August 07, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    - विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने 10 लाख रूपए की लागत से निर्मित होने वाले सामाजिक भवन का किया भूमिपूजन
    - विधानसभा अध्यक्ष नंदई चौक में आयोजित गुरूघासीदास बाबा जयंती के कार्यक्रम में हुए शामिल

        राजनांदगांव / शौर्यपथ / विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आज राजनांदगांव शहर के गुरूघासीदास धर्मशाला गुरूघासीदास चौक नंदई रोड में आयोजित सत्यमूर्ति परम पूज्य बाबा गुरूघासीदास जयंती समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने 10 लाख रूपए की लागत से निर्मित होने वाले सामाजिक भवन का भूमिपूजन किया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आज बाबा गुरूघासीदास जी के अवतरण दिवस है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बाबा गुरूघासीदास जी की आशीर्वाद से देश एवं प्रदेश में समरसता, शांति, सद्भावना एवं प्रेम है। श्रद्धापूर्वक बाबा जी के प्रतीक के रूप में सफेद ध्वज फहराते है। सफेद ध्वज शांति, प्रेम, सद्भावना, एकात्मता, सबको एक साथ मिलाने, सादगी और बाबा जी के विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गुरूघासीदास बाबा जी के जन्मस्थली गिरौदपुरी पूरे देश-दुनिया में विख्यात है। बाबा जी की प्रतीक एवं गरिमा के अनुरूप गिरौदपुरी में देश का अनूठा, सबसे ऊंचा और भव्य जैतखाम का निर्माण किया गया है।
    उन्होंने कहा कि बाबा जी के आशीर्वाद से ही जैतखाम को निर्माण कराने का अवसर मिला है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि ने कहा कि शासन द्वारा प्रदेश के लगभग सभी ग्रामों में समाज के लिए मंगल भवन का निर्माण किया गया है। सभी ग्रामों में कांक्रीट रोड का निर्माण किया गया है। शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई है। साथ ही नवोदय विद्यालय की स्थापना, नि:शुल्क कोचिंग और बच्चों के प्राथमिक शिक्षा के लिए बेहतर व्यवस्था की गई है।
    विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि समाज के लिए शिक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है। शिक्षित समाज ही नेतृत्व करते है और आगे बढ़ते है। उन्होंने कहा कि बालक हो या बालिका सभी के लिए शिक्षा जरूरी है और बाबा जी का पंथी के माध्यम से यही संदेश है। बाबा जी का हिंसा छोडऩे, मांस-मदिरा छोडऩे का उपदेश किसी एक समाज के लिए नहीं है, यह मानवता एवं सभी समाज के लिए है। मनुष्य में सतगुण, सद्भाव, सादगी होने और हिंसा छोडऩे पर दुनिया आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में शानदार नया विधानसभा बनकर तैयार हो गया है। उन्होंने समाज के नागरिकों को नए विधानसभा भवन में विधानसभा की कार्यवाही और विधानसभा को देखने के लिए आमंत्रित किया।
    पूर्व विधायक रामजी भारती ने सभी को गुरूघासीदास जयंती की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि आज बाबा के संदेश मनखे-मनखे एक समान हैं के उपदेश को लेकर समाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि गुरूघासीदास बाबा का आशीर्वाद पूरे समाज सहित सभी लोगों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आज सतनामी समाज अग्रणी समाज के रूप में आगे आ रहा है। इस अवसर पर अध्यक्ष शहर सतनामी समाज सेवा समिति राजनांदगांव नरेन्द्र राय ने स्वागत उद्बोधन दिया। इस अवसर पर महापौर मधुसूदन यादव, कोमल सिंह राजपूत, रमेश पटेल, पार्षद श्रीमती केवरा रॉय, पूर्व पार्षद विजय राय, अपर कलेक्टर सीएल मारकण्डेय, एसडीएम गौतम पाटिल एवं अन्य जनप्रतिनिधि तथा अधिकारी तथा सतनामी समाज के नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

    मतदान का प्रतिफल या मौन की सजा?
    दुर्ग विधानसभा और सांसद विजय बघेल की राजनीतिक जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल

    शौर्यपथ राजनैतिक / लोकतंत्र में मतदाता की सबसे बड़ी ताकत उसका मत होता है। यही मत किसी व्यक्ति को जनप्रतिनिधि बनाता है और वही मत उससे जवाबदेही की अपेक्षा भी करता है। किंतु जब यह मत विकास के बजाय उपेक्षा में बदल जाए, तब सवाल उठना स्वाभाविक है। दुर्ग विधानसभा क्षेत्र के मतदाता आज ठीक ऐसे ही सवालों के बीच खड़े हैं।
    दुर्ग विधानसभा की जनता ने लोकसभा चुनावों में सांसद के रूप में विजय बघेल को न सिर्फ एक बार, बल्कि दो बार अपना बहुमूल्य मत देकर संसद तक पहुंचाया। वर्ष 2019 में रिकॉर्ड मतों से जीत दिलाने में दुर्ग विधानसभा की भूमिका निर्णायक रही। तब यह उम्मीद जगी थी कि दुर्ग शहर और विधानसभा क्षेत्र को एक ऐसा सांसद मिलेगा, जो केंद्र में अपनी मजबूत उपस्थिति के माध्यम से क्षेत्र के विकास को नई दिशा देगा।
    परंतु 2019 से 2024 तक के पूरे कार्यकाल में दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में सांसद के रूप में विजय बघेल की कोई ठोस, दूरगामी या पहचान बनाने वाली पहल सामने नहीं आई। कुछ सीमित व्यक्तिगत या चुनिंदा लाभार्थियों तक सिमटे कार्यों को छोड़ दें, तो दुर्ग विधानसभा के लिए ऐसा कोई विकास कार्य नहीं दिखता जिसे सांसद की उपलब्धि के रूप में गिनाया जा सके।
    इसके बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव में दुर्ग की जनता ने एक बार फिर विजय बघेल को मौका दिया। यह निर्णय सांसद के व्यक्तिगत कार्यों से अधिक केंद्र में नरेंद्र मोदी को पुनः प्रधानमंत्री बनाने की भावना से प्रेरित माना गया। छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों में से केवल दो—दुर्ग और राजनांदगांव—में ही पुराने सांसद दोबारा चुने गए। राजनांदगांव में सांसद संतोष पांडे के कार्यों की चर्चा होती है, लेकिन दुर्ग में विजय बघेल के दूसरे कार्यकाल के डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी दुर्ग विधानसभा की ओर कोई उल्लेखनीय विकास पहल दिखाई नहीं देती।
    आज दुर्ग शहर में यह चर्चा आम हो चली है कि जनता ने सांसद को नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री के नाम पर वोट दिया। यह चर्चा केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत का प्रतिबिंब बनती जा रही है। यदि सांसद के छह-साढ़े छह वर्षों के कार्यकाल को देखा जाए, तो ऐसा कोई “मील का पत्थर” नजर नहीं आता जो दुर्ग शहर के विकास की दिशा और दशा बदलने वाला हो।
    ऐसे में एक बड़ा और गंभीर प्रश्न खड़ा होता है—क्या आज सांसदों का अस्तित्व केवल प्रधानमंत्री के नाम तक सीमित रह गया है? क्या क्षेत्रीय विकास, स्थानीय समस्याएं और जनता की अपेक्षाएं केवल चुनावी घोषणाओं तक सिमट कर रह गई हैं?
    दुर्ग विधानसभा की जनता अब यह महसूस करने लगी है कि उनका मत विकास का माध्यम नहीं, बल्कि सत्ता तक पहुंचने का साधन भर बन गया है। चुनाव के समय किए गए वादे, चुनाव परिणाम के बाद स्मृति से ओझल होते दिख रहे हैं। यही कारण है कि “मतदान की सजा” जैसी भावना आज दुर्ग विधानसभा के मतदाताओं के बीच जन्म ले रही है।
    लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि का मूल्यांकन भावनाओं से नहीं, कार्यों से होता है। दुर्ग विधानसभा क्षेत्र आज सांसद विजय बघेल से सवाल पूछ रहा है—क्या दो बार दिया गया जनादेश केवल चुनाव जीतने के लिए था, या क्षेत्र के समग्र विकास के लिए भी?
    यदि इन सवालों के उत्तर समय रहते नहीं मिले, तो यह असंतोष आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श की दिशा ही नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही की परिभाषा भी तय करेगा। दुर्ग विधानसभा की जनता अब मौन नहीं, बल्कि उत्तर चाहती है।

    दीपक वैष्णव क़ी खास रिपोर्ट

    सुकमा. नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न केवल प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया है, बल्कि महिला सुरक्षा और आदिवासी कर्मचारियों के सम्मान पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। कोंटा ब्लॉक में पदस्थ एक आदिवासी महिला स्वास्थ्य कर्मचारी ने जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) पर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने इस संबंध में कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की गई है।

    पीड़िता के अनुसार, 21 अगस्त 2025 को उसे कोंटा ब्लॉक से अचानक सीएमएचओ कार्यालय सुकमा में कार्य हेतु अटैच करने का आदेश जारी किया गया। आरोप है कि इसके बाद न तो उससे कोई नियमित कार्यालयीन कार्य कराया गया और न ही उसे स्पष्ट जिम्मेदारी दी गई। महिला कर्मचारी का कहना है कि इस दौरान उसे मानसिक दबाव, अपमानजनक व्यवहार और अनावश्यक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। एक आदिवासी महिला के लिए यह स्थिति न केवल मानसिक रूप से पीड़ादायक रही, बल्कि उसके आत्मसम्मान को भी गहरी ठेस पहुंचाने वाली बताई जा रही है।

    पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने इसे गंभीर बताते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की। पूर्व विधायक ने कहा कि यदि आरोप सही हैं तो यह न केवल एक महिला कर्मचारी के साथ अन्याय है, बल्कि सरकारी पद की गरिमा का भी दुरुपयोग है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारी पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी महिला कर्मचारी भय या दबाव में काम करने को मजबूर न हो। वहीं इस मामले में जब पीड़िता से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

    सुशासन का पोस्टर दुर्ग में फ टा हुआ,आयुक्त की कलम चल रही, शहर ठहर गया!


    दुर्ग । शौर्यपथ ।

    साल 2024 की दीपावली के बाद दुर्ग नगर पालिक निगम प्रशासन की कमान आयुक्त सुमित अग्रवाल के हाथों में आई। प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा "सुशासन" का दावा किया जा रहा है, लेकिन दुर्ग निगम क्षेत्र की जमीनी हकीकत इस दावे को आईना दिखाती नजर आ रही है। बड़े-बड़े वादों के सहारे भारतीय जनता पार्टी ने शहरी सरकार पर कब्जा तो कर लिया, पर शहर का विकास मानो फ ाइलों और प्रेस विज्ञप्तियों तक सिमट कर रह गया है।
    यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि दुर्ग निगम क्षेत्र में पसरी बदहाली की तस्वीर है। बीते लगभग एक वर्ष में विकास कार्य लगभग ठप्प हैं, ठेकेदार नजर नहीं आ रहे और निगम आर्थिक किल्लत से जूझ रहा है। इसके उलट, शहर भर में अव्यवस्थाओं का साम्राज्य तेजी से फैलता दिख रहा है, जिसने आयुक्त सुमित अग्रवाल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
    चर्च रोड के पास अवैध बाजार, समृद्धि बाजार क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर चल रही गतिविधियां, सुराना कॉलेज के सामने बदबूदार माहौल और संभावित बीमारियों का खतरा—ये सब निगम प्रशासन की कार्यशैली पर सीधा प्रश्नचिन्ह हैं। बड़े दुकानदारों के अवैध कब्जे आयुक्त की नजरों से ओझल हैं, जबकि गरीबों के ठेले-गुमठियों पर अतिक्रमण के नाम पर सख्ती दिखाई देती है। यही नहीं, अवैध रूप से हुए राम रसोई अनुबंध के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई न होना, चयनात्मक प्रशासन की ओर इशारा करता है।
    शहर के मध्य स्थित चौपाटी की बदहाल हालत "हमने बनाया, हम ही संवारेंगे" जैसे नारों की पोल खोल रही है। सड़कों पर आवारा मवेशियों की फौज, जगह-जगह गड्ढे, बदहाल चौक-चौराहे और नागरिकों को पीने के लिए दूषित जल—ये सब नगर निगम की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हैं। सुशासन तिहार में आवेदकों को गलत या भ्रामक जवाब देना और कार्रवाई के नाम पर चपरासियों व प्लेसमेंट कर्मचारियों को नोटिस थमाना, जबकि उच्च अधिकारियों को बचाने की रणनीति अपनाना, प्रशासनिक निष्पक्षता पर गहरी चोट है।
    सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दुर्ग निगम क्षेत्र में भाजपा की शहरी सरकार होने के बावजूद, और यहीं भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. सरोज पाण्डेय, दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री ललित चंद्राकर तथा छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव का निवास स्थान होने के बावजूद, शहर की यह बदहाली आज चर्चा का विषय बनी हुई है।
    ऐसे में आमजन के बीच यह सवाल गूंज रहा है—दुर्ग में ज्यादा ताकतवर कौन है? आयुक्त या फि र जनप्रतिनिधि?
    शहर की अव्यवस्था, विकास की रफ्तार पर ब्रेक और निगम अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ कथित भेदभावपूर्ण कार्रवाई ने आयुक्त सुमित अग्रवाल की नैतिक जिम्मेदारी पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। अब निगाहें प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर टिकी हैं—क्या वे दुर्ग निगम क्षेत्र की सुध लेंगे, या फिर "सुशासन" केवल सोशल मीडिया और विज्ञापनों तक ही सीमित रह जाएगा?
    दुर्ग की जनता आज जवाब चाहती है—क्योंकि सवाल सिर्फ विकास का नहीं, भरोसे का भी है।

    राज्य सरकार की प्रशासनिक स्तर पर बड़ी सर्जरी , कई जिलों के कलेक्टर बदले

    रायपुर। शौर्यपथ
    छत्तीसगढ़ शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों के व्यापक तबादले के आदेश जारी कर दिए हैं। यह आदेश सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किए गए हैं। आदेश के अनुसार राज्य के कई जिलों में कलेक्टर, अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और नगर निगम स्तर पर महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं।

    भास्कर विलास संदीपन बने छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी
    राज्य शासन द्वारा श्री भास्कर विलास संदीपन (IAS 2011), कलेक्टर जिला-सरगुजा को अस्थायी रूप से अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ के पद पर पदस्थ किया गया है। यह नियुक्ति आगामी आदेश तक प्रभावशील रहेगी। निर्वाचन से जुड़े इस महत्वपूर्ण दायित्व को देखते हुए यह बदलाव प्रशासनिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में भी बदलाव
    श्री रणबीर शर्मा (IAS 2012) को कलेक्टर बेमेतरा से हटाकर प्रबंध संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन नियुक्त किया गया है। उनके कार्यभार ग्रहण करने के बाद श्री संजीव कुमार झा (IAS 2011) को एनएचएम के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।

    जिलों में बदले गए कलेक्टर
    तबादला सूची के अनुसार कई जिलों में कलेक्टर स्तर पर परिवर्तन किया गया है—

    श्री अजीत वसंत (IAS 2013) → सरगुजा से कोरबा के कलेक्टर
    श्री कुणाल दुदावत (IAS 2017) → दंतेवाड़ा से कोरबा के कलेक्टर
    श्री देवेश कुमार ध्रुव (IAS 2018) → सुकमा से दंतेवाड़ा के कलेक्टर
    सुश्री प्रतिभा मित्तल (IAS 2018) → नारायणपुर से बेमेतरा की कलेक्टर

    नगर निगम और जिला पंचायत में भी बदलाव
    श्री अमित कुमार (IAS 2019) → आयुक्त, नगर निगम बिलासपुर से कलेक्टर, सुकमा
    श्री प्रकाश कुमार सर्वे (IAS 2019) → अपर कलेक्टर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ से आयुक्त, नगर निगम बिलासपुर
    श्री गजेन्द्र सिंह ठाकुर (IAS 2019) → अपर कलेक्टर, सुकमा से सीईओ, जिला पंचायत धमतरी
    सुश्री रोमा श्रीवास्तव (IAS 2020) → सीईओ, जिला पंचायत धमतरी से उप सचिव, मंत्रालय

    प्रशासनिक हलकों में हलचल
    इस तबादले को राज्य प्रशासन में बड़ा और रणनीतिक बदलाव माना जा रहा है। कई संवेदनशील जिलों में नए अधिकारियों की पदस्थापना से प्रशासनिक सख्ती, कार्यशैली में बदलाव और चुनावी तैयारी को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

     

    इस वर्ष 7.5 प्रतिशत अधिक किसानों का 19 प्रतिशत अधिक का रकबा पंजीयन

    रायपुर,/ शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में केन्द्र सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर राज्य के पंजीकृत किसानों से धान खरीदी का कार्य अनवरत रूप से जारी है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में संचालित 2739 खरीदी केन्द्रों के माध्यम से धान की खरीदी सुगमता पूर्वक की जा रही है । धान की खरीदी के लिए 15 नवम्बर 2025 से 31 जनवरी, 2026 तक की अवधि निर्धारित की गई है ।

    राज्य के किसानों से सुगमता पूर्वक धान खरीदी के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया है , वहीं अवैध धान परिवहन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

    7.5 प्रतिशत किसान एवं 19 प्रतिशत अधिक रकबा का पंजीयन

    राज्य में किसानों से धान खरीदी हेतु समुचित व्यवस्था की गई है । खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में किसान पंजीयन का कार्य एकीकृत किसान पोर्टल एवं एग्रीस्टेक पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है । वर्तमान में धान की खरीदी हेतु 27.40 लाख किसानों के धान का रकबा 34.39 लाख हेक्टेयर का पंजीयन किया गया है । जबकि गत वर्ष 25.49 लाख किसानों द्वारा रकबा 28.76 लाख हेक्टेयर से समर्थन मूल्य पर धान विक्रय किया गया था । इस प्रकार गत वर्ष विक्रय गये किसानों की तुलना में इस वर्ष लगभग 7.5 प्रतिशत किसान एवं 19 प्रतिशत रकबा का पंजीयन अधिक हुआ है ।

    एग्रीस्टेक पंजीयन से छूट

    संस्थागत पंजीयन, भूमिहीन किसान (अधिया/रेगहा), डूबान क्षेत्र के किसान, वन अधिकार पट्टाधारी किसान, ग्राम कोटवार (शासकीय पट्टेदार) श्रेणी के किसानों को एग्रीस्टेक पंजीयन से छूट प्रदान की गई है । किसान पंजीयन का कार्य वर्तमान में जारी है ।

    24 घंटे टोकन प्राप्त करने की सुविधा "टोकन व्यवस्था का हुआ सरलीकरण

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसानों के हितों का ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार ने अब 24 घंटे टोकन प्राप्त करने की सुविधा "तुहर टोकन" एप्प में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में प्रदान कर दी है । वर्तमान में 17.24 लाख टोकन से 87 लाख टन धान खरीदी हेतु जारी किया जा चुका है । किसानों द्वारा आगामी 20 दिवस के टोकन प्राप्त किये जा सकते हैं ।

    किसानों को 7 हजार 771 करोड़ रुपए की राशि का त्वरित भुगतान

    अधिकारियों ने बताया कि 11 दिसंबर 2025 की स्थिति में किसानों को धान खरीदी के एवज में 7 हजार 771 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान समर्थन मूल्य के तहत का किया जा चुका है ।

    अवैध धान विक्रय/परिवहन पर नियंत्रण

    जिलों में विशेष चेकिंग दल का गठन राजस्व, खाद्य, सहकारिता, वन, मंडी आदि विभागों के अधिकारियों का गठन कर किया गया है ।
    राज्य स्तर पर मार्कफेड अंतर्गत स्टेट इंटीग्रेटेड कमांड एवं कंट्रोल सेंटर (ICCC) की स्थापना की गई है । अब तक प्रदेश में अवैध धान परिवहन/भण्डारण के 2000 से अधिक प्रकरण बनाये गये हैं, जिसमें अब तक 1.93 लाख टन अवैध धान जब्त किया गया है ।

       रायपुर / शौर्यपथ  / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रामभक्ति की अमर प्रतिमूर्ति, श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के अग्रणी स्तंभ, पूर्व लोकसभा सांसद एवं संत परंपरा के महान प्रतिनिधि परम पूज्य श्रद्धेय स्वामी डॉ. रामविलासदास वेदान्ती जी के देवलोकगमन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वामी डॉ. रामविलासदास वेदान्ती जी का देवलोकगमन समस्त रामभक्तों, सनातन समाज और राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन श्रीराम के काज, धर्म-संरक्षण और लोककल्याण के लिए समर्पित कर दिया। उनका तपस्वी जीवन, स्पष्ट वैचारिक दृष्टि और निर्भीक राष्ट्रवादी चिंतन समाज को युगों तक मार्गदर्शन देता रहेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान स्वामी वेदान्ती जी का योगदान ऐतिहासिक और अविस्मरणीय रहा है। उन्होंने अपने आचरण, विचार और संघर्ष से यह सिद्ध किया कि संत परंपरा केवल साधना तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के उत्थान की सशक्त शक्ति है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वामी वेदान्ती जी का ओजस्वी व्यक्तित्व, धर्म के प्रति अटूट निष्ठा और लोकहित के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उनके द्वारा स्थापित आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की विरासत सदैव जीवंत रहेगी।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दिवंगत संत के श्रीचरणों में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि वे पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल अनुयायियों और श्रद्धालुओं को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

      रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज पाटिल को श्रद्धांजलि दी गई। विगत 12 दिसम्बर को लातूर में उनका निधन हो गया था। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, मंत्रीगणों और सदस्यों ने सदन में मौन धारण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने दिवंगत श्री शिवराज पाटिल के लंबे राजनीतिक जीवन को याद करते हुए कहा कि स्वर्गीय श्री पाटिल लगातार सात बार लोकसभा सदस्य रहे। उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण मंत्रालयों में मंत्री का दायित्व संभाला। संसदीय कार्यवाही के टेलीविजन प्रसारण में उनका महत्वपूर्ण योगदान है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने केन्द्रीय मंत्री और लोकसभा अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि स्वर्गीय श्री पाटिल ने डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार में केंद्रीय गृहमंत्री का अहम दायित्व संभाला था। एक ऐसे वक्त में जब दुश्मन लगातार देश के विरुद्ध षड़यंत्र कर रहे थे, उन्होंने गृहमंत्री का दायित्व बड़ी ही संवेदनशीलता से निभाया। लातूर का प्रतिनिधित्व करने वाले स्वर्गीय श्री पाटिल का लंबा सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन रहा है। उन्होंने लातूर को भूकंप की त्रासदी से निपटने में बहुत मदद की।

    नेता प्रतिपक्ष डा. चरणदास महंत ने श्री शिवराज पाटिल के सेवाभावी राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि उनका जाना हम सबके लिए बहुत दुखद है। वे विधि और संविधान के अच्छे जानकार थे।

      रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का आवास एवं पर्यावरण विभाग बीते दो वर्षों में वित्तीय अनुशासन, किफायती आवास, निवेश प्रोत्साहन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर चुका है। यह बात आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेसवार्ता में कही।
    मंत्री चौधरी ने बताया कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को 735 करोड़ रुपये का ऋण चुकाकर पूरी तरह ऋणमुक्त किया गया। अविक्रित संपत्तियों के निपटान हेतु लागू की गई ओटीएस-2 योजना के अंतर्गत 9 माह में 1251 संपत्तियों का विक्रय कर 190 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया। भविष्य में अविक्रित स्टॉक से बचने के लिए मांग आधारित निर्माण नीति लागू की गई है, जिसमें न्यूनतम पंजीयन के बाद ही निर्माण प्रारंभ होगा।
    नवा रायपुर अटल नगर देश का पहला ऋणमुक्त ग्रीनफील्ड शहर बन गया है, जहां 1,345 करोड़ रुपये का ऋण चुकाकर 5,030 करोड़ मूल्य की भूमि एवं संपत्तियां गिरवी मुक्त की गईं। यहां 132 एकड़ में टेक्सटाइल पार्क, सेमीकंडक्टर व आईटी सेक्टर में 3,800 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावित हैं, जिससे 30,000 से अधिक रोजगार सृजन की संभावना है।
    नवा रायपुर को टेक-हब, कॉन्फ्रेंस कैपिटल, वेडिंग डेस्टिनेशन और मेडिकल हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। 400 करोड़ की इनलैंड मरीना, 230 करोड़ की साइंस सिटी, 120 करोड़ का आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर और मेडी सिटी जैसी परियोजनाएं शहर को नई पहचान देंगी।
    नगर एवं ग्राम निवेश विभाग द्वारा किफायती जन आवास नियम-2025 लागू कर कृषि भूमि पर भी किफायती आवास की अनुमति दी गई है। औद्योगिक नियमों में संशोधन कर निर्माण को सरल और व्यावहारिक बनाया गया है। वहीं, पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा रियल टाइम उत्सर्जन निगरानी प्रणाली लागू कर पर्यावरणीय अनुशासन को सशक्त किया गया है।
    मंत्री चौधरी ने कहा कि आवास एवं पर्यावरण विभाग की ये उपलब्धियां छत्तीसगढ़ को वित्तीय रूप से सशक्त, निवेश-अनुकूल, पर्यावरण-संवेदनशील और नागरिक-केंद्रित राज्य के रूप में स्थापित करती हैं। नवा रायपुर अटल नगर विकसित छत्तीसगढ़ की सोच का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है।

       रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित उनके कार्यालय कक्ष में कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के प्रतिनिधियों ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री साय को कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया ट्रेडर्स एवं स्वदेशी जागरण मंच के संयुक्त तत्वावधान में देशभर में संचालित स्वदेशी संकल्प यात्रा के अंतर्गत 20 दिसंबर को दुर्ग में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने का आमंत्रण दिया।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने CAIT के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए आमंत्रण के लिए धन्यवाद दिया और स्वदेशी विचारधारा को मजबूती देने वाले ऐसे आयोजनों की सराहना की।

    उल्लेखनीय है कि स्वदेशी संकल्प यात्रा दुर्ग शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए नगर भ्रमण करेगी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य सशक्त स्वदेशी, वोकल फॉर लोकल, स्थानीय व्यापार को सशक्त बनाना तथा स्वदेशी उद्यमिता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है।

    इस अवसर पर कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया ट्रेडर्स के अध्यक्ष श्री प्रकाश सांखला, यात्रा संयोजक श्री संजय चौबे सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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