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ईमली पेड़ (दुलसिंह पेट्रोल पंप) के पास पानी निकासी नहीं होने से दुर्घटना का खतरा, स्थायी समाधान की मांग तेज
बरसात में सड़क बनी तालाब, आवागमन हुआ मुश्किल
कांकेर। जिले के सरोना से दुधावा राज्य सड़क मार्ग पर स्थित दुलसिंह पेट्रोल पंप के समीप ईमली पेड़ के पास ढलान वाली सड़क इन दिनों जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रही है। लगातार हो रही बारिश के कारण सड़क पर लगभग एक से दो फीट तक पानी जमा हो गया है। पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण यह स्थान किसी तालाब जैसा दिखाई देने लगा है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों की संख्या में ग्रामीण, किसान, विद्यार्थी, कर्मचारी एवं छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं, लेकिन जलभराव के कारण सभी को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर भरे पानी के कारण वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती, जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है।
पैदल यात्रियों और दोपहिया चालकों पर सबसे अधिक संकट
सड़क पर भरे पानी का सबसे अधिक असर पैदल चलने वालों, साइकिल सवारों और मोटरसाइकिल चालकों पर पड़ रहा है। तेज रफ्तार से गुजरने वाले बड़े वाहनों के कारण पानी के छींटे दूर तक उड़ते हैं, जिससे राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ती है। कई बार जल्दी निकलने की कोशिश में दोपहिया वाहन चालक संतुलन खो बैठते हैं और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थान पर आए दिन वाहन चालकों के बीच पानी उछालने को लेकर विवाद की स्थिति बन जाती है। कई बार कहासुनी हाथापाई तक पहुंच जाती है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना या जनहानि भी हो सकती है।
पानी निकासी मार्ग अवरुद्ध होने से बढ़ी समस्या, स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों और आसपास के लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर जलभराव हो रहा है, उसके आसपास इन दिनों नए भवनों का निर्माण किया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान मिट्टी डालकर प्राकृतिक पानी निकासी मार्ग को बंद कर दिया गया है, जिससे बारिश का पानी सड़क पर ही जमा हो रहा है। यदि पानी के बहाव के लिए पर्याप्त नाली या निकासी मार्ग बनाया जाता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। लोगों का आरोप है कि इस समस्या की जानकारी पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित विभाग को कई बार दी गई, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, रखरखाव की कमी बनी चिंता
यह राज्य सड़क मार्ग लोक निर्माण विभाग के अधीन आता है, लेकिन सड़क के रखरखाव और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग द्वारा ऐसे संवेदनशील स्थानों का सर्वेक्षण नहीं किया जाता, जहां हर वर्ष जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। सूत्रों के अनुसार विभाग में नियमित रूप से सड़क मरम्मत और रखरखाव करने वाले कर्मचारियों एवं मजदूरों की कमी है। यदि पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध होते तो समय-समय पर नालियों की सफाई, पानी निकासी की व्यवस्था और सड़क की मरम्मत कर समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता था। वर्तमान में कई स्थानों पर सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है और अनेक जगह जलभराव से लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
ग्रामीणों ने की स्थायी समाधान की मांग, विभाग और पंचायत से तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा
सरोना क्षेत्र के नागरिकों ने लोक निर्माण विभाग तथा ग्राम पंचायत सरोना से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल अस्थायी रूप से पानी निकाल देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इस स्थान पर वैज्ञानिक ढंग से जल निकासी की स्थायी व्यवस्था, आवश्यकतानुसार नाली अथवा पुलिया का निर्माण तथा सड़क के ढलान का सुधार किया जाना चाहिए। साथ ही जिन निर्माण कार्यों के कारण प्राकृतिक जलनिकासी बाधित हुई है, उनकी भी जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में बरसात के दौरान यह समस्या और गंभीर रूप धारण कर सकती है तथा कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से जनहित को ध्यान में रखते हुए तत्काल निरीक्षण कर शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है।
कांकेर जिले के प्रगतिशील किसान परशुराम साहू प्राकृतिक खेती की बन रहे मिसाल
उत्तर बस्तर कांकेर, / खेती की बढ़ती लागत और मिट्टी की घटती उर्वराशक्ति आज किसानों के सामने बड़ी चुनौती है। ऐसे समय में कृषि विभाग के मार्गदर्शन में विकासखंड चारामा के ग्राम गोलकुमड़ा के प्रगतिशील किसान श्री परशुराम साहू ने हरी खाद (ढैंचा) को अपनाकर यह साबित किया है कि प्राकृतिक तरीकों से भी कम लागत में बेहतर खेती की जा सकती है। उनका यह अनुभव क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है। कृषक श्री साहू ने करीब तीन वर्ष पहले कृषि विभाग के अधिकारियों के सुझाव पर धान की खेती में ढैंचा का उपयोग शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने प्रयोग के तौर पर इसे अपनाया, लेकिन सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद अब वे नियमित रूप से अपनी लगभग 03 एकड़ कृषि भूमि में धान की रोपाई से 40 से 45 दिन पहले ढैंचा की बुवाई करते हैं।
श्री साहू बताते हैं कि ढैंचा की फसल लगभग 35 से 40 दिन में तैयार हो जाती है। इसके बाद ट्रैक्टर या हल की सहायता से इसे खेत में पलटकर मिट्टी में मिला दिया जाता है। कुछ दिनों में यह पूरी तरह विघटित होकर उत्कृष्ट हरी खाद का रूप ले लेती है, जिससे भूमि को प्राकृतिक रूप से आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। वे बताते हैं कि ढैंचा अपनाने के बाद उनके खेत में रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो गई है। पहले जहां अधिक मात्रा में यूरिया एवं अन्य उर्वरकों का उपयोग करना पड़ता था, वहीं अब कम उर्वरक में भी अच्छी फसल मिल रही है। साथ ही उनकी भूमि पहले की तुलना में अधिक भुरभुरी, उपजाऊ और नमी बनाए रखने में सक्षम हो गई है।
विकासखंड चारामा के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री महेश कुमार सोनकर ने बताया कि ढैंचा दलहनी वर्ग की महत्वपूर्ण हरी खाद फसल है। इसकी जड़ों में विकसित होने वाली राइजोबियम जीवाणु ग्रंथियां वायुमंडल से नाइट्रोजन को स्थिर कर मिट्टी में उपलब्ध कराती हैं। एक हेक्टेयर क्षेत्र में तैयार ढैंचा की हरी खाद से भूमि को लगभग 40 से 60 किलोग्राम नाइट्रोजन प्राकृतिक रूप से प्राप्त हो सकती है। इसके साथ ही यह मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाती है, सूक्ष्मजीवों की सक्रियता को प्रोत्साहित करती है, जलधारण क्षमता में सुधार लाती है तथा मिट्टी की संरचना को बेहतर बनाती है। लगातार उपयोग से भूमि की उर्वराशक्ति लंबे समय तक बनी रहती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है।
उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा किसानों को ढैंचा बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक किसान प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती की इस वैज्ञानिक तकनीक को अपनाकर लाभान्वित हो सकें। खरीफ मौसम में धान की रोपाई से पहले ढैंचा की बुवाई कर उसे खेत में पलटने से मिट्टी में पर्याप्त जैविक पदार्थ एवं पोषक तत्व उपलब्ध होते हैं, जिससे धान की प्रारंभिक वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन क्षमता में भी सकारात्मक वृद्धि होती है। श्री परशुराम साहू का कहना है कि यदि किसान धीरे-धीरे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर हरी खाद, जैविक खाद तथा संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन को अपनाएं, तो खेती अधिक लाभकारी बनने के साथ-साथ मिट्टी का स्वास्थ्य भी सुरक्षित रखा जा सकता है। उनका मानना है कि प्राकृतिक खेती केवल लागत कम करने का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि सुरक्षित रखने का भी प्रभावी उपाय है।
कांकेर/ प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की समीक्षा करने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरेश मंडावी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में दुर्गूकोंदल, भानुप्रतापपुर एवं कांकेर विकासखंड के जनपद पंचायत सीईओ, नोडल अधिकारी, ब्लॉक समन्वय एवं अल्प प्रगति वाली ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं सचिव शामिल हुए।
बैठक में आवास पूर्णता की स्थिति की विस्तृत समीक्षा करते हुए जिला पंचायत सीईओ ने सभी लंबित आवासों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने बेहतर कार्ययोजना बनाकर साप्ताहिक लक्ष्य निर्धारित करने, सुदूर क्षेत्रों में 5 से 10 हितग्राहियों द्वारा सामूहिक रूप से निर्माण सामग्री परिवहन कर लागत कम करने तथा अप्रारंभ आवासों को शीघ्र शुरू कराने पर जोर दिया। सीईओ ने निर्देशित किया कि हितग्राहियों से राशि लेकर फरार होने वाले ठेकेदारों एवं मिस्त्रियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही पंचायत प्रतिनिधि, ग्राम के गायता, पटेल एवं समाज प्रमुखों के सहयोग से हितग्राहियों की समस्याओं का समाधान कर उन्हें आवास निर्माण के लिए प्रेरित करें। अप्रारंभ पड़े आवासों को जल्दी प्रारंभ करने तथा ग्राम पंचायत स्तर पर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि ऐसे हितग्राही जो आवास नहीं बना पा रहे हैं उन्हें ग्राम पंचायत स्तर पर आवश्यक मदद कर आवास पूर्ण कराए। साथ ही आवास टीमों को लगातार क्षेत्र भ्रमण करने, खराब प्रगति वाले पंचायतों में विशेष निगरानी रखने तथा लापरवाही बरतने वालों को चेतावनी देकर सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में एपीओ, डीसी सहित विकासखण्ड स्तर के अधिकारी उपस्थित रहे।
गुंडरदेही संवाददाता
बालोद जिला के गुंडरदेही क्षेत्र से एक खबर निकलकर सामने आ रही है यहां एक 37 वर्षीय व्यक्ति ने अपनी ही 12 वर्षीय नाबालिक बेटी को हवस का शिकार बनाया है मामले में मां की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी पिता को गिरफ्तार किया है जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला गुंडरदेही थाना क्षेत्र का है जहाँ एक माँ ने हैवान पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला गुंडरदेही थाना क्षेत्र का है एडिशनल एसपी मोनिका ठाकुर ने बताया कि थाना गुंडरदेही मे रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी नाबालिक पुत्रि के साथ उसके ही पिता द्वारा दुष्कर्म किया गया शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर आरोपी पिता को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है
दुर्ग में देर रात धरना स्थल हटाने की कार्रवाई के बाद फिर जुटे शिक्षक, कांग्रेस नेता अरुण वोरा ने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का लगाया आरोप
दुर्ग। प्रदेशभर में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत अतिथि शिक्षकों और राज्य सरकार के बीच टकराव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। एक ओर स्कूल शिक्षा संचालनालय ने सभी आंदोलनरत अतिथि शिक्षकों को 27 जुलाई तक अपने-अपने विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण करने का अंतिम अवसर (अल्टीमेटम) दिया है, वहीं दूसरी ओर दुर्ग में देर रात प्रशासन द्वारा धरना स्थल हटाने और आंदोलनकारियों को हटाए जाने की कार्रवाई ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग दे दिया है।
देर रात प्रशासन की कार्रवाई, सुबह फिर धरने पर लौटे शिक्षक
जानकारी के अनुसार, बुधवार देर रात जिला प्रशासन और पुलिस ने धरना स्थल पर पहुंचकर वहां लगाए गए टेंट, बैनर और अन्य सामग्री को हटाया। इसके बाद आंदोलनरत अतिथि शिक्षकों को वहां से हटाकर अस्थायी निवास स्थलों तक पहुंचाया गया। हालांकि गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक पुनः धरना स्थल पर पहुंचे और बारिश के बीच अपना आंदोलन जारी रखा।
अरुण वोरा का हमला, बोले— संवाद छोड़ दमन का रास्ता अपनाया गया
पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरुण वोरा ने प्रशासन की कार्रवाई की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि वर्षों से प्रदेश के दूरस्थ, आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने वाले अतिथि शिक्षक अपनी आजीविका और सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी मांगों का समाधान बातचीत और संवेदनशीलता से होना चाहिए था, लेकिन सरकार ने संवाद के बजाय पुलिस बल का सहारा लिया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी आंदोलन का समाधान दमन नहीं, बल्कि सार्थक संवाद और सहमति से निकाला जाना चाहिए।
संचालनालय का स्पष्ट आदेश— 27 जुलाई तक लौटें, अन्यथा सेवा समाप्त
स्कूल शिक्षा संचालनालय द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि नए शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ से ही हड़ताल के कारण सरकारी स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे विद्यार्थियों का शैक्षणिक हित प्रभावित हो रहा है।
आदेश के अनुसार यदि कोई अतिथि शिक्षक 27 जुलाई 2026 तक अपने विद्यालय में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है, तो वर्ष 2019 की अतिथि शिक्षक व्यवस्था के प्रावधानों के तहत उसकी सेवाएं समाप्त मानते हुए संबंधित विद्यालयों में नई नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी। साथ ही सभी जिला शिक्षा अधिकारियों एवं स्कूल प्रबंधन समितियों को भी आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
शिक्षकों का रुख बरकरार
आंदोलनरत अतिथि शिक्षकों का कहना है कि जब तक उनकी लंबित मांगों—नियमितीकरण, सेवा सुरक्षा, वेतनमान और मानदेय वृद्धि—पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के बजाय दबाव की नीति अपना रही है।
शिक्षा व्यवस्था और राजनीति दोनों के लिए अहम मुद्दा
सरकार विद्यार्थियों के हितों का हवाला देकर शिक्षकों से कार्य पर लौटने की अपील कर रही है, जबकि अतिथि शिक्षक अपने भविष्य और रोजगार सुरक्षा की मांग पर अडिग हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश की राजनीति का भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।
शौर्यपथ विश्लेषण
अतिथि शिक्षकों का आंदोलन ब केवल रोजगार का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक निर्णयों और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन की परीक्षा बनता जा रहा है। यदि सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच शीघ्र संवाद स्थापित नहीं हुआ, तो इसका सीधा प्रभाव प्रदेश की सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है।
रविशंकर स्टेडियम परिसर के दुकानदारों को मिली बड़ी राहत, चार माह तक बलपूर्वक कार्रवाई पर रोक; पुनर्वास व वैकल्पिक व्यवस्था पर सुनवाई के बाद ही आगे बढ़ेगा प्रशासन
दुर्ग। अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम निर्माण की दिशा में चल रही जिला प्रशासन की कार्रवाई को उस समय बड़ा झटका लगा, जब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने झम्मन साहू बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए स्टेडियम परिसर के दुकानदारों को बड़ी राहत प्रदान की। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगले चार माह तक किसी भी दुकानदार के खिलाफ बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
यह मामला दुर्ग के रविशंकर स्टेडियम परिसर में वर्षों से व्यवसाय कर रहे दुकानदारों को प्रशासन द्वारा जारी किए गए बेदखली नोटिस से जुड़ा है। जिला प्रशासन ने भवन को जर्जर बताते हुए दुकानों को खाली करने का निर्देश दिया था, जिसके विरोध में झम्मन साहू सहित अन्य दुकानदारों ने हाईकोर्ट की शरण ली।
हाईकोर्ट ने अपनाया संतुलित दृष्टिकोण
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि जर्जर भवन के कारण सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि है और प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है। वहीं न्यायालय ने यह भी स्वीकार किया कि संबंधित दुकानदार वर्षों से यहां व्यवसाय कर रहे हैं तथा उनकी आजीविका पूरी तरह इन दुकानों पर निर्भर है। ऐसे में बिना उचित पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था के बेदखली न्यायसंगत नहीं होगी।
पहले सुनवाई, फिर निर्णय
अपने आदेश में हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि दुकानदारों द्वारा पुनर्वास एवं वैकल्पिक व्यवस्था के संबंध में प्रस्तुत आवेदनों पर विधिसम्मत विचार किया जाए। सभी प्रभावित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए और उसके बाद कारणयुक्त (Speaking Order) आदेश पारित किया जाए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया के पूर्ण होने तक चार माह की अवधि में कोई दमनात्मक या बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई नहीं होगी।
दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी दुकानदारों की
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इस अवधि के दौरान जर्जर भवन में किसी प्रकार की दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी स्वयं संबंधित दुकानदारों की होगी। अर्थात न्यायालय ने राहत के साथ सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारी भी स्पष्ट कर दी है।
स्टेडियम परियोजना की रफ्तार पर असर संभव
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम निर्माण की दिशा में जिला प्रशासन की प्रस्तावित कार्रवाई फिलहाल धीमी पड़ सकती है। अब प्रशासन को सीधे बेदखली की बजाय न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप विधिसम्मत प्रक्रिया अपनानी होगी तथा पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था के मुद्दे पर निर्णय लेने के बाद ही आगे की कार्रवाई संभव होगी।
शौर्यपथ विश्लेषण
हाईकोर्ट का यह आदेश प्रशासनिक कार्रवाई और नागरिकों की आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। न्यायालय ने एक ओर सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से व्यवसाय कर रहे दुकानदारों के पुनर्वास के अधिकार को भी संरक्षण दिया है। आने वाले दिनों में जिला प्रशासन की अगली रणनीति और पुनर्वास संबंधी निर्णय इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।
विधानसभा चुनाव की चर्चाओं के बीच राजनीतिक विश्लेषकों की राय—यदि सक्रिय राजनीति में आना है तो किसी एक दल के साथ स्पष्ट वैचारिक प्रतिबद्धता दिखानी होगी, अन्यथा समाजसेवा की सर्वस्वीकार्य छवि ही सबसे बड़ी पूंजी बनी रहेगी।
शौर्यपथ राजनितिक विश्लेषण
दुर्ग शहर के प्रमुख व्यापारी एवं समाजसेवी इंद्रजीत सिंह 'छोटूÓ इन दिनों एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में हैं। हाल ही में उनके जन्मदिवस का भव्य आयोजन और उसमें विभिन्न क्षेत्रों के लोगों की बड़ी भागीदारी ने यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या वे भविष्य में विधानसभा चुनाव की राजनीति में कदम रख सकते हैं।
प्रदेश की वर्तमान राजनीति पर नजर डालें तो मुकाबला मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सिमटता दिखाई देता है। क्षेत्रीय दलों का प्रभाव लगातार कम हुआ है और मतदाताओं का झुकाव भी दो प्रमुख राष्ट्रीय दलों के इर्द-गिर्द केंद्रित होता जा रहा है। ऐसे राजनीतिक परिदृश्य में यदि कोई नया चेहरा चुनावी राजनीति में उतरना चाहता है, तो उसके लिए केवल लोकप्रिय होना पर्याप्त नहीं, बल्कि किसी एक राजनीतिक विचारधारा के साथ स्पष्ट रूप से खड़ा होना भी आवश्यक माना जाता है।
इंद्रजीत सिंह 'छोटूÓ की सबसे बड़ी ताकत उनकी सामाजिक सक्रियता और जनसंपर्क है। वर्षों से वे विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और जनहित के कार्यों में सक्रिय रहे हैं, जिसके कारण उन्हें लगभग सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और समाज के विभिन्न वर्गों का सम्मान मिलता है। यही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी भी है।
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजसेवा और सक्रिय राजनीति की कार्यशैली अलग-अलग होती है। समाजसेवी सभी वर्गों के बीच समान स्वीकार्यता बनाए रख सकता है, लेकिन राजनीति में अंतत: किसी एक दल, उसकी विचारधारा और संगठन के साथ स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखानी पड़ती है।
वर्तमान समय में भाजपा अपने लंबे समय से कार्य कर रहे संगठनात्मक कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देती रही है। वहीं कांग्रेस को लेकर कभी यह धारणा रही कि वह बाहरी या तथाकथित "हेलीकॉप्टर प्रत्याशियों" को भी अवसर देती है, लेकिन बदलते राजनीतिक माहौल में कांग्रेस संगठन भी अब लंबे समय से संघर्ष कर रहे कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे में किसी भी नए चेहरे के लिए केवल लोकप्रियता के आधार पर टिकट प्राप्त करना पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इंद्रजीत सिंह 'छोटूÓ के समर्थकों की संख्या भी कम नहीं है, लेकिन यह भी एक चर्चा का विषय है कि उनके अधिकांश समर्थक व्यापारी और परिचित वर्ग से जुड़े दिखाई देते हैं जिनकी सामजिक एवं आम जनता से दुरी स्पष्ट नजर आता है । यदि वे भविष्य में राजनीति को अपना लक्ष्य बनाते हैं तो उन्हें ऐसा मजबूत संगठन तैयार करना होगा, जो उनकी अनुपस्थिति में भी आम जनता की समस्याओं को सुने, उनके बीच लगातार सक्रिय रहे और राजनीतिक आधार को मजबूत करे जिनकी आज कमी है ।
राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में अभी पर्याप्त समय शेष है। यदि इंद्रजीत सिंह 'छोटूÓ वास्तव में राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं, तो उन्हें अभी से किसी एक दल और उसकी विचारधारा के प्रति अपना स्पष्ट झुकाव दिखाना होगा। राजनीति में लंबे समय तक दोनों पक्षों के साथ समान दूरी या समान निकटता बनाए रखने की रणनीति अब पहले जैसी प्रभावी नहीं मानी जाती।
दूसरी ओर, यदि वे राजनीति से दूरी बनाकर केवल समाजसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं, तो उनकी निष्पक्ष और सर्वस्वीकार्य छवि और अधिक मजबूत हो सकती है। समाजसेवा के क्षेत्र में उनकी पहचान किसी राजनीतिक सीमा में बंधे बिना लगातार विस्तार पा सकती है और यही उनकी सबसे बड़ी विरासत भी बन सकती है।
अंतत: फैसला इंद्रजीत सिंह 'छोटूÓ को ही करना है कि वे अपनी पहचान एक सफल समाजसेवी के रूप में आगे बढ़ाना चाहते हैं या फिर सक्रिय राजनीति की चुनौतियों को स्वीकार कर किसी राजनीतिक दल के साथ नई पारी शुरू करेंगे। आने वाले समय में उनका निर्णय न केवल उनकी राजनीतिक दिशा तय करेगा, बल्कि दुर्ग की राजनीति में भी नई चर्चाओं को जन्म दे सकता है।
वर्षों से मरम्मत और नए भवन की मांग, लेकिन नहीं मिली राहत
अशोक लुनावत
कांकेर। जिले के सरोना तहसील अंतर्गत ग्राम शामतरा में आंगनबाड़ी भवन एवं स्वास्थ्य केंद्र की जर्जर स्थिति ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। एक ओर आंगनबाड़ी भवन पूरी तरह जर्जर होकर दुर्घटना को आमंत्रण दे रहा है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य केंद्र भी बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है। इसके बावजूद अब तक जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई ठोस पहल नहीं होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से दोनों भवनों की स्थिति खराब बनी हुई है। भवनों की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं, छत भी कमजोर हो गई है और बरसात के दिनों में स्थिति और अधिक भयावह हो जाती है। ऐसे हालात में कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
मासूम बच्चों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा
ग्राम शामतरा के आंगनबाड़ी केंद्र में छोटे-छोटे बच्चे प्रतिदिन शिक्षा और पोषण संबंधी गतिविधियों के लिए पहुंचते हैं। लेकिन जिस भवन में उन्हें बैठाया जाता है, वह पूरी तरह जर्जर हो चुका है। भवन की कमजोर दीवारें और छत बच्चों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं।
अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को आंगनबाड़ी भेजते समय हमेशा चिंता में रहते हैं। यदि समय रहते नया भवन नहीं बनाया गया या पुराने भवन की मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली से इलाज के लिए भटक रहे ग्रामीण
ग्राम शामतरा का स्वास्थ्य केंद्र भी बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है। भवन जर्जर होने के कारण ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई बार मरीजों को असुविधा का सामना करना पड़ता है और उन्हें इलाज के लिए दूसरे गांवों अथवा दूरस्थ स्वास्थ्य केंद्रों का रुख करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति सुधरने से गांव सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में भवन की खराब स्थिति के कारण स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में भी अनेक कठिनाइयां सामने आ रही हैं।
पंचायत ने कई बार दिए आवेदन, लेकिन कार्रवाई अब भी अधूरी
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत द्वारा इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार लिखित आवेदन संबंधित विभागों, जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों को सौंपे जा चुके हैं। आवेदन में आंगनबाड़ी भवन एवं स्वास्थ्य केंद्र की जर्जर स्थिति का उल्लेख करते हुए नए भवन के निर्माण अथवा तत्काल मरम्मत की मांग की गई थी।
इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि केवल आश्वासन ही मिलते रहे, लेकिन धरातल पर कोई कार्य प्रारंभ नहीं हुआ। इससे लोगों में निराशा और असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
हादसे से पहले जागें जिम्मेदार, ग्रामीणों ने की तत्काल निर्माण की मांग
ग्राम शामतरा के लोगों ने जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि आंगनबाड़ी भवन और स्वास्थ्य केंद्र का तत्काल निरीक्षण कराया जाए तथा नए भवन के निर्माण अथवा आवश्यक मरम्मत के लिए शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए।
जिंदल स्टील में ट्रांसपोर्ट का काम दिलाने और पार्टनर बनाने का झांसा देकर लाखों रुपये लेने का आरोप, पुलिस की निष्क्रियता पर कोर्ट ने दिया हस्तक्षेप का आदेश
भिलाई/दुर्ग। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व स्पिनर राजेश चौहान कानूनी विवादों में घिर गए हैं। दुर्ग जिले की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) अदालत ने कथित ₹17.52 लाख की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक विश्वासघात से जुड़े मामले में सुपेला थाना पुलिस को उनके तथा उनके सहयोगी निकेश झा के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर विधि सम्मत कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
यह मामला भिलाई निवासी ठेकेदार उपेन्द्र सिंह द्वारा दायर आवेदन पर सामने आया है। शिकायत के अनुसार आरोपियों ने जिंदल इस्पात लिमिटेड (JSP) में ट्रांसपोर्ट का ठेका दिलाने और अपनी फर्म में 50 प्रतिशत साझेदारी देने का भरोसा दिलाकर लाखों रुपये प्राप्त किए, लेकिन न तो काम दिलाया और न ही राशि वापस की।
वर्ष 2021 से शुरू हुआ पूरा घटनाक्रम
याचिका के अनुसार वर्ष 2021 में उपेन्द्र सिंह की मुलाकात निकेश झा के माध्यम से पूर्व क्रिकेटर राजेश चौहान से हुई। शिकायत में दावा किया गया है कि राजेश चौहान ने अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने और बड़े औद्योगिक संस्थानों में प्रभाव होने का हवाला देकर विश्वास अर्जित किया।
इसके बाद दोनों आरोपियों ने जिंदल इस्पात लिमिटेड में ट्रांसपोर्टिंग का कार्य दिलाने तथा 'आरएन इंटरप्राइजेज' में 50 प्रतिशत साझेदार बनाने का प्रस्ताव रखा। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सुरक्षा राशि और व्यवसाय शुरू करने के नाम पर अलग-अलग किश्तों में ₹17,52,500 बैंक ट्रांसफर एवं चेक के माध्यम से लिए गए।
काम नहीं मिला, लौटाए गए चेक भी हुए बाउंस
शिकायत में कहा गया है कि लंबे समय तक कोई कार्य आवंटित नहीं किया गया। जब शिकायतकर्ता ने अपनी राशि वापस मांगी तो आरोपियों ने भुगतान के लिए कुछ चेक दिए, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर वे पर्याप्त शेष राशि न होने के कारण बाउंस हो गए।
आरोप है कि इसके बाद रकम लौटाने से इनकार कर दिया गया और शिकायतकर्ता को कथित रूप से धमकी भी दी गई।
पुलिस से निराश होकर अदालत पहुंचे पीड़ित
उपेन्द्र सिंह ने पहले सुपेला थाना और दुर्ग पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी। कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने न्यायालय में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत आवेदन प्रस्तुत किया।
अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और चेक बाउंस संबंधी अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद सुपेला थाना पुलिस को आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर विधि अनुसार जांच प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं।
व्यापारिक और खेल जगत में चर्चा
पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर का नाम सामने आने से यह मामला व्यापारिक और खेल जगत में चर्चा का विषय बन गया है। अब पुलिस न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच आगे बढ़ाएगी।
महत्वपूर्ण: यह मामला वर्तमान में न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं और अदालत ने एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण पुलिस जांच और न्यायालय की आगामी कार्यवाही के बाद ही होगा।
दुर्ग/भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट से कथित रूप से पिछले 40 वर्षों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के लोहे की चोरी के आरोपों के बीच एक नया विवाद सामने आया है। इस बार चर्चा का केंद्र कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक वरिष्ठ पत्रकार के सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रकाशित और बाद में हटाई गई पोस्ट बन गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब केवल निष्पक्ष और विधिसम्मत जांच से ही सामने आ सकता है।
भोपाल से प्रकाशित बताए जाने वाले साप्ताहिक समाचार पत्र 'जगत विजन' की एडिटर के रूप में अपना परिचय देने वाली विजया पाठक ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट में भिलाई के प्रतिष्ठित व्यापारी इन्द्रजीत सिंह उर्फ छोटू का नाम लेते हुए उन पर वर्षों से कथित लोहा चोरी सिंडिकेट संचालित करने सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। पोस्ट में पुलिस, भिलाई स्टील प्लांट के अधिकारियों और अन्य प्रभावशाली लोगों की कथित मिलीभगत तक का उल्लेख किया गया था।
यह पोस्ट सोशल मीडिया पर vijaya pathak की पोस्ट पर अभी भी समाचार लिखे जाने तक देखी जा सकती है। पोस्ट को शौर्यपथ की टीम ने उसका स्क्रीनशॉट और वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित कर ली थी, जिससे यह पुष्टि होती है कि उक्त सामग्री वास्तव में संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रकाशित हुई है।
रिकेश सेन लगातार उठा रहे हैं 10 हजार करोड़ के कथित घोटाले का मुद्दा
उल्लेखनीय है कि वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन पिछले कई दिनों से अपने सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए भिलाई स्टील प्लांट में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के कथित लोहा चोरी प्रकरण को लगातार उठा रहे हैं। उन्होंने विभिन्न पोस्ट में बड़े खुलासे, जिम्मेदार लोगों के नाम सामने आने, केंद्रीय एजेंसियों को कार्रवाई के निर्देश दिलाने तथा विधानसभा में मामला उठाने जैसी बातें कही हैं।
हालांकि अब तक विधायक ने किसी भी व्यक्ति विशेष का नाम सार्वजनिक रूप से नहीं लिया है। राजनीतिक और संवैधानिक मर्यादाओं को देखते हुए उनका यह रुख समझा जा सकता है, लेकिन लगातार संकेतों और दावों के बीच नाम सामने न आने से जनमानस में संशय की स्थिति भी बनी हुई है।
मुख्यमंत्री ने भी नहीं दिया था स्पष्ट जवाब
इसी मुद्दे पर जब प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मीडिया ने सवाल किया था, तब उन्होंने इस विषय पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की थी। ऐसे में मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
पोस्ट के बाद उठे कई महत्वपूर्ण सवाल
सोशल मीडिया पर हुए पोस्ट के बाद हिसार में एक बार फिर चर्चा का विषय है कि क्या मामले की जांच की दिशा अब आगे बढ़ेगी या फिर सोशल मीडिया में हुए पोस्ट को हटाने का दबाव बनाया जाएगा?
यह पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और उसके संभावित दुरुपयोग पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। बिना न्यायिक निष्कर्ष या आधिकारिक पुष्टि के किसी व्यक्ति का नाम सार्वजनिक कर देना उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकता है। वहीं यदि आरोप सही हैं, तो संबंधित एजेंसियों द्वारा निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक है।
दोनों परिस्थितियों में जांच जरूरी
यह मामला अब केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रह गया है। निष्पक्षता की दृष्टि से दोनों संभावनाओं की समान रूप से जांच होनी चाहिए—
यदि पोस्ट में लगाए गए आरोप प्रमाणित और तथ्यों पर आधारित हैं, तो पूरे कथित लोहा चोरी नेटवर्क की गहन जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
यदि आरोप निराधार या अपुष्ट थे, तो किसी प्रतिष्ठित नागरिक की छवि को नुकसान पहुंचाने के प्रयास की भी विधिसम्मत जांच होनी चाहिए तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब निगाहें आगे की कार्रवाई पर
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इन्द्रजीत सिंह उर्फ छोटू इस मामले में कानूनी कार्रवाई करते हुए शिकायत दर्ज कराएंगे और पोस्ट के पीछे के तथ्यों की जांच की मांग करेंगे, अथवा इस पूरे विवाद को नजरअंदाज करने का रास्ता अपनाएंगे।
वहीं दूसरी ओर, भिलाई स्टील प्लांट में कथित 10 हजार करोड़ रुपये के लोहा चोरी प्रकरण को लगातार उठा रहे वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन से भी अब यह अपेक्षा बढ़ गई है कि यदि उनके पास इस संबंध में ठोस तथ्य और साक्ष्य हैं तो उन्हें उचित मंच पर सार्वजनिक करें, ताकि आरोप, संकेत और अटकलों की जगह सत्य सामने आ सके।
(नोट : यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्ट, उसके स्क्रीनशॉट तथा विभिन्न सार्वजनिक बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें वर्णित आरोप संबंधित पोस्ट और सार्वजनिक दावों का उल्लेख हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध दोष सिद्ध होना शेष है।)
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
