August 05, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग एनएसयूआई जि़लाध्यक्ष आदित्य सिंह ने कलेक्टर और भिलाई विधायक देवेंद्र यादव को ज्ञापन सौंपकर कर कोरोना संक्रमण के नियंत्रण एवं रोकथाम को देखते हुए गणेश उत्सव के सम्बंध में जारी आदेश के कंडिका क्रमांक 9 को संशोधित करने की माँग की है ।
    आदित्य सिंह ने बताया कि जि़ला प्रशासन ने आमजनों की आस्था का ख़्याल रखते हुए विभिन्न नियम और शर्तों पर इसकी अनुमति दी है जो कि स्वागत योग्य है परंतु इसी क्रम में शासन द्वारा जारी आदेश के कंडिका क्रमांक 9 में उल्लेख है कि यदि कोई व्यक्ति बिना मास्क के मूर्ति दर्शन या पूजा के लिए बिना मास्क के आता है तो समबंधित व्यक्ति के साथ-साथ समिति के विरुद्ध भी वैधानिक कार्यवाही की जाए,इस आदेश के पश्चात् गणेश समितियों के मन में भय एवं चिंता की व्याकुलता व्याप्त है।
    देश भर में गणेश पूजा बड़े ही धूम धाम के साथ मनाया जाता है परंतु इस वर्ष कोरोना महामारी लोगों की आस्था में भी ख़लल डाल रखा है ऐसे समय में लोगों की आस्था को देखते हुए गणेश उत्सव मनाए जाने के निर्णय में इस आदेश से समिति के लोगों की अच्छी ख़ासी चिंता बढ़ा दी है।
    समितियों ने कहा है कि शासन के आदेश का पालन करते हुए फि़जि़कल डिस्टेंस का पालन भी करवाया जाएगा तथा मास्क पहनने समबंधित सभी प्रकार के जागरूकता अभियान चलाए जाएँगे,परंतु यदि कोई व्यक्ति बिना मास्क के मूर्ति दर्शन एवं पूजा के लिए पंडाल में आते है तो समबंधित व्यक्ति के ऊपर कार्यवाही की जाए जिससे की कड़ाई से सभी आदेशों का पालन किया जा सके। ज्ञापन सौपने वालोंमेशरद मिश्रा,जे.संजीव,आसिफ़ खान,फऱाज़ अहमद एवं विभिन्न गणेश समिति के साथी भी उपस्थित थे।

    दुर्ग / शौर्यपथ / महापौर धीरज बाकलीवाल एवं आयुक्त इंद्रजीत बर्मन द्वारा पुलगांव स्थित गौठान का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। कसारीडीह की कल्याणम महिला स्व सहायता समूह द्वारा गौठान का संचालन किया जा रहा है। महापौर बाकलीवाल ने आज गौठान संचालन समिति को अनुबंध पत्र सौंपे। महापौर के समक्ष आयुक्त बर्मन द्वारा अनुबंध पत्र में हस्ताक्षर किये गये। इस दौरान डाक्टर शम्स, डॉ0 दामिनी देशमुख, संचालन समिति के पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित थे।
    उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार को बने लगभग 2 साल होने आये किन्तु निगम में भाजपा की सत्ता काबिज थी . कारण कुछ भी रहा हो किन्तु छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार को बने साल भर बाद भी दुर्ग निगम क्षेत्र में निर्मित गौठान का सञ्चालन नहीं हो रहा था . दुर्ग निगम में कांग्रेस की सरकार के बनते ही महापौर बाकलीवाल द्वारा गौठान के कार्यो में तेजी आयी और कोरोना आपदा के दरम्यान ही गौठान संचालक समुह को हरेली त्योहार के दिन से गोधन न्याय योजना का शुभारंभ कर कल्याणम महिला स्व सहायता समूह को गौठान संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। संचालन अनुबंध पत्र में आज हस्ताक्षर कर महिला स्व सहायता समूह को दस्तावेज सौंपे गये।
    इस दौरान महापौर एवं आयुक्त ने गौठान के गायों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होनें डाक्टर शम्स और डॉ0 देशमुख द्वारा प्रतिदिन गायों के स्वास्थ्य की जांच और ईलाज की जानकारी ली। गौठान में मवेशियों के अनुसार सभी व्यवस्था ठीक पायी गयी। महापौर ने निगम अधिकारियों को मवेशियों के लिए गाजर घांस की खरीदी करने निर्देश दिये।

    दुर्ग / शौर्यपथ / जिले के पुलिस अधीक्षक प्रशांत ठाकुर ने राष्ट्रीय राजमार्ग-53 में कुम्हारी में हो रहे निर्माणाधीन फ्लाई ओव्हर का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर रोहित झा, अति.पुलिस अधीक्षक, डीएसपी ट्राफिक गुरजीत सिंह उपस्थि थे। निरीक्षण करने के बाद एस पी प्रशांत ठाकुर ने एएसपी रोहित झा और ट्राफिक डीएसपी गुरजीत सिंह को निर्देश देते हुए कहा कि रायपुर से दुर्ग आने वाले हल्के वाहन/चार पहिया वाहन चालकों को कैवल्यधाम टर्निग के पास से सर्विस रोड का उपयोग कर सुविधा पूर्वक डायवर्सन पार कर सकते है। इसी प्रकार दुर्ग से रायपुर जाने वाले हल्के वाहन/चार पहिया वाहन चालकों को भवानी पेट्रोल पम्प के पास सर्विस रोड का उपयोग कर सुविधा पूर्वक डायवर्सन पार कर सकते है। यातायात पुलिस को विपरीत दिशा से वाहन चलाने वाले चालकों पर कार्यवाही करने के निर्देश दिया गया ।
    वही श्री ठाकुर ने लोक निर्माण विभाग राष्ट्रीय राजमार्ग को निर्देश
    दिया कि राष्ट्रीय राजमार्ग-53 में कुम्हारी मार्ग में सड़क के खराब हो चुके हिस्सो का मरम्मत कार्य एवं डामरीकरण कराये और डामरीकरण के पश्चात सड़क पर व्हाईट प्लास्टिक पेन्ट से मार्किग करे जिससे वाहन चालकों को सुविधा हो तथा वाहन चालको की सुविधा के लिए सूचनात्मक साईन बोर्ड लगाया जाये। निर्माणधीन क्षेत्र में जहां-जहां पर्याप्त स्थान है वहां रोड की चैड़ाई को बढ़ाने के लिए भी एसपी ने कहा। डायवर्सन रोड पर जगह-जगह ''नो पार्किगÓÓ व ''रांग साईड मूव्हमेंटÓÓ संबंधी चेतावनी परक बोर्ड लगाने के भी निर्देश दिये। एसपीप्रशांत ठाकुर के निरीक्षण के दौरान यातायात पुलिस के अधिकारियों सहित निर्माण एजेन्सी के इंजीनियर व मैनेजर उपस्थित थे।

    दुर्ग / शौर्यपथ / कोरोना संक्रमण काल में ईदुल फित्र की तरह ईदुल अजहा भी मनाया जाएगा। एक अगस्त को ईद का त्यौहार देखते हुए प्रशासनिक तौर पर खरीदारी करने छूट दी गई थी। अब नमाज को लेकर शहर की तमाम मस्जिद कमेटियों ने अपने यहां नियम तय कर लिए हैं। जामा मस्जिद सेक्टर-6 के ईदगाह में एक अगस्त को सुबह 6:15 बजे ईदुल अजहा की नमाज में इमाम सहित सिर्फ 5 लोग शामिल होंगे। जामा मस्जिद सेक्टर-6 के इमामो खतीब मुहम्मद इकबाल हैदर अशरफी ने बताया कि कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए जमात के तौर पर मस्जिद या ईदगाह में नमाज अदा करने की इजाजत नहीं है। इसलिए शहर के मुस्लिम समुदाय ने जैसे ईदुल फित्र के मौके पर हुकूमत की आवाज पर लब्बैक कहते हुए तमाम नियमों का पालन किया ठीक वैसे ही ईदुल अजहा पर पाबंदी के बीच नमाज होगी।
    इस तरह पढ़ें ईद की नमाज
    हाफिज हैदर ने बताया कि जामा मस्जिद सेक्टर-6 के ईदगाह में सुबह 6 बज कर 15 मिनट तक नमाज होने के बाद लोग अपने घरों में नमाजे शुक्राना बशक्ले चाश्त या इशराक 2 या 4 रकअत में अदा कर सकते हैं। इसके बाद कुरबानी अदा कर सकते हैं। कुरबानी का यह सिलसिला 3 दिन तक चलेगा। उन्होंने कहा कि घरों में नमाज में खास तौर पर खयाल रखें कि जमाअत से अदा कर सकते हैं लेकिन तन्हा पढऩा ज्यादा बेहतर होगा। सलाम फेरने के बाद तकबीरे तशरीक यानि अल्लाहो अकबर-अल्लाहो अकबर, ला इलाहा इललल्लाह, वल्लाहो अकबर-वल्लाहो अकबर व लिल्लाहि हम्द तीन बार पढ़ लें और 34 मरतबा अल्लाहो अकबर-अल्लाहो अकबर और हो सके तो 100 या 300 बार सुबहान अल्लाहि वबे हम्दिही आप पढ़ लें।


    कब्रिस्तान में लगा रहेगा ताला
    शहर के कब्रिस्तान हैदरगंज कैम्प-1 में भी ईदुअ अजहा के मौके पर तीन दिन तक ताला लगा रहेगा। कब्रिस्तान इंतेजामिया कमेटी के शमशीर कुरैशी ने बताया ईद पर परंपरा अनुसार लोग ईदगाह/मस्जिदों में नमाज के बाद सबसे पहले कब्रिस्तान जाकर अपने दिवंगत परिजनों की कब्र पर दुआएं करते हैं। इन दिनों चूंकि कोरोना संक्रमण का खतरा है और शासन के आदेश अनुसार सार्वजनिक स्थलों पर लोगों की आवाजाही पर रोक है। इसे देखते हुए कब्रिस्तान में ईदुल अजहा पर ताला लगा रहेगा, जिससे यहां सार्वजनिक रूप से कोई भी इक_ा न हो सके। वहीं मैयत होने की हालत में सीमित लोगों को कब्रिस्तान में आने दिया जाएगा।

    रायपुर / शौर्यपथ / प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी अगस्त माह का प्रथम सप्ताह विश्व स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया जा रहा…

        रायपुर / शौर्यपथ / वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिये शारीरिक दूरी बनाये रखना,और मास्क और सेनेटाइज़र का उपयोग करते हुए घर पर ही रहकर आने वाले त्यौहारों का भरपूर आनंद लें । एक लापरवाही कोरोना संक्रमण को लोगों के घर तक ला सकती है । घर पर ही रह कर त्यौहार मनाने से खुद के साथ-साथ पूरा प्रदेश को कोविड-19 के संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है । मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रायपुर डॉ.मीरा बघेल के अनुसार कोरोना वायरस संक्रमण के बढते रोगियों की संख्या को देखते हुए रक्षाबंधन, ईदुल अज़हा और जन्माष्टमी के पर्व को सरकारी नियमों को ध्यान में रखकर मनाएं जिस प्रकार पूर्व में सरकार के बनाए नियमों का पालन करते हुए नवरात्रि,रमज़ान,और ईदुल फितर मनाया गया था।

       डॉ.बघेल ने लोगों से अपील की है कि त्यौहार शांतिपूर्ण तरीके से मनाएं। कोरोना काल में अपने-अपने घरों में रहकर ही ईदुल अज़हा की नमाज अदा करें। घर पर भी शारीरिक दूरी का अनुपालन करें। मास्क अवश्य लगाएं। वहीं पुलिस-प्रशासन के साथ प्रमुख लोगों की बैठक में यह फैसला लिया गया लोग घरों पर रहकर ही त्यौहारों को मनायेंगे। सार्वजनिक स्थान पर त्यौहार कार्यक्रम भी नहीं होंगे। बेवजह सड़कों पर निकलने वालों पर पुलिस-प्रशासन द्वारा सख्ती की जाएगी। दरअसल, 6 अगस्त तक रायपुर और बीरगांव नगर निगम एरिया टोटल कंटेनमेंट जोन घोषित है। इसे देखते हुए शारीरिक दुरियों का पालन समेत अन्य नियमों का पालन करते हुए सामूहिक नमाज अदा करने और सामूहिक कार्यक्रम करने पर रोक लगाने का फैसला लिया गया।

       रायपुर मनोरोग स्पर्श क्लिनिक   के चिकित्सा मनोवैज्ञानिक डीएस परिहार कहते है:``भले ही अपने रिश्तेदारों से त्यौहारों पर गले न मिल पाए, हाथ न मिला पाए तो कोई बात नही,लेकिन फ़ोन पर ऑडियो वीडियो बातचीत कर दिलों की दूरियां खत्म कर अपने संबंधों को मजबूत कर सकते हैं । एक दूसरे का भरोसा बन सकते हैं । ‘’मनोवैज्ञानिक श्री परिहार आगे कहते है: ``त्यौहारों का असली मजा परिवार के साथ ही है । हम वैश्विक महामारी की आपदा को खत्म करने के लिए अपने परिवार के साथ ही त्यौहार को जिंदगी भर के लिए अनोखा बना सकते हैं । लोग ऐसे में अपने परिवार माता-पिता अपने बच्चों का पूरा ध्यान रखते हुए मानसिक तौर पर तनाव मुक्त होकर पर्व को मनायें ।‘

    बिलासपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ प्रदेश में कला और अभिनय के क्षेत्र कई सितारे धीरे-धीरे टीम टिमा कर अपने कला और अभिनय के बल पर…

         बिलासपुर / शौर्यपथ / जिले में इस बार का वृक्षारोपण मनरेगा की मद से हो रहा है और जंगल विभाग चुन-चुन कर बिलासपुर के प्रशासनिक अमले और जनप्रतिनिधियों को गुमराह कर रहा है। जिले की प्रत्येक रेंज में बीटगार्ड से लेकर रेंजर और डीएफओ तक केवल पौधे लगाने के स्थान पर रुपये तोड़ने का काम किया जा रहा है। जनप्रतिनिधि वृक्षारोपण का सतही काम देख कर सोशल मीडिया पर खुश हो रहे है। जबकि बिलासपुर के गौठान स्वं सहायता समूह और वन प्रबंधक समिति को कुछ हासिल नही हुआ। फाॅरेस्ट ने सबसे पहले महात्मा गांधी रोजगार गारंटी कानून के 4 करोड़ 25 लाख में सेंधमारी की और गड्ढे में जमकर पैसा कमाया। एक नही दर्जनों स्थानों पर मानव श्रम की जगह मशीन से गड्ढा खोदा गया। कई जगहों पर कम भुगतान कर गड्ढे खोदवाय गए।
         अब मामला जैविक खाद्य का है। जिले में मुख्यमंत्री से लेकर मुख्य सचिव और कलेक्टर से विधायक तक ने घुम-घुम कर गौठान निर्माण कराए। इस तरह जिले में 97 गौठान बने और मुख्यमंत्री की महत्वकांक्षी योजना अस्तित्व में आई। गौठान में जैविक खाद्य बनाई गई और खाद्य जिले में जैविक खाद्य की खपत का आंकलन करके ही बनी। किन्तु फाॅरेस्ट ने जिले के गौठानों को बड़ा झटका दिया। 4 लाख गड्ढांे में राजनंदगांव जिले के वनप्रबंधन समितियों की जैविक खाद्य डाली जा रही है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जिले के उदासीन नेतृत्व को यह पता ही नई चला की पेड़ लगाने के दौरान अपने हाथों से जिस जैविक खाद्य को डाल रहे है उसका उत्पादन बिलासपुर में नही हुआ है। जिले के प्रभारी मंत्री ने अपनी प्रशासनिक पकड़ को इतना ढीला कर रखा है कि अधिकारी शासन के दिशा निर्देश को ही अनदेखा करते है।
         यही कारण है कि बिलासपुर के गौठान का जैविक खाद्य गौठान में ही पड़ा है और राजनंदगांव से जैविक खाद्य के तीन ट्रक अब तक आ चुके है। विभाग को जैविक खाद्य बुलाने की शीघ्रता इतनी थी कि खाद्य लेने वाले ट्रक यहीं से भेजे गए। इस मामले में जंगल के उच्च अधिकारी गेंद को एक दुसरे के पाले में डालते है। एक बड़ा अधिकारी दुसरे बड़े अधिकारी के निर्देश पर काम होना बताता है, जबिक बड़े अधिकारी का कहना है कि मैने पुरी जिम्मेदारी रेंजर को देदी है, और रेंजर दिशा निर्देश के अनुसार ही काम करेगा। अब यह बात समझ के परे है कि रेंजर को कागज पर छपा हुआ दिशा निर्देश मानना है या कि साहब के मौखिक दिशा निर्देश मानना है। कुल मिलाकर यी समझ आता है कि राजनंदगांव का प्रभारी मंत्री और फाॅरेस्ट का मिनिस्टर एक ही है। तो क्या लोक निर्माण और गुह विभाग बिलासपुर प्रभारी इतना कमजोर हो गया या बिलासपुर के नेताओं की जागरूक्ता केवल फेसबुक तक है। 

    दुर्ग / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री सुगम सड़क योजना के तहत दुर्ग शहर विधानसभा क्षेत्र में 10 सार्वजनिक स्थान जिसमें जिला चिकित्सालय, कलेक्ट्रेट परिसर, मुक्तिधाम, नई गंज मंडी, इंदिरा मार्केट, पुलगांव गौठान मार्ग, शिवनाथ नदी पुराना पुल जैसे जर्जर हो चुकी सड़कें शामिल हैं। इन स्थानों को पक्की सड़क से मुख्य मार्ग से जोडऩे का कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा किए जाने के लिए विधायक अरुण वोरा ने कार्यपालन अभियंता अशोक श्रीवास से जल्द प्रस्ताव बना कर निर्माण कार्य प्रारंभ करने हेतु चर्चा की। इन स्थानों पर हजारों लोगों का आवागमन दिन रात लगा रहता है किन्तु पिछले कई वर्षों से गड्ढा युक्त हो चुकी सड़कों से आम जन एवं कार्यालयीन कर्मचारियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
    वर्तमान में कांग्रेस सरकार ने सुगम सड़क योजना के अंतर्गत प्रदेश भर में सार्वजनिक स्थानों में पहुंच मार्ग बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रु की राशि का बजट आबंटन किया है। श्री वोरा ने 64 करोड़ की लागत से बनने जा रहे नेहरू नगर चौक से मिनीमाता चौक तक के मार्ग चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण की भी जानकारी ली जिसपर कार्यपालन अभियंता ने बताया कि अगस्त माह के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ कर लिया जाएगा साथ ही 14 करोड़ की लागत से बन रहे ऑडिटोरियम का कार्य भी अंतिम चरण में है जिसे अतिशीघ्र लोकार्पित किया जाएगा।

    रायपुर / शौर्यपथ / राजधानी के डॉ. अम्बेडकर अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड और अस्पताल के अन्य संवेदनशील जगहों पर अब सफाई कर्मचारी पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) किट पहन कर कार्य करेंगे। अस्पताल प्रशासन ने कोरोना संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए 170 सफाई कर्मचारियों के लिए पीपीई किट यानी व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करवाए हैं। पीपीई किट मिलने के बाद सफाई कर्मचारी और अधिक आत्मविश्वास के साथ सेवा का कार्य कर सकेंगे। कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए सभी सफाई कर्मचारियों को मास्क, ग्लव्स और सैनेटाइजर्स उपलब्ध करवाए गए थे। राज्य सरकार के निर्देश पर सभी सफाई कर्मचारियों के लिए अलग से ठहरने की व्यवस्था और प्रोटीन युक्त भोजन की व्यवस्था भी किए गए हैं। कोविड-19 वार्ड में आइसोलेशन में कर्मचारियों और अन्य स्थानों पर सफाई कार्य में लगे सफाई कर्मियों की सुरक्षा को देखते हुए पीपीई किट अति आवश्यक थी।
    बता दें कि कोरोना से पीड़ित मरीजों का मेकाहरा में 7 जून से इलाज शुरु किया गया। अस्पताल में 500 बेड का कोविड-19 बार्ड बनाया गया है अब तक 1000 कोरोना पॉजिटिव मरीज इलाज के बाद डिस्चार्ज भी हो गए हैं। ऐसे में सफाई कर्मचारियों की ज़िम्मेदारी दुगुना हो गयी हैं ।
    भारतीय सफ़ाई कर्मचारी महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष निलेश लंगोटे का कहना है सफाई कर्मचारियों की स्वास्थ्य को लेकर सावधानी जरुरी है। ये हमारे फ्रंट लाइन करोना योद्धा है। रायपुर मेकाहारा के सफाई कर्मचारी की जरुरत को देखते हुए अस्पताल प्रशासन अलग से कपड़े का ड्रेस बनवाया है जिसके बाद महिला सफाई कर्मी पीपीई कीट को पहनते हैं। वहीं संक्रमण से बचाव के लिए सभी 170 सफाई कर्मचारियों को अस्पताल परिसर से लगे मंगल भवन को क्वारेंटाइन सेंटर के रुप अस्थायी आवास व्यवस्था किया गया है। कोविड वार्ड में ड्यूटी के बाद ठनहें 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन भी किया जाता है। ताकि परिवार से दूर रहने वाले इन सभी कर्मचारियों के बेहतर स्वास्थ्य व परिजनों को भी वायरस से सुरक्षित रखा जा सके। इन सभी के लिए अच्छा प्रोटीन युक्त भोजन और नास्ता भी दिया जा रहा है। कोरोना काल के विपरीत परिस्थितियों में कोरोना वारियर्स का सम्मान पाने का असली हकदार सफाई कर्मचारी हैं।
    डॉ अंबेडकर अस्पताल के पीआरओ शुभ्रा सिंह ठाकुर ने कहा कोरोना संक्रमण का फैलाव रोकने के लिए सफाई कर्मचारी सराहनीय कार्य कर रहे हैं। ऐसे में यह हम सब की जिम्मेदारी है कि उनकी सेहत और सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखें। कोविड-19 वार्ड में तैनात सफाई कर्मचारियों, डॉक्टरर्स, स्टाफ नर्स व अन्य सहयोगी स्टाफ को भी पीपीई कीट उपलब्ध कराया गया है। पीआरओ सुश्री ठाकुर ने बताया यदि भविष्य में और पीपीई किट या अन्य किसी संसाधन की कमी होती है, तो वह उपलब्ध करवाया जाएगा।उन्होंने कहा कोरोना संकट के दौरान विपरीत परिस्थितियों में भी सफाई कर्मचारी आइसोलेशन, अस्पतालों, चिकित्साकर्मियों के अस्थाई निवास वाले होटल्स में दिन-रात पूरी कर्मठता और तत्परता से काम कर रहे हैं।
    उन्होंने बताया अस्पताल में तीन पालियों में 24 घंटे ड्यूटी पर सफाई कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। संबंधित ठेका कंपनी को निर्देश दिया गया है समय-समय पर कोविड-19 के लिए जारी गाइड लाइन का पालन किया जाए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट, प्रोटेक्टिव गियर्स हैं, पर्सनल प्रोटेक्टिव किट पहनने से कोरोनावायरस पीड़ितों का इलाज कर रहे डॉक्टरों और नर्स सहित सफाई कर्मचारियों आदि को सुरक्षित रखने के लिए डिजाइन किया गया है। इन गियर्स को पहनने से डॉक्टर्स व मेडिकल स्टॉफ कीटाणु के संपर्क में आने से खुद को अधिक से अधिक बचा पाते हैं। पीपीई किट में चश्मे, फेस शील्ड, मास्क, ग्लव्स, गाउन, हेड कवर और शू कवर शामिल हैं।

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