August 21, 2026
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    रायपुर

    रायपुर (6098)

    रायपुर /शौर्यपथ/

    आदिवासियों का वैश्विक मंच बना छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल -2आदिवासियों का वैश्विक मंच बना छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल -3आदिवासियों का वैश्विक मंच बना छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल -4आदिवासियों का वैश्विक मंच बना छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल -5आदिवासियों का वैश्विक मंच बना छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल -6

    झारखंड के मुख्यमंत्री  हेमंत सोरेन ने कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य, आदिवासियों की संस्कृति को सहेजने, संवारने और आगे बढ़ाने के लिए अभिनव कार्य कर रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह सिर्फ राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय वर्ग का सम्मान है। उन्होंने कहा कि जनजातीय वर्ग, वर्षाें से शोषित रहा है, सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा रहा है। उसे आगे बढ़ाने के लिए यह भव्य आयोजन पूरे देश के लिए एक संदेश है। उन्होंने कहा कि यदि हम सब चाहे तो यह जनजातीय वर्ग हमारे साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकता है, आगे बढ़ सकता है। मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल का जनजातीय वर्ग के प्रति यह प्रयास मील का पत्थर साबित होगा।

    राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव और छत्तीसगढ़ राज्योत्सव का शुभारंभ झारखण्ड के मुख्यमंत्री एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  हेमंत सोरेन ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने की। कार्यक्रम में राज्यसभा के पूर्व सांसद  बी.के. हरिप्रसाद, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत, युगाण्डा एवं फिलीस्तीन के कॉउंसलर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में 28 अक्टूबर से 1 नवम्बर तक आयोजित होने वाले इस ‘राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव’ और छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में देश के 27 राज्यों और 6 केन्द्रशासित प्रदेशों के कलाकारों के साथ ही 07 देशों- एस्वातीनी, नाइजीरिया, उज्बेकिस्तान, श्रीलंका, यूगांडा, माली और फिलिस्तीन से आए लगभग 1500 कलाकार भाग ले रहे हैं।

    मुख्य अतिथि  हेमंत सोरेन ने आगे कहा कि आज भौतिकवादी युग में जनजातीय समाज अपनी सभ्यता, संस्कृति को बचाने में लगा है। छत्तीसगढ़ सरकार के इस कार्यक्रम को देखकर यह महसूस हो रहा है कि इससे जनजाति वर्ग में आशा जगेगी। इससे उन्हें ताकत और ऊर्जा मिलेगी, वह अपनी संस्कृति और सभ्यता को अक्षुण्ण रखेंगे। उन्होंने कहा कि यहां आदिवासियों की कला, संस्कृति के साथ-साथ उनके उत्पाद के प्रदर्शन एवं विक्रय का मेला लगा है। श्री सोरेन ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में आदिवासियों की बेहतरी और उनके कल्याण के लिए संचालित योजनाओं का अध्ययन करते हैं और अपने राज्य में भी बदलाव की कोशिश करते हैं। उन्होंने जल-जंगल-जमीन जनजातीय समाज की आत्मा है। खेत-खलिहान, पशुधन और वनोपज इनकी सम्पत्ति है। छत्तीसगढ़ राज्य में लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी और वनवासियों को तेंदूपत्ता से लेकर लघु वनोपजों का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की तारीफ की और कहा कि उनका यह मानना है कि जब तक गांव समृद्ध नहीं होगा, तब तक शहर, प्रदेश और देश समृद्ध नहीं होगा। जनजातीय समुदाय की क्रय शक्ति बढ़े, इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

    मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इस मौके पर राज्य के सभी वर्ग एवं समाज के देवी-देवताओं को नमन करते हुए कहा कि अनेकता में एकता हमारी ताकत और पहचान है। उन्होंने कहा कि इसे जोड़ने एवं संजोने के लिए विश्व के आदिवासियों को एक मंच पर लाने के लिए यह आयोजन किया जा रहा है, ताकि वह संस्कृति को, अपनी ताकत को जाने और आगे बढ़े। छत्तीसगढ़ आज आदिवासियों का वैश्विक मंच के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर रहा हैं। उन्होंने कहा कि इसमें सफलता मिली है। यह राष्ट्रीय नृत्य महोत्सव का द्वितीय आयोजन है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में 42 जनजातियां और 5 विशेष पिछड़ी जनजातियां निवास करती है। इनकी जनसंख्या राज्य की कुल आबादी की एक-तिहाई है। सभी जनजातियों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है। उनकी बोली, उत्सव, नृत्य, देवी-देवता भी अलग-अलग है। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के माध्यम से जनजातियों की सांस्कृतिक विभिन्नता, उनकी कला को हमें एक मंच पर देखने और जानने का अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ राज्य में आदिवासी समुदाय की बेहतरी के लिए किए जा रहे कार्याें का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के नवनिर्माण में सबकी भागीदारी हो, सबका विकास हो, यह हमारी प्राथमिकता है।

    मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की नीतियों और फैसलों से राज्य की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है। छत्तीसगढ़ पहला राज्य हैं, जिसमें एक निजी उद्योग के लिए अधिग्रहित 4200 एकड़ जमीन आदिवासियों को वापस कराई है। वनवासियों को हम व्यक्तिगत और सामुदायिक पट्टे दे रहे हैं। गौठानों में दो रूपए किलो में गोबर की खरीदी की जा रही है। गोबर विक्रेता ग्रामीणों एवं पशुपालकों को इसके एवज में 104 करोड़ रूपए करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है। गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। गौठानों में इंडस्ट्रियल पार्क, लघु उद्योग एवं कृषि आधारित उद्योग लगाने का काम जारी है। हमारी सरकार राज्य के तीज-त्यौहार, कला-संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा दे रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2019 में पहली बार राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का सफल आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य ने किया। कोरोना संक्रमण की वजह से बीते वर्ष इसका आयोजन नहीं हो सका। इस साल सभी लोगों के आग्रह पर राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव एवं राज्योत्सव का आयोजन एक साथ किया जा रहा है।

    कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए संस्कृति मंत्री  अमरजीत भगत ने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से आदिवासी संस्कृति को देश और विश्व पटल पर स्थापित करना है। उन्होंने महोत्सव में भाग लेने के लिए आए विदेशी कलाकारों सहित देश के सभी राज्यों के कलाकारों का छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से स्वागत किया। पर्यटन मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ की संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का एकलौता राज्य है, जो इस तरह का आयोजन कर रहा है। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य सचिव  अमिताभ जैन ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि यह आयोजन, सांस्कृतिक एवं भाषायी विविधता और पुरानी परंपरा को एक सूत्र में पिरोकर, अनेकता में एकता का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के दौरान हम विभिन्न देशों एवं राज्यों से आए कलाकारों की कला का प्रदर्शन देखेंगे, उनका उत्साहवर्धन करेंगे और मेहमान कलाकार छत्तीसगढ़ से सुमधुर यादें अपने साथ लेकर जाएंगे।

    राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर विभिन्न राज्यों एवं देशों से आए नर्तक दलों ने पारंपरिक वेशभूषा एवं वाद्य यंत्रों के साथ आकर्षक मार्चपास्ट किया। इस अवसर पर मंत्री सर्वश्री रविन्द्र चौबे, मोहम्मद अकबर, डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, डॉ. शिव कुमार डहरिया, कवासी लखमा, गुरू रूद्र कुमार,  अनिला भेंड़िया, जयसिंह अग्रवाल, उमेश पटेल, राज्यसभा सांसद  फूलो देवी नेताम, संसदीय सचिवगण और विधायकगण सहित निगमों मण्डलों के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी, अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के साईंस कॉलेज मैदान में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में देश-विदेश के कलाकार पहुचे हैं। कलाकारों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। आज सुबह साईंस कॉलेज मैदान पहंुचे कलाकारों ने मंच पर पहंुचने से पहले मैदान में अपना रिहर्सल किया। कलाकारों ने बताया कि छत्तीसगढ़ आकर वे रोमांचित एवं उत्साहित हैं। यहां उन्हें अपनी कला को प्रदर्शित करने के लिए शानदार मंच है। देश के अंतिम छोर केन्द्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप से आए प्रतिभागी कलाकार मुमताज ने बताया कि हमारी टीम में 20 कलाकार है। कल देर शाम हम रायपुर पहंुचे। यहां पर हमें सभी प्रकार की सुविधाएं छत्तीसगढ़ शासन ने मुहैय्या कराई है। यहां पर किसी प्रकार की कोई तकलीफ नहीं हुई है। हम पहली बार राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। हम रोमांचित और उत्साहित है। हमारे द्वारा बंदिया लोक नृत्य की प्रस्तुति की जाएगी। इसी तरह से हरियाणा के केथल शहर से आए मुस्कान शामी एवं कृष्ण कुमार शर्मा ने बताया कि हमारे द्वारा हरियाणवी लोकनृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। हम कल दोपहर को रायपुर पहंुचे है। प्रशासन द्वारा यहां बेहतर व्यवस्था की गई है।


    यहां पुलिस प्रशासन की व्यवस्था को कलाकारों ने प्रशंसा की तथा कलाकारों के ठहरने, खाने की व्यवस्था की तारीफ की। इसी तरह से पुडुचेरी से आए कलाकार मुरगन ने कहा कि हम पहली बार इस राष्ट्रीय नृत्य महोत्सव में सम्मिलित होकर उत्साहित है। यहां की सभी व्यवस्थाएं उत्कृष्ट है। हमें किसी प्रकार की तकलीफ नहीं हुई। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने प्रतिभागियों से मुलाकात कर कलाकारों का हाल जाना। इस दौरान उन्होंने लक्षद्वीप, पुडुचेरी के कलाकारों के साथ स्वयं रू-ब-रू होकर उनके साथ फोटो सेल्फी लेते हुए उनकी संस्कृति के बारे में जानकारी प्राप्त की। प्रतिभागी कलाकारों ने उत्साह से उन्हें बताया कि हम यहां आकर रोमांचित हैं और अपने आपको गौरावान्वित महसूस कर रहे हैं। आने वाले समय में ऐसे कार्यक्रम देशभर में होना चाहिए।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    सांसद राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के आयोजन की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में देश के आदिवासी कलाकारों को एक मंच प्रदान करते हुए अपनी अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित करने का अवसर दिए जाने पर छत्तीसगढ़ शासन को बधाई दी है।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने आज यहां छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के र्साइंस कॉलेज मैदान में ‘राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव’ एवं ’राज्योत्सव 2021’ का दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। समारोह की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने कार्यक्रम की।

    रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में 28 अक्टूबर से एक नवंबर तक आयोजित होने वाले ‘राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव’ एवं ’राज्योत्सव 2021 समारोह में देश के 27 राज्यों और 6 केन्द्रशासित प्रदेशों के कलाकारों के साथ ही 07 देशों के नाइजीरिया, उजबेकिस्तान, श्रीलंका, यूगांडा, स्वाजीलैण्ड, मालदीप, पेलेस्टाइन और सीरिया से आए विदेशी कलाकार अपनी छटा बिखेरेंगे।

    रायपुर/शौर्यपथ/

    .झारखंड के मुख्यमंत्री  हेमंत सोरेन के राजधानी रायपुर पहुंचने पर स्वामी विवेकानंद विमानतल पर आत्मीय स्वागत किया गया। संस्कृति मंत्री  अमरजीत भगत और उद्योग मंत्रीकवासी लखमा ने उनकी अगुवानी की। उल्लेखनीय है कि झारखंड के मुख्यमंत्री राजधानी रायपुर के सांइस कालेज मैदान में  आज से आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव-छत्तीसगढ़ राज्योत्सव का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल करेंगे

    रायपुर /शौर्यपथ/

    उद्योग मंत्री  कवासी लखमा ने आज सुकमा जिले के प्रवास के दौरान सुदूर वनांचल ग्राम पंचायत किस्टाराम में आयोजित सुविधा शिविर में शामिल हुए।  लखमा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि दूरस्थ क्षेत्र में सुविधा शिविर का संचालन कर ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं और शासकीय योजनाओं का लाभ प्रदाय करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा सुविधा शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस शिविर में अंदरूनी क्षेत्रों के ग्रामीणों का आधार कार्ड, राशन कार्ड, पेंशन पंजीयन, स्वास्थ्य कार्ड आदि अब सहजता से बनने लगा है। मंत्री ने कहा कि आमजन की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता से कार्य करते हुए जिला प्रशासन ने उमदा कार्य किया है। इसी का परिणाम है कि लगभग 20 हजार ग्रामीणों को इन सुविधा शिविर से लाभान्वित किया गया है।

    उद्योग मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री  बघेल के मार्गदर्शन में जिले में विकास कार्यों का विस्तार तेजी से हो रहा है और बस्तर का आदिवासी समुदाय सरकार पर भरोसा करने लगा है। वर्षों से कई क्षेत्र सड़कविहीन और अविद्युतीकृत थे, आज वहाँ चमचमाती सड़के है, विद्युत विस्तार है। सुकमा जिलेवासियों के लिए यह सरकार नए सवेरे की तरह है जिसने आदिवासी जन सामान्य के जीवन में रोशनी लाई है। जिले के कई ऐसे क्षेत्र थे जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच नही थी, आज उन क्षेत्र के ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। माताओं तथा छोटे बच्चों को सुपोषित आहार प्रदान करने नवीन आंगनबाड़ी केन्द्र का संचालन, अंदरुनी क्षेत्रों के बच्चों को स्कूली शिक्षा सुलभ करने, वर्षों से बन्द पड़े स्कूलों का पुनः संचालन शिक्षादूत के माध्यम से किया जा रहा है, वहीं संवेदनशील क्षेत्रों जैसे जगरगुण्डा, भेज्जी में स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। मंत्री श्री लखमा ने अधिकारियों को आगामी दिवसों में ग्राम पंचायत वार सुविधा शिविर का आयोजन करने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रत्येक पंचायत में शत प्रतिशत व्यक्तियों को लाभ मिले। इस दौरान बीजापुर विधायक  विक्रम शाह मण्डावी, सुकमा नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष  जगन्नाथ साहू, सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    रबी सीजन 2021-22 में दलहन फसलों की बोनी का सिलसिला तेजी से शुरू हो गया है। अब तक 11 हजार 450 हेक्टेयर रकबे में विभिन्न प्रकार की दलहन फसलों की बोनी हो चुका है। इस साल राज्य में 8 लाख 20 हजार हेक्टेयर में दलहन फसलों की बोनी का लक्ष्य है, जो गत वर्ष राज्य में 7 लाख 52 हजार हेक्टेयर में हुई दलहन फसलों की खेती की तुलना में 68 हजार हेक्टेयर अधिक है।

    कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस साल रबी सीजन में चना की बोनी 4 लाख हेक्टेयर में, मटर की 55 हजार हेक्टेयर, मसूर की 40 हजार हेक्टेयर, मूंग की 35 हजार, उड़द की 30 हजार, तिवडा की 2 लाख 30 हजार तथ कुल्थी की 30 हजार हेक्टेयर मे बुआई का लक्ष्य है। इसके विरूद्ध अब तक चना, मटर, मसूर, तिवडा, कुल्थी एवं अन्य दलहन की फसलों की 11 हजार 450 हेक्टेयर में बुआई हो चुकी है।

    रायपुर /शौर्यपथ/

     वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  मोहम्मद अकबर के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में हाथी-मानव द्वंद पर नियंत्रण के उद्देश्य से विभाग द्वारा चलाये जा रहे महत्वपूर्ण अभियान के तहत 27 अक्टूबर को सूरजपुर वनमण्डल के प्रतापपुर बीट में एक और मादा हाथी का सफलतापूर्वक रेडियो कॉलर किया गया। ज्ञात हो कि तीन दिवस पूर्व ही 24 अक्टूबर को सरगुजा वृत्त के सूरजपुर वनमण्डल के मोहनपुर, कक्ष क्रमांक पी 2552 में एक मादा हाथी को सफलतापूर्वक रेडियो कॉलर किया गया है।
    गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून की संयुक्त परियोजना के तहत मानव-हाथी द्वंद को कम करने के उद्देश्य से हाथियों के विचरण की जानकारी प्राप्त करने हेतु हाथियों का रेडियो कॉलरिंग करने के अभियान जारी है। इसके तहत दिनांक 27.10.2021 को सरगुजा वृत्त के सूरजपुर वनमण्डल के प्रतापपुर बीट कक्ष क्र. आरएफ 36 में एक मादा हथनी को रेडियो कॉलरिंग करने में सफलता प्राप्त हुई है।

    वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  मोहम्मद अकबर के निर्देश पर तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  राकेश चतुर्वेदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी)  पी. वी. नरसिंग राव के मार्गदर्शन में वन विभाग की स्थानीय टीम तथा साइंटिस्ट-एफ डॉं. पराग निगम, भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून एवं उनकी टीम, तमिलनाडु के डॉ. मनोहरन द्वारा रेडियो कॉलरिंग का कार्य किया जा रहा है। आज 27 अक्टूबर को सूरजपुर वनमण्डल के प्रतापपुर से बनारस रोड, ग्राम सरहरी जंगल, परिक्षेत्र प्रतापपुर, कक्ष क्र. आर. एफ. 36 प्रतापपुर बीट में हाथी दल जिसमें 09 हाथी विचरण कर रहे थे, में से एक हथिनी उम्र 30-35 वर्ष की पहचान कर कुमकी हाथी राजू एवं दुर्योधन के सहयोग से पूर्वान्ह 11ः45 बजे डार्ट किया गया। रेडियोे कॉलरिंग की प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात् हाथी दोपहर लगभग 1ः00 बजे अपने दल में वापस मिल गया।

    प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी)  पी. वी. नरसिंग राव द्वारा अभियान की लगातार समीक्षा करते हुए रणनीति तैयार कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। इस अभियान में मुख्य वन संरक्षक सरगुजा वृत्त  अनुराग श्रीवास्तव, वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं फील्ड डायरेक्टर (एलीफेंट रिजर्व) सरगुजा डॉं. के. मेचियो, भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून की टीम, अधीक्षक तमोर पिंगला अभ्यारण्य जयजीत केरकेट्टा, परिक्षेत्र अधिकारी पिंगला  अजय सोनी एवं परिक्षेत्र अधिकारी प्रतापपुर श्री लक्ष्मी नरायण ठाकुर, डॉ. पी.के. चंदन, डॉ. सी.के. मिश्रा, डॉ. राकेश वर्मा,  लक्ष्मी नारायण,  अंकित,  समर्थ मंडल,  प्रभात दुबे एवं वन विभाग के मैदानी अमले सहित कुमकी हाथी राजू एवं दुर्योधन के महावतों का योगदान सराहनीय रहा।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में भाग लेने रायपुर आए फिलीस्तीन और श्रीलंका के कलाकारों नेे आज रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में छत्तीसगढ़ी गाने के साथ फ्यूजन डांस का वीडियो शूट किया। छत्तीसगढ़ी कलाकारों के साथ इन विदेशी कलाकारों के फ्यूजन डांस में विभिन्न संस्कृति का एक मेल दिखाई देगा। इसी तरह सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कई बेहतरीन अवसर 28 अक्टूबर से शुरू हो रहे तीन दिवसीय राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में देश-विदेश के कलाकारों को मिलेंगे। इससे मेहमान कलाकारों को न सिर्फ छत्तीसगढ़ की कला और परम्परा को करीब से जानने का मौका मिलेगा बल्कि यह मंच छत्तीसगढ़िया संस्कृति और परम्परा को ग्लोबल पहचान देगा।

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