August 07, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    भाजपा का 2 साल छत्तीसगढ़ बेहाल
    रायपुर/(shouryapath) प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने भारतीय जनता पार्टी की 2 साल की सरकार को खस्ता हाल बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में अपराध का ग्राफ बढ़ा है और अपराधी बेलगाम होते जा रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ा है। हर तीन घंटे में एक महिला दुष्कर्म का शिकार हो रही हैं। सिर्फ बलात्कार ही नहीं हत्या, लूट, अपहरण जैसे अपराधों के मामलों में भी रायपुर प्रदेश में सबसे आगे है। आंकड़ों के मुताबिक दुष्कर्म के मामले में रायपुर पहले पायदान पर है, जबकि बिलासपुर दूसरे और कोरबा तीसरे नंबर पर है।

    प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि फरवरी 2025 के इन सब आंकड़ों में बलात्कार के आंकड़े सबसे ज्यादा चौकाने वाले हैं। प्रदेश में एक साल के भीतर बलात्कार के कुल 3191 केस दर्ज किए गए हैं। इस हिसाब से रोज प्रदेश में 8 से 9 महिलाएं दुराचार का शिकार बन रही हैं। इस तरह से छत्तीसगढ़ में हर 3 घंटे में एक महिला के साथ दुष्कर्म की घटना हो रही है।

    प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जब-जब कोई स्लोगन दिया है, तब-तब उसका विपरीत ही हुआ है। जैसे की बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का नारा पर बेटियों के ऊपर अत्याचार, अनाचार की घटनाएं बढ़ती ही जा रही है और ना ही बेटी आगे पढ़ पा रही है, वैसे ही एक और स्लोगन भारतीय जनता पार्टी ने दिया है, हमने बनाया है और हम ही सवारेंगे लेकिन इसके विपरीत प्रदेश की जल, जंगल, जमीन को बेचने की तैयारी में लगे हुए हैं। विष्णु देव साय के सरकार में बिजली, खाद, जमीन, घर, रेत सीमेंट महंगा। मूलभूत के सभी वस्तुओं के दाम में वृद्धि होती जा रही है।

         रायपुर/ शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बिजली बिल सरकार प्रायोजित लूट के उदाहरण है। हर जगह बिजली उपभोक्ताओं की शिकायत है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से उनकी खपत वास्तविक खपत से अधिक बताई जा रही है, स्मार्ट मीटर सामान्य मीटर की तुलना में बहुत तेजी से चल रहा है। बिजली उपभोक्ताओं का यह अधिकार है कि अपनी वास्तविक खपत को जान सके। चेक मीटर का प्रावधान पहले से ही था, लेकिन यह सरकार अपनी लूट पर परदेदारी करने के लिए चेक मीटर लगाने और मीटर चेक करवाने उपभोक्ताओं से 1000 और 1500 रुपए शुल्क लेने का प्रावधान कर दिया गया है, यदि मीटर में गड़बड़ी का आरोप उपभोक्ता लगा रहे हैं, तो उसे मुफ्त में चेक किया जाए, किसी भी तरह से अतिरिक्त शुल्क अनुचित है। यह प्रावधान सरकार ने गड़बड़ी छुपाने के लिये किया है। मीटर चेक शुल्क का प्रावधान तत्काल वापस ले सरकार।

    भाजपा सरकार बिजली बिल के नाम पर जनता को लूट रही है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार ने बिजली के दाम चार बार बढ़ा दिया। 400 यूनिट हाफ योजना को बंद कर दिया। स्मार्ट मीटर लगा दिया इन सबसे बिजली के दाम बेतहाशा बढ़ गए, जनता परेशान है। सरकार, जनता को राहत देने के बजाय अब बिजली के दामों में 12 प्रतिशत विद्युत ईंधन अधिभार (एफपीपीएस) के रूप में अतिरिक्त चार्ज इस महीने से लगाने जा रही, इससे बिजली के दाम एक बार फिर से बढ़ेंगे। कांग्रेस, सरकार के इस निर्णय का विरोध करती है। सरकार, कोयले का सेस कम होने के कारण बिजली का दाम कम तो नहीं कर रही, ऊपर से एक नया टैक्स लगा रही।

    प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि 400 यूनिट तक छूट को आधी करके 200 यूनिट किया, उसमें भी यह शर्त लगा दिया गया कि खपत 400 यूनिट से अधिक होते ही सारी छूट, राहत, रियायत पूरी तरह खत्म। ऊपर से सभी घरों में स्मार्ट मीटर लगाकर अधिक वसूली कर रहे है। अधिक मुनाफाखोरी के लालच में यह सरकार अनाप-शनाप बिजली बिल वसूलने के लिए नए नए पैंतरे अपना रही है।

    राजनांदगांव / शौर्यपथ /
    छत्तीसगढ़ की साहित्यिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में “रायपुर साहित्य उत्सव : आदि से अनादि तक” का आयोजन 23 से 25 जनवरी 2026 तक नवा रायपुर में किया जा रहा है। इसी क्रम में नांदगांव संस्कृति एवं साहित्य परिषद तथा साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद के संयुक्त तत्वावधान में प्रेस क्लब राजनांदगांव में एक विचारोत्तेजक परिचर्चा आयोजित की गई।
    कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार श्री सुशील कोठारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा ने अध्यक्षता की। विशिष्ट अतिथियों में पुरातत्वविद डॉ. आर.एन. विश्वकर्मा, हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. शंकर मुनि राय तथा अनेक वरिष्ठ साहित्यकार शामिल रहे।
    मुख्य अतिथि श्री सुशील कोठारी ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और कठिन से कठिन समय में भी समाज को दिशा देने का कार्य करता है। उन्होंने गजानन माधव मुक्तिबोध, डॉ. पदुमलाल पन्नालाल बख्शी और डॉ. बल्देव प्रसाद मिश्र जैसे महान साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनांदगांव की परंपरा में और भी नाम जोड़ने का दायित्व आज की पीढ़ी का है। सोशल मीडिया के दौर में घटती पठन संस्कृति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने दिग्विजय कॉलेज को साहित्यकारों की कर्मभूमि बताया और नगर की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को रेखांकित किया।
    साहित्य अकादमी अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा ने कहा कि तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बौद्धिक चेतना को जाग्रत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि साहित्य के जरिए पीढ़ी दर पीढ़ी ज्ञान का हस्तांतरण होता है। श्रुति परंपरा, ब्रह्मनाद और भारतीय दर्शन की चर्चा करते हुए उन्होंने नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने का आह्वान किया तथा सभी साहित्यकारों से उत्सव में सक्रिय सहभागिता की अपील की।
    पुरातत्वविद डॉ. आर.एन. विश्वकर्मा ने कहा कि इतिहास को समझने के लिए साहित्य और संस्कृति का अध्ययन अनिवार्य है। साहित्य के माध्यम से ही किसी युग के सुख-दुख, राग-द्वेष और परिस्थितियों का चित्रण होता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के प्राचीन राजवंशों और ताला ग्राम की पुरातात्विक धरोहरों का उल्लेख करते हुए प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा पर प्रकाश डाला।
    हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. शंकर मुनि राय ने कहा कि साहित्य मनुष्यता का निर्माण करता है और समाज को जोड़ने का कार्य करता है। उन्होंने मुक्तिबोध, बख्शी और बल्देव प्रसाद मिश्र के साहित्यिक अवदानों को स्मरण करते हुए कहा कि साहित्य सृजन देश के सौहार्द और मानवीय मूल्यों को केंद्र में रखकर होना चाहिए।
    चेयरमेन अध्ययन बोर्ड (मानविकी) सीएसवीटीयू डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने अपने आधार वक्तव्य में राजनांदगांव को साहित्यकारों का शहर बताते हुए इसकी वाचिक परंपरा और रचनात्मक उर्वरता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह भूमि सरस्वती की साधना से समृद्ध रही है और यहां की साहित्यिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है।
    परिचर्चा में अनेक वरिष्ठ साहित्यकारों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सूर्यकांत मिश्रा ने किया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि साहित्य केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य को दिशा देने वाली जीवंत शक्ति है।

    - नागरिकों से सर्वे दल के घर पहुंचने पर पूर्ण सहयोग करने की अपील की गई
    - कुष्ठ रोग का उपचार सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में नि:शुल्क उपलब्ध

        राजनांदगांव / शौर्यपथ / राज्य शासन निर्देशानुसार जिले में सघन कुष्ठ जांच खोज अभियान 8 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 तक चलाया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने बताया की कुष्ठ जांच खोज अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले में कुष्ठ रोग की समय पर पहचान, त्वरित उपचार सुनिश्चित करना है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने नागरिकों से सर्वे दल के घर पहुंचने पर पूर्ण सहयोग करने के लिए अपील की है। परिवार के सभी सदस्यों की जांच अवश्य करवाएं ताकि कुष्ठ मुक्त समाज का लक्ष्य हासिल किया जा सके। कुष्ठ रोग पूर्णत: उपचार योग्य है तथा यह रोग छूने अथवा हाथ मिलाने से नहीं फैलता। कुष्ठ रोग का उपचार सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में नि:शुल्क उपलब्ध है।
    कुष्ठ अधिकारी डॉ. अल्पना लुनिया ने बताया कि कुष्ठ जांच खोज अभियान के तहत जिले के सभी विकासखंडो में स्वास्थ्य विभाग की प्रशिक्षित टीम आरएचओ एवं मितनिनों द्वारा घर-घर जा कर
    प्रत्येक व्यक्ति की जांच की जा रही है। सर्वे के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन 15 से 20 घरों तथा शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन 20 से 25 घरों का सर्वे किया जा रहा है। इस दौरान कुष्ठ रोग के शंकास्पद मामलों की पहचान कर प्रारंभिक अवस्था में ही एमडीटी की दावा उपलब्ध कारवाई जाएगी। जिससे रोग के प्रसार पर प्रभावी नियंत्रण हो सके। यदि किसी व्यक्ति के शरीर पर दाग के साथ सुन्नपन, नसों में मोटापन या दर्द, झुनझुनाहट अथवा कान व चेहरे में सूजन, मोटापन जैसे लक्षण दिखाई दे तो ये कुष्ठ रोग की संभावना हो सकती है।

    रायपुर / शौर्यपथ /

    रायपुर लोकसभा प्रत्याशी एवं पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने आज पत्रकार वार्ता में पीएम पोषण योजना के तहत एल्यूमिनियम बर्तन खरीदी को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार ने एल्यूमिनियम बर्तन खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर बच्चों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ किया है।
    उपाध्याय ने बताया कि एल्यूमिनियम बर्तनों में भोजन पकने से होने वाले दुष्प्रभाव वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हैं, इसी कारण केंद्र और कोर्ट ने सरकारी भोजन निर्माण में इनके उपयोग पर रोक के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद राज्य में टेंडर जारी कर दिए गए, जिससे खरीद प्रक्रिया की मंशा और पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
    उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडरों को ऐसे तैयार किया गया कि केवल चुनिंदा फर्मों—जैसे हृक्र ्रह्यह्यशष्द्बड्डह्लद्गह्य, त्रड्डठ्ठश्चड्डह्लद्ब श्वठ्ठह्लद्गह्म्श्चह्म्द्बह्यद्गह्य, स्द्धह्म्द्ब क्रड्डद्व ष्टह्म्द्गड्डह्लद्बशठ्ठ—को ही लाभ मिले। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी इन्हीं फर्मों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई, जबकि कई योग्य और कम दर वाले सप्लायरों को तकनीकी शर्तों के नाम पर बाहर कर दिया गया।
    उपाध्याय ने कहा कि हाल ही में स्पोट्र्स किट टेंडर में सुप्रीम कोर्ट की नाराजग़ी और री-टेंडर के आदेश के बाद भी विभाग ने सीख नहीं ली है। लगातार टेंडरों पर संदेह यह दर्शाता है कि खरीद प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कम होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के कुछ अधिकारियों, चुनिंदा ठेकेदारों और सत्ता से जुड़े प्रभावशाली व्यक्तियों के बीच गठजोड़ से टेंडर प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
    उन्होंने कहा, "यह लड़ाई राजनीति की नहीं, बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य की रक्षा की है। टेंडरों को निजी संपत्ति समझकर बांटने की प्रवृत्ति लोकतंत्र नहीं—लूटतंत्र है। और इस लूटतंत्र का अंत होना चाहिए।"
    उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की, यह कहते हुए कि राज्य सरकार पीएम की मंशा को पलीता लगा रही है।

    मुख्य माँगें:
    पोषण योजना में एल्यूमिनियम बर्तनों के उपयोग पर तुरंत रोक।
    सभी टेंडरों की विस्तृत और पारदर्शी समीक्षा।
    क्करू क्कह्रस्॥्रहृ की गाइडलाइन का कड़ाई से पालन।
    मिलीभगत सामने आने पर दोषियों पर कठोर कार्रवाई।
    विभाग में सक्रिय कथित गठजोड़ की निष्पक्ष जांच।
    पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर, सुरेन्द्र वर्मा, सत्यप्रकाश सिंह, अशोक ठाकुर, संदीप तिवारी और विनोद कश्यप उपस्थित रहे।

      दैनिक शौर्य पथ महासमुन्द ब्यूरो संतराम कुर्रे
    महासमुंद विकासखंड के ग्राम बावनकेरा में यूको बैंक द्वारा आज एकदिवसीय बैंक मेला आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की आसान पहुँच सुनिश्चित करना और स्वयं सहायता समूहों (स्॥त्र) एवं ग्रामीण उद्यमियों को वित्तीय रूप से मजबूत करना था।
    मेले में यूको बैंक के प्रधान कार्यालय से आए वरिष्ठ अधिकारी, अंचल कार्यालय के अधिकारी, स्थानीय शाखा के अधिकारी, सा-धन, हृक्ररुरू टीम, ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रही।
    कार्यक्रम के दौरान 10 स्वयं सहायता समूहों को कुल 60 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत/वितरित किया गया।12 ग्रामीण उद्यमियों को 10 लाख रुपये के व्यक्तिगत एंटरप्राइज़ फाइनेंस लोन का वितरण किया गया।
    इस प्रकार कुल 70 लाख रुपये का वित्तीय सहयोग ग्रामीण समुदाय को प्रदान किया गया।मेले में ग्रामीणों को बैंक अधिकारियों द्वारा द्ग-्यङ्घष्ट, जनसुरक्षा योजना, डिजिटल भुगतान प्रणाली, ऑनलाइन ठगी से बचाव, सुरक्षित बैंकिंग के तरीके, तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं और बैंकिंग उत्पादों की जानकारी दी गई। साथ ही समय पर ऋण भुगतान और डिजिटल बैंकिंग के महत्व पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

     दैनिक शौर्यपथ महासमुन्द ब्यूरो संतराम कुर्रे
    आज सांकरा सोसायटी अंतर्गत सागुनधाप, परसवानी धान खरीदी केंद्र सोसायटी का निरीक्षण किया तथा धान खरीदी में लिमिट कम करने का गम्भीर आरोप भाजपा सरकार पर फिर लागाया, किसान नेता संजय सिन्हा ने छत्तीसगढ में हो रहे धान खरीदी के लचर व्यवस्था एवं खरीद प्रणाली को लेकर प्रदेश की भाजपा की साय सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में धान खरीदी लगभग 23दिन से भी अधिक समय बीत चुके हैं।किंतु सरकार की गलत नीतियों के कारण खरीद केंद्र में लिमिट बहुत ही कम होने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभी मात्र 270 क्विंटल प्रतिदिन लिमिट से एस्ट्रा खरीदी हो रहा है उससे किसानों का कुछ नही होने वाला है साथ ही टोकन को लेकर भी समस्या आ रही, कई किसानों का आज भी एग्रीस्टेक पंजीयन नही हुवा है किसान धान तो लगाये पर गिदावरी रिपोर्ट में जीरो दिखा रहा हैं इससे किसानों को बहुत से समस्या से झूझना पड़ रहा है,आन लाइन टोकन में कम लिमिट दिखाई देने व आन लाइन में हो दिक्कतें भी परेशान कर रही।तीस प्रतिशत समिति द्वारा टोकन काटा जाना है वह भी सही नहीं हो रहा है। किसानों को अपने वाजीब फसल को विक्रय करने में जद्दोजहद करना पड़ रहा है।खरीदी की लिमिट कब बढ़ाया जाएगा इसका कोई जवाब नहीं दे रहा है। किसान आज अपने आप को ठगा सा महसूस कर रही है पूर्वर्ती भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार को याद कर रही है।किसान कांग्रेस नेता संजय सिन्हा ने आघे अपने विज्ञप्ति में कहा कि इस बार किसानों को धान बेचने के लिए टोकन काटने को जूझना पड़ रहा है तुंहर एप सिमित समय के लिये खुलता हैं और चंद मिनटों में ही बंद हो जाता है, दरअशल सुबह निर्धारित समय मे कुछ देर के लिये ही एप खुलता है इस समय सभी किसान टोकन के लिए प्रयाश करते हैं,इसमे कुछ ही किसान सफल हो पाते और बमुश्किल दो से चार मिनट में एप बन्द हो जाता है यही वजह है कि ज्यादातर किसान चॉइस सेंटर में जाकर टोकन के लिए लाइन लगाने को मजबूर हैं पूरे महासमुंद जिला व प्रदेश में यही तसवीर नजर आ रही है किसान कांग्रेस के प्रदेश सचिव संजय सिन्हा ने कहा कि पूर्व की किसान हितैषी कांग्रेस की भूपेश बघेल की सरकार में किसान परेशान नही थे जबकि अभी वर्तमान भाजपा के साय सरकार से पूरे प्रदेश के किसान परेशान हैं व किसान नेता सिन्हा ने कहा कि खरीदी की लिमिट शीघ्र बढाने को कहा है अगर लिमिट नही बढ़ता है इसका मतलब साफ है कि भाजपा की सरकार किसानों का धान नही खरीदना चाहता अगर खिरदना चाह रहा है तो किसानों का एक एक दाना चाहे फरवरी क्यो ना हो जावे खरीदने में सरकार को एक इस्टेटमेंट जारी करना चाहिये!

      दुर्ग / शौर्यपथ / कलेक्टर अभिजीत सिंह ने अत्यधिक ठंड और शीतलहर के प्रकोप को तथा बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, जिले में संचालित समस्त शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त, बी.एस.पी., सी.बी.एस.ई., एवं अन्य पाठ्यक्रम संचालित विद्यालयों के संचालन समय में तत्काल प्रभाव से परिवर्तन के निर्देश दिए है। यह आदेश 15 जनवरी 2026 तक प्रभावशील रहेगा। परिवर्तित समय सारणी के अनुसार, दो पाली में संचालित होने वाली शालाओं में, प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक की प्रथम पाली सोमवार से शुक्रवार तक पूर्वान्ह 08.00 बजे से पूर्वान्ह 11.45 बजे तक, और शनिवार को अपरान्ह 12.15 बजे से सायं 04.15 बजे तक चलेगी। और हाई/उ.मा.वि. की द्वितीय पाली सोमवार से शुक्रवार तक अपरान्ह 12.00 बजे से सायं 04.45 बजे तक, और शनिवार को पूर्वान्ह 08.00 बजे से पूर्वान्ह 12.00 बजे तक संचालित होगी। वहीं, एक पाली में संचालित होने वाली शालाओं का समय सोमवार से शुक्रवार तक पूर्वान्ह 10.00 बजे से सायं 04.00 बजे तक और शनिवार को पूर्वान्ह 08.00 बजे से पूर्वान्ह 12.00 बजे तक निर्धारित किया गया है।

    दुर्ग / शौर्यपथ / भारतीय बौद्ध महासभा के कार्यकारिणी सदस्यों का चुनाव 14 दिसंबर रविवार को डॉ बाबासाहेब अंबेडकर संस्कृतिक भवन सेक्टर 6 भिलाई में सुबह 9:00 से शाम 5:00 बजे तक होगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी एल उमाकांत ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण निष्पक्ष संपन्न कराने विभिन्न व्यवस्थाएं बनाई गई है। इसके अंतर्गत सभी प्रत्याशियों से अपने अपने वार्ड में सौह्राद्रपूर्ण ढंग से मतदाताओं के बीच प्रचार प्रसार करने अपील की गई है। वहीं मतदान परिसर में प्रत्याशियों के लिए पांच पंडाल में बैठने की निशुल्क व्यवस्था की गई है। प्रत्येक पंडाल में अलग-अलग वार्ड के सदस्यों के लिए बैठने की व्यवस्था है। प्रत्याशी प्रतिनिधियों को पहचान पत्र जारी किया गया है। वहीं 30 स्वतंत्र चुनाव सहायक की नियुक्ति की गई है। जिससे चुनाव संचालन सुचारु रूप से हो सके। उन्होंने बताया कि चुनाव परिसर में शांतिपूर्ण ढंग से व्यवस्था बनाने विचार सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति की गई है वहीं पुलिस प्रशासन को भी सूचित किया गया है। चुनाव अधिकारी एल उमाकांत ने सभी प्रत्याशियों से शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने और चुनाव संचालन समिति को सहयोग प्रदान करने की अपील की है।

    शौर्यपथ विशेष 
    नगर पालिक निगम क्षेत्र में कहां क्या गतिविधियां संचालित हो रही हैं, नागरिक सुविधाओं की वास्तविक स्थिति क्या है, स्वच्छता, वैधानिक बाजार, स्ट्रीट वेंडर्स की सूची, उनके पुनर्वास व संचालन की व्यवस्था—इन सभी की समुचित जानकारी और निगरानी प्रशासनिक मुखिया होने के नाते नगर निगम आयुक्त की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। किंतु दुर्ग नगर पालिक निगम क्षेत्र में इन जिम्मेदारियों के निर्वहन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

    दुर्ग जिले के सभी प्रशासनिक अधिकारियों को भिलाई के सुपेला संडे मार्केट का इतिहास भली-भांति ज्ञात है। प्रारंभिक लापरवाही के चलते वह बाजार धीरे-धीरे विशाल रूप लेता गया और जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हुई तो उसे हटाने के लिए कई बार पुलिस बल का सहारा लेना पड़ा। विवाद, तनाव और अव्यवस्था लंबे समय तक प्रशासन के लिए सिरदर्द बनी रही।

    अब ठीक वैसी ही स्थिति की आहट दुर्ग निगम क्षेत्र में सुनाई दे रही है। सुराना कॉलेज से चर्च रोड के बीच पिछले कुछ हफ्तों से एक नया बाजार संचालित हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस बाजार को लेकर निगम प्रशासन द्वारा किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति नहीं दी गई है। बाजार में यह चर्चा जरूर फैलाई जा रही है कि शनिचरी बाजार के व्यापारी यहां व्यापार कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। वर्षों से शनिचरी बाजार में व्यापार करने वाले गिने-चुने लोग ही यहां नजर आते हैं, जबकि बड़ी संख्या में बाहरी क्षेत्रों से आए व्यापारी इस मार्ग पर दुकानें सजा चुके हैं।

    कुछ व्यापारियों का दावा है कि शुरुआती एक-दो सप्ताह निगम द्वारा रसीदें काटी गईं, लेकिन इसके बाद निगम के कर्मचारी और अधिकारी इस ओर नजर ही नहीं आए। शनिचरी बाजार की आड़ में ऐसे व्यापारी भी यहां व्यापार कर रहे हैं, जो दुर्ग निगम क्षेत्र के निवासी तक नहीं हैं। सवाल यह है कि कौन व्यापारी, किस आधार पर, किसके निर्देश पर इस असंवैधानिक बाजार का संचालन कर रहा है—और यह सब जानते हुए भी निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल की ओर से कोई ठोस प्रशासनिक पहल क्यों नहीं की जा रही?

    यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि इस मुद्दे का उद्देश्य किसी के रोजगार या व्यापार को चोट पहुंचाना नहीं है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और भविष्य के विवादों को रोकना है। यदि यह बाजार निगम द्वारा वैधानिक रूप से स्वीकृत है तो इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए और राजस्व के रूप में इसे निगम की आय का स्रोत बनाया जाना चाहिए। और यदि अनुमति नहीं है, तो फिर निगम आयुक्त अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किस प्रकार कर रहे हैं, यह प्रश्न स्वाभाविक है।

    इसी बीच निगम प्रशासन में अनियमितताओं की लंबी फेहरिस्त भी चर्चा में है। कभी राजस्व मामलों में निचले स्तर के कर्मचारियों पर नोटिसों की बौछार, तो कभी दूषित जल आपूर्ति के मामलों में प्लेसमेंट कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराना—जबकि सड़कों पर आवारा पशुओं का आतंक, जगह-जगह गड्ढे, अधूरे विकास कार्य, बदबू और प्रदूषण से जूझते मोहल्ले शहर की पहचान बनते जा रहे हैं। कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलना और वर्षों से कार्यरत अनुभवी अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद गोपनीय दस्तावेज प्लेसमेंट कर्मचारियों को सौंपना, जिसके परिणामस्वरूप निगम की महत्वपूर्ण एक्सेल शीट का वायरल होना—इन सबने आयुक्त सुमित अग्रवाल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    अतिक्रमण हटाने की कार्रवाइयों में कथित भेदभाव, लिखित शिकायतों के बावजूद आयुक्त सुमित अग्रवाल का मौन, और निगम कार्यालय से जुड़ी गोपनीय फाइलों का चयनित रूप से बाहर आना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां तक कि निगम के भीतर चपरासी से लेकर ग्रेड-3 कर्मचारी और कथित पत्रकार के बीच हुए माफीनामा सौदे में आयुक्त सुमित अग्रवाल की भूमिका को लेकर भी निगम गलियारों में कानाफूसी है।

    ऐसे हालात में अब निगाहें दुर्ग निगम क्षेत्र के विधायक एवं प्रदेश सरकार में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और महापौर अलका बाघमार पर टिक गई हैं। आम जनता ने उन्हें शहर में सुशासन की उम्मीद के साथ चुना है। भले ही निगम प्रशासन तकनीकी रूप से एक स्वतंत्र संस्था हो, लेकिन शहर की बदहाली की जिम्मेदारी अंततः जनप्रतिनिधियों पर ही आकर टिकती है।

    अब बड़ा सवाल यह है कि क्या निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल अवैध बाजार, अव्यवस्था और प्रशासनिक अनियमितताओं पर ठोस कदम उठाकर दुर्ग शहर को सुशासन की दिशा में ले जाएंगे, या फिर सब कुछ यूं ही चलता रहेगा और शहर अगली बड़ी प्रशासनिक उलझन की ओर बढ़ता रहेगा? अवैध बाजार के संचालन में आयुक्त की कथित निष्क्रियता आज शहर में चर्चा का केंद्र बन चुकी है, और आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई ही यह तय करेगी कि यह चेतावनी समय रहते सुनी गई या नहीं।

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