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राजनांदगांव / शौर्यपथ / कोरोना काल के बीच रिश्ते तय होने के बाद भी मुफलिसी के चलते जब बेटियों की शादी नहीं हो पा रही थी, तब मुस्लिम समाज के द्वारा तेरह जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया।
राजनंदगांव शहर की आला हजरत वेलफेयर सोसाइटी के द्वारा समाज की निर्धन परिवार की बेटियों की शादी कराई जाती हैं। विगत वर्ष 8 निर्धन परिवार की बेटियों की शादी कराई गई थी। सामूहिक शादी का आयोजन समाज के द्वारा मार्च-अप्रैल महीने के आसपास किया जाता है, लेकिन इस वर्ष हुए लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण काल के चलते सामूहिक विवाह का आयोजन नहीं किया गया था, लेकिन इस बीच कई बेटियों के रिश्ते भी तय हो गए थे और रुपयों के अभाव में उन बेटियों की शादी नहीं हो पा रही थी। तब समाज के लोगों ने शादी को लेकर बनाए गए शासन-प्रशासन के नियमों का पालन करते हुए 13 जोड़ों का इज्तेमाई निकाह करवाया है। समाज के द्वारा ऐसे परिवारों से संपर्क किया गया, जिनकी बेटियों के रिश्ते लगभग डेढ़-दो साल से तय कर रखे गए थे, लेकिन रूपयों के अभाव में रिश्ते तय होने के बाद भी शादी नहीं हो पा रही थी, तब समाज के लोग आगे आए और इन बेटियों का निकाह करवाया। वहीं इनके गृहस्थ जीवन के लिए जरूरत के सामान भी समाज के दानदाताओं की मदद से मुहैया करवाया गया। समाज के रईस अहमद शकील व अब्दुल कदिर मनिहार का कहना है कि रुपयों के अभाव में बेटियों की शादी नहीं हो पा रही थी इसी सोच और जरूरत को देखते हुए यह सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया है।
मुस्लिम समाज के द्वारा आयोजित इस इज्तेमाई निकाह में महापौर भी नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देने पहुंची और यहां महापौर हेमा देशमुख ने अपनी ओर से आशीर्वाद स्वरूप बेटियों को भेंट भी दिया। महापौर हेमा देशमुख ने कहा कोरोना के चलते जब लोग आर्थिक परेशानी से जुझ रहे हैं तब समाज के लोग किसी का घर बसा रहे हैं। महापौर ने समाज के द्वारा किये जा रहे इस कार्य की सरहाना की है।
मुस्लिम परिवारों की इन बेटियों के रिश्ते तय चुके थे और दोनों परिवार शादी की तारीख आगे टालते भी रहे, लेकिन कोरोना काल के बीच आर्थिक स्थिति बेहद बिगड़ जाने के चलते परिवार चंद लोगों के साथ भी शादी का खर्च उठाने भी सक्षम नहीं हो पाये तक समाज के लोग इन बेटियों का विवाह कराने सामने आए। जिससे परिवार के लोगों को काफी राहत मिली है।
मुस्लिम समाज के द्वारा आयोजित इस सामूहिक विवाह में शासन के गाइडलाइन का पालन करते हुए दूल्हा और दुल्हन पक्ष से चंद लोगों को ही बुलाया गया था और बिना-बाजे गाजे के सादगी पूर्ण वातावरण में निकाह संपन्न कराया गया। इस सामूहिक निकाह में राजनांदगांव जिले के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले परिवार की बेटियों की शादी संपन्न हुई है। सामूहिक विवाह के इस तरह के आयोजन से माता-पिता पर जहां आर्थिक बोझ कम होगा तो वहीं दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों पर भी रोक लगेगी
इस कार्यक्रम के दौरान महापौर हेमा देशमुख के साथ पार्षद अमीन हुड्डा, पार्षद इशाक खान, हाजी राइस अहमद शकील, अब्दुल कादिर, हाजी अकरम भाई, सिराज सिज्वी, राशिद खान, हनीफ खान, हफीज वारसी, शोहेल शेख, शुभम लालवानी आदि के साथ आला हजरत वेलफर सोसाइटी के सदस्य गण उपस्थित थे।
रायपुर / शौर्यपथ / कांग्रेस संचार विभाग के सदस्य संदीप साहू ने कहा है कि रमन सिंह के बयान से जाहिर होता है कि वे पिछड़े वर्ग से आने वाले एक सामान्य परिवार के किसान पुत्र मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी के सफलतापूर्ण नेतृत्व को पचा नहीं पा रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद भूपेश बघेल जी जिस प्रकार से छत्तीसगढ़ के अस्मिता, संस्कृति, संस्कार एवं छत्तीसगढ़ियावाद के लिए कार्य कर रहे हैं, इससे रमन सिंह को अपने पार्टी की हमेशा के लिए जनाधार खत्म होने का डर सता रहा है। रमन रूपी रावण ने जिस प्रकार 15 वर्षों से सामंतवादी सरकार चलाया। अब उसकी साम्राज्य पूरी तरह से ढहने का समय आ गया है और बौखलाहट में वह इस प्रकार बयान दे रहे हैं जो उनके पूर्णतः निराशावादी सोच को दर्शाता है। आज भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ चहुंमुखी विकास कर रहा है और अपने सभ्यता, संस्कृति, अस्मिता और पहचान को लेकर आगे बढ़ रहा है और पूरे देश के अग्रिम पंक्ति के राज्य में खड़ा है। साथ ही भूपेश बघेल जी पूरे भारतवर्ष में सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहचान बनाए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की इस सफलता से चिढ़कर रमन के अंदर का रावण जाग चुका है और इस तरह के बयानबाजी कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ की जनता इसे भलीभांति समझती है और आने वाले समय में इसे पूर्ण रूप से नकार कर जवाब देने को तैयार हैं।
दुर्ग / शौर्यपथ / पटरी पार क्षेत्र की आम जनता की वर्षों पुरानी मांग पर वार्ड क्रमांक 15 सिकोला बस्ती की जर्जर हो चुकी सड़क भाजपा शासन काल में लंबे समय से उपेक्षित थी । जिसे अब 25 लाख की अधोसंरचना मद से नवनिर्मित किया जाएगा । शहर विधायक अरुण वोरा से वार्ड वासियों ने निगम द्वारा लगातार मांग किए जाने पर भी सड़क निर्माण नहीं किए जाने की शिकायत की जा रही थी जिसे संज्ञान में लेकर विधायक वोरा ने हस्तक्षेप पर पायल मेडिकल से एफसीआई के बाजू धमधा रोड तक 345 मीटर की 6 मीटर चौड़ी सड़क का सीमेंटीकरण करवाने महापौर से चर्चा किया। अब उक्त सड़क का निर्माण किया जाएगा । जिससे क्षेत्र की हजारों जनता को आवागमन में सुविधा होगी। इसके साथ ही वार्ड 28 के पांच बिल्डिंग क्षेत्र में 17 वर्षों से लंबित जर्जर सड़क के 11 लाख के डामरीकरण कार्य का भी आज आस पास के वार्ड वासियों की मौजूदगी में महापौर धीरज बाकलीवाल के मुख्य आतिथ्य में लोक निर्माण विभाग द्वारा भूमिपूजन कर कार्य प्रारम्भ करवाया गया।
महापौर बाकलीवाल ने कहा कि नवरात्रि के सुभपर्व पर पांच बिल्डिंग एवं पटरी पार सिकोला बस्ती के नागरिकों को नई सड़कों की सौगात मिलने जा रही है। कोविड के कारण नगर निगम के निर्माण कार्यों में आई धीमी गति को अब पुनः तेजी से निष्पादित किया जाएगा व शहर में विकास नजर आने लगेंगे। उन्होंने लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक रहने की अपील करते हुए मास्क, सेनेटाइजर का इस्तेमाल करने व दुर्गा पंडाल में दर्शनार्थियों को भी आग्रह किया है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन अवश्य करें। इस अवसर पर सभापति राजेश यादव एमआईसी मेंबर व पार्षद सहित अधिक संख्या में वार्ड नागरिकगण उपस्थित थे। इस दौरान उपस्थित पार्षद सहित वार्ड निवासियों ने इस विकास कार्य के लिए महापौर बाकलीवाल जी का आभार व्यक्त किये ।
मनोरंजन / शौर्यपथ / सैफ अली खान और करीना कपूर की शादी के वक्त इब्राहिम अली खान छोटे थे। इब्राहिम और सारा अली खान दोनों ही शादी में शामिल हुए थे। दोनों की शादी से सारा की फोटो तो सभी ने देखी है लेकिन अब इब्राहिम की फोटो सामने आई है। फोटो में इब्राहिम, सैफ और करीना के पीछे खड़े नजर आ रहे हैं। इस दौरान इब्राहिम के एक्सप्रेशन्स फैन्स को काफी पसंद आ रहे हैं।
इब्राहिम ने शेरवानी और सिर पर पगड़ी पहनी हुई है। इब्राहिम को देखकर पता चल रहा है कि जब फोटो क्लिक हो रही थी तब उन्हें पता ही नहीं था कि वह भी कैमरे में कैद हो रहे हैं।
बता दें कि इब्राहिम को बहन सारा की तरह एक्टिंग पसंद है। वह टिकटॉक पर कई मजेदार वीडियोज बनाते थे। फैन्स उनके वीडियोज को पसंद भी करते थे।इब्राहिम के वीडियोज आने के बाद सभी उनके बॉलीवुड डेब्यू का इंतजार कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले सारा से उनके भाई के बॉलीवुड एंट्री को लेकर सवाल किया गया था तो उन्होंने कहा था, 'इब्राहिम बॉलीवुड में आना चाहता है, लेकिन पहले वह अपनी पढ़ाई पूरी करेगा। इसके बाद ही वह प्रोफेशनल एक्टर बनने के बारे में सोच सकता है।'
सारा ने भाई के बारे में बताते हुए कहा था कि वह फिल्म की पढ़ाई करने के लिए पहले विदेश जाएंगे, उसके बाद तय करेंगे कि कब उन्हें एंट्री करनी है।
सारा से फिर पूछा गया था कि क्या वह अपने भाई को लॉन्च करेंगी तो उन्होंने कहा था, 'मुझे नहीं पता मैं उसे लॉन्च करूंगी या नहीं। ये एक ऑप्शन हो सकता है, लेकिन फिल्मी करियर काफी बड़ा होता है। वैसे इब्राहिम फिल्मों में आने के लिए काफी एक्साइटेड है।'
वहीं एक इंटरव्यू में इब्राहिम ने बहन सारा को लेकर कहा था, 'हम दोनों के बीच में करीब 5 साल का अंतर है, लेकिन हम एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं और हल पल को खुलकर जीते हैं। हम दोनों एक दूसरे के दोस्त भी हैं।'
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / दुनियाभर में होने वाले मनोरंजन और संगीत के आयोजनों पर भी कोरोना का कहर टूटा है। ऐसे में कोरोना महामारी से लड़ते हुए इन आयोजनों को दोबारा खड़ा करने के लिए कई तरह के प्रयोग किये जा रहे हैं। कहीं सोशल डिस्टेंसिंग में तहत लोगों को दूर-दूर बैठाकर कॉन्सर्ट कराने के तरीके का उपयोग हो रहा है तो कहीं सेंसरों की मदद से लोगों के हाथ सैनिटाइज करने और उनमें दूरी बरकरार रखने के प्रयोगों पर काम किया जा रहा है। ऐसा ही एक प्रयोग ओकलाहोमा में हाल ही में किया गया। यहां एक संगीत बैंड ने प्रयोग के तहत प्लास्टिक के बुलबुले में खुद को बंद कर मंच पर प्रस्तुति दी। इतना ही नहीं बल्कि दर्शकों को भी प्लास्टिक बबल में डाला गया।
वीडियो फुटेज में दिखा अनोखा नजारा-
द फ्लेमिंग लिप्स नामक संगीत बैंड ने अपने प्रशंसकों के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया। ओकलाहोमा शहर के इस समूह के सदस्यों ने खुद को अलग-अलग प्लास्टिक बबल में डाला। गायक और वादक सभी बुलबुलों के अंदर नजर आ रहे थे। कार्यक्रम के वीडियो फुटेज में 100 पिचके हुए प्लास्टिक के बुलबुले देखे गए।
इस कार्यक्रम कोरोनावायरस के कारण भविष्य में होने वाले कॉन्सर्ट का एक परीक्षण था। इसके साथ ही एक कार्यक्रम के दौरान एक म्यूजिक वीडियो भी बनाया गया ताकि भविष्य के कॉन्सर्ट की रूपरेखा के बारे में लोगों को बताया जा सके। कार्यक्रम के दौरान इस कॉन्सर्ट में 100 दर्शक भी प्लास्टिक बुलबुले के अंदर संगीत का लुत्फ उठाते नजर आएं।
अब और इंतजार नहीं कर सकते-
ओकलाहोमा के संगीत बैंड ने इस कार्यक्रम के दौरान अपने आने वाले नए एल्बम अमेरिकन हेड एट द क्राइटेरियन के दो गानों पर प्रस्तुति दी। इस कॉन्सर्ट हॉल में 3500 हजार लोगों के खड़े होने की व्यवस्था है, लेकिन प्रयोग के दौरान सिर्फ 100 लोगों को ही वहां आने की अनुमति दी गई। बैंड के सदस्य फ्रंटमैन वाइने कोएने ने इंस्टाग्राम पर कार्यक्रम का एक क्लिप साझा किया और साथ ही कई तस्वीरें भी पोस्ट की। उन्होंने कहा, मुझे लगता है किसी ने भी मार्च में नहीं सोचा होगा कि ये इतना लंबा चलेगा।
अब आठ महीने होने जा रहे हैं। मुझे लगता है कि सभी ने सोचा होगा कि अब यह बीमारी ठीक हो जाएगा, इस महीने नियंत्रण में आ जाएगी। लेकिन अब और इंतजार नहीं किया जा सकता। बबल के इस विकल्प पर पहली बार मई में प्रयोग किया गया था। स्टीफन कोलबर्ट ने अपने शो पर इसका प्रयोग किया था।
2004 से बबल का प्रयोग कर रहे कोएने-
कोएने 2004 से ही अपने कार्यक्रमों के दौरान प्लास्टिक बबल का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा, मुझे यह काफी पसंद है। इसके अंदर खड़े होकर आप कितने भी उत्साहित होकर चीख सकते है और इससे कोई दूसरा संक्रमित भी नहीं होगा। यह के बैरियर की तरह काम करता है जो आपको भी सुरक्षित रखता है और दूसरों को भी। यह एक सफल प्रयोग हैं और भविष्य में इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
नहीं होती घुटन-
बैंड के अन्य सदस्य डेजी स्मिथ ने कहा, यह प्लास्टिक बबल इतना बड़ा है कि इसके अंदर घुटन महसूस नहीं होती। इसके अंदर सांस लेने में कोई दिक्कत भी नहीं होती। अगस्त में पहली बार 2500 संगीत प्रेमियों के लिए सैम फेंडर के कॉन्सर्ट का आयोजन किया गया था। यहां दर्शकों के लिए छोटे-छोटे बाड़े बनाए गए थे ताकि सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन किया जा सके। वहीं न्यूकैसल गोसफोर्थ पार्क में नॉर्थ शील्ड बैंड ने प्रस्तुति दी जिसमें छह-छह फीट की दूरी पर 500 ऊंचे प्लेटफॉर्म बनाए गए थे जिसमें एक साथ सिर्फ पांच लोग ही खड़े हो सकते हैं।
शौर्यपथ / क्या आपका लाडला दिनभर टीवी या मोबाइल की स्क्रीन से चिपका रहता है? अगर हां तो संभल जाइए। एक अमेरिकी अध्ययन में स्क्रीन के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल को न सिर्फ बच्चों की आंखों और मानसिक स्वास्थ्य, बल्कि सीखने-समझने, चीजें याद रखने व रिश्ते निभाने की क्षमता के लिहाज से भी घातक करार दिया गया है। अभिभावकों से कहा गया है कि वे बच्चों को दिनभर में दो घंटे से ज्यादा स्क्रीन के प्रयोग की छूट न दें।
कैलिफोर्निया स्थित मेमोरियल केयर ऑरेंज कोस्ट मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं की मानें तो दिनभर में तीन घंटे से अधिक समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल करने वाले बच्चे देरी से बोलना सीखते हैं। उन्हें पढ़ने-लिखने और भाषा समझने में भी दिक्कत पेश आती है। वहीं, जो किशोर रोज पांच से सात घंटे स्क्रीन के सामने डटे रहते हैं, उनमें उदासी, बेचैनी, जीवन से नाउम्मीदी और आक्रामकता की शिकायत पनपने का खतरा दोगुना होता है।
मोटापे का खतरा
मुख्य शोधकर्ता डॉ. जीना पोजनर ने स्क्रीन की लत को बच्चों में मोटापे की बढ़ती समस्या के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने मेयो क्लीनिक के उस अध्ययन का हवाला दिया, जिसमें स्क्रीन का इस्तेमाल हर दो घंटे बढ़ने पर मोटापे की आशंका में 23 फीसदी इजाफा होने की बात सामने आई थी। यह भी पाया गया था कि स्क्रीन के इस्तेमाल में 50 फीसदी कटौती करने वाले बच्चे 25 प्रतिशत कम कैलोरी खाते हैं।
अनिद्रा की शिकायत
पोजनर ने बताया कि स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी स्लीप हार्मोन ‘मेलाटोनिन’ का उत्पादन बाधित करती है। इससे बच्चों को नींद के आगोश में समाने में तो दिक्कत पेश आती ही है, साथ ही सुबह उठने पर वे तरोताजा भी महसूस नहीं करते। अधूरी नींद का उनकी याददाश्त और तार्किक क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है। पोजनर ने सोने से दो घंटे पहले ही बच्चों के लिए स्क्रीन का इस्तेमाल प्रतिबंधित करने की सलाह दी।
सिर से लेकर कमर तक में दर्द
2018 में प्रकाशित एक ब्रिटिश अध्ययन का जिक्र करते हुए पोजनर ने कहा कि घंटों स्क्रीन के सामने डटे रहने वाले बच्चों में सिर, पीठ, कमर और कंधे में दर्द की समस्या भी ज्यादा सामने आती है। इसकी वजह सिर झुकाने से उसका भार बढ़ना और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ना है।
चिंताजनक
-आठ से 12 साल तक के बच्चे रोजाना 04 से छह घंटे औसतन स्क्रीन से चिपके रहते हैं
-09 घंटे औसतन किशोर उम्र के लोग मोबाइल, टीवी या कंप्यूटर की स्क्रीन पर गुजारते हैं
किसके लिए कितना इस्तेमाल सही
डेढ़ साल तक के बच्चे
-परिजनों से दो से पांच मिनट की वीडियो कॉल तक ही सीमित होना चाहिए स्क्रीन का इस्तेमाल। मां-बाप को खेलने-कूदने और पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
18 से 24 महीने
-माता-पिता की देखरेख में दिनभर में एक से डेढ़ घंटे ही स्क्रीन के प्रयोग की इजाजत होनी चाहिए। बच्चों को सिर्फ शिक्षण सामग्री तक पहुंच सुनिश्चित करना अनिवार्य।
दो से पांच साल
-नाच-गाने से जुड़े वीडियो और गेम खेलने की अनुमति दी जा सकती है। पर हफ्ते के शुरुआती पांच दिन अधिकतम एक घंटे और सप्ताहांत तीन घंटे से ज्यादा स्क्रीन न थमाएं।
पांच साल से ऊपर
-बड़े बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम निर्धारित करना मुश्किल। पर टीवी-मोबाइल-कंप्यूटर के इस्तेमाल से शारीरिक सक्रियता और सीखने-समझने, रिश्ते निभाने की कला प्रभावित होने लगे तो यह घातक है।
शौर्यपथ / अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के अनुसार आज के समय में एंटीबायोटिक के खिलाफ प्रतिरोध विकसित कर लेने वाले बैक्टीरिया चुनौती बनते जा रहे हैं। अमेरिका में हर लगभग 28 लाख लोग एंटीबायोटिक प्रतिरोधी संक्रमण की जद में आ जाते हैं और इनमें से तकरीबन 35,000 लोगों की मौत हो जाती है। अब अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया के पेरलमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने एक ततैया (वाष्प) के जहर से एक नया एंटीबायोटिक अणु तैयार किया है।
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इसके जहर से ऐसे एंटीमाइक्रोबियल अणु विकसित किए हैं जो उन बैक्टीरिया को खत्म करेंगे जिन पर दवाओं का असर नहीं हो रहा। अणु तैयार करने वाली अमेरिका की पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी का कहना है इससे तैयार होने वाली दवा से टीबी और सेप्सिस के खतरनाक बैक्टीरिया का इलाज किया जाएगा।
बैक्टीरिया पर बेअसर हो रही दवा का विकल्प-
नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस जर्नल में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने एशियन, कोरियन और वेस्पुला ततैया के जहर से प्रोटीन का छोटा से हिस्सा निकालकर उसमें बदलाव किया। बदलाव के कारण दवा के अणु में उन बैक्टीरिया को खत्म करने की क्षमता बढ़ी है जिन पर दवाएं बेअसर साबित हो रही हैं। इन बीमारियों का कारण बनने वाले बैक्टीरिया पर मौजूद एंटीबायोटिक दवाएं काम नहीं कर रही हैं।
चूहे पर किया गया अध्ययन-
चूहे पर किए गए अध्ययन में सामने आया कि जिन बैक्टीरिया पर दवा का असर नहीं हो रहा है उन पर इसका असर हुआ। वैज्ञानिकों का कहना है, वर्तमान में ऐसे नए एंटीबायोटिक्स की जरूरत है जो दवा से नष्ट न होने वाले बैक्टीरिया को खत्म कर सकें क्योंकि ऐसे संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। हमें लगता है जहर से निकले अणु नए तरह के एंटीबायोटिक का काम करेंगे।
ऐसे तैयार हुई दवा-
रिसर्च के मुताबिक, ततैया के जहर से मास्टोपरन-एल पेप्टाइड को अलग किया गया है। यह इनसानों के लिए काफी जहरीला होता है और रक्तचाप के स्तर को बढ़ाता है जिससे इनसानों की हालत नाजुक हो जाती है। इसके इस असर को कम करके इसमें इतना बदलाव किया गया कि यह बैक्टीरिया के लिए जहर का काम करे। इंसानों के लिए यह कितना सुरक्षित है, इस पर क्लीनिकल ट्रायल होना बाकी है।
इन बैक्टीरिया पर हुआ प्रयोग-
वैज्ञानिकों ने दवा का ट्रायल चूहे में मौजूद ई-कोली और स्टेफायलोकोकस ऑरेयस बैक्टीरिया पर किया। नई दवा की टेस्टिंग के दौरान 80 फीसदी चूहे जिंदा रहे। लेकिन जिन चूहों को इस दवा की मात्रा अधिक दी गई उनमें दुष्प्रभाव दिखे। शोध में दावा किया गया है कि यह दवा जेंटामायसिन और इमिपेनेम का विकल्प साबित हो सकता है क्योंकि दवा प्रतिरोधी बैक्टीरिया के मामले बढ़ रहे हैं। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि वो इस तरह के जहर से और एंटीबायोटिक अणु बना सकेंगे और इससे नई तरह की असरदार दवाएं बनाई जा सकेंगी।
शौर्यपथ / कोरोनावायरस महामारी के दौरान लॉकडाउन में घर में बैठे-बैठे लोगों के स्क्रीन देखने के समय में इजाफा हो गया है। एक और जहां बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई के कारण ज्यादा देर तक स्क्रीन देख रहे हैं वहीं दूसरी ओर कामकाजी लोग भी काफी देर तक काम करने के दौरान स्क्रीन देखते रहते हैं।
अब एक नए शोध में पता चला है कि रात को सोने से पहले नीली रोशनी को काटने वाले चश्मे का प्रयोग करने से नींद भी अच्छी आती है और अगले दिन कामकाज की उत्पादकता में भी बढ़ोतरी होती है।
इंडियाना यूनिवर्सिटी के केली स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रोफेसर क्रिस्टियानों एल गुआराना ने कहा, हमने पाया कि नीली रोशनी को काटने या फिल्टर करने वाले चश्मे नींद को बेहतर करने में एक प्रभावी हस्तक्षेप साबित हुए हैं। इसके अलावा कार्यक्षमता को बढ़ाने, प्रदर्शन को बेहतर करने, संस्थागत व्यवहार को बेहतर करने और खराब कार्य व्यवहार को कम करने में भी ये ब्लू लाइट चश्मे प्रभावी साबित हुए हैं।
नीली रोशनी को फिल्टर करने वाले चश्मे आंखों के सामने एक शारीरिक अंधेरा पैदा कर देते हैं जिससे नींद की गुणवत्ता और अवधि दोनों में ही बढ़ोतरी होती है।
इन उपकरणों से निकलती है नीली रोशनी
ज्यादातर इस्तेमाल में आने वाले उपकरण जैसे कंप्यूटर स्क्रीन, स्मार्टफोन, टैबलेट और टीवी से नीली रोशनी निकलती है। पूर्व शोधों के अनुसार इस नीली रोशनी से नींद में खलल पड़ती है। घर से काम करने के दौरान लोगों की इन उपकरणों पर निर्भरता बढ़ गई है। शोधकर्ता गुआराना ने कहा, सामान्य तौर पर नीली रोशनी को रोकने वाले चश्मे से देर रात जागने वाले लोगों को ज्यादा फायदा होता है।
हालांकि नीली रोशनी से बचने से सभी को फायदा होता है। रात को काम करने वाले कर्मचारियों को इन चश्मों से ज्यादा फायदा होता है क्योंकि उनकी आंतरिक जैविक घड़ी और बाहरी नियंत्रित कार्य के समय में काफी गड़बड़ होती है। हमारे शोध से पता चलता है कि ब्लू लाइट चश्मे कर्मचारियों के स्वास्थ्य और कार्यक्षमता दोनों ही बढ़ाते हैं।
कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को होगा फायदा
यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के प्रोफेसर बारनेस ने कहा, इस शोध से पता चलता है कि ये नीली रोशनी को रोकने वाले चश्मे के इस्तेमाल के सस्ते तरीके से कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को ही फायदा होगा।
शोधकर्ताओं ने 63 कंपनी मैनेजरों और 67 कॉल सेंटर अधिकारियों से डाटा लिया। कुछ कर्मचारियों को ब्लू लाइट चश्मे दिए गए और कुछ को नहीं दिए गए। उन्होंने पाया कि कभी-कभी कर्मचारियों को अहले सुबह भी काम करना पड़ता है। इससे उनकी जैविक घड़ी में गड़बड़ी आ जाती है।
नियोक्ताओं को नीली रोशनी के संपर्क में आने की मात्रा को लेकर सोचना चाहिए और कर्मचारियों की जैविक घड़ी को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / जियोवानी कैरिली और जियैमपिएरो नोबिली इटली के सुदूर नॉर्तोशे कस्बे के दो मात्र बाशिंदे हैं। बावजूद इसके वे कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए जरूरी सभी एहतियाती उपायों का सख्ती से पालन कर रहे हैं। एक-दूसरे से मिलते समय दोनों न सिर्फ मास्क पहनना सुनिश्चित करते हैं, बल्कि आपस में छह फीट का फासला बनाए रखना भी नहीं भूलते।
नॉर्तोशे पर्यटकों के बीच लोकप्रिय पेरुगिया प्रांत की नरीना घाटी का बेहद खूबसूरत कस्बा है। हालांकि, समुद्र तल से 900 मीटर की ऊंचाई के चलते यहां पहुंचना उतना आसान नहीं। बावजूद इसके 82 वर्षीय कैरिली और 74 साल के नोबिली खुद को सार्स-कोव-2 वायरस के प्रकोप से सुरक्षित नहीं महसूस करते।
बकौल कैरिली, ‘कोविड-19 का नाम सुनते ही मेरी रूह कांप उठती है। मैं अगर संक्रमित हो गया तो कौन मेरा ख्याल रखेगा। मेरी उम्र हो चली है, फिर भी मैं जिंदा रहना चाहता हूं, अपनी भेड़ों, कुत्ते, सेब के बगानों, मधुमक्खी के छत्तों, वाइनयार्ड और मशरूम के खेतों के लिए।’
कैरिली कहते हैं, ‘नॉर्तोशे में न तो कोई होटल-रेस्तरां या बार है, न ही अस्पताल,क्लीनिक, दवा की दुकान या मिनी बाजार। हर छोटे-बड़े सामान की खरीदारी के लिए हमें शहर जाना पड़ता है। वहां अगर हम किसी संक्रमित के संपर्क में आ गए हों तो नहीं चाहते कि दूसरा भी वायरस का शिकार हो। मास्क लगाने और सामाजिक दूरी पर अमल करने की एक बड़ी वजह यह भी है।’
नियमों का पालन करना जरूरी
-इटली में सार्वजनिक स्थलों पर मास्क पहनना और एक मीटर की सामाजिक दूरी का पालन करना अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी करने पर 470 से 1170 डॉलर (करीब 32900 से 81900 रुपये) का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। नोबिली के मुताबिक वह और कैरिनी सिर्फ स्वास्थ्य कारणों से मास्क नहीं पहनते या फिर सोशल डिस्टेंसिंग पर अमल नहीं करते। दोनों का मानना है कि नियम-कायदे सबके लिए समान होते हैं। इन्हें तोड़ना अपने उसूलों का अपमान करने जैसा है।
आखिरी सांस तक नॉर्तोशे में रहेंगे
-कैरिली की पैदाइश नॉर्तोशे की ही है, पर पढ़ाई और नौकरी के सिलसिले में उनका ज्यादातर वक्त राजधानी रोम में गुजरा। रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी बिताने के लिए वह पुश्तैनी गांव लौट गए। उनके साले के बहनोई नोबिली ने भी नॉर्तोशे में जा बसने का मन बना लिया। कैरिली कहते हैं, नोबिली के अलावा उनकी पांच भेड़ें और एक कुत्ता ही नॉर्तोशे में रहते हैं। बावजूद इसके दोनों को कभी अकेलापन महसूस नहीं होता। बाजार से लंबी दूरी और साधन का अभाव भी उन्हें शहर में बसने के लिए नहीं उकसाता।
वास्तु टिप्स / शौर्यपथ /हर इंसान सुख-सुविधाओं भरा जीवन गुजारना चाहता है। अपनी ख्वाहिशों के साथ जरुरतों को पूरा करने के लिए भी इंसान को पैसों की जरुरत होती है। कभी-कभी ऐसा होता है हम अपने परिवार की जरुरतों को पूरा करने के दिन-रात मेहनत करते हैं। लेकिन अंत में हमारे हाथ खाली ही रहते हैं। कई बार घर में धन के टिकने का न कारण वास्तु दोष भी होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, वास्तु दोष को कुछ उपायों और टोटकों से दूर किया जा सकता है। जानिए अगर आपके घर का भी वास्तु खराब है तो उसे कैसे कर सकते हैं दूर, ताकि घर में टिकने लगे धन-
1. वास्तु शास्त्र के अनुसार, आप जहां पैसे रखते हैं उस अलमारी या तिजोरी का मुख उत्तर दिशा में होना चाहिए। कहा जाता है कि इससे धन में वृद्धि के साथ खर्चा भी कम होता है।
2. वास्तु के अनुसार, घर के पानी का निकास दक्षिण और पश्चिम दिशा से ही होना चाहिए। सही दिशा से जल निकासी का रास्ता होने से आर्थिक समस्याएं दूर हो जाती हैं।
3. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में अक्सर टोटियों या नल से पानी गिरते रहना अशुभ होता है। इसके धन पानी की तरह बहता है और बेवजह के खर्च भी बढ़ता है।
4. कहा जाता है कि घर में टूटे शीशे रखना अशुभ होता है। ऐसा करने से घर में नेगेटिव एनर्जी का वास होता है और आर्थिक नुकसान भी होता है।
ये 3 चीजें बदल सकती हैं घर का माहौल-
1. माना जाता है कि घर में स्वास्तिक का निशान होना जरुरी होता है। कहते हैं कि जिस घर में स्वास्तिक चिन्ह होता है वहां नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती है। घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
2. कहते हैं कि घर में कलश रखना बेहद शुभ होता है। इससे घर में खुशियां आती हैं और आर्थिक लाभ भी होता है।
3. कहते हैं कि घर में ओम का चिन्ह बनाने से वास्तु दोष दूर होता है और घर के सदस्यों के बीच प्यार बढ़ता है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
