August 04, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने नए कृषि कानून को लेकर सरकार पर हमला बोला है. साथ ही राज्यसभा में कृषि क्षेत्र से जुड़े विधेयक के पास होने के तरीके पर भी सवाल उठाया है. राहुल गांधी ने कृषि कानून का विरोध करते हुए कहा कि यह कानून हमारे किसानों के लिए मौत की सजा है. बता दें कि संसद की ओर से पारित कृषि विधेयक कानून का रूप भले ही ले चुके हैं, लेकिन इसको लेकर जारी विरोध अब भी नहीं थमा है. पंजाब समेत अन्य जगहों पर किसान नए कृषि कानून का विरोध कर रहे हैं.
    राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में कहा, "कृषि क़ानून हमारे किसानों के लिए मौत की सज़ा है. उनकी आवाज़ संसद के अंदर और बाहर कुचल दी गयी है. ये इस बात का प्रमाण है कि भारत में लोकतंत्र मर चुका है."
    वहीं, भाषा की खबर के मुताबिक, भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कृषि संबंधी कानूनों के विरोध में सोमवार सुबह इंडिया गेट पर एक ट्रैक्टर को आग के हवाले कर दिया. पुलिस के मुताबिक, खुद के पंजाब युवा कांग्रेस का सदस्य होने का दावा करने वाले पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है. पुलिस का कहना है कि करीब 15-20 लोग राजपथ, मान सिंह क्रॉसिंग पर एक ट्रैक्टर को ट्रक में लादकर पहुंचे. इसके बाद उन्होंने ट्रैक्टर को नीचे उतारकर उसमें आग लगा दी.
    भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी राहुल राव ने कहा कि संगठन की पंजाब इकाई के कार्यकर्ताओं ने कृषि संबंधी कानूनों के विरोध में ट्रैक्टर को आग लगाई. युवा कांग्रेस ने ट्वीट किया, ''शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती पर आज पंजाब युवा कांग्रेस ने गूंगी-बहरी सरकार को जगाने के लिए इंडिया गेट पर किसानों के साथ ट्रैक्टर आग के हवाले किया और प्रदर्शन किया.
    पुलिस उपायुक्त (नयी दिल्ली) ईश सिंघल ने बताया कि पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है और एक इनोवा कार को भी पुलिस ने अपने कब्जे में लिया है. पुलिस के मुताबिक, जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है उनकी पहचान मनजोत सिंह (36), रमनदीप सिंह (28), राहुल (23), साहिब (28) और सुमित (28) के तौर पर हुई है। ये सभी पंजाब के निवासी हैं.
    इस घटना को लेकर भाजपा की दिल्ली इकाई के मीडिया संपर्क प्रमुख नीलकांत बक्शी ने कहा कि 'अफवाह फैलाकर हिंसा भड़काने की इस खतरनाक साजिशÓ को लेकर वह प्राथमिकी दर्ज कराएंग

    धर्म संसार /शौर्यपथ /ज्योतिष शास्त्र में वैदिक गणित के साथ-साथ फलादेश की कई विधाएं हैं। जैसे शकुन-अपशकुन विज्ञान, छींक और स्वर संचालन आदि। ऐसे ही कुछ संकेत हमारे जीवन में मिलते हैं जिनसे यह पता लगा सकते हैं कि हमारे साथ क्या होने जा रहा है। ज्योतिषाचार्य पं.शिवकुमार शर्मा से जानिए ऐसे संकेतों के बारे में जिनसे पता चल सकता है कि आने वाला समय अच्छा नहीं है।

    -यदि कोई नई वस्तु घर में आते ही टूट जाए, खंडित हो जाए या खराब हो जाए तो समझो कि भाग्य साथ नहीं है।
    -यदि रसोई में बार-बार दूध उफनकर नीचे चल जाए या तेल,घी आदि बिखर जाए तो मानना चाहिए कि अभी भाग्य साथ नहीं दे रहा।
    -पूजा करते समय कुत्तों के भौंकने या तेज लड़ाई की आवाज आए तो यह भी अच्छा संकेत नहीं है।
    - यदि घर में मकड़ियों के जाले लगे हों और मंदिर गंदा रहता हो तो यह शुभ संकेत नहीं है।
    -पूजा करते समय दीपक में घी होने पर तथा तेज हवा न होने पर भी दीपक अचानक बुझ जाए तो यह अच्छा संकेत नहीं है।
    -नया वस्त्र पहनते ही फट जाए या किसी कोने में उलझ जाए यह भी शुभ संकेत नहीं है।
    -यदि घर से निकलते ही पैरों में ठोकर लग जाए,चप्पल टूट जाए, यह जूता फट जाए तो यह शुभ शकुन नहीं है।
    -घर का मुख्य दरवाजा या छत हमेशा गंदी रहती हो या छत पर कबाड़ पड़ा हो इससे राहु अप्रसन्न होकर दुर्भाग्य लाते हैं।
    -नवरात्रों के समय जौ बोए जाते हैं। यदि सारे जौ एकसाथ होकर सुनहरे रंग के निकले तो भाग्य साथ देता है। यदि ज्वारे पूरे ना निकले या चार-पांच दिन बाद निकले तो समझो भाग्य में अवरोध है।
    -रुपयों को थूक लगाकर गिनना लक्ष्मी हानि के संकेत हैं।
    -यदि चारपाई या बेड पर अचानक खटमल हो जाएं समझो कि दुर्भाग्य दस्तक देने जा रहा है।
    -रात्रि के समय रसोई में जूठे बर्तन रखे हो,उनकी साफ-सफाई ना हो। सामान अस्त-व्यस्त हो तो वहां भी दुर्भाग्य को दस्तक देने में देर नहीं लगती।
    -जिस घर में गंदगी रहती हो, किसी कोने में बदबू आती हो, प्लास्टर चटक गया हो या सीलन आ गई हो तो यह भी अच्छे संकेत नहीं होते हैं।

    दुर्ग । शौर्यपथ । कृषि विधेयक को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के बयान पर कांग्रेस ने घेरते हुए कहा है कि आखिर वे किस मुंह से इसे किसान हितैषी बता रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री राजेंद्र साहू ने बयान जारी करते हुए कहा कि कृषि विधेयक किसानों को गर्त में ले जाने वाला विधेयक है। डॉ. रमन सिंह द्वारा इस विधेयक को किसान हितैषी बताना समझ से परे हैं। राजेंद्र ने कहा कि रमन सिंह को याद रखना चाहिए कि उनके कार्यकाल में छत्तीसगढ़ के किसान कर्ज में डूबे थे। प्रदेश के किसान लगातार आत्महत्या कर रहे थे। अपनी जायज मांगों को लेकर किसानों द्वारा किए गए आंदोलन को दबाने का प्रयास किया गया। 15 साल के शासनकाल में रमन सरकार को किसानों की आवाज नहीं सुनाई दी। किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में कोई भी प्रयास नहीं हुआ। राजेंद्र ने कहा कि पूर्ववर्ती डॉ रमन सिंह की सरकार ने किसानों से किया कोई भी वादा पूरा नहीं किया। किसानों को वायदे के अनुसार 21 सौ रुपए प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य नहीं दिया। वायदे के अनुसार 3 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से बोनस भी नहीं दिया गया। किसानों को नकली खाद और घटिया बीज की सप्लाई की गई। रतनजोत के बीज से डीजल बनाने की बात कह कर किसानों के साथ धोखा किया गया। धान घोटाला, नान घोटाला सहित कई घोटाले किए गए, जिसे प्रदेश की जनता भली भांति जानती है। राजेंद्र ने कहा कि कृषि विधेयक को लेकर किए जा रहे दावे और बयानबाजी बिल्कुल वैसे ही हैं, जैसे हर नागरिक के खाते में 15 लाख रुपए, 2 करोड़ लोगों को हर साल रोजगार और महंगाई कम करने के वादे किए गए थे। सारे दावे गलत साबित हुए। इसी तरह धरातल में कृषि विधेयक का हाल भी वैसा ही होगा जैसा जीएसटी, नोटबंदी का हुआ। मोदी सरकार के इन फैसलों से आम जनता को सिर्फ नुकसान हुआ। भविष्य में कृषि विधेयक से भी किसानों और आम जनता को नुकसान ही होगा। राजेंद्र ने रमन सिंह से कहा है कि अगर वे वास्तव में किसानों का हित चाहते हैं, तो पूरे देश में किसानों को गेहूं और धान का समर्थन मूल्य 2500 रुपए प्रति क्विंटल करने एक प्रतिनिधिमंडल के साथ केंद्र सरकार से बात करें। सहकारी समिति के माध्यम से किसानों का अनाज को खरीदने की व्यवस्था हो और केंद्र सरकार किसानों का अनाज खरीदे। सरकार व्यवसाइयों से एग्रीमेंट करे। कार्पोरेट जगत और किसानों के बीच एग्रीमेंट न कराया जाए।

    लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / सोशल मीडिया पर ‘घोस्ट चैलेंज’ तेजी से वायरल हो रहा है। बड़ी संख्या में किशोर भूत की वेशभूषा में रिकॉर्ड किए गए वीडियो ट्विटर, इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर साझा कर रहे हैं। हालांकि, दुनियाभर में अश्वेतों को समान अधिकार देने की मांग को लेकर जारी ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ आंदोलन के मद्देनजर आलोचकों ने ‘घोस्ट चैलेंज’ पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
    उन्होंने कहा है कि सफेद चादर में लिपटे किशोर ‘कू क्लक्स क्लान’ की याद दिलाते हैं। ‘कू क्लक्स क्लान’ एक श्वेत दक्षिणपंथी संगठन था, जिसके लड़ाके सफेद चोगे में घूमते थे। वे अश्वेतों की हत्या और उत्पीड़न के लिए कुख्यात थे। 1800 और 1900 के दशक में उनकी दहशत चरम पर थी। अमेरिका में हैलोवीन पार्टी में सफेद पोशाक पहनने का चलन भी ‘कू क्लक्स क्लान’ से समानता के चलते ही बंद हुआ था।
    सफेद चादर की मदद से भूत का भेष धर रहे किशोर
    -‘#घोस्टफोटोशूट’ के तहत जारी वीडियो में किशोर भूत का भेष धरने के लिए सफेद चादर का सहारा ले रहे हैं। वे आंखों को डरावना लुक देने के लिए या तो चादर में दो छेद कर रहे हैं या फिर उस पर काला चश्मा सनग्लास लगाकर मछली पकड़ने वाला जाल ओढ़ रहे हैं। मध्य सितंबर में शुरू हुए इस चैलेंज में प्रतिभागी जैक स्टॉबर का लोकप्रिय गाना ‘ओह-क्लाहोमा’ भी गुनगुनाते दिखते हैं।
    संगठित नस्लभेद का प्रतीक माना जाता है सफेद चोगा
    -वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. डेविड कनिंघम कहते हैं, सफेद चोगे ‘संगठित नस्लभेद’ का प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें सभ्य समाज में हमेशा नकारा गया है। 2016 में फ्लोरिडा के एक हाईस्कूल ने फैंसी-ड्रेस प्रतियोगिता में भूत के भेष में पहुंचे तीन छात्रों को सिर्फ इसलिए निष्काषित कर दिया था क्योंकि उन्होंने सफेद चादर से बना चोगा पहन रखा था।
    ट्विटर और टिकटॉक पर कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे यूजर
    -अमेरिका पुलिस हिरासत में अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड और ब्रेओना टेलर की मौत के बाद से नस्लभेद विरोधी आंदोलन की आंच में जल रहा है। ऐसे में आलोचकों का कहना है कि साल 2020 ‘घोस्ट चैलेंज’ के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके तहत जारी वीडियो पहली नजर में भूत कम और ‘कू क्लक्स क्लान’ लड़ाकों की याद ज्यादा दिलाते हैं। ऐसे वीडियो पोस्ट करने वाले यूजर नस्लभेद विरोधियों के निशाने पर आ सकते हैं।
    नोट-
    -नस्ली/जातीय हिंसा के इतिहास पर व्यापक चर्चा होना बेहद जरूरी है। इसके अभाव में लोग अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका समाज पर बुरा असर पड़ता है। ‘घोस्ट चैलेंज’ ऐसी ही एक गलती है। : डॉ. डेविड कनिंघम, समाजशास्त्री, वाशिंगटन यूनिवर्सिटी
    ‘बेनाड्रिल चैलेंज’ से भी सतर्क रहें-
    -अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्राधिकरण ने हाल ही में टिकटॉक को ‘बेनाड्रिल चैलेंज’ से जुड़े वीडियो हटाने का निर्देश दिया है। इस चैलेंज के तहत किशोर-किशोरी ‘मतिभ्रम’ यानी ‘हैलुसिनेशन’ के साइडइफेक्ट महसूस करने के लिए बेहद अधिक मात्रा में बेनाड्रिल का सेवन कर रहे हैं। अमेरिका के टेक्सास में ‘बेनाड्रिल चैलेंज’ में हिस्सा लेने वाले तीन छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। ओकलाहामा में इस चैलेंज में शामिल एक छात्रा की मौत की खबर भी सामने आई है।
    सिंगल और कपल चैलेंज घातक-
    -गुजरात पुलिस ने फेसबुक और इंस्टाग्राम यूजर को तेजी से वायरल हो रहे ‘कपल चैलेंज’, ‘सिंगल चैलेंज’ और ‘क्यूट डॉटर चैलेंज’ में शामिल न होने की चेतावनी जारी की है। अधिकारियों के मुताबिक ‘#’ के चिह्न के तहत पोस्ट की जाने तस्वीरें सार्वजनिक मंच पर आ जाती हैं। साइबर अपराधी व्यक्ति के निजी और पारिवारिक जीवन से जुड़ी इन तस्वीरें से छेड़छाड़ कर उनका उत्पीड़न कर सकते हैं। अतीत में तस्वीरों में छेड़खानी के बाद ब्लैकमेलिंग के कई मामले सामने आ चुके हैं।

    सेहत /शौर्यपथ /आयरन की कमी और एनीमिया आजकल हर दूसरे व्यक्ति के लिए परेशानी का सबब बन गया है। यह समस्या अधिकतर महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है। अगर आपके शरीर में भी हीमोग्लोबिन की कमी है तो रोजाना शाम को डाइट में शामिल करें काले चने की चाट। यह खाने में तो टेस्टी है ही साथ ही पोषण तत्वों से भी भरपूर है। चने में आयरन की मात्रा काफी होती है जो शरीर में खून की कमी को दूर करती है। इतना ही नहीं इसका सेवन करने से कब्ज जैसी समस्या भी छूमंतर हो जाती है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है ये हेल्दी चाट रेसिपी।
    काले चने की चाट बनाने की सामग्री-
    - 4-5 घंटे भिगोया हुआ 1 कप काला चना
    -1/4 कप धनिया कटा हुआ
    -हरी मिर्च कटी हुई
    -1 कप प्याज कटी हुई
    -1 कप उबला हुआ आलू कटा हुआ
    -स्वादानुसार नमक
    -2 टी स्पून चाट मसाला
    -1 टी स्पून पिसा जीरा
    -स्वाद के लिए नींबू का रस
    काले चने की चाट बनाने का तरीका-
    काले चने की चाट बनाने के लिए सबसे पहले काले चनों को धोकर ताजे पानी में उबाल लें। अब चनों में से पानी निकालकर उन्हें ठंडा कर लें। बताई गए सभी मसालों को स्वादानुसार मिलाकर चना चाट सर्व करें।

    सेहत / शौर्यपथ / कोरोना वायरस ने लोगों के जीने का तरीका बदल दिया है। आज लोग इस जानलेवा संक्रमण से बचने के लिए घरों से निकलने से पहले चेहरे पर मास्क लगाना बिल्कुल नहीं भूलते। विशेषज्ञों की मानें तो कोरोनावायरस संक्रमण के जोखिम को रोकने के लिए, मास्क पहनना सबसे सरल और अच्छा बचाव का उपाय बताया गया है। मास्क हवा में मौजूद वायरस को हमारी आंख, नाक और मुंह द्वारा भीतर प्रवेश करके व्यक्ति को संक्रमित होने से रोकता है।

    कई अध्ययनों की मानें तो मास्क पहनने से संक्रमित होने के जोखिम को 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। यही वजह है कि लोगों को घर से बाहर निकलने से पहले मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है। हालांकि, कई लोग घंटो मास्क पहनने से होने वाली असुविधा से भी बेहद परेशान हैं। जिसमें चेहरे पर मुंहासे, तनाव, चश्मे में भाप का आना और अब गले में खराश भी शामिल हो गई है।

    लंबे समय तक या गंदे मास्क चेहरे पर पहनने वाले कई लोगों ने गले में खराश की शिकायत की है। आइए जानते हैं क्या है इसका कारण और हल।

    गंदा मास्क और गले की खराश -
    कोरोना संक्रमण से बचने के लिए जिस तरह समय-समय पर हाथ धोना, कपड़े बदलना और अन्य चीजों को साफ रखने की आवश्यकता होती है। उसी तरह कीटाणुओं और जीवाणुओं के संपर्क के जोखिम को कम करने के लिए मास्क को भी नियमित रूप से धोया जाना चाहिए।

    बैक्टीरिया, वायरस, धूल और एलर्जी ये सब मिलकर गले में खराश की समस्या पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक मास्क का इस्तेमाल बिना धोएं करने से इसके ऊपर बैक्टीरिया के कण जमा हो जाते हैं। यही छोटे कण गले में पहुंचकर जलन और खिंचाव पैदा करते हैं। जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है या जिन्हें धूल के कणों से एलर्जी होती है उन्हें इसका खतरा अधिक होता है।

    इसके अलावा जब लोग मास्क पहनकर किसी दूसरे व्यक्ति से बात करते हैं तो उन्हें बाकी समय की तुलना में अपनी बात दूसरों तक पहुंचाने के लिए जोर से बोलना पड़ता है। जो गले में अनावश्यक तनाव डाल सकता है, जिसकी वजह से भी गले में जलन या खराश पैदा हो सकती है।

    बचाव के लिए क्या करें-
    कोरोना संक्रमण से बचने के लिए हाथों को धोना जितना जरूरी है, उतना ही मास्क को धोना भी है। मास्क के हर उपयोग के बाद, उसे गर्म पानी और साबुन से धोएं। मास्क को पहनने से पहले उसे सूर्य की रोशनी में अच्छे से सूखने दें। यही वजह है कि व्यक्ति को दो मास्क रखने की सलाह दी जाती है ताकि आप उन्हें बदल-बदलकर इस्तेमाल कर सकें।

    इसके अलावा अपने मास्क को बार-बार छूने से बचें और इसे पहनने से पहले और इसे हटाने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह से धोएं।

     

    खाना खजाना / शौर्यपथ / कचौरी एक लोकप्रिय स्ट्रीट फूड है जिसे खाने के लिए किसी बहाने की जरूरत नहीं है। कचौरी को ​कई अलग-अलग स्टफिंग के साथ बनाया जाता है। लेकिन ऑयली होने की वजह से अगर आप कचौरी से दूरी बना रहे हैं तो टेंशन छोड़ अब खाएं जी भर कर यह टेस्टी स्नैक। जी हां, कचौरी को आप डिप फ्राई की जगह हेल्दी तरीके से भी बना सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे।
    बेक्ड कचौरी बनाने के लिए सामग्री-
    -50 ग्राम उड़द दाल पाउडर
    -3 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर
    -4 टी स्पून सौंफ का पाउडर
    -6 टी स्पून धनिया पाउडर
    -1/4 टी स्पून हींग
    -1 टी स्पून यीस्ट
    -250 ग्राम गेंहू का आटा
    -2 टी स्पून चीनी
    -पानी
    -स्वादानुसार नमक
    -1-2 टी स्पून तेल
    बेक्ड कचौरी बनाने का तरीका-
    फीलिंग के लिए-
    बेक्ड कचौरी की फीलिंग तैयार करने के लिए सबसे पहले एक बाउल में उड़द दाल का पाउडर लेकर उसमें जरूरत के अनुसार पानी ​डालकर अच्छे से मिलाकर 30 मिनट के लिए छोड़ दें। ध्यान दें यह फूला और ड्राई होना चाहिए। अब इसमें लाल मिर्च पाउडर, सौंफ पाउडर, नमक, धनिया पाउडर, हींग मिलाकर गर्म पानी की मदद से इसे नरम कर लें।
    कचौरी बनाने के लिए-
    कचौरी बनाने के लिए सबसे पहले एक बाउल में गेंहू का आटा, चीनी, पानी और यीस्ट डालकर अच्छे से गूंथकर एक घंटे के लिए रख दें। अब डो पर हल्का सा तेल डालकर इसकी पैटी बनाएं। पैटी के बीच उड़द दाल की पीठी भरकर बेलन से 6 से 7 इंच में बेल लें। अब एक बेकिंग ट्रे में तेल लगाकर 160 डिग्री पर प्रीहिट ओवन में इसे ​क्रिस्पी और गोल्डन ब्राउन होने तक बेक करें। तैयार हैं आपकी गर्मा-गर्म कचौरी।

    नुस्खा / शौर्यपथ / करेला स्वाद में भले ही कड़वा होता है, लेकिन सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। करेला का सेवन करने से सेहत को कई अद्भुत फायदे होते हैं। करेले का नियमित सेवन करने से कब्ज और अपच से राहत मिलने के साथ मधुमेह में रामबाण औषधि का काम करता है। लेकिन इसके कड़वे स्वाद की वजह से कई लोग इसे अपने आहार की हिस्सा बनाने से कतराते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं तो आइए जानते हैं क्या हैं करेले का कड़वापन दूर करने के उपाय।

    करेले का कड़वापन दूर करने के उपाय-
    -करेले का कड़वापन खत्म करने के लिए इसे ऊपर से छील लें। करेले के ऊपर जितनी भी खुरदुरी स्किन मौजूद होती है वह सब निकाल दें।
    -करेले को पकाने से पहले उसके बड़े बीज निकाल दें। करेले के बीज काफी कड़वे होते हैं जो सब्जी में कड़वापन ला सकते हैं।
    -करेले का कड़वापन हटाने के लिए उस पर नमक लगाकर करीब 20 से 30 मिनट के लिए अलग रखें। आप देखेंगे करेला पानी छोड़ देगा जो कि इसका कड़वा रस है।
    -नमक लगाने के बाद करेले को निचोड़ें। करेले को पानी से साफ करके दोबारा निचोड़े, ऐसा करने से करेले का कड़वापन निकल जाएगा।
    -करेले का कड़वापन निकालने के लिए इसके छोटे-छोटे टुकड़े करके दही में एक घंटे के लिए भिगोकर रख दें।
    -करेले की कड़वाहट कम करने के लिए करेले छीलकर उन पर आटा और नमक लगाकर एक छंटे के लिए अलग रखे दें। फिर धोकर इसकी सब्जी बनाएं।
    -करेले में चीरा लगाकर चावल के पानी में आधा घंटे भिगाकर रखें और फिर इसकी सब्जी बनाएं। करेले की कड़वाहट का पता नहीं चलेगा।

    खेल / शौर्यपथ /किंग्स इलेवन पंजाब और राजस्थान रॉयल्स के बीच आईपीएल का नौवां मैच रोमांच से भरपूर रहा। इस मुकाबले में दर्शकों को छक्के-चौकों की बारिश देखने को मिली। इस मैच में पंजाब ने पहले खेलते हुए 20 ओवर में 223 रन को बड़ा स्कोर बनाया। इसके जवाब में राजस्थान ने राहुल तेवतिया, संजू सैमसन और कप्तान स्टीव स्मिथ की बेहतरीन बल्लेबाजी के दम पर तीन गेंद पहले ही लक्ष्य का पीछा कर लिया। इस मैच में पंजाब के निकोलस पूरन की कमाल की फील्डिंग ने सभी का दिल जीत लिया। उनके इस प्रयास को दुनियाभर के लोगों ने सराहा है। बाउंड्री पर पूरन की छलांग को दुनिया के सबसे बेहतरीन फील्डर रहे ओर टीम के कोच जोंटी रोड्स ने भी सलाम किया।
    हालांकि, इस कैच पर बल्लेबाज आउट तो नहीं हुआ लेकिन टीम के लिए निकोलस पूरन ने पांच रन जरूर बचा लिए। मैच के दौरान टीम के फील्डिंग कोच व अपने दौर के सर्वश्रेष्ठ फील्डर रहे दक्षिण अफ्रीका के महान जोंटी रोड्स ने खड़े होकर पूरन के सम्मान में सिर झुकाया।
    पूरन की इस शानदार फील्डिंग की तारीफ मैदान पर मौजूद सभी खिलाड़ियों ने की। वहीं शॉट लगाने वाले संजू सैमसन पूरन के इस प्रयास से हैरान रह गए। इससे पहले पूरन ने बल्लेबज़ी में भी जलवा दिखाया था। उन्होंने सिर्फ आठ गेंदो में तीन छक्कों की मदद से नाबाद 25 रन बनाए थे और टीम का स्कोर 220 के पार पहुंचाया था। हालांकि, पूरन की बल्लेबाज़ी और शानदार फील्डिंग भी उनकी टीम को जीत नहीं दिला सकी और राजस्थान ने आईपीएल के इतिहास का सबसे बड़ा रन चेज़ कर लिया।
    इससे पहले केएल राहुल और मयंक ने पहले विकेट के लिए 183 रनों की साझेदारी की जो आईपीएल में ओपनिंग के तौर पर की गई तीसरी सबसे बड़ी साझेदारी है। मयंक ने अपने आईपीएल करियर का पहला शतक जमाया। मयंक आईपीएल के इतिहास में भारतीय बल्लेबाजों के द्वारा सबसे तेज शतक जंमाने के मामले में दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। यूसुफ पठान इस मामले में नबर वन भारतीय हैं।

    मनोरंजन/ शौर्यपथ / भारतीय सिनेमा जगत में पिछले सात दशक से लता मंगेश्कर ने अपनी मधुर आवाज से लोगों को अपना दीवाना बनाया हुआ है, लेकिन उनके बारे में कुछ ऐसे दिलचस्प फैक्ट्स हैं जिनसे आप आज तक अंजान हैं। आज लता मंगेशकर अपना 91वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में जन्मीं लता एक मध्यम वर्गीय मराठी परिवार से हैं।

    उन्होंने साल 1942 में 'किटी हसाल' के लिए अपना पहला गाना गाया, लेकिन उनके पिता दीनानाथ मंगेश्कर को लता का फिल्मों के लिए गाना पसंद नहीं आया और उन्होंने उस फिल्म से लता के गाए गीत को हटवा दिया था। हालांकि, इसी साल लता को 'पहली मंगलगौर' में अभिनय करने का मौका मिला। लता की पहली कमाई 25 रुपये थी जो उन्हें एक कार्यक्रम में स्टेज पर गाने के दौरान मिली थी। बचपन में उन्हें काफी संघर्षों का सामना करना पड़ा था। जब वह 13 साल की थीं तभी दिल का दौरा पड़ने से उनके पिता की मौत हो गई थी।

    लता मंगेशकर ने 36 भाषाओं में 50 हजार से ज्यादा गीत गाए हैं। लता मानती हैं, “पिता का गायन सुन-सुनकर ही मैंने सीखा था, लेकिन मुझ में कभी इतनी हिम्मत नहीं थी कि उनके साथ गा सकूं।” मास्टर गुलाम हैदर ने लता को फिल्म 'मजबूर' के गीत 'अंग्रेजी छोरा चला गया' में गायक मुकेश के साथ गाने का मौका दिया था। यह लता का पहला बड़ा ब्रेक था। इसके बाद उन्हें काम की कभी कमी नहीं हुई। बाद में लता मंगेशकर ने चांदनी, राम लखन, सनम बेवफा, लेकिन, फरिश्ते, पत्थर के फूल, डर, हम आपके हैं कौन, दिल वाले दुल्हनियां ले जाएंगे, माचिस, दिल तो पागल है, वीर जारा, कभी खुशी कभी गम, रंग दे बसंती और लगान जैसी फिल्मों में गाने गाए।

    लता ने क्यों नहीं की शादी
    पिता के गुजर जाने के बाद घर की सारी जिम्मेदारियां लता मंगेशकर पर आ गईं थीं। एक इंटरव्यू में लता मंगेशकर ने कहा था कि घर के सभी सदस्यों की जिम्मेदारी मुझ पर थी। ऐसे में कई बार शादी का ख्याल आता भी तो उस पर अमल नहीं कर सकती थी। बेहद कम उम्र में ही मैं काम करने लगी थी। सोचा कि पहले सभी छोटे भाई बहनों को सेटल कर दूं। फिर बहन की शादी हो गई। बच्चे हो गए। तो उन्हें संभालने की जिम्मेदारी आ गई। इस तरह से वक्त निकलता चला गया और मैंने शादी नहीं की।

    जब किशोर कुमार से यूं हुई थी मुलाकात
    किशोर कुमार के साथ लता की अनबन का वाकया काफी दिलचस्प है। इस घटना के बारे में बताते हुए लता ने बताया था कि 'बॉम्बे टॉकीज' की फिल्म 'जिद्दी' के गाने की रिकॉर्डिंग पर जाने के लिए वह लोकल ट्रेन से सफर कर रही थीं। उस समय उन्होंने देखा कि एक शख्स भी उसी ट्रेन में सफर कर रहा है। स्टूडियो जाने के लिए जब उन्होंने तांगा लिया तो देखा कि वह शख्स भी तांगा लेकर उसी ओर जा रहा है। जब वह बॉम्बे टॉकीज पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि वह शख्स भी बॉम्बे टॉकीज पहुंचा हुआ है। बाद में उन्हें पता चला कि वह शख्स किशोर कुमार हैं। बाद में 'जिद्धी' में लता ने किशोर कुमार के साथ 'ये कौन आया रे करके सोलह सिंगार' गाना गाया था।

    रफी से बातचीत कर दी थी बंद
    लता ने पार्श्वगायक मोहम्मद रफी के साथ सैकड़ों गीत गाए थे, लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब उन्होंने रफी से बातचीत तक बंद कर दी थी। लता गानों पर रॉयल्टी की पक्षधर थीं, जबकि मोहम्मद रफी ने कभी भी रॉयल्टी की मांग नहीं की। दोनों का विवाद इतना बढ़ा कि मोहम्मद रफी और लता के बीच बातचीत भी बंद हो गई और दोनों ने एक साथ गीत गाने से इनकार कर दिया। हालांकि, चार साल बाद अभिनेत्री नरगिस के प्रयास से दोनों ने एक साथ एक कार्यक्रम में 'दिल पुकारे' गीत गाया।

    एक दिन में 12 मिर्चे तक खा लेती हैं लता
    बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि लता का असली नाम हेमा हरिदकर है। बचपन के दिनों से उन्हें रेडियो सुनने का बड़ा ही शौक था। 18 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला रेडियो खरीदा था और रेडियो ऑन करते ही उन्हें के. एल. सहगल की मृत्यु की खबर मिली थी, जिसके बाद उन्होंने वह रेडियो दुकानदार को वापस लौटा दिया था। लता को अपने बचपन के दिनों में साइकल चलाने का काफी शौक था जो पूरा नहीं हो सका। बता दें कि उन्होंने अपनी पहली कार 8000 रुपये में खरीदी थी। स्पाइसी खाने की शौकीन लता एक दिन में तकरीबन 12 मिर्चे तक खा लेती हैं। उनका मानना है कि मिर्च खाने से गले की मिठास बढ़ती है। लता को किक्रेट देखने का भी काफी शौक रहा है। लार्डस में उनकी एक सीट हमेशा रिजर्व रहती है।

    सिर्फ एक दिन के लिए गईं स्कूल
    बहुत कम लोगों को पता होगा कि लता महज एक दिन के लिए स्कूल गई थीं। इसकी वजह यह रही कि जब वह पहले दिन अपनी छोटी बहन आशा भोंसले को स्कूल लेकर गई तो टीचर ने आशा को यह कहकर स्कूल से निकाल दिया कि उन्हें भी स्कूल की फीस देनी होगी। बाद में लता ने निश्चय किया कि वह कभी स्कूल नहीं जाएंगी। इसके बाद उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा घर में ही रहकर अपने नौकर से प्राप्त की। हालांकि, बाद में उन्हें न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी सहित छह विश्वविधालयों से मानक उपाधि से नवाजा गया।

    भारत रत्न से नवाजा गया
    लता को अपने सिने करियर में मान-सम्मान बहुत मिला। वह फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला हैं जिन्हें भारत रत्न और दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्राप्त हुआ।

     

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