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March 24, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

नई दिल्ली ।
पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रमों और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े हालात को देखते हुए भारत सरकार ने ईंधन आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की उपलब्धता पर्याप्त है तथा नागरिकों को घबराकर खरीदारी न करने की सलाह दी गई है।

ईंधन आपूर्ति सामान्य, रिफाइनरियां पूरी क्षमता से चालू

सरकार के अनुसार सभी तेल शोधन कारखाने पूरी क्षमता से कार्य कर रहे हैं और कच्चे तेल के पर्याप्त भंडार उपलब्ध हैं। देशभर में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है तथा एलपीजी का उत्पादन भी बढ़ाया गया है। तेल विपणन कंपनियों ने किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन की कमी की सूचना नहीं दी है।

पीएनजी को बढ़ावा, एलपीजी पर दबाव कम करने की तैयारी

सरकार ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे होटल, रेस्तरां और कैंटीन जैसे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को पीएनजी कनेक्शन प्राथमिकता से दें। प्रमुख शहरों में वाणिज्यिक एलपीजी उपभोक्ताओं को एलपीजी के स्थान पर पीएनजी अपनाने का परामर्श दिया गया है।

राज्यों और मंत्रालयों को सीजीडी नेटवर्क के विस्तार और अनुमोदन प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सभी सरकारी कार्यालयों और कैंटीनों को भी जहां संभव हो पीएनजी का उपयोग शुरू करने की सलाह दी गई है।

वाणिज्यिक एलपीजी का अतिरिक्त आवंटन

सरकार ने राज्यों को 20 प्रतिशत अतिरिक्त वाणिज्यिक एलपीजी स्वीकृत की है, जिससे कुल आवंटन अब 50 प्रतिशत हो गया है। यह अतिरिक्त गैस मुख्य रूप से—

  • रेस्तरां, होटल और ढाबों
  • औद्योगिक एवं सामुदायिक कैंटीन
  • डेयरी एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों
  • प्रवासी श्रमिकों के लिए 5 किलो एफटीएल सिलेंडर
  • रियायती कैंटीन और सामुदायिक रसोई

जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर दी जाएगी।

जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती

सरकार ने एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए कई राज्यों में बड़े पैमाने पर छापेमारी शुरू की है। अब तक 3,500 से अधिक छापे मारे जा चुके हैं और लगभग 1,400 सिलेंडर जब्त किए गए हैं।

इसके अलावा देशभर में 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियंत्रण कक्ष और जिला स्तरीय निगरानी समितियां स्थापित की गई हैं।

समुद्री संचालन सामान्य, बंदरगाहों पर कोई भीड़ नहीं

सरकार ने बताया कि भारत का समुद्री क्षेत्र सामान्य रूप से कार्य कर रहा है और किसी भी बंदरगाह पर भीड़भाड़ की सूचना नहीं है। पश्चिमी फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले 22 जहाज और 611 भारतीय नाविक मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है।

अब तक 534 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जा चुका है।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

विदेश मंत्रालय ने बताया कि पश्चिम एशिया में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। क्षेत्र में भारतीय दूतावास 24×7 हेल्पलाइन और सहायता सेवाएं संचालित कर रहे हैं।

इस बीच, नरेन्द्र मोदी ने मसूद पेज़ेशकियान तथा हामद बिन ईसा अल खलीफा से बातचीत कर क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर दिया।

एक सकारात्मक घटनाक्रम में एमटी सेफसी विष्णु जहाज के 15 भारतीय चालक दल सदस्य इराक से सुरक्षित स्वदेश लौट आए हैं।

नागरिकों के लिए सलाह

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि—

  • घबराकर एलपीजी या ईंधन की बुकिंग न करें
  • केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें
  • वैकल्पिक ईंधन जैसे पीएनजी या इंडक्शन कुकटॉप अपनाएं
  • ऊर्जा संरक्षण के उपायों को अपनाएं

निष्कर्ष:
पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति के बावजूद भारत सरकार ने ईंधन आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक और बहु-स्तरीय व्यवस्था की है। सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे। ⚡?

नई दिल्ली ।
भारत सरकार के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन प्रकृति 2026 का शुभारंभ नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किया। इस अवसर पर भारतीय कार्बन बाजार पोर्टल का भी शुभारंभ किया गया, जो देश में कार्बन बाजार के संचालन और प्रशासन के लिए केंद्रीय डिजिटल मंच के रूप में कार्य करेगा।

यह सम्मेलन ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा विद्युत मंत्रालय तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के संरक्षण में आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 के अंतर्गत हो रहा है, जिसमें देश-विदेश के विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।

भारतीय कार्बन बाजार को मिला डिजिटल मंच

कार्यक्रम के दौरान लॉन्च किया गया भारतीय कार्बन बाजार पोर्टल देश के कार्बन क्रेडिट तंत्र को पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि जलवायु उत्तरदायित्व और आर्थिक विकास साथ-साथ चल सकते हैं

उन्होंने बताया कि भारत में कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) के तहत अब तक 9 अधिसूचित पद्धतियां तैयार की जा चुकी हैं और बायोगैस, हाइड्रोजन तथा वानिकी क्षेत्रों में 40 से अधिक संस्थाएं पंजीकृत हैं। साथ ही 7 ऊर्जा-गहन क्षेत्रों की लगभग 490 संस्थाओं के लिए उत्सर्जन लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

‘तीन C’ से मजबूत होंगे कार्बन बाजार

कार्यक्रम में केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने कार्बन बाजारों को मजबूत बनाने के लिए तीन प्रमुख स्तंभ—विश्वसनीयता, पूंजी और सहयोग—पर जोर दिया।

  • विश्वसनीयता: डिजिटल एमआरवी (Monitoring, Reporting, Verification) के माध्यम से उत्सर्जन की सटीक निगरानी
  • पूंजी: नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन में बड़े निवेश
  • सहयोग: पेरिस समझौता के अनुच्छेद-6 के तहत अंतरराष्ट्रीय साझेदारी

उन्होंने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में तेजी से वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है।

किसानों और उद्योगों को मिलेगा लाभ

दो दिवसीय इस सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी, जिनमें—

  • डिजिटल एमआरवी प्रौद्योगिकियां
  • कार्बन सीमा नीतियां
  • भवन एवं शीतलन प्रणालियों का कार्बन बाजार में एकीकरण
  • किसानों और एमएसएमई को कार्बन वित्त से जोड़ना
  • स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के लिए वित्तपोषण

विशेषज्ञों का मानना है कि कार्बन बाजार न केवल उत्सर्जन कम करने में मदद करेंगे, बल्कि नवाचार, निवेश और उद्यमिता के नए अवसर भी पैदा करेंगे।

जलवायु नेतृत्व की ओर बढ़ता भारत

प्रकृति-2026 सम्मेलन भारत के हरित विकास और जलवायु प्रतिबद्धताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पारदर्शी और विश्वसनीय कार्बन बाजार ढांचा तैयार कर भारत न केवल अपने घरेलू हरित परिवर्तन को गति दे रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर सतत विकास की दिशा में भी अग्रणी भूमिका निभाने की ओर बढ़ रहा है। ??

निष्कर्ष:
‘प्रकृति-2026’ और भारतीय कार्बन बाजार पोर्टल का शुभारंभ भारत के जलवायु लक्ष्यों को गति देने, उद्योगों को हरित दिशा में प्रेरित करने तथा किसानों और उद्यमियों के लिए नए आर्थिक अवसर सृजित करने की दिशा में एक निर्णायक पहल साबित हो रही है।

मुंबई ।
भारत के उभरते तकनीकी नवाचारों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत इनोवेट्स डीप-टेक प्री-समिट का उद्घाटन मुंबई स्थित आईआईटी बॉम्बे परिसर के एस्पायर–आईआईटी बॉम्बे रिसर्च पार्क फाउंडेशन में किया गया। यह दो दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन देश के सर्वश्रेष्ठ डीप-टेक स्टार्टअप्स को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की तैयारी का अहम चरण माना जा रहा है।

कार्यक्रम का उद्घाटन भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने किया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर, आईआईटी बॉम्बे बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन तथा आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

3,000 आवेदनों में से 137 स्टार्टअप्स का चयन

देशभर से प्राप्त 3,000 से अधिक स्टार्टअप आवेदनों में से बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद 13 प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों में 137 उत्कृष्ट डीप-टेक स्टार्टअप्स का चयन किया गया है। इनमें एडवांस्ड कंप्यूटिंग, हेल्थकेयर एवं मेडटेक, स्पेस एवं डिफेंस, सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी, स्मार्ट सिटीज, एग्री-फूड टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, आपदा प्रबंधन और इंडस्ट्री 4.0 जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

उद्घाटन के बाद 70 से अधिक स्टार्टअप्स ने पिच सत्रों में अपने नवाचार प्रस्तुत किए, वहीं निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने रिवर्स पिच के माध्यम से तकनीकी आवश्यकताओं और निवेश प्राथमिकताओं पर चर्चा की।

भारत का बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम

अपने संबोधन में प्रो. अभय करंदीकर ने बताया कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है, जहां लगभग 2 लाख स्टार्टअप और करीब 125 यूनिकॉर्न कंपनियां सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि डीप-टेक क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 में 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) कोष को मंजूरी दी है, जिससे निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स को दीर्घकालिक वित्तीय सहयोग मिलेगा।

वैश्विक मंच पर भारत की तैयारी

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने कहा कि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में तकनीकी नेतृत्व स्थापित करने के लिए डीप-टेक नवाचार अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों, शोध संगठनों और स्टार्टअप्स की भूमिका को देश के भविष्य के लिए निर्णायक बताया।

उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी ने कहा कि भारत इनोवेट्स 2026 एक “पूरे सरकार का प्रयास” है, जो शिक्षा, विज्ञान, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों को एक साझा मंच पर लाता है। उन्होंने निवेशकों से महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों के स्टार्टअप्स को भी पहचानने का आह्वान किया।

फ्रांस में होगा वैश्विक समापन

यह प्री-समिट भारत इनोवेट्स 2026 अभियान का प्रारंभिक चरण है, जिसका भव्य समापन जून 2026 में फ्रांस के नीस शहर में आयोजित वैश्विक नवाचार प्रस्तुतीकरण के साथ होगा। यह आयोजन भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का हिस्सा है।

22 मार्च को ग्रैंड फिनाले

कार्यक्रम का दूसरा दिन 22 मार्च 2026 को आयोजित होगा, जिसमें अतिरिक्त स्टार्टअप पिच सत्र, नीति चर्चा, निवेशक सहभागिता तथा ग्रैंड फिनाले और पुरस्कार समारोह आयोजित किए जाएंगे। इसमें सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप प्रस्तुतियों को सम्मानित किया जाएगा।

निष्कर्ष:
‘भारत इनोवेट्स डीप-टेक प्री-समिट’ भारत के नवाचार इकोसिस्टम को नई गति देने के साथ देश के स्टार्टअप्स को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। यह आयोजन भारत को तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने वाला एक सशक्त कदम माना जा रहा है।

'कैद में देखभाल: चिड़ियाघरों की सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रदर्शित करने वाला एक संकलन' शीर्षक से एक प्रकाशन भी जारी किया गया
नई दिल्ली / शौर्यपथ /
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में आयोजित केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की 45 वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के दौरान चिड़ियाघरों के प्रभावी प्रबंधन मूल्यांकन के दूसरे चरण के प्रगति की समीक्षा की गई।

बैठक में निम्नलिखित निर्णय लिए गए, जिनका विवरण नीचे दिया गया है:
' मेरा चिड़ियाघर ' की अवधारणा पर एक समिति का गठन किया जाए ताकि विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख व्यक्तियों को चिड़ियाघरों से जोड़ा जा सके।
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की आगामी बैठकों में चिड़ियाघरों द्वारा प्रति बैठक 2 से 3 प्रजातियों के संरक्षण प्रजनन पर हुई प्रगति को प्रस्तुत किया जाएगा।
मानव-तेंदुआ नकारात्मक अंतःक्रियाओं में शामिल तेंदुओं को उन चिड़ियाघरों में स्थानांतरित करने के संबंध में अद्यतन जानकारी दी जानी चाहिए , जिन चिड़ियाघरों ने उनके दीर्घकालिक देखभाल के लिए दूर क्षेत्रों में सुविधाओं की उपलब्धता की सूचना दी हो और जो उचित आवास, रखरखाव और स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करती हों।
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय चिड़ियाघर के आधुनिकीकरण की अवधारणा को अन्य चिड़ियाघरों के लाभ के लिए साझा किया जा सकता है।
चिड़ियाघर के पशु चिकित्सकों के लिए बंदी पशुओं के पोषण पर एक क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया जाए।
आगामी बैठकों में नीतिगत मामलों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की अगली बैठक में चिड़ियाघर निदेशक द्वारा एक प्रस्तुति को शामिल किया जाए।
बैठक के दौरान 'कैद में देखभाल: चिड़ियाघरों की सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रदर्शित करने वाला संकलन' शीर्षक से एक प्रकाशन जारी किया गया। यह संकलन पशु कल्याण, संरक्षण प्रजनन, अनुसंधान और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए चिड़ियाघर प्रबंधन के प्रति भारत के विकसित होते दृष्टिकोण को उजागर करता है।

नई दिल्ली / शौर्यपथ /
भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज हाल ही में मुंबई में आयोजित ऐतिहासिक जैन दीक्षा समारोह के आयोजकों, दानदाताओं और इससे जुड़े परिवारों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि दीक्षा समारोह में प्रतिबिंबित त्याग और सेवा भाव पूरे समाज के लिए प्रेरणा स्रोत है।

लोक भवन में सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि जैन धर्म हमेशा से ही समाज सेवा और अहिंसा, अपरिग्रह और सहिष्णुता के मूल्यों का प्रतीक रहा है, जो आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि जहां अधिकांश लोग सांसारिक जिम्मेदारियों में लिप्त रहते हैं, वहीं दीक्षा लेने वालों द्वारा किया गया त्याग समाज को चिंतन करने, जीवन को सरल बनाने और सचेत जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत जैन धर्म सहित कई धर्मों की जन्मभूमि है। यूटी तमिलनाडु और जैन धर्म के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंध को रेखांकित किया। उपराष्ट्रपति ने संगम और उत्तर-संगम काल के दौरान तमिल साहित्य और संस्कृति में जैन विद्वानों और भिक्षुओं के महत्वपूर्ण योगदान को याद किया और सिलप्पथिकारम जैसी शास्त्रीय रचनाओं और जैन धर्म के दार्शनिक और नैतिक आदर्शों को प्रतिबिंबित करने वाली अन्य साहित्यिक कृतियों का उल्लेख किया।

जैन दर्शन की सार्वभौमिक प्रासंगिकता पर जोर देते हुए, उपाध्यक्ष ने कहा कि अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद के सिद्धांत संघर्ष, पर्यावरण क्षरण और सामाजिक विभाजन सहित कई समकालीन वैश्विक चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि सादा जीवन जीना, सोच-समझकर उपभोग करना और करुणा का अभ्यास करना न केवल आध्यात्मिक ज्ञान है, बल्कि एक सतत और सामंजस्यपूर्ण भविष्य के लिए मार्गदर्शक भी है।

उपाध्यक्ष ने कहा कि यद्यपि हर कोई संसार का त्याग नहीं कर सकता, लेकिन हर कोई दयालुता, नैतिक जीवन और सभी जीवित प्राणियों के प्रति सम्मान के माध्यम से इन मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में अपना सकता है। उन्होंने आगे कहा कि अपने परिवार के सदस्यों को ऐसे महान आध्यात्मिक मार्ग पर समर्पित करना महान आस्था और शक्ति का कार्य है, और ऐसे कार्य समाज की नैतिक और आध्यात्मिक शक्ति में योगदान करते हैं।

उपाध्यक्ष ने भव्य दीक्षा समारोह के आयोजकों, दानदाताओं और इससे जुड़े परिवारों को बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि समाज के उत्थान के लिए उनके प्रयास आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेंगे।

उपराष्ट्रपति ने गैलरी का भी दौरा किया और जैन पूजा सामग्री, जिसे अष्ट द्रव्य के नाम से जाना जाता है, जैन पवित्र ग्रंथों, जिन्हें सामूहिक रूप से आगम या आगम सूत्र के रूप में जाना जाता है, भगवान महावीर की शिक्षाओं और भगवान महावीर के पवित्र आभूषणों वाले मूलभूत ग्रंथों के प्रदर्शन को देखा।

इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस, महाराष्ट्र सरकार में कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार मंत्री श्री मंगल प्रभात लोढ़ा, न्यासी, दानदाता, जैन समुदाय के सदस्य और अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।

दुर्ग।

दुर्ग नगर निगम की अतिक्रमण कार्रवाई अब गंभीर विवादों के घेरे में है। आरोप है कि शहरी सरकार की कार्रवाई निष्पक्ष होने के बजाय “चुनिंदा टारगेट” पर केंद्रित होती जा रही है। ताजा मामला पुलगांव चौक क्षेत्र का है, जहां एक गन्ना रस की छोटी दुकान चलाने वाले परिवार ने निगम की लगातार कार्रवाई से परेशान होकर सामूहिक आत्महत्या तक की चेतावनी दे डाली है।

परिवार के मुखिया का कहना है कि क्षेत्र में दर्जनों अतिक्रमण मौजूद हैं, लेकिन बार-बार केवल उनकी ही दुकान को निशाना बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि निगम का अमला उन्हें लगातार हटाने, तोड़ने और दबाव बनाने की कार्रवाई कर रहा है, जिससे उनका जीवनयापन संकट में आ गया है। परिवार की इस चेतावनी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

चुनिंदा कार्रवाई पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के बीच भी यह चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई समान रूप से क्यों नहीं हो रही। कुआं चौक और पुलगांव चौक जैसे व्यस्त इलाकों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण होने के बावजूद कार्रवाई सीमित नजर आती है, जबकि छोटे दुकानदारों पर सख्ती दिखाई जा रही है।

आरोप यह भी है कि पुलगांव चौक के पास कपड़ा मार्केट क्षेत्र में कई दुकानों के बीच सिर्फ एक दुकान पर बार-बार बुलडोजर चलाना “भेदभावपूर्ण नीति” को दर्शाता है।

बड़े अतिक्रमण पर ‘मौन’ क्यों?

शहर में कई बड़े और स्थायी अतिक्रमणों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चतुर्भुज राठी से जुड़े कथित निर्माण, ओम ज्वैलर्स द्वारा सड़क तक फैले कब्जे, समृद्धि बाजार के सामने बने स्थायी ढांचे और चर्च मार्ग पर लगने वाले साप्ताहिक बाजार जैसे मामलों में कार्रवाई नहीं होने को लेकर महापौर अलका बाघमार की कार्यशैली पर विपक्ष ही नहीं, सत्ता पक्ष के पार्षद भी सवाल उठा चुके हैं।

हाल ही में हुई सामान्य सभा की बैठक में भी सत्ता पक्ष के पार्षदों ने खुलकर निगम प्रशासन और महापौर पर भेदभाव के आरोप लगाए थे, जिससे यह मामला और ज्यादा राजनीतिक रंग ले चुका है।

सत्ता पक्ष में भी असंतोष

नगर निगम की सामान्य सभा में जिस तरह सत्ता पक्ष के पार्षदों ने ही अपनी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, उससे साफ है कि असंतोष अब अंदरूनी स्तर पर भी गहराता जा रहा है। सभापति द्वारा भी इस स्थिति पर चिंता जताई गई थी, जो इस पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को दर्शाता है।

“सुशासन” पर सवाल

प्रदेश में “सुशासन” की बात करने वाली सरकार के बीच दुर्ग की शहरी सरकार की कार्यशैली अब सवालों के घेरे में है। आरोप है कि निगम की मनमानी न केवल आम जनता को प्रभावित कर रही है, बल्कि इससे प्रदेश सरकार की छवि पर भी असर पड़ रहा है।

जनता की नजर अब मंत्री पर

मामले को लेकर अब लोगों की उम्मीदें क्षेत्रीय विधायक एवं मंत्री गजेंद्र यादव पर टिक गई हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष और समान कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए, तो ऐसे मामले और बढ़ सकते हैं।

स्पष्ट संदेश की जरूरत

इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमों के तहत सभी पर समान रूप से लागू होगी, या फिर “चुनिंदा कार्रवाई” का आरोप यूं ही गूंजता रहेगा?

(नोट: शौर्यपथ समाचार किसी भी अतिक्रमण का समर्थन नहीं करता, बल्कि निष्पक्ष और समान कार्रवाई की पक्षधरता करता है।)

दुर्ग / शौर्यपथ विशेष /

दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा में 17 मार्च को जो घटनाक्रम सामने आया, उसने शहर की राजनीति में हलचल मचा दी है। आमतौर पर विपक्ष द्वारा सत्ता पक्ष को घेरने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार भारतीय जनता पार्टी के ही पार्षद अपनी ही शहरी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते नजर आए। खासकर अतिक्रमण और अवैध निर्माण के मामलों में दोहरी नीति के आरोपों ने माहौल को और अधिक गर्म कर दिया।
सभा के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठा कि शहर में छोटे दुकानदारों, ठेला-गुमटी वालों पर कार्रवाई की बात तो जोर-शोर से की जाती है, लेकिन कथित रूप से चतुर्भुज राठी के संरक्षण में संचालित "राम रसोई" पर निगम प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

// बस स्टैंड की बेशकीमती जमीन पर 'राम रसोईÓ का संचालन, अनुबंध खत्म फिर भी जारी//
जानकारी के अनुसार, बस स्टैंड स्थित कीमती निगम भूमि पर संचालित राम रसोई का अनुबंध समाप्त हो चुका है। आरोप है कि अनुबंध अवधि के दौरान भी शर्तों का पालन नहीं किया गया, इसके बावजूद न तो जांच हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई। सबसे गंभीर आरोप यह है कि अनुबंध समाप्त होने के बाद भी निर्माण और संचालन जारी है, जो सीधे-सीधे नियमों की अनदेखी को दर्शाता है।

अवैध निर्माण पर विभागों की 'पासिंग द बकÓ
// इस मामले में निगम के अलग-अलग विभागों का रवैया भी सवालों के घेरे में है।
//अतिक्रमण शाखा का कहना है कि उन्हें बाजार विभाग से आदेश नहीं मिला
//बाजार विभाग भवन शाखा पर जिम्मेदारी डाल रहा है
//भवन शाखा का तर्क है कि आवंटन के समय उनसे राय ही नहीं ली गई
इस तरह जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालकर कार्रवाई से बचने की कोशिश साफ नजर आती है।

शहरभर में अतिक्रमण, कार्रवाई सिर्फ 'कमजोरोंÓ पर?
चर्च रोड, समृद्धि बाजार, जेल चौक, मालवीय नगर, पटेल चौक और कुआं चौक जैसे प्रमुख इलाकों में तेजी से बढ़ते अतिक्रमण पर भी निगम की निष्क्रियता उजागर हुई।
आरोप है कि जहां छोटे व्यापारियों पर सख्ती दिखाई जाती है, वहीं प्रभावशाली लोगों के मामलों में प्रशासन मौन साध लेता है।

// सामान्य सभा में भाजपा पार्षदों का विरोध, सभापति ने दिए संकेत//
सामान्य सभा के दौरान भाजपा पार्षदों ने खुलकर शहरी सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि सभापति श्याम शर्मा को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा।उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि अवैध कार्यों पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है, ताकि सरकार और पार्टी की छवि पर आंच न आए।

ट्रिपल इंजन सरकार पर उठे सवाल
सभा में यह भी चर्चा रही कि "ट्रिपल इंजन सरकार" का दावा जमीनी स्तर पर कमजोर पड़ता दिख रहा है। जहां एक ओर राज्य और केंद्र की योजनाओं को गति मिल रही है, वहीं नगर निगम की कार्यप्रणाली विकास में बाधा बनती नजर आ रही है।

// महापौर की चुप्पी पर बढ़ते सवाल //
पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल महापौर अलका बाघमार की भूमिका को लेकर उठ रहा है।
अतिक्रमण हटाने के बड़े-बड़े दावे करने वाली महापौर पर आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के मामलों में वे मौन हैं।
विशेष रूप से चतुर्भुज राठी से जुड़े मामले में कार्रवाई का अभाव भेदभाव की नीति और मिलीभगत जैसे गंभीर आरोपों को जन्म दे रहा है।

शहर की जनता और राजनीतिक गलियारों में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या निगम प्रशासन राम रसोई और अन्य अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करेगा?
क्या नियमों का पालन सभी पर समान रूप से लागू होगा?
या फिर यह मामला भी राजनीतिक संरक्षण की भेंट चढ़ जाएगा?
फिलहाल, 17 मार्च की सामान्य सभा ने यह साफ कर दिया है कि दुर्ग की "शहरी सरकार" अब विपक्ष नहीं, बल्कि अपने ही घर के सवालों से घिरी हुई है।

निजी हॉस्पिटल में सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान तीन मजदूरों की मौत पर गहरी संवेदना: पीड़ित वर्ग को हर संभव सहायता दी जाए - मुख्यमंत्री साय
केवल नगर निगम अथवा पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही कराया जाए सीवरेज सफाई का कार्य
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य में जबरन दबावपूर्वक मैनुअल स्केवेंजर्स का कार्य करवाने वाले व्यक्तियों पर कड़ाई से कार्यवाही की जाए। उन्होंने सीवरेज सफाई के संबध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए। इसके अतर्गत केवल नगर निगम के माध्यम से अथवा पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही सीवरेज सफाई का कार्य करवाया जाए। साथ ही सफाई के दौरान सुरक्षा मापदंडों का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए, जिससे कोई भी अप्रिय घटना ना होने पाए।
मुख्यमंत्री साय ने कल राज्य के एक निजी बड़े हॉस्पिटल में सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान तीन मजदूरों की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पीड़ित वर्ग को हर संभव सहायता दी जाए साथ ही घटना के जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अप्रिय घटना ना होने पाए।
मुख्यमंत्री साय ने आज अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध तथा उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में राज्य अनुश्रवण समिति की छत्तीसगढ विधानसभा स्थित सभाकक्ष में आयोजित बैठक की अध्यक्षता के दौरान ये निर्देश दिए।
इस मौके पर आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि जबरन हाथ से मैला उठाने का कार्य करवाने वाले व्यक्तियों पर ऐक्ट में दंड का भी प्रावधान है, जिसमें एक वर्ष का कारावास अथवा पचास हजार तक जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि नगरीय क्षेत्रों में जागरूकता लाने हेतु उचित प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति के पुनर्गठन के बाद यह पहली बैठक है। प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के परिपालन में गाईडलाइन अनुसार प्रदेश के समस्त जिलों में मैनुअल स्केवेंजर्स रिसर्वे करवाया गया है जिसमें सभी जिला कलेक्टर द्वारा मैनुअल स्केवेंजर्स मुक्त का प्रमाण पत्र दिया गया है जो कि प्रदेश के लिए बहुत ही सम्मान एवं गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि हाथ से मैला उठाने की प्रथा मानवीय मूल्यों एवं संविधान द्वारा स्थापित उच्च आदर्शों के विपरीत है। समाज में हर व्यक्ति को पूरे सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। उन्होंने मैन्युअल स्कैवेंजर्स प्रथा के उन्मूलन की दिशा में सराहनीय प्रयास हेतु पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा अन्य सहयोगी विभागों / संस्थानों के समन्वित प्रयास की भी सराहना की।
बैठक में वर्ष 2018 में आयोजित पूर्व बैठक का कार्यवाही विवरण प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 20 अक्टूबर 2023 के आदेश के अनुसरण में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से प्राप्त मैनुअल स्कैवेजर्स के पुनसर्वेक्षण रिपोर्ट पर राज्य स्तरीय सर्वेक्षण समिति द्वारा चर्चा की गई एवं अनुमोदन किया गया।
बैठक में केबिनेट मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, विधायक पुन्नूलाल मोहले, डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, मुख्य सचिव विकासशील, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव एस. बसवराजू सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

  रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को चैत्र नवरात्रि, हिंदू नववर्ष (नव संवत्सर) एवं गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी है। उन्होंने इस मंगल अवसर पर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और शांति की कामना की है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चैत्र मास के प्रथम दिन से प्रारंभ होने वाला हिंदू नववर्ष नव ऊर्जा, नव संकल्प और नव चेतना का प्रतीक है। इसी पावन अवसर से शक्ति उपासना के महापर्व चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होता है, जो श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक आस्था के साथ पूरे देश में मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि गुड़ी पड़वा विशेष रूप से महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों में नववर्ष के स्वागत का उत्सव है, जो आशा, उत्साह और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है। यह पर्व समाज में सकारात्मक ऊर्जा, नव शुरुआत और उत्सवधर्मिता का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध देवी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि मां शीतला, मां दंतेश्वरी, महामाया, बम्लेश्वरी, कंकाली, बिलईमाता और चंद्रहासिनी देवी जैसे विविध स्वरूपों में प्रदेश की आस्था और संस्कृति गहराई से रची-बसी है। यह आध्यात्मिक विरासत प्रदेश की पहचान को सशक्त बनाती है।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि के इन पावन दिनों में छत्तीसगढ़ की धरती भक्ति, साधना और शक्ति आराधना से आलोकित हो उठती है। देवी उपासना केवल आध्यात्मिक ऊर्जा ही नहीं देती, बल्कि सामाजिक समरसता, सकारात्मक सोच और आंतरिक चेतना का भी संचार करती है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन सरकार प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए विकास और विश्वास के नए आयाम स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने मां भगवती से प्रार्थना करते हुए कहा कि उनकी कृपा से छत्तीसगढ़ निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर रहे और प्रदेश के प्रत्येक परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास बना रहे।

  नई दिल्ली / एजेंसी / राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने चैत्र शुक्लादि, उगादी, गुड़ी पाड़वा, चेटी चांद, नवरेह और सादिबुचेरोबा के शुभ अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा, “चैत्र शुक्लादि, उगादी, गुडी पड़वा, चेती चांद, नवरेह और सादिबुचेरोबा के शुभ अवसर पर, मैं देश-विदेश में रहने वाले सभी देशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं देती हूं।
नव वर्ष के आगमन पर मनाए जाने वाले ये पर्व भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और प्रकृति के साथ हमारे गहरे संबंध के प्रतीक हैं। उत्सव नई आशाओं, नए संकल्प और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। हमारी संस्कृत के वाहक ये पर्व मिलकर खुशियां बांटने की हमारी गौरवशाली परंपरा को भी दर्शाते हैं।
मैं कामना करती हूं कि ये सभी त्यौहार भारत के विभिन्न समुदायों को प्रेम, सौहार्द और स्नेह के बंधन में बांधें और सभी के लिए खुशहाली तथा सुख-समृद्धि लेकर आएं।”

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