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March 24, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित रामकृष्ण केयर अस्पताल में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा मानकों और मानव जीवन की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा और संशोधित जानकारी के अनुसार, इस घटना में दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य मजदूर की हालत गंभीर बनी हुई है और उसका इलाज जारी है।

मृतकों की पहचान, एक की हालत नाजुक

मृतकों की पहचान गोविंद सेंद्रे और अनमोल मांझी के रूप में हुई है। वहीं सत्यम कुमार की हालत गंभीर है और उसका इलाज जारी है। घटना में घायल एक अन्य युवक प्रशांत कुमार भी उपचाराधीन बताया जा रहा है। सभी मजदूर सिमरन सिटी क्षेत्र के निवासी हैं।

कैसे हुआ हादसा

मंगलवार को मजदूरों को अस्पताल के लगभग 50 फीट गहरे सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए उतारा गया था। बताया जा रहा है कि टैंक में उतरते ही एक मजदूर जहरीली गैस के कारण बेहोश हो गया। उसे बचाने के प्रयास में अन्य मजदूर भी एक-एक कर नीचे उतरे, लेकिन वे भी गैस की चपेट में आ गए। कुछ ही देर में दम घुटने से दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि अन्य की हालत गंभीर हो गई।

सुरक्षा के नाम पर खिलवाड़

घटना में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे।
सुरक्षा के नाम पर केवल साधारण मास्क दिए गए, जबकि इतने खतरनाक कार्य के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर, गैस डिटेक्टर और अन्य जरूरी उपकरण अनिवार्य होते हैं। मजदूरों को यह भरोसा भी दिलाया गया था कि टैंक में उतरने पर कोई खतरा नहीं है।

अस्पताल के बाहर हंगामा, मुआवजे की मांग

हादसे की खबर मिलते ही परिजन अस्पताल पहुंच गए और जमकर हंगामा हुआ। आक्रोशित परिजन अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए और प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तथा उचित मुआवजे की मांग करने लगे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई

एडीसीपी वेस्ट राहुल देव शर्मा ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। प्रारंभिक जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाएगी।
अस्पताल प्रबंधन द्वारा मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा भी की गई है, जिस पर बातचीत जारी है।

बड़ा सवाल

यह हादसा सीधे तौर पर यह सवाल उठाता है कि जब सेप्टिक टैंक की सफाई जैसे खतरनाक कार्य के लिए सख्त नियम और कानून बने हैं, तो फिर बिना पर्याप्त सुरक्षा के मजदूरों को मौत के मुंह में क्यों उतारा गया?

फिलहाल, एक मजदूर जिंदगी के लिए जूझ रहा है, जबकि दो परिवार अपनों को खोने के गम में डूबे हैं — और जिम्मेदारों पर कार्रवाई का इंतजार जारी है।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर में होली मिलन समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि होली केवल रंगों का नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता का पर्व है। यह पर्व आपसी मनमुटाव को भुलाकर रिश्तों को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि होली बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है और हमें इस अवसर पर अपने भीतर की नकारात्मकताओं को त्यागकर सकारात्मकता को अपनाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने आह्वान किया कि युवा वर्ग सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाए, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग को इन योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने प्रदेशवासियों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि होली का त्योहार परिवार और समाज के साथ मिलकर आनंद और अपनत्व के साथ मनाने की परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन हमारी संस्कृति और सामाजिक एकता को और मजबूत बनाते हैं।

इस अवसर पर आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा, तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री खुशवंत साहेब, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े, विधायक श्री किरण देव, श्री मोतीलाल साहू, श्री अनुज शर्मा, रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे, धमतरी महापौर श्री रामू रोहरा सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और नागरिक उपस्थित थे।

नई दिल्ली / 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से मुलाकात कर त्योहार की शुभकामनाएं दीं और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रमों की समीक्षा की।
प्रधानमंत्री ने कुवैत के युवराज शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से बातचीत की और आगामी ईद के त्योहार की शुभकामनाएं दीं। बातचीत के दौरान, श्री मोदी और युवराज ने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर विचार-विमर्श किया और हाल के घटनाक्रमों पर चिंता व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने कुवैत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमलों की भारत की निंदा को दोहराते हुए इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए निरंतर राजनयिक जुड़ाव को अनिवार्य माना। प्रधानमंत्री ने कुवैत में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण के लिए युवराज द्वारा दिए जा रहे निरंतर समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद भी दिया।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

"कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से बात की और आगामी ईद के त्योहार पर बधाई दी।
हमने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर विचार-विमर्श किया और हाल के घटनाक्रमों पर चिंता व्यक्त की। हमने कुवैत की संप्रभुता और क्षेत्रीय जुड़ाव पर हमलों की भारत की निंदा को दोहराया। होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
हम इस बात पर सहमत हुए कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए निरंतर राजनयिक जुड़ाव अनिवार्य बना हुआ है। मैंने कुवैत में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण के लिए उनके निरंतर समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।"

दुर्ग।

दुर्ग शहर कांग्रेस इन दिनों संगठनात्मक राजनीति और अंदरूनी समीकरणों के चलते चर्चा के केंद्र में है। खासकर महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर हलचल तेज होती नजर आ रही है, जहां एक ओर पुराने और अनुभवी नाम हैं, वहीं दूसरी ओर नई सक्रियता के सहारे उभरती दावेदारियां भी सामने आ रही हैं।

इसी कड़ी में शहर कांग्रेस की महामंत्री निकिता मिलिंद का नाम अचानक सुर्खियों में आ गया है। हाल के दिनों में उनके द्वारा लगातार प्रेस विज्ञप्तियों के माध्यम से केंद्र सरकार पर हमलावर रुख अपनाना और मीडिया में सक्रिय बने रहना, पार्टी के भीतर नई चर्चा को जन्म दे रहा है।

क्या सक्रियता का लक्ष्य ‘कुर्सी’?

राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि—

क्या यह सक्रियता संगठन में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति है?

या फिर शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल की नजरों में जगह बनाकर महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद की दावेदारी मजबूत करने की कोशिश?

हालांकि, इस पद के लिए अब तक  महापौर प्रत्याशी प्रेमलता साहू का नाम सबसे प्रबल माना जा रहा है। उनके संगठन में पुराने और मजबूत संबंध, खासकर शहर अध्यक्ष के साथ, उन्हें स्वाभाविक दावेदार बनाते हैं।

विपक्ष की भूमिका पर उठते सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि शहर कांग्रेस स्थानीय मुद्दों पर कितनी सक्रिय है?

जहां एक ओर शहरी सरकार पर भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के आरोप लग रहे हैं, वहीं कांग्रेस के पार्षदों की अपेक्षित आक्रामक भूमिका नजर नहीं आ रही।

दिलचस्प बात यह है कि निगम की सामान्य सभा में सत्ता पक्ष (भाजपा) के पार्षद ही अपनी सरकार को घेरते दिखे, जबकि कांग्रेस अपेक्षाकृत शांत नजर आई।

सोशल मीडिया बनाम ज़मीनी राजनीति

दुर्ग कांग्रेस में अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि राजनीति का केंद्र जमीनी आंदोलनों से हटकर सोशल मीडिया और प्रेस विज्ञप्तियों तक सिमटता जा रहा है।

निकिता मिलिंद की बढ़ती मीडिया सक्रियता को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है—जहां जमीनी मुद्दों की बजाय राष्ट्रीय राजनीति पर बयानबाजी ज्यादा दिख रही है।

बदलते समीकरण, नई टीम की तैयारी

दुर्ग कांग्रेस की राजनीति में पिछले कुछ समय में बड़ा बदलाव आया है। एक समय तक प्रभावी रहे वोरा परिवार का वर्चस्व अब लगभग समाप्त हो चुका है, और शहर अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के नेतृत्व में नई टीम और नए चेहरे उभर रहे हैं।

पूर्व राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे राजेश यादव और धीरज बाकलीवाल का साथ आना भी इन बदलते समीकरणों का संकेत है।

क्या संभव है ‘तेज प्रमोशन’?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महामंत्री पद मिलने के तुरंत बाद महिला कांग्रेस अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंचना आसान नहीं होता, लेकिन

“राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं”—खासकर तब, जब संगठन में बड़े बदलाव की प्रक्रिया चल रही हो।

अब देखना यह होगा कि—

क्या अनुभव और पुराने संबंध बाजी मारेंगे?

या फिर नई सक्रियता और रणनीति संगठन में नया समीकरण बनाएगी?

फिलहाल, दुर्ग कांग्रेस में एक बात साफ है—

“कुर्सी एक, दावेदार कई… और सियासत अपने पूरे रंग में!”

लेख - राजनीतिक चर्चाओं के आधार पर 

दुर्ग। शौर्यपथ । 

दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा में इस बार सिर्फ मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि शहरी सरकार की कार्यप्रणाली पर खुला ‘मंथन’ और ‘मंथन से निकला असंतोष’ भी साफ दिखाई दिया। शहर की जनता ने जिस भरोसे के साथ “ट्रिपल इंजन सरकार” को चुना था—तेजी से विकास, बेहतर सफाई और सुदृढ़ व्यवस्था—वह भरोसा अब सवालों के घेरे में खड़ा नजर आ रहा है।

शहर में बढ़ते अवैध बाजार, अतिक्रमण, गंदगी और अव्यवस्थित यातायात ने न केवल नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि कहीं न कहीं भारतीय जनता पार्टी की छवि पर भी असर डालना शुरू कर दिया है।

सामान्य सभा में उठा ‘जनता का सवाल’

सभा के दौरान सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों के पार्षदों ने शहर की बिगड़ती व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर की। चर्च मार्ग पर लगने वाला अवैध बाजार और अन्य प्रमुख स्थानों पर बढ़ता अतिक्रमण, प्रशासनिक निष्क्रियता का प्रत्यक्ष उदाहरण बनकर सामने आया।

सभापति श्याम शर्मा का सख्त संदेश

सामान्य सभा में सभापति श्याम शर्मा ने भी स्पष्ट शब्दों में शहरी सरकार को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि—

“जनता ने ट्रिपल इंजन सरकार इसलिए चुनी है कि विकास जमीन पर दिखे, सिर्फ कागज और प्रचार में नहीं।”

“यदि वार्डों में असमान विकास और अव्यवस्था जारी रही, तो जनप्रतिनिधियों के लिए जनता को जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।”

उनके इस बयान ने यह साफ कर दिया कि मामला अब केवल विपक्ष का आरोप नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर भी गहरी चिंता का विषय बन चुका है।

विकास बनाम हकीकत

एक ओर शहरी सरकार विकास के दावे और उपलब्धियां गिनाती नजर आती है, वहीं दूसरी ओर शहर की सड़कों पर अतिक्रमण, गंदगी और अव्यवस्था इन दावों की सच्चाई उजागर कर रहे हैं।

पार्षदों ने यह भी आरोप लगाया कि विकास कार्यों में भेदभाव किया जा रहा है—कुछ वार्डों में काम, तो कई वार्डों में बुनियादी सुविधाएं तक अधूरी।

ट्रिपल इंजन का ‘सपना’ बनाम ‘जमीनी सच्चाई’

प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप “ट्रिपल इंजन” का जो सपना जनता ने देखा था, वह अभी तक जमीनी स्तर पर पूरी तरह साकार होता नजर नहीं आ रहा।

अब सवाल यह है कि—

क्या शहरी सरकार इस चेतावनी को गंभीरता से लेगी?

क्या अतिक्रमण और अव्यवस्था पर ठोस कार्रवाई होगी?

या फिर “विकास” सिर्फ प्रचार और दावों तक सीमित रह जाएगा?

फिलहाल, सामान्य सभा से निकला संदेश साफ है—

“अगर अब भी सुधार नहीं हुआ, तो जवाब सिर्फ सरकार को नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को देना पड़ेगा।”

दुर्ग।

दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा इस बार सिर्फ औपचारिक चर्चा का मंच नहीं रही, बल्कि सफाई व्यवस्था के नाम पर सियासी टकराव और प्रशासनिक सवालों का विस्फोट बन गई। मामला वार्ड नंबर 57 में जनवरी महीने के दौरान पूरे एक हफ्ते तक सफाई कार्य बंद रहने का है, जिसने अब शहरी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।

भोजन अवकाश के बाद जब सभा दोबारा शुरू हुई, तो वार्ड के सुपरवाइजर ने खुले मंच पर यह स्वीकार किया कि वार्ड 57 में एक हफ्ते तक काम नहीं हुआ और उसी दौरान वार्ड 58 में कार्य किया गया। यह बयान जैसे ही सामने आया, वार्ड 58 की पार्षद ने तुरंत पलटवार करते हुए पूछा—“आखिर हमारे वार्ड में कहां काम हुआ?”

इस सीधे सवाल के सामने सुपरवाइजर का जवाब न तो स्पष्ट था और न ही संतोषजनक, जिससे यह संदेह और गहरा गया कि कहीं न कहीं दबाव में बयान दिया जा रहा है। अब यह दबाव प्रशासनिक था या राजनीतिक—यह जांच का विषय बन चुका है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभापति श्याम शर्मा ने पार्षदों की सहमति से निगम आयुक्त को स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी पर निलंबन की कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही। वहीं, सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों के पार्षदों ने तत्काल कार्रवाई की मांग कर दी।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने दुर्ग की स्वास्थ्य और सफाई व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। लंबे समय से पार्षद इस मुद्दे पर नाराजगी जता रहे थे, लेकिन अब यह असंतोष खुलकर सामने आ गया है।

खास बात यह है कि आरोप सिर्फ विपक्ष की ओर से नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के पार्षदों ने भी स्वास्थ्य प्रभारी नीलेश अग्रवाल की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह स्थिति साफ संकेत देती है कि मामला केवल राजनीति नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर खामी का है।

गुप्ता पर कार्रवाई या ‘आदेश’ का खुलासा?

अब पूरा मामला स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गया है। सवाल यह है कि—

क्या बिना किसी आदेश के एक हफ्ते तक सफाई कार्य रोका जा सकता है?

अगर आदेश था, तो वह किसका था?

और अगर गलती है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

नगर निगम के गलियारों में अब यह चर्चा तेज है कि क्या गुप्ता पर निलंबन की गाज गिरेगी, या फिर वे उस नाम का खुलासा करेंगे जिनके निर्देश पर यह पूरा खेल हुआ?

सत्ता पक्ष ही बना ‘सबसे बड़ा विपक्ष’

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि दुर्ग नगर निगम में इस समय सत्ता पक्ष ही अपनी सरकार के खिलाफ सबसे मुखर विपक्ष बन गया है।

अब नजरें निगम आयुक्त की कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या यह मामला सिर्फ एक अधिकारी के निलंबन तक सीमित रहेगा, या फिर इसके पीछे छिपे “असली आदेश” और जिम्मेदार चेहरे भी सामने आएंगे?

फिलहाल, शहर इंतजार कर रहा है—

“न्याय होगा या सिर्फ कार्रवाई का दिखावा?”

दुर्ग,।

दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा में मंगलवार को जो दृश्य सामने आया, उसने नगर निगम की राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया। आमतौर पर जहां विपक्ष सत्ता पक्ष को घेरता है, वहीं इस बार सत्ता पक्ष के पार्षद ही अपनी ही “शहरी सरकार” पर हमलावर नजर आए।

सामान्य सभा में विपक्ष के पार्षद संख्या में भले ही कम रहे और अपेक्षाकृत शांत दिखे, लेकिन सत्ता पक्ष के पार्षदों की एक लंबी कतार ने मोर्चा संभालते हुए महापौर और एमआईसी (MIC) पर सीधा हमला बोला। आरोप साफ था—विकास कार्यों में खुला भेदभाव।

पार्षदों ने आरोप लगाया कि कई वार्डों को विकास कार्यों से पूरी तरह वंचित रखा गया है, जबकि कुछ वार्डों में लाखों रुपए के कार्य स्वीकृत कर दिए गए। इस असमानता से नाराज पार्षदों ने सभा के भीतर ही अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया।

स्थिति इतनी असहज हो गई कि महापौर और एमआईसी सदस्य, पार्षदों के सवालों का संतोषजनक जवाब देने में असफल नजर आए। नगर निगम के इतिहास में यह शायद पहला मौका माना जा रहा है जब सत्ता पक्ष के भीतर ही इस स्तर की खुली नाराजगी और टकराव सामने आया हो।

“ट्रिपल इंजन सरकार” पर भी सवाल

सभा में उठे इस बवाल ने उन दावों पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया, जिनमें “ट्रिपल इंजन सरकार” के जरिए शहर में विकास और सुशासन का वादा किया गया था। भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे, सांसद विजय बघेल और गृह मंत्री विजय शर्मा के वादों के उलट, अब उसी पार्टी के पार्षद व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

विपक्ष खामोश, सत्ता पक्ष आक्रामक

सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि जहां विपक्ष अपेक्षाकृत मौन रहा, वहीं सत्ता पक्ष के पार्षद ही सबसे ज्यादा आक्रामक दिखाई दिए। आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर में शहरी सरकार अपने ही घर में घिरी नजर आई।

“विकास की वीरांगना” पर कटाक्ष

शहर में विकास के दावों और प्रचार के बीच, पार्षदों ने महापौर की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। “विकास की वीरांगना” जैसे विशेषणों पर कटाक्ष करते हुए पार्षदों ने कहा कि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

अब नजरें सामान्य सभा के दूसरे चरण (भोजन अवकाश के बाद) पर टिकी हैं, जहां यह देखना अहम होगा कि सत्ता पक्ष के पार्षद अपनी ही सरकार से किस तरह जवाब मांगते हैं और क्या शहरी सरकार इस आंतरिक बगावत को संभाल पाएगी या नहीं।

दुर्ग | शौर्यपथ । 

नगर पालिक निगम दुर्ग ने शहर के बेघर और किराये के मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए खुशियों की सौगात दी है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत अब जरूरतमंद परिवार बेहद कम कीमत और आसान किश्तों में अपना खुद का पक्का घर पा सकते हैं। महापौर श्रीमती अलका बाघमार और आयुक्त सुमित अग्रवाल ने पात्र नागरिकों से इस योजना का लाभ उठाने की भावुक अपील की है।

? इन प्राइम लोकेशन्स पर उपलब्ध हैं फ्लैट्स

निगम द्वारा शहर के विकसित क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं के साथ फ्लैट्स का निर्माण किया गया है, जो आवंटन के लिए तैयार हैं:

सरस्वती नगर

माँ कर्मा बोरसी

फॉर्चून हायट्स बोरसी

गोकुल नगर

? किश्तों में भुगतान और फाइनेंस की सुविधा

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लगभग ₹3.5 लाख की लागत वाले ये फ्लैट्स किश्तों के माध्यम से प्राप्त किए जा सकते हैं। मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों की सुविधा के लिए नगर निगम ने फाइनेंस कंपनियों की भी व्यवस्था की है, ताकि ऋण (Loan) लेने में कोई बाधा न आए।

✅ कौन ले सकता है लाभ? (पात्रता शर्तें)

योजना का लाभ लेने के लिए निम्नलिखित शर्तें पूरी होनी अनिवार्य हैं:

हितग्राही अगस्त 2015 से पूर्व से दुर्ग शहर में निवासरत हो।

वर्तमान में किराये के मकान, कच्चे मकान या किसी अन्य के मकान में रह रहा हो।

पूरे भारत में हितग्राही के नाम पर कोई भी स्वयं का पक्का घर न हो।

? "सपनों का घर पाने का यह अंतिम अवसर"

"हमारा उद्देश्य शहर के हर सिर पर छत सुनिश्चित करना है। बेघर परिवार अब किराये के बोझ से मुक्त होकर सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे। पात्र लोग देरी न करें और इस 'पहले आओ-पहले पाओ' मौके का लाभ उठाएं।"

— श्रीमती अलका बाघमार, महापौर

"पारदर्शिता के लिए हमने सीधा आवेदन और 'पहले आओ-पहले पाओ' की नीति अपनाई है। आवास कार्यालय में हेल्प डेस्क तैयार है ताकि लोगों को आवेदन में कोई परेशानी न हो।"

— सुमित अग्रवाल, आयुक्त

? यहाँ करें संपर्क

आवास प्राप्त करने के इच्छुक हितग्राही अधिक जानकारी और आवेदन के लिए संपर्क कर सकते हैं:

स्थान: प्रधानमंत्री आवास योजना कार्यालय, डाटा सेंटर, नगर निगम दुर्ग।

संपर्क समय: का

र्यालयीन समय के दौरान।

दुर्ग | शौर्यपथ । 

दुर्ग पुलिस ने अवैध गतिविधियों के खिलाफ अपना कड़ा रुख बरकरार रखते हुए पंचशील नगर क्षेत्र में चल रहे एक बड़े जुआ फड़ पर सर्जिकल स्ट्राइक की है। थाना सिटी कोतवाली और एसीसीयू (ACCU) की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सटीक सूचना पर खेत में दबिश देकर 13 जुआरियों को रंगे हाथ दबोचा। पुलिस ने मौके से करीब 3 लाख रुपये की मशरूका जप्त की है।

खेत में बिछी थी बिसात, पुलिस ने चारों तरफ से घेरा

जानकारी के मुताबिक, पंचशील नगर और मोहलाई के बीच स्थित एक सुनसान खेत में बड़े पैमाने पर जुआ खेलने की सूचना मिली थी। जुआरी पुलिस की नजरों से बचने के लिए रिहायशी इलाके से दूर खेत का सहारा ले रहे थे। दुर्ग पुलिस की स्पेशल टीम ने योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी की, जिससे आरोपियों को भागने का मौका नहीं मिला।

बड़ी बरामदगी: नगदी और मोबाइल फोन जप्त

पुलिस की इस रेड में जुआरियों के पास से विलासिता और जुए के साजो-सामान बरामद हुए हैं:

कुल जप्ती: ₹2,97,000 (लगभग 3 लाख रुपये)

नगद राशि: ₹1,53,000 (दांव पर लगी रकम)

स्मार्टफोन: 18 नग कीमती मोबाइल (कीमत ₹1,44,000)

अन्य: 03 गड्डी ताश, तिरपाल, कंबल और चादरें।

पकड़े गए आरोपियों की सूची (13 गिरफ्तार)

गिरफ्तार आरोपियों में दुर्ग और आसपास के क्षेत्रों के रसूखदार और आदतन जुआरी शामिल हैं:

मोहम्मद फहीम (मील पारा)

बल्लू वर्मा (रिशाली)

किशन साहू (जवाहर नगर)

पंकज सोनी (नयापारा)

नितेश जैन (उरला)

सुरेश गुप्ता (चंडी मंदिर क्षेत्र)

शंकर लाल चौधरी (कसारीडीह)

मोहित सिन्हा (बघेरा)

ललित भट्ट (शिव नगर)

खिलेश्वर निषाद (कोटनी)

बसंत कुमार सोनी (राम नगर)

राकेश मंडल (पंचशील नगर)

मनोज राजपूत (कोटनी)

नया कानून, कड़ी कार्रवाई

पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022 की धारा 3(2) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112(2) के तहत अपराध क्रमांक 132/2026 पंजीबद्ध किया है।

इनकी रही मुख्य भूमिका:

इस सफल कार्रवाई में सिटी कोतवाली के सउनि रामकृष्ण तिवारी, प्रधान आरक्षक राकेश निर्मलकर, आरक्षक केशव कुमार, गजेन्द्र यादव और एसीसीयू टीम का विशेष योगदान रहा।

पुलिस की चेतावनी: दुर्ग पुलिस ने साफ कर दिया है कि जिले में किसी भी प्रकार का अवैध कारोबार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि आपके आसपास ऐसी गतिविधियां हो रही हैं,

तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।

दुर्ग, ।  जिले में त्रिस्तरीय पंचायत उप-निर्वाचन 2026 की प्रक्रिया गति पकड़ चुकी है। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) के निर्देशानुसार, जिले की तीन प्रमुख जनपद पंचायतों—दुर्ग, धमधा और पाटन—में फोटोयुक्त निर्वाचक नामावली (मतदाता सूची) तैयार करने का कार्य युद्ध स्तर पर प्रारंभ कर दिया गया है।

इस प्रक्रिया के लिए 1 अप्रैल 2026 को संदर्भ तिथि (Base Date) माना गया है।

? जिम्मेदारी का बंटवारा: नियुक्त किए गए अधिकारी

निर्वाचन नियमों के सुचारू पालन के लिए शासन ने प्रशासनिक अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं:

रजिस्ट्रीकरण अधिकारी: अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) - दुर्ग, धमधा और पाटन।

सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी: संबंधित तहसीलों (दुर्ग, धमधा, पाटन) के तहसीलदार।

अपीलीय प्राधिकारी: अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी (ADM), दुर्ग।

? किन क्षेत्रों में होगा पुनरीक्षण?

उप-निर्वाचन के तहत कुल 17 ग्राम पंचायतों और संबंधित वार्डों में मतदाता सूची का मिलान और नवीनीकरण किया जाएगा:

जनपद पंचायत प्रभावित ग्राम पंचायतें

दुर्ग (05) भोथली, तिरगा, बोरई, कोटनी, उमरपोटी।

धमधा (05) रुहा, पथरिया (डो.), लहंगा, नंदवाय, करेली।

पाटन (07) सुरपा, तुलसी, मानिकचौरी, कसही, गोडपेन्ड्री, मनसुली, गातापार (वार्ड सहित) एवं पाहंदा (अ) सांकरा।

अहम जानकारी

छत्तीसगढ़ पंचायत निर्वाचन नियम 1995 के नियम 18 के तहत यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी। मतदाता सूची पुनरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहे और सूची पूरी तरह त्रुटिहीन हो।

अपील: संबंधित क्षेत्रों के नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने या सुधार करवाने के लिए निर्धारित केंद्रों पर संपर्क कर सकते हैं

दुर्ग ।  मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण अभियान और 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में वरदान साबित हो रही है। दुर्ग जिले के ग्राम सिलोदा (ग्राम पंचायत खपरी) की निवासी गीतांजली साहू की कहानी इस योजना की सफलता का एक जीवंत उदाहरण है, जहाँ सही समय पर मिली आर्थिक सहायता और पोषण परामर्श ने एक मां और बच्चे के जीवन में खुशहाली भर दी।

चुनौतियों भरा था सफर: कम वजन और हीमोग्लोबिन की समस्या

गर्भावस्था के शुरुआती दौर में गीतांजली का स्वास्थ्य चिंता का विषय था। उनका वजन मात्र 38 किलोग्राम था और हीमोग्लोबिन का स्तर भी 10 ग्राम (एनीमिक श्रेणी) था। ऐसी स्थिति में जच्चा-बच्चा दोनों के लिए जोखिम अधिक था।

योजना बनी मददगार: ₹3000 की पहली किस्त से बदला आहार

सेक्टर रसमड़ा की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और महिला सशक्तिकरण केंद्र की टीम ने गीतांजली का पंजीयन 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' में कराया।

पोषण सहायता: पांचवें माह में उन्हें योजना के तहत 3000 रुपये की पहली किस्त प्राप्त हुई।

बदलाव: इस राशि का उपयोग गीतांजली ने अपने खान-पान को सुधारने में किया। उन्होंने अपने आहार में अंकुरित अनाज, ताजे फल, सलाद और दूध को शामिल किया।

सकारात्मक परिणाम: स्वस्थ मां, स्वस्थ बच्चा

नियमित देखरेख और संतुलित पोषण का परिणाम सुखद रहा:

वजन में सुधार: नौवें माह तक गीतांजली का वजन 8 किलो बढ़ गया।

हीमोग्लोबिन: रक्त का स्तर बढ़कर 11 ग्राम हो गया।

स्वस्थ प्रसव: 23 नवंबर 2025 को उन्होंने एक स्वस्थ बालक (वजन 2.50 किग्रा) को जन्म दिया।

शिशु विकास: जन्म के बाद उचित स्तनपान से मात्र एक माह में बच्चे का वजन बढ़कर 3.5 किलोग्राम हो गया है।

"शासन की यह मदद मेरे लिए संबल बनी"

गीतांजली साहू ने शासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर मिली जानकारी और आर्थिक सहायता ने उनके मातृत्व को सुरक्षित बनाया। वह अब अन्य महिलाओं को भी इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

? मुख्य बिंदु: महिला सशक्तिकरण केंद्र दुर्ग की पहल

जागरूकता अभियान: दुर्ग ग्रामीण के सेक्टर रसमड़ा में लगातार महिलाओं को योजनाओं के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

परामर्श: केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि आहार चार्ट और नियमित जांच के लिए भी प्रेरि

त किया जा रहा है।

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