August 03, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

       भिलाई निगम / शौर्यपथ / कैलाश नगर, मानसरोवर मंदिर के समीप स्थित खसरा नंबर 1591, 1592 एवं 1593, जो लंबे समय से शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है, को बचाने के लिए स्थानीय नागरिकों ने बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया। वर्ष 2023 में पार्षद नेहा साहू की पहल पर इस भूमि पर सामुदायिक भवन निर्माण हेतु नगर निगम भिलाई द्वारा निविदा जारी की गई थी, परंतु शासन परिवर्तन के बाद निविदा निरस्त हो गई।

    भूमि पर कब्जे के लगातार प्रयास

    भूमि लंबे समय से खाली होने के कारण भू-माफियाओं की नजर बनी हुई थी। इसी क्रम में आशा वैष्णव द्वारा अपने निजी खसरों (1588 और 1590/1) का सीमांकन शासकीय भूमि पर करवाने का प्रयास किया गया। मोहल्लेवासियों एवं पार्षद नेहा साहू ने स्थल पंचनामा में इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई, क्योंकि बिना मूल दस्तावेज और रजिस्ट्री के शासकीय भूमि पर सीमांकन किया जा रहा था।
    लगातार शिकायतों के बाद नगर निगम आयुक्त एवं अतिरिक्त तहसीलदार को भूमि संरक्षण हेतु आवेदन किया गया, जिसके आधार पर राजस्व प्रकरण दर्ज कर टीम गठित की गई। सीमांकन प्रक्रिया कई बार भू-माफियाओं के हस्तक्षेप के कारण बाधित होती रही और महीनों तक प्रकरण लंबित रहा।

    शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा

    18 नवंबर 2025 को सुनील कश्यप एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा संपूर्ण भूमि पर पोल, प्री-कास्ट दीवार और कैमरा लगाकर कब्जा कर लिया गया। जब मोहल्लेवासियों ने इसका विरोध किया तो सुनील कश्यप ने दावा किया कि उसने यह जमीन आशा वैष्णव से खरीदी है। इसकी शिकायत पार्षद नेहा साहू ने नगर निगम, तहसीलदार, एसडीएम दुर्ग और कलेक्टर को दी, परन्तु तत्काल कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच भू-माफियाओं द्वारा अवैध प्लॉटिंग भी शुरू कर दी गई।

    01 दिसंबर से अनिश्चितकालीन धरना

    प्रकरण में विलंब व लगातार कब्जों के विरोध में पार्षद नेहा साहू तथा मोहल्लेवासी 01 दिसंबर 2025 से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। इसी दिन तहसीलदार भिलाई ने आशा वैष्णव को काम रोकने और शासकीय भूमि सीमांकन का आदेश जारी किया।

    सीमांकन में 80% भूमि शासकीय पाई गई

    दो दिन चली सीमांकन प्रक्रिया में कब्जाई गई भूमि का करीब 80% हिस्सा शासकीय पाया गया।
    जांच टीम ने बताया कि निजी खसरा 1590/1 का चिन्हांकन भी आवश्यक है। सीमांकन के बाद लगभग 28–30 घर शासकीय भूमि पर निर्मित पाए गए, जिनमें से आधे से अधिक घरों को आशा वैष्णव या उनके पिता द्वारा बेचा गया था। शेष घर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से अनुमोदित पाए गए।

    छह दिन बाद प्रशासन से वार्ता

    लगातार छह दिनों के धरने के बाद 06 दिसंबर 2025 की शाम को तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, जामुल थाना प्रभारी व टीम धरनास्थल पहुंचे। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि शासकीय भूमि को सुरक्षित किया जाएगा। निजी खसरों की स्थिति स्पष्ट होने तक क्षेत्र की वर्तमान स्थिति यथावत रखी जाएगी।

    धरना समाप्त

    संतोषजनक चर्चा के बाद पार्षद नेहा साहू एवं मोहल्लेवासियों ने धरना समाप्त करने की घोषणा की और जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन तथा मीडिया का आभार व्यक्त किया।

    bhilai / shouryapath / 06 दिसंबर 2025 को सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के कोक ओवन एवं कोल केमिकल विभाग के सभागार में मुख्य महाप्रबंधक (कोक ओवन) तुलाराम बेहरा के मुख्य आतिथ्य में राजभाषा के प्रगामी प्रयोग को बढ़ावा देने तथा भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा निर्धारित नीतियों के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया।

    मुख्य अतिथि तुलाराम बेहरा ने उद्बोधन में कहा कि कार्यक्षेत्र में वार्तालाप हिंदी में करने से संवाद सरल बनता है। कंप्यूटर, दस्तावेजों एवं रजिस्टरों में हिंदी में लेखन आज की आवश्यकता है। राजभाषा नीति के अनुसार पत्राचार एवं कार्यालयीन कार्य हिंदी में किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें शत-प्रतिशत कार्य हिंदी में करने की दिशा में प्रयासरत रहना चाहिए। हिंदी हमारे समग्र निष्पादन को भी बेहतर बनाती है।

    महाप्रबंधक एवं विभागीय हिंदी समन्वय अधिकारी एम.एस. नायडू ने विभाग द्वारा हिंदी के क्षेत्र में की जा रही पहलों, विशेष कार्यों तथा संयंत्र स्तरीय प्रतियोगिताओं के विजेताओं की जानकारी दी। विभागीय प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि विभाग में राजभाषा के सांविधिक प्रावधानों का पालन किया जाता है तथा अधिकारियों के सभी नामपट्ट और रबर स्टाम्प द्विभाषी हैं।

    कार्यक्रम में राजभाषा विभाग द्वारा सामान्य ज्ञान आधारित एक रोचक प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें एम.एस. नायडू, विजेन्द्र कुमार वर्मा और हेमराज क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार विजेता रहे। प्रोत्साहन पुरस्कार मधुसूदन नायक (महाप्रबंधक–प्रभारी सीआरजी), देवेन्द्र कुमार सोनी (इंजीनियरिंग एसोसिएट) और डी. विक्टर (चार्जमेन) को प्रदान किए गए।

    कार्यशाला में महाप्रबंधक (प्रभारी प्रचालन) झगर सिंह, महाप्रबंधक (यांत्रिकी) मधुसूदन नायक, टी.ए. गगन किशोर, इंजीनियरिंग एसोसिएट राजेश वर्मा, रमेश दौने, राजेन्द्र कुमार गजेन्द्र, लोकचंद यादव, लेखराम घरेन्द्र, भोपाल सिंह ब्राहेन, उदय राज रामटेके, केदार वर्मा, अनिश कुमार राम, जूनियर इंजीनियरिंग एसोसिएट नरेन्द्र कुमार जोशी तथा टेक्नीशियन वी. दिवाकर राव, डेविड कुमार और दीनबंधु दुर्गा सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

    उप प्रबंधक (संपर्क एवं प्रशासन–राजभाषा) जितेन्द्र दास मानिकपुरी ने राजभाषा के सांविधिक प्रावधानों की जानकारी दी तथा ऑनलाइन वॉइस टाइपिंग एवं ‘सैप’ प्रणाली में हिंदी में नोटशीट तैयार करने का प्रदर्शन किया।

    कार्यक्रम का संचालन इंजीनियरिंग एसोसिएट राजेश वर्मा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन इंजीनियरिंग एसोसिएट विजेन्द्र कुमार वर्मा द्वारा प्रस्तुत किया गया।

      रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा के नेतृत्व में कवर्धा जिले में महिला सशक्तिकरण के प्रयासों ने पिछले दो वर्षों में अभूतपूर्व गति पकड़ी है। स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में शुरू की गई महत्वपूर्ण योजनाओं ने कवर्धा की महिलाओं को नई दिशा और मजबूत आधार प्रदान किया है। महतारी वंदन योजना से लेकर सोनोग्राफी शिविर, लखपति दीदी योजना और महतारी सदन जैसी पहलें जिले को महिला विकास के नए मॉडल के रूप में स्थापित कर रही हैं।

    महतारी वंदन योजना: माताओं-बहनों को मिला 251.63 करोड़ का आर्थिक संबल

    कवर्धा विधानसभा की 1 लाख 30 हजार से अधिक महिलाओं को महतारी वंदन योजना से प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता निरंतर मिल रही है। अब तक 251 करोड़ 63 लाख 96 हजार रुपये महिलाओं के खातों में पहुंच चुके हैं।
    21 माह की राशि के बाद हाल ही में 22वीं किश्त भी जारी कर दी गई है। कई महिलाओं ने इस राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा, घर-गृहस्थी और छोटी-मोटी घरेलू जरूरतों को पूरा करने में किया, जिससे उनके जीवन में आर्थिक स्थिरता आई।

    409 कन्याओं का सामूहिक विवाह, उपमुख्यमंत्री बने बाराती

    मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से कवर्धा में 409 कन्याओं का सामूहिक विवाह धूमधाम से सम्पन्न हुआ। श्री शर्मा स्वयं बाराती बनकर नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देने पहुंचे—यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हुई।

    वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य क्रांति: निःशुल्क सोनोग्राफी शिविर से 1000 से अधिक गर्भवती महिलाएं लाभान्वित

    सुदूर वन क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के उद्देश्य से शुरू किए गए निःशुल्क सोनोग्राफी शिविर अब तक 1,000 से अधिक महिलाओं के लिए जीवनदायिनी साबित हुए हैं।
    समय पर जांच होने से जटिल गर्भावस्था के मामलों की पहचान और उपचार आसानी से संभव हो रहा है, जिससे जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य सुरक्षा मजबूत हुई है।

    स्वरोजगार को बढ़ावा: 100 महिलाओं को मिला सिलाई मशीन का संबल

    महिला रोजगार को नई दिशा देने के लिए उपमुख्यमंत्री ने 100 से अधिक महिलाओं को सिलाई मशीन वितरित की हैं। यह कदम ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का सरल और प्रभावी माध्यम साबित हो रहा है।

    लखपति दीदी योजना: कवर्धा की 13,924 महिलाएँ बनीं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत कवर्धा में बने 6,158 स्व-सहायता समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहे हैं। यही नहीं, आजीविका गतिविधियों से जुड़कर 13,924 महिलाएँ “लखपति दीदी” के रूप में उभरकर सामने आई हैं—जो किसी भी जिले के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि है।

    महतारी सदन — महिला सशक्तिकरण के लिए नया संस्थागत केंद्र

    कबीरधाम जिले को उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल पर 19 महतारी सदनों की बड़ी सौगात मिली है।
    अब तक निर्मित 5 महतारी सदनों का लोकार्पण मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा किया जा चुका है जबकि शेष 14 भवनों का निर्माण 3.45 करोड़ की लागत से तेज़ी से जारी है। ये महतारी सदन महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, परामर्श, स्वास्थ्य शिक्षा और समूह गतिविधियों के लिए समर्पित स्थान के रूप में विकसित किए जा रहे हैं।

    महिला विकास के नए युग की शुरुआत

    उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के निरंतर प्रयासों ने कवर्धा में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य सुरक्षा, सामूहिक विवाह, आजीविका प्रोत्साहन और बुनियादी संरचना के विकास जैसे कदमों ने कवर्धा को महिला विकास का अग्रणी जिला बनाने की दिशा में बड़ी भूमिका निभाई है। कवर्धा की महिलाएं आज अधिक सक्षम, सुरक्षित और आत्मनिर्भर हो रही हैं—और इस सफर में श्री विजय शर्मा के प्रयास एक मजबूत आधारस्तंभ के रूप में सामने आए हैं।

      रायपुर / शौर्यपथ / राज्यपाल रमेन डेका ने स्वतंत्रता सेनानियों और देश की रक्षा में अपना जीवन समर्पित करने वाले पूर्व सैनिकों की स्मृति को संरक्षित करने के लिए ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
    राज्यपाल डेका ने आज लोकभवन में राजधानी रायपुर के कलेक्टर गौरव सिंह से इस संबंध में चर्चा की। उन्होंने विशेष रूप से स्वतंत्रता सेनानी श्री रामकृष्ण तिवारी का उल्लेख किया जिन्होंने आजादी के आंदोलन में परिवार सहित अपना सब कुछ बलिदान कर दिया। उन्होंने जेल, त्याग और संघर्ष की कठिन यातनाएं झेलीं। उनसे जुड़े अभिलेख, विरासत को संरक्षित रखने के लिए निर्देश दिया।
    श्री डेका ने रायपुर में ऐसी पहचान योग्य जगहों की पहचान करने तथा वहां स्मारक, सूचना पट्ट या मेमोरियल गैलरी के रूप में संरक्षित करने के भी निर्देश दिए। राज्यपाल ने कहा कि यह कार्य प्रशासन की पहल और समाज के सहयोग से मिलकर किया जाना चाहिए, तभी उनकी स्मृतियां अविस्मरणीय बन पाएंगी।

        रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश में भूमि और संपत्ति के मूल्यांकन नियमों को लेकर उठे तीव्र विरोध व व्यापक सुझावों के बाद केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने कई अहम निर्णय लिए हैं जिनका आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि ये बदलाव नगरीय विकास, रियल एस्टेट सेक्टर और आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखकर किए गए हैं ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और किफायती हो सके।

    मुख्य निर्णय — क्या बदला गया

    1400 वर्ग मीटर तक के भूखंडों पर इंक्रीमेंटल गणना समाप्त: नगरीय क्षेत्रों में 1400 वर्ग मीटर तक के भूखंडों के लिए इंक्रीमेंटल आधार पर मूल्यांकन की वर्तमान व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। अब पूर्व प्रचलित स्लैब प्रावधान पुनः लागू होंगे — नगर निगम क्षेत्रों में 50 डेसिमल, नगर पालिका में 37.5 डेसिमल और नगर पंचायत में 25 डेसिमल तक स्लैब दरों पर मूल्यांकन होगा।

    सुपर बिल्ट-अप एरिया की गणना विलोपित: बहुमंजिला भवनों में फ्लैट, दुकान और कार्यालय के हस्तांतरण पर अब सुपर बिल्ट-अप एरिया के आधार पर बाजार मूल्य लागू नहीं होगा; स्थानांतरण का मूल्यांकन अब बिल्ट-अप एरिया के आधार पर किया जाएगा। यह प्रावधान मध्य प्रदेश शासन के समय से चले आ रहे पुराने नियम को बदलता है और वर्टिकल डेवलपमेंट को गति देने की मांग को पूरा करता है।

    मंजिलों के आधार पर छूटें: बहुमंजिला और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के मूल्यांकन में बेसमेंट व प्रथम तल पर 10% तथा द्वितीय तल व ऊपर के तल पर 20% की कटौती लागू की गई है — इससे मध्यम वर्ग को किफायती दरों पर फ्लैट और व्यावसायिक स्थान मिलना आसान होगा।

    कमर्शियल कॉम्प्लेक्सों में दूरी-आधारित छूट: किसी कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के मुख्य मार्ग से बने हिस्से से मापी गई 20 मीटर की दूरी के बाद स्थित संपत्तियों के लिए भूखंड दरों में 25% की छूट दी जाएगी। यह व्यवस्था वास्तविक स्थिति के आधार पर अधिक न्यायसंगत मूल्यांकन सुनिश्चित करेगी।

    जिला मूल्यांकन समितियों को निर्देश: बोर्ड ने निर्देश दिया है कि हाल ही में दरों में वृद्धि के बाद प्राप्त आपत्तियों, ज्ञापनों और सुझावों का परीक्षण कर 31 दिसंबर तक गाइडलाइन दरों में संशोधन के प्रस्ताव जिला स्तर से भेजे जाएं; इन प्रस्तावों के आधार पर केंद्रीय बोर्ड आगामी गाइडलाइन दरों पर अंतिम निर्णय लेगा।

    पृष्ठभूमि और प्रशासनिक कदम

    नई कलेक्टर गाइडलाइन 20 नवंबर को लागू की गई थी, जिसके बाद प्रदेश भर में तीव्र विरोध और आपत्तियाँ उठीं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संकेत के बाद सरकार ने समीक्षा के लिए कदम उठाते हुए सेंट्रल वैल्यूएशन बोर्ड की बैठक बुलाई।

    रजिस्ट्रेशन विभाग ने सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी थी। बैठक के बाद महानिरीक्षक पंजीयन एवं सुपरिटेंडेंट ऑफ स्टैंप्स, छत्तीसगढ़, रायपुर ने संशोधित गाइडलाइंस और आदेश जारी किए। अधिकारियों ने बताया कि ये प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं ताकि अस्थिरता दूर हो और रियल एस्टेट सेक्टर को स्थिर दिशा मिल सके।

    सरकार का मकसद और अपेक्षित प्रभाव
    प्रशासन का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और शहरी भूमि के समुचित उपयोग को प्रोत्साहित करना है। बिल्ट-अप एरिया पर मूल्यांकन तथा मंजिल-आधारित छूटों से वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे शहरी आवास और व्यावसायिक इकाइयों की उपलब्धता और किफायती विकल्पों में इजाफा होगा।

    आगे की प्रक्रिया
    केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड द्वारा माँगे गए जिलास्तरीय प्रस्तावों के मिलने के बाद बोर्ड अंतिम गाइडलाइन दरों की घोषणा करेगा। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन प्रावधानों को वापस लिया गया है, वे तत्कालीन आदेशों के अनुरूप लागू माने जाएँगे, जबकि नए छूट-प्रावधान संस्थागत स्तर पर लागू होंगी।

    हजारों फ्लाइट रद्द और देरी के कारण खिलाड़ियों के परिवार व समर्थक फंसे, यात्रा योजनाएं हुईं बाधित DGCA ने एयरलाइन के CEO को कारण बताओ नोटिस जारी, क्रू रोस्टरिंग और…

      रायपुर/ शौर्यपथ / Óमहासमुंद जिले के सेनभाठा, बागबाहरा में धान का टोकन ना मिलने की वजह से एक किसान मनोबोध गाढ़ा के आत्महत्या के प्रयास को सरकार की प्रताडऩा करार देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि पूरे प्रदेश में धान खरीदी बाधित है, भाजपा सरकार की मंशा किसानों से उनके रकबा के आधार पर तय 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी करने की नहीं है, पिछले 3 दिनों से किसान मनोबोध टोकन के लिए चक्कर लगा रहा था आज हताश और निराशा होकर किसान ने अपना गला ही काट लिया, सरकार के फर्जी दावों की हकीकत सामने हैं। पूरे प्रदेश में लगभग यही स्थिति है, किसानों को रकबा के अनुपात में जीतने धान का टोकन काटा गया है उतनी खरीदी भी नहीं की जा रही है। सरकार और प्रशासन की अक्षमता से किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हैं, बागबाहरा के किसान मनोबोध गाढ़ा की हालत नाज़ुक है। सरकार उसके इलाज का समुचित प्रबंध कराए।
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि किसान विरोधी भाजपा सरकार ने अपने ही पूर्व निर्धारित लक्ष्य से कम धान खरीदने का षड्यंत्र करके एनआईसी के द्वारा लक्ष्य घटाकर सोसाइटियों को किसानों से कम खरीदी के लिए बाध्य किया जा रहा है। जिन किसानों का टोकन 10 दिन पहले कट गया है उनसे भी खरीदी नहीं की जा रही है, तौलाई के लिए घुमाया जा रहा है। टोकन के लिए किस भटक रहे हैं, भाजपा सरकार की मंशा धान खरीदी करने की नहीं है, किसान समिति के चक्कर लगा लगाकर हताश हो चुके हैं, बागबाहरा की घटना इस सरकार के किसान हत्यारी सरकार होने का प्रमाण है।

      कवर्धा / शौर्यपथ / कवर्धा शहर के विकास को नई दिशा देते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 10 करोड़ 73 लाख रुपये की लागत से बनने वाले गौरव पथ का विधिवत भूमिपूजन किया। यह बहुप्रतिक्षित मार्ग राजनांदगांव बायपास (पिलारी नहर) से नवीन बाजार तक तैयार किया जाएगा, जिससे शहर की यातायात सुविधा, व्यापारिक गतिविधियां और शहरी सौंदर्य में उल्लेखनीय सुधार होगा।
    भूमिपूजन कार्यक्रम में सांसद संतोष पाण्डेय, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि गौरव पथ केवल सड़क नहीं बल्कि कवर्धा के भविष्य को गति देने वाला विकास मार्ग है। उन्होंने बताया कि शहर में दो आधुनिक चौपाटियों का निर्माण, प्रमुख मार्गों का चौड़ीकरण, मेडिकल कॉलेज के लिए 300 करोड़ से अधिक की स्वीकृति, सड़क उन्नयन और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार जैसे कार्य तेजी से प्रगति पर हैं।
    सांसद संतोष पाण्डेय ने इसे कवर्धा के लिए ऐतिहासिक दिन बताया और कहा कि नई सरकार के संयुक्त प्रयासों से शहर में बड़े पैमाने पर विकास कार्य शुरू हुए हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन 11 दिसंबर को किया जाएगा, जो स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।
    करीब 2 किलोमीटर लंबा गौरव पथ रामनगर, शिवाजी कॉलोनी, शांतिदीप कॉलोनी और नवीन बाजार के हजारों नागरिकों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा और शहर को आधुनिक स्वरूप प्रदान करेगा।

    मुख्यमंत्री साय सर्व रविदास समाज के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल

    raipur / shouryapath / सामाजिक विकास का वास्तविक आधार शिक्षा है। चाहे जीवन जीने की कला हो, व्यापार हो, कृषि हो या कोई अन्य क्षेत्र — हर क्षेत्र में सफलता का पहला कदम शिक्षा ही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित छत्तीसगढ़ प्रदेश सर्व रविदास समाज के शपथ ग्रहण समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री श्री साय ने मंच पर सभी नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को शपथ दिलाई और उन्हें शुभकामनाएँ दीं।
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रारंभ से ही शिक्षा के स्तर को उन्नत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राज्य गठन के समय जहाँ मात्र एक मेडिकल कॉलेज था, वहीं आज प्रदेश में लगभग 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इसी प्रकार, छत्तीसगढ़ में आईआईटी, ट्रिपल-आईटी, आईआईएम, लॉ यूनिवर्सिटी, एम्स, सिपेट जैसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों की स्थापना से स्थानीय युवाओं को बड़े अवसर प्राप्त हुए हैं।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि समाज को मजबूत और संगठित होना समय की आवश्यकता है, क्योंकि संगठित समाज ही राष्ट्र निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मूलमंत्र — “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” — का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्हीं मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार राज्य सरकार 23 महीनों से सभी वर्गों के हित में काम कर रही है।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार ने हाल के महीनों में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं जिसमें अन्नदाताओं के लिए कृषक उन्नति योजना, प्रत्येक परिवार को पक्का मकान देने हेतु प्रधानमंत्री आवास योजना, माताओं और बहनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने वाली महतारी वंदन योजना, दूरस्थ अंचलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु शिक्षक युक्तियुक्तकरण जैसे कदम शामिल हैं।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अब तक विभिन्न विभागों में 10 हजार से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं पूर्ण निष्पक्षता के साथ संपन्न कराई गई हैं, जिससे युवाओं में नया विश्वास उत्पन्न हुआ है।
    उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने नई उद्योग नीति लागू की है, जिससे स्थानीय लोगों को अधिक अवसर, रोज़गार और स्वरोजगार प्राप्त हो सकेगा।
    मुख्यमंत्री साय ने समाज के लोगों से आग्रह किया कि वे अधिकाधिक संख्या में शासन की योजनाओं का लाभ लेकर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ। कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार विकास बोर्ड के अध्यक्ष ध्रुव कुमार मिर्धा ने भी संबोधित किया और नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई दी।
    इस अवसर पर सर्व रविदास समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विजय मेहरा, रायपुर संभाग आयुक्त महादेव कांवरे, दिलीप वासनीकर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

    छत्तीसगढ़ में भी इस तकनीक के व्यापक उपयोग को सुनिश्चित किया जाएगा – मुख्यमंत्री साय

     RAIPUR / SHOURYAPATH / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री राजेश राजौरा ने आज भोपाल में सिंचाई की नवीनतम तकनीक PIN (Pressure Irrigation Network) के संबंध में विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि पारंपरिक सिंचाई पद्धतियों की तुलना में यह प्रणाली कहीं अधिक कुशल, आधुनिक और जल संरक्षण के अनुरूप है।

    अपर मुख्य सचिव श्री राजौरा ने प्रस्तुति के दौरान बताया कि जहाँ पारंपरिक नहर आधारित सिंचाई में लगभग 35 प्रतिशत एफिशिएंसी प्राप्त होती है, वहीं प्रेशर इरिगेशन प्रणाली में दक्षता बढ़कर 65 प्रतिशत तक पहुँच जाती है। इस तकनीक में प्रेशर आधारित पाइपलाइनों से सिंचाई की जाती है, जिससे पानी का रिसाव और अपव्यय कम होता है तथा बिजली की उल्लेखनीय बचत होती है। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रणाली में भू-अधिग्रहण की आवश्यकता न्यूनतम होती है, जिससे परियोजनाएं समय पर और लागत प्रभावी तरीके से पूरी की जा सकती है।

    प्रस्तुति में उल्लेख किया गया कि मध्यप्रदेश में 13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इस तकनीक से सिंचाई की जा रही है और आगामी वर्षों में इसे 40 लाख हेक्टेयर तक विस्तारित करने का लक्ष्य है। इस मॉडल से न केवल जल उपयोग दक्षता बढ़ी है, बल्कि किसानों की उत्पादकता और सिंचाई सुविधा में भी महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिला है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रेजेंटेशन की सराहना करते हुए कहा कि सिंचाई की यह उन्नत तकनीक जल प्रबंधन की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप है। उन्होंने कहा, “हम इस तकनीक का छत्तीसगढ़ में भी अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करेंगे, ताकि राज्य के किसानों को कम पानी में अधिक सिंचाई सुविधा और बेहतर उत्पादन मिल सके। जल संरक्षण, ऊर्जा बचत और त्वरित क्रियान्वयन के दृष्टिकोण से यह तकनीक अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। इस तकनीक के माध्यम से भूमि अधिग्रहण किए बिना भी सिंचाई का लाभ मिल सकेगा।” मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विभागीय अधिकारियों को इस तकनीक के अध्ययन, परीक्षण और चरणबद्ध क्रियान्वयन के लिए दिशा-निर्देश दिए।

    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, मध्यप्रदेश जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता श्री विनोद देवड़ा, अधीक्षण यंत्री श्री विकास राजोरिया और अधीक्षण यंत्री श्री शुभंकर विश्वास भी उपस्थित थे।

    उल्लेखनीय है कि पारंपरिक नहर आधारित सिंचाई में पानी का एक बड़ा हिस्सा रिसाव, वाष्पीकरण और अनियंत्रित बहाव के कारण व्यर्थ हो जाता है, जिससे खेतों तक वास्तविक जल आपूर्ति सीमित रहती है और पूरी कमांड एरिया में समान सिंचाई नहीं हो पाती। सामान्यतः पारंपरिक प्रणाली की कुल सिंचाई दक्षता केवल 35 प्रतिशत मानी जाती है। वहीं दूसरी ओर PIN (Pressure Irrigation Network) प्रणाली में पानी पाइपलाइनों के माध्यम से नियंत्रित दबाव के साथ सीधे खेतों तक पहुँचाया जाता है, जिससे पानी का अपव्यय लगभग शून्य हो जाता है। इस तकनीक से सिंचाई दक्षता बढ़कर 65 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, जो जल संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    PIN प्रणाली में सिंचाई पूरी तरह पाइपलाइन आधारित होने के कारण नहर निर्माण की आवश्यकता कम हो जाती है और भू-अधिग्रहण भी न्यूनतम होता है। इससे परियोजनाओं की लागत घटती है और कार्य समय पर पूरे होते हैं। पारंपरिक सिंचाई की तुलना में इस तकनीक में पंपिंग दक्षता अधिक होती है, जिससे बिजली की उल्लेखनीय बचत होती है। समान दबाव से पानी वितरण होने के कारण खेतों के टेल एंड के क्षेत्रों को भी पर्याप्त पानी मिलता है। इस प्रणाली से फसलों की उत्पादकता में वृद्धि, जल प्रबंधन में सुधार और किसानों की आय में वृद्धि जैसे व्यापक लाभ प्राप्त होते हैं।

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