
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
एक साल में 901 किसानों के खातों में डीबीटी से पहुंचे 30.34 करोड़ रुपये
चेक और बैंक के चक्कर से मिली राहत, मुआवजा, पुनर्वास और बोनस की राशि सीधे खाते में
रायपुर, / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में राज्य शासन द्वारा सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए शासकीय सेवाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लगातार सरल बनाया जा रहा है। इसी दिशा में रायगढ़ जिले में भू-अर्जन से प्रभावित किसानों को मुआवजा, पुनर्वास एवं बोनस की राशि सीधे उनके बैंक खातों में ऑनलाइन अंतरित करने की व्यवस्था किसानों के लिए बड़ी सहूलियत साबित हो रही है। बीते एक वर्ष में रायगढ़ अनुविभाग के 901 किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 30 करोड़ 34 लाख 77 हजार 902 रुपये अंतरित किए जा चुके हैं।
रायगढ़ अनुविभाग में 26 सितम्बर 2025 से भू-अर्जन से संबंधित भुगतान ऑनलाइन करने की व्यवस्था लागू की गई। इसके बाद किसानों को चेक जारी करने के स्थान पर स्वीकृत राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है। 21 सितम्बर 2026 तक इस व्यवस्था के माध्यम से 901 किसानों को 30 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भू-अर्जन मुआवजे के रूप में 391 किसानों के खातों में 20 करोड़ 67 लाख 53 हजार 163 रुपये अंतरित किए गए हैं। इसी तरह पुनर्वास एवं बोनस के तहत 510 किसानों को 9 करोड़ 67 लाख 24 हजार 739 रुपये का भुगतान किया गया है। इस प्रकार दोनों मदों में कुल 901 किसानों को 30 करोड़ 34 लाख 77 हजार 902 रुपये सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त हुए हैं।
चेक से सीधे खाते तक, आसान हुई भुगतान प्रक्रिया
पूर्व में भू-अर्जन से प्रभावित किसानों को मुआवजा राशि का भुगतान चेक के माध्यम से किया जाता था। चेक प्राप्त करने के बाद किसानों को उसे बैंक में जमा कराने और भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ता था। कई बार इसके लिए कार्यालय और बैंक के चक्कर भी लगाने पड़ते थे। ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों को इस प्रक्रिया से राहत मिली है।
अब स्वीकृत मुआवजा, पुनर्वास एवं बोनस की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में पहुंच रही है। इससे किसानों के समय और श्रम की बचत होने के साथ भुगतान प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी हुई है।
किसानों ने कहा—बिना परेशानी सीधे खाते में मिल रही राशि
ग्राम कोतासुरा के किसान श्री टंकधर मालाकार ने बताया कि भू-अर्जन मुआवजा वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था किसानों के लिए काफी सुविधाजनक है। पहले की तुलना में अब मुआवजा राशि आसानी से प्राप्त हो रही है।
ग्राम दनौट की श्रीमती चम्पाबाई अगरिया ने कहा कि ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था से किसानों को काफी लाभ मिला है। अब बिना किसी परेशानी के मुआवजे की राशि सीधे बैंक खाते में प्राप्त हो रही है।
ग्राम मुरालीपाली के श्री हनुमान प्रसाद शर्मा ने बताया कि पहले भू-अर्जन की राशि प्राप्त करने के लिए चेक मिलने के बाद बैंक जाना पड़ता था। अब मुआवजा एवं पुनर्वास की राशि सीधे बैंक खाते में जमा हो रही है, जिससे किसानों को काफी सुविधा मिली है।
भू-अर्जन मुआवजे की ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था ने किसानों के लिए पूरी प्रक्रिया को सरल बनाया है। डीबीटी के माध्यम से राशि सीधे बैंक खातों में पहुंचने से एक ओर किसानों को कार्यालय और बैंक के अनावश्यक चक्कर से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता और सुविधा भी बढ़ी है।
24 सितंबर तक लगभग 60 लाख राशनकार्डधारियों ने लगभग 19.58 लाख क्विंटल चावल का किया उठाव
रायपुर, / सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत राज्य में सितंबर एवं अक्टूबर 2026 माह के लिए खाद्यान्न का आबंटन 14,186 उचित मूल्य दुकानों को जारी किया गया है। सितंबर माह के लिए आबंटित खाद्यान्न का सभी उचित मूल्य दुकानों में भंडारण पूर्ण हो चुका है तथा राशनकार्डधारियों को खाद्यान्न वितरण की कार्यवाही निरंतर जारी है।
24 सितंबर 2026 तक राज्य में लगभग 60 लाख राशनकार्डधारियों द्वारा सितंबर माह के खाद्यान्न का उठाव किया जा चुका है। इस दौरान कुल 19 लाख 57 हजार 880 क्विंटल चावल का उठाव हुआ है। शेष राशनकार्डधारियों को भी निर्धारित पात्रता के अनुसार खाद्यान्न का वितरण उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से किया जा रहा है।
राज्य के सभी जिलों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत खाद्यान्न वितरण का कार्य प्रचलित है। राज्य शासन द्वारा खाद्यान्न के भंडारण एवं वितरण की नियमित निगरानी और मानिटरिंग की जा रही है, ताकि पात्र राशनकार्डधारियों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न समय पर उपलब्ध कराया जा सके। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सुचारू संचालन तथा राशनकार्डधारियों को खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक निगरानी बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के तहत बेटियों को मिली स्वच्छता और सम्मान की सुविधा
रायपुर, / कांकेर जिले के जनपद पंचायत कोयलीबेड़ा के नक्सल मुक्त ग्राम पंचायत केसकोड़ी में अब विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। कभी नक्सल समस्या से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में अब शिक्षा, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विकसित भारत - रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत केसकोड़ी में पहला बालिका शौचालय निर्मित किया गया है। यह निर्माण बेटियों की गरिमा, स्वच्छता और विद्यालयों में सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है। कांकेर जिले की नक्सल मुक्त पंचायत केसकोड़ी में निर्मित बालिका शौचालय इस अभियान को धरातल पर उतारने का उदाहरण है। इससे विद्यालय में अध्ययनरत बालिकाओं को स्वच्छता संबंधी आवश्यक सुविधा उपलब्ध होगी।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने 6 अगस्त 2026 को ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान का शुभारंभ किया था। यह विशेष अभियान 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में 286.85 करोड़ रुपए की लागत से 6,671 बालिका शौचालयों का निर्माण किया जाना है। प्रत्येक शौचालय के निर्माण के लिए 4 लाख 30 हजार रुपए की राशि निर्धारित की गई है।
उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान का उद्देश्य गांव की हर बेटी को विद्यालय में सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में बालिकाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के किसी भी गांव की बेटी को ऐसी समस्या का सामना न करना पड़े। कांकेर जिले की नक्सल मुक्त पंचायत केसकोड़ी में वीबी-जी राम जी योजना से निर्मित पहला बालिका शौचालय इसी संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में कभी नक्सल समस्या के कारण विकास की गति प्रभावित रही, वहां आज बेटियों की शिक्षा, स्वच्छता और सम्मान के लिए कार्य हो रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि 26 जनवरी 2027 तक प्रदेश के सभी शासकीय विद्यालयों में 6,671 बालिका शौचालयों का निर्माण पूरा हो, ताकि हमारी बेटियां बिना किसी असुविधा के आत्मविश्वास के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
वीबी- जीरामजी के अंतर्गत अब 375 प्रकार के विकास कार्य अनुमेय हैं। इनमें जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका संवर्धन तथा आपदा प्रबंधन से संबंधित कार्य शामिल हैं। इन कार्यों का चयन ग्राम पंचायत एवं ग्राम सभा के अनुमोदन से किया जाएगा, जिससे ग्रामीणों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता मिल सके। इसके साथ ही पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी भी प्राप्त होगी।
महिलाओं के लिए पंजीयन शुल्क 4 से घटकर 2 प्रतिशत, स्टाम्प शुल्क में पहले से मिल रही 1 प्रतिशत छूट का भी मिला लाभ
कम हुआ रजिस्ट्री का खर्च, ‘सेवा संकल्प अभियान’ में कांकेर की महिला किसान ने साझा किया अनुभव
रायपुर / अपने नाम जमीन होना किसी भी महिला के लिए आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कांकेर जिले के सरोना निवासी महिला किसान श्रीमती चंद्रकांता नेताम के लिए जमीन की रजिस्ट्री अब पहले की तुलना में कम खर्चीली हुई है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर पंजीयन शुल्क 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किए जाने और स्टाम्प शुल्क में पहले से लागू 1 प्रतिशत की छूट का लाभ मिलने से उन्हें रजिस्ट्री में कुल 9,510 रुपये की आर्थिक राहत मिली। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने इस बदलाव से मिला अपना अनुभव साझा किया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन व्यवस्था को नागरिकों के लिए सरल और सुविधाजनक बनाने के साथ महिलाओं को आर्थिक राहत देने की दिशा में पहल की गई है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में दी जा रही रियायत का लाभ श्रीमती चंद्रकांता नेताम जैसी महिला किसानों तक सीधे पहुंच रहा है।
4 से 2 प्रतिशत हुआ पंजीयन शुल्क, बचत बनी बड़ी राहत
श्रीमती नेताम ने बताया कि अपने नाम जमीन की रजिस्ट्री कराने के दौरान उन्हें महिलाओं के लिए लागू शुल्क रियायत का लाभ मिला। पंजीयन शुल्क 4 प्रतिशत के स्थान पर 2 प्रतिशत लगने से रजिस्ट्री का खर्च कम हुआ। इसके साथ ही महिला क्रेता को स्टाम्प शुल्क में पहले से मिल रही 1 प्रतिशत की छूट का लाभ भी मिला। दोनों रियायतों के कारण उन्हें कुल 9,510 रुपये की बचत हुई।
एक किसान परिवार के लिए रजिस्ट्री में बची यह राशि मायने रखती है। श्रीमती नेताम ने इस आर्थिक राहत को महिलाओं के हित में उपयोगी पहल बताते हुए छत्तीसगढ़ शासन और पंजीयन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।
महिलाओं के नाम संपत्ति को मिल रहा प्रोत्साहन
महिलाओं के नाम संपत्ति के पंजीयन पर शुल्क में रियायत केवल रजिस्ट्री का खर्च कम करने तक सीमित नहीं है। इससे परिवारों को महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदने और पंजीयन कराने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन भी मिल रहा है। संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से उनकी आर्थिक सुरक्षा और परिवार में वित्तीय भागीदारी को भी मजबूती मिलती है।
डिजिटल सुविधाओं ने भी आसान की रजिस्ट्री
आर्थिक राहत के साथ पंजीयन विभाग द्वारा तकनीक आधारित सुविधाओं के माध्यम से रजिस्ट्री की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जा रहा है। ऑनलाइन शुल्क भुगतान, आधार आधारित पहचान सत्यापन और डिजिटल दस्तावेज जैसी सुविधाओं से पंजीयन प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हुई है। संपत्ति की लोकेशन आधारित फोटो जैसी तकनीकी व्यवस्थाएं पारदर्शिता बढ़ाने में सहायक हैं।
ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के माध्यम से पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया भी स्वतः आगे बढ़ती है। इससे नागरिकों को रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से प्रक्रिया पूरी करने और अनावश्यक दौड़भाग से राहत मिलती है।
चंद्रकांता की कहानी में आर्थिक राहत और महिला सशक्तिकरण का संदेश
श्रीमती चंद्रकांता नेताम को मिली 9,510 रुपये की बचत बताती है कि शुल्क में किया गया बदलाव किस तरह सीधे हितग्राही को आर्थिक राहत पहुंचा सकता है। जमीन अपने नाम होने से संपत्ति में महिला की भागीदारी मजबूत होती है और शुल्क में रियायत इस प्रक्रिया को कम खर्चीला बनाती है।
‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर सेवाओं में आए बदलाव, उनके अनुभव और सुझावों को सामने ला रहा है। चंद्रकांता की कहानी इसी बदलाव की एक तस्वीर है—जहां तकनीक से प्रक्रिया आसान हो रही है और शुल्क में राहत से महिलाओं के लिए अपने नाम संपत्ति का पंजीयन अधिक किफायती बन रहा है।
रायपुर / शौर्यपथ / बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से बस्तर संभाग में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई है। नदी-नाले उफान पर हैं और कई मार्गों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर बस्तर जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं।
कलेक्टर श्री आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में नगरनार क्षेत्र के नदी बोड़ना में बाढ़ में फंसे करीब 40 लोगों को नावों की मदद से सुरक्षित निकालकर राहत शिविर पहुंचाया गया। तोकापाल के घाट धनोरा से 25 परिवारों को सुरक्षित निकाला गया। पलवा और लोहंडीगुड़ा के भेजा क्षेत्र के निचले इलाकों में पानी भरने पर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों एवं पंचायत भवनों में स्थानांतरित किया गया।
9 राहत शिविरों में 350 से अधिक लोगों को आश्रय
बस्तर जिले में 9 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां अब तक 350 से अधिक प्रभावितों को सुरक्षित आश्रय दिया गया है। जगदलपुर के चार शिविरों में 175 लोग ठहरे हैं। शहीद भगत सिंह स्कूल में 100 से अधिक लोगों के भोजन एवं ठहरने की व्यवस्था की गई है। नगरनार के नदी बोड़ना शिविर में करीब 40, भैंसगांव में 77, बेलगांव में 35 तथा ग्राम पंचायत भेजा में 26 प्रभावितों को आश्रय दिया गया है।
सभी शिविरों में भोजन, पेयजल, ठहरने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
कलेक्टर और एसपी ने प्रभावित क्षेत्रों का किया निरीक्षण
कलेक्टर श्री आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा ने प्रभावित क्षेत्रों का सघन निरीक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। अधिकारियों ने गंगामुंडा पारा, महादेव घाट, खड़कघाट, मेडिकल कॉलेज डिमरापाल के आसपास तथा नगरनार-भेजापदर मार्ग सहित विभिन्न जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित परिवारों से चर्चा कर राहत व्यवस्थाओं की जानकारी ली और मैदानी अमले को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए।
इंद्रावती नदी का बढ़ा जलस्तर, निचले क्षेत्रों में सतर्कता
लगातार बारिश से इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ गया है। ओडिशा स्थित खातीगुड़ा बांध के तीन और मुरान बांध के दो गेट खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है। इसके मद्देनजर नदी तटीय एवं निचले क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में बचाव दल नावों और आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात हैं।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से उफनते नदी-नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार न करने, अफवाहों पर ध्यान न देने और आपात स्थिति में बाढ़ नियंत्रण कक्ष अथवा संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचना देने की अपील की है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर प्रशासन, पुलिस एवं आपदा प्रबंधन दल समन्वय के साथ राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की है।
रायपुर । शहर को स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ बनाने के संदेश के साथ स्वच्छता ही सेवा एवं सेवा संकल्प अभियान के तहत मठपारा स्थित महाराजबंध तालाब में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, नगर निगम की टीम, ग्रीन आर्मी, स्वयंसेवी-सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने एक साथ श्रमदान किया। उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने स्वयं अभियान में शामिल होकर लोगों को स्वच्छता की शपथ दिलाई और सफाई मित्रों का सम्मान किया।
उपमुख्यमंत्री साव ने कहा कि स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसे दैनिक जीवन की आदत बनाना होगा, तभी शहर स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ बनेंगे। उन्होंने कहा कि हर नागरिक अपने आसपास सफाई रखने को अपनी जिम्मेदारी बनाए। सरकार के प्रयासों के साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही स्वच्छता के प्रयास स्थायी और प्रभावी होंगे।
तालाब परिसर में किया श्रमदान
महाराजबंध तालाब परिसर में श्रमदान के दौरान सभी ने मिलकर कचरा और गंदगी साफ की। लोगों को तालाबों और अन्य जलस्रोतों को स्वच्छ रखने, उनमें कचरा नहीं डालने तथा सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया। अभियान के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि शहर की स्वच्छता केवल नगर निगम या सफाई कर्मियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक सुनील सोनी, मोतीलाल साहू एवं पुरंदर मिश्रा, महापौर मीनल चौबे, महंत रामसुंदर दास, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन और सूडा सीईओ सुमित अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
पांच सफाई मित्रों का सम्मान
कार्यक्रम में सफाई मित्र रमेश सोना, अवधेश सोनी, घना कुर्रे, अमित धीवर और राहुल राजपूत को सम्मानित किया गया। अतिथियों ने शहर को स्वच्छ रखने में सफाई मित्रों की भूमिका की सराहना की।
विधायक सुनील सोनी ने सेवा, सहभागिता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना के साथ स्वच्छता अभियानों से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का आह्वान किया। अतिथियों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। “सेवा मेरा योगदान” की भावना के साथ हुए श्रमदान में विभिन्न वर्गों की भागीदारी ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।
रायपुर । प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हो रही भारी बारिश और संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों को बारिश, नदी-नालों के जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रखा गया है और भारी बारिश के कारण कहीं भी किसी प्रकार की आवश्यकता उत्पन्न होने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने कहा कि आमजन को किसी तरह की परेशानी न हो और जरूरतमंदों तक समय पर सहायता पहुंचे।
नदी-नालों और जलमग्न रास्तों से रहें दूर
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से भारी बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नदी-नालों, जलप्रपातों और उफनते जलस्रोतों के पास जाने से बचें, क्योंकि पानी का बहाव अचानक बढ़ सकता है। जलमग्न पुल-पुलियों और सड़कों को पार करने का प्रयास नहीं किया जाए। जिन स्थानों पर सुरक्षा के लिए बैरियर लगाए गए हैं, वहां प्रशासन के निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन किया जाए।
उन्होंने अनावश्यक यात्रा से बचने, विशेषकर रात के समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की। गिरे हुए बिजली के तारों और अन्य विद्युत खतरों से दूर रहने तथा इसकी सूचना तत्काल संबंधित विभाग, पुलिस या स्थानीय प्रशासन को देने कहा।
बच्चों और बुजुर्गों का रखें विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने तथा उन्हें अकेले बाहर नहीं जाने देने की अपील की। पहाड़ी क्षेत्रों और भूस्खलन की आशंका वाले स्थानों पर भी सतर्क रहने कहा गया है।
उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में नागरिक डायल 112 अथवा स्थानीय प्रशासन से तत्काल संपर्क करें। मौसम और राहत संबंधी जानकारी के लिए केवल शासन-प्रशासन एवं अन्य अधिकृत स्रोतों से जारी सूचनाओं पर भरोसा करें तथा अफवाहों और भ्रामक संदेशों को आगे न बढ़ाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में सतर्कता, संयम और परस्पर सहयोग सबसे महत्वपूर्ण है। आसपास किसी व्यक्ति को सहायता की आवश्यकता होने पर यथासंभव मदद करें और जरूरत पड़ने पर तत्काल प्रशासन को सूचित करें।
दुर्ग/रायपुर / विकसित भारत-जीरामजी योजना के अंतर्गत प्रदेश की ग्राम पंचायतों में विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी) तैयार करने के लिए राज्य स्तरीय जिला मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण शुक्रवार को ठाकुर प्यारेलाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान, निमोरा में आयोजित किया गया। विकसित भारत-जीरामजी के आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा की अध्यक्षता में हुए प्रशिक्षण में प्रदेश के सभी जिलों के सहायक परियोजना अधिकारियों एवं प्रोग्रामरों ने हिस्सा लिया।
आयुक्त सिन्हा ने कहा कि विकसित ग्राम पंचायत योजना की सफलता के लिए ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। ग्राम सभाओं में प्रत्येक गांव की जरूरतों और प्राथमिकताओं पर खुलकर संवाद किया जाए तथा बस्ती एवं वार्ड स्तर तक पहुंचकर अधिक से अधिक ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए।
प्रशिक्षण में ग्राम पंचायत स्तर पर सहभागी विकास योजना तैयार करने, डिजिटल मैपिंग, परिसंपत्तियों के सत्यापन और विभिन्न योजनाओं के समेकन की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य जिला मास्टर ट्रेनर्स को योजना निर्माण की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराना है, ताकि निर्धारित समय-सीमा में ग्राम पंचायतों की योजनाएं तैयार हो सकें।
2 अक्टूबर से ग्राम सभाओं में शुरू होगा योजना निर्माण
प्रदेश की ग्राम पंचायतों में 2 अक्टूबर से ग्राम सभाओं के माध्यम से वीजीपीपी तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। ग्राम सभाओं में ग्रामीणों को गांव के आधारभूत आंकड़ों, उपलब्ध संसाधनों, मानचित्रों और प्रस्तावित विकास कार्यों की जानकारी दी जाएगी। ग्रामीण स्वयं गांव की जरूरतों, समस्याओं और विकास की प्राथमिकताएं तय करने में भागीदारी करेंगे। प्राप्त सुझावों के आधार पर ग्राम पंचायत की आगामी विकास कार्ययोजना तैयार होगी।
अक्टूबर-नवंबर में होगा स्थल सत्यापन, दिसंबर में अनुमोदन
अक्टूबर और नवंबर में बस्ती एवं वार्ड स्तर पर बैठकें आयोजित कर सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन किया जाएगा। इस दौरान समस्याओं, आवश्यक सुविधाओं, उपलब्ध संसाधनों और प्रस्तावित कार्यों पर ग्रामीणों से सुझाव लिए जाएंगे। गांवों में मौजूद परिसंपत्तियों का स्थल सत्यापन भी होगा। भौतिक रूप से उपलब्ध लेकिन डिजिटल अभिलेखों में दर्ज नहीं परिसंपत्तियों को युक्तधारा पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। प्रस्तावित विकास कार्यों के संभावित स्थानों को डिजिटल मानचित्र पर भी चिह्नित किया जाएगा।
दिसंबर में तैयार योजना का प्रारूप ग्राम सभा के समक्ष रखा जाएगा। ग्रामीणों के सुझावों एवं विचार-विमर्श के बाद इसे अंतिम रूप देकर ग्राम सभा से अनुमोदन लिया जाएगा और विकासखंड स्तर पर भेजा जाएगा। ग्राम पंचायतों से प्राप्त योजनाओं का विकासखंड एवं जिला स्तर पर समेकन 15 जनवरी तक पूरा किया जाएगा।
जल सुरक्षा और आजीविका पर रहेगा जोर
वीजीपीपी में जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका से जुड़ी अधोसंरचना तथा प्रतिकूल मौसमीय घटनाओं के प्रभाव को कम करने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। योजना बनाते समय गांवों के प्राकृतिक एवं भौतिक संसाधनों का भी आकलन किया जाएगा।
प्रशिक्षण में संयुक्त आयुक्त रामाधन श्रीवास, दीपक शर्मा, अधीक्षण अभियंता विनय गुप्ता, सहायक आयुक्त यशवत चंद्राकर, राज्य एमआईएस नोडल अधिकारी मजहर शामी एवं वीबी-जीरामजी संकाय सदस्य आनंद रघुवंशी ने योजना निर्माण की प्रक्रिया और तकनीकी बिंदुओं पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं का जमीनी असर
रायपुर, / कभी बारिश की बूंदें सरिता बैगा के परिवार के लिए चिंता लेकर आती थीं। कच्ची दीवारों और खपरैल की छत वाले घर में रहने वाले इस परिवार को हर बरसात में छत टपकने और घर को सुरक्षित रखने की चिंता सताती थी। आज वही सरिता अपने पक्के घर के आंगन में खड़ी होकर अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सुकून भरा जीवन जी रही हैं। यह बदलाव उनके लिए केवल एक पक्के मकान का मिलना नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी चिंता से मुक्ति और सम्मान के साथ जीवन जीने का नया अवसर है।
पेंड्रा-गौरेला-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी निवासी श्रीमती सरिता बैगा बताती हैं कि पहले उनका परिवार कच्चे घर में रहता था। बारिश शुरू होते ही घर की छत से पानी टपकने लगता था। खपरैल को संभालना और हर साल उसकी मरम्मत करना परिवार के लिए बड़ी परेशानी थी। बच्चों को बारिश से बचाने की चिंता अलग रहती थी। ऐसे समय में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा संचालित पीएम जनमन आवास योजना उनके परिवार के लिए उम्मीद की किरण बनकर आई।
योजना के माध्यम से सरिता बैगा के परिवार को पक्का आवास मिला। अब उनका घर बारिश में नहीं टपकता। परिवार के पास एक सुरक्षित छत है, जहां बच्चे निश्चिंत होकर रह सकते हैं और पूरा परिवार सम्मान के साथ अपना जीवन आगे बढ़ा सकता है। सरिता के लिए यह बदलाव उनके चेहरे पर आई मुस्कान में साफ दिखाई देता है।
सरिता कहती हैं कि पहले बारिश आते ही चिंता होने लगती थी कि घर की छत कहां से टपकेगी और बच्चों को कैसे सुरक्षित रखा जाएगा। अब पक्का घर मिलने के बाद बारिश का डर खत्म हो गया है। उनके लिए उनका नया घर सिर्फ ईंट और सीमेंट से बना मकान नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, बच्चों के बेहतर भविष्य और खुशहाल जीवन की मजबूत नींव है।
महतारी वंदन योजना से मिला आर्थिक संबल
सरिता बैगा को हर माह महतारी वंदन योजना की राशि भी नियमित रूप से प्राप्त हो रही है। इस राशि से उन्हें घरेलू जरूरतों और परिवार के छोटे-बड़े खर्चों को पूरा करने में सहूलियत मिल रही है। एक ओर पक्का आवास परिवार को सुरक्षा दे रहा है, वहीं नियमित आर्थिक सहायता ने घरेलू बजट को संभालने में उनका साथ दिया है।
सरिता के जीवन में आया यह बदलाव केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के समन्वित प्रभाव को दर्शाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय एवं वंचित परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार इन योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
सरिता बैगा के लिए सरकार की योजनाएं अब कागज पर दर्ज प्रावधान नहीं, बल्कि उनके अपने जीवन में महसूस किया गया बदलाव हैं। पक्के घर की सुरक्षित छत और आर्थिक सहायता ने उनके परिवार में आत्मविश्वास बढ़ाया है। वह कहती हैं कि सरकार की योजनाओं ने उनके परिवार को नई उम्मीद दी है और बच्चों के भविष्य को लेकर उनका भरोसा मजबूत हुआ है।
सरिता ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए सरकार की योजनाएं जीवन बदलने का माध्यम बन रही हैं। उनके लिए पक्का घर उस सपने के पूरा होने जैसा है, जिसे कभी उन्होंने केवल मन में संजोया था। कच्चे घर से पक्के आशियाने तक का यह सफर सरिता बैगा के परिवार की कहानी भर नहीं है। यह उस भरोसे की कहानी है, जब शासन की योजनाएं गांव के अंतिम छोर तक पहुंचकर किसी परिवार की जिंदगी में सुरक्षा, सम्मान और खुशियों की नई सुबह लेकर आती हैं।
साहित्य, लोककला, संगीत, नृत्य, सिनेमा और रंगकर्म सहित 13 क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रतिभाओं को मिलेगा सम्मान, 5 अक्टूबर तक पंजीकृत डाक से भेज सकेंगे आवेदन
रायपुर, / संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विभिन्न कला, साहित्य, संस्कृति एवं सामाजिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को प्रदान किए जाने वाले राज्य सम्मान 2026 के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। विभाग द्वारा स्थापित 12 राज्य स्तरीय सम्मान एवं 1 राष्ट्रीय सम्मान के लिए निर्धारित प्रारूप में 5 अक्टूबर 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। चयनित प्रतिभाओं को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित ‘राज्योत्सव 2026’ के राज्य अलंकरण समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
राज्य सम्मान के लिए इच्छुक पात्र व्यक्ति निर्धारित प्रारूप में अपनी प्रविष्टियां प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदन में आवेदक का नाम, पता, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि एवं आयु के साथ प्रस्तावक का विवरण तथा आवेदक की उपलब्धियों का संक्षिप्त ब्यौरा देना होगा। आवेदक द्वारा पूर्व में प्राप्त सम्मान एवं पुरस्कारों की जानकारी भी निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत करनी होगी। इसमें अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, प्रदेश एवं जिला स्तर पर प्राप्त सम्मान एवं पुरस्कारों का विवरण शामिल किया जाना है।
शासकीय सेवा में कार्यरत आवेदकों को सामान्य प्रशासन विभाग से अनुमति पत्र संलग्न करने का प्रावधान भी रखा गया है। सम्मान की नियमावली एवं आवेदन का निर्धारित प्रारूप विभागीय वेबसाइट www.cgculture.in पर उपलब्ध है।
13 प्रमुख क्षेत्रों में मिलेगा सम्मान
संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2026 के लिए विभिन्न विधाओं और क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित किया जाएगा। पं. सुन्दरलाल शर्मा सम्मान हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में, दाऊ मंदराजी सम्मान लोक नाट्य एवं लोक शिल्प के क्षेत्र में तथा चक्रधर सम्मान शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य के क्षेत्र में प्रदान किया जाएगा।
देवदास बंजारे स्मृति पुरस्कार लोक नृत्य के क्षेत्र में तथा लाला जगदलपुरी साहित्य पुरस्कार आंचलिक साहित्य एवं लोक कविता के क्षेत्र में दिया जाएगा। हबीब तनवीर सम्मान समकालीन रंगकर्म के लिए प्रदान किया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ी, हिन्दी एवं अन्य भाषाओं के नाटक शामिल हैं।
इसी क्रम में देवदास बंजारे स्मृति पंथी नृत्य पुरस्कार पंथी नृत्य के क्षेत्र में, लक्ष्मण मस्तुरिया सम्मान छत्तीसगढ़ी लोकगीत के क्षेत्र में और खुमान साव सम्मान छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के क्षेत्र में प्रदान किया जाएगा।
सिनेमा के क्षेत्र में भी प्रतिभाओं को सम्मान
किशोर साहू सम्मान हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी सिनेमा में रचनात्मक लेखन, निर्देशन, अभिनय एवं पटकथा निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाएगा। वहीं किशोर साहू राष्ट्रीय अलंकरण हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी सिनेमा में निर्देशन के क्षेत्र में प्रदान किया जाएगा।
इसके अलावा छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान देश के बाहर रहकर सामाजिक कल्याण, मानव संसाधन विकास, कला, साहित्य अथवा आर्थिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अप्रवासी भारतीयों को प्रदान किया जाएगा। डॉ. तीजन बाई राज्य सम्मान पंडवानी के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदान किया जाएगा।
दीर्घ साधना और उपलब्धियों के आधार पर होगा चयन
संबंधित क्षेत्रों में उपलब्धि, योगदान एवं दीर्घ साधना को ध्यान में रखते हुए पात्र प्रतिभाओं का चयन किया जाएगा। चयनित प्रतिभाओं को ‘राज्योत्सव 2026’ के राज्य अलंकरण समारोह में राज्य सम्मान से विभूषित किया जाएगा।
प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं, साहित्य, संगीत, नृत्य, रंगमंच एवं सिनेमा के क्षेत्र में निरंतर योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करने की यह पहल राज्य की कला एवं सांस्कृतिक परंपराओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी।
5 अक्टूबर तक पंजीकृत डाक से भेजें आवेदन
संस्कृति विभाग ने संबंधित क्षेत्र के पात्र कलाकारों, साहित्यकारों, सांस्कृतिक कर्मियों एवं अन्य प्रतिभाओं से निर्धारित प्रारूप में अपनी प्रविष्टियां 5 अक्टूबर 2026 तक पंजीकृत डाक से भेजने का आग्रह किया है।
आवेदन इस पते पर भेजे जा सकते हैं:
संचालक, संस्कृति एवं राजभाषा
द्वितीय तल, व्यावसायिक परिसर, सेक्टर-27,
नवा रायपुर अटल नगर, छत्तीसगढ़
आवेदन निर्धारित प्रारूप में आवश्यक दस्तावेजों एवं उपलब्धियों के विवरण के साथ निर्धारित समय-सीमा के भीतर भेजना होगा। सम्मान से संबंधित विस्तृत जानकारी, नियमावली एवं आवेदन का निर्धारित प्रारूप संस्कृति विभाग की वेबसाइट www.cgculture.in पर उपलब्ध है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
