August 06, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    खाना खजाना / शौर्यपथ /लॉकडाउन के बाद अनलॉक होते शहरों में चाय पोहे और जलेबी जैसे नाश्‍ते की दुकानें खोलने के भी निर्णय लि‍ए जा रहे हैं। इंदौर के बेहद पॉपुलर पोहा- जलेबी की दुकानें खुलने के बाद ट्व‍िटर पर जलेबी ट्रेंड कर रही है। सोशल मीडि‍या पर भी जलेबी और पोहा की बातें हो रही हैं।
    ऐसे में आज आपको बताएंगे आखि‍र कैसे बनती है जलेबी। जानते हैं जलेबी बनाने की वि‍धि‍।

    जलेबी दो पारंपरिक और झटपट तरीके से बनती है। पारंपरिक विधि में, मैदा और दही से घोल बनाया जाता है और उसे 24 घंटे के लिए फरमेंट किया जाता है। पारंपरिक विधि द्वारा तैयार की गई जलेबी का स्वाद बेहतर होता है।

    तो जलेबी घर पर बनाने के लिए मुख्य-3 स्टेप हैं; पहले स्टेप में, मैदा और दही से घोल तैयार किया जाता है, दूसरे स्टेप में चाशनी बनायीं जाती है, और अंतिम स्टेप में, घोल में से गर्म तेल में सीधे जलेबी बनाकर कुरकुरी होने तक तली जाती है और फिर गर्म चाशनी में डुबोयी जाती है।

    घोल बनाने की सामग्री:
    1/2 कप मैदा
    1 टेबलस्पून कॉर्न स्टार्च (कॉर्न फ्लोर) या अरारूट पाउडर
    1/4 टीस्पून बेकिंग पाउडर
    एक चुटकी हल्दी पाउडर (पीला रंग पाने के लिए)
    1/4 कप दही
    1/4 कप पानी

    चाशनी बनाने की सामग्री:
    1/2 कप शक्कर
    1/4 कप + 2 टेबलस्पून पानी
    1 टी स्पून नींबू का रस
    एक चुटकी इलायची पाउडर
    5-7 केसर की किस्में, वैकल्पिक
    एक कटोरे में 1/2 कप मैदा छान लें। उसमें 1 टेबलस्पून कॉर्न स्टार्च (कॉर्न फ्लोर), 1/4 टी स्पून बेकिंग पाउडर, एक चुटकी हल्दी पाउडर और 1/4 कप दही डालें।
    जरूरत के अनुसार पानी (लगभग 1/4 कप) डालें और गाढ़ा घोल (इडली के घोल की तुलना में थोड़ा मोटा) बना लें। घोल में कोई गांठ ना रहे।
    घोल को एक प्लेट या एक ढक्कन से ढककर 24 घंटे के लिए कमरे के तापमान पर (किचन के काउंटर टॉप पर ही रखे) फरमेंट होने के लिए (खमीर उठाने के लिये) रखे। 24 घंटे के बाद, ढक्कन हटा दें।
    घोल को एक चम्मच से अच्छी तरह से फैंट लें।
    जलेबी बनाने की बोतल या (एक खाली सोस की बोतल) या एक जिपलॉक बेग (या कोई भी मोटी प्लास्टिक की बेग) में घोल डालें।

    जलेबी के लिए चाशनी बनाने की विधि
    एक गहरे पतीले या पैन में चीनी, केसर की किस्में, इलायची पाउडर और पानी डालें और मध्यम आंच पर पकने के लिये रखे।
    इसे तब तक पकाइये जब तक कि हल्की 1-तार की चाशनी हो जाये।
    जब 1-तार की चाशनी हो जाये तब नींबू का रस डालें। अच्छी तरह से मिलाएं और गैस बंद कर दें। चाशनी तैयार है। (अगर चाशनी ठंडी हो तो जब आप जलेबी बनाना शुरू करे तब चाशनी को गर्म रखने के लिए कम आंच पर रख दें ताकि अगले स्टेप में जब जलेबी चाशनी में डुबाये तब वे गर्म रहें।)

    जलेबी को तलने के लिए एक कड़ाही में मध्यम आंच पर घी/तेल गर्म करें। इस विधि में तलने के लिए तेल + 2 टेबलस्पून घी का उपयोग किया है। तेल तलने के लिए तैयार है या नहीं उसकी जांच करने के लिये घोल की एक बूंद गर्म तेल में डालें और अगर यह रंग बदले बिना ही तुरंत सतह पर आती है तो तेल तलने के लिए तैयार है। इसके बाद जिपलॉक बैग को दबाते हुए गोल गोल घूमा के जलेबी बनाये।

    उन्हें हल्का सुनहरा और कुरकुरा होने तक तले।
    उन्हें तेल में से निकालें और तुरंत ही गर्म चाशनी में डाल दें। सिरप (चाशनी) गर्म या थोड़ा गर्म होंना चाहिये, यह ठंडा नहीं होना चाहिए। उन्हें लगभग दो मिनट के लिए सिरप में रखें। एक मिनट के बाद पलट दें। अब जलेबी खाने को तैयार है।

    शौर्यपथ / भोजन के साथ कई लोग नियमित दही लेते है, लेकिन जो लोग इसे अब तक खाना पसंद नहीं करते हैं, दही में छुपे सेहत और सुंदरता के राज जानने के बाद वे लोग भी इसे रोजाना खाना शुरू कर देंगे। आइए, जानते हैं दही के गुण -
    1 दही के रोजाना सेवन से शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। दही में अजवाइन मिलाकर पीने से कब्ज की शिकायत दूर होती है।
    2 गर्मी के मौसम में दही की छाछ या लस्सी पीने से पेट की गर्मी शांत होती है। इसे पीकर बाहर निकले तो लू से भी बचाव होता है।
    3 दही पाचन क्षमता बढ़ाता है। दही में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में होता है। इसे रोजाना खाने से पेट की कई बीमारियां ठीक हो जाती हैं।
    4 दही का रोजाना सेवन सर्दी और सांस की नली में होने वाले इंफेक्शन से बचाता है।
    5 अल्सर जैसी बीमारी में दही के सेवन से विशेष लाभ मिलता है।
    6 मुंह में छाले होने पर दही का कुल्ला करने से छाले ठीक हो जाते हैं।

    सेहत / शौर्यपथ / हममे से अधिकतर लोग खाना खाने के बाद सौंफ खाना पसंद करते है। वैसे भी सौंफ माउथ फ्रेशनर का भी काम करता हैं। सौंफ के सेवन से मुंह की दुर्गंध से भी छुटकारा मिलता है, इसके अलावा भी सौंफ के कई फायदे हैं। दरअसल, सौंफ औषधीय गुणों से भरपूर होती है, खाने के बाद इसके सेवन से भोजन पचाने में आसानी होती है। ऐसे कई अन्य गुणों के लिए सौंफ जानी जाती हैं। आइए जानते हैं सौफ के पानी के फायदों के बारे में
    सौंफ का पानी पेट की कई समस्याओं से निजात दिलाता है। इससे आपको पेट से जुड़ी समस्या से राहत मिलती है। जैसे एसिडिटी और पेट में गैस की समस्या से आप परेशान हैं, तो सौंफ का पानी आपको नियमित रूप से पीना चाहिए। इससे आपको राहत मिलेगी।
    वजन घटाना चाहते है, तो सुबह खाली पेट सौंफ के पानी का सेवन करना आपके लिए बहुत फायदेमंद है। सौंफ के पानी से
    वजन घटाने में मदद मिलती है। इसे आप नियमित सुबह के समय खाली पेट पीएं। यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है, जिससे शरीर अधिक फैट को कम करता है। इसके लिए सौंफ को रातभर पानी में भिगोकर रखें फिर इसका सुबह-सुबह सेवन करें।
    यदि मासिक धर्म के दर्द से परेशान है तो सौंफ का पानी आपके बहुत काम आ सकता है। इससे मासिक धर्म के समय ऐंठन और दर्द से राहत मिलती है।
    सौंफ का पानी शरीर को डिटॉक्स करने में भी बहुत मददगार होता है। इसमें फाइबर पाया जाता है जो शरीर के विषैले पदार्थ को बाहर निकालने में मदद करता है। और शरीर को अंदर से साफ करता है।

    सेहत / शौर्यपथ /सुबह उठते ही कुछ ऐसे काम है जिन्हें यदि आपने कर लिया तो आपका दिन अच्छा व्यतित होना सुनिश्चित हो जाता है। आइए,जानते हैं ऐसे ही 5 कामों के बारे में जिन्हें करके आपको अपने दिन की शुरूवात करनी चाहिए -
    आइए जानें,ऐसे ही 5 तरीके जिनके साथ करें दिन की शुरुआत...
    1. सुबह उठते ही सबसे पहले आधा लीटर ठंडा पानी पिएं। खाली पेट ठंडा पानी पीने से मेटाबॉलिज्म यानी कि पाचन दुरूस्त रहने में मदद मिलती है।
    2. खाली पेट छह से दस बादाम और अखरोट खाएं, इससे कुछ इंजाइम्स बनते हैं जो मेटाबॉलिज्म बढ़ाने में सहायक होते हैं।
    3. हमेशा थोड़ा भारी ब्रेकफास्ट करें, इससे आपको दोपहर के खाने तक ऊर्जा की कमी महसूस नहीं होगी। आपका ब्रेकफास्ट ऐसा हो जो कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन से भरपूर हो।
    4. बादाम और अखरोट ऊर्जा के भंडार हैं। यदि आप रोजाना बादाम आरे अखरोट नहीं खा पाते हैं तो दिन भर थोड़ी-थोड़ी मूंगफली भी खा सकते हैं।
    5. सुबह उठ कर चाहे 10 मीनिट ही सही लेकिन मेडिटेशन जरूर करें। इससे आपके विचार संतुलित हो जाएंगे और दिमाग शांत रहेगा।

    सेहत / शौर्यपथ /अगर आपकी मम्‍मी या सासू मां मधुमेह से ग्रस्‍त हैं और हर बार की तरह इस बार भी करवा चौथ का व्रत रखने की जिद पर अड़ी हैं, तो आपको रखना होगा उनका खास ख्‍याल।
    डायबिटीज यानी मधुमेह एक जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है, जिसमें खून में शुगर का स्तर प्रभावित होता है। इसके पीछे इन्सुलिन कम बनने या इंसुलिन का शरीर द्वारा इस्तेमाल न हो पाना दोषी होता है। डायबिटीज के यूं तो कई कारण हैं, लेकिन खराब और अस्वस्थ जीवनशैली सबसे प्रमुख कारण है। अगर आप व्यायाम नहीं करतीं हैं या मोटापे से ग्रस्त हैं तो आपका डायबिटीज का जोखिम बढ़ जाता है।
    डायबिटीज सिर्फ एक लाइलाज बीमारी ही नहीं है, बल्कि अन्य बीमारियों की गंभीरता को भी बढ़ा देती है। एक डायबिटीज के मरीज को बहुत सावधानी बरतनी होती है। जैसे दिन में हर दो से तीन घण्टे पर छोटी मील लेना, व्यायाम करना, नियमित रूप से ब्लड शुगर लेवल जांचना और चिंता मुक्त रहना। आहार के लिए भी बहुत परहेज किया जाता है। साथ ही ग्लूकोज के सीधे सेवन से बचा जाता है।
    ऐसे में चिंता यह है कि एक डायबिटीज का मरीज दिन भर उपवास कैसे रख सकता है! करवा चौथ का व्रत सोलह से अठारह घण्टे का उपवास होता है जिसमें कई संस्कृतियों में पानी भी नही पिया जाता।
    दिन भर का उपवास यूं तो शरीर को डिटॉक्स करने के लिए अच्छा उपाय है, लेकिन डायबिटीज में ऐसा नहीं है। मधुमेह से ग्रस्‍त व्यक्ति को शुगर लेवल नियंत्रित करने के लिए थोड़ी-थोड़ी देर पर मील्स लेनी जरूरी होती हैं। तो ऐसे में मधुमेह से ग्रस्‍त आपकी मम्‍मी या सासू मां करवा चौथ का व्रत कैसे रखेंगी?
    घबराने की जरूरत नहीं है, आप उनके स्वास्थ्य से समझौता किये बिना ही उनकी आस्‍था में उनका साथ दे सकती हैं। हम आपको बता रहे हैं वे तरीके जिनसे वे व्रत भी रख सकेंगी और उनकी सेहत को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा।
    व्रत से पहले खाएं ये कुछ खास चीजें
    सूर्योदय के साथ ही करवा चौथ के व्रत की शुरुआत होती है, और चंद्रमा निकलने के बाद ही व्रत खोला जाता है। व्रत शुरू करने से पहले सभी महिलाएं भोजन करती हैं, जिसे सरगी कहते हैं। पारम्परिक रूप से सास अपनी बहू के लिए सरगी बनाती है, जिसमें मिठाई, सेवईं, मेवे और फल इत्यादि होते हैं।
    लेकिन अगर आप डाय‍िबिटिक हैं तो आपकी सरगी बिल्कुल अलग होगी। अपनी सरगी में प्रोटीन और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट शामिल करें। प्रोटीन पचने में समय लेता है, जिससे आपके शरीर को लम्बे समय तक ऊर्जा मिलती रहेगी और हाइपोग्लाइसीमिया की स्थिति नहीं आएगी। हाइपोग्लाइसीमिया का अर्थ है खून में ग्लूकोज की कमी।
    आप सुबह सरगी के रूप में दही, दूध, ओट्स, जौं या बाजरे की रोटी और ड्राई फ्रूट्स लें। अगर आपकी शुगर नियंत्रित रहती है तो आप फल भी ले सकती हैं।
    व्रत तोड़ने के लिए
    व्रत तोड़ने के लिए भी पारंपरिक व्यंजनों से दूरी बनाए रखें। तले, भुने और मसालेदार खाने से आपके शरीर मे एकदम से कार्बोहाइड्रेट बढ़ेगा जिससे हाइपरग्लाइसीमिया की समस्या हो जाएगी। व्रत तोड़ने के लिए ताजा फलों का जूस पियें। उसके बाद फाइबर युक्त भोजन थोड़ा-थोड़ा कर के, 15 से 20 मिनट के गैप पर खाएं।
    ट्रान्स फैट और सिंपल कार्बोहाइड्रेट्स से दूर ही रहें।
    इन बातों का रखें ख्याल-
    अगर आपकी डायबिटिक मां या सास जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है, वह व्रत रखती हैं, तो उन्हें निर्जला व्रत न रखने दें। दिन में पानी, नारियल पानी, जूस और चाय इत्यादि देती रहें। याद रखें, किसी भी पूजा या व्रत में सबसे महत्वपूर्ण मन की पवित्रता और श्रद्धा होती है।
    अगर आपकी शुगर अक्सर लो हो जाती है तो दिन में दूध, चाय, जूस इत्यादि ले लें।
    व्रत से एक दो दिन पहले से ही डाइट कम कर लें ताकि शरीर कम ग्लूकोज के लिए तैयार हो जाये।
    चक्कर आएं, बहुत कमजोरी महसूस हो तो दूध या नींबू पानी ले लें।
    अपनी सेहत का ख्याल रखें क्योंकि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है।

    धर्म संसार /शौर्यपथ / कोरोना काल में करवा चौथ का पावन पर्व आज बुधवार को मनाया जाएगा। अखंड सुहाग के निमित्त महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी। चंद्रोदय के बाद विधिपूर्वक पूजन करके अर्घ्य देंगी। परंपरा के अनुसार पति को चलनी से निहारने के बाद व्रत का पारण करेंगी।
    हर सुहागिन के लिए प्रेम का प्रतीक करवा चौथ खासा मायने रखता है। लेकिन इस बार कोरोना कालखंड ने पर्व के प्रति आस्था, उल्लास को सीमित कर दिया है। इस का प्रभाव पारंपरिक पूजन, श्रृंगार, आभूषमों और कपड़ों पर दिख रहा है। संक्रमण का भय, सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन और कोरोना के प्रसार ने पर्व की रौनक कम कर दी है। लेकिन महिलाएं परंपरा के अनुसार पूजन अर्चन करके कोरोना से अपने सुहाग की रक्षा की कामना करेंगी।
    पैर छूकर आशीर्वाद से परहेज
    व्रत औऱ पूजन में महिलाएं पहले गले मिलकर और पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करती थी, लेकिन अब सोशल डिस्टेंसिंग के कारण पैर छूने से परहेज करेंगी। पति की ओर से दिए जाने वाले उपहार में इस बार डिजाइनर मास्क औऱ सेनिटाइजर दिए जाएंगे। करवा चौथ में पूजा के प्रसाद भी बाजार से ना मंगाकर घर पर ही शुद्ध प्रसाद बना लें।
    यूट्यूबर पर सुनेंगी कथाएं: इस बार महिलाएं सामूहिक पूजा में शामिल न होकर यूटयूब, लाइव वीडियो कॉल में कथाएं सुनेंगी। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए इस तरह की सावधानी रखना बहुत जरूरी है।
    करवा चौथ पूजा मुहूर्त
    पूजा समय शाम - शाम 6:04 से रात 7:19
    उपवास समय सुबह - शाम 6:40 से रात 8:52
    चौथ तिथि - सुबह 3:24 से 5 नवंबर सुबह 5:14 तक
    चंद्रमा का उदय - 4 नवंबर रात 8.16 से 8:52 तक
    इस व्रत में पूरे दिन निर्जला रहा जाता है। व्रत में पूरा श्रृंगार किया जाता है। महिलाएं दोपहर में या शाम को कथा सुनती हैं। कथा के लिए पटरे पर चौकी में जलभरकर रख लें। थाली में रोली, गेंहू, चावल, मिट्टी का करवा, मिठाई, बायना का सामान आदि रखते हैं। प्रथम पूज्य गणेश जी की पूजा से व्रत की शुरुआत की जाती है। गणेश जी विघ्नहर्ता हैं इसलिए हर पूजा में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। इस बात का ध्यान रखें कि सभी करवों में रौली से सतियां बना लें। अंदर पानी और ऊपर ढ़क्कन में चावल या गेहूं भरें। कथा के लिए पटरे पर चौकी में जलभरकर रख लें। थाली में रोली, गेंहू, चावल, मिट्टी का करवा, मिठाई, बायना का सामान आदि रखते हैं। प्रथम पूज्य गणेश जी की पूजा से व्रत की शुरुआत की जाती है। गणेश जी विघ्नहर्ता हैं इसलिए हर पूजा में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। इसके बाद शिव परिवार का पूजन कर कथा सुननी चाहिए। करवे बदलकर बायना सास के पैर छूकर दे दें। रात में चंद्रमा के दर्शन करें। चंद्रमा को छलनी से देखना चाहिए। इसके बाद पति को छलनी से देख पैर छूकर व्रत पानी पीना चाहिए।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / नवंबर माह ज्योतिष के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस महीने कई ग्रहों की चाल बदल रही है। जिनमें से एक गुरु बृहस्पति देव भी शनि की राशि मकर में गोचर करेंगे। गुरु दिवाली बाद मकर राशि में 20 नवंबर (शुक्रवार) को प्रवेश करेंगे। बृहस्पति देव को देवताओं का गुरु और सुख-सुविधाओं, संपत्ति और धन का कारक माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, गुरु ग्रह के राशि परिवर्तन से कुछ राशियों पर सकारात्मक तो कुछ राशियों को नाकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे। जानिए इस राशि परिवर्तन से किन राशियों को होगा लाभ-
    1. मेष राशि- गुरु के राशि परिवर्तन से मेष राशि के जातकों को सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। माना जा रहा है कि रोजी-रोजगार में तरक्की के योग बनेंगे और वैवाहिक जीवन में खुशहाली बढ़ेगी। छात्रों को भी खुशखबरी मिल सकती है।
    2. मिथुन राशि- माना जा रहा है कि इस राशि परिवर्तन के दौरान इस राशि के जातकों के अटके हुए कार्यों में तेजी आएगी। व्यापार में भी शुभ परिणाम मिल सकते हैं। बेरोजगार युवाओं को रोजगार के भी अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
    3. कन्या राशि- कन्या राशि के जातकों के लिए गुरु का राशि परिवर्तन खुशखबरी लेकर आ सकता है। माना जा रहा है कि इस गोचर के दौरान जातकों को नए अवसर प्राप्त होंगे और घर-वाहन का भी सपना पूरा हो सकता है। रुठा मित्र भी जिंदगी में वापस आ सकता है।
    4. तुला राशि- तुला राशि के जातकों को इस गोचर के दौरान शुभ फल की प्राप्ति हो सकती है। पारिवारिक सुख में बढ़ोत्तरी के साथ संतान के विवाह की समस्या खत्म हो सकती है। घर में नए मेहमान के आगमन का शुभ समाचार मिल सकता है।
    5. कुंभ राशि- इस राशि के जातकों के लिए यह राशि परिवर्तन धन लाभ के योग बना सकता है। पुराने निवेश में लाभ होने के साथ ही व्यापार में भी धन लाभ हो सकता है। जमीन में निवेश के लिए भी यह समय उत्तम है।
    6. मकर राशि- गुरु के राशि परिवर्तन से इस राशि के जातकों के धार्मिक यात्रा पर जाने के योग बनेंगे। शिक्षा के जुड़े क्षेत्र में नई पहचान बन सकती है।

    भिलाई / शौर्यपथ / कब्ज़ा एक ऐसा शब्द जो आदमी की हैसियत देख कर प्रशासन की कार्यवाही निर्भर कर्ता है . अगर कब्जाधारी इंसान म्वार्ग हो तो निगम या तो जुर्माना वसूल कर्ता है और अतिक्रमण हटाने की ताकीद कर्ता है या फिर निगम का तोडू दस्ता पूरी फौज के साथ आकर अवैध कब्ज़े को हटा देता है क्योकि ऐसे कब्जाधारी कमजोर व माध्यम वर्ग के होते है जिस पर निगम प्रशासन की सख्ती कार्य करती है किन्तु अगर कब्जाधारी रसूखदार हो या धनवान हो तो कब्ज़ा करने में आसानी और कार्यवाही में लेटलतीफी आम बात हो जाति है . जी हाँ ऐसा ही कुछ मामला भिलाई निगम के आकाश गंगा क्षेत्र का है जहां के निगम काम्प्लेक्स में कई दुकानदारों द्वारा आम जनता की सुविधा के लिए बने बरामदे को कब्ज़ा कर कच्चा / पक्का निर्माण कर दिया गया और भिलाई निगम के अधिकारी सिर्फ देखते है और मौन रहते है क्योकि कब्जाधारी के रसूख के आगे शासन के सारे नियम एक कोने में रखे रह जाते है .
    मामला है आकाश गंगा भिलाई के निगम काम्प्लेक्स का जहाँ निगम प्रशासन द्वारा निर्मित काम्प्लेक्स के डी ब्लाक में पारस ज्वेलर्स के नाम से संस्थान संचालित हो रहा है . यह संस्थान साल डो साल पहले ही बना है किन्तु भवन किस नियम के तहत बना है ये भवन अनुज्ञा अधिकारी भिलाई निगम को भी पता नहीं भवन अनुज्ञा अधिकारी के अनुसार किसी भी व्यवसायिक भवन के निर्माण के लिए भवन अनुज्ञा भिलाई निगम के मुख्य कार्यालय से प्रदान की जाति है किन्तु डो साल पहले बने पारस ज्वेलर्स का कोई रिकार्ड ऑनलाइन सिस्टम में उपलब्ध नहीं है जबकि 2017 से भवन अनुज्ञा ऑनलाइन पद्दति से हो रही है . भवन अनुज्ञा अधिकारी के अनुसार ऑफ लाइन में निरिक्षण करने पर ही ज्ञात होगा की निर्माण किस नियमके तहत हुई है .
    निगम के अधिकारियो ने यह भी बताया की दूकान की साइज़ अनुमानत: 80 वर्गफीट है किन्तु निर्माण को देखने से ही साफ़ प्रतीत होता है की निर्माण कम से कम 200 वर्गफीट पर किया गया है और आम जनता के लिए निर्मित पब्लिक स्पेस बरामदे पर भी अवैध कब्ज़ा कर निर्माण को अंजाम दिया गया है .
    इस बारे में जब जोन आयुक्त सुनील अग्रहरी से चर्चा र्की गयी तो उनके अनुसार इस बात की जानकारी नहीं कि किस नियम के तहत निर्माण हुआ है किन्तु मामले की जाँच कर उचित कार्यवाही की जाएगी और अगर अवैध रूप से निर्माण हुआ है तो निश्चित ही नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी .
    अब देखना यह है की जिस तरह गरीबो के अतिक्रमण पर निगम प्रशासन कार्यवाही में तत्परता दिखाती है वैसी ही तत्परता पारसा ज्वेलर्स के मामले पर भिलाई निगम प्रशासन और जोन 1 कार्यालय दिखाएगी या नहीं ?

    रायपुर/ शौर्यपथ / 

     

      मुख्यमंत्री  बघेल ने प्रसिद्ध साहित्यकार, भाषाविद् और छत्तीसगढ़ राज्य-गीत के रचयिता डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा को उनकी जयंती पर उन्हें नमन किया है। 4 नवम्बर को डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा की जयंती है। मुख्यमंत्री ने डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा को याद करते हुए कहा है कि डॉ. वर्मा बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने कवि, चिंतक, उपन्यासकार, नाटककार, सम्पादक और मंच संचालक जैसी कई भूमिकाओं में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। अंग्रेजी में भी उन्होंने अपनी रचनाएं लिखीं। अपनी ओजपूर्ण वाणी और अकाट्य तर्कों से वे किसी को भी पलभर में प्रभावित करने की क्षमता रखते थे। युवा उत्सव के समारोह में उन्होंने अपने विचारों से तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू को भी गहराई तक प्रभावित किया था। ’अरपा-पइरी के धार, महानदी हे अपार......’ के रूप में उन्होंने अमर रचना दी है, जिसमें छत्तीसगढ़ महतारी का वैभव एक बारगी साकार हो उठा है। यह गीत डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा की पहचान और छत्तीसगढ़ का मान बन गया है। उनकी कलम से निकला यह गीत राज्य गीत के रूप में आज बस्तर से लेकर सरगुजा तक छत्तीसगढ़वासियों की आत्मा का गान बन चुका है। छत्तीसगढ़ की ऐसी वंदना उनका सच्चा सपूत ही कर सकता है।

        मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि डॉ.नरेंद्र देव वर्मा ने जो भी लिखा, वह लोगों की अंतरआत्मा में उतर गया। उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ के जनजीवन तथा संस्कृति का सजीव चित्रण मिलता है। उनके हिंदी उपन्यास ‘सुबह की तलाश‘ जब छत्तीसगढ़ी में अनुवाद के बाद ‘‘सोनहा बिहान‘‘ के रूप में लोगों के बीच रंगमंच के माध्यम से पहुंचा, तब इसने आम लोगों में सुनहरी सुबह के साकार होने की आशा जगा दी। सही अर्थों में वे छत्तीसगढ़ के सोनहा बिहान के स्वप्नदृष्टा थे। उन्होंने ‘‘छत्तीसगढ़ी भाषा व साहित्य का उद्विकास‘‘ विषय पर शोध किया और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने छत्तीसगढ़ी गीत संग्रह ‘अपूर्वा’, हिंदी उपन्यास ‘सुबह की तलाश’ जैसे कई ग्रंथों की रचना की। उनका लिखा ‘मोला गुरु बनई लेते छत्तीसगढ़ी प्रहसन’ अत्यंत लोकप्रिय हुआ। डॉ. वर्मा ने छत्तीसगढ़ी भाषा-अस्मिता को बनाए रखने और यहां की संस्कृति को विशिष्ट पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए उनका यह अमूल्य योगदान हमेशा याद किया जाता रहेगा।

    रायपुर / शौर्यपथ /राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने आज शाम रायपुर के बूढ़ा तालाब-स्वामी विवेकानंद सरोवर का भ्रमण किया। उन्होंने बूढ़ा तालाब में नौका विहार भी किया। इस अवसर पर परिसर में रंगबिरंगी रोशनी की गई और आतिशबाजी भी की गई। राज्यपाल ने कहा कि ऐतिहासिक बूढ़ा तालाब रायपुर ही नहीं पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव है। इस अल्प अवधि में सौंदर्यीकरण करने के पश्चात एक सुंदर स्वरूप में शहरवासियों के लिए प्रस्तुत किया गया। इसके लिए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल, महापौर श्री एजाज ढेबर तथा नगर निगम आयुक्त श्री सौरभ कुमार बधाई के पात्र हैं। रायपुर शहर के अंदर शहरवासियों के लिए पर्यटन तथा सहपरिवार समय व्यतीत करने के लिए एक सुंदर जगह है। अभी तक छत्तीसगढ़वासी छत्तीसगढ़ से बाहर दूसरे राज्यों में पर्यटन के लिए जाते थे। मगर अब शासन के प्रयासों के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ में ही कई सुंदर पर्यटन स्थल विकसित हो रहे हैं। इससे हमारे प्रदेश के ही नहीं दूसरे प्रदेश के लोग भी पर्यटन के लिए आएंगे और निश्चित ही प्रदेश की राजधानी रायपुर देश में प्रथम स्थान पर सबसे खुबसूरत शहर के रूप में जाना जाएगा। राज्यपाल ने महापौर एवं जिला प्रशासन को ऐतिहासिक बूढ़ेश्वर मंदिर को विकसित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर वरिष्ठ विधायक  सत्यनारायण शर्मा, विधायक  कुलदीप जुनेजा, सभापति  प्रमोद दुबे, रायपुर नगर निगम के पार्षदगण तथा कलेक्टर  एस. भारतीदासन और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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