February 05, 2026
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शौर्यपथ

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‘बड़ी दीदी’ बुधरी ताटी, डॉ. रामचंद्र गोडबोले एवं सुनीता गोडबोले का पद्म श्री के लिए चयन छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण

रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के लिए यह अत्यंत गर्व और सम्मान का अवसर है कि बस्तर की समाजसेविका, स्नेह और ममता की प्रतिमूर्ति ‘बड़ी दीदी’ के नाम से विख्यात श्रीमती बुधरी ताटी, तथा जनजातीय अंचलों में निःस्वार्थ सेवा के जीवंत प्रतीक डॉ. रामचंद्र गोडबोले एवं सुनीता गोडबोले का पद्म श्री सम्मान के लिए चयन किया गया है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश और देश का नाम रोशन करने वाली इन तीनों विभूतियों को हृदय से बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए उनके स्वस्थ जीवन की कामना की है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह उपलब्धि न केवल इन तीनों विभूतियों की तपस्या और समर्पण का सम्मान है, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए अपार गौरव का विषय भी है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बस्तर और जनजातीय अंचलों में मानव सेवा, करुणा और समर्पण की जो मिसाल इन विभूतियों ने प्रस्तुत की है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि सेवा भाव से किया गया कार्य सीमाओं को पार कर राष्ट्रीय पहचान बन जाता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इन तीनों विभूतियों ने वर्षों तक मौन साधना की तरह समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों की सेवा की है और आज देश ने उस सेवा को सम्मान दिया है। यह छत्तीसगढ़ की मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक चेतना और जनजातीय संस्कृति की शक्ति का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है।

  रायपुर / शौर्यपथ / जशपुर जिले को एक प्रमुख इको-पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय बगिया में आयोजित कार्यक्रम में भारत के अग्रणी होमस्टे प्लेटफॉर्म होमस्टेज़ ऑफ इंडिया, छत्तीसगढ़ शासन और जशपुर जिला प्रशासन के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया। इसके अंतर्गत ग्राम केरे को एक मॉडल सामुदायिक पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने ग्राम केरे में तैयार किए गए होमस्टे का शुभारंभ किया गया।

एमओयू के अंतर्गत जशपुर का पहला संगठित होमस्टे ग्राम बनाने की दिशा में कार्य होगा। एक सुव्यवस्थित एवं विस्तार योग्य होमस्टे-आधारित ग्रामीण पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना होगी। इस पहल के माध्यम से स्थानीय परिवारों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, सतत आजीविका को सुदृढ़ किया जाएगा तथा क्षमता निर्माण और कौशल विकास के जरिए युवाओं एवं महिलाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस परियोजना का मूल उद्देश्य स्थानीय संस्कृति, परंपराओं एवं प्राकृतिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन करना है, ताकि पर्यटन विकास समावेशी, समुदाय-स्वामित्व वाला और पर्यावरण की दृष्टि से सतत बना रहे तथा क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे।

मुख्यमंत्री श्री साय की उपस्थिति में हुए इस समझौता का ज्ञापन पर कलेक्टर जशपुर श्री रोहित व्यास तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनोद वर्मा और होमस्टेज़ ऑफ इंडिया प्रा. लि. के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए। अधिकारियों ने बताया कि यह पहल राज्य सरकार की इको-पर्यटन, समावेशी विकास एवं समुदाय-नेतृत्व वाले आर्थिक विकास की परिकल्पना के अनुरूप है। स्थानीय संस्कृति और प्रकृति पर आधारित प्रामाणिक पर्यटन अनुभवों के माध्यम से यह परियोजना जशपुर की पहचान को सशक्त करेगी और उसे राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य पर्यटन मानचित्र में स्थापित करने में सहायक होगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के समक्ष रेयर प्लेनेट संस्था से हुआ ऐतिहासिक एमओयू ,महिला स्वावलंबन को मिला नया बाजार

रायपुर / शौर्यपथ / वन विभाग की पहल पर जशपुर जिले में महिला सशक्तिकरण और वन आधारित आजीविका को नई दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में विगत दिवस बगिया में रेयर प्लेनेट संस्था तथा जशपुर जिले की स्व-सहायता समूह—जागरण, स्माईल आरती, राखी एवं मुस्कान समूह—के मध्य जशक्राफ्ट ब्रांड के उत्पादों के विपणन हेतु अनुबंध समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।इस महत्वपूर्ण समझौते के अंतर्गत अब जशपुर की जनजातीय महिलाओं द्वारा बांस, छिंद, मिट्टी एवं लकड़ी से निर्मित हस्तशिल्प, आभूषण एवं सजावटी उत्पाद देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर संचालित रेयर प्लेनेट के बिक्री केंद्रों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय स्व-सहायता समूहों को स्थायी बाजार, उचित मूल्य तथा नियमित आय के अवसर प्राप्त होंगे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने एमओयू को जशपुर की महिलाओं के लिए एक निर्णायक उपलब्धि बताते हुए कहा कि जशक्राफ्ट जैसे ब्रांड के माध्यम से हमारी आदिवासी बहनों की कला अब देशभर के लोगों तक पहुँचेगी। यह पहल केवल उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान, आर्थिक स्वतंत्रता और स्वावलंबन की मजबूत नींव रखती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि वन एवं परंपरागत ज्ञान आधारित आजीविका को बाजार से जोड़ा जाए, ताकि महिलाएं अपने गांव में रहकर सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह एमओयू ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा को साकार करता है तथा जशपुर की जनजातीय महिलाओं को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक ठोस और दूरगामी पहल है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, पत्थलगांव क्षेत्र की विधायक श्रीमती गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वनमंडलाधिकारी श्री शशि कुमार सहित स्व-सहायता समूह की महिलाएं एवं रेयर प्लेनेट संस्था के प्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

पुस्तक विमोचन और जशक्राफ्ट उत्पादों की सराहना

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा “जशक्राफ्ट” पर आधारित विशेष पुस्तक का विमोचन किया गया। उन्होंने जशक्राफ्ट के अंतर्गत तैयार किए गए आभूषणों एवं हस्तनिर्मित उत्पादों का अवलोकन करते हुए उनकी गुणवत्ता, कलात्मकता और नवाचार की सराहना की।
स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी एवं विधायक श्रीमती गोमती साय का जशक्राफ्ट ब्रांड के पारंपरिक आभूषण पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया, जो महिला सशक्तिकरण और स्थानीय संस्कृति के सम्मान का सशक्त प्रतीक बना।

इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री द्वारा जशक्राफ्ट ब्रांड के प्रचार-प्रसार हेतु तैयार वीडियो का भी विमोचन किया गया, जिससे जशक्राफ्ट को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।

जशक्राफ्ट: जशपुर की सांस्कृतिक विरासत से जन्मा सशक्त ब्रांड

उल्लेखनीय है कि जशक्राफ्ट जशपुर जिले की समृद्ध जनजातीय सांस्कृतिक विरासत की सजीव अभिव्यक्ति है। जिले की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या जनजातीय समुदायों से आती है, जहाँ पीढ़ियों से बाँस, कांसा घास, छिंद पत्ते, लकड़ी एवं मिट्टी से हस्तनिर्मित कलाकृतियाँ तैयार की जाती रही हैं। पूर्व में संगठित व्यवस्था और बाजार की कमी के कारण कारीगरों की प्रतिभा सीमित रह जाती थी।

जिला प्रशासन की पहल से जशक्राफ्ट के रूप में ऐसा सशक्त मंच विकसित हुआ है, जो जशपुर जिले के आठों विकासखंडों के कारीगरों को एकजुट कर उनकी कला को पहचान, संरक्षण और बाजार उपलब्ध करा रहा है।

इस पहल के केंद्र में आदिवासी महिला कारीगर हैं, जिनके हाथों से बिना मशीनों के बने उत्पाद परंपरा, प्रकृति और आत्मनिर्भरता का संदेश देते हैं। जशक्राफ्ट आज स्वदेशी ज्ञान से आकार लेते हुए एक टिकाऊ और सम्मानजनक आजीविका मॉडल के रूप में उभर रहा है।

वन विभाग द्वारा संचालित यह पहल महिला स्वावलंबन, वन आधारित आजीविका और स्थानीय उत्पादों के राष्ट्रीय बाजारीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध हो रही है, जो आने वाले समय में जशपुर को हस्तशिल्प के राष्ट्रीय मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाएगी।

रायपुर साहित्य उत्सव के समापन समारोह में शामिल हुए राज्यपाल

रायपुर / शौर्यपथ / राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा है कि इंटरनेट से भरी इस दुनिया और न्यू जनरेशन वाले इस दौर में भी प्रिंट और साहित्य का महत्व हमेशा बना रहेगा। राज्यपाल श्री डेका ने आज नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव ‘आदि से अनादि‘ के समापन समारोह के अवसर पर उक्त विचार व्यक्त किए। राज्यपाल ने कहा कि साहित्य और कविता में हमेशा एक संदेश होना चाहिए। जिस तरह संगीत के सात स्वर हमें जोड़े रखते है उसी तरह साहित्य का आदान-प्रदान नई बातों का सीखने का अवसर प्रदान करता है।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से राज्यपाल ने कहा कि पिछले तीन दिनों में इस मंच पर बहुत अच्छी और सार्थक चर्चाएं हुईं। विचारों का खुलकर आदान-प्रदान हुआ। सबने मिलकर साहित्य, समाज और जीवन से जुड़े कई विषयों पर बात की। यह उत्सव सभी साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार और सीखने वाला अनुभव रहा है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। देश भर से आए नामी प्रकाशकों ने यहां किताबों का बहुत सुंदर संग्रह प्रस्तुत किया। पाठकों को नई-नई किताबें देखने और पढ़ने का अच्छा मौका मिला। यह देखकर अच्छा लगता है कि आज भी लोगों में किताबों के प्रति गहरी रुचि है।

श्री डेका ने कहा साहित्य और संगीत का आदान प्रदान जरूरी है और ऐसे साहित्य का उत्सव हमेशा होना चाहिए। उन्होंने तीन दिवसीय सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन राज्य के अन्य शहरों एवं गांवांे के स्तर तक भी किया जाना चाहिए और यह आयोजन सरकारी न होकर समुदाय की भागीदारी वाले होने चाहिए।

श्री डेका ने कहा कि आज की पीढ़ी छत्तीसगढ़ के रामायण कालीन संस्कृति एवं साहित्य को भूल गयी है। हमारा राज्य बहुत सुंदर है और यहां की संस्कृति भी बहुत समृद्ध है। इसका प्रचार प्रसार होना चाहिए ताकि राज्य के बाहर के लोग यहां के बारे में जान सकें। श्री डेका ने कहा कि शब्दों में बहुत शक्ति होती है। शब्द का रूप ब्रह्म है। उन्हांेने बंकिमचंद्र चटर्जी के वंदे मातरम गीत का उल्लेख किया और कहा कि सारे देश को इन दो शब्दों ने जागृत कर दिया था। उन्होंने कहा कि साहित्य हमें जोड़ता है, हमें सोचने की नई दिशा देता है और हमें बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है। हम सभी साहित्य को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाएं और विचारों की यह रोशनी लगातार जलाए रखें। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें, जो बिना किसी लेन-देन या व्यक्तिगत स्वार्थ के हो। ऐसे कार्य देश और समाज के समग्र विकास को मजबूती प्रदान करते हैं।

समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में साहित्य की अविरल धारा बहती रही है। कालीदास, रविन्द्रनाथ टैगोर जैसे कवि एवं साहित्यकारों का इतिहास भी छत्तीसगढ़ से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी इस तरह के आयोजन अनवरत किए जाते रहेंगे।

समापन समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात रंगकर्मी, नाट्य लेखक डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्माता-निर्देशक श्री अनुराग बसु विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर कृष्णा दास, मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा , राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, राज्यपाल के विधिक सलाहकार श्री भीष्म प्रसाद पाण्डेय, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

बिलासपुर।
बिलासपुर पुलिस महकमे से जुड़ी एक बेहद गंभीर और संवेदनशील खबर सामने आई है। सोशल मीडिया पर प्रसारित समाचारों एवं वीडियो को संज्ञान में लेते हुए नगर पुलिस अधीक्षक (ASP – सिटी) श्री राजेंद्र जायसवाल के खिलाफ जांच के आदेश जारी किए गए हैं। यह आदेश पुलिस महानिरीक्षक, बिलासपुर रेंज द्वारा जारी किया गया है, जिसमें पूरे प्रकरण की तथ्यात्मक, निष्पक्ष और गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं।
प्राप्त आधिकारिक पत्र के अनुसार, सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो एवं आरोप सामने आए हैं, जिनमें यह दावा किया जा रहा है कि स्पा सेंटर संचालकों से अवैध रूप से धन की मांग की जा रही थी। इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले को हल्के में न लेते हुए उच्च स्तर पर जांच का निर्णय लिया गया है।
SSP को सौंपी गई जांच की जिम्मेदारी
इस पूरे मामले की जांच वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), जिला बिलासपुर को सौंपी गई है। IG कार्यालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सोशल मीडिया में वायरल वीडियो की दृश्य-श्रव्य सामग्री, उपलब्ध दस्तावेजों तथा शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों की सूक्ष्म और वस्तुनिष्ठ जांच की जाए।
पूर्व में भी आई थी शिकायत
आदेश में यह भी उल्लेख है कि इससे पहले लोकेश सेन एवं अमन सेन द्वारा एक लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई थी, जिसमें सिविल लाइन थाना, बिलासपुर से जुड़े कुछ मामलों में कथित अवैध वसूली, दबाव एवं व्यवसाय को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप लगाए गए थे। उक्त शिकायत पहले ही जांच हेतु अग्रेषित की जा चुकी है और अब उसे भी वर्तमान जांच से संबद्ध कर लिया गया है।
7 दिन में रिपोर्ट तलब
IG बिलासपुर रेंज ने SSP को निर्देशित किया है कि वे 7 दिवस के भीतर सभी तथ्यों की जांच कर स्पष्ट अभिमत सहित विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। साथ ही, जांच में प्रयुक्त समस्त साक्ष्य, दस्तावेज एवं सामग्री को विधिवत संलग्न करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
ASP स्तर के अधिकारी के विरुद्ध इस प्रकार की जांच के आदेश से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सबकी निगाहें SSP द्वारा की जाने वाली जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं।
प्रशासन का सख्त संदेश
इस कार्रवाई को पुलिस प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और पद के दुरुपयोग के आरोप चाहे कितने भी उच्च पदस्थ अधिकारी पर क्यों न हों, जांच से कोई भी ऊपर नहीं है।
अब देखना यह होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या इस मामले में आगे कोई बड़ी कार्रवाई होती है।

गृह वार्ड में ‘चयनात्मक कार्रवाई’ के आरोप: क्या दुर्ग में अतिक्रमण नीति सबके लिए समान है?

दुर्ग।

शासन-प्रशासन जब किसी शासकीय अधिकारी पर पद के दुरुपयोग का आरोप पाता है, तो निलंबन और बर्खास्तगी जैसी कड़ी कार्रवाइयाँ दिखाई देती हैं। सुशासन की दुहाई दी जाती है। लेकिन सवाल तब उठता है जब यही कसौटी जनप्रतिनिधियों पर लागू होती नहीं दिखती। दुर्ग नगर पालिका निगम के वार्ड क्रमांक 59—जो स्वयं महापौर श्रीमती अलका बाघमार का गृह वार्ड है—में हालिया अतिक्रमण कार्रवाई को लेकर भेदभावपूर्ण व्यवहार के गंभीर आरोप सामने आए हैं।

वार्ड में एक ऐसी दुकान पर कार्रवाई की गई, जिसके संबंध में न तो यातायात अवरोध की शिकायतें थीं और न ही सड़क जाम जैसी स्थिति। दुकान संचालक रोहित जैन का आरोप है कि महापौर के पदभार ग्रहण करने के बाद से ही उन पर निजी द्वेष के तहत लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि बीते 6–7 महीनों से विभिन्न नीतिगत हथकंडों के जरिए दुकान खाली कराने का प्रयास हो रहा है, यहाँ तक कि खुले तौर पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

बुधवार, 21 जनवरी, को नगर निगम की टीम ने दुकान के सामने सड़क से काफी दूरी पर लगे शेड को अतिक्रमण बताकर तोड़ने की कार्रवाई की। हैरानी इस बात की है कि इसी दौरान शहर के कई अन्य इलाकों में स्पष्ट और प्रत्यक्ष अतिक्रमण प्रशासन की निगाहों से ओझल बने रहे।

स्थानीय लोगों के अनुसार,

महापौर निवास कार्यालय से मात्र 100 मीटर दूर साईं द्वार के पास बढ़ता अतिक्रमण,

चर्च रोड का अवैध बाजार,

समृद्धि बाजार के सामने हालिया कब्जे,

और गणेश मंदिर के सामने सड़क पर कब्जा कर संचालित राम रसोई—

इन सब पर कोई सख्त कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।

आरोप यह भी है कि सड़क पर कब्जा कर राम रसोई चलाने वाले व्यापारी को निगम की प्रेस विज्ञप्ति में ‘समाजसेवी’ बताकर प्रस्तुत किया गया, जबकि नियमों का उल्लंघन प्रत्यक्ष है। यदि अतिक्रमण वास्तव में जनहित और यातायात के आधार पर हटाया जाना है, तो नीति सबके लिए समान क्यों नहीं दिखती?

यह पूरा प्रकरण केवल एक दुकान या एक वार्ड तक सीमित नहीं रह जाता। यह नगर निगम की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक मुखिया सुमित अग्रवाल और जनप्रतिनिधि नेतृत्व की निष्पक्षता पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाता है। शहर के विकास के दावे तब खोखले प्रतीत होते हैं, जब कार्रवाई चयनात्मक और व्यक्तिगत पसंद-नापसंद के आधार पर होती दिखाई दे।

राज्य में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार सुशासन की बात करती है। ऐसे में दुर्ग नगर निगम में सामने आ रही यह तस्वीर कहीं सरकार के लिए “काला अध्याय” न बन जाए—यह चिंता स्वाभाविक है। शहर की जनता आज यही पूछ रही है:

क्या कानून केवल कुछ के लिए है, या सबके लिए समान?

यदि जवाब दूसरा है, तो फिर निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमसम्मत कार्रवाई की शुरुआत गृह वार्ड से क्यों नहीं होती?

भ्रष्टाचार, पद का दुरुपयोग और चुनिंदा कार्रवाई के आरोपों से घिरे आयुक्त

हिंदू युवा मंच का अल्टीमेटम—कार्रवाई नहीं तो उग्र आंदोलन तय

दुर्ग।
मुख्यमंत्री के नाम पर जिस “सुशासन मॉडल” का ढोल पीटा जा रहा है, दुर्ग नगर निगम की हकीकत उस दावे को सरेआम चुनौती दे रही है। नगर निगम दुर्ग के आयुक्त सुमित अग्रवाल पर लगे गंभीर आरोप अब प्रशासनिक गलियारों की फुसफुसाहट नहीं रहे, बल्कि जनता के गुस्से और आक्रोश की खुली आवाज बन चुके हैं। भेदभाव, मनमानी, पद के दुरुपयोग और सत्ता के संरक्षण में चल रहे कथित भ्रष्ट तंत्र ने दुर्ग शहर को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या कानून केवल आम आदमी के लिए है?

जिलाधीश को सौंपा गया “आरोप पत्र”, जवाबदेही की खुली मांग

हिंदू युवा मंच, दुर्ग के जिला प्रभारी राजा देवांगन के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जिलाधीश को एक तीखा, तथ्यपूर्ण और सवालों से भरा ज्ञापन सौंपते हुए नगर निगम आयुक्त की भूमिका पर सीधे-सीधे उंगली उठाई। ज्ञापन किसी राजनीतिक बयानबाज़ी का दस्तावेज नहीं, बल्कि उन सबूतों का पुलिंदा है जो यह दर्शाता है कि निगम में सत्ता का दुरुपयोग किस तरह खुलकर किया जा रहा है।

निजी काम, दबाव और प्रताड़ना—कर्मचारी पहुँचे हाईकोर्ट

ज्ञापन और सामने आए दस्तावेज बताते हैं कि आयुक्त द्वारा अधीनस्थ कर्मचारियों से निजी कार्य कराए गए, व्यक्तिगत सुविधाओं के लिए दबाव बनाया गया और विरोध करने वालों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। हालात इतने बिगड़े कि एक निगम कर्मचारी को न्याय के लिए माननीय उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा। यह घटना अपने आप में निगम प्रशासन की कार्यसंस्कृति पर करारा तमाचा है।

विवादों की लंबी फेहरिस्त, कार्रवाई का सन्नाटा

यह कोई एक मामला नहीं है, बल्कि विवादों की पूरी श्रृंखला है—

  • अशोक परिहार प्रकरण: शिकायतें आईं, पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई शून्य।

  • लॉलीपॉप विज्ञापन बोर्ड मामला: नियमों की अनदेखी, केवल कागजी खानापूर्ति।

  • राम रसोई संचालन: नियमों को ताक पर रखकर संचालन।

  • मंदिर के सामने अवैध राम रसोई शेड: जानकारी होते हुए भी जानबूझकर आंख मूंदना।

इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि निगम में कानून समान नहीं, बल्कि “संपर्क और संरक्षण” देखकर लागू होता है।

सुशासन नहीं, चयनित सख्ती का मॉडल?

हिंदू युवा मंच ने सवाल उठाया है कि जब एक बड़े शहर का शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी ही नियमों को रौंदता दिखाई दे, तो आम नागरिक किससे न्याय की उम्मीद करे? यदि यही सुशासन है, तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि पारदर्शिता केवल पोस्टरों और मंचों तक ही क्यों सीमित है?

अब चेतावनी नहीं, आंदोलन का ऐलान

हिंदू युवा मंच ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष न्यायिक या उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर और उदाहरणात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन सड़क से सदन तक आंदोलन करेगा। इसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

साथ ही, संगठन ने यह भी मांग की है कि—

  • की गई कार्रवाई की लिखित जानकारी सार्वजनिक की जाए

  • आयुक्त को जांच पूर्ण होने तक पद से पृथक किया जाए

  • निगम में व्याप्त भ्रष्ट तंत्र को ध्वस्त किया जाए

दुर्ग की जनता पूछ रही है सवाल

आज दुर्ग की जनता यह नहीं पूछ रही कि आरोप क्यों लगे, बल्कि यह पूछ रही है कि अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या शासन इस चुनौती को स्वीकार करेगा या फिर यह मामला भी बाकी फाइलों की तरह धूल में दबा दिया जाएगा?

यह लड़ाई किसी एक संगठन की नहीं, बल्कि दुर्ग की जनता के सम्मान, अधिकार और सुशासन की साख की है।

कैबिनेट के फैसलों से छत्तीसगढ़ को मिला विकास का रोडमैप
शराब नीति से लेकर विश्वस्तरीय शिक्षा, स्टार्ट-अप और स्वास्थ्य सेवाओं तक बड़े निर्णय

रायपुर। शौर्यपथ विशेष


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक में छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास को गति देने वाले अनेक दूरगामी और नीतिगत निर्णय लिए गए। इन फैसलों से जहां राज्य की अर्थव्यवस्था, शिक्षा और तकनीकी नवाचार को मजबूती मिलेगी, वहीं आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का सीधा लाभ प्राप्त होगा।

आबकारी नीति 2026-27 को मंजूरी

मंत्रिपरिषद ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की छत्तीसगढ़ आबकारी नीति के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान करते हुए उससे संबंधित समस्त अनुषांगिक कार्यवाहियों के लिए विभाग को अधिकृत किया। यह निर्णय राज्य के राजस्व प्रबंधन को सुदृढ़ करने और नीति में पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नवा रायपुर बनेगा शिक्षा का राष्ट्रीय केंद्र

कैबिनेट ने नवा रायपुर अटल नगर में राष्ट्रीय स्तर के उच्च कोटि के शैक्षणिक संस्थान की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। इसके तहत ख्यातिप्राप्त संस्था श्री विले पारले कलावनी मंडल (SVKM) को उनके नरसी मोंजी प्रबंधन अध्ययन संस्थान (NMIMS) की स्थापना हेतु सेक्टर-18 में लगभग 40 एकड़ भूमि 90 वर्षों की लीज पर आवंटित करने की स्वीकृति दी गई।

वर्ष 1934 से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत SVKM देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं में शामिल है, जिसके 30 से अधिक शैक्षणिक संस्थान संचालित हैं और एक लाख से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वर्ष 2025 की NIRF यूनिवर्सिटी रैंकिंग में 52वां स्थान प्राप्त करने वाली इस संस्था की नवा रायपुर में स्थापना से छत्तीसगढ़ में आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और वैश्विक स्तर की शिक्षा को नई मजबूती मिलेगी।

स्टार्ट-अप और आईटी सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्ट

राज्य को तकनीकी नवाचार का केंद्र बनाने की दिशा में मंत्रिपरिषद ने सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के साथ एमओयू कर नवा रायपुर में चार नवीन उद्यमिता केंद्रों की स्थापना का निर्णय लिया। इससे राज्य में आईटी/आईटीईएस उद्योग और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिलेगा।

इन केंद्रों के माध्यम से आगामी 3 से 5 वर्षों में 133 डोमेन-विशेष स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा दिया जाएगा। एआई, मेडटेक (हर्बल मेडिसिन एवं वन उत्पाद आधारित), स्मार्ट सिटी और स्मार्ट एग्री जैसे क्षेत्रों में युवाओं को अवसर मिलेंगे। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विकास (ESDD) केंद्र की स्थापना से हर वर्ष 30 से 40 हार्डवेयर स्टार्ट-अप और एमएसएमई को तकनीकी सहयोग प्रदान किया जाएगा।

स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता सुधार पर विशेष जोर

मंत्रिपरिषद ने राज्य के सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए बड़े निर्णय लिए। जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में लैब सेवाओं को सुदृढ़ और प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि निर्धारित मानकों के अनुसार जांचों की संख्या और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि हो।

सुशासन की दिशा में ठोस कदम

कैबिनेट के ये निर्णय स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास, सुशासन, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। नवा रायपुर को शिक्षा और स्टार्ट-अप का हब बनाने के साथ-साथ आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की यह पहल छत्तीसगढ़ के भविष्य को नई दिशा देने वाली साबित होगी।

दुर्ग। शौर्यपथ
छत्तीसगढ़ में सरकारी गोदामों से करोड़ों रुपये मूल्य के धान के कथित रूप से "मुसवा (चूहा)" द्वारा नष्ट किए जाने के भाजपा सरकार के दावे के खिलाफ दुर्ग में कांग्रेस ने ऐसा प्रतीकात्मक और राजनीतिक प्रतिकार किया, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान खींच लिया। किसानों की मेहनत पर पर्दा डालने और धान घोटाले की जिम्मेदारी चूहों पर डालने के आरोपों के बीच जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के नेतृत्व में मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को एक अनोखा "मुसवा प्रदर्शन" आयोजित किया गया।

राजीव भवन से कलेक्टर कार्यालय तक ढोल-नगाड़ों, नारों और प्रतीकात्मक झांकियों के साथ निकली यह रैली पूरी तरह राजनीतिक संदेश से भरी रही। प्रदर्शन का केंद्र बनी "चूहा झांकी", जिसमें चूहे के वेश में सजे कार्यकर्ता नाचते-गाते आगे बढ़े और हाथों में धान लेकर यह जताते रहे कि भाजपा सरकार अपनी नाकामी और भ्रष्टाचार को "चूहा खा गया" कहकर छुपाने की कोशिश कर रही है।

इस प्रदर्शन में दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल की भूमिका सबसे प्रमुख रही। उन्होंने कहा कि धान किसानों की मेहनत का प्रतीक है और उसे चूहों के खाते में डालना सरकार की असफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। "यदि सरकार का दावा है कि धान चूहे खा गए, तो आज कांग्रेस वही चूहे सरकार को सौंप रही है। अब जवाब सरकार दे," उन्होंने तीखे शब्दों में कहा। धीरज बाकलीवाल ने इसे केवल आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि किसानों के आत्मसम्मान पर सीधा हमला बताया।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने प्रतीकात्मक रूप से पिंजरे में बंद चूहे प्रशासन को सौंपे। इन चूहों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि असल जिम्मेदारी किसी जानवर की नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों की है। कलेक्टर कार्यालय परिसर में भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश और किसान आक्रोश साफ दिखाई दिया।

इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के अध्यक्ष ने कहा कि सरकार धान खरीदी की समय-सीमा नहीं बढ़ा रही है और टोकन व्यवस्था को सीमित रखकर किसानों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है और बड़ी मात्रा में धान खरीदी से बाहर रह जाने का खतरा है।

प्रदर्शन के बाद दुर्ग कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें करोड़ों के धान घोटाले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों व मंत्रियों पर कड़ी कार्रवाई, किसानों का शत-प्रतिशत धान खरीदी सुनिश्चित करने, टोकन सीमा बढ़ाने और खरीदी की समय-सीमा में विस्तार की मांग प्रमुख रूप से रखी गई।

कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी कि यदि भाजपा सरकार ने किसानों के हित में तुरंत निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेशव्यापी और उग्र रूप लेगा। दुर्ग में निकली यह "मुसवा बारात" अब भाजपा सरकार की कथित विफलता, भ्रष्टाचार और किसान-विरोधी नीतियों के खिलाफ एक मजबूत राजनीतिक प्रतीक बनकर सामने आ गई है।

विधायक ललित चंद्राकर एवं महापौर श्रीमती अलका बाघमार ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

दुर्ग / शौर्यपथ / श्री रामलला दर्शन (अयोध्या धाम) योजनाÓ के तहत आज दुर्ग जिले से रामभक्तों का एक बड़ा जत्था स्पेशल ट्रेन से अयोध्या के लिए रवाना हुआ। जय श्री राम नारों से गूंजता दुर्ग रेलवे स्टेशन से 182 श्रद्धालुओं को ट्रेन के माध्यम से रवाना किया गया।
दुर्ग रेलवे स्टेशन से श्रद्धालुओं से भरी स्पेशल ट्रेन को छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व विधायक श्री ललित चंद्राकर, महापौर श्रीमती अलका बाघमार ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम के दौरान स्टेशन परिसर में श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक था। यात्रा से पहले सभी यात्रियों को भोजन, पेयजल, चिकित्सकीय सुविधा एवं आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गईं। प्रशासन द्वारा पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा और सुविधा की विशेष व्यवस्था की गई है। इस अवसर पर गणमान्य नागरिक एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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