August 22, 2026
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    रायपुर

    रायपुर (6098)

    रायपुर /शौर्यपथ/

    राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके से राजभवन में गुजरात के पत्रकारों के समूह ने आज मुलाकात की। पत्रकारों के समूह ने राज्यपाल को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया। राज्यपाल ने उन्हें छत्तीसगढ़ का स्मृति चिन्ह प्रदान किया।
    राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ वन संसाधनों से परिपूर्ण आदिवासी बहुल राज्य है। यहां की संस्कृति और परंपराएं अनूठी है। यहां के पर्यटन स्थल मन मोह लेते हैं। यहां का बस्तर दशहरा पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इस अवसर पर रथयात्रा होती है, जो श्रद्धालुओं द्वारा खींची जाती है। इस पर्व का प्रत्येक चरण अनूठा है। इसकी तैयारी काफी पहले से की जाती है। लकड़ियों से रथ तैयार किया जाता है। इस रथ को आदिवासियों द्वारा चुराने की रस्म की जाती है, उसे बाद में बस्तर के राजा द्वारा खोजा जाता है और खोजकर देवताओं की पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र पांचवी अनुसूची के तहत आते हैं, जहां राज्यपाल को आदिवासियों के संरक्षण के लिए विशेष अधिकार प्राप्त है। उन्होंने बताया कि जबसे उन्होंने राज्यपाल का दायित्व ग्रहण किया तबसे उन्होंने यह प्रयास किया कि राजभवन के दरवाजे जो भी आए, उनकी तकलीफों को सुनूं और उन्हें दूर करने का प्रयास करूं। उन्होंने राजभवन की परंपरागत विशिष्ट अवधारणा को समाप्त करने का प्रयास किया है। राजभवन के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं, वे छत्तीसगढ़ की जनता की संरक्षक हैं और सभी वर्गों के कल्याण के लिए कार्य करती हैं।

    पत्रकारों के समूह ने बताया कि उन्होंने पुरखौती मुक्तांगन और सिरपुर का भ्रमण किया है। पुरखौती मुक्तांगन में आदिवासी परंपराओं और संस्कृति की जानकारी मिली। उन्हें गुजरात के आदिवासियों की संस्कृति और परंपराओं और यहां के आदिवासियों की संस्कृति में साम्यता महसूस हुई। जब उन्होंने सिरपुर को देखा तो उन्हें गुजरात में स्थित लोथल का स्मरण हुआ। उन्होंने राज्यपाल सुश्री उइके को गुजरात आने का आग्रह भी किया।
    इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव  अमृत कुमार खलखो, पी.आई.बी. रायपुर के सहायक निदेशक  सुनील तिवारी, पत्र सूचना कार्यालय अहमदाबाद के कंडक्टिंग अधिकारी श्री जितेन्द्र यादव,  जतिन आर. भट्ट, सुश्री अस्मिता दवे, सुश्री गीता मेहता, सुश्री जलपा व्यास उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि गुजरात से पत्रकारों का यह समूह ‘‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ के भ्रमण पर हैं।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    बायोफ्यूल के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्य के लिए छत्तीसगढ़ को इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी द्वारा ‘इंडिया ग्रीन एनर्जी अवार्ड‘ से नवाजा गया है। यह अवार्ड बायोफ्यूल के आऊटस्टैंडिंग रिन्यूएबल एनर्जी जनरेशन प्रोजेक्ट केटेगरी में छत्तीसगढ़ को प्रदान किया गया है। नई दिल्ली में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी और केन्द्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री भगवंत खूबा ने छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल डेव्हलपमेंट अथार्टी (सीबीडीए) रायपुर के मुख्यकार्यपालन अधिकारी  सुमीत सरकार को इंडिया ग्रीन एनर्जी अवार्ड प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किया। मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल डेव्हलपमेंट अथार्टी को पुरस्कार प्राप्त करने पर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

    उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार ऊर्जा के परंपरागत स्रोतों पर निर्भरता कम करने के लिए अपरंपरागत ऊर्जा के नवीन विकल्पों को प्रोत्साहित कर रही हैं। इस दिशा में छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल डेव्हलपमेंट अथार्टी द्वारा राज्य में बायोफ्यूल के क्षेत्र में अधिशेष अनाज से एथेनॉल उत्पादन संयंत्र की स्थापना, बायो-जेट एवीएशन फ्यूल के निर्माण में सहयोग और जैव ईंधन के क्षेत्र में अनुसंधान कार्य जैसे उल्लेखनीय काम किए जा रहे हैं।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  गडकरी ने कृषि उत्पाद से बायोफ्यूल उत्पादन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की और भविष्य में बायोफ्यूल का महत्व बताते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अन्यदाता को ऊर्जा दाता बनना जरूरी है।

    इंडियन फेडरेशन आफ ग्रीन एनर्जी, 2020, भारत सरकार के नवीन एवं नवीकणीय ऊर्जा मंत्रालय, सरदार शरण सिंह नेशनल इन्स्टीयूट ऑफ बायो-एनर्जी एवं एसोसियेशन ऑफ स्टेट रोड़ ट्रान्सपोर्ट अन्डरटेकिंग के सपोर्टिग पार्टनरशिप में एवं केयर रेटिंग के नॉलेज पार्टनरशिप से अपारंपरिक ऊर्जा के विभिन्न क्षेत्र जैसे कि सौर ऊर्जा, बायोमास, बायोफ्यूल आदि में अवार्ड के लिए नॉमिनेशन आमंत्रित किया गया था। समग्र भारत से प्राप्त नॉमिनेशन में से भारत सरकार के वैज्ञानिक संगठन सीएसआईआर के साइंटिस्ट एवं शिक्षण प्रतिष्ठान आईआईटी के प्रतिनिधि वाले विशिष्ट ज्यूरी ने प्रत्येक कैटेगरी में अवार्ड हेतु चयन किया है।

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    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नागरिकों की सुविधा के लिए नगरीय प्रशासन विभाग को दिए निर्देश, स्टोर्स से संबंधित शिकायतों का निराकरण 24 घंटे की समय-सीमा में करने कहा

    स्टोर्स में बिल नहीं मिलने, दवा उपलब्ध नहीं होने, सही समय पर स्टोर्स नहीं खुलने जैसी शिकायतों के निदान के लिए टोल-फ्री नम्बर 1100 पर शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था के भी निर्देश दिए

    धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स को पहले ही दिन मिला अच्छा प्रतिसाद, दुर्ग में 311 रूपए के ट्रैवल-किट सेट की 130 रूपए में और 691 रूपए के होम-किट सेट की 290 रूपए में बिक्री

      छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लोगों को सस्ती दरों पर दवाईयां उपलब्ध कराने शुरू की गई श्री धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर योजना को पहले ही दिन विभिन्न नगरीय निकायों में अच्छा प्रतिसाद मिला है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा विगत 20 अक्टूबर को प्रदेश भर में 94 मेडिकल स्टोर्स के वर्चुअल शुभारंभ के बाद भिलाई नगर निगम क्षेत्र में तीन, दुर्ग, भिलाई-चरोदा, राजनांदगांव, जगदलपुर, रायगढ़ और कोरबा नगर निगम में दो-दो स्टोर्स के साथ ही कोण्डागांव, केशकाल, फरसगांव, नारायणपुर, कांकेर, कोंटा, भैरमगढ़, भोपालपट्नम, सुकमा, दोरनापाल, बीजापुर, रामानुजगंज, बगीचा, प्रतापपुर, जशपुर नगर तथा बलरामपुर जैसे कस्बाई क्षेत्रों में संचालित इन दवा दुकानों से लोगों को बहुत कम कीमत पर दवाईयां मिल रही हैं। दुर्ग में जेनेरिक दवाईयों का अनूठा सेट तैयार किया गया है। वहां के धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर में 311 रूपए का ट्रैवल-किट सेट 130 रूपए में और 691 रूपए का होम-किट सेट 290 रूपए में उपलब्ध है। पहले ही दिन वहां 27 ट्रैवल-किट सेट एवं 22 होम-किट सेट की बिक्री हुई है।

    मुख्यमंत्री बघेल ने  धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर तक लोगों की पहुंच आसान बनाने के लिए इन दुकानों की लोकेशन गुगल मैप पर स्टोर करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इंटरनेट पर इनकी जानकारी उपलब्ध कराने गुगल बिजनेस डायरेक्ट्री में स्टोर की लोकेशन, खुलने व बंद होने का समय तथा एम.आर.पी. में छूट की जानकारी 15 दिनों में अपलोड करने कहा है। मुख्यमंत्री ने इन मेडिकल स्टोर्स में बिल नहीं मिलने, दवा उपलब्ध नहीं होने, सही समय पर स्टोर नहीं खुलने एवं बंद रहने जैसी शिकायतों के निदान के लिए टोल-फ्री नम्बर 1100 पर शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने टोल-फ्री नंबर पर दर्ज की जाने वाली शिकायतों का निराकरण 24 घण्टे की समय-सीमा में करने कहा है।

    रायगढ़ जिले में संचालित धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स में 20 अक्टूबर को पहले ही दिन दस हजार 800 सौ रूपए के उत्पादों की बिक्री हुई है। वहां रायगढ़ शहर में 70.10 प्रतिशत, धर्मजयगढ़ में 71 प्रतिशत, सरिया में 52 प्रतिशत, सारंगढ़ में 53 प्रतिशत और खरसिया में एम.आर.पी. में 66.20 प्रतिशत छूट के साथ दवाईयों का विक्रय किया जा रहा है। मेडिकल स्टोर के शुभारंभ के बाद पहले दिन दंतेवाड़ा में 2530 रूपए की दवाईयां 51 प्रतिशत छूट के साथ विक्रय की गई हैं। सक्ती में 538 रूपए की दवाईयां 50 प्रतिशत छूट के साथ, सरिया में 938 रूपए की दवाईयां 52 प्रतिशत छूट के साथ, कवर्धा में 1350 रूपए की दवाईयां 52 प्रतिशत, छूट के साथ एवं कांकेर में 3642 रूपए की दवाईयां 55 प्रतिशत छूट के साथ बेची गई हैं। महासमुंद के नागरिकों एवं आसपास के ग्रामीणों द्वारा 2042 रूपए की दवाईयां 60.50 प्रतिशत छूट के साथ खरीदी गई है। रिसाली में 50 प्रतिशत की छूट के साथ पांच हजार रूपए की, अंबिकापुर में 52.25 प्रतिशत की छूट के साथ 7350 रूपए की, जांजगीर में 62.25 प्रतिश छूट के साथ 1281 रूपए की तथा जशपुर नगर में 63 प्रतिशत छूट के साथ 3825 रूपए की दवाईयों की बिक्री पहले ही दिन हुई है।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक जनवरी से समस्त कलेक्टरों एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को ऐसे हाट बाजारों में जहां मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना अब तक शुरू नहीं हुई है, वहां इस योजना को प्रारम्भ करने के निर्देश दिए हैं।

    उन्होंने हाट बाज़ार क्लिनिक की मोबाईल मेडिकल यूनिट की मॉनिटरिंग जीपीएस के माध्यम से कलेक्टरों को स्वयं करने के निर्देश दिए। श्री बघेल ने पहुंचविहीन क्षेत्रों में नवाचार करने, बाईक एम्बुलेंस जैसी योजना पर स्थानीय स्तर पर विचार करने निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि हर हाल में स्वास्थ्य सुविधायें दूरस्थ अंचल के नागरिकों तक पहुंचायें। उन्होंने योजना का पर्याप्त प्रचार करने के निर्देश सभी जिला कलेक्टरों को दिए ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सके।
    बैठक में कृषि मंत्री रविंद्र चौबे, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक श्री डी. एम. अवस्थी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती रेणु जी.पिल्ले, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, मुख्यमंत्री के सचिव डी.डी. सिंह, मुख्यमंत्री सचिवालय में उप सचिव सुश्री सौम्या चौरसिया सहित प्रमुख सचिव, विभिन्न विभागों के सचिव, कमिश्नर, जिलों के कलेक्टर तथा वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने आज आयोजित कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में गौठानों को ग्रामीण औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर एक माह के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के प्रथम वर्ष में गौठानों में अधोसंरचना विकसित करने तथा द्वितीय वर्ष में गौठानों की गतिविधियों के संचालन को गति प्रदान करने का कार्य किया गया। उन्होंने कहा कि अब इस योजना का लोकव्यापीकरण करने की दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि धान के लिए इनपुट सब्सिडी देने से प्रदेश में किसानों की संख्या और खेती के रकबे में बढ़ोत्तरी हुई है। इसी तरह गोधन न्याय योजना से डेयरी के व्यवसाय को बढ़ावा मिला है।

    उन्होंने कहा कि गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने, अगरबत्ती, साबुन बनाने जैसी आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ गौठानों में धान कूटने की मशीन, तेल पेराई की मशीन लगाई जाए। चर्मशिल्प विकास बोर्ड और लौह शिल्प विकास बोर्ड की गतिविधियां प्रारंभ की जाएं। उन्होंने कहा कि वनांचलों के गौठानों में लघु वनोपजों के वैल्यूएडीशन की गतिविधियों को और अधिक प्रोत्साहित करने के साथ उत्पादों के विक्रय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएं। उन्हांेने कहा कि हर गौठान में रोजगार और आयमूलक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 5-5 रोजगारमूलक गतिविधियां चिन्हित की जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि आसपास के गौठानों में अलग-अलग गतिविधियां संचालित हो। मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टरों को साप्ताहिक समीक्षा बैठक में गौठानों की गतिविधियों की नियमित रूप से समीक्षा करने के निर्देश भी दिए।

    मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि गौठानों में चारे की व्यवस्था के लिए प्रति गौठान 30 से 40 हजार रूपए की राशि दी जा रही है। 4 हजार गौठानों में चारागाह विकसित किए जा रहे हैं। गौठानों में मवेशियों के लिए पानी, चारा और छाया की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि मवेशियों की नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान को और अधिक बढ़ाएं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कलेक्टर नरवा योजना की समीक्षा भू-जल स्तर में वृद्धि के आधार पर भी करें। कम जल स्तर वाले क्षेत्रों में कार्य समय सीमा में पूर्ण किए जायें। इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने से जन-चेतना आएगी और इससे इस अभियान को बल मिलेगा। कलेक्टर यह सुनिश्चित करें कि जल संरक्षण और संवर्धन हेतु निर्मित की जा रही अधोसंरचना से किसी भी किसान की निजी भूमि प्रभावित न हो। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि मध्याह्न भोजन, आश्रम, सुपोषण अभियान जैसे अभियानों को बाड़ी घटक से जोड़े जाने की आवश्यकता है। कलेक्टर इन योजनाओं के अभिसरण से समूहों को आत्मनिर्भर बनायें।

    बैठक में कृषि मंत्री श्री रविंद्र चौबे, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक डी. एम. अवस्थी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव  रेणु जी.पिल्ले, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव  सुब्रत साहू, मुख्यमंत्री के सचिव  डी.डी. सिंह, मुख्यमंत्री सचिवालय में उप सचिव सुश्री सौम्या चौरसिया सहित प्रमुख सचिव, विभिन्न विभागों के सचिव, कमिश्नर, जिलों के कलेक्टर तथा वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि किसी भी राज्य के विकास के लिए शांति व्यवस्था बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य में हर हाल में सौहार्द्र का वातावरण बनाए रखने की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की है। उन्होंने कलेक्टरों को समाज के सभी वर्ग के लोगों से सीधा संवाद बनाए रखने तथा स्थानीय परिस्थितियों पर निरंतर निगाह रखने के निर्देश दिए। आज यहां न्यू सर्किट हाउस में आयोजित कलेक्टर कॉन्फ्रेंस की मैराथन बैठक में कानून व्यवस्था के मुद्दे की गहन समीक्षा हुई। यह बैठक लगभग 9 घंटे तक चली।

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को बिगाड़ने के लिए प्रायोजित घटनाएं की जा रही है। इसकी रोकथाम के लिए शासन-प्रशासन को अलर्ट रहने की जरूरत है। उन्होंने बैठक में कहा कि राज्य सरकार के विकास एवं कल्याणकारी कार्यक्रमों से आम जनता को मिल रहे लाभ को कतिपय लोग बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। सरकार के जनकल्याण के कार्यक्रमों से परेशान कुछ लोग राज्य में कानून व्यवस्था को बिगाड़ने में लगे हैं। ऐसे लोगों को चिन्हित करने और उनके मंसूबों को नाकाम करने की जरूरत है।

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम जनता तक पहुँचाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने सभी कलेक्टरों को मीडिया से सतत् संवाद स्थापित करते हुए उनसे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं, कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार में आवश्यक सहयोग प्राप्त करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आम जनता की भलाई के लिए अनेक योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। इसका लाभ भी आम लोगों को सुलभ हुआ है। राज्य का कोई भी ऐसा जिला और क्षेत्र नहीं है, जहां विकास के काम न हुए हो। शासन के विकास एवं निर्माण के कार्याें तथा फ्लेगशिप योजनाओं के लाभान्वितों से संबंधित सकारात्मक खबरों की मीडिया के सभी माध्यमों का उपयोग करते हुए प्रचारित-प्रसारित किया जाना चाहिए, ताकि अन्य लोग भी शासकीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित हो।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया का प्लेटफार्म काफी प्रभावी हो गया है। कतिपय लोग इस प्लेटफार्म का दुरूपयोग नकारात्मक एवं भ्रामक बातों को फैलाने में करने लगे हैं। झूठी और भ्रामक सूचनाओं के मामले में तत्परता से सही जानकारी लोगों के सामने लाना जरूरी है। इसके लिए प्रशासन को अलर्ट रहने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नकारात्मक, झूठी एवं भ्रामक सूचनाओं की रोकथाम के लिए हम सबकी यह जिम्मेदारी है कि अविलंब सही तथ्य जनता के सामने लाया जाए। जिससे लोगों को वास्तविक स्थिति की जानकारी हो सके और राज्य में सामाजिक सद्भाव तथा क़ानून व्यवस्था की स्थिति बनी रहे।

    मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने राज्य में चिट फंड कम्पनियों के निवेशकों की धन वापसी और कम्पनियों के विरूद्ध कार्यवाही से लोगों में एक विश्वास जगा है। उन्होंने चिट फंड कम्पनियों के विरूद्ध कार्यवाही को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का एकलौता राज्य है, जहां चिट फंड कम्पनियों की धोखा-धड़ी के शिकार लोगों की राशि लौटाने का अभियान संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से मिले आवेदनों का परीक्षण एवं उनके द्वारा कम्पनियों में डिपॉजिट राशि का आंकलन करने भी निर्देश दिए। उन्होंने कलेक्टरों को चिटफंड कम्पनियों के एजेंट एवं हितग्राहियों के साथ जिला स्तर पर बैठक कर चिटफंड कम्पनियों की परिसम्पत्ति की जानकारी भी तैयार करने के निर्देश दिए। चिटफंड कम्पनियों की परिसम्पत्ति की कुर्की एवं उनके विरूद्ध संचालित मामलों का तेजी से निराकरण करने के भी निर्देश दिए।

    बैठक में कृषि मंत्री  रविंद्र चौबे, मुख्य सचिव  अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक  डी. एम. अवस्थी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती रेणु जी.पिल्ले, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव  सुब्रत साहू, मुख्यमंत्री के सचिव  डी.डी. सिंह, मुख्यमंत्री सचिवालय में उप सचिव सुश्री सौम्या चौरसिया सहित प्रमुख सचिव, विभिन्न विभागों के सचिव, कमिश्नर, जिलों के कलेक्टर तथा वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

     

    रायपुर /शौर्यपथ/

     

    राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन एक बार फिर राजधानी रायपुर में होने जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किये जा रहे इस आयोजन में शामिल होने के लिए आदिवासी नृत्य से ताल्लुक रखने वाले कलाकार अपनी तैयारी में जुट गए हैं। कलाकार लगातार अभ्यास कर रहे हैं, उन्हें भरोसा है कि यदि उन्होंने अच्छे से मेहनत की तो उनका चयन निश्चित ही आदिवासी नृत्य समारोह के लिए होगा। आदिवासी नृत्य महोत्सव की तैयारी में बड़े-बड़े कलाकारों के बीच कुछ नन्हें कलाकार भी है, जो अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए अपने स्तर पर कड़ी मेहनत कर रहे हैं। विशेष पिछड़ी जनजाति कमार से संबंधित विवाह कार्यक्रम के दौरान खुशियों को गीतों और पारम्परिक नृत्य के माध्यम से मंच पर प्रस्तुत करने दस साल का छयांक अपने पिता श्री अमर सिह और समूह के अन्य सदस्यों के साथ जुटा हुआ है। अभी तक कई कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुति दे चुके छयांक के नृत्य का कमाल देखकर देखने वाले भी ताली बजाने मजबूर हो जाते हैं।

    रायपुर के साइंस कालेज मैदान में 28 से 30 अक्टूबर 2021 तक द्वितीय राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसकी तैयारी जोरो से चल रही है। कलाकार अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन करने समय का इंतजार कर रहे हैं। धमतरी जिले के ग्राम मोहेरा से दस साल का छयांक कक्षा चौथी में पढ़ाई करता है। उसकी रूचि बचपन से ही नृत्य में है। इसलिए आदिवासी नृत्य से जुड़े उसके पिता श्री अमर सिह उन्हें भी कई कार्यक्रमों में साथ लेना नहीं भूलते। कमार जनजाति जो कि छत्तीसगढ़ में एक विशेष पिछड़ी जनजाति है। इनसे संबंधित जनजाति द्वारा विवाह के अवसर पर किये जाने वाले नृत्य और गाये जाने वाले गीत को पारम्परिक वाद्य यंत्रों के माध्यम से जय निरईमाता आदिवासी कमार नृत्य समूह द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। समूह में 23 पुरूष सदस्य है। जिसमें छयांक भी बाल कलाकार के रूप में विशेष परिधान धारण कर नृत्य करता है। छयांक के पिता अमर सिह ने बताया कि वह जब 8 से 9 साल का था तब से नृत्य करता आ रहा है। पहले गांव-गांव जाकर नृत्य करता था। इसके बाद अनेक कार्यक्रमों में प्रस्तुति देता आ रहा है। आज वह अपने समूह का मुखिया है और सभी कलाकार उनके निर्देशन में उनके साथ ही सामूहिक रूप से नृत्य की प्रस्तुति देते हैं। उन्होंने बताया कि छयांक का भी लगाव नृत्य में हैं। इसलिए नृत्य कौशल का सम्पूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। छयांक ने बताया कि कमार जनजाति पर आधारित आदिवासी नृत्य उन्हें पसंद है। वह स्कूल भी जाता है। चूंकि आदिवासी नृत्य महोत्सव है। इसलिए कुछ दिनों के लिए वह अभ्यास में जुटा है और आदिवासी संस्कृति को आगे बढ़ाना चाहता है। छयांक के पिता अमर सिंह का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आदिवासी समाज की संस्कृति, कला और परम्परा को उभारने के साथ छिपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाने राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन करना एक बेहतर माध्यम साबित होगा।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आयोजित आदिवासी नृत्य महोत्सव में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अधिकृत जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा सभी राज्यों के राज्यपाल सहित मुख्यमंत्री एवं अन्य विशिष्टजनों से मुलाकात कर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा भेजे गए निमंत्रण पत्र और मोंमेटो देकर कार्यक्रम में शामिल होने आमन्त्रित किया जा रहा हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ शासन की ओर से वरिष्ठ विधायक  सत्यनारायण शर्मा ने ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और ओडिया भाषा व संस्कृति विभाग के मंत्री  ज्योति प्रकाश पाणीग्राही से भेंट कर उन्हें राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव हेतु आमंत्रित किया।

    ओडिशा के मुख्यमंत्री  पटनायक को विधायक  शर्मा ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राजधानी रायपुर में 28 से 30 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के उद्देश्य के बारे में विस्तार से जानकारी दी और कहा कि छत्तीसगढ़ सहित देश के सभी राज्यों की आदिवासी संस्कृति को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आदिवासी संस्कृति को विश्व पटल पर लाने के प्रयासों के बारे में भी जानकारी देते हुए कहा कि इस महोत्सव के माध्यम से छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परम्परा को देखने और समझने का अवसर मिलेगा।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    राज्य शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की एजेंसी छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत स्टेट क्वालिटी मॉनिटर्स के इम्पैनलमेंट के लिए आवेदन आमंत्रित किया है। इसके लिए कार्यपालन अभियंता या इससे उच्च पद से सेवानिवृत्त सिविल अभियंताओं तथा छत्तीसगढ़ व पड़ोसी राज्यों के इंजीनियरिंग या पॉलिटेक्निक कॉलेज के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों (सिविल इंजीनियरिंग) से आवेदन मंगाया गया है। आवेदकों को इन व्यावसायिक योग्यताओं के साथ ही सड़क या पुल या दोनों के निर्माण का अनुभव होना आवश्यक है। आवेदन 23 अक्टूबर 2021 तक जमा किए जा सकते हैं। आवेदकों को मैदानी अनुभव (Field Experiences) से संबंधित दस्तावेज भी आवेदन के साथ संलग्न करने कहा गया है।  

    इम्पैनलमेंट के लिए पात्रता की शर्तें, स्टेट क्वालिटी मॉनिटर्स के कर्तव्य (Duty) और आवेदन पत्र का प्रारूप वेबसाइट www.pmgsy.nic.in (डब्लूडब्लूडब्लू डॉट पीएमजीएसवाई डॉट एनआईसी डॉट इन) पर ‘डीओ एंड एसक्यूएम सलेक्शन एंड परफॉर्मेंस इवेल्यूएशन (DO and SQM selection and performance evaluation)’ शीर्षक के तहत देखी जा सकती है। स्टेट क्वालिटी मॉनिटर्स के रूप में कार्य करने के इच्छुक आवेदक निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण, विकास भवन, सिविल लाइन, रायपुर को 23 अक्टूबर तक भेज सकते हैं। अभिकरण ने एनआरआईडीए (NRIDA) में नेशनल क्वालिटी मॉनिटर और दूसरे राज्यों में स्टेट क्वालिटी मॉनिटर के रूप में इम्पैनल्ड अधिकारियों तथा 23 अक्टूबर 2021 को 70 साल की उम्र पूरी कर रहे अधिकारियों को आवेदन नहीं करने कहा है।

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