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जांजगीर-चाम्पा । शौर्यपथ । ग्राम पंचायत तुलसी सरपंच पर बेजाकब्जा करने और दूसरे की जमीन को गोठान के लिए चिन्हांकित करने का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत कलेक्टर व एसपी से करते हुए कार्रवाई की मांग की है। ग्राम तुलसी निवासी बालाराम ने कलेक्टर और एसपी से की शिकायत में बताया है कि सरपंच शिवमंगल सिंह टंडन द्वारा खुद गांव की सरकारी जमीन पर कब्जा किया गया है। शिकायत में कहा है जब गांव में गोठान बनाने के लिए जमीन चिन्हांकन की बात आई तो चुनावी रंजिश रखते हुए उनके जमीन को गोठान के लिए चिन्हांकित कर दिया गया। उनके पिता दुखीराम ने अपने जीवन काल मे मकान बाड़ी बनाकर जिस पट्टे की जमीन पर गुजर बसर किया जा रहा है उसे गोठान के लिए चिन्हांकित किया गया है। जबकि सरपंच द्वारा दो स्थानों के जमीन पर बेजाकब्जा कर खेती की जा रही है। बलराम ने बताया कि सरपंच द्वारा उसे चुनाव में वोट नहीं देने के नाम पर रंजिश रखते हुए उसी की जमीन पर गोठान बनाने के लिए प्रस्ताव किया गया है। उन्होंने कलेक्टर और एसपी से मामले की शिकायत करते हुए सरपंच का भी अतिक्रमण हटाए जाने की मांग की है। पंचायती राज अधिनियम के तहत बेजाकब्जा करने पर पद से हटाने का प्रावधान है। पंचायत राज अधिनियम में पंचायत प्रतिनिधियो के द्वारा शासकीय भूमि अथवा भवन पर बेजाकब्जा किये जाने पर पद से हटाए जाने का प्रावधान है। मगर मामले में उचित कार्यवाही नही होने के कारण पंचायत प्रतिनिधियों के हौसले बुलंद रहते है। जबकि सही कार्यवाही की जाए तो जिले के की पंच, सरपंच, जनपद सदस्य इस अधिनियम के तहत अयोग्य घोषित हो सकते है।
दुर्ग । शौर्यपथ । दिनांक 19 10 2020 को ग्राम सैलूद पाटन ब्लाक में गोंडवाना की मातृ शक्तियॉ एकजुटता, जागरुकता एवं महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर चर्चा एवं मार्गदर्शन के लिए समाजसेवी राकेश ठाकुर की उपस्थिति में बैठक किया गया । बैठक की शुरुआत आदिशक्ति बुढ़ा देव की पूजा अर्चना सगाजनों की उपस्थिति में किया गया तत्पश्चात समाजसेवी राकेश ठाकुर ने कहा कि सशक्त समाज, सशक्त संगठन से बनता है और संगठन के लिए जागरुकता जरूरी है समाज में जागरूकता मातृशक्ति आस्था एवं सरलता से ला सकती है क्योंकि जागरूकता ही सामाजिक उत्थान के लिए एक सशक्त माध्यम है चर्चा के दौरान महिला प्रभाग की श्रीमती संगीता ठाकुर ने कहा समाज की महिलाएं एकजुट है किंतु शासन-प्रशासन के किसी भी योजना का लाभ हमें नहीं मिलता जबकि हम सभी चाहते हैं कि शासकीय योजना का लाभ गोंडवाना समाज की महिलाओं को भी मिले जिससे समाज की महिलाएं जी आर्थिक रूप से अपने परिवार को सहयोग कर सकें। बैठक का संचालन पूर्णिमा ठाकुर एवं आभार सरोज ठाकुर द्वारा किया गया बैठक में श्रीमती संगीता ठाकुर, सुरेखा ठाकुर, सीता ठाकुर, सोनिया ठाकुर, कांति ठाकुर, शैल ठाकुर, अहिल्या ठाकुर, आशा ठाकुर, सुनीता ठाकुर, कामेश्वरी ठाकुर, चित्रलेखा ठाकुर सविता ठाकुर, संध्या ठाकुर, रीना ठाकुर गायत्री ठाकुर, लक्ष्मी ठाकुर, सोनी ठाकुर, सीमा ठाकुर लता ठाकुर शिवकुमारी ठाकुर प्रमिला ठाकुर गायत्री ठाकुर, दिप्ती ठाकुर, मैना ठाकुर, सुभद्रा ठाकुर, रेखा ठाकुर रोशनी ठाकुर भावना ठाकुर, भारती ठाकुर, ओम कुमारी ठाकुर, चमेली ठाकुर, पार्वती ठाकुर, विनय ठाकुर व विजेश बर्वे समाजसेवी के उपस्थिति में किया गया।
खेल /शौर्यपथ / इरफान पठान को लगता है कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के मौजूदा सीजन में अब भी चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) की टीम प्लेऑफ में पहुंच सकती है। पहले 10 मैचों में सीएसके की टीम सात मैचों में हार झेल चुकी है और अब उसे चार मैच और खेलने हैं। सोमवार को सीएसके को राजस्थान रॉयल्स ने सात विकेट से हराया, जिसके बाद से टीम के लिए प्लेऑफ में पहुंचने की राह काफी मुश्किल हो चुकी है। सीएसके ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में पांच विकेट पर महज 125 रन बनाए, जवाब में राजस्थान रॉयल्स ने 17.3 ओवर में तीन विकेट गंवाकर 126 रन बनाकर मैच अपने नाम कर लिया।
इरफान पठान ने कहा कि टीम धोनी के पास ऐसी टीम है, जो अभी भी इस टूर्नामेंट में वापसी कर सकती है। पठान ने स्टार स्पोर्ट्स पर कहा, 'अगर कोई टीम है जो सातवें-आठवें नंबर से टूर्नामेंट में वापसी कर सकती है, तो वो टीम सीएसके की है। सीएसके को पता है कि खिलाड़ियों को कैसे हैंडल करना है, वो खिलाड़ियों को काफी कंफर्ट देते हैं। मैं उस टीम का 2015 में हिस्सा रह चुका हूं, उनके लिए खिलाड़ी काफी महत्व रखते हैं।'
उन्होंने आगे कहा, 'इस फ्रेंचाइजी को 21-22 सालों से क्रिकेट चलाना आता है। चेन्नई लीग में भी वे ऐसे ही टीम चलाते हैं। यहां बात सिर्फ खिलाड़ियों की होती है। आप जाइये खेलिए और हम आपको बैक करेंगे।' सीएसके का यह आईपीएल का 11वां सीजन है और अगर टीम प्लेऑफ तक नहीं पहुंचती है, तो यह पहला मौका होगा, जब सीएसके की टीम अगले राउंड तक नहीं पहुंचेगी। इरफान पठान ने कहा, 'हमें पता है सीएसके की टीम सालों से बहुत अच्छी रही है, इस साल टीम में हरभजन सिंह और सुरेश रैना के नहीं होने से फर्क पड़ा है। इसके अलावा कुछ खिलाड़ी चोटिल हुए। लेकिन हमें अब भी उम्मीद है क्योंकि उनके पास धोनी की रूप में अच्छा कप्तान है, वह मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति से टीम को निकाल सकते हैं।' सीएसके को अपना अगला मैच शुक्रवार को मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेलना है।
मनोरंजन / शौर्यपथ / पॉप्युलर टीवी शो द कपिल शर्मा शो दर्शकों को खूब एंटरटेन कर रहा है। इस बार के शो अपकमिंग एपिसोड में रितेश देशमुख और जेनेलिया डिसूजा नजर आएंगे। सोनी टीवी के ट्विटर अकाउंट पर शो का प्रोमो वीडियो शेयर किया गया है, जिसमें रितेश और जेनेलिया से कपिल शर्मा मजेदार सवाल पूछते हुए नजर आ रहे हैं।
वीडियो में दिखता है कि कपिल शर्मा, जेनेलिया से पूछते हैं, रितेश एक्टर तो हैं ही साथ में वह बहुत बड़ी पॉलिटिकल फैमिली से भी हैं, तो जब आपकी शादी हुई थी तो फेरे हुए थे या फिर इन्होंने शपथ दिलवाई थी? इसके जवाब में रितेश कहते हैं, फेरे लिए थे। उन्होंने आगे कहा कि जब आप शपथ लेते हैं तो पांच साल की सरकार होती है। पांच साल में बदल जाती है। यह सुनकर कपिल शर्मा हंसने लगते हैं।
इस प्रोमो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा गया है, 'मिलिए बॉलीवुड के इस लवी डवी कपल रितेश देशमुख और जेनेलिया से और हो जाइए परफैक्टर एंटरटेनिंग रात के लिए तैयार।' इस प्रोमो वीडियो को जमकर लाइक और शेयर किया जा रहा है।
बताते चलें कि रितेश और जेनेलिया साल 2003 में फिल्म तुझे मेरी कसम के सेट पर मिले थे। यही से उनकी प्यार की कहानी शुरू हुई। दोनों ने काफी समय तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद साल 2012 में शादी कर ली थी। रितेश और जेनेलिया के दो बेटे हैं। रितेश देशमुख पिछली बार फिल्म हाउसफुल 4 में नजर आए थे, यह पिछले साल दिवाली के मौके पर रिलीज हुई थी।
शौर्यपथ / कोरोना संक्रमण की जद में फंसी लाखों जिंदगियां भले ही मौत के कुएं से निकलकर बाहर आ गई हों, लेकिन इसका शरीर की हड्डियों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। यह हम नहीं, बल्कि अलीगढ़ में संक्रमित मरीजों के स्वस्थ होने के बाद डॉक्टर्स की रिपोर्ट कह रही है। बढ़ती उम्र के साथ कमजोर हड्डियों पर कोरोना संक्रमण की दोहरी मार पड़ने लगी है। कोरोना संक्रमित हो चुके मरीजों में हड्डियों में दर्द की समस्या सबसे ज्यादा आ रही है।
दुनियाभर में आज विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस मनाया जाता है। यह हड्डी का एक ऐसा रोग है जिसमें हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। जिसके बाद ज्वाइंट्स में दर्द और कमजोरी शिकायत रहने लगती है। डॉक्टर्स के मुताबिक कोरोना संक्रमण का हड्डियों पर गहरा प्रभाव पड़ने वाला है। इस बीमारी से बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा ग्रसित होती हैं।
मगर कोरोना संक्रमण की वजह से इनपर दोहरी मार पड़ने लगी है। जो मरीज पहले इस बीमारी से काफी हद तक ठीक हो चुके थे वह दोबारा इससे ग्रसित होने लगे हैं। डॉक्टर्स ने बताया कि किसी भी कोरान मरीज को 15 से लेकर 21 दिन तक आइसोलेशन में रखा जाता है। जहां उसे पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी नहीं मिल पाती है। विटामिन डी ही एक ऐसा श्रोत है जिससे हड्डियों को मजबूती मिलती है।
क्या कहते हैं कोरोना मरीज :
इस संबंध में 20 कोरोना संक्रमित रह चुके मरीजों से बात की गई, जिसमें से 12 लोगों ने हडि्डयों के दर्द की शिकायत की। जिसमें कोरोना संक्रमित रह चुके अपर मंडला आयुक्त शमीम अहमद ने बताया कि कोरोना तो ठीक हो गया पर जिंदगी भर का दर्द दे गया है। संक्रमण के बाद से हड्डियों में सबसे ज्यादा दर्द रहने लगा है। रीढ़, घुटने और गर्दन की हडि्डयों हमेशा दर्द रहता है। वहीं 62 वर्षीय सुरेंद्र कुमार ने बताया कि हडि्डयों में दर्द की शिकायत पहले से थी, लेकिन कोरोना संक्रमित होने के बाद यह समस्या ज्यादा बढ़ गई है।
क्या है ऑस्टियोपोरोसिस बीमारी :
यह एक गंभीर बीमारी है फिर भी लोगों में इसके बारे में पता नहीं है। यह समस्या महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है, लेकिन पुरुष भी इससे अछूते नहीं है। यह हड्डियों को कमजोर और नाजुक बनाती है। जरा सी चोट लगने पर हड्डियां टूट सकती हैं। कभी-कभी झुकने, खांसने या छींकने से भी फ्रैक्चर हो सकता है। ऐसे कई कारण हैं जो इस रोग के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या को कोरोना संक्रमण और विकराल कर सकता है। खासकर बुजुर्ग लोगों का कोरोना संक्रमित होना। संक्रमण की वजह से उनपर ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या और बढ़ जाएगी। जो मरीज पहले ठीक हो चुके हैं उन्हें ऑस्टियोपोरोसिस फिर अपने जद में ले सकता है।
कोरोना संक्रमित होने की वहज से मरीजों को 21 दिन तक अस्पताल या आइसोलेशन में रहना पड़ता है। जहां उन्हें पर्याप्त मात्र में विटामिन डी नहीं मिल पाता। जो की हडि्डयों के लिए बहुत खरनाक है। जरूरी है कि आइसोलेशन के समय भी विटामिन की पर्याप्त मात्रा उन्हें दी जाए।
फिजियोथेरेपी के लिए महामारी से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही। लगातार बढ़ रही संख्या से एक अनुमान लगाया जा सकता है कि संक्रमण ने हमारी हडि्डयों को प्रभावित किया है। मरीज ठीक होने के बाद एक्सरसाइज और खानपान में सुधार करें तो कुछ हद तक समस्या कम हो सकती है।
ऑस्टियोपोरोसिस के कारण :
आधुनिक जीवनशैली, निष्क्रिय रहने की आदत, शराब और तंबाकू का सेवन, धूम्रपान, अधिक कैलोरी और जंक फूड का सेवन जैसी शहरी खान-पान की आदतें, भोजन में मिलावट और कम उम्र में मधुमेह रोग।
ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण :
कमर में दर्द की शिकायत, शरीर में लगातार थकावट, काम की इच्छा न करना, हाथ और पांव में दर्द रहना, हल्की चोट पर हड्डियों का टूटना।
सेहत / शौर्यपथ / दुघर्टनाओं और गलत जीवनशैली के कारण देश में गर्दन एवं रीढ़ की हड्डी(स्पाइनल कॉर्ड) के क्षतिग्रस्त होने की समस्याएं बढ़ रही हैं। देश में करीब 15 लाख लोगों को गर्दन अथवा स्पाइनल कॉर्ड में चोट लगने के कारण विकलांगता का जीवन व्यतीत करना पड़ रहा है। अनुमानों के अनुसार देश में हर साल स्पाइनल कॉर्ड के चोटिल होने के 2० हजार से अधिक मामले आते हैं।
ऊंचाई से गिरने, खेल-कूद और मार-पीट जैसे कई कारणों से गर्दन क्षतिग्रस्त हो सकती है और कई बार इसकी वजह से मौत भी हो सकती है। इसके अलावा गलत तरीके से व्यायाम करने और सोने-उठने-बैठने के गलत तौर-तरीकों से भी गर्दन दर्द की समस्या हो सकती है।
नयी दिल्ली के फोर्टिस एस्काट्र्स हार्ट रिसर्च इंस्टीच्यूट के ब्रेन एवं स्पाइन सर्जरी विभाग के निदेशक डा. राहुल गुप्ता के अनुसार गर्दन हमारे शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गर्दन की गतिशीलता की मदद से ही हम आगे-पीछे देखते हैं, कम्प्यूटर आदि पर काम करते हैं या किसी से बात करते हैं। गर्दन में हमारे शरीर का बहुत ही नाजुक अंग है, जिसे स्पाइनल कॉर्ड कहा जाता है, जो कई कारणों से चोटिल हो सकता है।
अगर गर्दन में चोट बहुत हल्की हो तो आराम करने या फीजियोथिरेपी से राहत मिल जाती है लेकिन कई लोगों के लिए गर्दन में चोट विकलांगता का भी कारण बन जाता है। ऐसे में जरूरी है कि गर्दन में चोट या गर्दन की किसी भी समस्या की अनदेखी नहीं करें। अगर आराम करने या दवाइयों के सेवन से भी गर्दन दर्द बढ़ता जाए या गर्दन दर्द बांहों और पैरों तक फैल जाए अथवा सिर दर्द, कमजोरी, हाथों और पैरों में सुन्नपन और झुनझुनी आए तो तुरंत न्यूरो एवं स्पाइन विशेषज्ञ से जांच और इलाज कराएं।
डा. राहुल गुप्ता बताते हैं कि कई बार जब गर्दन की हड्डी में ज्यादा कैल्शियम जमा हो जाता है जिससे हड्डी का क्षेत्र कम हो जाता है और स्पाइनल कार्ड के लिए जगह नहीं होती है। ऐसे में हल्की चोट लगने से भी स्पाइनल कार्ड क्षतिग्रस्त हो सकता है। इसके अलावा वहां पर खून की नस- वटेर्व्रल आर्टरी होती है और उसमें भी अगर चोट लगे तो गर्दन में दर्द हो सकता है।
सवार्इकल कॉर्ड में चोट लगने से गर्दन में दर्द की समस्या बहुत ही आम है और इससे काफी लोग ग्रस्त रहते हैं। लेकिन अगर क्वाड्रिप्लेजिया पैरालाइसिस होने पर मरीज को ताउम्र विकलांग जीवन व्यतीत करना पड़ सकता है। उसे बिस्तर पर ही रहने को मजबूर होना पड़ सकता है, उसे बेड सोर यानी बिस्तर पर लंबे समय तक सोने से होने वाले घाव सकते हैं और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है और वह रोजमरार् के कामकाज एवं दिनचयार् के लिए अपने परिजनों पर ही पूरी तरह से निर्भर हो जाता है।
स्पाइनल कॉर्ड में चोट लगने से उसके नीचे का हिस्सा सुन्न हो सकता है, मल-मूत्र त्यागने में दिक्कत हो सकती है और कई बार सांस लेने में भी तकलीफ हो सकती है। इसलिए गर्दन एवं सवार्इकल स्पाइन की सुरक्षा करना बहुत जरूरी है और इसमें चोट लगने या कोई दिक्कत होने पर उसकी अनदेखी नहीं करें। गर्दन को हमें हर तरह की चोट से बचा कर रखना जरूरी है और चोट लगने पर तत्काल इलाज करना जरूरी है।
डा. गुप्ता के अनुसार अगर गर्दन में चोट लगी है और हाथ-पैर तक दर्द या सुन्नपन चला गया है तो तत्काल न्यूरो एवं स्पाइन सर्जन से परामर्श करना चाहिए। स्पाइन विशेषज्ञ एक्स रे, सीटी स्कैन या एमआरआई कराने की सलाह देते हैं ताकि चोट की सही स्थिति का पता चल सके। एमआरआई से बोन, साफ्ट टिश्यू एवं स्पाइनल कार्ड सबके बारे में विस्तार से पता चलता है। सीटी स्कैन से बोन के बारे में विस्तार से पता चलता है जबकि एक्स रे हड्डी के बारे में आरंभिक जानकारी मिल जाती है जिसके आधार पर आगे की जांच कराने की सलाह दी जाती है।
ऊंचाई से गिरने पर कई बार मौके पर ही मौत हो जाती है। ऐसे मामलों में ज्यादातर सवार्इकल स्पाइन में इंज्युरी ही होती है। दुर्घटना के शिकार या उंचाई से गिरने वाले घायल व्यक्ति का तत्काल आपरेशन होना जरूरी है जिसमें उनके गर्दन की हड्डी को सीधा किया जाता है प्लेट लगाकर उसे एलाइमेंट में रखा जाता है।
कुछ चिकित्सक स्टेम सेल थिरेपी का उपयोग करते हैं। कुछ प्रयोगों में इसे सफल भी पाया गया लेकिन अभी तक इसे किसी मान्यताप्राप्त चिकित्सा संस्थान या संगठन से मान्यता नहीं मिली है। जो भी लोग इस तरह का उपचार कर रहे हैं वे एक प्रयोग की तरह इसे कर रहे हैं और हो सकता है कि कुछ लोगों को उससे फायदा हुआ हो लेकिन इससे आम तौर पर नुकसान नहीं होता है।
खाना खजाना / शौर्यपथ / आलू का चीला खाने में जितना टेस्टी होता है, बनने में उतना ही आसान भी है। इस चीले को बनाने में बेहद कम समय लगता है। व्रत के दौरान अगर आपको जोर से भूख लग जाए तो झटपट बना लें ये चटपटा चीला। तो देर किस बात की आइए जान लेते हैं क्या है इस चीले को बनाने की झटपट टेस्टी रेसिपी।
आलू का चीला बनाने के लिए सामग्री-
-2-3 कच्चे आलू कद्दूकस किए हुए
-2 हरी मिर्च
-बारीक कटा हुआ हरा धनिया
-¼ छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर
-1 बड़ा चम्मच देसी घी
-सेंधा नमक स्वादानुसार
आलू का चीला बनाने का तरीका-
आलू का चीला बनाने के लिए सबसे पहले एक बाउल में कद्दूकस किया हुआ आलू, हरी मिर्च, धनिया पत्ती, काली मिर्च पाउडर और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें। अब तवे को गर्म करके उसमें 1 चम्मच देसी घी डालें। इसके बाद गर्म तवे में आलू का मिश्रण डालकर चम्मच की मदद से तवे पर ½ सेमी मोटाई के साथ मिश्रण को गोल आकार में फैलाएं। वरना चीला टूट सकता है। अब चीले को दोनों तरफ से गोल्डन ब्राउन होने तक पकाएं। आपका आलू का चीला बनकर तैयार है। इस फलाहारी चीले को व्रत की चटनी या दही के साथ सर्व कर सकते हैं।
धर्म संसार / शौर्यपथ /नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा-आराधना की जाती है। इनकी उपासना से सिद्धियों में निधियों को प्राप्त कर समस्त रोग-शोक दूर होकर आयु-यश में वृद्धि होती है। देवी कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। बुद्धि और कौशल का विकास करने वाली मां कूष्मांडा की पूजा नवरात्र के चौथे दिन की जाती है। मां कूष्माडा की आठ भुजाएं हैं। भक्तों में मान्यता है कि मां कूष्मांडा आयु और यश भी बढ़ाती हैं। मां कूष्मांडा देवी की आराधना से रोग-शोक समाप्त हो जाते हैं।
कूष्मांडा का अर्थ है कुम्हड़ा। मां को बलियों में कुम्हड़े की बलि सबसे ज्यादा प्रिय है। इसलिए इन्हें कूष्मांडा देवी कहा जाता है।
ऐसा है मां का स्वरूप : कूष्मांडा देवी की आठ भुजाएं हैं, जिनमें कमंडल, धनुष-बाण, कमल पुष्प, शंख, चक्र, गदा और सभी सिद्धियों को देने वाली जपमाला है। मां के पास इनके अलावा हाथ में अमृत कलश भी हैर्। ंसह की सवारी करने वाली मां की भक्ति करने से आयु, यश और आरोग्य की वृद्धि होती है।
ऐसे करें पूजा : कूष्मांडा देवी योग और ध्यान की देवी भी हैं। देवी का यह स्वरूप अन्नपूर्णा का भी है। उदराग्नि को शांत करने वाली देवी का मानसिक जाप करें। देवी कवच को पांच बार पढ़ना चाहिए। माता कुष्मांडा के दिव्य रूप को मालपुए का भोग लगाकर दुर्गा मंदिर में ब्राह्मणों को इसका प्रसाद देना चाहिए। इससे भक्तों की बुद्धि और कौशल का विकास होता है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / राहु छाया ग्रह होने से इसको किसी भी राशि का स्वामित्व नहीं मिला है। यद्यपि इसे कन्या राशि का स्वामी मानते हैं। यह आर्द्रा, स्वाति और शतभिषा नक्षत्र का स्वामी है। राहु की उच्च राशि वृषभ मानी गई है और नीच राशि वृश्चिक। छाया ग्रह होने कारण राहु जिस ग्रह की राशि में होते हैं उसी के अनुसार फल देते हैं। राहु के पूर्ण दृष्टि 5, 7 एवं नौवें स्थान पर पड़ती है। यह तमोगुणी एवं अंधकार प्रिय ग्रह है। इसको पापी ग्रह की संज्ञा मिली है। राहु की स्वराशि कन्या मानी गई है। इस के मित्र ग्रह शनि और केतु हैं। सूर्य, चंद्रमा और बुध, राहु के शत्रु हैं। मंगल इसका सम ग्रह हैं। राहु का रंग धुएं की तरह होता है। यह पृथकतावादी ग्रह है। राहु कूटनीति, राजनीति, झूठ कपट, षड्यंत्र कारक ग्रह है। वायु विकार देने वाला, उत्प्रेरक (उकसाने वाला) और हवाई यात्रा कारक ग्रह है।
लोग राहु का नाम सुनकर बहुत ही अशुभ मानते हैं। लेकिन शनि की तरह यदि आपके कर्म अच्छे हैं और कर्म भाव में शनि या राहु का शुभ प्रभाव है तो आप राजनीति में अच्छा कर सकते हैं। राहु कालसर्प दोष का कारक है। जब राहु और केतु के बीच में सभी ग्रह एक और हो जाते हैं तब वह कालसर्प दोष बनता है। राहु सर्प का मुख माना गया है और केतु सर्प का पुच्छ माना गया है। यदि राहु केतु के साथ में कोई ग्रह हो या एक ग्रह बाहर हो और वह राहु-केतु से अंशों में अधिक हो तो कालसर्प दोष कट जाता है। राहु के साथ मंगल होने से अंगारक दोष बनता है। यह दोष व्यक्ति के अंदर अहं एवं क्रोध का निर्माण करता है। यह ग्रह चोट आदि भी देता है।
यदि कुंडली में पंचम या षष्ठ भाव में व्यक्ति को पेट रोग देता है। द्वितीय अथवा द्वादश भाव में राहु या शनि हो मंगल हो तो उस व्यक्ति को नेत्र पीड़ा हो सकती है। छठे भाव में राहु, केतु, शनि, मंगल के प्रभाव के पैरों में चोट आदि का भय रहता है। राहु की महादशा 18 साल होती है। यदि कुंडली में राहु अशुभ होता है तो व्यक्ति को बुरे कर्म करने को उकसाता है। सबसे पहले व्यक्ति की दिनचर्या को खराब करता है। घूमने-फिरने का शौक पैदा करता है। वाणी दोष उत्पन्न करता है और विवेकहीनता उसके अंदर आ जाती है। अच्छे-बुरे का ज्ञान नहीं रह पाता। उसको घूमना, फिरना, मांस-मदिर का शौक पड़ जाता है। यदि राहु की महादशा में आप उपरोक्त अवस्था से पीड़ित हो रहे हैं तो समझो कि आप के साथ राहु बहुत बुरा करने वाला है। अपयश, धोखा,आर्थिक हानि, मानसिक विकार एवं तलाक हो सकता है।
कुंडली में राहु अच्छी अवस्था में हो तो वह अपने महादशा में रंक से राजा बना देता है। राजनीति में राहु अपना उच्चतम स्थान रखता है और किसी साधारण व्यक्ति को भी राजा बना सकता है। यदि आपकी कुंडली में राहु अशुभ है या महादशा में अशुभ प्रभाव दे रहा है तो आप कुत्ते को दूध रोटी खिलाएं। कोढियों को भोजन दान करें। मछलियां को आटे की गोलियां खिलाएं। राहु के तांत्रिक मंत्र का जाप कराएं और अपनी दिनचर्या बदले। राहु की अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए रांगे की गोली सफेद धागे में बुधवार को गले में धारण करें। रांगा और गोमेद राहु के नकारात्मक प्रभाव को कम करते हैं। रांगा जो बर्तनों में टांका लगाने का काम आता है बहुत ही महत्वपूर्ण है। यदि किसी को राहु अत्यंत पीड़ित कर रहा हो या किसी बालक को नजर अधिक लगती हो, अज्ञात भय रहता हो तो रांगे की गोली सफेद धागे में धारण करें।
दुर्ग / शौर्यपथ / पैसा और सम्बन्ध आज की दुनिया में दो ऐसे पहलु है जो इंसान को करीब भी लाते है और दूर भी करते है कुछ ऐसा ही मामला इन दिनों दुर्ग के दो परिवारों में चल रहा है जहा शिकायतों और एफआईआर का सिलसिला लगातार दोनों पक्षों में जारी है मामला है उरला निवासी देवेन्द्रपाल सिंह लूथरा और दूसरा पक्ष शहर के दो बड़े ट्रांसपोर्टर फिरोज राठौर और सुखदेव सिंह के बीच पैसे के लेन देन को लेकर चल रहे विवाद को लेकर अपनी चरम सीमा में है क्योकि यह लेन देन तकरीबन 50 लाख का है जिसमे कुछ रकम आरटीजीएस से हुई तो कुछ रकम की लिखापढ़ी की बात सामने आ रही है इस विवाद में शहर के प्रतिष्ठित व्यक्ति परवाना बंधू दोनों एफआईआर में गवाह के रूप में सामने आये है वही आरोपी के द्वारा भी इनकम टेक्स में शिकायत कर इतनी बड़ी रकम के स्रोत की बात कही गयी है .
एफआईआर और शिकायत के इस दौर में एक और एफआईआर की बात की शंका जाहिर करते हुए देवेन्द्र पाल की पत्नी ने मोहन नगर थाने में शिकायत की और शिकायत का आधार उस काल रिकार्डिंग को बताया जिसमे देवेन्द्र पाल के बड़े भाई को गवाह द्वारा फोन पर एक और एफआईआर की बात कही गयी . देवेन्द्र पाल की पत्नी द्वारा शौर्यपथ समाचार पत्र को एक ऑडियो (काल रिकार्डिंग ) भेजा गया जिसमे एक और एफआईआर करके देवेन्द्र पाल लूथरा को घेरने की बात कही गयी वही इस बारे में जब परवाना बंधू से चर्चा हुई तो उनके अनुसार ऐसी किसी बात की अनिभिज्ञता जताया गया . किन्तु इसी बात को आधार मान कर देवेन्द्र पाल की पत्नी द्वारा धमकी देने और झूठे केस में फ़साने की की शिकायत मोहन नगर थाना में दो हफ्ते पहले कर दी गयी किन्तु आज तक इस शिकायत पर किसी तरह की कोई जाँच या कार्यवाही की जानकारी श्रीमती लूथरा को प्राप्त नहीं हुई है .
आखिर गवाह क्यों है परेशान ...
इस लाखो के लेन देन में पीडि़त व्यति द्वारा किसी भी तरह का कोई ऐसा कार्य नहीं किया गया जिससे आरोपी देवेन्द्र पाल के परिवार वालो को तकलीफ हो साल भर पहले हुई एफआईआर में जिसमे प्रार्थी फिरोज राठौर है के द्वारा अपनी शिकायत और एफआईआर के बाद न्यायालय के न्याय की उम्मीद में मौन है वही माह भर पहले सुखदेव द्वारा भी एफआईआर के बाद न्यायालय के फैसले का इंतज़ार है किन्तु इन दोनों मामले में परवाना बंधू पर धमकी और झूठे केस में फ़साने की शिकायत आखिर देवेन्द्र लूथरा की पत्नी ने क्यों की क्या एक महिला की शिकायत पर मोहन नगर पुलिस मामले को संज्ञान में लेगी या मौन रहेगी . अभी कुछ दिन पहले ही प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा महिला के साथ न्याय और सम्मान की बात को लेकर कड़े कानून बनाने की पहल की गयी किन्तु उन्ही मुख्यमंत्री के गृह जिले में एक महिला की शिकायत पर जाँच प्रक्रिया क्यों शिथिल है ...
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
