August 08, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    खेल /शौर्यपथ / भारत और ऑस्ट्रेलिया के चार टेस्ट मैचों की बॉर्डर-गावस्कर सीरीज सीरीज शुरू होने में अब ज्यादा समय बाकी नहीं रह गया है। दोनों टीमों के बीच 17 दिसंबर से सीरीज का पहला मैच एडिलेड में खेला जाएगा। यह एक डे-नाइट टेस्ट मैच होगा। भारत को डे-नाइट टेस्ट मैच खेलने का ज्यादा अनुभव नहीं है और उसने अब तक केवल एक ही मैच खेला है। टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले दोनों ही टीमें चोट की समस्या से गुजर रही हैं। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से सलामी बल्लेबाज डेविड वॉर्नर और विल पुकोवस्की एडिलेड टेस्ट से बाहर हो चुके है, वहीं भारत की तरफ से रोहित शर्मा शुरुआत दो टेस्ट और टेस्ट स्पेशलिस्ट तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा पूरी सीरीज से बाहर हो चुके हैं। इस बीच, टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने उस गेंदबाज का नाम लिया है जो टेस्ट सीरीज में ईशांत शर्मा को रिप्लेस कर सकता है।
    भारतीय टीम के लिए मुश्किल हो चुके इस मुद्दे पर 'सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क' से बात करते हुए मोहम्मद कैफ़ ने कहा है कि, ''मेरे लिए तीसरे पेसर के तौर पर सबसे अच्छा ऑप्शन उमेश यादव होंगे। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि पिछली सीरीज़ जीत में अहम भूमिका निभाने वाले ईशांत शर्मा इस सीरीज़ में टीम के साथ नहीं है। अन्य तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह के साथ उमेश का तालमेल भी काफी बेहतरीन है। इन तीन तेज गेंदबाजों के साथ ऑफ स्पिनर आर अश्विन और पार्ट टाइम स्पिनर हनुमा विहारी भारतीय टीम की बॉलिंग को मजबूती दे सकते हैं।
    उन्होंने कहा कि बेशक नवदीप सैनी और मोहम्मद सिराज ने आईपीएल 2020 में अपनी स्पीड से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा हो, लेकिन हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि दोनों ही गेंदबाज टेस्ट क्रिकेट खेलने के मामले में बिल्कुल भी अनुभवी नहीं हैं। यहां उमेश यादव की बात करते हुए दिल्ली कैपिटल्स के फील्डिंग कोच कैफ ने कहा कि उन्हें टेस्ट खेलने का अच्छा अनुभव भी है, इसलिए पहले मैच में जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी के साथ उमेश यादव को प्लेइंग इलेवन में जगह मिलनी चाहिए। उमेश के टेस्ट करियर की बात करें तो उन्होंने अब तक 46 टेस्ट में 144 विकेट झटके हैं।

    मनोरंजन /शौर्यपथ / तमिलनाडु पुलिस ने अभिनेत्री वी जे चित्रा की कथित आत्महत्या के मामले में उनके पति को गिरफ्तार कर लिया है। उनके पति को सुसाइड के लिए सुसाइड के लिए मजबूर करने के आरोप में गिरफ्तार किया। चित्रा 9 दिसंबर को चेन्नई के बाहरी इलाके के एक होटल में मृत पाई गई थीं. महज 28 साल की उम्र में अभिनेत्री ने अपनी जान देदी।
    चित्रा और हेमंत की सगाई अगस्त में हुई थी और दोनों ने अक्टूबर में एक रजिस्ट्रार शादी की थी। उनकी औपचारिक शादी फरवरी 2021 के लिए निर्धारित थी। पुलिस पिछले 6 दिनों से हेमंत के साथ पूछताछ कर रही थी, रिपोर्ट्स का कहना है कि दोनों का आपस में कुछ मतभेद चल रहा था।
    तमिल सीरियल में मुल्लई का रोल प्ले करने वालीं चित्रा मंगलवार की शाम को भी शूटिंग कर रही थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक रात को ढाई बजे वह शूटिंग से लौटी थीं और फिर एक घंटे के भीतर ही उन्होंने फंदे से लटककर जान दे दी। चित्रा के पति हेमंत ने उनकी आत्महत्या के बारे में चेन्नै के नाजेथपेट्टाई पुलिस थाने में अपना बयान दर्ज कराया है।
    होटल में चित्रा के साथ ही ठहरे उनके पति हेमंत ने कहा कि शूटिंग से लौटने के तुरंत बाद ही वह नहाने के लिए चली गई थीं। काफी देर तक जब वह नहीं लौटीं तो फिर मैंने दरवाजा खटखटाया और जब अंदर से कोई जवाब नहीं मिला तो होटल के स्टाफ को बुलाया। डुप्लिकेट चाबी से गेट खोला गया और अंदर देखा तो चित्रा मृत थीं। पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है।

    खाना खजाना /शौर्यपथ /सामग्री-मैदा 1 प्याला, क्रीम 2 बड़े चम्मच, चीनी (पिसी हुई) 2 प्याले, नमक 1/2 चम्मच, बेकिंग सोड़ा 1 छोटा चम्मच, ऑरेंज एसेंस 1 बड़ा चम्मच, मक्खन 1 बड़ा चम्मच, दही 1 प्याला, कोको पावडर 1 प्याला।
    आइसिंग के लिए सामग्री-
    मक्खन 3 बड़े चम्मच, कोको पावडर 1/4 प्याला, कंडेंस्ड मिल्क 3 बड़े चम्मच, आइसिंग शक्कर 1 प्याला।
    विधि-
    सर्वप्रथम मैदा, कोको पावडर, नमक व बेकिंग सोड़े को एक साथ छान लें। एक कटोरे में दही, मक्खन, एसेंस लेकर फेंटें। क्रीम में धीरे-धीरे पिसी चीनी मिलाएं।
    दही का मिश्रण मिलाकर बुलबुले उठने तक फेंटें। अब मैदे का मिश्रण मिलाकर फेंटें। केक पैन को घी लगाकर चिकना करें, उस पर थोड़ा-सा मैदा बुरकें। घोल को पैन में डालें। पहले से गर्म ओवन में रखकर धीमें तापमान पर करीब 30-40 मिनट तक बेक कर यमी और डिलीशियस चॉकलेटी केक सर्व करें।

    सेहत /शौर्यपथ / मल्टी ग्रेन यानि मिला जुला अनाज गेहूं के आटे की बजाए सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है। इसमें गेहूं के अलावा चना, चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, जौ, सोयाबीन, ति‍ल्ली आदि को एक साथ पीसकर आटा तैयार किया जाता है। इसके गुणों को जरूर जानिए ताकि आप भी इसका फायदा उठा पाएं -
    1 मल्टीग्रेन आटा या उससे बने व्यंजन आपके शरीर में एक कई तरह के पोषक तत्वों की एक साथ पूर्ति करते हैं, जबकि सामान्य आटे में आपको सीमित पोषण ही मिल पाता है।
    2 इसका प्रयोग करने से शरीर को भरपूर मात्रा में फाइबर मिलता है जो आपके पाचन तंत्र को बेहतर कार्य करने में मदद करता है और कब्ज की समस्या नहीं होती।
    3 शरीर को फाइबर अधिक मिलने पर यह वजन कम करने और मोटापा घटाने में भी बेहद सहायक होता है और जिससे आप जल्दी दुबले हो सकते हैं।
    4 मल्टीग्रेन कई पोषक तत्वों की आपूर्ति करता है जिससे आपकी प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा होता है और बीमारियां आपसे दूरी बनाए रखती हैं।
    5 इसका एक खास फायदा यह भी है कि यह डायबिटीज के मरीजों और रक्तचाप रोगियों के लिए फायदेमंद होता है और शरीर में वसा का जमाव नहीं होने देता।

    सेहत / शौर्यपथ / दिनभर अगर काम करते-करते आप थकान महसूस करते हैं या पैर के पंजों में दर्द बना रहता है तो हम आपको बता रहे हैं कुछ आसान-सी 5 एक्सरसाइज जिन्हें अपनाकर आप दिनभर की थकान से छुटकारा पा सकते हैं। आइए जानते हैं-
    टांगें सीधी करके बैठें और बाजू शरीर को सहारा देते हुए पीठ के पीछे रहेंगे। अंगुलियां पीछे की ओर खुली होंगी।
    सामान्य श्वास लेते हुए पंजों को ऊपर की ओर करें और बारी-बारी से पंजों को अंदर की ओर मोड़ें व बाहर की ओर फैलाएं।
    सामान्य श्वास लेते हुए पंजों को शरीर की तरफ लचीला व ढीला करें और फिर उनको बाहर की ओर फैलाएं, यह क्रिया आहिस्ता और सचेत रहते करें। जहां तक संभव हो, पैरों को दोनों दिशाओं में घुमाएं।
    सामान्य श्वास लेते हुए दोनों पैरों के साथ 5 बार दाईं ओर से बाईं ओर तथा 5 बार बाईं ओर से दाईं ओर घुमाने की क्रिया करें।
    बायां पैर मोड़ें और बाएं पैर को दाईं जांघ के ऊपर रखें। बाएं हाथ से बाईं टांग को टखने के ऊपर से पकड़ लें और बाएं पैर की अंगुलियों को दाएं हाथ से पकड़ लें। सामान्य श्वास लेते हुए टखने को दोनों दिशाओं में 5 बार घुमाएं। टांग बदल लें और इसी व्यायाम को दोहराएं।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / क्रिसमस के अवसर पर पढ़ें पवित्र बाइबिल का संदेश
    1. भलाई से बुराई को जीतो।
    2. बुराई को अपने ऊपर हावी मत होने दो।
    3. जो कोई दया करे, वह हंसी-खुशी के साथ दया करें।
    4. प्रेम में कोई कष्ट नहीं होना चाहिए।
    5. बुराई से घृणा करनी चाहिए।
    6. भलाई में लगे रहना चाहिए।
    7. एक-दूसरे के साथ भाईचारे का प्रेम करना चाहिए।
    8. एक-दूसरे का आदर करने में होड़ करनी चाहिए।
    9. प्रयत्न करने में आलस नहीं करना चाहिए।
    10. आशा में प्रसन्न रहो। दुःख में स्थिर रहो।
    11. सज्जनों की सहायता करो। अतिथियों की सेवा करो।
    12. सताने वालों को आशीर्वाद दो।
    13. हंसने वालों के साथ हंसो। रोने वालों के साथ रोओ।
    14. बुराई के बदले बुराई न करो।
    15. भले काम करो। सबसे मेल रखो।
    16. किसी से बदला मत लो।
    17. तुम्हारा शत्रु भूखा हो, तो उसे खाना खिलाओ।
    18. प्यासा हो, तो पानी पिलाओ।
    19. जो कोई दान दे, वह सिधाई के सात दान दें।
    20. घर-घर प्रेम और भाईचारे का संदेश फैलाना चाहिए।
    प्रभु यीशु के जन्म की कहानी
    मरिया, योसेफ की धर्म पत्नी थी, जो बढ़ई का काम करता था। वे नाजरेथ में रहते थे। एक दिन स्वर्गदूत गाब्रिएल ने उसे दर्शन देकर कहा- 'प्रणाम, कृपापूर्ण, प्रभु आपके साथ है, धन्य हैं आप स्त्रियों में।' यह सुनकर मरिया चकित रह गई, परंतु स्वर्गदूत ने उन्हें सांत्वना देते हुए यह कहा कि वे ईश्वर की माता बनने के लिए चुनी गई हैं। तब मरिया ने उत्तर दिया, 'देखिए, मैं प्रभु की दासी हूं, आपका वचन मुझमें पूरा हो।' और उसी क्षण से वह ईश्वर की माता बन गई।

    कुछ समय के बाद मरिया और योसेफ अपना नाम लिखवाने बेथलेहेम गए और कहीं भी जगह न मिलने पर वे एक एकांत गुफा में आए, जो शहर से बाहर थी और वह यही स्थान था, जहां येसु का जन्म हुआ। मरिया ने उसे शिशु वस्त्र में लपेटा और चरनी में लिटा दिया। उसी समय उन्हें स्वर्गदूतों का मधुर गीत, ईश्वर की स्तुति करता सुनाई दिया-

    'उच्च आकाश में ईश्वर की महिमा, और पृथ्वी पर उसके कृपापात्रों को शांति।'

    पास ही पहाड़ियों के गड़ेरिए स्वर्गदूतों के निमंत्रण पर नन्हें येसु की आराधना करने गए और पूछा जा सकता है कि यह नन्हा येसु कौन है? यह येसु ख्रीस्त दुनिया का मुक्तिदाता है, ईश्वर का पुत्र, सच्चा ईश्वर और सच्चा मनुष्य।

    संत योहन (1:34) लिखते हैं, 'मैंने देखा और इस बात की साझी देता हूं कि यही ईश्वर का पुत्र है।'

    मिस्र में कुछ समय रहने के बाद वे नाजरेथ लौट आए, जहां योसेफ फिर से बढ़ई का धंधा करने लगा। जब येसु करीबन 30 वर्ष के हुए तो उन्होंने घर छोड़ दिया। अपना सुसमाचार सुनाना आरंभ किया, आश्चर्य के काम किए और अपनी कलीसिया की स्थापना की।

    संत मत्ती ने लिखा, (4:23) 'येसु, सारे गलीलिया में घूम-घूमकर उनके सभाघरों में उपदेश देते, राज्य के सुसमाचार की घोषणा करते और लोगों के बीच हर तरह की बीमारी और सब प्रकार की दुर्बलताएं दूर करते थे। उनकी प्रसिद्धि सारे सीरिया में फैल गई।'

    यह अकसर होता है कि जो लोग दूसरों के लिए कुछ अच्छा काम करते हैं, तो उनके अनेक शत्रु हो जाते हैं। उसी तरह से प्रभु येसु ख्रीस्त के द्वारा किए जाने वाले भले कामों के कारण उनके भी अनेक शत्रु हो गए थे। उनका शिष्य, जिसका नाम यूदस था, उनके शत्रुओं से यहां तक मिल गया कि वह मात्र चांदी के तीस सिक्कों पर विश्वासघात करने पर तैयार हो गया।

    अब ऐसा हुआ कि पास्का पर्व के प्रीतिभोज के बाद, येसु जैतून पहाड़ पर प्रार्थना करने गए। जब वे प्रार्थना कर रहे थे, यूदस एक भारी भीड़ के साथ वहां आ पहुंचा, जिन्हें उसने यह संकेत दिया था, 'जिसे मैं चूमूं, वही येसु है, उसे पकड़ लेना और बांध लेना।' और येसु के पास जाकर उसने उसे चूमा।

    येसु ने कहा, 'यूदस! चुंबन देकर मेरे साथ विश्वासघात करते हो?' तब सैनिक उसकी ओर लपके और उन्हें पकड़कर प्रधान याजक और पिलातुस के पास ले गए। वहीं पूरी रात और दिनभर, येसु निष्ठुर सिपाहियों की इच्छानुसार रहा। उन्होंने उसका मजाक उड़ाया, उस पर थूका, थप्पड़ मारे, कांटों का मुकुट बनाकर सिर पर रखा।

    अंत में पिलातुस ने यहूदियों को खुश करने के लिए जो कि येसु को क्रूस पर चढ़ाना चाह रहे थे, उनकी क्रूस की मौत की घोषणा की। अपने जख्मी कंधों पर भारी क्रूस उठाए येसु ने कलवारी पहाड़ी की यात्रा शुरू की। वह इतना कमजोर हो गया था कि तीन बार क्रूस के नीचे गिरा।

    कलवारी पहुंचने पर येसु के कपड़ों को बड़ी बेरहमी से खींचा गया और क्रूस पर ठोंक दिया गया। उसकी मां, संत योहन और कुछ धार्मिक स्त्रियां वहां थीं। उसके कुछ अनुयायी दूर खड़े होकर सब देख रहे थे। उन्हें अपने स्वयं की सुरक्षा की पड़ी थी।

    पास खड़े यहूदियों ने उनका निरादर कर हंसी-मजाक उड़ाया। पर येसु ने उनके लिए प्रार्थना करते हुए कहा, 'हे पिता, उन्हें क्षमा कर दीजिए, क्योंकि उन्हें ज्ञात नहीं कि वे क्या कर रहे हैं।' और तीन घंटों की घोर प्राण पीड़ा के पश्चात येसु मर गए। मानव जाति को मुक्ति दिलाने के लिए उसने ऐसा किया। येसु की मृत्यु के बाद उसके कुछ शिष्य आए और उन्हें एक कब्र में दफना दिया। तीसरे दिन बड़े तड़के भूकंप हुआ, येसु महिमा और विजय के साथ कब्र से बाहर आए।

    जब धार्मिक स्त्रियां आईं तो उन्होंने दो स्वर्गदूतों को देखा, जिसने उनसे कहा, 'क्या आप येसु को खोज रहे हैं? वे यहां नहीं हैं, वे मृतकों में से जी उठे हैं।' उसी दिन संध्या के समय शिष्यगण यहूदियों के डर से द्वार बंद करके जमा हुए थे। वहीं येसु आए और उनके बीच खड़े होकर उनसे कहा, 'तुम्हें शांति मिले।' वे सहम गए और भय के मारे सोचने लगे कि हम कोई प्रेत देख रहे हैं। येसु ने उनसे कहा, 'डरो मत, मैं ही हूं, मेरे हाथ और पैर देखो।' और उनके साथ वे अंतर्ध्यान हो गए।

    येसु, यह साबित करने के लिए कि वे सचमुच मृतकों में से जी उठे हैं, प्रेरितों को समझाने का कार्य पूर्ण करने और अपनी कलीसिया की स्थापना करने के लिए, 40 दिनों तक इस दुनिया में रहे।

    इसके बाद वे प्रेरितों को जैतून पहाड़ पर ले गए और अपने हाथ उठाकर उन्हें आशीर्वाद देते हुए स्वर्ग की ओर उड़ते चले गए, जब तक कि एक बादल ने उन्हें नहीं ढंक लिया। तब दो स्वर्गदूत दिखाई दिए और उनसे कहा, 'यही येसु, जिसे तुम अपने बीच से स्वर्ग की ओर जाते देख रहे हो फिर आएंगे, जैसे तुमने उस स्वर्ग की ओर जाते देखा है। तब वह समस्त मानवों का न्याय करेगा।'

     

    सुकमा / शौर्यपथ / त्रेतायुग में वनवास के दौरान भगवान राम के पग पड़ने से पवित्र हो चुकी माता चिटमिट्टीन की यह भूमि आज फिर से राममय हो गई, जब हजारों की संख्या में बाइक सवारों ने राम नाम के नारे के साथ रैली निकाली। प्रभु श्री राम वनगमन पर्यटन रथ के साथ निकली बाइक रैली का जगह-जगह खड़े श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया। रथयात्रा मार्ग में भी फूल बिछाये गए थे। भगवान राम के दर्शन को जिस तरह शबरी की आंखें व्याकुल थी, वही आतुरता रथ यात्रा और बाइक रैली के स्वागत के लिए बच्चे बूढ़े और जवानों में भी नजर आया और यह नजारा पूरे सुकमा जिले की रथ यात्रा मार्ग में गांव-गांव में नजर आया। रथ यात्रा की स्वागत के साथ ही सुकमा, छिंदगढ़, कुकानार और तोंगपाल में रामायण पाठ व धार्मिक भजनों का आयोजन भी किया गया, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
    रथयात्रा माता चिटमिट्टीन की पवित्र भूमि रामाराम से प्रारंभ हुई और लगभग 65 किलोमीटर की यात्रा कर बस्तर जिले की सीमा पर स्थित टाहकवाड़ा पहुंची, जहां सुकमा कलेक्टर श्री नन्दनवार ने बस्तर कलेक्टर श्री रजत बंसल को यात्रा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई। रामाराम में कलेक्टर श्री विनीत नन्दनवार ने रथ यात्रा को हरी झंडी दिखा कर रवाना करने के साथ ही रथ यात्रा में भी शामिल हुए। इस दौरान सुकमा नगर पालिका अध्यक्ष जगन्नाथ साहू सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि व श्रद्धालु शामिल हुए।
    उल्लेखनीय है कि सुकमा जिला मुख्यालय से दक्षिण में लगभग दस किलोमीटर की दूरी पर रामाराम ग्राम स्थित है। यहां की आराध्य देवी चिटमिट्टीन हैं। राम वन गमन मार्ग के शोध से भगवान राम के यहां आगमन और भू-देवी के आराधना की जानकारी मिलती है।
    यह भी उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा भगवान राम से बहुत ही गहरा संबंध रखने वाले छत्तीसगढ़ प्रदेश में राम वन पथ गमन परिपथ का विकास किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक तथा क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता का अवलोकन करने का अवसर प्राप्त हो सके। इस मार्ग में फलदार और औषधीय पौधों के रोपण का कार्य भी किया जा रहा है।

    एम्पोरियम में गोबर की लकड़ी, ईंट, दीये, धूप बत्ती, अगरबत्ती, गमले, खिलौने,
    सजावटी समान विक्रय के लिए उपलब्ध होंगे

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज सरगुजा जिला प्रवास के दौरान जिला मुख्यालय अंबिकापुर में प्रदेश के पहले गोधन एम्पोरियम का उद्घाटन किया। इस एम्पोरियम में गोधन न्याय योजना के तहत गोठानों में खरीदे गए गोबर से महिला समूहों द्वारा निर्मित हो रहे विभिन्न उत्पादों की बिक्री की जाएगी।
    गोधन एम्पोरियम में गोबर से महिला समूहों द्वारा बनाई गई लकड़ी, ईंट, दीये, धूप बत्ती, अगरबत्ती, खिलौने, सजावटी समान सहित घनजीवामृत विक्रय के लिए उपलब्ध रहेगा। महिलाओं द्वारा गोबर तथा बेसन के साथ अन्य प्राकृतिक उत्पाद के मिश्रण से घनजीवामृत तैयार किया जा रहा है। इसके उपयोग से भूमि की उर्वरता बढ़ती है।
    गोधन उत्पाद विक्रय सह प्रदर्शनी केंद्र के रूप में अंबिकापुर के कला केंद्र मैदान के सामने गांधी स्टेडियम के प्रवेश द्वार के निकट गोधन एम्पोरियम की शुरुआत की जा रही है। एम्पोरियम का संचालन गोठान प्रबंध समिति द्वारा नगर निगम एवं राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के मार्गदर्शन एवं निगरानी किया जाएगा। गोधन एम्पोरियम खुलने से जहां नागरिकों को गोधन उत्पाद खरीदने में सुविधा होगी वहीं समूह की महिलाओं अपने उत्पादों के विक्रय के लिए एक व्यवस्थित स्थान मिलेगा। अंबिकापुर का गोधन एम्पोरियम प्रदेश के लिए एक मॉडल साबित हो सकता है।
    इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल, संसदीय सचिव चिंतामणि महाराज, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बृहस्पति सिंह, राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल भी उपस्थित थे।

    1470 कैंप में 75 हजार से अधिक मरीजों ने कराया इलाज

    मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना का लोग उठा रहे हैं लाभ 

          रायपुर / शौर्यपथ /  रायपुर लाखे नगर क्षेत्र की श्रीमती जाहिदा बेगम को पिछले कुछ दिनों से कमजोरी महसूस हो रही थी। श्रीमती रिजवाना मेमन को पैर में दर्द था। पापड़ पैकिंग का काम करने वाली श्रीमती रामकोर को भी दर्द महसूस हो रहा था। ये सभी महिलाएं अपने उपचार के लिए अस्पताल तो जाना चाहती थी, लेकिन कार्य की व्यस्तता की वजह से नहीं जा पा रही थी। इनके घर के पास जब मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट पहुंची तो इन सभी की बीमारी मानों दूर ही हो गई। मोबाइल मेडिकल यूनिट में मौजूद चिकित्सक और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने श्रीमती जाहिदा, रिजवाना सहित आसपास की महिलाओं का स्वास्थ्य जांच कर उन्हें दवाइयां दी तो सभी को बीमारी से राहत मिली। पहले छोटी-छोटी बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल न जा पाने वाली इन महिलाओं ने कई बार निजी अस्पताल का चक्कर भी काटा और अपने पैसे भी खर्च किए। अब जबकि इन्हें घर के पास ही मोबाइल मेडिकल यूनिट की टीम से इलाज मिल गया है और ठीक भी हो गए हैं तो वे सरकार का आभार जताना नहीं भूलती। 

          मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल और नगरीय प्रशासन तथा श्रम मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया की पहल से शहरी क्षेत्र के स्लम इलाकों में रहने वाले गरीब परिवारों के निःशुल्क उपचार की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के माध्यम से मोबाइल मेडिकल यूनिट प्रदेश के 14 नगर निगम क्षेत्र के अलग-अलग वार्डों में पहुंच कर लोगों का इलाज कर रही है। इस योजना के तहत स्लम क्षेत्र के निवासियों के स्वास्थ्य की जांच, उपचार, दवा वितरण एवं स्वास्थ्य परामर्श सुविधा निःशुल्क दिया जा रहा है। यूनिट में ओपीडी, प्रयोगशाला जांच के साथ दवा वितरण और लैब में 41 प्रकार के स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध है। दाई-दीदी क्लीनिक के माध्यम से भी मोबाइल मेडिकल टीम रायपुर, बिलासपुर और भिलाई नगर निगम क्षेत्र में पहुचकर लोगों का निःशुल्क उपचार कर रही है। दाई-दीदी क्लीनिक में महिलाओं के प्राथमिक उपचार के साथ-साथ महिला चिकित्सक द्वारा स्तन कैंसर की जांच, हितग्राहियों को स्व स्तन जांच का प्रशिक्षण, गर्भवती महिलाओं की नियमित एवं विशेष जांच आदि की अतिरिक्त सुविधा प्रदान की गई है। प्रदेश के 14 नगर निगमों में अभी तक 1470 स्थानों पर मोबाइल मेडिकल यूनिट ने कैंप लगाई है। इन कैंपों के माध्यम से 75 हजार 227 मरीजों का स्वास्थ्य जांच, 18082 मरीजों का लैब टेस्ट, 65 हजार मरीजों को दवा का वितरण, किया गया है। सबसे अधिक कैंप रायपुर नगर निगम में 474, बिलासपुर में 136, राजनांदगांव में 135 और दुर्ग में 127 कैंप लगाया गया है। 

    सबसे अधिक बिलासपुर के लोगों ने उठाए लाभ

        मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू )द्वारा अभी तक लगाए गए 1470 कैंप में सबसे अधिक कैंप रायपुर नगर निगम में लगाया गया है। यहां 22965 मरीज लाभान्वित हुए हैं। यदि औसत देखा जाए तो एक एमएमयू में सर्वाधिक बिलासपुर में 70 मरीजों को लाभ मिला है। बिलासपुर में 136 कैंप में 9497 मरीज लाभान्वित हुए हैं। दुर्ग में 6738, कोरबा में 5832, राजनांदगांव में 5756 मरीज और भिलाई में 4853, रायगढ़ में 4576 मरीज लाभान्वित हुए हैं।

    दाई-दीदी क्लीनिक में 3305 महिलाएं हुई लाभान्वित

        नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा 19 नवंबर को मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल एवं विभागीय मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने प्रदेश के तीन नगर निगम रायपुर, बिलासपुर और भिलाई नगर निगम के लिए दाई-दीदी क्लीनिक का शुभारंभ करते हुए स्पेशल मोबाइल मेडिकल यूनिट का शुभारंभ किया था। दाई-दीदी क्लीनिक का तीनों नगर निगम में अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। विगत 25 दिनों में 59 कैंपों में 3306 महिलाएं इससे लााभन्वित हुई है। लगभग 1061 मरीजों का लैब टेस्ट, 3044 मरीजों को दवा वितरित किया गया है। इस योजना का सबसे अधिक लाभ बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की 1360 महिलाओं ने उठाया है।

    82 करोड़ रूपए लागत के अम्बिकापुर-दरिमा-नवानगर 36 किलोमीटर सड़क मार्ग और
    43 करोड़ रूपए लागत से अम्बिकापुर-दरिमा मार्ग चौड़ीकरण-उन्नयन कार्य का भूमिपूजन
    लगभग 26 करोड़ रूपए की लागत से 124 बसाहटों में सोलर आधारित नल-जल योजना का भी भूमिपूजन
    50 लाख रूपए की लागत से निर्मित लखनपुर थाना भवन सहित जिले के चार मार्गों पर लगभग 8 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित चार पुलों का लोकार्पण

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज सरगुजा जिले के मुख्यालय अम्बिकापुर के राजीव गांधी शासकीय स्नात्कोत्तर महाविद्यालय मैदान में आयोजित कार्यक्रम में 633 करोड़ 88 लाख रूपए की लागत के 110 विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। श्री बघेल इनमें से 559 करोड़ 84 लाख रूपए के 79 कार्यों का भूमिपूजन एवं 74 करोड़ 04 लाख रूपए की लागत के 31 कार्यों का लोकार्पण किया।
    मुख्यमंत्री बघेल ने जिन कार्यो का भूमिपूजन किया उनमें 82 करोड़ रूपए की लागत से बनने वाले अम्बिकापुर दरिमा नवानगर मार्ग निर्माण (हवाई पट्टी एवं ब्लॉक मुख्यालय तक 36 किलोमीटर का मुख्य मार्ग), लगभग 43 करोड़ रूपए की लागत से अम्बिकापुर से दरिमा मार्ग का चौड़ीकरण एवं उन्नयन कार्य, लगभग 27 करोड़ रूपए की लागत से सीतापुर में चलता से हर्रामार्ग तक पुलिया सहित 20 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य, लगभग 26 करोड़ रूपए की लागत से 124 बसाहटों में सोलर आधारित नल-जल योजना के कार्य और लगभग 19 करोड़ रूपए की लागत से सीतापुर में चिरंगा से घण्टाडही गोविंदपुर तक पुल-पुलिया सहित 11 किलोमीटर सड़क निर्माण के कार्य शामिल हैं।
    मुख्यमंत्री ने जिन कार्यो का लोकार्पण किया, उनमंे लगभग 4 करोड़ रूपए की लागत से सीतापुर क्षेत्र में राताखार नदी पर नर्मदापुर-काराबेल रोड़ से उदुमकेला-आमापारा मार्ग पर नवनिर्मित पुल, 2 करोड़ रूपए की लागत से लुण्ड्रा क्षेत्र में कुसू से प्रतापपुर मार्ग पर बरनई नदी पर निर्मित पुल एक करोड़ रूपए की लागत से अम्बिकापुर क्षेत्र में बिलासपुर रोड़ से गुमगराकला मार्ग पर चुलहुट नदी पर पुल निर्माण, एक करोड़ रूपए की लागत से अम्बिकापुर क्षेत्र में भुकुरमा नदी पर निर्मित पुल और छत्तीसगढ़ पुलिस हाउंसिंग कारर्पोरेशन द्वारा अम्बिकापुर क्षेत्र में 50 लाख रूपए की लागत से निर्मित लखनपुर थाना भवन शामिल है।
    इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल, संसदीय सचिव चिंतामणि महाराज, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बृहस्पति सिंह, राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल भी उपस्थित थे।

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