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धर्म संसार / शौर्यपथ / पावन नवरात्र में तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की उपासना की जाती है। मां चंद्रघंटा का रूप बहुत सौम्य है। मां का स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। मां के मस्तक में घंटे का आकार का अर्द्धचंद्र है, इसलिए मां को चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। मां के दिव्य स्वरूप का ध्यान करने से हर तरफ सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो जाता है।
मां को लाल रंग के फूल अर्पित करें। मां की उपासना करते समय मंदिर की घंटी अवश्य बजाएं। घंटे की ध्वनि से मां अपने भक्तों पर हमेशा अपनी कृपा बरसाती हैं। मां को मखाने की खीर का भोग लगाना शुभ माना जाता है। मां की आराधना से अहंकार नष्ट हो जाता है। मां की आराधना से घर-परिवार में शांति आती है। तृतीय नवरात्र पर लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। मां को गाय का दुग्ध अर्पित करने से दुखों से मुक्ति मिलती है। माता चंद्रघंटा को शहद का भोग लगाना शुभ माना जाता है। मां की आराधना से सभी कष्टों का निवारण होता है। मां सौभाग्य, शांति और वैभव प्रदान करती हैं। मां का उपासक निर्भय हो जाता है। मां चंद्रघंटा के भक्त जहां भी जाते हैं लोग उन्हें देखकर शांति और सुख का अनुभव करते हैं।
लखनऊ / शौर्यपथ / बलिया हत्याकांड के मुख्य आरोपी धीरेंद्र सिंह को यूपी एसटीएफ ने आज गिरफ्तार कर लिया. उधर बलिया में हत्या के आरोपी के समर्थन में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया. उन्होंने जमकर नारेबाज़ी की. उनकी मांग है कि पीड़ित पक्ष पर भी मुकदमा हो क्योंकि उन्होंने भी मारपीट की थी. अगर मामला दर्ज नहीं हुआ तो वे बीजेपी छोड़ देंगे. पहले पुलिस ने धीरेंद्र सिंह को पकड़कर पिस्टल समेत छोड़ दिया था...लेकिन आज पकड़ा तो नहीं छोड़ा.अब उसे बलिया पुलिस को सौंपा जा रहा है.
बलिया के बीजेपी कार्यकर्ता, डब्लू भैया यानी हत्या के मुलज़िम धीरेंद्र सिंह की हिमायत में नारेबाज़ी करते रहे. वे कह रहे थे कि हत्या के आरोपी के संघर्ष में वे उनके साथ हैं. उनकी मांग है कि मरने वाले जयप्रकाश पाल के लोगों पर मुक़दमा हो वरना वे बीजेपी छोड़ देंगे.
बीजेपी के मंडल अध्यक्ष बुट्टन राय ने कहा कि, ''इस्तीफ़ा दे देंगे हम लोग.भारतीया जनता पार्टी में रहने से क्या फायदा है. क्या लाभ है हम लोगों को? क्या तनख़्वाह मिलती है? अपना घर से हम खर्चा करते हैं. अपने काम का नुकसान क के हम लोग पार्टी और देश के लिए काम करते हैं.''
उधर गोलीकांड में मारे गए जयप्रकाश पाल का परिवार मुलज़िम के लिए कड़ी से कड़ी सज़ा चाहता है. उनका कहना है कि उन्हें मुकदमों में न फंसाया जाए. जयप्रकाश के भाई सूरजपाल ने कहा कि ''विधायक जी उनकी तरफ, से हत्यारे की तरफ से बिल्कुल खड़े हैं. और हम लोगों को यह भी सुनने में आ रहा है कि तरह-तरह के मुक़दमे में फंसना चाहते हैं. इसलिए सरकार को हम लोगों की सहायता के लिए कुछ करना चाहिए."
धीरेंद्र सिंह के समर्थन में प्रदर्शन करने वाले बीजेपी कार्यकर्ता आरोप लगा रहे हैं कि जिले के संगठन में भ्रष्ट लोग हैं इसलिए धीरेंद्र सिंह की मज़बूत पैरवी नहीं हो पाई. बुट्टन राय ने कहा कि ''यहां का जो ज़िला अध्यक्ष है वो पैसा लेकर पद बांटता है. और करन मौर्य जो है विधानसभा में बसपा को वोट दिया था... उसको ज़िला कार्यसमिति में लिया. एक दिलीप गुप्ता है, वो हमसे सपा का वोट मांगा था.''
प्रवासी श्रमिकों के लिए प्रदेश भर में बनाए गए थे साढ़े 21 हजार से अधिक क्वारेंटाइन सेंटर
आवास एवं भोजन सहित सभी बुनियादी सुविधाएं कराई गई थीं मुहैया, कोरोना के संभावित मरीजों की तत्काल जांच करवाई गईं
कोरोना संक्रमण का प्रसार रोकने में इन क्वारेंटाइन सेंटरों से मिली बड़ी मदद
रायपुर / शौर्यपथ / देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ लौटे प्रवासी श्रमिकों के लिए ग्राम पंचायतों में बनाए गए क्वारेंटाइन सेंटरों से कोरोना संक्रमण का प्रसार रोकने में बड़ी सहायता मिली है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से इसके लिए प्रदेश भर में 21 हजार 580 क्वारेंटाइन सेंटर बनाए गए थे। कोरोना काल में प्रदेश लौटे छह लाख 80 हजार 665 लोग इन सेंटरों में सफलतापूर्वक क्वारेंटाइन अवधि पूरी कर अपने घर पहुंच चुके हैं। इन लोगों ने खुद के एवं अन्य ग्रामीणों के स्वास्थ्य की सुरक्षा की दृष्टि से क्वारेंटाइन अवधि पूर्ण करने के बाद अगले दस दिनों तक होम-क्वारेंटाइन में रहने के निर्देशों का भी गंभीरता से पालन किया है।
गांवों में स्थापित क्वारेंटाइन सेंटरों का संचालन एवं नियंत्रण संबंधित जिला प्रशासन द्वारा किया गया। इनके संचालन में ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला पंचायतों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। ग्राम पंचायतों में स्थापित क्वारेंटाइन सेंटरों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों को आवास और भोजन सहित सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई गई थीं। अस्थायी शौचालयों, पुरूषों एवं महिलाओं के लिए अलग-अलग स्नानगृहों, स्वच्छ पेयजल, लाइट एवं पंखों की भी वहां व्यवस्था की गई थी। लोगों के मनोरंजन के लिए टेलीविजन एवं रेडियो के इंतजाम के साथ अनेक रचनात्मक गतिविधियां भी वहां संचालित की जा रही थीं। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने योग और प्राणायाम का भी अभ्यास कराया गया। वृक्षारोपण, पेंटिंग, खेलकूद, पठन-पाठन जैसी गतिविधियों के माध्यम से भी उनकी मानसिक सेहत का ध्यान रखा गया।
क्वारेंटाइन सेंटरों में बेहतर साफ-सफाई के साथ कोरोना संक्रमण से बचाव के दिशा-निर्देशों के पालन पर भी जोर दिया गया था। बार-बार हाथ धोने के लिए साबुन और पानी के साथ ही हैंड-सेनिटाइजर भी उपलब्ध कराया गया था। मुंह ढंकने के लिए मास्क एवं गमछा भी दिया गया। कोरोना संक्रमित व्यक्ति के मिलने जैसी आपात स्थिति के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रत्येक सेंटर में एक कमरा पृथक से आइसोलेशन के लिए सुरक्षित रखा गया था। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से क्वारेंटाइन सेंटरों में रह रहे लोगों के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की गई। अस्वस्थ लोगों को इलाज और दवाईयां भी मुहैया कराई गईं। संक्रमण की संभावना और लक्षण वाले व्यक्तियों के तत्काल सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव के निर्देश पर विभाग द्वारा प्रवासी श्रमिकों के लिए मनरेगा के तहत जॉब-कार्ड बनाकर रोजगार दिए जाने के साथ ही उन्हें अन्य योजनाओं के माध्यम से भी रोजगार उपलब्ध कराने त्वरित कदम उठाए गए हैं। स्थानीय प्रशासन द्वारा मजदूरों की स्किल-मैपिंग कर औद्योगिक, भवन निर्माण और अन्य क्षेत्रों में उन्हें काम दिलाने के लिए भी गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं।
नई दिल्ली / शौर्यपथ / बिहार में बांकीपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा ने रविवार को कहा कि उन्होंने भाजपा के इस गढ़ में भगवा पार्टी को चुनौती देकर और अपनी क्षमता साबित कर राजनीतिक पारी की शुरूआत करने का फैसला किया है. लव ने यह भी कहा कि वह पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट से चुनाव, 2019 के आम चुनाव में अपने पिता को मिली हार का बदला लेने के लिये नहीं लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह पटना के लोगों के कल्याण के लिये यह चुनाव लड़ रहे हैं.
अपने पिता की ही तरह अभिनेता से नेता बने लव ने पीटीआई-भाषा से एक साक्षात्कार में कहा कि 2014 के बाद से भाजपा बदल चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि अब भगवा पार्टी के अंदर ज्यादा चर्चा नहीं होती है और अब सिर्फ ‘‘आदेश' जारी किया जाता है.
यह पूछे जाने पर कि बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) जैसी पार्टी की व्यापक उपस्थिति होने के बावजूद उन्होंने अपनी चुनावी पारी का आगाज करने के लिये कांग्रेस को ही क्यों चुना, लव (37) ने कहा, ‘‘सिर्फ मैंने कांग्रेस को नहीं चुना है, बल्कि कांग्रेस ने भी मुझे चुना है. ''
उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस ने मेरे द्वारा किये गये काम पर गौर किया, यहां तक कि उस वक्त के काम भी...जब मैंने अपने पिता के भाजपा में रहने के दौरान किये थे. मैंने यहां 2009 से अपने पिता के साथ काम किया है. मैं आश्वस्त हूं कि पार्टी (कांग्रेस) ने पिछले चुनावों में मेरे द्वारा किये गये काम पर गौर किया होगा और यही कारण है कि उन्होंने मुझे यह टिकट दिया. ''
भाजपा के इस गढ़ में चुनाव लड़ने की बात स्वीकार करते हुए लव ने कहा, ‘‘क्या इस कारण लड़ने से डरना चाहिए. मैं अपनी क्षमता साबित करने और अपनी क्षमता दुनिया को दिखाने के लिये लड़ाई लड़ने में यकीन रखता हूं. जीत या हार, कहीं से भी मेरे हाथ में नहीं है. जनता फैसला करेगी और हमें उनके फैसले को स्वीकार करना होगा.''
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा विधायक नितिन नबीन के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा उम्मीदवार को यह सीट अपने पिता से विरासत में मिली थी, जो बांकीपुर से विधायक थे. अपने पिता के कारण टिकट मिलने की अटकलों को खारिज करते हुए लव ने कहा कि यदि यह परिवारवाद होता, तो उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ना चुना होता, विधानसभा चुनाव नहीं .
उल्लेखनीय है कि लव ने जेपी दत्ता की फिल्म ‘पलटन' में अभिनय किया था. बांकीपुर, पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र के तहत आता है और इसे भाजपा का एक गढ़ माना जाता है. संसदीय सीट पर शत्रुघ्न सिन्हा 2009 और 2014 में भाजपा के टिकट पर निर्वाचित हुए थे. हालांकि, 2019 के चुनाव में शत्रुघ्न (74) ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और इसमें उन्हें भाजपा के रविशंकर प्रसाद से हार का सामना करना पड़ा था.
० कलेक्टर ने धान खरीदी के संबंध में समिति प्रबंधकों और कम्प्यूटर ऑपरेटरों की ली बैठक
० धान खरीदी प्रारंभ होने के पहले सभी तैयारी करने के दिए निर्देश
० धान खरीदी केन्द्र में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य
० 31 अक्टूबर तक किसानों का पंजीयन शत प्रतिशत करने के दिए निर्देश
० जिले की सीमा पर निगरानी रखने के दिए निर्देश
राजनांदगांव / शौर्यपथ / कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने जिला पंचायत सभाकक्ष में धान खरीदी और किसान पंजीयन के संबंध में समिति प्रबंधकों और कम्प्यूटर ऑपरेटरों की बैठक ली। कलेक्टर श्री वर्मा ने धान खरीदी के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धान खरीदी प्रारंभ होने से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली जाए। ताकि धान खरीदी में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। धान खरीदी केन्द्रों में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य है। धान के पंजीयन का कार्य 31 अक्टूबर तक किया जाना है इस कार्य को समय-सीमा में शत प्रतिशत पूरा किया जाए। पंजीयन कार्य पूरा होने के बाद इसका दावा-आपत्ति भी होना चाहिए। जिससे किसानों को पंजीयन के बाद उनके रकबे की सही जानकारी रहे।
कलेक्टर ने कहा कि जिले के अधिकांश तहसील महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश सीमा से लगे हुए है। सीमा से लगे होने के कारण कोचियों द्वारा धान लाने की संभावना बनी रहती है। ऐसी स्थिति में आवागमन वाले सभी रास्तों पर कड़ी निगरानी रखनी होगी। वहीं सीमा से लगे धान केन्द्रों में कोचियों के माध्यम से धान खपाने की संभावना बनी होती है। समिति प्रबंधकों को धान खरीदी के समय सतर्कता रखनी होगी। धान खरीदी का कार्य पूरी सतर्कता से किया जाना चाहिए। कलेक्टर श्री वर्मा ने कहा कि केन्द्रों में सिर्फ खरीफ वर्ष का ही धान खरीदा जाएगा। कुछ लोगों द्वारा पुराने धान को मिलाकर बेचे जाने की शिकायत होती है इस पर भी कड़ी निगरानी रखी जाए।
कलेक्टर वर्मा ने कहा कि धान खरीदी केन्द्रों में बारदाने की व्यवस्था पहले ही कर ली जाए। केन्द्रों में किसानों के लिए पेयजल, छाया, बिजली एवं अन्य सभी व्यवस्थाएं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण टला नहीं है। धान खरीदी में कोरोना के प्रोटोकॉल का पालन किया जाना सुनिश्चित करें। धान खरीदी केन्द्रों के कर्मचारी सहित किसानों को मास्क लगाना अनिवार्य है। केन्द्रों में सोशल डिस्टेसिंग का पालन होना चाहिए इसका ध्यान रखा जाए। कोरोना संक्रमण से सुरक्षा के सभी उपाए पहले ही कर ली जाए। कलेक्टर श्री वर्मा ने कहा कि धान खरीदी पूरी सावधानी से गुणवत्तापूर्ण करनी है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। धान खरीदी में किसानों को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। शिकायत मिलने और सही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर ने कहा कि जिले में लगातार गोबर की खरीदी की जा रही है और इसका भुगतान हर 15 दिन में हितग्राहियों के खाते में किया जा रहा है। शासन की यह महत्वपूर्ण योजना इसका प्रचार-प्रसार भी करना आवश्यक है। इस गोबर से वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण किया जा रहा है जिसका विक्रय सोयायटी के माध्यम से किसानों को किया जाएगा। इस अवसर पर उप संचालक कृषि जीएस धु्रर्वे, जिला खाद्य अधिकारी केके सोमावार, सीईओ जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक सुनील वर्मा, जिला विपणन अधिकारी सौरभ भारद्वाज, उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं जान खलखो सहित समिति प्रबंधक उपस्थित थे।
मुंबई / शौर्यपथ / डिजिटल लेनदेन के दौर में भुगतान के लिए चेक का इस्तेमाल बेहद कम हो गया है. आरबीआई के ताजा आंकड़े बताते हैं कि ऑनलाइन लेनदेन में चेक से भुगतान की हिस्सेदारी महज 3 फीसदी रह गई है, जो पांच साल पहले 15 फीसदी से ज्यादा थी. डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन की वजह से बीते वित्त वर्ष 2019-20 में चेक के जरिये खुदरा भुगतान का आंकड़ा काफी नीचे आ गया है.बीते वित्त वर्ष में कुल खुद भुगतान में चेक क्लियरिंग का हिस्सा घटकर मात्र 2.96 प्रतिशत रह गया. हालांकि मूल्य के हिसाब से यह 20.08 प्रतिशत रहा.
पांच वर्षों में डिजिटल लेनदेन कई गुना बढ़ा
वित्त वर्ष 2015-16 में नोटबंदी के बाद केंद्रीय बैंक ने डिजिटल भुगतान को काफी तेजी से आगे बढ़ाना शुरू किया था. उस समय खुदरा भुगतान में मात्रा के हिसाब से चेक का हिस्सा 15.81 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 46.08 प्रतिशत था. 2015-16 में चेक के जरिये भुगतान मात्रा के हिसाब से 15.81 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 46.08 प्रतिशत हिस्सा था. वित्त वर्ष 2016-17 में यह आंकड़ा घटकर क्रमश: 11.18 प्रतिशत और 36.79 प्रतिशत पर आ गया. 2017-18 में यह मूल्य के हिसाब से 7.49 प्रतिशत और मात्रा के हिसाब से 28.78 प्रतिशत पर आ गया. वहीं 2018-19 में यह और घटकर क्रमश 4.60 प्रतिशत और 22.65 प्रतिशत पर आ गया.
55 फीसदी की दर से बढ़ रहा डिजिटल भुगतान
रिजर्व बैंक के अनुसार वित्त वर्ष 2015-16 से 2019-20 के दौरान मात्रा के हिसाब से डिजिटल भुगतान सालाना आधार पर 55.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 593.61 करोड़ से 3,434.56 करोड़ पर पहुंच गया. मूल्य के हिसाब से यह 920.38 लाख करोड़ रुपये से 1,623.05 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इसमें सालाना आधार पर 15.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई.
वित्त वर्ष 2016-17 में डिजिटल भुगतान 593.61 करोड़ से 969.12 करोड़ पर पहुंच गया. मूल्य के हिसाब से यह इस दौरान 1,120.99 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया.
कोरोना काल में और बढ़ेगा डिजिटल लेनदेन
2017-18 में यह मात्रा के हिसाब से 1,459.01 करोड़ पर और मूल्य हिसाब से 1,369.86 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। बाद में इसमें और तेज वृद्धि हुई और 2018-19 में यह मात्रा के हिसाब से 2,343.40 करोड़ और मात्रा के हिसाब से 1,638.52 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया.कोविड-19 महामारी की वजह से लागू लॉकडाउन के चलते मात्रा के हिसाब से आगे डिजिटल भुगतान का आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है.
मुंबई / शौर्यपथ / करीब 7 महीनो तक बंद रहने के बाद सोमवार से मुम्बई मेट्रो को एक बार फिर से आम आदमी के लिए शुरू किया जा रहा है. सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही कोरोना से बचाव के लिए कई नियम बनाए गए हैं जिसका पालन करना अनिवार्य होगा. जैसे अब मेट्रो में एक समय में 300 लोगों को ही सफर करने दिया जाएगा. जहां पहले करीब 1300 से 1500 लोग इसमें सफर किया करते थे.
मुम्बई मेट्रो के सीईओ अभय कुमार मिश्रा ने एनडीटीवी को बताया, "सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए हमने एक समय में केवल 300 लोगों को जाने की अनुमति दी है.. जैसे जैसे भीड़ बढ़ेगी, चीज़ो को बदला जाएगा. "
सुबह साढ़े आठ बजे से लेकर रात के साढ़े आठ बजे तक चलने वाली मेट्रो में हर रोज़ 200 गाडियां चलाई जाएंगी. पहले इसकी संख्या 450 थी. इसके अलावा लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखना होगा. AC का कम से कम उपयोग करने के लिए हर एक स्टेशन पर ज़्यादा समय के लिए दरवाज़े को खोला जाएगा ताकि हवा अंदर आ सके. लोगों के तापमान जांचे जाएंगे और साथ ही ऑनलाइन पेमेंट पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाएगा.
मुंबई मेट्रो के सीईओ ने बताया, "पहले की तरह टोकन देने के बजाय लोगों को पेपर टिकट दिए जाएंगे ताकि खतरा सीमित हो, साथ ही ऑनलाइन पेमेंट की कई सुविधाएं मौजूद रहेंगी."
घाटकोपर से वर्सोवा की ओर चलने वाली मेट्रो का इस्तेमाल अधिकांश दफ्तर जाने वाले लोग करते हैं. लॉकडाउन के बाद से जहां सड़क पर ट्रैफिक के वजह से लोगों के कई घंटे बर्बाद हो रहे थे, तो वहीं मेट्रो के दोबारा शुरू होने से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है
मुम्बई लोकल और मुंबई मेट्रो में एक बड़ा अंतर यह है कि लोकल में फिलहाल अत्यावश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों को ही सफर करने दिया जा रहा है पर मेट्रो में हर कोई सफर कर सकता है, बशर्ते वो सभी नीयमों का पालन करें.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / बीजिंग चीन में फ्रिज के बेहद ठंडे तापमान में रखे गए खाद्य पदार्थों पैकेट पर जिंदा कोरोना वायरस मिलने से वैज्ञानिक चौकन्ना हो गए हैं. अभी तक यही माना जाता था कि ठंडे खुले वातावरण में तो वायरस रह सकता है. लेकिन शून्य से काफी नीचे के तापमान में वायरस निष्क्रिय हो जाता है.
चीन के स्वास्थ्य प्रशासन ने कहा है कि क्विंगदाओ बंदरगाह शहर में आयात कर विशालकाय रेफ्रिजरेटर में रखी गई समुद्री मछली के पैकेट की बाहरी सतह पर जीवित कोरोना वायरस मिले हैं. चाइनीज सेंटर फोर डिसीज कंट्रोल एडं प्रिवेंशन ने शनिवार को एक बयान में कहा कि दुनिया में यह पहला मौका है जब प्रशीतित (रेफ्रिजरेटेड) खाद्य पैकेट की बाहरी सतह पर जिंदा कोरोना वायरस मिला है.
क्विंगदाओ में मिला था क्लस्टर
चीन के क्विंगदाओ शहर में हाल ही में कोविड-19 मामलों का एक ‘क्लस्टर' सामने आया। प्रशासन ने अपने सभी करीब 1.1 करोड़ नागरिकों की जांच कराई लेकिन कोई नया ऐसा झुंड नहीं पाया गया। जुलाई में चीन ने रेफ्रिजरेटेड (refrigerated) झींगे के आयात पर अस्थायी रोक लगा दी थी क्योंकि पैकेटों और कंटेनर के अंदरूनी हिस्सों में यह घातक वायरस पाया गया था.
मछली के पैकेट पर मिला वायरस
सीडीसी ने कहा कि क्विंगदाओ में आयातित कॉड मछली के पैकेट के बाहर जीवित वायरस मिला. शहर में हाल ही में संक्रमण सामने आने के बाद उसके स्रोत की जांच के दौरान यह खुलासा हुआ था. उससे यह साबित हो गया कि जीवित कोरोना वायरस से संक्रमित डिब्बों के संपर्क में आने से संक्रमण फैल सकता है. हालांकि यह नहीं बताया कि ये पैकेट किस देश से आए थे.
नई दिल्ली/ शौर्यपथ / केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने संडे संवाद के छठे एपिसोड में सोशल मीडिया के उपयोगकर्ताओं के साथ विचार-विमर्श किया और उनके प्रश्नों के उत्तर दिए. नवरात्र के अवसर पर अपनी शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने सोशल मीडिया के उपयोगकर्ताओं से आग्रह किया कि वे प्रधानमंत्री जी के जन-आंदोलन के आह्वान का सम्मान करें और अन्य लोगों के लिए एम्बेसडर बनकर कोविड अनुकूल व्यवहार का पूरी तरह पालन करें. उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति त्योहारों को पारम्परिक तरीके से अपने घरों में प्रियजनों के साथ मनाएं. केन्द्रीय मंत्री ने कहा, ‘इस त्योहारों के मौसम में आयोजन से बढ़कर उपकार पर जोर दिया जाना चाहिए. त्योहारों का मेरा आयोजन भी विश्व भर में हमें बचाने के लिए संघर्ष कर रहे लाखों कोरोना वारियर्स पर कोविड-19 के प्रभाव के कारण हल्का रहेगा.'
डॉ हर्ष वर्धन ने हाल ही में केरल में कोविड-19 के मामलों में आए उछाल को लेकर अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि 30 जनवरी से 3 मई के बीच केरल से कोविड-19 के केवल 499 मामलों का पता चला था और 2 मौतें हुई थीं. उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि केरल हाल ही में ओणम त्योहार के दौरान हुई घोर लापरवाही की कीमत भुगत रहा है, जब राज्य में अनलॉक अवधि के दौरान गतिविधियों जैसे कि व्यापार और पर्यटन के लिए अंतर्राज्यीय यात्रा को शुरू किया जा रहा था, तब राज्य के विभिन्न जिलों में कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी हुई. केरल की कोविड-19 के बारे में तस्वीर पूरी तरह बदल गई और दैनिक मामले दोगुना हो गए. केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि इससे उन सभी राज्यों को सबक लेना चाहिए, जो त्योहारों के मौसम के दिशा-निर्देश जारी करने में लापरवाह रहते हैं.
चीन के इस दावे कि पिछले वर्ष कई देशों में एक साथ नोवेल कोरोना वायरस का फैलाव हुआ था, पर डॉ हर्ष वर्धन ने बताया, “इस बात का कोई प्रमाण नहीं है जिससे इस दावे की वैधता साबित हो सके कि नोवेल कोरोना वायरस का फैलाव विश्व के कई देशों में हुआ था.” उन्होंने कहा हालांकि चीन के वुहान को विश्व में कोरोना के पहले मामले की रिपोर्ट करने के लिए अब भी माना जाता है.
भारत के बाजारों में चीन द्वारा निर्मित ऑक्सीमीटर की भरमार होने के एक प्रश्न के उत्तर में डॉ हर्ष वर्धन ने बताया, “उपभोक्ताओं को बाजार से या ऑनलाइन विक्रेताओं से पल्स ऑक्सीमीटर खरीदते समय एफडीए/सीई स्वीकृत उत्पादों और उनके साथ आईएसओ/आईईसी विनिर्दिष्टताओं को देखना चाहिए.” यद्यपि उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑक्सीजन स्तर में कमी कोविड-19 का लक्षण नहीं है, क्योंकि ऐसा कुछ अन्य चिकित्सीय स्थितियों के कारण भी हो सकता है.
डॉ हर्ष वर्धन ने भरोसा दिलाया कि अभी भारत में कोरोना वायरस में किसी परिवर्तन का पता नहीं चला है, जो कि अधिक प्रसार कुशलता का द्योतक है या रोगजनक है. पिछले एपिसोड के एक प्रश्न के अंतर्गत उनसे राज्यों को दूसरे चरण के अंतर्गत कोविड-19 से संबंधित अनुदान के बारे में पूछा गया था. इससे संबंधित एक प्रश्न का उत्तर देते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने पहले ही दूसरे चरण के अंतर्गत 33 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को कोविड पैकेज जारी कर दिया है. दूसरे पैकेज में जारी पैकेज की कुल राशि 1352 करोड़ रुपये है. दूसरे चरण के अंतर्गत अगस्त, सितंबर और अक्तूबर, 2020 के महीनों के दौरान किस्तों में राशि जारी की गई है.
डॉ हर्ष वर्धन ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि उनका मंत्रालय महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा दिए जाने को लेकर पीछे नहीं है. भारत में मेडिकल कॉलेज और चिकित्सा संस्थान एमबीबीएस विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित कर रहे हैं, जिनकी मंजूरी राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने दी है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोविड-19 के मद्देनजर स्नातकोत्तर चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए पेशेवर प्रशिक्षण हेतु मानक संचालन प्रक्रियाएं जारी कर दी हैं.
एक प्रश्नकर्ता के सुबह की चाय के साथ समाचार पत्र पढ़ने का अवसर नहीं मिलने के कारण आनंद की अनुभूति नहीं होने से संबंधित एक सवाल पर डॉ हर्ष वर्धन ने भरोसा दिलाया कि कोई ऐसा वैज्ञानिक प्रमाण नहीं, जो साबित कर सके कि समाचार पत्रों से नोवेल कोरोना वायरस का प्रसार होता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि समाचार पत्र पढ़ना कोविड-19 महामारी के दौरान भी पूरी तरह सुरक्षित है.
देश भर में कोविड-19 से हो रही मौतों की संख्या में विसंगतियों से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में डॉ हर्ष वर्धन ने बताया कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ कोविड-19 से हुई मौतों के सही स्पष्टीकरण का मुद्दा कई बार उठाया है. इसके अलावा सही तौर-तरीके से मौतों की सूचना देने की प्रक्रिया भी साझा की है, ताकि देश भर में कोविड-19 से संबंधित मौतों की सूचना एक समान मिलती रहे.
केन्द्रीय मंत्री ने भरोसा दिलाया कि देश में मेडिकल ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है, भारत में वर्तमान में लगभग 6400 मीट्रिक टन प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है, सरकार महामारी के कारण इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए तैयार है. गृह मंत्रालय द्वारा गठित अधिकार प्राप्त समूह देश भर में मेडिकल ऑक्सीजन की आवश्यकता पर भी नजर रखे हुए है. स्वास्थ्य मंत्रालय भी राज्यों के ऑक्सीजन के संबंधित नोडल अधिकारियों तथा प्रधान सचिवों या मिशन निदेशकों के साथ नियमित वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से क्षेत्रीय स्तर पर मेडिकल ऑक्सीजन की उपलब्धता और आपूर्ति पर नजर रखे हुए है; राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को 1,02,400 मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर दे दिए गए हैं. राष्ट्रीय फॉर्मास्यूटिकल मूल्य प्राधिकरण ने तरल मेडिकल ऑक्सीजन की कीमत तय कर दी है; कोविड-19 के प्रबंधन के लिए ऑक्सीजन के तर्कसंगत उपयोग को लेकर दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं.
डॉ हर्ष वर्धन ने बताया कि हालांकि इस समय इंट्रानेज़ल (नाक में डालने के लिए) कोई कोविड-19 वैक्सीन परीक्षण के चरण में नहीं है, आने वाले महीनों में नियामक अनुमति मिलने के बाद सीरम इंडिया और भारत बायोटेक द्वारा देश में ऐसे वैक्सीन का नैदानिक परीक्षण करने की आशा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि तीसरे चरण का नैदानिक परीक्षण आमतौर पर हजारों लोगों पर किया जाता है, कुछ मामलों में यह परीक्षण 30 से 40 हजार लोगों पर किया जाता है. यह संभव है कि किसी एक शहर या अस्पताल से परीक्षण के लिए कई सौ लोगों का चयन किया जाए, लेकिन सामान्य तौर पर तीसरे चरण में लोगों की संख्या बहुत अधिक रहती है.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / बिहार विधान सभा चुनावों में सभी राजनीतिक पार्टियां समाज के विभिन्न वर्गों को अपनी तरफ लुभाने और लामबंद करने में जुटी हैं. विपक्षी महागठबंधन की अगुवाई कर रहे तेजस्वी यादव जहां पिता लालू यादव के परंपरागत वोट बैंक माय (मुस्लिम यादव) के अलावा नीतीश कुमार के परंपरागत वोट बैंक ईबीसी (अति पिछड़ी जातियों) में सेंधमारी कर नए सामाजिक समीकरण गढ़ने की फिराक में लगे हैं, वहीं नीतीश राजद के माय समीकरण में सेंधमारी की कोशिशों में जुटे हैं. तेजस्वी ने नए सियासी समीकरण को साधते हुए भाजपा के भी वोट बैंक में भी सेंधमारी की कोशिश की है. तेजस्वी की कोशिश है कि वह माय के अलावा एक नया वोट बैंक भी तैयार करें और उसे अपने पाले में करें.
इसी कोशिश में पहली बार राजद ने कुल 144 सीटों में से 24 सीटों पर अति पिछड़ी जाति (ईबीसी) और एक दर्जन सीटों पर उच्च जाति के उम्मीदवारों को टिकट दिया है. पिछले चुनावों में राजद ने ईबीसी को चार और उच्च जाति के दो उम्मीदवारों को ही टिकट दिया था. राजद ने 30 महिलाओं को भी टिकट दिया है. इसके अलावा राजद ने अपने परंपरागत वोट बैंक के दो वर्गों यादवों और मुस्लिमों को क्रमश: 58 और 17 टिकट दिए हैं.
उधर, नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के लिए 2005 और 2010 के चुनावों से ही ईबीसी और महादलित परंपरागत वोट बैंक रहे हैं. पार्टी ने इस बार 19 ईबीसी, 15 कुशवाहा और 12 कुर्मी उम्मीदवारों को टिकट दिया है. नीतीश कुमार ने 17 अनुसूचित जाति के लोगों को भी चुनावी टिकट दिया है. जेडीयू ने 11 मुस्लिमों और 18 यादवों को टिकट देकर माय समीकरण में घुसपैठ की कोशिश की है.
राज्य में 26 फीसदी ओबीसी और 26 फीसदी ईबीसी का वोट बैंक है. ओबीसी में बड़ा हिस्सा यादवों का है जो 14 फीसदी के करीब है. यादवों को राजद का परंपरागत वोट बैंक समझा जाता है. इसके अलावा ओबीसी में 8 फीसदी कुशवाहा और 4 फीसदी कुर्मी वोट बैंक है. इन दोनों पर नीतीश कुमार का प्रभाव है. वैसे उपेंद्र कुशवाहा भी आठ फीसदी कुशवाहा समाज पर प्रभाव का दावा करते हैं. इनके अलावा 16 फीसदी वोट बैंक मुस्लिमों का है. मौजूदा सियासी समीकरण में इस वोट बैंक पर राजद का प्रभाव दिखता है लेकिन जेडीयू भी उसे अपने पाले में करने की कोशिशों में जुटी है. पहले भी माय समीकरण का बड़ा हिस्सा नीतीश को समर्थन दे चुका है.
बिहार में अति पिछड़ी जाति के मतदाताओं का हिस्सा 26 फीसदी के करीब है. इसमें लोहार, कहार, सुनार, कुम्हार, ततवा, बढ़ई, केवट, मलाह, धानुक, माली, नोनी आदि जातियां आती हैं. पिछले चुनावों में ये अलग-अलग दलों को वोट करते रहे हैं लेकिन 2005 के बाद से इनका बड़ा हिस्सा नीतीश के साथ रहा है. अब तेजस्वी इसे तोड़ने की कोशिश में जुटे हैं. 2014 और 2019 के चुनावों में इस समूह का झुकाव बीजेपी की तरफ था.
राज्य में दलितों का वोट परसेंट 16 फीसदी के करीब है. इनमें पांच फीसदी के करीब पासवान हैं बाकी महादलित जातियां (पासी, रविदास, धोबी, चमार, राजवंशी, मुसहर, डोम आदि) आती हैं, जिनका करीब 11 फीसदी वोट बैंक है. पासवान को छोड़कर अधिकांश महादलित जातियों का झुकाव भी 2010 के बाद से जेडीयू की तरफ रहा है. तेजस्वी इसे भी तोड़ने की कोशिश में लगे हैं. पासवान का झुकाव लोजपा की तरफ शुरू से ही रहा है.
राज्य में 15 फीसदी वोट बैंक उच्च जातियों (भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण और कायस्थ) का है. भाजपा और कांग्रेस का फोकस सवर्णों पर रहा है लेकिन पहली बार राजद ने इसमें भी सेंधमारी की कोशिश की है और दर्जन भर टिकट उच्च जाति के उम्मीदवारों को दिए हैं. जेडीयू ने भी 10 भूमिहार, 7 राजपूत और दो ब्राह्मणों को टिकट दिया है.उधर, भाजपा भी ईबीसी और यादवों को अधिक टिकट देकर रिझाने की कोशिशों में जुटी है. यानी सभी दल एक-दूसरे के परंपरागत वोट बैंक में सेंधमारी कर रहे हैं. ऐसे में जो दल मतदाताओं को लामबंद कर पाने में सफल रहेगा, जीत उसी की होगी.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
