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रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा प्रवास के दौरान अंबिकापुर के आकाशवाणी चौक पर माँ भारती के वीर सपूत, अमर क्रांतिकारी शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अदम्य साहस, त्याग और बलिदान को नमन किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद का जीवन हर भारतीय के लिए राष्ट्रभक्ति, साहस और अदम्य वीरता की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद जी ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया और आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा का अमूल्य संदेश दिया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज़ाद जी के आदर्श हमें यह सिखाते हैं कि राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ते हुए ही हम एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के संकल्प को सिद्ध कर सकते हैं। यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं में देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रीय मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि नई पीढ़ी महान स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सके।
इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम, पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
रायपुर, /छत्तीसगढ़ में आयोजित श्रमिक महासम्मेलन में व्यय पूर्णतः टेंडर के अनुसार अनुबंधित दर पर तथा सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के पश्चात किया गया है। इस कार्यक्रम में मनमाना व्यय व वित्तीय अनियमितता का आरोप निराधार है। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के सचिव ने बताया कि बिना निविदा प्रक्रिया के कुर्सी और नाश्ते पर मनमाने खर्च का आरोप पूर्णतः निराधार और भ्रामक है।
छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के सचिव श्री गिरीश रामटेके ने बताया कि विभागीय जानकारी के अनुसार, 17 सितंबर 2024 को विश्वकर्मा जयंती और छत्तीसगढ़ श्रम दिवस के अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में बड़े स्तर पर श्रमिक महासम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें लगभग 8,000 लोग शामिल हुए थे।
श्रम विभाग ने बताया कि कार्यक्रम के लिए आवश्यक व्यवस्थाएँ जैसे मंच, बैठक व्यवस्था, भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य शिविर रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अंतर्गत पूर्व से अनुबंधित संस्था के माध्यम से स्वीकृत दरों पर कराई गईं। विभाग के अनुसार कार्यक्रम स्थल में अंतिम समय में बदलाव और समयाभाव के कारण निविदा प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं था, ऐसे में पूर्व अनुबंधित एजेंसी के माध्यम से कार्य कराना प्रशासनिक दृष्टि से उचित निर्णय था। आयोजन के बाद सभी व्ययों का परीक्षण एवं सत्यापन कर का भुगतान अनुबंधित एजेंसी को नियमों के तहत किया गया।
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सरगुजा जिला प्रवास के दौरान अम्बिकापुर में पीडब्ल्यूडी ऑफिस के पास पंडित रविशंकर त्रिपाठी चौक में भटगांव विधानसभा के पूर्व विधायक पंडित रविशंकर त्रिपाठी की पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा का अनावरण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि पंडित रविशंकर त्रिपाठी जी का जीवन जनसेवा, समर्पण और संगठन के प्रति निष्ठा का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि उनके विचारों और कर्मठता की जीवंत प्रेरणा है, जो आने वाली पीढ़ियों को समाज और राष्ट्र के लिए कार्य करने की दिशा दिखाती रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे व्यक्तित्वों का योगदान हमें यह सिखाता है कि जनसेवा ही सच्चा राष्ट्रधर्म है और इसी मार्ग पर चलकर हम एक सशक्त और समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण कर सकते हैं।
इस दौरान कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
विशेषज्ञों द्वारा स्टेट कॉमन्स कन्विनिंग चर्चा के बाद जो तथ्य निकल कर आएंगे वे राज्य के नीति निर्माण में होंगे सहायक
जल जंगल, जमीन, संस्कृति और पर्यावरण, विरासत संरक्षण एवं संवर्धन में कॉमन्स की प्रभावी भूमिका-श्री बोरा
दो दिवसीय छत्तीसगढ़ कॉमन्स कन्विनिंग कार्यशाला का शुभारंभ
रायपुर, / आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री बोरा ने कहा कि कॉमन्स पर जनजातिय समुदायों के अटूट विश्वास उनके सशक्तिकरण से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि जल जंगल, जमीन, संस्कृति और पर्यावरण, विरासत संरक्षण एवं संवर्धन में कॉमन्स की प्रभावी भूमिका है। उन्होंने न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन की बात करें तो स्थानीय लोग नीति-कार्यान्वयन में सबसे आगे हैं। उन्होंने कहा कि नीतिगत बदलाव के लिए सरकार एक समर्पित टास्क फोर्स बनाने की प्रक्रिया में है। इस टास्क फोर्स का उद्देश्य पूरे राज्य में अधिक प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पेसा) और वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के मध्य संतुलित समन्वय सुनिश्चित करना है। कॉमन्स सम्मेलन संवाद में सांस्कृतिक और पारंपरिक दृष्टिकोणों को केंद्र में रखा गया था, जिसकी शुरुआत पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित श्री जागेश्वर यादव और श्री पांडी राम मंडावी तथा गौर मारिया नृत्य कलाकार सुश्री लक्ष्मी सोरी जैसे सम्मानित अतिथियों के प्रारंभिक उद्बोधनों से हुई।
साझा प्राकृतिक संसाधनों (कॉमन्स) के सुशासन और सामुदायिक संरक्षण पर केंद्रित दो दिवसीय “छत्तीसगढ़ कॉमन्स कंवीनिंग” का शुभारंभ आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने किया। कार्यशाला नवा रायपुर ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, सेक्टर-24, में आयोजित हो रहा है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ शासन के जनजातीय विकास विभाग के सहयोग से “प्रॉमिस ऑफ कॉमन्स” पहल के अंतर्गत विभिन्न साझेदार संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है। कल 10 अप्रैल को मुख्य सचिव श्री विकास शील जनजातीय नीति पर संवाद में शामिल होंगे। वहीं समापन सत्र में आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम शामिल होंगे।
जल जंगल, जमीन, संस्कृति और पर्यावरण विरासत संरक्षण एवं संवर्धन में कॉमन्स की प्रभावी भूमिका
श्री बोरा ने कहा कि इसके अलावा प्राकृतिक संसाधनों और जनजातीय विरासत के बीच गहरे जुड़ाव को पहचानते हुए, एक विशेष स्टूडियो स्थापित करने की योजना पर काम कर रहे हैं। जल्द ही यह प्रोजेक्ट सामने आएगा और यह स्टूडियो पारंपरिक लोक गीतों और स्वदेशी वाद्य यंत्रों की धुन, दस्तावेज़ीकरण, पहचान और कॉपीराइट सुरक्षा के लिए समर्पित होगा। इन साझा संसाधनों के संरक्षण के संबंध में, श्री बोरा ने कहा कि वैश्वीकरण और आधुनिक जीवन शैली जैसे चुनौतियों के बीच संतुलित तरीका अपनाते हुए, साझा ज्ञान का विकास कैसे करें और अपनी आकांक्षाओं, विरासत और भविष्य को कैसे बेहतर बनाएँ।
राज्य के विशाल प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में सामुहिक देखरेख की महत्वपूर्ण भूमिका
आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने कहा कि यह सम्मेलन संवाद के लिए एक विशाल मंच साबित हुआ है, जिसमें छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के विभिन्न हिस्सों से 300 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें विभिन्न संगठनों के नीति विशेषज्ञ, पंचायतों के प्रतिनिधि, शोधकर्ता और समुदाय के समर्पित सदस्य शामिल हैं। यह विविध समूह छत्तीसगढ़ में कॉमन्स (साझा संसाधन) के रूप में वर्गीकृत 70 लाख एकड़ ज़मीन पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए हैं। इस ज़मीन में जंगल, घास के मैदान और जल निकाय शामिल हैं, जो ग्रामीण और जनजातीय आबादी के लिए जीवनरेखा का काम करते हैं। कॉमन्स कन्विनिंग के पहले दिन, विशेषज्ञों ने राज्य के विशाल प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में सामुहिक देखरेख की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया गया।
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने और यातायात को तेज, सुगम व सुरक्षित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेशभर में 9 नई बायपास सड़कों के निर्माण के लिए 448 करोड़ 13 लाख रुपए से अधिक की राशि स्वीकृत की है।
उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के निर्देश पर इन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है, ताकि शहरों के भीतर ट्रैफिक जाम से राहत मिल सके और लंबी दूरी का आवागमन बाधारहित हो।
? जिलेवार बायपास परियोजनाएं
? रायगढ़ जिला (3 बायपास):
तमनार बायपास (6 किमी) – ₹152.17 करोड़
रायगढ़ रिंग रोड (बायपास) – ₹70.47 करोड़
खरसिया बायपास-3 (2 किमी) – ₹7.22 करोड़ (चौड़ीकरण व मजबूतीकरण)
? धमतरी जिला (2 बायपास):
भखारा बायपास (4 किमी) – ₹14.94 करोड़
नारी बायपास (1.5 किमी) – ₹7.97 करोड़
? बलौदाबाजार जिला (2 बायपास):
बलौदाबाजार बायपास (15 किमी) – ₹88.68 करोड़
रिसदा बायपास (7 किमी) – ₹20.99 करोड़
? अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाएं:
कोनी-मोपका फोरलेन बायपास, बिलासपुर (13.40 किमी) – ₹82.80 करोड़
छिरहा बायपास, बेमेतरा (1.20 किमी, कांक्रीटीकरण) – ₹2.89 करोड़
? क्या होगा फायदा?
इन बायपास सड़कों के बनने से:
शहरों के अंदर भारी वाहनों का दबाव कम होगा
ट्रैफिक जाम में कमी आएगी
आवागमन होगा तेज, सुरक्षित और व्यवस्थित
व्यापार और परिवहन को मिलेगा नया गति
?️ मंत्री का बयान
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा—
“राज्य शासन शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में निर्बाध, तेज और सुरक्षित यातायात उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। बायपास, पुल और ओवरब्रिज जैसे प्रोजेक्ट प्राथमिकता में हैं, जिससे प्रदेश में आधुनिक और मजबूत सड़क अधोसंरचना विकसित हो रही है।”
? निष्कर्ष
यह निर्णय केवल सड़कों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के आर्थिक, सामाजिक और शहरी विकास को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इन बायपास मार्गों से न सिर्फ ट्रैफिक सुधरेगा, बल्कि प्रदेश की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।
*नए वित्तीय वर्ष की कार्ययोजना एवं नवीन व्यय प्रस्तावों की समीक्षा*
*आधार बेस उपस्थिति प्रणाली - प्रथम स्थान पर आने वालों की प्रशंसा*
*समय पर उपस्थित ना होने वालों पर होगी कार्यवाही*
रायपुर / आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में आज नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के सभाकक्ष में गत वर्ष के आय-व्यय एवं नए वित्तीय वर्ष की कार्ययोजना की समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग द्वारा कुल बजट का 68 प्रतिशत व्यय किया गया है। प्रमुख सचिव श्री बोरा ने कहा कि सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के सफल क्रियान्वयन हेतु जो बजट आंबटित किया जाता है उसका पूर्ण लाभ हितग्राही वर्ग को मिलना चाहिए। इसके लिए वर्ष के प्रारंभ से ही एक कार्ययोजना बनाकर उसपर अमल किया जाए। इस हेतु सभी प्रभारी अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समय-सीमा में कार्य संपादित करना चाहिए। श्री बोरा ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में व्यय को 80 प्रतिशत किए जाने का लक्ष्य दिया है।
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व एवं मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में विभाग प्रगति ओर अग्रसर है। विभागीय योजनाओं के सफल क्रियान्वयन को देखते हुए भारत सरकार से वित्तीय वर्ष 2025-26 में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान हेतु 732 करोड़, 21 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों हेतु 915 करोड़ तथा अनुच्छेद 275 (1) अंतर्गत 170 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है, यह विभाग के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है, जो आगामी दो वर्षोें में इन सभी कार्यों के सफल क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ के विकास को गति मिलेगी।
बैठक में आदिम जाति विकास विभाग के अलावा आदिम जाति अनुंसधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, अनुसूचित जाति विकास विभाग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास तथा छ.ग. राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के वित्तीय वर्ष 2025-26 अंतर्गत आय-व्यय की भी समीक्षा की गई। बैठक में संयुक्त सचिव श्री बी.के.राजपूत, श्री अनुपम त्रिवेदी, वित्त नियंत्रक श्री लाजरूस मिंज, अपर संचालक श्री संजय गौड़, श्री आर.एस.भोई, उपायुक्त श्रीमती गायत्री नेताम, श्री प्रज्ञान सेठ, श्री एल.आर.कुर्रें, श्री विश्वनाथ रेडडी, श्रीमती मेनका चंद्राकर, कार्यपालन अभियंता श्री त्रिदीप चक्रवर्ती सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बैठक में आधार फेस उपस्थिति प्रणाली एवं ई-ऑफिस व्यवस्था की भी समीक्षा की। आधार बेस उपस्थिति प्रणाली में विभाग में सर्वाधिक उपस्थिति वाले अधिकारी-कर्मचारियों की प्रशंसा की। साथ ही उन्होंने कहा कि समय पर नहीं आने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बैठक में ई-ऑफिस की भी समीक्षा करते हुए कहा कि ई-ऑफिस व्यवस्था लागू होने से प्रशासन में पारदर्शिता एवं कसावट आई है। साथ ही व्यवस्था सुुदृढ़ करने में बहुत ही उपयोगी सिद्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि अब ई-ऑफिस में फाईल आने के बाद से बहुत ही तीव्र गति से कार्य संचालन संभव हुआ है। अधिकारी फाईल बढ़ाते समय सभी नियमों एवं स्पष्ट अभिमत के साथ ही फाईल को प्रस्तुत करें, ताकि उस पर अंतिम रूप से निर्णय लिया जा सके।
उन्होंने बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के अपरीक्षित नवीन व्यय मद प्रस्तावों तथा विभिन्न विकास कार्यों की अद्यतन स्थिति की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा क्रय की गई सामग्रियों के मानकीकरण निर्धारित हो। उन्होंने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की जिलावार स्थिति, आवंटित एवं व्यय राशि की भी समीक्षा की।
प्रमुख सचिव ने बैठक में भवन निर्माण कार्यों, प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं धरती आबा योजना के अंतर्गत संचालित कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। साथ ही छत्तीगढ़ आदिवासी संग्रहालय एवं शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय से प्राप्त आय-व्यय के आगामी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।
रायपुर / गाँव में कभी बस की पहुँच नहीं थी, आज वहाँ बस के आते ही बच्चों के चेहरे खिल उठते हैं। सड़क पर बस दिखते ही बच्चे हाथ हिलाकर खुशी जाहिर करते हैं और हॉर्न की आवाज़ सुनते ही लोग घरों से बाहर निकल आते हैं—एक नई उम्मीद के साथ। यह उम्मीद अब शहर मुख्यालय, नगर मुख्यालय और विकासखंड मुख्यालय तक आसान पहुँच की है।
यात्री बस में बैठकर लोग उन दिनों को याद करते हैं, जब उन्हें पैदल या किसी निजी वाहन के सहारे दूसरे स्थानों तक जाना पड़ता था। अब हालात बदल चुके हैं। स्कूल के बच्चे समय पर स्कूल पहुँच रहे हैं, वहीं अधिकारी-कर्मचारी भी समय पर अपनी ड्यूटी पर पहुँच पा रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ़ सुविधा का नहीं, बल्कि उन ग्रामीण परिवारों के सपनों का है जो विकसित भारत की कल्पना को अपने जीवन में साकार होते देख रहे हैं। यह परिवर्तन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से संभव हो पाया है। इस योजना के तहत आज बसें उन गाँवों तक पहुँच रही हैं, जहाँ पहले कभी बस नहीं पहुँची थी।
पहाड़ी अंचल की महिलाओं को मिली राहत
जशपुर जिला के बगीचा विकासखंड के सन्ना निवासी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सुनीता निकुंज बताती हैं कि पहले उन्हें पास के गाँव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुँचने के लिए किसी से लिफ्ट लेनी पड़ती थी, निजी वाहन या पैदल जाना पड़ता था। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यह बहुत कठिन था। अब ग्रामीण बस से उनकी यह समस्या दूर हो गई है। वे कहती हैं, “यह बस मेरे लिए बहुत बढ़िया साधन बन गई है।”
ग्रामीणों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
बस में सफर कर रहे ग्राम मरंगी निवासी श्री दशरथ भगत हँसते हुए बताते हैं कि पहले इस सड़क पर बस नहीं चलती थी, इसलिए पैदल ही आना-जाना करना पड़ता था। बस का नाम लेते ही उसका चेहरा खिल गया l उन्होंने बताया कि “अब मुख्यमंत्री जी की पहल से बस शुरू हो गई है। हम आसानी से बगीचा जाते हैं और समय पर वापस भी लौट आते हैं।”
यात्री श्री मंगलराम बताते हैं कि पहले वे छिछली और चंपा जैसे बाजारों तक पैदल जाया करते थे। “अब बस आने से बहुत सुविधा हो गई है। हम सब बहुत खुश हैं।”
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से न केवल यात्रा सुगम हुई है, बल्कि ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों के लिए शहर तक पहुँचने में भी बड़ी सुविधा मिली है। यह योजना ग्रामीण जीवन को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रही है और जशपुर जैसे पहाड़ी व दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की नई राह खोल रही है।
किरण भारत के लिए खेल चुकी हैं और क्रोएशियन महिला लीग में डिनामो ज़ाग्रेब के लिए भी खेली हैं
किसी भी पोज़िशन पर खेलने की क्षमता उनकी सबसे बड़ी ताकत
रायपुर / जब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के सेमीफाइनल में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट के दौरान किरण पिस्दा ने गोलकीपिंग के दस्ताने पहने, तब वह अपने अब तक के अनुभवों पर भरोसा कर रही थीं। उन अनुभवों पर, जिन्होंने चुनौतियों और निराशाओं के बीच उन्हें और अधिक मजबूत बनाया।
24 साल की उम्र में किरण अपने खेल कौशल के शिखर पर नजर आती हैं। वह यूरोप में लीग फुटबॉल खेल चुकी हैं और अब बड़े अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की दहलीज पर हैं।
हालांकि, उनका यह सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा, भले ही उन्हें स्कूल और परिवार से शुरुआती समर्थन मिला। उनके भाई गिरीश पिस्दा, जो खुद राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं, उनके लिए प्रेरणा बने।
किरण ने साई मीडिया से कहा, “मुझे स्कूल में काफी सपोर्ट मिला। वहीं से मुझे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के मौके मिले और हर चयन के साथ मेरा आत्मविश्वास बढ़ता गया।” इसके बाद किरण शारीरिक शिक्षा में डिग्री हासिल करने के लिए रायपुर आईं। छत्तीसगढ़ महिला लीग के दौरान उन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और उन्हें राष्ट्रीय शिविर के लिए बुलावा मिला।
किरण बताती हैं, “उस समय मैं शारीरिक रूप से उतनी फिट नहीं थी और मेरा मानसिक स्तर भी सीनियर खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार नहीं था।” यही कारण रहा कि उस राष्ट्रीय शिविर में उन्हें भारतीय टीम के लिए चयन नहीं मिला। वह कहती हैं, “मुझे एहसास हुआ कि वहां जो अनुभव मिला है, उस पर मुझे काम करना होगा।”
इसके बाद उनके जीवन में आत्म-सुधार का एक कठिन दौर शुरू हुआ। उन्होंने अपनी फिटनेस पर काम किया, मैचों का विश्लेषण करना शुरू किया और अपनी पोज़िशनल समझ को बेहतर बनाया। लेकिन सबसे बड़ा बदलाव उनकी मानसिकता में आया।
वह कहती हैं, “मैंने खुद से कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं नकारात्मक नहीं सोचूंगी। अगर आप नकारात्मक हो जाते हैं, तो उसका सीधा असर आपके प्रदर्शन पर पड़ता है।” इस बदलाव में उनके मेंटर और कोच योगेश कुमार जांगड़ा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। किरन ने कहा,“जब भी मुझे लगता है कि मैं अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही हूं या मन खराब होता है, तो मैं उनसे बात करती हूं। वह हमेशा मुझे सकारात्मक रहने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।”
किरण की मेहनत का असर धीरे-धीरे दिखने लगा। घरेलू स्तर पर उनके प्रदर्शन ने केरल ब्लास्टर्स जैसे क्लबों के दरवाजे खोले, जहां उन्होंने खुद को और निखारा। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी बहुमुखी प्रतिभा बन गई। वह कहती हैं, “मैंने स्ट्राइकर के रूप में शुरुआत की, फिर मिडफील्ड में खेली और अब राष्ट्रीय टीम के लिए फुल-बैक के रूप में खेलती हूं। एक फुटबॉलर के रूप में आपको अपनी टीम के लिए कई पोज़िशन पर खेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।”
किरण कई बार भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वह 2022 के सैफ़ चैंपियनशिप स्क्वाड का हिस्सा रही हैं और क्रोएशियन महिला लीग में डिनामो ज़ाग्रेब के लिए भी खेल चुकी हैं। फिर भी, इस मुकाम पर भी असफलताएं उनके सफर का हिस्सा रही हैं। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एएफसी (AFC) महिला एशियन कप जैसे बड़े टूर्नामेंट के लिए चयन न होना उनके लिए एक और परीक्षा थी।
किरण कहती हैं, “बड़े टूर्नामेंट के लिए चयन न होना दुख देता है। हर खिलाड़ी इसे महसूस करता है। लेकिन अब मैं इसे अलग नजरिए से देखती हूं। इसे मैं और मेहनत करने और मजबूत वापसी करने की प्रेरणा मानती हूं।” दबाव को संभालना उनकी पहचान बन चुका है। चाहे टीम में जगह के लिए प्रतिस्पर्धा हो या अहम मैचों में प्रदर्शन, उन्होंने खुद को संयमित रखना सीख लिया है। वह कहती हैं, “ऊंचे स्तर पर खेलते समय दबाव हमेशा रहता है। आपको उसे संभालना सीखना पड़ता है।”
किरण टीम के प्रदर्शन की भूमिका को भी महत्वपूर्ण मानती हैं। उन्होंने कहा, “अगर टीम अच्छा कर रही होती है, तो हर खिलाड़ी आत्मविश्वास से भरा होता है। लेकिन जब टीम हार रही होती है, तो व्यक्तिगत प्रदर्शन भी प्रभावित होता है।” जनजातीय पृष्ठभूमि से आने वाली किरण दूर-दराज के इलाकों के खिलाड़ियों की चुनौतियों को अच्छी तरह समझती हैं। उनका मानना है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे मंच इस अंतर को पाटने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
वह कहती हैं, “जनजातीय इलाकों में बहुत प्रतिभा है, लेकिन खिलाड़ियों को हमेशा मौके नहीं मिलते। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। इससे उन्हें आत्मविश्वास और राज्य तथा देश के लिए खेलने का सपना देखने की प्रेरणा मिलती है।” जहां तक किरण का सवाल है, उनका फोकस फिलहाल इंडियन वुमेंस लीग जैसी घरेलू प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने और राष्ट्रीय टीम में नियमित जगह बनाने पर है। लेकिन उनका लक्ष्य इससे कहीं बड़ा है।
वह कहती हैं, “मैं लगातार खुद को बेहतर बनाना चाहती हूं, नियमित प्रदर्शन करना चाहती हूं और बड़े टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हूं। अगर आपका चयन नहीं होता, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप अच्छे खिलाड़ी नहीं हैं—इसका मतलब है कि आपको और मेहनत करनी होगी।”
रायपुर / शौर्यपथ / खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में आज रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में पुरुषों की हॉकी में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच तीसरे और चौथे स्थान के लिए मैच खेला गया। इसमें छत्तीसगढ़ ने मध्यप्रदेश को 14-6 से हरा कर कांस्य पदक जीता।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
