August 03, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    दुर्ग / शौर्यपथ / पटरी पार औद्योगिक नगर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही नशाखोरी और आपराधिक गतिविधियों को लेकर नगर पालिका निगम दुर्ग के पार्षद देवनारायण चंद्राकर ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने क्षेत्र में सघन पुलिस गश्त बढ़ाने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए आवेदन सौंपा।
    लोक कर्म विभाग प्रभारी देवनारायण चंद्राकर ने बताया कि मोहन नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत पटरी पार के शक्ति नगर, शांति नगर, सिकोला भाटा, सिकोला बस्ती, कैलाश नगर चरला सहित कई वार्डों में गांजा, नशीली दवाओं और अवैध शराब का कारोबार बढ़ता जा रहा है। इससे युवा वर्ग और स्कूल जाने वाले बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं।
    उन्होंने कहा कि शक्ति नगर तालाब के आसपास शाम से देर रात तक नशाखोरी और जुआ का जमावड़ा लगा रहता है। नियमित पुलिस गश्त नहीं होने से असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं, जिससे क्षेत्र में अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं। हाल के दिनों में शक्ति नगर और शांति नगर में हुई गंभीर वारदातों के कारण आम नागरिकों में दहशत और असुरक्षा का माहौल है।
    पार्षद ने एसएसपी से मांग की है कि क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर अवैध नशे के कारोबार पर सख्त कार्रवाई की जाए और नियमित गश्त सुनिश्चित कर आम जनता को सुरक्षा का भरोसा दिलाया जाए।

    पवित्र जैतखाम की पूजा-अर्चना और गुरु घासीदास बाबा का पुण्य स्मरण कर प्रदेशवासियों की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की

      रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के मोवा स्थित सतनाम भवन परिसर से "विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा" का शुभारंभ किया। उन्होंने धार्मिक विधि-विधान के साथ पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर पावन गिरौदपुरी धाम के लिए रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पवित्र जैतखाम की पूजा-अर्चना कर गुरु घासीदास बाबा का पुण्य स्मरण किया तथा प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
    मुख्यमंत्री श्री साय ने पदयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं और सामाजिक बंधुओं से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि गुरु घासीदास बाबा का "मनखे-मनखे एक समान" का संदेश संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पदयात्रा समाज में सद्भावना, समरसता और भाईचारे को और सुदृढ़ करेगी। श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार समाज के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा सामाजिक हितों को गति देने हेतु विशेष प्राधिकरण का गठन भी किया गया है। पदयात्रा के उपरांत विशाल मेले के आयोजन की जानकारी भी उन्होंने दी।
    कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि यह पदयात्रा सामाजिक समरसता, मानव कल्याण और एकता के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। उन्होंने सभी से सामाजिक भेदभाव और द्वेष से ऊपर उठकर राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढऩे का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा गुरु घासीदास बाबा के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाएगी।
    कार्यक्रम में धर्मगुरु गुरु श्री बालदास साहेब, विधायक श्री ललित चंद्राकर, विधायक श्री मोतीलाल साहू, फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, छत्तीसगढ़ रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रहलाद रजक, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, संत समाज के प्रतिनिधि एवं सर्व समाज के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
    गौरतलब है कि रायपुर से गिरौदपुरी धाम तक प्रस्तावित "विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा" का आयोजन 18 से 22 फरवरी 2026 तक किया जाएगा। पदयात्रा का उद्देश्य सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारा और सद्भाव का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है। इस दौरान गिरौदपुरी धाम मेले में विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए

    युवाओं को लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा—मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
    सीडीएस में ऑल इंडिया चौथी रैंक, मुंगेली की सुप्रिया बनी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट

    रायपुर / शौर्यपथ /
    छत्तीसगढ़ के लिए गौरव के क्षण में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन स्थित अपने कार्यालय में सीडीएस परीक्षा में ऑल इंडिया चौथी रैंक प्राप्त करने वाली मुंगेली की सुश्री सुप्रिया सिंह श्रीनेत को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने सुप्रिया एवं उनके परिजनों को पुष्पगुच्छ भेंट कर बधाई दी, मुँह मीठा कराया और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं। इस अवसर पर मुंगेली कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार भी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुप्रिया की सफलता यह सिद्ध करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास ईमानदार हों, तो साधारण परिवेश से आने वाला युवा भी असाधारण उपलब्धि हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा कि अनुशासन, परिश्रम और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण सुप्रिया को विशिष्ट बनाता है और राज्य के युवाओं को उनसे प्रेरणा लेकर अपने लक्ष्य की दिशा में निरंतर आगे बढऩा चाहिए।

    ग्रामीण अंचल की बेटी ने रचा राष्ट्रीय सफलता का इतिहास

    उल्लेखनीय है कि ग्राम टेढ़ाधौंरा, जिला मुंगेली की 23 वर्षीय सुप्रिया सिंह श्रीनेत ने सीडीएस परीक्षा में देशभर में चौथा स्थान प्राप्त कर न केवल अपने जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर हुआ है।

    साधारण परिवेश, असाधारण संकल्प

    सुप्रिया एक किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता श्री वैदेही शरण सिंह एवं माता श्रीमती संतोषी सिंह श्रीनेत ने उन्हें शिक्षा और संस्कारों का मजबूत आधार प्रदान किया। सुप्रिया ने प्रारंभिक शिक्षा सेंट जोसेफ हायर सेकेंडरी स्कूल से प्राप्त की। उन्होंने कक्षा 10वीं में 71 प्रतिशत तथा 12वीं में 58 प्रतिशत अंक अर्जित किए। इसके पश्चात उन्होंने बी.टेक (इलेक्ट्रॉनिक एंड टेलीकम्युनिकेशन) में स्नातक की डिग्री हासिल की।

    इंजीनियरिंग अध्ययन के दौरान ही सुप्रिया ने एनसीसी से जुड़कर नेतृत्व, अनुशासन और साहस के गुण विकसित किए तथा जूनियर अंडर ऑफिसर के पद तक पहुँचीं। यहीं से उनके भीतर भारतीय सेना में अधिकारी बनने का संकल्प दृढ़ हुआ।

    कठिन परिश्रम का सुनहरा परिणाम

    वर्ष 2023 में इंजीनियरिंग पूर्ण करने के बाद सुप्रिया ने पूरी एकाग्रता और अनुशासन के साथ सीडीएस परीक्षा की तैयारी की। निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने शॉर्ट सर्विस कमिशन के अंतर्गत आयोजित एसएसबी साक्षात्कार में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया चौथी रैंक प्राप्त की।

    उनकी यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण अंचल की बेटियों के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है। पढ़ाई और सैन्य उपलब्धियों के साथ-साथ सुप्रिया सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रही हैं। नृत्य उनकी विशेष रुचि है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलन और ऊर्जा प्रदान करता है।

    प्रदेश के लिए गर्व की उपलब्धि

    सुप्रिया सिंह श्रीनेत की यह उपलब्धि मुंगेली जिले के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और मेहनत से किसी भी सपने को साकार किया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय दायित्व को पूरी गंभीरता, सटीकता और संवेदनशीलता के साथ निभाने का किया आह्वान

    छत्तीसगढ़ राज्य व संभाग स्तरीय अधिकारियों का प्रशिक्षण सम्मेलन आयोजित

    रायपुर /भारत की जनगणना-2027 के सफल संचालन के लिए आयोजित राज्य एवं संभाग स्तरीय अधिकारियों के प्रशिक्षण सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, कलेक्टरों एवं प्रशासनिक अधिकारियों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व को पूरी गंभीरता, सटीकता और संवेदनशीलता के साथ निभाने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 की जनगणना स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी। जनगणना प्रशासन की विश्वसनीयता और शासन की पारदर्शिता की परीक्षा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आंकड़े अधूरे या त्रुटिपूर्ण होंगे तो विकास योजनाओं का लक्ष्य प्रभावित होगा। एक भी व्यक्ति या परिवार छूटना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे विकास की प्रक्रिया अधूरी रह सकती है। उन्होंने बताया कि जनगणना-2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी। मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से डेटा संकलन किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी होगी। छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 1 मई से 30 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा। यह कार्य प्रदेश के 33 जिलों, 252 तहसीलों और 19,978 गाँवों में संपन्न किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व-गणना की सुविधा से जनभागीदारी बढ़ेगी और जनता का विश्वास ही जनगणना की सफलता का आधार है। यह कार्य विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत-2047 की नींव रखने वाला सिद्ध होगा। प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कहा कि जनगणना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें तथ्यों का व्यवस्थित एवं प्रमाणिक संकलन किया जाता है। उन्होंने अधिकारियों से सभी निर्धारित कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए।

    मुख्य सचिव ने प्रगणकों के प्रशिक्षण में सपोर्टिव सुपरविजन की तकनीक अपनाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि मैदानी स्तर पर कार्य करने वाले कर्मियों को निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग मिलना चाहिए, जिससे त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हो। उन्होंने नई भवन अनुज्ञाओं को पूर्व से ही ट्रेस करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि मकान सूचीकरण के दौरान कोई संरचना छूट न जाए। साथ ही सीमावर्ती जिलों के संदर्भ में उन्होंने स्वयं के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा की अन्य राज्यों में चले गए व्यक्तियों की गणना में दोहराव से बचने के लिए विशेष सावधानी बरती जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि जनगणना की सफलता सूक्ष्म योजना, समन्वय और सटीक क्रियान्वयन पर निर्भर करती है, इसलिए सभी अधिकारी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ इस राष्ट्रीय दायित्व का निर्वहन करे।

    इस अवसर पर भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त श्री मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक एवं सांख्यिकीय कार्यों में से एक है। यह हमारे लोकतंत्र की आधारशिला है और नीति-निर्माण व विकास योजनाओं की दिशा तय करती है। उन्होंने बताया कि भारत में पहली संगठित जनगणना वर्ष 1872 में प्रारंभ हुई थी और आगामी जनगणना देश की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी।
    उन्होंने कहा कि 150 वर्षों की परंपरा वाली भारतीय जनगणना गाँव, कस्बा और वार्ड स्तर तक प्राथमिक आँकड़ों का सबसे बड़ा स्रोत है। इसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएँ, परिसंपत्तियाँ, जनसांख्यिकीय विवरण, धर्म, अनुसूचित जाति-जनजाति, भाषा, शिक्षा, आर्थिक गतिविधि, प्रव्रजन एवं प्रजनन से संबंधित सूक्ष्म एवं विश्वसनीय आँकड़े संकलित किए जाते हैं।

    गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज पिंगुआ ने कलेक्टरों को जनगणना-2027 से संबंधित कार्य के बारे में विस्तार से दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, छत्तीसगढ़ राज्य जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने जनगणना 2027 के संबंध में आधारभूत जानकारी दी। राज्य स्तरीय संभागायुक्त-कलेक्टर सम्मेलन में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, सभी संभागायुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त एवं अन्य अधिकारी व जनगणना निदेशालय के अधिकारी उपस्थित थे।

      रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज महानदी भवन में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन छत्तीसगढ़ स्टेट के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।इस दौरान डॉक्टरों ने 7 व 8 मार्च 2026 राजधानी रायपुर में स्थित श्री बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में "आईएमए सीजीकॉन 2026" 21 वां स्टेट कॉन्फ्रेंस का न्यौता दिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए अग्रिम बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

    इस अवसर पर आईएमए छत्तीसगढ़ राज्य शाखा अध्यक्ष एवं चेयरमेन डॉ अनूप वर्मा,अध्यक्ष हॉस्पिटल बोर्ड डॉ सुरेंद्र शुक्ला,आईएमए सचिव डॉ संजीव श्रीवास्तव, डॉ गंभीर सिंह उपस्थित थे।

    घर में आया जल-जीवन, चौघड़ा गांव में जल क्रांति की कहानी

    रायपुर / जल जीवन मिशन के माध्यम से भारत के प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध करना है, ताकि सभी घरों, स्कूलों और आंगनवाडी केन्द्रों तक नल से पानी पहुंच सके।इसी परिप्रक्ष्य में ग्रामीण जीवन में बदलाव की एक प्रेरक और सशक्त कहानी ग्राम पंचायत चौघड़ा के लोहारपारा से सामने आई है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला के विकासखंड मनेन्द्रगढ़ की निवासी दीपा के लिए स्वच्छ पेयजल कभी एक सपना हुआ करता था, जिसे पूरा करने के लिए रोज़ाना लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। घर से दूर स्थित कुएँ से पानी लाने में उनका काफी समय और मेहनत खर्च हो जाता था, जिससे दैनिक जीवन के अन्य कार्य प्रभावित होते थे।

    हर घर नल से जल योजना के लागू होने के बाद दीपा और उनके परिवार का जीवन पूरी तरह बदल गया है। अब उनके घर पर ही शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध है। पानी के लिए भटकने की मजबूरी खत्म हो गई है और समय की बचत होने से दीपा अब परिवार, बच्चों और अन्य घरेलू कार्यों पर बेहतर ध्यान दे पा रही हैं। सबसे बड़ा बदलाव स्वास्थ्य के क्षेत्र में देखने को मिला है, जहां स्वच्छ पानी के कारण परिवार की सेहत में स्पष्ट सुधार हुआ है। दीपा बताती हैं कि नल से जल मिलने के बाद जीवन में सुविधा, सम्मान और सुरक्षा का एहसास बढ़ा है। उन्होंने इस जनकल्याणकारी योजना के लिए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना केवल पानी नहीं, बल्कि बेहतर जीवन की गारंटी लेकर आई है। उनके शब्दों में यह पहल हमारे जीवन को ही नहीं, बल्कि पूरे गांव के भविष्य को बदल रही है।

    जल जीवन मिशन की यह पहल आज ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सुधार का सशक्त उदाहरण बन चुकी है। चौघड़ा गांव की दीपा की कहानी यह साबित करती है कि जब योजनाएं ज़मीन पर उतरती हैं, तो वे सिर्फ नल से पानी नहीं, बल्कि लोगों की ज़िंदगी में खुशहाली और आत्मसम्मान भी पहुंचाती हैं।

    रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा की पूज्य माता स्वर्गीय श्रीमती कुसुम सिन्हा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने बिलासपुर के बोदरी स्थित मुख्य न्यायाधीश निवास में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में पहुंचकर श्रीमती कुसुम सिन्हा के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित किए और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। उन्होंने शोक संतप्त परिवारजनों से मुलाकात कर उन्हें ढाढ़स बंधाया और कहा कि माता जी का स्नेह, संस्कार और त्याग जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उनका सरल, स्नेहमयी और अनुपम स्वभाव सदैव स्मरणीय रहेगा।

    इस अवसर पर केंद्रीय शहरी विकास राज्य मंत्री एवं सांसद श्री तोखन साहू, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, पूर्व राज्यपाल श्री रमेश बैस, विधायक श्री सुशांत शुक्ला ने भी श्रद्धांजलि अर्पित कर शोक संवेदना व्यक्त की। कार्यक्रम में उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीशगण, अधिवक्तागण, महाधिवक्ता कार्यालय के अधिकारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

    35 अभ्यर्थियों की अर्हता जांच के लिए उच्च स्तरीय विषय-विशेषज्ञ समिति गठित

    रायपुर, /
    राज्य में प्राध्यापक (उच्च शिक्षा) परीक्षा–2021 के अंतर्गत 595 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया को तेज करते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने उच्च स्तरीय विषय-विशेषज्ञ समिति का गठन कर दिया है। यह समिति अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत शैक्षणिक दस्तावेजों और प्रमाण-पत्रों की गहन जांच कर अंतिम पात्रता निर्धारण करेगी।
    ज्ञात हो इससे पहले 11 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र प्रेषित कर 35 अभ्यर्थियों की शैक्षणिक अर्हताओं की विस्तृत जांच के लिए विषय-विशेषज्ञ समिति गठित करने का अनुरोध किया था। आयोग ने 4 दिसंबर 2025 को आयोजित बैठक में
    निर्णय लिया था कि दस्तावेज सत्यापन के दौरान उत्कृष्ट प्राध्यापक पद के लिए आवेदन करने वाले इन अभ्यर्थियों के अभिलेखों का विशेषज्ञ स्तर पर परीक्षण आवश्यक है।
    मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर से जारी आदेश के अनुसार, चयन प्रक्रिया को यूजीसी विनियम 2018 के तहत निर्धारित अर्हताओं के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है। विज्ञापन की कंडिका 6 (2) (iv) (ख) के विशेष संदर्भ में विभिन्न विषयों के अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जाएगी। गठित समिति में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ प्राध्यापकों को शामिल किया गया है। समिति के संयोजक के रूप में निदेशक, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रोफेसर ओम प्रकाश व्यास को नियुक्त किया गया है। इसी तरह सदस्य के रूप में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष जैविक विज्ञान विभाग डॉ.एस.एस.सन्धु, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष वाणिज्य विभाग के डॉ.पवन मिश्रा, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष गणित विभाग के डॉ. अवनीश कुमार,अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रींवा के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र विभाग के डॉ. एन. पी.पाठक,रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान के डॉ. विवेक मिश्रा तथा आरटीएम नागपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष रसायनशास्त्र विभाग के डॉ. नंद किशोर कराडे को शामिल किए गए हैं।
    उच्च शिक्षा विभाग की इस पहल को भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। समिति द्वारा परीक्षण उपरांत योग्य अभ्यर्थियों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा, जिससे राज्य के महाविद्यालयों में रिक्त पद शीघ्र भरे जा सकें और शैक्षणिक गतिविधियों को नई गति मिल सके।

     

     रायपुर / प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को लेकर आज 18 फरवरी को प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन द्वारा जिला स्तरीय जांच दल से विस्तृत भौतिक सत्यापन कराया गया। जांच रिपोर्ट में कई तथ्य भ्रामक एवं अपूर्ण जानकारी पर आधारित पाए गए हैं। उपायुक्त, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, छत्तीसगढ़ ने स्पष्ट किया है कि अधिकांश मामलों में भुगतान नियमानुसार हुआ है और निर्माण कार्य प्रगति पर है।

    महासमुंद - 12 हजार से ज्यादा किश्त अटकी होने का दावा गलत

    खबर में बागबाहरा जनपद में 12,366 हितग्राहियों की दूसरी किश्त अटकी होने और केवल 25 हजार रुपए पहली किश्त दिए जाने का उल्लेख किया गया है, जबकि जांच में सामने आया कि योजना शुरू होने से अब तक जनपद पंचायत बागबाहरा में 22,910 आवास स्वीकृत हुए हैं। इनमें से 19,411 मकान पूर्ण हो चुके हैं। शेष 3,499 आवास निर्माणाधीन हैं। प्रशासन के मुताबिक किश्तों का भुगतान निर्माण कार्य की प्रगति के अनुसार किया जा रहा है।

    गरियाबंद - जिन घरों को अधूरा बताया, वे निर्माणाधीन

    ग्राम तुहामेटा में झुलवती के नाम पर प्रधानमंत्री जनमन योजना अंतर्गत वर्ष 2023-24 में स्वीकृत आवास में दो किश्तों में एक लाख रुपए जारी किए जा चुके हैं। जांच में पाया गया कि छत ढलाई का कार्य पूरा है। हितग्राही श्रीमती झूलबती के निधन के बाद उनके पति श्री पीलाराम को उत्तराधिकारी के रूप में पोर्टल में दर्ज किया गया है, जो कि पीएफएमएस में लंबित है।

    इसी तरह राजापड़ाव क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत अडगडी में सुगारो के नाम से वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास स्वीकृत है। 40 हजार रुपए की पहली किश्त जारी हो चुकी है। मकान प्लिंथ स्तर पर है और दूसरी किश्त के लिए जियो-टैगिंग पूरी कर ली गई है।

    ग्राम पंचायत जाड़ापदर में हिरमनी बंजारा के पिता खेतुराम बंजारा के नाम से वर्ष 2024-25 में आवास स्वीकृत है। दो किश्तों में 95 हजार रुपए जमा किए जा चुके हैं। मकान चौखट स्तर तक बन चुका है। जांच में फर्जी भुगतान का आरोप सही नहीं पाया गया।

    जांच रिपोर्ट में इस बात स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि लफंदी में मनरेगा मजदूरी में गड़बड़ी नहीं मिली है। फिंगेश्वर ब्लॉक के लफंदी गांव में मनरेगा मजदूरी में 4 लाख रुपए की कथित गड़बड़ी की शिकायत की भी गहन जांच की गई। मस्टररोल, मांगपत्र और सहमति पत्रों का परीक्षण किया गया। प्रशासन के अनुसार श्रमिकों को नियमानुसार भुगतान हुआ है और किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता का प्रमाण नहीं मिला है।

    सामूहिक गृह प्रवेश पर भी स्पष्टीकरण

    गरियाबंद जिले के मैनपुर जनपद में 3817 घरों को कागजों में पूर्ण दिखाने और सामूहिक गृह प्रवेश कराने के आरोपों की भी जांच की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन आवासों को पूर्ण दर्शाया गया है, वे निर्धारित मानकों के अनुरूप विभिन्न स्तरों पर पूर्ण पाए गए। जियो-टैगिंग और ऑनलाइन मॉनिटरिंग की प्रक्रिया अपनाई गई है।

    उपायुक्त प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण छत्तीसगढ़ का कहना है कि योजना में भुगतान सीधे लाभार्थियों के खातों में ऑनलाइन माध्यम से किया जाता है। निर्माण की प्रगति जियो-टैगिंग के जरिए मॉनिटर होती है। शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रकाशित समाचार के कई बिंदु अपूर्ण तथ्यों पर आधारित हैं और आमजन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर सकते हैं। योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को सुरक्षित पक्की छत उपलब्ध कराना है और इसके क्रियान्वयन में हर स्तर पर पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है।

    नई दिल्ली / एजेंसी /
    राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (16 फरवरी, 2026) नई दिल्ली में संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित अलचिकि लिपि के शताब्दी महोत्सव का उद्घाटन किया।
    इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि संताल समुदाय की अपनी भाषा, साहित्य और संस्कृति है। हालांकि, अपनी लिपि के अभाव में संताली भाषा को प्रारंभ में रोमन, देवनागरी, उड़िया और बंगाली लिपियों में लिखा जाता था। नेपाल, भूटान और मॉरीशस में रहने वाले संताल समुदाय के लोग भी वहाँ प्रचलित लिपियों का उपयोग करते थे। ये लिपियां संताली भाषा के मूल शब्दों का सही उच्चारण सही तरीके से नहीं कर पा रही थीं. साल 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मु ने अलचिकि लिपि का आविष्कार किया। तब से यह संताली भाषा के लिए उपयोग में लाई जा रही है। आज यह लिपि विश्वभर में संताल पहचान का सशक्त प्रतीक बन चुकी है और समुदाय में एकता स्थापित करने का प्रभावी माध्यम भी है।
    राष्ट्रपति ने कहा कि अलचिकि की शताब्दी समारोह इस लिपि के व्यापक प्रचार-प्रसार का संकल्प लेने का अवसर होना चाहिए। बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी, उड़िया, बंगाली या किसी अन्य भाषा में शिक्षा मिल सकती है, लेकिन उन्हें अपनी मातृभाषा संताली भी अलचिकि लिपि में सीखनी चाहिए।

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    राष्ट्रपति ने खुशी जाहिर की कि अनेक लेखक अपने साहित्यिक कार्यों से संताली साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं। उन्होंने लेखकों को अपने लेखन के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने की सलाह दी।

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    राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अनेक भाषाओं का उपवन है। भाषा और साहित्य समुदायों के भीतर एकता को बनाए रखने वाले सूत्र हैं। साहित्य के आदान-प्रदान से भाषाएं समृद्ध होती हैं। संताली साहित्य को अन्य भाषाओं के विद्यार्थियों तक अनुवाद और लेखन के माध्यम से पहुंचाने तथा अन्य भाषाओं के साहित्य को संताली में उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाने चाहिए।
    इस अवसर पर राष्ट्रपति ने अलचिकि लिपि के 100 वर्ष पूरे होने पर स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया। साथ ही, संताल समुदाय के 10 विशिष्ट व्यक्तियों को संताली लोगों के बीच अलचिकि लिपि के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित किया।

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