाभान्वित होंगे।
हर घर तक बिजली और सौर ऊर्जा पर जोर
भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा प्रदेश के प्रत्येक घर तक पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाने की है। उन्होंने ग्रामीणों से सरकार की ‘प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ और ‘बिजली बिल समाधान योजना’ का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।
जनप्रतिनिधियों ने बताया विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह और जिला पंचायत सदस्य रेणुका राठिया ने नए सबस्टेशन की स्वीकृति और भूमिपूजन को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम बताते हुए मंत्री देवांगन के प्रयासों की सराहना की।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधि रफीक मेमन, निगम पार्षद नरेंद्र देवांगन, सीमा कंवर, जामबहार सरपंच उपन सिंह कंवर सहित बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
मुख्य सचिव विकासशील ने जुलाई की रैंकिंग में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को दिए प्रशंसा पत्र, विभागाध्यक्ष और जिला कार्यालय भी सम्मानित
रायपुर / शौर्यपथ / सरकारी कामकाज में तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ शासन लगातार डिजिटल कार्यप्रणाली को मजबूत कर रहा है। इसी दिशा में मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित मासिक सम्मान कार्यक्रम में मुख्य सचिव श्री विकासशील ने जुलाई माह में ई-ऑफिस के माध्यम से नस्तियों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण तथा कार्यालयीन समयबद्ध उपस्थिति में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
ई-ऑफिस में विभागीय प्रदर्शन के आधार पर लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को प्रथम, आदिम जाति विकास विभाग को द्वितीय और ग्रामोद्योग विभाग को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। मुख्य सचिव ने सम्मानित अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई देते हुए अपेक्षा की कि ई-ऑफिस में इसी तरह लगातार बेहतर प्रदर्शन किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों-कर्मचारियों को आई-गॉट (iGOT) पर प्रत्येक माह विभागीय आवश्यकता के अनुरूप कम से कम 3 से 4 कोर्स अनिवार्य रूप से करने के लिए भी प्रेरित किया। प्रदेश स्तर पर आई-गॉट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को भी प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया।
ई-ऑफिस रैंकिंग में इन अधिकारियों-कर्मचारियों का रहा उत्कृष्ट प्रदर्शन
संयुक्त सचिव से कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी की ई-ऑफिस रैंकिंग में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव श्री सच्चिदानंद आलोक प्रथम, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की संयुक्त सचिव श्रीमती जयश्री जैन द्वितीय तथा आदिम जाति विकास विभाग के संयुक्त सचिव श्री भूपेन्द्र कुमार राजपूत तृतीय स्थान पर रहे।
उप सचिव श्रेणी में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के श्री दूरदेशी राम सोन्टापर प्रथम, श्रम विभाग के श्री विपुल कुमार गुप्ता द्वितीय तथा सामान्य प्रशासन विभाग कक्ष-8 की श्रीमती ऋतु वर्मा तृतीय रहीं। अवर सचिव श्रेणी में गृह विभाग के श्री पूरन लाल साहू प्रथम, सामान्य प्रशासन विभाग कक्ष-1 के श्री कैलाश कुमार नेताम द्वितीय तथा लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की श्रीमती दिव्या वैष्णव तृतीय रहीं।
अनुभाग अधिकारी श्रेणी में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के श्री वीरेन्द्र कुमार प्रथम, श्री जीवन लाल नेताम द्वितीय तथा वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के श्री योगेन्द्र कुमार साहू तृतीय स्थान पर रहे। सहायक अनुभाग अधिकारी श्रेणी में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के श्री मोहम्मद शाहिर अंसारी प्रथम, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की श्रीमती प्रिया बागड़े द्वितीय तथा सामान्य प्रशासन विभाग कक्ष-4 के श्री जलेश राम तृतीय रहे।
वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के श्री मुकेश राम प्रधान प्रथम, अनुसूचित जाति विकास विभाग के श्री गौरव कुमार राय द्वितीय तथा श्रीमती अंजू दत्ता तृतीय स्थान पर रहीं। कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के श्री प्रभु सिंह राठिया प्रथम, खाद्य विभाग के श्री संदीप कुमार तारम द्वितीय तथा नगरीय प्रशासन विभाग के श्री उमेश यादव तृतीय रहे।
सहायक ग्रेड-2 श्रेणी में आदिम जाति विकास विभाग के श्री शेष नारायण साहू प्रथम, डाटा एंट्री ऑपरेटर श्रेणी में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की श्रीमती माया देवांगन द्वितीय तथा सहायक ग्रेड श्रेणी में विधि एवं विधायी कार्य विभाग के श्री तरूण कुमार धृतलहरे तृतीय स्थान पर सम्मानित हुए।
समयबद्ध उपस्थिति में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन
अटेंडेंस रैंकिंग में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों में श्री अनिल तिर्की, सुश्री आराधना साहू, श्री आशिष कुमार शर्मा, श्री आशुतोष वर्मा, श्री अश्वनी कुमार भतपहरी, श्री भागेश कुमार ध्रुव, श्री भूपेन्द्र सिंह राजपूत, श्रीमती दिव्या वैष्णव, श्रीमती हेमिन बाघे, श्री किशोर कुमार, श्री लोक नारायण शर्मा, श्रीमती मंजूषा राजपूत, श्री मेलू राम ध्रुव, श्री मिर्जा मुस्कान बेग, श्री मुकेश कुमार शाकार, श्री नरेश कुमार बाघमार, श्री पवन कुमार साहू, श्रीमती पुष्पांजली गजभिये, श्री राज कुमार सोरी, श्री राजेश सिंह राणा, सुश्री राखी सिदार, श्री रमाकांत, सुश्री रूपाली तिवारी, श्री शिवचरण राठौर, श्रीमती सुधा शेंडे, श्री तरूण कुमार धृतलहरे और श्री विवेक सोनी शामिल रहे।
तीन माह की रैंकिंग में भी विभागों ने बनाई जगह
तीन माह की ई-ऑफिस रैंकिंग में आदिम जाति विकास विभाग के संयुक्त सचिव श्री भूपेन्द्र कुमार राजपूत प्रथम, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव श्री सच्चिदानंद आलोक द्वितीय और वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की संयुक्त सचिव श्रीमती जयश्री जैन तृतीय स्थान पर रहीं।
तीन माह की अटेंडेंस रैंकिंग में उच्च शिक्षा विभाग के सहायक अनुभाग अधिकारी श्री लोक नारायण शर्मा प्रथम, सामान्य प्रशासन विभाग के भृत्य श्री राज कुमार सोरी द्वितीय तथा वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्री मेलू राम ध्रुव तृतीय स्थान पर रहे।
तीन माह की विभागीय रैंकिंग में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग प्रथम, गृह विभाग द्वितीय तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तृतीय स्थान पर रहा।
विभागाध्यक्ष और जिला कार्यालय भी सम्मानित
ई-ऑफिस रैंकिंग में विभागाध्यक्ष स्तर पर उच्च शिक्षा विभाग की आयुक्त सुश्री रीता यादव प्रथम, आदिम जाति विकास विभाग के आयुक्त श्री डी. राहुल वेंकट द्वितीय और उच्च शिक्षा विभाग के अपर संचालक श्री जॉन तिग्गा तृतीय स्थान पर रहे। चिकित्सा शिक्षा विभाग के सहायक ग्रेड-3 श्री वेद प्रकाश देवांगन चौथे तथा लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के डाटा एंट्री ऑपरेटर श्री पीताम्बर प्रसाद पांचवें स्थान पर रहे।
ई-ऑफिस जिला कार्यालय रैंकिंग में रायपुर की सहायक परियोजना अधिकारी सुश्री अनिता जैन प्रथम, सक्ती जिला कार्यालय की सहायक सह डाटा एंट्री ऑपरेटर सुश्री नंदनी सोनी द्वितीय और रायपुर जिले के नोडल अधिकारी श्री पंकज कुमार शर्मा तृतीय स्थान पर रहे। सक्ती के ई-जिला तकनीकी प्रबंधक श्री तुलसी देवांगन चौथे तथा कबीरधाम के अधीक्षक श्री राजेन्द्र सिंह धुर्वे पांचवें स्थान पर रहे।
आई-गॉट में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन
आई-गॉट रैंकिंग में आयुक्त कार्यालय बिलासपुर के चौकीदार श्री गौतम कुमार देवांगन प्रथम, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय बलौदाबाजार के व्याख्याता श्री प्रेम नारायण नायक द्वितीय तथा पुलिस अधीक्षक कार्यालय बालोद के आरक्षक श्री दिनेश कुमार तृतीय स्थान पर रहे।
मुख्य सचिव ने कहा कि डिजिटल कार्यप्रणाली और समयबद्ध उपस्थिति में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों का सम्मान अन्य कर्मचारियों को भी बेहतर कार्य के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने सभी विभागों से ई-ऑफिस और आई-गॉट सहित डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग करते हुए शासकीय कार्यों के त्वरित निराकरण की अपेक्षा की।
राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के तहत शिक्षा, प्रशिक्षण, कौशल विकास से लेकर बाजार और अनुसंधान तक पर होगा फोकस
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में तकनीकी वस्त्र (टेक्निकल टेक्सटाइल) क्षेत्र को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्य सचिव श्री विकासशील ने राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के तहत ग्रामोद्योग विभाग एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रदेश में टेक्निकल टेक्सटाइल उद्योग की संभावनाओं को चिन्हित करते हुए व्यापक और ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में रोजगार, उद्यमिता और औद्योगिक विकास की व्यापक संभावनाएं हैं, इसलिए शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास को उद्योग की जरूरतों से जोड़कर आगे बढ़ाया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि तकनीकी वस्त्र क्षेत्र के लिए आवश्यक मानव संसाधन तैयार करने में प्रदेश के शैक्षणिक एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और कौशल विकास से जुड़े संस्थानों से आवश्यक सहयोग लेकर प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण की व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि प्रदेश के युवाओं को इस उभरते क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकें।
एग्रो से मेडिकल और स्मार्ट टेक्सटाइल तक संभावनाओं पर मंथन
बैठक में ग्रामोद्योग विभाग के अधिकारियों ने राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के तहत शिक्षा, प्रशिक्षण, कौशल विकास, बाजार विकास, अनुसंधान, नवाचार एवं विकास से संबंधित विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। इस दौरान प्रदेश में तकनीकी वस्त्र क्षेत्र के विभिन्न संभावित क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में एग्रो टेक्सटाइल, मेडिकल टेक्सटाइल, कंस्ट्रक्शन टेक्सटाइल, स्मार्ट टेक्सटाइल तथा स्पोर्ट्स, होम एवं क्लॉथ टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों और विशेषज्ञों ने इन क्षेत्रों में प्रदेश की मौजूदा क्षमताओं, संभावित बाजार, तकनीकी आवश्यकताओं और कौशल विकास की जरूरतों पर भी चर्चा की।
विशेषज्ञ संस्थानों के सहयोग से तैयार होगी रणनीति
बैठक में ग्रामोद्योग विभाग के सचिव श्री राजेश सिंह राणा सहित उद्योग एवं वाणिज्य, तकनीकी शिक्षा, एनआईटी, कौशल विकास, उच्च शिक्षा एवं विश्वविद्यालयों के तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने तकनीकी वस्त्र क्षेत्र के विकास के लिए उपलब्ध संसाधनों और संस्थागत क्षमताओं का बेहतर उपयोग करने पर अपने सुझाव दिए।
सरकार का जोर ऐसी कार्ययोजना तैयार करने पर है, जिसके माध्यम से तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और बाजार को एक साथ जोड़कर छत्तीसगढ़ को तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में नई पहचान दिलाई जा सके।
स्वसहायता समूह से जुड़कर बदली जिंदगी; किराना दुकान और मुर्गी व्यवसाय से सालाना आय पहुंची 2 से 2.5 लाख रुपये तक
रायपुर / शौर्यपथ / सरकारी योजनाओं का सही उपयोग और मेहनत का जज्बा किसी भी परिवार की आर्थिक तस्वीर बदल सकता है। मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी की श्रीमती सीता मरावी इसकी प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई हैं। कभी सीमित आमदनी में परिवार का भरण-पोषण करने वाली सीता मरावी ने स्वसहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार की राह पकड़ी और आज ‘लखपति दीदी’ बनकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।
25 हजार से किराना दुकान, 50 हजार से शुरू किया मुर्गी व्यवसाय
सीता मरावी वंदना महिला स्वसहायता समूह से जुड़ीं। समूह से प्राप्त सहयोग ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया। बैंक लोन, सीआईएफ एवं आरएफ के माध्यम से प्राप्त 25 हजार रुपये की राशि से उन्होंने गांव में किराना दुकान शुरू की। व्यवसाय को आगे बढ़ाने के बाद समूह के संकुल से 50 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि प्राप्त कर उन्होंने मुर्गी व्यवसाय भी प्रारंभ किया।
दोनों व्यवसायों को उन्होंने मेहनत, लगन और बेहतर प्रबंधन के साथ आगे बढ़ाया। इसका परिणाम यह रहा कि उनकी वार्षिक आय अब लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है। बढ़ी हुई आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने के साथ सीता के भीतर आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की नई ऊर्जा भी पैदा की।
समूह से मिला सहयोग बना जिंदगी का टर्निंग पॉइंट
सीता मरावी बताती हैं कि महिला स्वसहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। समूह से मिले आर्थिक सहयोग, मार्गदर्शन और स्वरोजगार के अवसर ने उन्हें अपनी क्षमता पहचानने का मौका दिया। आज वह स्वयं आर्थिक रूप से सक्षम हैं और अपने गांव की दूसरी महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
सीता को महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि भी प्राप्त हो चुकी है। विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से मिले सहयोग को उन्होंने अपनी मेहनत और सूझबूझ के साथ जोड़कर आर्थिक सशक्तिकरण की राह बनाई है।
‘मेहनत करें तो योजनाएं बनती हैं सहारा’
सीता मरावी के लिए ‘लखपति दीदी’ बनना केवल आय बढ़ने की कहानी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई पहचान है। किराना दुकान और मुर्गी व्यवसाय के माध्यम से उन्होंने यह साबित किया है कि यदि महिलाओं को आर्थिक सहयोग, सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकती हैं।
अपने जीवन में आए इस सकारात्मक बदलाव के लिए श्रीमती सीता मरावी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि स्वसहायता समूह और शासन की योजनाओं से मिले सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता दिया, जिसे उन्होंने अपनी मेहनत से सफलता में बदला।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
