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रायपुर /शौर्यपथ/
मंत्री डॉ डहरिया ने तिल्दा-नेवरा में जिन विकास एवं निर्माण कार्याें का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया
नगरीय विकास एवं प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया ने आज रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत करीब 2 करोड़ 30 लाख 23 हजार रूपए की लागत के विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्योें का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। उन्होंने तिल्दा नेवरावासियों को इस मौके पर बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शहरी क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण इलाकों में जनसामान्य को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। कोरोना काल के बावजूद भी राज्य के सभी क्षेत्रों में विकास एवं निर्माण के कार्य अनवरत रूप से जारी रहे हैं। आने वाले दिनों में विकास के कामों में और तेजी आएगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य में विकास एवं निर्माण के लिए किसी भी तरह की कोई कमी नहीं आएगी। कार्यक्रम के प्रारंभ में मंत्री डॉ. डहरिया का नगर पालिका के पदाधिकारी सहित क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने आत्मीय एवं भव्य स्वागत किया गया।
नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. डहरिया ने तिल्दा-नेवरा नगर पालिका के वार्ड 6 में 20 लाख 96 हजार रूपए की लागत से बने पौनी पसारी चबूतरा का लोकार्पण किया।
मंत्री डॉ डहरिया ने तिल्दा-नेवरा में जिन विकास एवं निर्माण कार्याें का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया, उनमें पौनी-पसारी योजना के तहत पसरा निर्माण, गौठान निर्माण, मंगल भवन, तालाब गहरीकरण सहित अन्य कार्य शामिल हैं। डॉ. डहरिया तिल्दा-नेवरा के तहसील साहू संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए और मुरा गांव का दौरा कर लोगों से मुलाकात की और विकास कार्यों की जानकारी ली।
नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. डहरिया ने तिल्दा-नेवरा नगर पालिका के वार्ड 6 में 20 लाख 96 हजार रूपए की लागत से बने पौनी पसारी चबूतरा का लोकार्पण किया। इसी तरह से वार्ड क्रमांक 22 में नरवा, गरवा, घुरूवा और बाड़ी योजना के अंतर्गत 18 लाख 92 हजार रूपए की लागत से बने गौठान का लोकार्पण भी किया। उन्होंने तिल्दा में एक करोड़ 28 लाख की लागत से बने डॉ. भीमराव अंबेडकर सर्व समाज मांगलिक भवन का लोकार्पण किया। डॉ. डहरिया ने वार्ड क्रमांक 20 में राज्य प्रवर्तित योजना के अंतर्गत 36 लाख रूपए की लागत से बने बननू बाई तालाब एवं तालाब गहरीकरण, सौंदर्यीकरण एवं पचरीकरण कार्य का लोकार्पण किया। इसी तरह से नगरीय प्रशासन मंत्री ने पौनी पसारी भूमिपूजन 26 लाख 33 हजार रूपए की लागत से बनने वाले पौनी पसारी के निर्माण कार्याें का भूमिपूजन भी किया। इस अवसर पर नगर पालिका तिल्दा की अध्यक्ष गुरू लेमिक्षा डहरिया जी, खुशवंत साहेब, जनक राम, महेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
आदिवासी समुदाय प्रकृति प्रेमी होते हैं। उनकी जीवनशैली सरल और सहज होती है।
आदिवासी समुदाय प्रकृति प्रेमी होते हैं। उनकी जीवनशैली सरल और सहज होती है। इसकी स्पष्ट छाप उनकी कला, संस्कृति, सामाजिक उत्सवों और नृत्यों में देखने को मिलती है। प्रकृति से जुड़ा हुआ यह समुदाय न केवल उसकी उपासना करता है, बल्कि उसे सहेजकर भी रखता है। ऐसा ही एक समुदाय गोंड़ जनजाति है। जिसकी कई उपजातियां हैं। जिनके रीति-रिवाजों में लोक जीवन के अनेक रंग देखने को मिलते हैं।
धुरवा जनजाति गोंड जनजाति की उपजाति है। धुरवा जनजाति छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर, दंतेवाडा तथा सुकमा जिले में निवास करती है। बांस के बर्तन एवं सामग्री बनाने मंे दक्षता के कारण धुरवा जनजाति को ‘बास्केट्री ट्राइब‘ अर्थात ‘बांस का कार्य‘ करने वाली जनजाति की संज्ञा दिया गया है। सन् 1910 के बस्तर के प्रसिद्ध (आदिवासी विद्रोह ‘भूमकाल के नायक शहीद वीर गुण्डाधुर की सेना द्वारा मड़ई नृत्य के माध्यम से अपनी भावना जनसामान्य तक पहुंचाने के लिए इसे मेला मड़ई में प्रदर्शित करते थे।
धुरवा युवक-युवतियां वीर रस से परिपूर्ण होकर मड़ई नृत्य करते हैं, पुरूष हाथ में कुल्हाडी एवं मोरपंख का गुच्छा (मंजूरमूठा) लेकर उंगली से मुंह से सुईक-सुईक की आवाज निकाल कर दुश्मनों को ललकारते हुए नृत्य करते है। युवतियां-युवकों के पीछे-पीछे लय मिलाते हुए सामूहिक रूप में नृत्य करती हैं। नृत्य के दौरान हाथ में मोर पंख का गुच्छा (मंजूरमूठा) रखते हैं।
मुरिया जनजाति छत्तीसगढ़ राज्य के दक्षिण मंे स्थित बस्तर संभाग में निवास करती है। मुरिया जनजाति गोड़ जनजाति की उपजाति हैं। मुरिया जनजाति के तीन उपभाग- राजा मुरिया, झोरिया मुरिया तथा घोटूल मुरिया होते है। रसेल एवं हीरालाल के ग्रंथ द टाइब्स एंड कास्टस ऑफ द सेन्टल प्रोविसेंस ऑफ इंडिया भाग-3, 1916 के अनुसार बस्तर के गोंड, मुरिया एवं माडिया दो समूह में बंटे हुए है। मुरिया शब्द की व्युत्पत्ति ‘मूर‘ अर्थात बस्तर के मैदानी क्षेत्रों में पाये जाने वाले पलाश वृक्ष या ‘मुर‘ अर्थात जड़ शब्द से हुई है‘‘। एक अन्य मान्यता के अनुसार ‘मूर‘ अर्थात ‘मूल‘ निवासी को मुरिया कहा जाता है।
वर्तमान में ग्राम देवी की वार्षिक, त्रि-वार्षिक पूजा के दौरान मड़ई नृत्य करते हैं
‘मड़ई लोक-नृत्य‘
वर्तमान में ग्राम देवी की वार्षिक, त्रि-वार्षिक पूजा के दौरान मड़ई नृत्य करते हैं, इसमें देवी-देवता के जुलूस के सामने मड़ई नर्तक दल नृत्य करते है एवं पीछे-पीछे देवी-देवता की डोली, छत्रा, लाट आदि प्रतीकों को जुलूस रहता है। मड़ई के अगले दिन मड़ई नर्तक दल ग्राम के सभी घरों में जाकर मड़ई नृत्य करते हैं, जिसे ‘बिरली‘ कहते हैं। ग्रामवासी मड़ई नर्तक दल को धान, महुआ और रूपए देते हैं। नृत्य के समापन के पश्चात ग्राम के मुखिया के साथ नर्तक दल भोज करता है और खुशियां मनाता हैं। नृत्य में धुरवा पुरूष सफेद शर्ट, काला हाफ कोट, धोती या घेरेदार लहंगा के साथ कपड़े मंे सिला हुआ कमर बंद या सिर में तुराई, पेटा (पगड़ी), मोर पंख, तुस (कपड़े से बनी पतली पट्टी), गले में विभिन्न प्रकार की मालाएं, पैरों में झाप (रस्सी में बंधा हुआ घुंघरू) का श्रृंगार करते हैं।
महिलाएं ब्लॉउज तथा पाटा, साड़ी पहनती हैं। बालों के खोंसा (जूडे़ में) कांटा, पनिया (बांस की कंघी), गले में चीप माला, सूता तथा बाजार में मिलने वाली विभिन्न प्रकार की मालाएं, कान में खिलवां, बांह में बांहटा, कलाई मंे झाडू तथा पैरों में पायल धारण करती हैं। मड़ई नृत्य वाद्य यंत्र हेतु ढोल, तुडबुड़ी, बांसुरी, किरकिचा, टामक, जलाजल, तोड़ी का उपयोग किया जाता है। नृत्य का प्रदर्शन मेला-मड़ई, धार्मिक उत्सव तथा मनोरंजन अवसर पर किया जाता है।
‘‘विवाह नृत्य‘‘
धुरवा जनजाति विवाह के दौरान विवाह नृत्य करते हैं। विवाह नृत्य वर-वधू दोनों पक्ष में किया जाता है। विवाह नृत्य तेल-हल्दी चढ़ाने की रस्म से प्रारंभ कर पूरे विवाह में किया जाता है। इसमें पुरूष और स्त्रियां समूह मंे गोल घेरा बनाकर नृत्य करते हैं। पुरूष सफेद शर्ट, काला हाफ कोट, धोती या घेरेदार लहंगा के साथ कपड़े में सिला हुआ कमर बंद या सिर में तुराई, पेटा (पगड़ी), मोर पंख, तुस (कपड़े से बनी पतली पट्टी), गले में विभिन्न प्रकार की मालाएं, पैरों में झाप (रस्सी में बंधा हुआ घुंघरू) का श्रृंगार करते हैं।
महिलाएं ब्लॉउज तथा पाटा, साड़ी पहनती है बालों के खोंसा (जूड़े में) कांटा, पनिया (बांस की कंघी), गले में चीप माला, सूता तथा बाजार में मिलने वाली विभिन्न प्रकार की मालाएं, कान में खिलवां, बांह में बांहटा, कलाई में झाडू तथा पैरों में पायल का श्रृंगार करती है। नृत्य के दौरान हाथ में मोरपंख का गुच्छा (मंजूरमूठा) रखती हैं। मड़ई नृत्य में ढोल, तुडबुड़ी, बांसुरी, किरकिचा, टामक, जलाजल, वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया जाता है। नृत्य विवाह के अवसर पर तथा मनोरंजन हेतु किया जाता है।
‘गेड़ी नृत्य‘
मुरिया जनजाति के सदस्य नवाखानी त्यौहार के दौरान के दौरान लगभग एक माह पूर्व से गेड़ी निर्माण प्रारंभ कर सावन मास के हरियाली अमावस्या से भादो मास की पूर्णिमा तक गेड़ी नृत्य किया जाता है। गेड़ी नृत्य नवाखानी त्यौहार के समय करते हैं। इसमें मुरिया युवक बांस की गेंड़ी में गोल घेरा में अलग-अलग नृत्य मुद्रा में नृत्य करते हैं। नृत्य के दौरान युवतियां गोल घेरे में गीत गायन करती है। पूर्व समय ग्राम में बारिश के दिनों में ग्राम में अधिक कीचड़ होता था, ऐसी स्थिति में गेड़ी के माध्यम से एक दूसरे स्थान पर जाते है। पूर्व में ऊंचे-ऊंचे गेड़ी का निर्माण करते थे।
गेड़ी नृत्य के समय मुरिया जनजाति की महिलाएं लुगड़ा या साड़ी, पुरूष काले रंग की फूल शर्ट, प्लास्टिक की लंबी माला, इसे दोनों कंधें से छाती एवं पीठ में क्रास स्थिति में पहनते हैं। कमर में कपड़े में सिला हुआ कमर बंद या पट्टा, कमर के नीचे लाल-पीले रंग का घेरेदार लहंगा सिर में लाल पगड़ी, मोर पंख या पंखों का गुच्छा, कपड़े में सिला हुआ कपड़े से बने फूलों की पट्टी, गले में कपड़े के लाल गुच्छों की माला और अन्य माला, पैरों में घुंघरू (रस्सी में बंध अुआ) का श्रृंगार करते हैं।
वाद्य यंत्रों में बांस से बना गेंड़ी का मुख्य रूप से उपयोग किया जाता है। जिसे विभिन्न रंगों से रंग कर सजाया जाता है। साथ ही वादक मांदरी, तुडबुडी, विसिल या सीटी एवं बांसुरी का उपयोग नृत्य में करते है।
गेंड़ी नृत्य विवाह, मेला-मंड़ई, धार्मिक उत्सव के अवसर तथा मनोरंजन के लिए करते हैं। गेंड़ी नृत्य युवाओं को नृत्य है। गेंड़ी नृत्य संतुलन, उत्साह तथा रोमांस से परिपूर्ण है। मुरिया जनजाति में गेंड़ी के अनेक खेल, गेंड़ी दौड़ आदि प्रतियोगिता होती है। जिसमें पुरूष गेंड़ी पर चढ़कर नृत्य करते हैं।
‘गवरमार नृत्य‘
गंवरमार नृत्य में मुरिया जनजाति के नर्तक दल गौर-पशु मारने का प्रदर्शन करते है। यह नाट्य तथा नृत्य का सम्मिलित रूप है। इस नृत्य में दो व्यक्ति वन में जाकर गौर-पशु का शिकार करने का प्रयास करते है, किन्तु शिकार के दौरान गौर-पशु से घायल होकर एक व्यक्ति घायल हो जाता है। दूसरा व्यक्ति गांव जाकर पुजारी(सिरहा) को बुलाकर लाता है जो देवी आह्वान तथा पूजा कर घायल व्यक्ति को स्वस्थ्य कर देता है तथा दोनों व्यक्ति मिलकर गंवर पशु का शिकार करते है। इसी के प्रतीक स्वरूप गवंरमार नृत्य किया जाता है।
महिलाएं लुगड़ा या साड़ी, पुरूष काले रंग की फूल शर्ट, प्लास्टिक की लंबी माला, इसे दोनों कंधों से छाती व पीठ में क्रास की स्थिति में पहनते हैं कमर में कपड़े में सिला हुआ कमरबंद या पट्टा कमर के नीचे लाल-पीले रंग का घेरेदार लहंगा, सिर में लाल पगड़ी मोर पंख या पंखों का गुच्छा, कपड़े में सिला हुआ कपड़े से बने फूलों की पट्टी, गले में कपड़े के लाल गुच्छों की माला एवं अन्य माला, पैरों में घुंघरू (रस्सी में बंधा हुआ) का श्रृंगार करते है।
वाद्य यंत्रों में ढोलक, तुडबुडी, सिटि, बांसुरी आदि का प्रयोग किया जाता है। नृत्य का प्रदर्शन मुरिया जनजाति के सदस्य गंवरमार मेला-मंडई, धार्मिक उत्सव के अवसर पर तथा मनोरंजन के लिए किया जाता है।
रायपुर /शौर्यपथ/
राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजनांतर्गत केेले की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर लागत पर 50 हजार रूपए का अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। वर्ष 2021-22 में राज्य में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत एक हजार यूनिट (एक हजार हेक्टेयर) यूनिट लक्ष्य है। केले की व्यवसायिक खेती के इच्छुक कृषक अपने इलाके के उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से सम्पर्क कर विस्तृत जानकारी एवं योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। गौरतलब है कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन अंतर्गत केले की व्यवसायिक खेती की प्रति हेक्टेयर 1 लाख 25 हजार रूपए की इकाई लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान दिए जाने का प्रावधान है।
राज्य में वर्ष 2019-20 में लगभग 720 कृषकों द्वारा 1293 हेक्टेयर क्षेत्र में केला टिश्यु कल्चर पौध का रोपण कर 3 लाख 88 हजार टन केले का उत्पादन किया गया। वर्ष 2021-22 में भी केला क्षेत्र विस्तार हेतु 1000 ई. का लक्ष्य रखा गया है। उद्यानिकी विभाग द्वारा राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत बालोद, बलौदाबाजार, बलरामपुर, बेमेतरा, बिलासपुर, दुर्ग, गरियाबंद, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, जगदलपुर, जशपुर, कबीरधाम, कोण्डागांव, कोरबा, कोरिया, मुंगेली, रायगढ़, रायपुर, राजनांदगांव, सूरजपुर एवं सरगुजा जिला शामिल हैं। राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के घटक केला क्षेत्र विस्तार से कृषकों को लाभान्वित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य में मुख्यतः केले की प्रजाति जी-9 किस्म का रोपण व्यवसायिक खेती के लिए बहुतायत रूप से किया जाता है। कृषक केले के पौधों को एक बार अपने खेत में लगाकर 2-3 साल तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। राज्य में प्रति हेक्टेयर औसतन 3 हजार केले पौधे को रोपित कर 250-500 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। प्रति हेक्टेयर केले की व्यवसायिक खेती पर औसतन एक लाख 10 हजार रूपए की लागत आती है, जबकि तीन वर्षाें तक इससे लगातार फलत्पादन प्राप्त कर 5 लाख से 10 लाख रूपए तक का मुनाफा अर्जित किया जा सकता है।
रायपुर /शौर्यपथ/
उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने मंगलवार को रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखण्ड अंतर्गत विभिन्न ग्रामों का भ्रमण किया और एक करोड़ 2 लाख 25 हजार की लागत वाले विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमिपूजन किया। जिसमें 61 लाख 43 हजार रुपये की लागत वाले कार्यों का लोकार्पण एवं 40 लाख 82 हजार रुपये का भूमिपूजन कार्य शामिल है। इस दौरान पटेल ने ग्रामवासियांे को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जनकल्याण के लिए चलाए जा रहे विभिन्न विकासकार्यों और योजनाओं के बारे में जानकारी देने के साथ ही ग्रामवसियों की समस्याओं से अवगत हुए तथा इसके शीघ्र निराकरण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।
उच्च शिक्षामंत्री पटेल मंगलवार को पुसौर विकासखण्ड अंतर्गत धनगांव, तोरना, घुघवा, रावनखोदरा, सेमीभांवर व सेमरा गांव पहुंचकर ग्रामवासियो से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने ग्रामवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ लोगों के विकास के लिए समर्पित है। पटेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की बड़ी आबादी गांवों में निवास करती है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार निरंतर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए योजनाओं का प्राथमिकता से निर्माण और क्रियान्वयन कर रही है। इसी परिप्रेक्ष्य में सरकार वनोपज समर्थन मूल्य में वृद्धि कर एवं राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से किसानों, ग्रामीणों एवं आदिवासियों के आय में वृ़िद्ध कर रही है। उन्होंने भूमिहीन श्रमिक परिवारों को राज्य सरकार द्वारा 6 हजार रूपए प्रतिवर्ष दिए जाने के संबंध मे जानकारी देने के साथ ही सभी पात्र लोगों को जल्द पंजीयन कराने की अपील की। उन्होंने आगे कहा कि गांवों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए घर-घर तक नल कनेक्शन दिया जा रहा है। इसके साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, कुपोषण मुक्ति की दिशा में भी व्यापक स्तर पर कार्य हो रहा है।
इन कार्यों का हुआ लोकार्पण व भूमिपूजन- उच्च शिक्षामंत्री पटेल ने 61 लाख 43 हजार रुपये के विभिन्न कार्यों का लोकार्पण किया। जिसमें ग्राम सेमरा में 12 लाख 44 हजार रुपये की लागत से प्राथमिक शाला एवं माध्यमिक शाला में अहाता निर्माण कार्य, सेमरा में 6 लाख 20 हजार रुपये की लागत से मुक्तिधाम निर्माण एवं 16 लाख 74 हजार रुपये की लागत से गोठान निर्माण, ग्राम-धनगांव में 3 लाख रुपये की लागत से सांस्कृतिक शेड निर्माण कार्य, घुघवा में 6 लाख 20 हजार रुपये की लागत से मुक्तिधाम निर्माण कार्य, रावनखोदरा में 16 लाख 85 हजार रुपये की लागत से सीसी रोड निर्माण का कार्य शामिल है
इसी तरह पटेल ने 40 लाख 82 हजार रुपये की लागत से 10 कार्यों का भूमिपूजन किया। जिसमें ग्राम-सेमरा में 01 लाख रुपये की लागत से मंदिर तालाब डीपापारा पचरी निर्माण कार्य, 01 लाख रुपये की लागत से माझापारा में चबुतरा निर्माण कार्य, 4 लाख 60 हजार रुपये की लागत से सीसी रोड निर्माण कार्य, ग्राम-तोरना में 2 लाख रुपये की लागत से बोर खनन एवं पंप स्थापना, धनगांव में 9 लाख 12 हजार रुपये की लागत से सीसी रोड निर्माण एवं 4 लाख 50 हजार रुपये की लागत से बाजार शेड निर्माण कार्य, ग्राम-रावनखोदरा में 3 लाख रुपये की लागत से सांस्कृतिक शेड निर्माण कार्य एवं 15 लाख 60 हजार रुपये की लागत से सीसी रोड निर्माण कार्य शामिल है।
इस मौके पर बीज निगम सदस्य दिलीप पाण्डेय, जिला पंचायत अध्यक्ष निराकार पटेल, जिला पंचायत सदस्य आकाश मिश्रा, अध्यक्ष जनपद पंचायत पुसौर सुशील भोय, उपाध्यक्ष जनपद पंचायत पुसौर गोपी चौधरी, सदस्य जनपद पंचायत रूपा दिनेश पटेल, अनुसुईया चौहान, सरपंच ग्राम पंचायत नावापारा (माण्ड) मंजु भानुप्रताप नायक, सरपंच घुघवा सरस्वती डनसेना, लिटाईपाली सरपंच लता चौहान, सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।
रायपुर /शौर्यपथ/
झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 28 अक्टूबर को राजधानी रायपुर के साईंस कॉलेज मैदान में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव एवं राज्योत्सव 2021 का उद्घाटन करेंगे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे।
झारखण्ड के मुख्यमंत्री सोरेन 28 अक्टूबर को पूर्वान्ह 11.15 बजे रायपुर के स्वामी विवेकानंद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंचकर साईंस कॉलेज मैदान के लिए प्रस्थान करेंगे और वहां 11.45 बजे आयोजित समारोह का उद्घाटन करेंगे तथा यहां आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री सोरेन अपरान्ह 4.30 बजे साईंस कॉलेज मैदान से स्वामी विवेकानंद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा के लिए प्रस्थान करेंगे और वहां से शाम 5 बजे विमान द्वारा रांची (झारखण्ड) के लिए प्रस्थान करेंगे।
रायपुर /शौर्यपथ /
राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके से राजभवन में संत रावतपुरा सरकार ने मुलाकात की। इस अवसर पर राज्यपाल ने उन्हें प्रतीक चिन्ह भेंट किया।
दुर्ग । शौर्यपथ । भाजपा नेता अतुल पर्वत ने आज राजभवन पहुँच छत्तीसगढ़ की महामहिम राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके जी से सौजन्य मुलाक़ात की।Governor Chhattisgarh जी को पुष्पगुच्छ देकर उनसे आशीर्वाद लिया, इस अवसर पर अतुल पर्वत ने दीपावली के पूर्व महामहिम राज्यपाल जी को दीपावली व अन्य सभी पर्व की बधाई शुभकामनाएं दी। साथ ही #bhilaiCanDo के द्वारा समाज में नये कार्य व त्योहारों में माननीय प्रधानमंत्री Narendra Modi जी की मुहिम #VocalForLocal को ध्यान में रखते हुए गरीब भाई बहन कारीगर से बने हुए सामान चीजों का ही ले,इस पर भी bhilaicando की टीम कार्य कर रही है।आदि विभिन्न विषयों से अवगत कराया।
रायपुर /शौर्यपथ/
सामुदायिक बाड़ी, मत्स्य पालन कर रही महिलाएं
सुराजी गांव योजना सुदूर वनांचल ग्रामीण क्षेत्रों में महिला जागृति एवं सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर है। स्वसहायता समूह की महिलाओं ने एकता और आत्मविश्वास से स्वावलंबन के लिए कदम आगे बढ़ाएं है। राजनांदगांव जिले में स्वसहायता समूह की महिलाओं का कारंवा उन्नति की ओर अग्रसर है। छुरिया विकासखंड के ग्राम मासूल आदर्श गौठान की महिलाएं विभिन्न तरह की गतिविधियों से आर्थिक दृष्टिकोण से मजबूत बन रही हैं। इंदिरा स्वसहायता समूह महिलाओं ने वर्मी कम्पोस्ट निर्माण व वर्म बीज उत्पादन तथा बोरी विक्रय के कार्य से प्राप्त लाभांश राशि से मिनी राईस मिल व मल्ट्रीग्रेन मशीन खरीद ली है। जिससे उनकी आमदनी में बढ़ोत्तरी हुई है। इस मशीन के माध्यम से आटा पीसने, मसाला बनाना, भीगे उड़द की पिसाई एवं दाल के छीलके निकालने का कार्य किया जा रहा है।
सुराजी गांव योजना ग्रामीण क्षेत्रों में महिला जागृति एवं सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर
कलेक्टर श्री तारन प्रकाश सिन्हा ने महिला समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गौठान में सभी तरह की गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए हैं। जिसका सुखद परिणाम यह है कि गौठानों में एक साथ कई तरह की गतिविधियों के संचालन से महिलाओं के आय में वृद्धि हुई है। गौठान की बाड़ी में मां दुर्गा स्वसहायता समूह द्वारा सामुदायिक बाड़ी में विविध सब्जियां जिमीकंद, कद्दू, लौकी, अदरक एवं मुनगे के पौधे लगाएं गए है। फल एवं सब्जियों की मल्टीलेयर खेती की जा रही है। शीतला स्वसहायता समूह की महिलाएं मत्स्य पालन कर रही हैं। वहीं पूर्णिमा स्वसहायता समूह द्वारा मशरूम उत्पादन का कार्य संचालित है। मासूल गौठान में मुर्गी पालन के लिए शेड का निर्माण भी किया गया है।
रायपुर /शौर्यपथ/
संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत आज दोपहर राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के लिए तैयार हो रहे मुख्य मंच और शासकीय विभागों के स्टालों सहित अन्य व्यवस्थाओं की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने मुख्य समारोह स्थल के साथ-साथ विभागीय स्टालों में बिजली-पानी, साज-सज्जा सहित आगंतुकों के आने-जाने के व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था सहित सभी आवश्यक पहलुओं की बारीकी से निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 28 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक आकर्षक राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जाना है। इस संबंध में सभी आवश्यक तैयारी पूर्ण कर ली जाये। इसके अलावा एक नवम्बर को 21वां राज्य स्थापना दिवस पर राज्य अलंकरण समारोह का भी आयोजन किया जाना है। इस दृष्टिकोण से सभी आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मंत्री भगत ने पार्किंग व्यवस्था, चिकित्सा सुविधा केंद्र, पुलिस नियंत्रण कक्ष सहित सभी जरूरी तैयारियां पूर्ण रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए। इस मौके पर जनप्रतिनिधिगण सहित संस्कृति विभाग के संचालक विवेक आचार्य व संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
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