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शैक्षणिक सत्र की नई शुरुआत के साथ बच्चों की सामाजिक अधिकार भी हो रही सुनिश्चित
7,566 बच्चों को शाला प्रवेश के साथ प्रदान किया जा रहा है जाति प्रमाण पत्र
रायपुर /शौर्यपथ /राज्य सरकार ने जाति प्रमाण पत्र प्रदाय करने की प्रक्रिया को सरलीकृत किया है जिसकेे तहत् स्कूल और आंगनबाड़ी के बच्चों को आसानी से जाति प्रमाण पत्र मिल सके। विद्यार्थियों को जाति प्रमाण पत्र सुगमता से उपलब्ध हो जाने से छात्रवृत्ति के अलावा शासन की अन्य सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सके। इसी जनहितकारी योजना के तहत् स्कूली बच्चों को समय पर आवश्यक दस्तावेज प्रदान कर उनकी शिक्षा यात्रा को सुगम और अधिकारयुक्त बनाने के उद्देश्य से कोरबा कलेक्टर के निर्देशन में जिला प्रशासन द्वारा शिक्षा और सामाजिक अधिकारों को मजबूती देने की दिशा में एक सराहनीय पहल की जा रही है। चालू शैक्षणिक सत्र में जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों से प्राथमिक शालाओं में प्रवेश लेने वाले बच्चों को शाला प्रवेश के साथ ही जाति प्रमाण पत्र प्रदान किया जा रहा है। कोरबा जिले में अब तक आंगनबाड़ी से शाला में प्रवेश लेने वाले कुल 7,566 बच्चों को जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया है।
प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाने हेतु एसडीएम द्वारा जाति प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं, जिन्हें बीईओ, सीएचसी के माध्यम से संबंधित विद्यालयों तक पहुंचाकर विद्यार्थियों को वितरित किया जा रहा है। अनुविभाग कोरबा में 2930, कटघोरा में 1293, पोड़ी उपरोड़ा में 1696 एवं पाली में 1647 शाला प्रवेशी बच्चों को जाति प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। आगे भी शेष बच्चों को जाति प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।
जिला प्रशासन की इस पहल से स्कूली बच्चों एवं उनके पालकों में हर्ष व्याप्त है। उन्होंने प्रशासन के इस पहल की सराहना करते हुए प्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन को धन्यवाद दिया है। इससे बच्चों को आगे चलकर छात्रवृत्ति, शैक्षणिक सुविधाओं एवं अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी।
छत्तीसगढ़ में सामरिक एवं रणनीतिक खनिजों के दोहन पर तकनीकी सहित विभिन्न पहलुओं पर हुई विस्तृत चर्चा
निवेश और औद्योगिक विकास को गति मिलने की संभावना
रायपुर/शौर्यपथ /मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में उपलब्ध सामरिक एवं रणनीतिक महत्व के खनिजों के सुव्यवस्थित अन्वेषण एवं दोहन के संबंध में राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस के कन्वेंशन हॉल में एकदिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री के सचिव एवं खनिज संसाधन विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा से परिपूर्ण एक समृद्ध राज्य है, जहाँ 28 प्रकार के प्रमुख खनिज जैसे—कोयला, चूना पत्थर, डोलोमाइट, लौह अयस्क, बाक्साइट, टिन अयस्क के साथ-साथ लीथियम, कोबाल्ट तथा रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे सामरिक एवं परमाणु महत्व के खनिज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि नेशनल प्रोग्राम ऑन एक्सप्लोरेशन स्ट्रैटेजी तथा नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित प्रयासों को और अधिक गति प्रदान करने के उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है। इसका लक्ष्य राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना तथा राज्य में रणनीतिक खनिज परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन की दिशा में ठोस कदम उठाना है।
इस कार्यशाला का आयोजन खनिज संसाधन विभाग तथा छत्तीसगढ़ भूविज्ञान एवं खनन संचालनालय द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इसका उद्देश्य भारत की क्रिटिकल मिनरल्स क्षमता के समुचित दोहन हेतु वैज्ञानिक अन्वेषण तकनीकों को प्रोत्साहित करना, प्रस्ताव प्रस्तुतिकरण प्रणाली को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना तथा राष्ट्रीय स्तर की रणनीतिक अन्वेषण नीतियों में राज्य की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना था।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के श्री रविकांत गुप्ता ने छत्तीसगढ़ की भूवैज्ञानिक विशेषताओं एवं ओजीपी क्षेत्रों की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड के श्री भुवनेश्वर कुमार ने लीथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट, निकल, टंगस्टन, फॉस्फेट जैसे खनिजों की खोज हेतु आधुनिक भू-भौतिकीय एवं भू-रासायनिक तकनीकों पर आधारित प्रस्तुति दी, जिससे अधिकारियों को नवीनतम विधियों की जानकारी प्राप्त हुई। एनएमईटी से श्री अक्षय वर्मा ने प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया, वित्तीय सहायता एवं अनुदान नीतियों की जानकारी साझा करते हुए एनएमईटी के अंतर्गत उपलब्ध अवसरों को रेखांकित किया और राज्य की अधिक सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया।
वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला में छत्तीसगढ़ की भूमिका पर बल
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि छत्तीसगढ़ की खनिज विविधता और गुणवत्ता इसे वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण कड़ी बना सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि खनिज उत्पादन, बाज़ार मांग और भविष्य की संभावनाओं के बीच संतुलन स्थापित कर राज्य खनिज आधारित औद्योगिक विकास का नेतृत्व कर सकता है।
समापन सत्र में राज्य में अब तक किए गए खनिज सर्वेक्षणों, उनके निष्कर्षों एवं प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने तकनीकी दक्षता तथा अंतर-विभागीय समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। भूविज्ञान एवं खनन संचालनालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि खनिज संसाधन किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति का मूल आधार होते हैं। कार्यशाला ने यह स्पष्ट किया कि पारदर्शी, तकनीकी रूप से सक्षम एवं समयबद्ध प्रक्रियाएं अपनाकर छत्तीसगढ़ न केवल निजी एवं सार्वजनिक निवेश को आकर्षित कर सकता है, बल्कि राष्ट्रीय रणनीतिक खनिज नीति में भी अग्रणी भूमिका निभा सकता है। सभी प्रतिभागियों ने खनिज आधारित सतत औद्योगिक विकास हेतु संयुक्त प्रयास और दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर कार्यशाला में आईआईटी धनबाद के प्रो. साहेंद्र सिंह, आईबीएम के श्री प्रेम प्रकाश, संचालक श्री रजत बंसल, संयुक्त संचालक श्री अनुराग दीवान एवं श्री संजय कनकाने सहित विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय एजेंसियों, अनुसंधान संस्थानों, नीति सलाहकारों एवं तकनीकी विशेषज्ञों ने सहभागिता की।
नन्दौरखुर्द के बच्चों को मिला नया शिक्षक
रायपुर/शौर्यपथ /राज्य सरकार द्वारा लागू युक्तियुक्तकरण नीति के अंतर्गत अब विद्यालयों में अतिरिक्त शिक्षक की पदस्थापना होने से शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ खेलकूद और गतिविधियां अच्छे से संचालित होंगी। इससे विद्यालय की शिक्षण व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है और विद्यार्थियों को विषयवार पढ़ाई का लाभ मिलेगा।
सक्ती जिले के ग्राम नन्दौरखुर्द स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय लंबे समय से शिक्षकों की कमी से जूझ रहा था। करीब 31 छात्र-छात्राएं इस स्कूल में अध्ययनरत हैं, लेकिन अब तक केवल एक शिक्षक के भरोसे पूरी शिक्षण व्यवस्था संचालित हो रही थी, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था।
पूर्व में एकल शिक्षक व्यवस्था होने के कारण बच्चों को बेहतर पढ़ाई के लिए अन्य ग्रामों की ओर रुख करना पड़ता था। अब शिक्षक की नियुक्ति के बाद स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी। इसका सीधा असर पालकों और ग्रामीणों के विश्वास पर पड़ा है, जो अब अपने बच्चों का नामांकन नन्दौरखुर्द के प्राथमिक स्कूल में कराने के लिए आगे आ रहे हैं।
युक्तियुक्तकरण की यह पहल न केवल शिक्षकों की कमी को दूर कर रही है, बल्कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी रूप देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
रायपुर/शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज हरियाणा के रोहतक पहुंचे, जहाँ उन्होंने हरियाणा सरकार के पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के निवास सिंधु भवन पहुंचकर शोक संवेदनाएँ व्यक्त कीं।
मुख्यमंत्री साय ने कैप्टन अभिमन्यु की पूज्य माताजी श्रीमती परमेश्वरी देवी जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने शोकाकुल परिजनों से भेंट कर उन्हें सांत्वना दी तथा ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
रायपुर/शौर्यपथ /मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने Axiom-4 मिशन की ऐतिहासिक सफलता पर पायलट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि समूचे देशवासियों की आकांक्षाओं, विश्वास एवं शुभकामनाओं के साथ शुभांशु शुक्ला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में पहुंचने वाले प्रथम भारतीय बनने की ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त करेंगे। यह हम सभी के लिए गौरव और प्रेरणा का क्षण है।
रायपुर/शौर्यपथ /मध्य क्षेत्रीय परिषद की वाराणसी में आयोजित 25वीं बैठक के दौरान यह जानकारी दी गई कि अगली बैठक का आयोजन छत्तीसगढ़ के बस्तर में किया जाएगा। यह निर्णय देश के दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण अंचलों को राष्ट्रीय नीति-निर्धारण की मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। बस्तर जैसे क्षेत्र में इस स्तर की बैठक का आयोजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समावेशी विकास और सुशासन की नीति का सशक्त प्रतीक है।
बैठक के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने आशा व्यक्त की कि अगली परिषद बैठक तक बस्तर में नक्सल उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय और निर्णायक प्रगति हो चुकी होगी। इस विश्वास के साथ, परिषद ने बस्तर क्षेत्र को शांति, स्थायित्व और विकास के एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने का लक्ष्य रखा है। यह घोषणा राज्य और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय और सामूहिक इच्छाशक्ति का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि बस्तर में इस तरह की उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन न केवल क्षेत्र के लिए गौरव की बात है, बल्कि इससे वहां के विकास को नई ऊर्जा भी प्राप्त होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से बस्तर अब संघर्ष का नहीं, संभावनाओं का प्रतीक बनने की ओर अग्रसर है।
महासमुंद की बेटी ने रचा नया इतिहास, कलेक्टर लंगेह सहित समस्त जिले में हर्ष की लहर
रायपुर/शौर्यपथ /छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले की होनहार बालिका दिव्या रंगारी ने अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करते हुए मालदीव में आयोजित अंडर-16 एशियन बास्केटबॉल चौंपियनशिप क्वालीफायर में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ भारतीय टीम ने फिबा अंडर-16 वूमेन एशियन चैंपियनशिप 2025 के लिए सफलतापूर्वक क्वालीफाई कर लिया है, जो आगामी 14 से 20 सितम्बर 2025 तक मलेशिया में आयोजित होगी।
उल्लेखनीय है कि 12 से 15 जून 2025 तक आयोजित इस अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारतीय टीम ने श्रीलंका, बांग्लादेश तथा मालदीव जैसी टीमों को पराजित करते हुए शानदार प्रदर्शन किया। फाइनल मुकाबले में भारत ने एक बार पुनः श्रीलंका को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस स्वर्णिम सफलता में महासमुंद जिले की दिव्या रंगारी का योगदान अत्यंत सराहनीय रहा।
दिव्या इससे पूर्व भी 48वीं सब-जूनियर नेशनल बास्केटबॉल चौंपियनशिप (अगस्त 2023, पांडिचेरी) में छत्तीसगढ़ की टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। उनकी निरंतर मेहनत, अनुशासन एवं खेल के प्रति समर्पण ने उन्हें राष्ट्रीय से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया है।
इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने दिव्या को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि, दिव्या की उपलब्धि न केवल जिले बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है। यह सफलता जिले के अन्य खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी। इसके अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री एस. आलोक, अपर कलेक्टर श्री रवि साहू, जिला शिक्षा अधिकारी श्री विजय कुमार लहरे, जिला खेल अधिकारी श्री मनोज धृतलहरे सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने दिव्या को शुभकामनाएं दीं एवं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
जिला बास्केटबॉल संघ महासमुंद के अध्यक्ष श्री नुरेन चंद्राकर, चेयरमैन श्री गौरव चंद्राकर, सचिव श्री शुभम तिवारी एवं सदस्य श्री मनीष श्रीवास्तव तथा श्री संतोष कुमार सोनी ने भी दिव्या की इस ऐतिहासिक जीत पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके कोच एवं परिवार को बधाई दी।
महासमुंद जिले के मिनी स्टेडियम में दिव्या ने नियमित अभ्यास कर यह मुकाम हासिल किया है। यहाँ जिले के शहरी व ग्रामीण अंचलों से अनेक बालक-बालिकाएँ प्रतिदिन बास्केटबॉल का प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। हाल के वर्षों में जिले के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीतकर जिले की पहचान खेल जगत में स्थापित की है।
दिव्या रंगारी की यह उपलब्धि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के खेल परिदृश्य को एक नई दिशा देगी और खेल संस्कृति को और अधिक सशक्त बनाएगी।
रायपुर /शौर्यपथ /छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में आधारभूत संरचना के विकास को नया आयाम मिलने जा रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा भटगांव विधायक श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के सतत् प्रयासों से लोक निर्माण विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए कुल 48 करोड़ 72 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस राशि से जिले में महत्वपूर्ण सड़कों और पुलों का निर्माण किया जाएगा, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी।
प्रमुख स्वीकृत कार्यों में एन.एच. 43 से नया कृष्ण मंदिर सिलफिली बनारस रोड तक 5 किलोमीटर लंबे पहुँचमार्ग का निर्माण कार्य, जिसकी लागत 690.68 लाख रूपये है। इसी प्रकार एन.एच. 43 से मायापारा दुर्गाबाड़ी होते हुए रविंद्र नगर (नवापारा) तक 4 किलोमीटर का पहुँच मार्ग 448.95 लाख रूपए की लागत से तैयार किया जाएगा। बीरमताल से उमेशपुर के बीच गोबरी नदी पर पुलिया निर्माण कार्य हेतु 307.19 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है।
इसी तरह 761 लाख रूपए की लागत से पकनी चेन्द्रा चौड़ीकरण, 593 लाख रूपए की लागत से कुप्पा जमघरपारा से चौकीदार पारा नवा पारा, गिरहूलपारा (6.10 किलोमीटर पुल-पुलिया) सहित निर्माण, 419 लाख रूपए की लागत से हरिपुर से छतरंग पहुंच मार्ग में कागज नाला पर पुलिया निर्माण, 510 लाख रूपए की लागत से सिरसी से कुसमुसी मार्ग पर गोबरी नदी पर उच्चस्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग का निर्माण, 741 लाख रूपए की लागत से लांजित से सौहार मार्ग पर महान नदी पर उच्चस्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग का निर्माण और सुंदरपुर-शौंकी-नेवटाली-सलका मार्ग (लंबाई 4.10 किमी) पर डब्ल्यू.बी.एम. एवं डामरीकरण कार्य 403 लाख रूपए से निर्मित होने वाली शामिल हैं।
इन कार्यों के स्वीकृत होने पर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने प्रसन्नता जताते हुए कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से सूरजपुर जिले के ग्रामीण अंचलों में आवागमन सुगम होगा और स्थानीय लोगों को यातायात की बेहतर सुविधा मिलेगी। साथ ही, व्यापार और कृषि से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विकास के हर वादे को धरातल पर उतारने का कार्य कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
इन परियोजनाओं से जुड़े निर्माण कार्य शीघ्र शुरू किए जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी।
रायपुर/शौर्यपथ /मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में सभी वर्गो के विकास के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। मुख्यमंत्री साय की मंशा है कि केन्द्र सरकार से मिलने वाली सभी योजनाओं का लाभ राज्य के व्यक्तियों को भी समय पर मिले शासन द्वारा निर्धारित समय पर हितग्राहियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) 2.0 के तहत दंतेवाड़ा जिले के चितालंका ग्राम पंचायत के कई जरूरतमंद परिवारों को उनके पक्के मकान का सपना साकार हो रहा हैं। आवास किसी भी व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकताओं मे से एक है। वर्षों से झोपड़ियों या अधूरे कच्चे मकानों में जीवन बिता रहे इन परिवारों के चेहरों पर अब इस सौगात की खुशी की झलक साफ देखी जा सकती है। इस परिप्रेक्ष्य में इन हितग्राहियों में से एक चितालंका की निवासी श्रीमती सुकारी ईच्छाम के अधूरे घर की दीवारें अब मजबूती से खड़ी हैं, क्योंकि उनका मकान ’’प्लिन्थ’’ स्तर पर कार्य पूरा हो चुका है और छत की तैयारी शुरू हो गई है। वहीं श्रीमती श्यामदई नाग के घर का निर्माण कार्य छज्जा स्तर तक पहुँच चुका है, जिससे यह स्पष्ट है कि कुछ ही समय में उनका मकान भी पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा।
एक अन्य हितग्राही कलजुक नेताम के लिए सबसे बड़ी खुशी की बात यह है कि उनका घर पूरी तरह बनकर तैयार हो गया है। अब उनके परिवार के पास एक मजबूत, सुरक्षित और सम्मानजनक आवास है, जिसकी उन्होंने वर्षों से कामना की थी। यह सिर्फ ईंट और सीमेंट का निर्माण नहीं है, बल्कि उन सपनों की नींव है जो लंबे समय से अधूरा था। अब ये परिवार न केवल बारिश, धूप और ठंड से सुरक्षित हैं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और गरिमा की भी अनुभूति आई है। उनके परिवार के लिए बारिश के मौसम में कच्चे घर में रहना हमेशा एक चुनौती भरा रहता था। छत से पानी टपकता, दीवारें भीगती और जहरीले जीवों का खतरा हर वक्त बना रहता था। इन समस्याओं ने उन्हें अक्सर चिंता और असुरक्षा ने घेर रखा था। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 उनके जीवन में एक नई रोशनी की किरण लेकर आई। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत मिली यह सौगात ग्रामीणों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर तबके को एक पक्के घर के साथ-साथ उनके सपनों को भी नए पंख दे रही है।
हितग्राहियों ने समय पर उनके आशियानों के सपने पूरा करने के लिए शासन के प्रति आभार जताया है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
