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बालोद / शौर्यपथ / कलेक्टर जनमेजय महोबे ने कहा कि जिले में शासन से प्राप्त लक्ष्य के अनुरूप कोरोना वायरस (कोविड-19) की जाॅच शतप्रतिशत हो। श्री महोबे आज शाम संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित स्वास्थ्य विभाग की बैठक में निर्देशित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को या उसके परिवार के अन्य सदस्यों को सर्दी, खांसी, बुखार, श्वास लेने में कठिनाई, स्वाद या गंध नहीं आने पर तत्काल कोरोना जाॅच कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से बचाव हेतु मास्क का उपयोग और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन जरूरी है। कलेक्टर ने कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव हेतु जनजागरूकता लाने प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने कोविड-19 अस्पताल और कोविड केयर सेंटर्स में साफ-सफाई की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि नियमित साफ-सफाई, समय पर भोजन और दवाईयों की उपलब्धता सुनिश्चित हो। कलेक्टर ने जिले में कोविड-19 टीकाकरण की तैयारी के संबंध में चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने नियंत्रण कक्ष की स्थापना, वैक्सीनेशन प्लान, प्रशिक्षण आदि पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। बैठक में कोविड-19 टीकाकरण के जिला स्तरीय नोडल अधिकारी व डिप्टी कलेक्टर अभिषेक दीवान, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. जे.पी.मेश्राम, जिला कार्यक्रम प्रबंधक डाॅ. भूमिका वर्मा सहित खण्ड चिकित्सा अधिकारी आदि मौजूद थे।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / आज डोंगरगढ़ विधायक अध्यक्ष अनुसूचित जाति प्राधिकरण भुनेश्वर बघेल के निर्देशानुसार धान खरीदी केन्द्र पदुमतरा का निरीक्षण क्षेत्रीय जनपद सदस्य व सभापाति ओमप्रकाश साहू व युवा कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ वैष्णव पहंुचे।
जनपद सभापति ओमप्रकाश साहू ने किसानों से मुलाकात किये धान खरीदी की व्यवस्था देखा व अधिकारी-कर्मचारियों व हमालों से बातचीत किये व बेहतर व्यवस्था रखने की बात कही व किसानों को किसी प्रकार परेशानी न हो इस पर विशेष ध्यान रखने कहा गया।
युवा कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ वैष्णव ने कहा छत्तीसगढ़ सरकार किसानों की सरकार है किसानो की धान खरीदी व्यवस्था का ध्यान देने की बात कही।
० एनीमिक गर्भवती माता श्रीमती गोमती सिन्हा ने स्वस्थ शिशु को दिया जन्म
० आंगनबाड़ी केन्द्र में पौष्टिक भोजन, अंडा एवं मूंगफल्ली की चिक्की से स्वास्थ्य हुआ अच्छा
राजनांदगांव / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान अंतर्गत राजनांदगांव की एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना (शहरी) के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा कुपोषण की रोकथाम के लिए एनीमिक गर्भवती माताओं को घर-घर जाकर पौष्टिक आहार दिया जा रहा है और उन्हें गर्भावस्था के दौरान संपूर्ण देखभाल की जानकारी दी जा रही है। आंगनबाड़ी केन्द्र बलराम दास वार्ड नंबर 15 केन्द्र क्रमांक 2 की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती लता सोनटिया ने वजन पंजीयन के दौरान देखा कि गर्भवती महिला श्रीमती गोमती सिन्हा का वजन 50 किलोग्राम था और उनका हिमोग्लोबिन 9.5 ग्राम था। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत उन्हें लगातार आंगनबाड़ी केन्द्र में सप्ताह में तीन दिन अंडा, मूंगफल्ली की चिक्की एवं प्रतिदिन गर्म भोजन दिया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने गृह भेंट के दौरान पौष्टिक भोजन के साथ ही आयरन, फॉलिक एसिड की गोली, टीकाकरण, नियमित जाँच की सतत निगरानी की। जिसके फलस्वरूप गर्भवती महिला श्रीमती गोमती सिन्हा का हिमोग्लोबिन 12 ग्राम हो गया और उन्होंने एक स्वस्थ्य शिशु को जन्म दिया, जिसका वजन 3 किलोग्राम था।
मार्च 2020 से कोविड-19 के कारण आंगनबाड़ी बंद हो जाने के कारण आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा घर-घर जाकर एनीमिक गर्भवती महिलाओं को सूखा राशन वितरण किया गया और सतत निगरानी की गई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा परिवार एवं समुदाय के बीच एनिमिया और कुपोषण की कमी हेतु उपलब्ध इ-ईला के विडियो और विभिन्न चार्ट, पोस्टरों के माध्यम से जागरूकता लाने का कार्य कर रही हैं। स्वच्छता और कोविड-19 से बचाव हेतु गृह भेंट कर सभी बच्चों के पालकों, गर्भवती महिलाओं एवं परिवार को लगातार मार्गदर्शन दे रही हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, एएनएम एवं पर्यवेक्षक के आपसी समन्वय से शीघ्र से शीघ्र गर्भवती महिलाओं का पंजीयन, शत प्रतिशत संस्थागत प्रसव, जन्म के तुरन्त बाद या 1 घण्टे के अंदर स्तनपान, टीकाकरण, कुपोषित बच्चों को पर्याप्त ऊपरी पौष्टिक आहार, वजन, कृमिनाशक गोली, आयरन सिरप का वितरण एवं बच्चों और महिलाओं के लिए स्वास्थ्य जाँच शिविर का आयोजन करवा रही हैं। ताकि बच्चों और महिलाओं में कुपोषण और एनीमिया की दर में कमी आ सके।
० खाद्य सामग्रियों की प्रदर्शनी लगाकर बताए फायदे
० शहरी क्षेत्र के गौरी नगर में हुआ पोषण जागरुकता कार्यक्रम
राजनांदगांव / शौर्यपथ / बच्चों और महिलाओं को सुपोषित बनाने के लिए जिले में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन सभी कार्यक्रमों का उद्देश्य कुपोषण को मिटाना है। इसी कड़ी में राजनांदगांव शहरी क्षेत्र के गौरीनगर में महिला एवं बाल विकास विभाग के कर्मचारियों और क्षेत्रीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका व मितानिन ने विशेषकर गर्भवती महिलाओं और शिशुवती माताओं के स्वास्थ्य से संबंधित कई कार्यक्रम किए।
इस अवसर पर मौजूद लाभार्थियों को सुपोषण के प्रति प्रेरित करने का प्रयास किया गया। कुपोषण मुक्ति के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से यहां विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्रियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में प्रमुख रूप से मूंगफली, केला, कुंदरू, कद्दू, अंडे, पपीता, सोया बड़ी, चना, उड़द, अरहर दाल, बटरा, पापड़, प्याज, आलू, मुनगा भाजी, कांदा भाजी, पोई भाजी और मीठा नीम जैसी विभिन्न प्रजातियों को रखा गया। साथ ही महिलाओं को इसके सेवन से होने वाले फायदे भी बताए गए। वहीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका व मितानिन ने गर्भवती महिलाओं व शिशुवती माताओं को कम वजन के नवजात शिशुओं को कंगारू मदर केयर देने की जानकारी दी। साथ ही संक्रमण से बचाव हेतु साफ सफाई बरतने, मां द्वारा शिशु को कम से कम 6 माह तक सिर्फ स्तनपान कराने तथा माता को स्वयं मौसमी फलों, हरी सब्जियों और रेडी-टू-ईट का उपयोग करने हेतु समझाइश दी।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका व मितानिन ने महिलाओं को जागरूक करते हुए कहा, सही पोषण ही बेहतर विकास की नींव मानी जाती है, इसलिए जो चीजें हमारे आसपास ही मौजूद हैं, उसका भरपूर उपयोग करें। शिशु व स्वयं के स्वास्थ्य के प्रति गंभीर लाभार्थी महिलाएं सजगता के साथ समय-समय पर जरूरी सलाह लेती रहेंगी तो कुपोषण के खिलाफ जारी लड़ाई जीतने में निश्चित तौर पर बड़ी मदद मिलेगी। उन्होंने महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि, बच्चों को कुपोषित होने से बचाना है तो आंगनबाड़ी केन्द्र में होने वाली गतिविधियों से जरूर जुड़ें। आंगनबाड़ी के लाभ को अपनाएं। इसके साथ-साथ रेडी-टू-ईट, हरी सब्जियों, अंडा और खासकर मुनगा जैसी चीजों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं और कुपोषण से मुक्ति पाएं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अमृता ठाकुर ने बताया, महिलाओं और शिशुओं में सुपोषण के लिए गोद भराई, उचित पोषण आहार, रेडी-टू-ईट या वजन जांचने जैसे क्रिया-कलाप क्षेत्र में लगातार किए जा रहे हैं और इससे महिलाएं लाभान्वित भी हो रही हैं। इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने बताया, सुपोषण के लिए जिले में किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजनांतर्गत इस वर्ष अब तक 9,093 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई एवं 4,281 गंभीर कुपोषित बच्चों को निःशुल्क दवा वितरण किया गया है। जिले में 6 पोषण पुनर्वास केन्द्र संचालित हैं, जिसमें नियमित रूप से बच्चों को लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है। वर्ष 2019-20 में माह फरवरी 2020 तक कुल 960 अति गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र का लाभ दिया गया। पोषण पुनर्वास केन्द्र में 14 दिवस लाभ लेने के बाद घर पर बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण पर विशेष ध्यान देने के लिए अभिभावकों की काउंसलिंग स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है।
उन्होंने बताया, कुपोषण मुक्ति के लिए स्थानीय पौष्टिक आहार को प्रमुखता, बाड़ी, किचन गार्डन को बढ़ावा और अधिक से अधिक जन समुदाय की सहभागिता जैसे कई प्रयास एक साथ और लगातार किए जा रहे हैं। इसके अलावा बच्चे का नियमित टीकाकरण हो, यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है और इसी कड़ी में गौरी नगर क्षेत्र में पोषण से संबंधित जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
जांजगीर-चांपा / शौर्यपथ / त्रिस्तरीय पंचायतीराज संस्थाओं के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को आधारभूत, अभिमुखीकरण तीन दिवसीय प्रशिक्षण विगत दिनों ऑनलाइन माध्यम से राज्य स्तरीय प्रशिक्षकों ने दिया। जिसमें पंचायतीराज व्यवस्थाओं की बारीकियों के बारे में विस्तार से जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी गई।
जिला पंचायत संसाधन केन्द्र में 7 से 10 दिसम्बर तक ऑनलाइन प्रशिक्षण जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों को दिया गया। जिसमें वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से 7 दिसम्बर को उद्घाटन सत्र का शुभारंभ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस.सिंहदेव के द्वारा किया गया। इसके पश्चात ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान निमोरा रायपुर से संचालित ऑन लाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम में 8 से 10 दिसम्बर तक राज्य स्तर के प्रशिक्षकों द्वारा दिया गया। जिसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों को 73 वॉ संविधान संशोधन अधिनियम एवं छत्तीसगढ़ में पंचायतीराज व्यवस्था एवं प्रमुख धाराओं से अवगत कराया गया।
इसके बाद पंचायतीराज व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए आयोजित बैठकों एवं कामकाज से अवगत कराया गया। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों के कार्य दायित्व, अधिकार एवं सामान्य सभा के बैठकों में लाये जाने वाले मुद्दों से अवगत कराया गया। इसके अलावा जिला पंचायत समितियों की बैठक एवं कामकाज के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में पंचायत संचालनालय एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं जैसे मुख्यमंत्री समग्र विकास, 15 वें वित्त, मूलभूत, प्रधानमंत्री आवास, स्वच्छ भारत मिशन, महात्मा गांधी नरेगा आदि के बारे में जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के अंतिम दिवस नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी विकास में पंचायतों की भूमिका तथा ग्राम गोठान प्रबंधन समिति के संबंध में जानकारी दी गई। वहीं अन्य विभागीय योजनाओं के बारे में प्रशिक्षण में बताया गया। प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी तीर्थराज अग्रवाल ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों को प्रमाण पत्र का वितरण किया गया। प्रशिक्षण के दौरान अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं उपसंचालक अभिमन्यु साहू एवं लेखाधिकारी जी.एस.सिदार, संकाय सदस्य चंद्रहास जायसवाल, अजय सिंह सहित आदि उपस्थित थे।
नई दिल्ली /शौर्यपथ / सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के मामले पर गुरुवार को सुनवाई करेगी. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वो दो दिनों में इस मामले में अदालत में हलफनामा दाखिल करेगी कि नए अध्यादेश के लागू करने से प्रदूषण पर क्या प्रभाव पड़ा है. इसे देखते हुए अदालत ने मामले की सुनवाई टाल दी है.
पिछली सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने कहा था कि शहर में प्रदूषण की समस्या पर नियंत्रण पाना सरकार की जिम्मेदारी है. किसी आयोग से उसे कोई सरोकार नहीं है. इससे पहले, सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि प्रदूषण के मामले में आयोग गठित कर दिया गया. आयोग 6 नवंबर से ही काम शुरू कर देगा. इस पर प्रधान न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे ने कहा, सरकार यह सुनिश्चित करे कि शहर में प्रदूषण की समस्या नियंत्रण में रहे. कोर्ट को किसी आयोग से कोई सरोकार नहीं है.
कोर्ट ने कहा कि पहले से ही प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए कई आयोग और निकाय बने हुए हैं. सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि शहर में कोई स्मॉग न हो. CJI ने कहा, जिस तरह से हमें प्रदूषण के मामले में अपराधों की ग्रेडिंग की आवश्यकता है. लिहाजा विस्तार से देखें कि आप किस तरह के अपराधों को देख रहे हैं. ऐसे अपराधों पर या आयोग के आदेशों का उल्लंघन करने पर जुर्माना 5 साल की जेल या एक करोड़ रुपये जुर्माना नहीं हो सकता है. CJI ने कहा, "प्रदूषण की समस्या से कार्यपालिका को निपटना पड़ेगा. उनके पास संसाधन हैं, पैसा है."
केंद्र सरकार ने दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए गठित आयोग के पदाधिकारियों के नाम की अधिसूचना जारी की है, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पूर्व सचिव एमएम कुट्टी आयोग के अध्यक्ष हैं. उनके अलावा 14 और सदस्य हैं. इनमें अलग-अलग विभाग के अधिकारी, विशेषज्ञ, दिल्ली, हरियाणा, यूपी, राजस्थान और पंजाब के अधिकारी शामिल हैं.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / भारतीय राजदूतों के समूह ने किसान आंदोलन पर कनाडा के रुख को 'वोटबैंक की राजनीति' बताते हुए खुला पत्र लिखा है. इस पत्र पर 22 पूर्व राजनयिकों के दस्तखत हैं, जिनमें कनाडा में उच्चायुक्त रहे विष्णु प्रकाश भी शामिल हैं. पिछले दिनों भारत में हो रहे किसानों के आंदोलन पर कनाडा की प्रतिक्रिया को लेकर भारत में आलोचना हुई है.
इस खुली चिट्ठी में कहा गया है कि कई महत्वपूर्ण गुरुद्वारों पर खालिस्तानी तत्वों का नियंत्रण है, जिससे कि उनकी फंड तक पहुंच है. इसमें आरोप लगाया गया है कि यह लिबरल राजनीतिक दलों के चुनाव अभियान में मदद के काम आता है. इसके तहत वो समय-समय पर प्रदर्शन, रैली आदि आयोजित करते हैं, जहां भारत विरोधी नारे लगते हैं.
इसमें यह भी कहा गया है कि 'खालिस्तानियों और पाकिस्तानी डिप्लोमैट्स के बीच संपर्क है. पाकिस्तानी डिप्लोमैट्स ऐसी गतिविधियों में खुल कर भाग लेते हैं और कनाडा सरकार इस पर ध्यान नहीं देती.'
इस चिट्ठी में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की किसान आंदोलन पर की गई टिप्पणी को गैरजरूरी बताया गया है. बता दें कि कुछ दिनों पहले ट्रूडो ने एक वीडियो जारी कर किसान आंदोलन पर टिप्पणी की थी और कहा था कि भारत में हो रहे किसान आंदोलन की स्थिति 'चिंताजनक' है. उन्होंने यह भी कहा था कि कनाडा कहीं भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के साथ खड़ा है. कनाडा के कई दूसरे नेताओं ने भी इन आंदोलनों पर बयान दिया था, जिसे लेकर विदेश मंत्रालय की ओर से आलोचना की गई थी.
राजदूतों ने अपनी चिट्ठी में यह भी कहा है कि WTO में कनाडा MSP को लेकर भारत के रुख का आलोचक है. ऐसे व्यवहार से अंतरराष्ट्रीय मंच पर कनाडा की छवि को धक्का लगेगा. अन्य देश कनाडा के खिलाफ ऐसा ही रुख अपना सकते हैं.
चिट्ठी में कहा गया है कि 'भारत कनाडा से अच्छे रिश्ते चाहता है लेकिन यह एकतरफा नहीं हो सकता. भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ कदमों को अनदेखा नहीं किया जा सकता. इस बारे में निर्णय कनाडा के लोगों को ही करना होगा.'
नई दिल्ली / शौर्यपथ / बेंगलुरु आईफोन बनाने वाली ताइवान की कंपनी विस्ट्रान के नरसापुर प्लांट में शनिवार को हिंसा भड़कने के मामले में एप्पल ने गंभीर रुख अपनाया है. आईफोन ब्रांड की मालिक एप्पल ने सोमवार को कहा है कि उसने हिंसा की जांच के लिए अतिरिक्त टीम भारत भेजने का फैसला किया है. एप्पल के अधिकारी पता लगाएंगे कि क्या विस्ट्रान ने सप्लायर गाइडलाइन का किसी भी तरह से उल्लंघन किया है.आईफोन बनाने वाली कंपनी एप्पल अतिरिक्त टीम जांच के लिए भारत भेज रही है. कई महीनों से बकाया वेतन न मिलने से गुस्साए कर्मचारियों ने विस्ट्रान के नरसापुर प्लांट में तोड़फोड़ और आगजनी की थी.
कंपनी के सूत्रों ने बताया कि एप्पल सप्लाई चेन में शामिल सभी लोगों के सम्मान और गरिमा का ख्याल रखती है. हिंसा के पीछे कर्मचारियों का कई माह से बकाया वेतन न मिलने को बड़ी वजह माना जा रहा है. ऐसे में एप्पल ने विस्ट्रान के नरसापुरा संयंत्र के विस्तृत जांच शुरू कर दी है. सूत्रों का कहना है कि संयंत्र पर एप्पल टीम के सदस्यों और ऑडिटरों को भेजा गया है. एप्पल की टीम स्थानीय अधिकारियों के भी संपर्क में हैं. उन्हें जांच में पूरा सहयोग का भरोसा दिया गया है.शनिवार को भड़की हिंसा के दौरान वेतन न मिलने से गुस्साए कई कर्मचारियों ने प्लांट परिसर में तोड़फोड़ की थी. कई वाहनों को आग लगा दी गई थी.
विस्ट्रान ने 412 करोड़ के नुकसान का दावा किया
विस्ट्रान द्वारा दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि कोलार जिले के उसके प्लांट में हुई हिंसा से उसे 412.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. इसमें मोबाइल, मशीनरी और उपकरणों को हुई क्षति शामिल है. करीब 10 करोड़ का बुनियादी ढांचा नष्ट हो गया . करीब 1.5 करोड़ के फोन खराब या चोरी हो गए. इस मामले में 100 के करीब लोगों की गिरफ्तारी हुई है.
Apple के लिए Iphone बनाती है विस्ट्रान
विस्ट्रान एप्पल की बड़ी आपूर्तिकर्ताओं में से एक है. कंपनी भारत में आईफोन 7 का निर्माण करती है. फैक्ट्री में करीब 10 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं. एक शिफ्ट में करीब 3 से 3500 कर्मी रहते हैं. विस्ट्रान ने कहा कि अज्ञात लोगों ने कंपनी में धावा बोला और प्लांट को नुकसान पहुंचाया. कंपनी जांच में पुलिस और स्थानीय अधिकारियों का पूरा सहयोग कर रही है.
शौर्यपथ / गाजर खाने के अनेक फायदे है क्योंकि इसमें विटामिन ए, सी, के, बी 8, तांबा, लौह जैसे कई और भी खनिज व विटामिन पाए जाते है। गाजर 12 महीने आपको आसानी से मिल जाता है। आज हम आपको बता रहे हैं गाजर खाने के फायदे-
-रोजाना गाजर का सलाद खाने से या गाज़र का जूस पीने से चेहरे पर चमक आती है। गाजर रक्त की विषाक्ता कम करता है और इसके सेवन से कील-मुहासों से भी छुटकारा मिलता है।
-गाजर में विटामिन ‘ए’ अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसलिए अगर गाजर का नियमित रूप से सेवन किया जाए तो आंखों की रोशनी बढ़ सकती है।
-गाजर का जूस पीने से शरीर में हिमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ जाती हैं, और गाजर में अधिक मात्रा में फाइबर पाया जाता हैं जो शरीर की पाचनशक्ति को बढ़ाता हैं।
-गाजर में कैरोटीनायड होता है, जो हृदय रोगियों के लिए अच्छा होता है। यह माना जाता है कि गाजर का प्रतिदिन सेवन कालेस्ट्राल के स्तर को कम करता है।
-गाजर के प्रतिदिन सेवन से रक्त में शर्करा का स्तर ठीक रहता है।
-इसे खाने से मसूड़ों से ब्लड आना बंद हो जाता है और दांतों की चमक बढ़ती है।
-गाजर में बीटा कैरोटीन होती है और यह प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए अच्छा होता है।
-गाजर के रस में मिश्री व काली मिर्च मिलाकर पीने से खाँसी ठीक हो जाती है तथा कफ कि समस्या में भी आराम मिलता है।
-गाजर खाने से, पेट और फेफड़ों के कैंसर का जोखिम कम होता है।
शौर्यपथ /कोरोनाकाल में आज फेस मास्क हर किसी की पहली जरूरत बन गया है। लोगों को कोविड-19 के संक्रमण से दूर रखने के लिए डब्ल्यूएचओ ने लोगों को घर से निकलने से पहले या फिर किसी भी बाहरी व्यक्ति के संपर्क में आने से पहले चेहरे पर मास्क लगाने की सलाह दी है। हालांकि लंबे समय तक चेहरे पर मास्क लगाए रखना कोई आसान बात नहीं है, शायद यही वजह है कि लोग चेहरे पर मास्क लगाते समय अनजाने में ही कई गलतियां कर बैठते हैं। आइए जानते हैं संक्रमण से बचे रहने के लिए वो कोई सी सावधानियां हैं जिनका ध्यान हर व्यक्ति को रखना चाहिए।
चेहरे पर मास्क लगाते समय ध्यान रखें ये सावधानियां-
-मास्क गीला होने पर उसे तुरंत बदल दें। गीला मास्क पहनने से चेहरे पर इरिटेशन और खुजली जैसी समस्या हो सकती है। याद रखें चेहरे पर हमेशा साफ और सूखे मास्क का ही इस्तेमाल करें।
-अगर आप कहीं बाहर जा रहे हैं तो अपने साथ एक एक्स्ट्रा मास्क रखें। जरूरत पड़ने पर किसी दूसरे का मास्क लगाना या उसे देना आपको संक्रमण की चपेट में ला सकता है।
-बाजार में कई तरह के फैब्रिक्स वाले मास्क उपलब्ध हैं, लेकिन कॉटन से बने मास्क त्वचा के लिए सुरक्षित हो सकते हैं । इसे पहनने से आपकी त्वचा नुकसान से बची रहती है।
-चेहरे पर मास्क लगाते समय भूलकर भी चेहरे पर हैवी मेकअप न लगाएं। ऐसा करने से आपकी त्वचा को दाग-धब्बे और ऐक्ने जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं।
-व्यक्ति मास्क का उपयोग अपने मुंह और नाक को अच्छी तरह से ढकने के लिए करता है ताकि हवा के माध्यम से फैलेनवाले इस संक्रमण से बचाव हो सके। लेकिन इसके लिए यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि मास्क बहुत टाइट ही हो। जरूरत से ज्यादा टाइट मास्क आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है, ऐसा करने से बचें।
-मास्क उतारने के बाद चेहरे को किसी सौम्य साबुन से रोजाना दिन में दो बार धोएं। ऐसा करने से आप त्वचा संबंधी कई समस्याओं से बचे रहेंगे।
-संवेदनशील त्वचा वाले लोग मास्क उतारने के बाद हाइपोएलर्जेनिक मॉइस्चराइजर चेहरे पर लगाएं,ऑइटमेंट बेस वाले मॉइस्चाइजर के इस्तेमाल से बचें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
