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हाथरस / शौर्यपथ / उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुए कथित गैंगरेप की घटनास्थल से कुछ दूर दो युवा खड़े हैं. एक ने कमर पर कीटनाशक छिड़कने वाली मशीन बांध रखी है. वो अपनी फ़सल पर कीटनाशक छिड़कने निकले थे. खेत पर जाने के बजाए वो यहाँ चले आए हैं.
ये दलित युवा बेहद आक्रोशित हैं. वो पीडि़ता को नहीं जानते. पूछने पर कहते हैं, "हमारी बहन के साथ दरिंदगी हुई है. हमारा ख़ून उबल रहा है. जबसे सोशल मीडिया पर उसके बारे में पढ़ा है, हम बेचैन हैं. हम अब ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे. चुनाव आने दो, इसका जवाब दिया जाएगा."
हालांकि यूपी के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार का कहना है कि फ़ोरेंसिक रिपोर्ट में ये साफ़ कहा गया है कि महिला के साथ रेप नहीं हुआ. बल्कि मौत का कारण गर्दन में आई गंभीर चोटें हैं.
वहीं दूसरी ओर दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 'Ó20 वर्ष की महिला को 28 सितंबर को सफ़दरजंग अस्पताल में लाया गया और उनकी हालत काफ़ी गंभीर थी. जब उन्हें भर्ती किया गया तो वह सर्वाइकल स्पाइन इंजरी, क्वेड्रिफ़्लेजिया (ट्रॉमा से लकवा मारना) और सेप्टिकेमिया (गंभीर संक्रमण) से पीडि़त थीं. 'Ó
हालांकि यूपी पुलिस ये बार बार कह रही है कि रीढ़ की हड्डी नहीं टूटी बल्कि गर्दन की हड्डियां टूटी थी जो गला दबाने की कोशिश में टूट गईं. और यही मौत का कारण है.
यहाँ बाजरे के खेत हैं. गाँव को मुख्य मार्ग से जोडऩे वाली सड़क से कऱीब 100 मीटर दूर बाजरे के ही खेत में कथित गैंगरेप हुआ था. घटनास्थल पर पत्रकारों का आना-जाना लगा है. यहाँ मिले कुछ स्थानीय पत्रकार कहते हैं, "ये घटना उतनी बड़ी थी नहीं, जितनी बना दी गई है. इसकी सच्चाई कुछ और भी हो सकती है."
जब मैंने उनसे पूछा कि अगर सच्चाई कुछ और है, तो फिर आपने रिपोर्ट क्यों नहीं की, उनका कहना था, "इस घटना को लेकर भावनाएँ उबाल पर हैं. हम अपने लिए कोई ख़तरा मोल क्यों लें?" हालाँकि अपनी बात के समर्थन में उनके पास कोई ठोस सबूत नहीं थे. वो सुनी-सुनाई बातें ही ज़्यादा कह रहे थे. ये 'बातेंÓ आगे चलकर गाँव में भी सुनाई दीं.
स्थानीय पत्रकारों के साथ हुई अनौपचारिक बातचीत से उठे सवाल को हाथरस के एसपी विक्रांत वीर का ये बयान और गहरा करता है कि 'मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने वाले डॉक्टरों ने अभी रेप की पुष्टि नहीं की है. फ़ॉरेंसिक जाँच की रिपोर्ट का इंतज़ार किया जा रहा है. उसके बाद ही इस बारे में स्पष्ट राय दी जा सकेगी.Ó
कथित गैंगरेप का शिकार हुई पीडि़ता के परिवार को अभी भी मेडिकल रिपोर्ट नहीं दी गई है. जब पीडि़ता को दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तब भी उनके परिजनों के पास मेडिकल रिपोर्ट नहीं थी.
पीडि़ता के भाई कहते हैं, "पुलिस ने हमें पूरे कागज़़ नहीं दिए हैं. हमारी बहन की मेडिकल रिपोर्ट भी अभी हमें नहीं दी गई है." जब इस बारे में एसपी विक्रांत वीर से सवाल किया गया तो उनका कहना था कि ये जानकारी गोपनीय है. जाँच का हिस्सा है. हम घटना से जुड़े हर सबूत जुटा रहे हैं. फ़ॉरेंसिक सबूत भी इक_े किए गए हैं.
एसपी बार-बार इस बात पर ज़ोर देते हैं कि पीडि़ता के साथ उस तरह की दरिंदगी नहीं हुई, जिस तरह मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है. वो कहते हैं, "उनकी जीभ नहीं काटी गई थी. रीढ़ की हड्डी भी नहीं टूटी थी. गले पर दबाव बढऩे की वजह से उनकी गले की हड्डी टूटी थी जिससे नर्वस सिस्टम प्रभावित हुआ था." घटना के कुछ देर बाद रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में पीडि़ता ने अपने साथ बलात्कार की बात नहीं की है. इसमें उन्होंने मुख्य अभियुक्त का नाम लिया है और हत्या के प्रयास की बात की है.
हालाँकि अस्पताल में रिकॉर्ड किए गए एक दूसरे वीडियो में और पुलिस को दिए गए बयान में पीडि़ता ने अपने साथ गैंगरेप की बात की है. इस वीडियो में पीडि़ता कहती है कि मुख्य अभियुक्त ने उसके साथ पहले भी छेडख़़ानी और रेप करने की कोशिश की थी. घटना के दिन के बारे में वो बताती हैं, "दो लोगों ने रेप किया था, बाक़ी मेरी माँ की आवाज़ सुनकर भाग गए थे."
घटना के दिन को याद करते हुए पीडि़ता की माँ कहती हैं, "मैं घास काट रही थी, मैंने बेटी से कहा कि घास को इक_ा कर ले, वो घास इक_ा कर रही थी. एक ही ढेरी बना पाई थी. मुझे जब वो नहीं दिखी तो मैं उसे ढूँढती फिरी. घंटा भर तक उसे ढूँढती रही. मुझे लगा कहीं घर तो नहीं चली गई है. मैंने खेतों के तीन चक्कर काटे. फिर मेढ़ के पास खेत में पड़ी मिली. गले में चुन्नी खींच रखी थी. वो बेहोश पड़ी थी. सारे कपड़े उतरे पड़े थे."
वो पीछे गर्दन की ओर इशारा करते हुए कहती हैं, "रीढ़ की हड्डी टूटी हुई थी. जीभ कटी हुई थी. ऐसा लग रहा था जैसे फ़ालिज मार गया हो. मेरी लड़की में बिल्कुल जान नहीं थी." पीडि़ता ने अपने सबसे पहले बयान में सिफऱ् एक युवक का ही नाम लिया था. इस सवाल पर उसकी माँ कहती हैं, "जब हम उसे बाजरा में से निकाल के ले गए, वो पूरी तरह बेहोश नहीं हुई थी, तब उसने एक का ही नाम बताया था. फिर एक घंटे बाद बेहोश हो गई. चार दिन बाद सुध आई तो पूरी बात बताई कि चार लड़के थे."
पीडि़ता का परिवार उसे अस्पताल ले जाने से पहले चंदपा थाने लेकर गए थे. ये थाना घटनास्थल से कऱीब पौने दो किलोमीटर दूर है. उसकी माँ कहती हैं, "वो रास्ते भर ख़ून की उल्टियाँ कर रही थी. जीभ नीली पड़ती जा रही थी. मैंने उससे पूछा कि बेटा कुछ बता, उसने बस इतना कहा कि मेरा गला दबा हुआ है, मैं बता नहीं सकती हूँ. फिर वो बेसुध हो गई."
सफ़दरजंग अस्पताल ने पीडि़ता की जो ऑटॉप्सी रिपोर्ट जारी की है, "उसमें मौत का कारण गले के पास रीढ़ की हड्डी में गहरी चोट और उसके बाद हुई दिक़्क़तों को बताया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि उसके गले को दबाए जाने के निशान हैं, लेकिन मौत की वजह ये नहीं है. मेडिकल रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अभी विसरा रिपोर्ट आनी बाक़ी है और उसके बाद ही मौत की सही वजह बताई जा सकेगी."
पीडि़ता की मौत के बाद सफ़दरजंग अस्पताल की प्रवक्ता ने कहा था, "20 वर्ष की महिला 28 सितंबर को साढ़े तीन बजे नए इमरजेंसी ब्लॉक में न्यूरो सर्जरी के तहत दाख़िल हुई थी. उन्हें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से रेफऱ किया गया था. भर्ती के समय उनकी स्थिति बहुत नाज़ुक थी. उन्हें सर्वाइकल स्पाइन इंजरी, क्वाड्रीप्लीजिया और सेप्टीसीमिया था. भरसक प्रयास और इलाज के बावजूद उनका कल 29 सितंबर को सुबह 6.25 बजे देहांत हो गया."
14 सितंबर को हुए इस कथित गैंगरेप के मामले में पुलिस ने एफ़आईआर की धाराओं को तीन बार बदला है. पहले सिफऱ् हत्या के प्रयास का मुक़दमा दर्ज किया गया था. उसके बाद गैंगरेप की धाराएँ जोड़ीं गईं. दिल्ली के अस्पताल में 29 सितंबर को पीडि़ता की मौत के बाद हत्या की धाराएँ भी जोड़ी गई हैं.
पुलिस ने इस मामले में पहली गिरफ़्तारी पाँच दिन बाद की थी. क्या पुलिस से जाँच में लापरवाहियाँ हुई हैं, इस सवाल पर पुलिस अधीक्षक कहते हैं, "14 सितंबर को सुबह लगभग साढ़े नौ बजे पीडि़ता अपनी माँ और भाई के साथ थाने आईं थीं. पीडि़ता के भाई ने पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि मुख्य अभियुक्त ने हत्या की मंशा से उसका गला दबाया है. साढ़े नौ बजे मिली इस सूचना पर हमने साढ़े दस बजे एफ़आईआर कर ली थी."
एसपी विक्रांत वीर कहते हैं, "पीडि़ता को तुरंत जि़ला अस्पताल भेजा गया था. जहाँ से उसे अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफऱ कर दिया गया था. इलाज भी तुरंत शुरू हो गया था. तहरीर के आधार पर पहली एफ़आईआर 307 और एससी-एसटी एक्ट की दर्ज की गई थी. फिर पीडि़ता जब कुछ बोलने लायक़ हुई, तो इंवेस्टिगेटिंग ऑफि़सर, जो सर्किल ऑफि़सर हैं, ने बयान लिए, उसमें पीडि़ता ने एक और लड़के का नाम लिया और कहा कि उसके साथ छेडख़़ानी की गई. ये बयान हमारे पास ऑडियो-वीडियो में है. इस बयान के बाद एक और अभियुक्त का नाम रिपोर्ट में जोड़ा गया."
"इसके बाद 22 तारीख़ को पीडि़ता ने अपने साथ दुष्कर्म और चार लोगों के शामिल होने की बात बताई. जब उससे पूछा गया कि पहले उसने दो लोगों का नाम क्यों लिया था और छेड़छाड़ की बात क्यों बताई थी तो उसने कहा इससे पहले उसे बहुत होश नहीं था. पीडि़ता के इस बयान के बाद हमने 376डी यानी गैंगरेप की धारा जोड़ी और अभियुक्तों की गिरफ़्तारी के लिए टीमें गठित कर दीं. जल्दी ही बाक़ी तीनों अभियुक्तों को भी गिरफ़्तार कर लिया गया और जेल भेज दिया गया."
पीडि़ता ने अस्पताल में दिए अपने बयान में गैंगरेप का जि़क्र किया है. लेकिन क्या मेडिकल रिपोर्ट में गैंगरेप की पुष्टि होती है? इस सवाल पर एसपी कहते हैं, "मेडिकल रिपोर्ट एक अहम सबूत है. अभी जो मेडिकल रिपोर्ट हमें मिली है, उसमें डॉक्टरों ने चोटों का अध्ययन किया है लेकिन सेक्शुअल असॉल्ट (यौन हमले) की पुष्टि नहीं की है. अभी उन्हें फ़ॉरेंसिक रिपोर्ट मिलने का इंतज़ार है. उसके बाद ही वो उस पर राय देंगे. पीडि़ता के प्राइवेट पाट्र्स पर भी किसी चोट का जि़क्र नहीं है. ये मेडिकल रिपोर्ट हमारी केस डायरी का हिस्सा होगी."

रात के अंधेरे में अंतिम संस्कार
पुलिस ने मंगलवार देर रात पीडि़ता का अंतिम संस्कार कर दिया था. परिजनों का आरोप है कि उन्हें घर में बंद करके ज़बरदस्ती अंतिम संस्कार किया गया. हालाँकि पुलिस का कहना है कि परिजनों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार हुआ.
इस तरह रात के अंधेरे में ज़बरदस्ती किए गए अंतिम संस्कार के बाद परिजनों और दलित समुदाय का ग़ुस्सा और भड़क गया है. कुछ लोग इसे पीडि़ता का 'दूसरा बलात्कार बता रहे थे.Ó वहीं पुलिस के इस कृत्य को साक्ष्य मिटाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है. आक्रोशित लोगों का कहना था कि पुलिस ने इस तरह अंतिम संस्कार करके 'दोबारा पोस्टमार्टम की संभावना को ख़त्म कर दिया है.Ó
पीडि़ता के भाई ने बीबीसी से कहा, "हमारे रिश्तेदारों को पीटा गया. ज़बरदस्ती उसे जला दिया. हमें तो पता भी नहीं कि पुलिस ने किसका अंतिम संस्कार किया है. आखऱिी बार चेहरा तक नहीं देखने दिया गया. पुलिस को ऐसी क्या जल्दी थी?"
जब हमने एसपी से यही सवाल किया तो उनका कहना था, "मौत हुए काफ़ी देर हो चुकी थी. पोस्टमार्टम और पंचनामे की कार्रवाई होते-होते 12 बज गए थे. कुछ कारणों से पीडि़ता का शव तुरंत नहीं लाया जा सका था. पीडि़ता के पिता और उनके भाई शव के साथ ही आए थे. परिजनों ने रात में ही अंतिम संस्कार करने का फ़ैसला किया था. पुलिस ने क्रियाकर्म के लिए लकडिय़ाँ और अन्य चीज़ें इक_ा करने में मदद की थी. परिजनों ने ही अंतिम संस्कार किया था."
क्या कहना है अभियुक्तों के परिजनों का?
पीडि़ता के घर से अभियुक्तों का घर बहुत दूर नहीं है. एक बड़े संयुक्त घर में तीन अभियुक्तों के परिवार रहते हैं. जब मैं यहाँ पहुँचा, तो घर में सिफऱ् महिलाएँ हीं थीं. उनका कहना था कि उनके बच्चों को झूठा फँसाया गया है. एक अभियुक्त 32 साल का है और तीन बच्चों का पिता है. दूसरा 28 साल का है और उसके दो बच्चे हैं. बाक़ी दो की उम्र 20 साल के आसपास है और उनकी शादी नहीं हुई है.
जब उनकी माओं से पूछा गया कि अगर उनके बेटे शामिल नहीं हैं, तो फिर उनका नाम क्यों लिया गया है तो उनका कहना था, "बहुत पुरानी रंजिश है. इनका तो काम ही यही है. झूठे आरोप लगा दो. फिर बाद में पैसा ले लो. सरकार से भी मुआवज़ा लेते हैं और लोगों से भी."
परिजनों का कहना था कि पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया था बल्कि उन्हें हाजिऱ किया गया था. एक महिला कहती हैं, "जब नाम आ गया तो हमने अपने बालक पुलिस के हाथ में दे दिए." एक अभियुक्त की माँ कहती हैं कि उनका बेटा दूध की डेयरी पर काम करता है और घटना के दिन वहीं था. उसकी हाजिऱी की जाँच की जा सकती है.
अभियुक्तों के परिजन बार-बार अपने ठाकुर होने और पीडि़ता के परिवार के दलित होने का जि़क्र कर रहे थे. अभियुक्त की माँ कहती हैं, "हम ठाकुर हैं, वो हरिजन, हमसे उनका क्या मतलब. वो रास्ते में दिखते हैं तो हम उनसे वहाँ दूरी बना लेते हैं. उन्हें छुएँगे क्यों, उनके यहाँ जाएँगे क्यों?"

अभियुक्तों के बारे में क्या कहना है गाँव के लोगों का?
अभियुक्तों के बारे में गाँव की लोगों की राय उनके परिवार से अपने रिश्तों के आधार पर बँटी है. पास के ही ठाकुर परिवार की कुछ महिलाएँ कहती हैं कि एक अभियुक्त तो पहले से ही ऐसा था. सड़क चलती लड़कियों को छेड़ता था. अपने खेत पर काम कर रहे कुछ ठाकुर परिवारों से जुड़े युवक भी कहते हैं, "ये परिवार ऐसा ही है. लड़ाई-झगड़े करते रहते हैं. बड़ा परिवार है, तो इनके डर से कोई कुछ बोलता नहीं है. सभी एकजुट हो जाते हैं. इनका दबदबा है. गाँव में इनके ख़िलाफ़ कोई कुछ नहीं बोलेगा."
कुछ दूर एक दूसरे खेत पर काम कर रहा एक और युवक कहता है, "सर इस घटना के बारे में जैसा आप सोच रहे हैं वैसा नहीं है. अब एसआईटी जाँच करेगी. एक हफ़्ते में सब पता चल जाएगा कि क्या हुआ. देखते रहिए. टीम गाँव आ रही है."
पड़ोस के ही दलित परिवार के एक बुज़ुर्ग कहते हैं, "ये पहली बार नहीं है कि हम पर इस तरह का हमला किया गया है. हमारी बहू-बेटी अकेले खेत पर नहीं जा सकती है. और ये बेटी तो माँ-भाई के साथ गई थी तब भी उसके साथ ये हो गया. इन लोगों ने हमारी जि़ंदगी को नर्क बना दिया है. हम ही जानते हैं इस नर्क में हम कैसे रह रहे हैं."
गांव में जातिवाद
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से कऱीब 160 किलोमीटर दूर बसे इस गाँव में अधिकतर ठाकुर और ब्राह्मण परिवार ही रहते हैं. दलितों के कऱीब दर्जनभर घर हैं, जो आसपास ही हैं.
दलितों और गाँव के बाक़ी लोगों के बीच सीधा संबंध नजऱ नहीं आता है. इस घटना के बाद तथाकथित उच्च जाति के लोगों ने पीडि़ता के घर जाकर सांत्वना नहीं दी है. पीडि़ता के रिश्तेदार भी यही कहते हैं कि दूसरी जाति के लोगों से उनका संबंध नहीं है. एक अभियुक्त का नाबालिग़ भाई अपने भाई को निर्दोष बताते हुए बार-बार अपनी जाति का जि़क्र करता है. वो कहता है, "हम गहलोत ठाकुर हैं, हमारी जाति इनसे बहुत ऊपर है. हम इन्हें हाथ लगाएँगे, इनके पास जाएँगे."
दलितों में भड़कता आक्रोश
पुलिस ने गाँव पहुँचने के सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग की है. अधिकतर लोगों को बाहर ही रोका जा रहा है. पत्रकारों को भी पैदल ही गाँव जाने दिया जा रहा है. दलित समुदाय से जुड़े लोग पीडि़ता के घर पहुँचकर सांत्वना देना चाहते हैं. लेकिन पुलिस उन्हें बाहर ही रोक रही है.
उत्तराखंड से आए दलितों के एक प्रतिनिधिमंडल को भी पुलिस ने बाहर ही रोक दिया. इसमें शामिल लोग कहते हैं, "सरकार हमारे साथ बहुत अन्याय कर रही है, हम इसे अब और नहीं सहेंगे. हम अपने लोगों के घर जाकर उन्हें ढांढस भी नहीं बंधा सकते." इस समूह में शामिल एक युवा कहता है, "इस सरकार का घमंड अब चुनावों में ही टूटेगा."
मैंने गाँव से मुख्य मार्ग तक जाने के लिए एक बाइक सवार से लिफ़्ट ली. ये यहाँ से कऱीब 30 किलोमीटर दूर स्थित एक गाँव का कोई 18-20 साल की उम्र का युवा था. वो नोएडा में नौकरी करता है और घटना का पता चलने के बाद यहाँ आया है.
वो कहते हैं, "जब से अपनी बहन के बलात्कार के बारे में पता चला है. चैन से नहीं बैठा हूँ. रोज़ सोशल मीडिया पर उसके बारे में पढ़ रहा था. उसकी मौत की ख़बर सुनते ही तुरंत गाँव चला आया. अगर वो दरिंदे मेरे सामने आए तो गोली मार दूँ."
एसआईटी जाँच
सरकार ने अब इस घटना की जाँच के लिए तीन सदस्यों की स्पेशल इंवेस्टिगेटिंग टीम गठित कर दी है, जो बुधवार शाम हाथरस पहुँच गई. अब गाँव की सीमाओं को मीडिया समेत बाक़ी सभी के लिए सील कर दिया गया है. एसआईटी ने जाँच शुरू कर दी है.
एक सप्ताह बाद एसआईटी को अपनी रिपोर्ट सौंपनी हैं. एसआईआटी की जाँच में ही घटना का पूरा सच पता चल सकेगा. घटना का सच जो भी है, इससे शायद अब बहुत ज़्यादा फ़कऱ् नहीं पड़ेगा. दलित समुदाय का ग़ुस्सा इस घटना के बाद भड़क गया है, उसे अब थामना बहुत आसान नहीं होगा.
पुलिस की भूमिका पर उठते सवाल
इस घटना के बाद पुलिस की शुरुआती जाँच और भूमिका पर कई गंभीर सवाल उठे हैं, जिनके जवाब अभी नहीं मिल सके हैं.
1. पुलिस ने घटना स्थल को सील क्यों नहीं किया. घटना के पहले दिनों में वहाँ से साक्ष्य क्यों नहीं जुटाए?
2. रात के अंधेरे में ज़बरदस्ती अंतिम संस्कार क्यों किया?
3. पीडि़ता के परिवार के साथ उसकी मेडिकल रिपोर्ट साझा क्यों नहीं की?
4. तकनीकी साक्ष्य क्यों नहीं जुटाए गए और अभियुक्तों की गिरफ़्तारी में देर क्यों की गई?
हालाँकि इन सवालों पर हाथरस के एसपी विक्रांत वीर का कहना था, "पुलिस ने अपने काम में कोई लापरवाही नहीं की है. सभी सबूत जुटाए गए हैं और जुटाए जा रहे हैं. घटना की विवेचना निष्पक्षता से की जा रही है. कोई गुनाहगार बचेगा नहीं और किसी बेगुनाह को झूठा फँसाया नहीं जाएगा."
वो कहते हैं, "हमारी जाँच अपनी रफ़्तार से चल रही है, हम मामले को फ़ॉस्ट ट्रैक अदालत ले जाकर पीडि़ता को इंसाफ़ दिलाएँगे."
(समाचार संकलन बीबीसी हिंदी से )
मुंबई / शौर्यपथ / मुंबई में वडाला GRP ने लोकल में यात्रा करने के लिए फर्जी QR कोड बनाने वाले शख्स का पर्दाफाश किया है. मामले में मुख्य आरोपी अनीस राठौड़ के साथ फर्जी QR कोड पर यात्रा करने वाले कुछ यात्रियों को भी गिरफ्तार किया गया है. वडाला GRP के वरिष्ठ निरीक्षक राजेन्द्र पाल ने बताया कि कुछ दिन पहले वडाला रेल स्टेशन पर दो यात्रियों को फर्जी QR कोड पर यात्रा करते पकड़ा गया था. मुंबई में ऐसे 6 स्टेशनों पर अलग-अलग मामले सामने आने पर पुलिस ने जब जांच शुरू की तो सभी में अनीस राठौड़ का नाम सामने आया.
अनीस के घर पर दबिश दी गई तो उसके घर से कंप्यूटर और बाकी साहित्य जब्त हुए. अनीस ने पूछताछ में बताया कि वह 500 से 1000 रुपये लेकर फर्जी QR कोड बनाकर देता था. अब तक 500 के करीब लोगों को कोड बेच चुका है.
कोरोना काल में जो लोग सरकारी या अत्यावश्यक सेवा में हैं, उन्हें ही लोकल से यात्रा करने की इजाजत है. इसके लिए QR कोड बनाकर दिया जाता है. पता चला है कि अनीश से QR कोड लेने वाले ज्यादातर गरीब मजदूर हैं, जो खाने के स्टॉल पर काम करते हैं.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की यात्रा के लिए विशेष रूप से निर्मित बी-777 विमान गुरुवार को अमेरिका से भारत पहुंचेगा. सरकारी अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि विमान को अगस्त में ही विमान निर्माता कंपनी बोइंग द्वारा एअर इंडिया को सौंपा जाना था, लेकिन तकनीकी कारणों से इसमें देरी हुई.
अधिकारियों ने बताया कि बोइंग से विमान प्राप्त करने के लिए एअर इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी अगस्त में ही अमेरिका पहुंच गए थे.
विमान बृहस्पतिवार को अपराह्न लगभग तीन बजे टेक्सास से दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरेगा. उन्होंने कहा कि वीवीआईपी की यात्रा के लिए एक और विशेष रूप से निर्मित बी777 विमान बाद में बोइंग से प्राप्त होने की संभावना है. उम्मीद की जा रही थी कि VVIP यात्रा के लिए इन दोनों विमानों को जुलाई तक सौंप दिया जाएगा, लेकिन कोविड-19 के कारण इनकी आपर्ति में कुछ महीनों की देरी हुई है. एक अधिकारी ने बताया कि वीवीआईपी की यात्रा के दौरान, दोनों बी777 विमानों को एअर इंडिया के पायलट नहीं, बल्कि भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के पायलट उड़ाएंगे. गौरतलब है कि वर्तमान में, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री एअर इंडिया के बी747 विमानों से यात्रा करते हैं.
पटना / शौर्यपथ / बिहार की राजधानी पटना में इन दिनों घरों में चोरी आम बात है लेकिन बुधवार को प्रख्यात कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु के पटना स्थित आवास पर चोरों ने हाथ साफ़ कर लिया. चोरों ने उनकी कई सारी साहित्य विरासत और पांडुलिपियां चुराकर ले गए .जिसमें रेणु जी के परती परिकथा , मैला आंचल और सत्तर के दशक में चुनाव में हार के बाद अधूरी लिखी काग़ज़ की नांव शामिल हैं . परिवार के सदस्यों की माने तो इसके अलावा कई और किताबें, दुर्लभ चिट्टियां और उनके विधायक रहे पुत्र पद्म प्रयाग रेणु के अहम काग़ज़ात भी शामिल हैं.
इस चोरी की घटना को अंजाम देने वाले चोरों ने किसी महंगे समान जैसे टीवी, फ़्रिज को हाथ भी नहीं लगाया. परिवार वाले उनके हस्तलिखित पांडुलिपि के चोरी होने से अधिक दुखी हैं .पटना के राजेंद्र नगर स्थित इस घर में फ़िलहाल उनके छोटे बेटे का एक सम्बंधी रहता था जो घटना के समय बाहर गया हुआ था.
हालांकि इससे पूर्व उनके गांव में रेणु स्मृति भवन में भी इस साल जनवरी में चोरी हुई थी .हालांकि इस घटना के बाद पटना पुलिस के वरीय अधिकारी पहुंचे और सीसीटीवी में उन्हें चोरों का सुराग भी मिला है . लेकिन इस घटना ने पूरे राज्य में विधि व्यवस्था और ख़ासकर राजधानी पटना में चोरों के बढ़ते साम्राज्य को फिर से दर्शाया हैं . रेणु जी की लिखी मारे गये गुलफाम पर तीसरी क़सम फिल्ब बनी थी वहीं मैला आंचल पर धारावाहिक बन चुका हैं.
पटना / शौर्यपथ / बिहार विधानसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी के सूत्र से सीट शेयरिंग को लेकर एनडीटीवी से बात की. सूत्र से मिली जानकारी के मुताबिक, बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व में एलजेपी इस चुनाव में 42 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रहा है. एलजेपी के सूत्र के मुताबिक, लोक जनशक्ति पार्टी ने पिछले चुनाव में 42 सीटों पर चुनाव लड़ा था. इस बार भी लोक जनशक्ति पार्टी ने 42 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखी है.
साथ ही यह भी कहा, ''हमारे लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि इन 42 सीटों में से कम से कम 32 सीटें ऐसी हो, जो हमारी पसंद की हो. पिछले चुनाव में हमें जो सीटें दी गई थी उसमें से सिर्फ 8 सीटें हमारी ए-लिस्ट की सीटें थी जहां हम मजबूत थे. अगर बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व हमारे मांग को स्वीकार नहीं करती है, तो लोजपा 143 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है.''
सूत्र ने बताया कि लोक जनशक्ति पार्टी को यह आश्वासन दिया गया है कि अगले 1 से 2 दिन के अंदर सीट शेयरिंग पर फैसला हो जाएगा. सूत्र के मुताबिक, नीतीश का "7 निश्चय" हमें स्वीकार नहीं है. अगर नीतीश कुमार हमारे समर्थन से दोबारा मुख्यमंत्री बनते हैं तो उन्हें "बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट" की नीति को भी अपने एजेंडे में शामिल करना होगा. हम चाहते हैं कि बिहार चुनाव के लिए एनडीए एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम तैयार करे.
सेहत / शौर्यपथ / कमजोर हड्डियां सिर्फ शरीर को ही कमजोर नहीं बनाती बल्कि हृदय के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डालती हैं। अगर आप अपने हृदय को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो अपने हड्डियों को मजबूत बनाना बेहद जरूरी है।
लंदन की क्वीन मेरी यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ हैंपटन के मेडिकल रिसर्च काउंसिल लाइफकोर्स इपिडेमियोलॉजी यूनिट के एक हालिया शोध में हड्डियों में मिनरल की कम मात्रा और खराब हृदय स्वास्थ्य के बीच संबंध पाया गया है। शोध में पाया गया है कि महिलाओं और पुरुषों दोनों में ही हड्डियों के कमजोर होने से हृदयरोग पनपते हैं।
जर्नल ऑफ बोन में प्रकाशित इस शोध में यूके बायोबैंक के डाटा का इस्तेमाल किया गया है। शोधकर्ताओं ने इमेजिंग और रक्त बायोमार्कर डाटा के कई प्रारूपों का संयुक्त तरीके से इस्तेमाल कर हड्डियों और हृदय के स्वास्थ्य के बीच संबंधों का आकलन किया।
इन कारणों से कमजोर हो सकती है हड्डी-
इनदिनों गठिया और हृदय की बीमारियों सबसे बड़े स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में उभर रहे हैं। दोनों तरह की बीमारियों की वजह बढ़ती उम्र, धूम्रपान और असक्रिय जीवनशैली है। शोध से पता चलता है कि जोखिम कारकों के समान होने के अलावा भी दोनों के बीच संबंध हो सकते हैं। इस शोध से यह भी पता चलता है कि दोनों तरह की समस्याओं का जैविक पाथवे भी समान हो सकता है। इस शोध से दोनों बीमारियों के लिए दवा की खोज आसान हो सकेगी।
सख्त हो जाती हैं धमनियां-
शोधकर्ताओं ने पाया कि हड्डी का घनत्व कम होने का संबंध धमनियों के सख्त होने से था। जिन महिलाओं और पुरुषों की हड्डी कमजोर थीं उनके हृदय की धमनियां ज्यादा सख्त थीं। शोध में पाया गया कि हड्डी में कमजोरी से जूझ रहे मरीजों में हृदयघात से मौत होने का खतरा ज्यादा था। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि हड्डी और हृदय के स्वास्थ्य की प्रणालियां पुरुषों और महिलाओं में अलग थी।
शोधकर्ता डॉक्टर जहरा राइशी ने कहा, हमारे शोध में कमजोर हड्डियो और दिल की बीमारियों के बीच सीधा संबंध पाया गया है। प्रोफेसर निक हार्वे ने कहा यूके बायोबैंक में मौजूद डाटा का बड़े पैमाने पर विश्लेषण करने पर पाया कि मस्क्यूलोस्केलेटल और कार्डियोवस्कुलर स्वास्थ्य का जैविक पाथवे एक जैसा है और इस खोज से इन दोनों के लिए दवा बनाने में मदद मिल सकती है। प्रोफेसर स्टीफन पीटरसन ने कहा, हृदयरोगों के जोखिम कारकों के बारे में जानकारी बढ़ने से उससे बचाव और उसके इलाज के बेहतर तरीकों के बारे में जाना जा सकेगा।
इन चीजों के सेवन से मजबूत होंगी हड्डियां-
कैल्शियम के स्रोत :
कैल्शियम के लिए आप दूध और दूध से बनी चीजों का सेवन कर सकते हैं। इसके साथ ही हरी पत्तेदार सब्जियां आपको कैल्शियम और आयरन दोनों ही देने में मदद करती है। मछली भी अच्छा विकल्प है। साबुत अनाज, केले, सार्डिनेस, सालमन, बादाम, ब्रेड, टोफू और पनीर कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं।
विटामिन डी के स्रोत :
आप विटामिन डी के लिए फैटी फिश जैसे टूना, मेकरेल, सेलमॉन, अंडे का सफेद भाग, सोया मिल्क, डेयरी प्रोडक्ट जैसे दूध, दही वगैरह मशरूम, अनाज, चीज, संतरे का जूस, कोका को आहार में शामिल कर सकते हैं।
पोटैशियम के स्रोत : पोटैशियम के लिए आप अपने आहार में जड़ यानी कंद-मूल शामिल करें। इनमें शकरकंद, आलू छिलके के साथ सहित अच्छा विकल्प है। इसके अलावा दूध या दूध से बनी चीजें भी आप आहार में शामिल कर सकते हैं।
मैग्नीशियम के स्रोत :
मैग्नीशियम के लिए आप हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल कर सकते हैं। पालक मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत होता है। इसे अलावा टमाटर, आलू, शकरकंद भी ले सकते हैं।
नंबर गेम-
-हड्डियों का एक सामान्य वयस्क में +1 से -1 एसडी घनत्व होना चाहिए
-हड्डियों का घनत्व गठिया की बीमारी होने पर -2.5 एसडी हो जाता है
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / कोरोना वायरस ने पूरे विश्व को चपेट में ले रखा है। दुनियाभर के वैज्ञानिक आए दिन इसे लेकर नए-नए शोध कर रहे हैं। इसी बीच अमेरिका के जॉर्जिया विश्वविद्यालय ने संक्रमण को लेकर एक नया अध्ययन किया है, जो बंद जगहों पर कोविड-19 के हवा में संचरण के बढ़ते सबूतों का समर्थन करता है।
शोधकर्ताओं ने कोरोना से संक्रमित एक चीनी रोगी पर अध्ययन किया, जिसके चलते बस के एयर कंडिशनिंग सिस्टम के जरिए बस में सवार दूसरे लोग भी संक्रमण की चपेट में आ गए। हालांकि बस में शारीरिक दूरी का पालन किया जा रहा था। इसका कारण यह था कि बस की खिड़कियां बंद थीं। वेंटिलेशन की समस्या के चलते दूसरे यात्री भी कोरोना का शिकार हो गए।
जामा इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित किए गए यह अध्ययन इस सवाल पर विचार करता है कि कोविड-19 हवा के जरिए कैसे फैल सकता है। यूजीए कॉलेज ऑफ पब्लिक हेल्थ की सहयोगी प्रोफेसर और रिसर्च की लेखक ये शेन ने कहा कि हवा के जरिए कोरोना संक्रमण के प्रसार की संभावना कई वैज्ञानिकों ने जताई है पर सीमित साक्ष्यों के साथ। हमारे शोध से ऐसे प्रमाण सामने आए हैं, जिसने इस संदेह को हकीकत में बदल दिया है।
शेन ने कहा कि काफी हद तक यही माना जाता रहा था कि खांसने और छींकने से निकलीं बूंदों के माध्यम से यह वायरस फैल रहा है। इसके बाद विश्व स्तर पर शारीरिक दूरी और हाथ धोने जैसे उपायों को अपनाया गया ताकि इसके प्रसारण पर लगाम लग सके। बावजूद इसके कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है।
भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जोखिम ज्यादा-
शेन ने कहा कि हमारे इस शोध के निष्कर्ष उन परिदृश्यों को उजागर करते हैं, जहां कोविड-19 एरोसोल कणों के माध्यम से एक बंद स्थान में हवा के जरिए फैल सकता है। भीड़-भाड़ वाली बंद जगहों पर ज्यादा खतरा है, क्योंकि वहां वेंटिलेशन नहीं हो पाता और संक्रमण का जोखिम दोगुना जाता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि चाहे आप अपने दफ्तर में हों या दुकान में या किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर कर रहे हों, आपके लिए मास्क पहनना अनिवार्य है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / इंसानों को भोजन, दवा और ईंधन देने वाले विश्व के 40 फीसदी पौधे विलुप्ति के कगार पर हैं। संयुक्त राष्ट्र समिट में जारी की गई एक रिपोर्ट से इस भयावह स्थिति का खुलासा हुआ। विश्व के पौधों और कवक की स्थिति पर 42 देशों के 200 से अधिक वैज्ञानिकों ने यह रिपोर्ट तैयार की है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ये पौधे 39.4 प्रतिशत की दर से विलुप्त हो रहे हैं।
इन वैज्ञानिकों का कहना है कि ये पौधे इतनी तेजी से विलुप्त हो रहे हैं कि हमें उनकी विलुप्ति से पहले उनके नाम और विवरण देने के लिए समय के साथ दौड़ लगानी पड़ रही है। रिपोर्ट के बारे में रॉयल बॉटेनिक गार्डन के निदेशक प्रो. एलेक्सजेंडर अंटोनी ने कहा कि जो पौधे दुनिया को खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे से लड़ने का उपाय दे सकते थे, उनके विलुप्त हो जाने से दुनिया यह अवसर भी खो देगी।
जंगल कटने से आया संकट -
रिपोर्ट में बताया गया है कि बेतहाशा जंगल काटे जाने से इन पौधों के पनपने का अनुकूल वातावरण नष्ट होता जा रहा है इसलिए बहुत बड़ी तादाद में ये प्रजातियां नष्ट हो रही हैं। प्रो. एलेक्सजेंडर ने कहा कि अब हम विलुप्ति के दौर में जी रहे हैं, सभी देशों के नेताओं को इस स्थिति से निपटने के लिए तुरंत उपाय करने चाहिए।
1.4 लाख पौधों को खतरा-
रिपोर्ट में बताया गया कि विश्व में पौधों की प्रजातियों का कुल 39.4 प्रतिशत यानी 1.4 लाख पौधों को विलुप्ति का खतरा मंडरा रहा है। 2016 में विलुप्ति की दर का अनुमान 21 प्रतिशत माना गया था।
बिना उपयोग में आए ही नष्ट हो जाएंगे -
रिपोर्ट में बताया गया कि जो पौधे जल्दी नष्ट होने वाले हैं, उनमें से बहुत सी ऐसी प्रजातियां हैं जिनका अब तक इंसानी जरूरतों के लिए इस्तेमाल ही नहीं हुआ। सात हजार से ज्यादा खाद्य योग्य ऐसे पौधे नष्ट हो सकते हैं जिनसे खेती करके दुनिया की बड़ी आबादी का पेट भरा जा सकता था। अभी मौजूद 2500 प्रजातियों से करोड़ों लोगों तक बायो ईंधन पहुंच सकता पर वे निकट भविष्य में नहीं बचेंगे।
अभी दुनिया में बायो ईंधन बनाने के लिए मात्र छह फसलें- मक्का, गन्ना, सोयाबीन, ताड़ का तेल, रेपसीड और गेहूं का ही उपयोग होता है। संरक्षण विज्ञान के प्रमुख डॉ. कोलिन कहते हैं कि हमने भोजन, दवा व ईंधन बनाने में जंगली प्रजातियों की क्षमता की अनदेखी की है।
एक नजर में-
-2016 में 21% की दर से विलुप्ति का लगाया गया था अनुमान
-2020 में 39.4% दर से पौधों के लुप्त होने का अनुमान लगाया
-7000 से ज्यादा पौधों से भविष्य में खेती हो सकती थी
-2500 से ज्यादा पौधे करोड़ों लोगों को जैव ईंधन दे सकते थे
-723 औषधि वाले पौधे, 1,942 अन्य पौधे व 1,886 कवक पर संकट
खाना खजाना / शौर्यपथ / बच्चे हों या बड़े चॉकलेट आइसक्रीम हर किसी की फेवरेट होती है। खास बात यह है कि इस टेस्टी डिजर्ट का लुत्फ आप किसी भी मौसम में उठा सकते हैं। यह आइसक्रीम खाने में जितनी टेस्टी है बनने में उतनी ही आसान भी है। तो डिजर्ट लवर्स देर किस बात की, आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है यह टेस्टी आइसक्रीम।
चॉकलेट आइसक्रीम बनाने के लिए सामग्री-
-2 1/2 कप फुल क्रीम दूध
-1 टी स्पून कस्टर्ड पाउडर
-2 टी स्पून कोको पाउडर
-1 कप चीनी
-1/2 टी स्पून वनीला एसेंस
-1 1/2 कप क्रीम
-नट्स
चॉकलेट आइसक्रीम बनाने का तरीका-
चॉकलेट आइसक्रीम बनाने के लिए सबसे पहले आधा कप दूध में चीनी, कोको और कस्टर्ड पाउडर मिलाने के बाद बचे हुए दूध को उबालकर उसमें बनाया हुआ कस्टर्ड मिक्सचर मिला लें। अब इस मिक्सचर के उबलने के बाद आधा मिनट गैस की आंच हल्की करके ठंडा होने के लिए छोड़ दें।
ठंडा होने पर इसमें क्रीम और वनीला एसेंस मिलाकर इसे 1 डिब्बे में भरकर रख दें। आइसक्रीम जमने के बाद इसे ब्लैंडर में पीसकर दोबारा फ्रिज में जमने के लिए रख दें। यह प्रकिया दो बार दोहराएं। अब करीब 2 घंटे तक इसे नॉर्मल टैंपरेचर पर जमाकर नट्स डालकर गार्निश करके सर्व करें।
खाना खजाना / शौर्यपथ / जब कभी इंडियन स्नैक्स की बात होती है तो चाय की प्याली के साथ पकौड़ों का जिक्र जरूर होता है। पकौड़े तो आपने कई तरह के खाए होंगे पर आज हम आपको बताने जा रहे हैं कैसे बनाया जाता है चिकन पकौड़ा। चिकन पकौड़े हर तरह की पार्टी के लिए एक बढ़िया स्टार्टर होने के साथ शाम की चाय के लिए एक अच्छा स्नैक भी है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कैसे बनाएं जाते हैं क्रिस्पी चिकन पकौड़े।
चिकन पकौड़ा बनाने के लिए सामग्री-
-1/2 टी स्पून चिकन बोनलेस
-स्वादानुसार नमक
-1 टी स्पून अदरक लहसुन का पेस्ट
-2 कप बेसन
-1 टी स्पून चिली फलेक्स
-1 छोटा चम्मच पीसा जीरा
-1 छोटा चम्मच पीसे धनिये के बीज
-1 टी स्पून चिकन पाउडर
-1 टी स्पून आमचूर
-2 टी स्पून अनारदाना
-एक चुटकी बेकिंग सोडा
-2 टेबल स्पून हरा धनिया कटा हुआ
-2 टेबल स्पून पुदीना कटा हुआ
-8 टेबल स्पून तेल
चिकन पकौड़ा बनाने का आसान तरीका-
चिकन पकौड़ा बनाने के लिए सबसे पहले चिकन को नमक और अदरक-लहसुन के पेस्ट में लगाकर 10 मिनट के लिए मैरीनेट होने के लिए अलग रख दें। अब एक दूसरे बाउल में सभी सामग्री को मिलाकर पानी की मदद से एक अच्छा सा बैटर तैयार कर लें। अब चिकन के टुकड़ों को बैटर में डिप करके उन्हें तेल में डीप फ्राई करें। आपके गर्मा-गर्म चिकन पकौड़े बनकर तैयार हैं, उन्हें शाम की चाय के साथ और हरी चटनी के साथ सर्व करें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
