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रायपुर /शौर्यपथ/
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आदिवासियों एवं वनाश्रितों के जीवन में बदलाव लाने के लिए शुरु की गई विभिन्न योजनाओं ने आदिवासी क्षेत्रों में विश्वास के वातावरण की बहाली हुई है। प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों में शांति, विकास और समृद्धि के नये वातावरण का निर्माण हुआ है। वनभूमि अधिकार पत्र वितरण करने, लघु वनोपज संग्रहण करने, उनका वैल्यू एडीशन करने, तेंदूपत्ता संग्राहकों की आय में बढ़ोतरी करने, लघु धान्य फसलों का समर्थन मूल्य घोषित करने जैसे कदमों से राज्य शासन ने आदिवासी क्षेत्रों में विकास के नये दरवाजे खोल दिए हैं।
वनवासियों को वन भूमि अधिकार पट्टा देने के मामले में छत्तीसगढ़ पूरे देश में अव्वल राज्य है। छत्तीसगढ़ में अब तक 04 लाख 41 हजार 500 से अधिक लोगों को व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। इसके माध्यम से 03 लाख 60 हजार 6 सौ हेक्टेयर से अधिक भूमि का अबंटन किया गया है। 2 हजार 617 ग्राम सभाओं को सामुदायिक वन संसाधन अधिकार दिए गए हैं। इनके माध्यम से 10 लाख 60 हजार 738 हेक्टेयर क्षेत्र में वनवासी ग्रामीणों को वन संसाधन का अधिकार प्राप्त हुआ है।
वन अधिकार पट्टा धारकों वन अधिकार पट्टा धारकों के जीवन को खुशहाल बनाने के लिए राज्य शासन द्वारा भूमि समतलीकरण, मेड़ बांधन, सिंचाई सुविधा के साथ-साथ खाद-बीज एवं कृषि उपकरणों संबंधी सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है। तेंदूपत्ता और लघु वनोपज संग्रहण के जरिये वनवासियों की आय में बढ़ोतरी की गई है। लघु वनोपजों के वैल्यू एडीशन के लिए 139 वन धन केंद्रों का संचालन राज्य में किया जा रहा है। इनके अलावा सुराजी गांव योजना के तहत गांव-गांव में बने गोठानों में भी वैल्यू एडीशन किया जा रहा है। वनक्षेत्रों में लघु वनोपजों एवं वनौषधियों से तैयार उत्पादों की बिक्री वन विभाग के संजीवनी काउंटर के साथ-साथ निजी दुकानों में भी की जा रही है। हाल ही में शुरु की गई श्री धन्वंतरी जैनेरिक मेडिकल स्टोर्स योजना के तहत प्रदेश में खोले गए मेडिकल स्टोरों में भी इन उत्पादों की बिक्री की जा रही है। ये उत्पाद अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफार्मों के माध्यम से भी देशभर में बेचे जा रहे हैं।
ये उत्पाद अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफार्मों के माध्यम सेकोरोना संकट काल में भी राज्य में लघु वनोपज और तेंदूपत्ता संग्रहण का काम चलता रहा। तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य इस वर्ष, यानी 2021 में भी सुचारू रूप से चल रहा है। 12 लाख 14 हजार से ज्यादा संग्राहकों से 13 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण कर उन्हें 520 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। तेंदूपत्ता संग्रहण दर में बढ़ोतरी किए जाने से वर्ष 2019 में 13 लाख 51 हजार से ज्यादा परिवारों को 225 करोड़ 75 लाख रुपए की अतिरिक्त आय तेंदूपत्ता संग्रहण के समय ही प्राप्त हुई थी। वर्ष 2019 में लाभ में रही 595 समितियों के 8 लाख 34 हजार से ज्यादा संग्राहकों को 70 करोड़ 88 लाख रुपए के बोनस का भुगतान हाल ही में किया गया।
वर्ष 2018 के लिए भी 728 समितियों के 11 लाख 48 हजार संग्राहकों को 232 करोड़ रुपए का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में पिछले साल किया गया था। तेंदूपत्ता संग्राहकों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए राज्य में शहीद महेंद्र कर्मा तेंदूपत्ता सामाजिक सुरक्षा योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत 12 लाख 50 हजार परिवारों को सामाजिक सुरक्षा कवच प्राप्त है। राज्य शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले लघु वनोपजों की संख्या 07 से बढ़ाकर अब 52 कर दी गई है। इसके अलावा कोदो-कुटकी-रागी जैसी लघु धान्य फसलों का भी समर्थन मूल्य शासन द्वारा घोषित कर दिया गया है। इन फसलों का भी वैल्यू एडीशन स्थानीय स्तर शुरु करने के लिए यूनिटों की स्थापना की गई है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत खरीफ की सभी फसलों, उद्यानिकी की फसलों, वृक्षारोपण के साथ-साथ कोदो-कुटकी और रागी बोने वाले किसानों को भी लाभान्वित किया जा रहा है।
धमतरी /शौर्यपथ/
जिला जल एवं स्वच्छता समिति के तहत जलजीवन मिशन के अंतर्गत स्वीकृत विभिन्न कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई, साथ ही अनुमोदन भी किया गया। जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रियंका महोबिया की अध्यक्षता में आज सुबह कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आहूत बैठक में लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता ने बताया गया कि रेट्रोफिटिंग जलप्रदाय योजना के 262 के लक्ष्य के विरूद्ध सभी योजनाओं की तकनीकी एवं प्रशासकीय मिल चुकी है तथा 115 का कार्य आदेश जारी हो चुका है और 147 के निविदा आमंत्रण की प्रक्रिया जारी है। इनमें से 102 कार्य प्रगतिरत हैं। इसी तरह सिंगल विलेज जलप्रदाय योजना के तहत 361 के लक्ष्य के विरूद्ध 165 की तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति पूर्ण हो चुकी हैं और 81 के लिए निविदा आमंत्रण की प्रक्रिया जारी है, जबकि 4 के कार्यादेश जारी हो चुके हैं। इसके अलावा जल जीवन मिशन के तहत सोलर आधारित पेयजल योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि 80 स्वीकृत योजनाओं में से 58 कार्य प्रगतिरत हैं। समूह जलप्रदाय योजनाओं की जानकारी देते हुए कार्यपालन अभियंता ने बताया कि इसके तहत 09 योजनाएं प्रस्तावित हैं जिनमें रूद्री समूह जलप्रदाय योजना, देवपुर, सांकरा, घठुला, बेलरगांव, सिर्री, मोहरेंगा, मोहंदी और सलोनी समूह जलप्रदाय योजना सम्मिलित हैं। सभी की डीपीआर तैयार कर शासन को प्रशासकीय स्वीकृति के लिए भेजा गया है, जिनमें से दो योजना सांकरा एवं घठुला की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इनके विरूद्ध निविदा आमंत्रण की कार्रवाई राज्य स्तर से की जा रही है। शेष समूह जलप्रदाय योजनाओं की आवश्यकता की मांग ऑनलाइन पोर्टल में की गई है। इसके अलावा 11 रेट्रोफिटिंग एवं 25 सिंगल विलेज योजनाओं के आमंत्रित निविदा में प्राप्त न्यूनतम दर की स्वीकृति के लिए अनुमोदन का प्रस्ताव बैठक में रखा गया। बैठक में संबंधित विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के नवनियुक्त संचालक राजेश सिंह राणा ने न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम के तहत प्रदेश के एक तिहाई असाक्षरों को साक्षर करने के लिए विशेष कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस कार्ययोजना के माध्यम से बुनियादी साक्षरता और अंक ज्ञान के साथ असाक्षरों का कौशल विकास, जीवन कौशल, वित्तीय साक्षरता, कानूनी साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, सतत शिक्षा और बुनियादी शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाएगा।
राणा ने कहा है कि असाक्षरों के लिए एक विशेष पाठ्यक्रम तैयार करने एससीआरटी में 28 अक्टूबर से कार्यशाला का आयोजन भी किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप अब स्टेट करिकुलम फ्रेमवर्क प्रौढ़ शिक्षा के लिए बनाया जाएगा, जिसमें आगामी 10 वर्ष की कार्य योजना तैयार की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को पढ़ना-लिखना अभियान अंतर्गत महापरीक्षा अभियान में शामिल लगभग दो लाख शिक्षार्थियों के डाटा सीजी स्कूल डॉट इन पोर्टल में 3 दिन के भीतर अपलोड किए जाने के निर्देश दिए। श्री राणा ने बताया कि पढ़ना-लिखना अभियान के सफल शिक्षार्थियों को एनआईओएस नई दिल्ली द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। इसके लिए एक सप्ताह के भीतर कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के अधिकारियों को दिए।
गौरतलब है कि राजेश सिंह राणा ने आज 25 अक्टूबर को राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के संचालक का पदभार ग्रहण किया और इसके बाद उन्होंने मिशन प्राधिकरण के अधिकारियों की बैठक लेकर साक्षरता कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने असाक्षरों को साक्षर बनाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने के भी निर्देश दिए। राणा के पदभार ग्रहण के अवसर पर राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के सहायक संचालक प्रशांत पांडे, दिनेश टॉक, परियोजना सलाहकार निधि अग्रवाल, और नेहा शुक्ला, यूनिसेफ सलाहकार डॉ. मनीष वत्स और विकास भदोरिया सहित कर्मचारियों ने श्री राणा से सौजन्य भेंट कर उनका स्वागत किया।
रायपुर /शौर्यपथ/
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में हाथी-मानव द्वंद पर नियंत्रण के उद्देश्य से विभाग द्वारा चलाए जा रहे महत्वपूर्ण अभियान के तहत 24 अक्टूबर को सूरजपुर वनमंडल के मोहनपुर में एक मादा हाथी का सफलतापूर्वक रेडियो कॉलर किया गया। रेडियो कॉलरिंग किए गए इस हाथी को ‘मैत्री‘ नाम दिया गया है। राज्य में इस दौरान विचरण कर रहे हाथियों की अनुमानित संख्या 291 है। इनमें सरगुजा वन वृत्त अंतर्गत 193, बिलासपुर वन वृत्त अंतर्गत 69, दुर्ग वन वृत्त अंतर्गत 22 और रायपुर वन वृत्त के अंतर्गत 07 हाथी शामिल है।
गौरतलब है कि वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून की संयुक्त परियोजना के तहत मानव-हाथी द्वंद को कम करने के उद्देश्य से हाथियों के विचरण की जानकारी प्राप्त करने हेतु हाथियों का रेडियो कॉलरिंग करने का अभियान जारी है। इसके तहत 24 अक्टूबर 2021 को सरगुजा वृत्त के सूरजपुर वनमंडल के मोहनपुर, कक्ष क्रमांक पी 2552 में एक मादा हाथी को सफलतापूर्वक रेडियो कॉलर किया गया।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर के निर्देश पर तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख राकेश चतुर्वेदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) पी.वी. नरसिंग राव के मार्गदर्शन में वन विभाग की स्थानीय टीम तथा साइंटिस्ट-एफ, भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून डॉ. पराग निगम एवं उनकी टीम, तामिलनाडू के डॉ. मनोहरन द्वारा रेडियो कॉलरिंग अभियान प्रारंभ किया गया। इस अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एलीफेंट रिजर्व सरगुजा डॉ. के. मेचियो को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
अभियान के तहत विगत दिवस 23 अक्टूबर 2021 को सूरजपुर वनमंडल के बंशीपुर बीट के कक्ष क्रमाक 1682 में हाथी दल की पहचान की गई। इस दल में 09 हाथी थे। नियमित रूप से ट्रेकर एवं विशेषज्ञ अमलों द्वारा उक्त दल की ट्रेकिंग की गयी। प्रदेश का कुमकी हाथी राजू एवं दुर्योधन को इस अभियान में शामिल किया गया। भौगोलिक परिस्थिति अनुकूल नहीं बन पाने तथा हाथियों का दल घनी झाड़ियों में होने के कारण उक्त दिवस को रेडियो कॉलरिंग नहीं हो पाया। हाथी का उक्त दल रातों-रात बीट मोहनपुर के कक्ष क्रमांक पी 2552 में पहुंच गए। दल के 09 हाथी में से एक मादा हाथी को रेडियो कॉलर करने हेतु चिन्हित किया गया। तत्पश्चात् 24 अक्टूबर 2021 को भोर से ही उक्त दल का ट्रेकिंग किया जाता रहा। अंततः दोपहर 12.40 बजे चिन्हित मादा हाथी जिसकी उम्र लगभग 20 से 25 वर्ष है, इसको ट्रैंक्यूलाईज कर रेडियो कॉलर लगाने में सफलता प्राप्त हुई।
गत दिवस 24 अक्टूबर 2021 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) पी.वी. नरसिंग राव पूरे अभियान के दौरान मौके पर ही मौजूद रहे और सफलतापूर्वक रेडियो कॉलर पश्चात् समीक्षा बैठक लेकर अन्य हाथियों के रोडियो कॉलर की रणनीति तैयार की गयी। इस अभियान में मुख्य वन संरक्षक सरगुजा वृत्त अनुराग श्रीवास्तव, वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं फील्ड डायरेक्टर (एलीफेंट रिजर्व) सरगुजा डॉ. के. मेचियो, संचालक गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान बैकुण्ठपुर रंगनाथा रामाकृष्णा वाई, उप निदेशक एलीफेंट रिजर्व सरगुजा प्रभाकर खलखो, संचालक अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फियर रिजर्व श्री विष्णु नायर, भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून डॉ. पराग निगम एवं उनकी टीम, प्रभारी वनमंडलाधिकारी सूरजपुर बी.एस. भगत, डॉ.पी. के. चंदन, डॉ.सी.के. मिश्रा, डॉ. राकेश वर्मा, लक्ष्मी नारायण, श्री अंकित, श्री समर्थ मंडल, अमलेन्दु मिश्रा, प्रभात दुबे एवं वन विभाग के मैदानी अमले सहित कुमकी हाथी के महावतों का योगदान सराहनीय रहा।
रायपुर /शौर्यपथ/
राज्य शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के तीन अधिकारियों के कार्य प्रभार में परिवर्तन के आदेश जारी किए है। छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेशानुसार रीता शांडिल्य को तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग का सचिव बनाया गया है। नीलम नामदेव एक्का को उनके वर्तमान कर्त्तव्य जनशिकायत निवारण विभाग, खेल एवं युवा कल्याण, विमानन के साथ ही राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव, राहत एवं पुनर्वास और भू-अभिलेख विभाग का आयुक्त बनाया गया है। आकाश छिकारा को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दंतेवाड़ा के पद पर पदस्थ किया गया है।
रायपुर /शौर्यपथ/
प्रदेश में दीपावली पर्व के अवसर पर घर-आंगन को सजाने और रौशनी से जगमग करने की तैयारी महिला समूहों ने कर ली है। दीपावली को ध्यान में रखते हुए कांकेर जिले में महिला स्व-सहायता समूहों ने गोबर से दीया, ओम, स्वास्तिक, शुभ-लाभ, गणेश और लक्ष्मी जी की मूर्ति तथा अन्य सजावटी समान बनाये जा रहे हैं। विकासखण्ड कोयलीबेड़ा के मॉडल गौठान डोंडे (हरनगढ़) में खरीदे गए गोबर से महिला समहों द्वारा 1 लाख से अधिक दीए और 500 गणेश और लक्ष्मी जी की मूर्तियां तैयार की है। उनके द्वारा 30 छोटे दीये, 20 बड़े दीए और एक-एक गणेश और लक्ष्मी जी की मूर्ति के साथ एक किट टोकरी तैयार की गई है। इस टोकरी की कीमत 390 रुपये रखी गई है। इसकी बिक्री से महिला समूहों का उत्साहवर्धन होने के साथ उनकी दीवाली भी समृद्ध हो सकेगी।
इसी तरह नरहरपुर विकासखण्ड के ग्राम लिलवापहर के दंतेश्वरी समूह द्वारा 1587 दीया, ग्राम मुड़पार के शीतला समूह द्वारा 1642, बिहाव पारा के जय पार्वती समूह द्वारा 956 और ग्राम राजपुर के लक्ष्मी समूह द्वारा 1254 गोबर के दीयों का निर्माण किया गया है। अंतागढ़ विकासखण्ड के ग्राम पोड़गांव के युक्ति समहू द्वारा 800 तथा ग्राम कलगांव के उन्नति समूह द्वारा 500 गोबर के दीये बनाये गये हैं, वहीं ग्राम आमाबेड़ा के शीतला समूह द्वारा 80 किलोग्राम रंगोली और ग्राम फुफगांव के नारी शक्ति समूह द्वारा 600 नग मोमबत्ती तैयार की गई है, जिनके विक्रय से उनको अच्छी आमदनी की उम्मीद है। विकासखण्ड कांकेर के ग्राम गढ़पिछवाड़ी में गायत्री स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा भी दीपावली के लिए गोबर से दीया, ओम, शुभ-लाभ, श्री आदि सजावटी समान बनाए गये हैं।
रायपुर /शौर्यपथ/
उद्योग मंत्री एवं कोण्डागांव जिले के प्रभारी मंत्री कवासी लखमा एवं हस्तशिल्प बोर्ड के अध्यक्ष एवं विधायक नारायणपुर चंदन कश्यप कोंडानार हस्तशिल्प महोत्सव में शामिल हुए। मंत्री लखमा ने स्थानीय शिल्पकारों से मुलाकात कर उनका प्रोत्साहन किया, शिल्पकारों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया और स्थानीय परंपरागत वाद्य यंत्र तोड़ी एवं नगाड़े को भी बजाया। इस महोत्सव का आनंद सभी लोग ले रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा पंखुड़ी सेवा समिति के सहयोग से कोण्डागांव में शिल्पकारों के प्रोत्साहन के लिए इसका आयोजन किया गया है।
उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन के सहयोग से पंखूड़ी सेवा समिति द्वारा स्थानीय कलाकारों को आभूषण निर्माण से जोड़कर ढोकरा कला में बेलमेटल एवं टेराकोटा के आभूषणों का परम्परागत जनजातीय डिजाइनों में निर्माण किया जा रहा है। इसके संबंध में पंखूड़ी सेवा समिति की संचालक खुशी ने बताया कि समिति द्वारा स्थानीय ढोकरा कला के युवा शिल्पकारों को एकत्र कर परम्परागत जनजातीय आभूषणों को बेलमेटल द्वारा निर्मित कर देश-विदेशों तक श्रृंगार जनजातीय ज्वेलरी की ब्रांड द्वारा पहुंचाने की योजना बनाई गई है, जिसके तहत् शिल्पनगरी में ही आभूषणों का निर्माण कार्य किया जायेगा। बेलमेटल के आभूषणों में स्थायी चमक होने के साथ इन्हें पहनना काफी आरामदेह होता है। इन आभूषणों में ढोकरा शिल्प का विशेष रंग होने के साथ यह काफी आकर्षक भी दिखती है। इन आभूषणों को विभिन्न प्रदर्शनियों एवं हेण्डीक्रॉफ्ट स्टोर्स में विक्रय के साथ ऑनलाईन माध्यम में भी बेचा जायेगा। इन आभूषणों के प्रति लॉन्च के पूर्व ही खासा उत्साह देखा गया है।
कोंडानार हस्तशिल्प महोत्सव अब 30 अक्टूबर 2021 तक संचालित रहेगी। पूर्व में यह 10 से 25 अक्टूबर तक प्रदर्शनी लगायी गयी थी, कलाकारों की मांग पर जिला प्रशासन द्वारा प्रदर्शनी को अब 30 अक्टूबर तक लगाने की अनुमति प्रदान कर दी है।
रायपुर /शौर्यपथ/
छत्तीसगढ़ शासन के वन, परिवहन, आवास, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर अपने एक दिवसीय प्रवास के दौरान आज कवर्धा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कुसुमघटना में आयोजित भागवत कथा में शामिल हुए और पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद भी लिया और कबीरधाम जिले एवं छत्तीसगढ़ की खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर श्री कन्हैया अग्रवाल, नीलकंठ चन्द्रवंशी, कलीम खान, तुकाराम चंद्रवंशी सहित जनप्रतिनधि उपस्थित थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के अंतर्गत किए जाने वाले विभिन्न कार्यों के लिए एसओआर (Schedule of Rates) पुनरीक्षण कार्य की समीक्षा की। जनप्रतिनिधियों, सरपंचों, कलेक्टरों और मनरेगा आयुक्त कार्यालय के साथ ही कई निर्माण एजेंसियों द्वारा इसकी पुनरीक्षण की मांग की जा रही थी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री सिंहदेव ने बैठक में कहा कि जीएसटी लागू होने, निर्माण सामग्री की कीमतों में वृद्धि, मजदूरी की दर में बढ़ोतरी तथा पेट्रोल व डीजल की कीमत बढ़ जाने से पुराने एसओआर पर कार्य संपादन में मुश्किल आ रही है। वर्तमान में प्रचलित दरें 2015 से लागू है। इसका पुनरीक्षण कर निर्माण और संधारण कार्यों के लिए ज्यादा राशि का प्रावधान किया जाना चाहिए। उन्होंने पुनरीक्षण कार्य शीघ्रता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने दुर्गम क्षेत्रों में परिवहन एवं अन्य कार्यों में ज्यादा खर्च को देखते हुए ऐसे क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त प्रावधान रखने के निर्देश दिए।
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा द्वारा पक्के और कच्चे दोनों तरह के निर्माण व संधारण कार्यों के साथ ही जंगल सफाई, रंगाई-पुताई, पत्थर, लकड़ी, लोहे के काम, नाली निर्माण तथा कुआं खुदाई जैसे कार्यों की दरें पुनरीक्षित की जा रही हैं। साथ ही सामग्री, परिवहन और मजदूरी की दरें भी पुनरीक्षित की जा रही हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
