August 05, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    मनोरंजन /शौर्यपथ / हरियाणवी क्वीन सपना चौधरी हाल ही में मां बनी हैं। उन्होंने इस साल की शुरुआत में हरियाणा के सिंगर-राइटर वीर साहू से शादी कर ली थी। इस खबर के बाहर आने के बाद कुछ लोग सपना की शादी और उनके मां बनने को लेकर सवाल उठाने लगे तो उनके पति वीर साहू भड़क गए और उन्होंने ट्रोलर्स की जमकर क्लास लगाई।
    वीर साहू ने फेसबुक लाइव के जरिए फैंस को बताया कि वह पिता बन गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने उन लोगों करारा जवाब दिया, जो उनकी शादी को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वीर ने कहा कि मेरी शादी हुई, बेटा हुआ तुमको क्या मतलब है? वीर ने कहा कि शादी के बाद मेरे फूफा का निधन हो गया था तो क्या किसी ने पूछा?
    वीर ने सपना के खिलाफ गलत कमेंट करने वाले लोगों के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि हमसे इस तरह सवाल पूछे जा रहे हैं जैसे हमने किसी डाका डाल दिया या किसी को मार दिया है। तुम किसी की बहन-बेटी की इज्जत नहीं करते। वीर ने गुस्से में कहा कि अगर तुम सपना की कहानी सुन लोगे तो आंखों मे आंसू आ जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने सपना का हमेशा साथ देने की बात कही।
    बता दें कि सपना के पीआरओ चरणसिंह सहरावत ने हिन्दुस्तान लाइव से बातचीत में सपना के मां बनने की खबर की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सपना चौधरी ने 4 अक्टूबर को बेबी व्बॉय को जन्म दिया है। सपना की शादी को लेकर उन्होंने कहा कि इस साल जनवरी में सपना ने वीर साहू से कोर्ट मैरिज की थी।
    उन्होंने आगे बताया कि एक प्रोग्राम का आयोजन कर इस शादी के बारे में सभी को बताना था लेकिन उसी दौरान वीर साहू के फूफा का निधन हो गया। इस वजह से प्रोग्राम को टाल दिया गया लेकिन फिर बाद में कोरोना के चलते देश में लॉकडाउन हो गया। इसके चलते सपना फैन्स को अपनी शादी की जानकार नहीं दे पाईं।

    मनोरंजन / शौर्यपथ / आमिर खान की बेटी इरा खान मल्टीटैलेंटेड हैं। इरा की लेटेस्ट इंस्टाग्राम पोस्ट से ऐसा लगता है कि उनके करियर लिस्ट में एक और प्रोफेशन शामिल हो गया है। यह प्रोफेशन है- टैटू आर्टिस्ट। जी हां, इरा ने सोशल मीडिया पर अपनी विशलिस्ट को शेयर करते हुए बताया कि उन्हें टैटू आर्टिस्ट बनने की ख्वाहिश थी और वह अब गई हैं। इरा की नई इंस्टाग्राम पोस्ट में एक परमानेंट टैटू की तस्वीरें शेयर की हैं, जिसे उन्होंने अपनी ट्रेनर नुपुर शिखर के हाथ में बनाया है।
    तस्वीरों को शेयर करते हुए इरा ने कैप्शन लिखा- 'बकेट लिस्ट आइटम- #5 डन। मैंने अपना पहला टैटू बनाया। शुक्रिया नुपूर मुझपर विश्वास करने के लिए। इतना बुरा नहीं है, है ना। मुझे लगता है कि अब मेरे पास एक और करियर ऑप्शन है।' एक तस्वीर में इरा मास्क और ग्लव्स पहनकर टैटू बना रही हैं। इरा खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर फैमिली और फ्रेंड्स के साथ तस्वीरें पोस्ट करती रहती हैं। खास बात यह है कि इरा अपने पिता आमिर खान की तरह ही कई क्रिएटिव चीजें करती रहती हैं।
    आपको बता दें कि इरा खान बॉलीवुड की पॉपुलर स्टार डॉटर्स में से एक हैं। लाइमलाइट से दूर रहने वालीं इरा बीते दिनों नए घर में शिफ्ट होने के कारण चर्चा में थीं। इरा पूरे लॉकडाउन पिता आमिर खान के घर पर थीं। इरा ने अपने भाई अजाद राव को 'लॉकडाउन बडी' बताया था।

     

    क्या अवैध सूदखोरी पर होगी जाँच , क्या आयकर विभाग लेगा मामले को संज्ञान

    दुर्ग / शौर्यपथ / सूदखोरी समाज के लिए वर्तमान परिवेश में एक अभिशाप बनता जा रहा है शासन की लाख कोशिश के बाद भी अवैध रूप से सूदखोरी आज भी चलन में है अवैध सूदखोरी के मामले समय समय पर सामने भी आते रहे है किन्तु आज भी ऐसे कई लोग है जो इस सूदखोरी के जाल में उलझे हुए है . ऐसे कई प्रकरण न्यायालय में लंबित है जिसमे प्रतिवादी द्वारा कर्ज ली गयी रकम से कई गुना ज्यादा देने के बाद भी मुकदमे की मार झेल रहे है . सूदखोर जरुरत के समय रकम तो देते है किन्तु साथ ही विश्वास और भरोसे को भी दफऩ करते हुए जरुरतमंदो से खाली स्टाम्प , ब्लैंक चेक आदि पर दस्खत करवा कर अपनी तरफ से मजबूत हो जाते है और फिर खेल शुरू होता है 5 प्रतिशत से लेकर 25-30 प्रतिशत तक के ब्याज का धीरे धीरे कर्ज लेने वाला रकम चुकाते चुकाते थक जाता है किन्तु सूदखोरों की भूख नहीं मिटती और मामला पहुँच जाता है न्यायालय जहा कई प्रकरण में समझौता होता है तो कई प्रकरण में सजा किन्तु इस पर फिर भी कोई ध्यान नहीं देता कि रकम देने वाले के पास जो पैसे है क्या वो आयकर विभाग की नजर में है क्योकि ऐसे रकम का लेनदेन अधिकतर नगद ही होता है ऐसे ही एक मामले की जानकारी शौर्यपथ समाचार के पास है जिसमे सामने जो दिख रहा है वो भी सच हो सकता है किन्तु जो नहीं दिख रहा है उस पर जांच की तरफ रुख करने से कई मामले का खुलासा हो सकता है .
    ऐसे ही एक मामले मे सुभाष नगर निवासी फिरोज राठोर के साथ धोखाधड़ी हुई जिसकी एफआईआर प्रार्थी द्वारा पद्मनाभपुर चौकी में 2019 में कर दी गयी मामला था वाहन खरीदी बिक्री में लेनदेन का जसके अनुसार चिखली निवासी देवेन्द्र द्वारा फिरोज राठौर से 2 लाख 90 हजार और 29 लाख की रकम के लेनदेन पर विवाद कौर्ट तक पहुँच गया . मामले के अनुसार देवेन्द्र सिंह ने एक वाहन का क्रय किया जिसका भुगतान फिरोज राठौर द्वारा 2लाख90 हजार टोयोटाशोरूममें (ह्म्ह्लद्दह्य) द्वारा किया गया साथ ही 29 लाख रूपये का कर्ज भी दिया गया और वाहन के अपने कब्जे में ले लिया गया जिसकी कि़स्त की रकम का भुगतान देवेन्द्र सिंह को करना था जिसकी बाकायदा लिखा पढ़ी भी हुई लिखा पढ़ी कितनी सच है और कितने झोल मामला न्यायालय में है किन्तु इन सबमे बड़ी बात यह है कि फिरोज राठौर द्वारा इस लेनदेन में लिखापढ़ी जिस स्टाम्प में हुई उस पर कई तरह के सवाल परिवादी की तरफ से उठाये जा रहे है इतनी बड़ी रकम की लिख पढ़ी में एक बात गौर करने वाली है कि जो रकम छोटी है और जिसका लेनदेन बैंकिंग से हुआ वह रकम बाकायदा टाइप की हुई है वही उससे 10 गुना बड़ी रकम 29 लाख रूपये पेन से लिखे हुए है और नगद भुगतान की बात लिखी गयी है .
    वही आरोपी देवेन्द्र सिंह का कहना है कि मेरे द्वारा सिर्फ 2 लाख 90 हजार की रकम ली गयी थी वही 29 लाख की रकम की जानकारी मुझे नहीं है इससे पहले भी संव्यवहार हुआ था किन्तु इतनी बड़ी रकम मेरे द्वारा नहीं ली गयी . वैसे 29 लाख की रकम के बारे में देवेन्द्र सिंह द्वारा आयकार विभाग में जांच की मांग की गयी है कि क्या इतनी बड़ी रकम फिरोज राठौर के पास होने की जानकारी विभाग को है वही इन सबमे बड़ी बात यह है कि जिस वाहन का लेनदेन हुआ था वह वाहन फोर्चुनर टोयटा है जिसका बाजार मूल्य लगभग 32 लाख का है इतनी बड़ी वाहन को खरीदने वाला आखिरकार उस वाहन को अपने पास क्यों नहीं रखा है प्राप्त जानकारी के अनुसार वाहन देवेन्द्र सिंह के नाम से है जिसके रकम का भुगतान फिरोज राठौर ने किया किन्तु वाहन का उपयोग अन्य कोई तीसरा कर रहा है . क्या इन शिकायतों की सच्चाई के पीछे कोई और कहानी है . आरोपी देवेन्द्र सिंह की धर्मपति से चर्चा पर पता चला कि वाहन में अवैध कार्य कर फ़साने की धमकी के भी फोन आ रहे है जिसकी शिकायत देवेन्द्र सिंह की पत्नी ने मोहन नगर थाने में कर दी है .

    पुलिस जाँच से हो सकते है कई खुलासे ..

    शिकायत पर शिकायत लें दें पर बड़ी बड़ी रकम कभी नगद तो कभी बैंकिंग आखिर ऐसा क्या व्यापार करते है है वादी और परिवादी की लाखो के नगद लेनदेन पर जो सालो से हो रहा अचानक दरार आ गयी क्योकि इस बार रकम 30 लाख के करीब की है और दोनो पक्ष अपने अपने बात पर अडिग है क्या इस नगद लेनदेन के पीछे कोई और कहानी तो नहीं इस बात की निष्पक्ष जाँच से हो सकते है कई खुलासे हो क्योकि अब इन लेन देंन के फर्जी होने की बात पर देवेन्द्र सिंह की धर्मपत्नी के द्वारा भी फिरोज राठौर व अन्य को नोटिस भेजने की बात कही गयी है .

    दुर्ग । शौर्यपथ । अवैध भूमि पर कब्जे के नित नए मामले उजागर होते है जो विवाद का कारण बनते है इसमे जितना दोष अवैध कब्जा करने वालो का होता है उतना ही दोष क्षेत्र के निगम की कार्यप्रणाली का भी है । दुर्ग निगम में अवैध कब्जेधारियों के हौसले बुलंदी पर है कारण अधिकारियों की लापरवाही का है । एक तरफ तो आयुक्त अपील करते है कि ऐसी किसी तरह की शिकायत मिलने पर तुरंत कार्यवाही की जाएगी वही दूसरी तरफ जानकारी होने के बाद भी निगम प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी मौन रहते है जिससे ये तो स्पष्ट है कि निगम की अपील पूरी तरह दिखावा मात्र है । ऐसे कई मामले है जिनकी जानकारी विभाग को है किंतु कार्यवाही के नाम पर शून्य । निगम अधिकारी इतने लापरवाह है कि शासन के आदेशों को भी लगता है रद्दी की टोकरी पर डाल देते है । शौर्यपथ समाचार पत्र द्वारा ऐसे कई अवैध निर्माण की सूचना के बार अधिकारियों को दी गई किन्तु आश्वासन के अलावा अधिकारी कुछ नही करते और ऐसे ही कारणों से अवैध कब्जाधारियों के हौसले बुलंद पर है चाहे मामला आदर्श नगर में नाले की जमीन पर घर बनाने का हो या सड़क के ऊपर से एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग तक रोपवे बनाने वाले गंगोत्री हॉस्पिटल का हो या sdm दुर्ग के आदेश पर शासन की जमीन को सुरक्षित करने के लिए घेरा बनाने का हो ऐसे कई मामलों की जानकारी के बाद भी निगम के भवन अधिकारियों द्वारा लापरवाही पूर्वक कार्य दो पक्षो के विवाद का कारण बनता जा रहा है । ऐसे ही एक मामला हाल ही में आया है जिसमे करोड़ो की जमीन पर अवैधानिक रूप से निर्माण कार्य प्रगति पर है और निगम प्रशासन मौन है । मामला है बाफना मंगलम से लगी हुई जमीन का करोड़ो की इस जमीन पर जिसका प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद भी रसूखदारों द्वारा क्रय किया गया और अब फैसला एक पक्ष ऋषिकेश गुप्ता के पक्ष में आ गया । किन्तु सारी जानकारी के बाद भी कौड़ियों के दाम खरीदने वाले रसूखदारों द्वारा कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए निगम के नियमो की धज्जी उड़ाते हुए निर्माण चालू कर दिया गया जिस तेजी से निर्माण कार्य हो रहा ऐसा प्रतीत होता है कि माह दो माह में बिल्डिंग खड़ी हो जायेगी । इस मामले में ऋषिकेश गुप्ता द्वारा निर्माण करने वालो को , पटवारी को व सम्बंधित विभाग को सूचना व शिकायत की गई किन्तु कोई भी शासन के आदेश कोर्ट के फैसले को गंभीरता से नही ले रहा । दुर्ग निगम क्षेत्र में होने के कारण बिना अनुमति निर्माण पर कार्यवाही की जिम्मेदारी निगम प्रशासन की बनती है किंतु निगम प्रशासन भी मौन है ऐसे में भविष्य में इस जमीन के मालिक और अवैध निर्माण करने वालो के बीच कोई विवाद हो तो कौन इसका जिम्मेदार होगा जब शक्तियां प्राप्त प्रशासन मौन है तो कैसे कह सकते है कि दुर्ग में सुशासन है । जब अवैध रूप से निर्माण करने वाले खुले आम शासन के सामने बेख़ौफ़ निर्माण कर रहे है तो कैसे कहा जा सकता है कि शासन कार्य के प्रति जिम्मेदार है अधिकारी कार्य के प्रति गंभीर है ये हाल उस जिला मुख्यालय का है जहां प्रदेज़ह के मुख्यमंत्री का , गृह मंत्री का , पीएचई मंत्री का निवास है प्रदेश के हाई प्रोफाइल जिले में ये हाल है तो सोंचिये दुरस्त इलाके का क्या हाल होगा । शेषण के इस धृतराष्ट्र रूपी रवैये से अवैध कब्जाधारियों के हौसले बुलंद है और पीड़ितों की परेशानी दुगनी हो गई । क्या दुर्ग निगम आयुक्त मामले को संज्ञान लेकर त्वरित कार्यवाही करेंगे या फिर मौन रहेंगे क्योकि गुप्ता द्वारा सम्पूर्ण जानकारी और शिकायत निगम प्रशासन में कर दी गई है अब देखना यह है कि निगम किस ओर अपना रुख रखता है पीड़ित की ओर या अवैध निर्माण करने वालो की तरफ ?

    रायपुर। शौर्यपथ । छत्तीसगढ़, खासकर बस्तर में हाल ही में नक्सल हिंसा की वारदात तेज होने पर राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उईके भी चिंतित हैं। राजभवन के सूत्रों के अनुसार उन्होंने प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को पत्र लिखकर अपनी चिंता से अवगत कराया है, इसके साथ ही उन्होंने राज्य में नक्सली घटनाएं बढ़ने के मामले को लेकर एक समीक्षा बैठक भी बुलाई है। इस बैठक में गृह विभाग के उच्चाधिकारी भी शामिल होंगे। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह सहित कुछ अन्य लोगों ने राज्यपाल को पत्र लिखकर बढ़ती नक्सल घटनाओं पर चिंता व्यक्त की थी। 138 लोगों की गई हैं जान राज्य में कांग्रेस सरकार के शासन काल में वर्ष 2019 से लेकर 2020 में अब तक नक्सलियों के हाथों 53 सुरक्षा कर्मियों की जानें गई हैं। इसी तरह नक्सलियों ने इसी अवधि में अब तक 85 ग्रामीणों की हत्याएं की हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार ज्यादातर घटनाएं अलग-अलग हुई हैं। लेकिन बड़ी संख्या में ग्रामीणों की नक्सल हत्याओं से पूरे बस्तर में दहशत का वातावरण बनता जा रहा है। समीक्षा बैठक जल्द राजभवन से पिछले दिनों गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू को पत्र जारी किया है। इस पत्र में कहा गया है कि नक्सल घटनाओं को लेकर इसी माह समीक्षा बैठक आयोजित की जानी है। इस बैठक के लिए अभी तारीख तय नहीं है। माना जा रहा है कि गृहमंत्री द्वारा पत्र के जवाब के साथ बैठक की तारीख सामने आएगी। कई बिंदुओं पर होगी समीक्षा बताया गया है कि गृहमंत्री को लिखे पत्र में राज्यपाल ने राज्य में हो रही नक्सल घटनाओं के संबंध में कुछ बिंदुओं के आधार पर चर्चा व समीक्षा की बात कही है। इसमें यह बात शामिल है कि प्रदेश में नक्सली घटनाएं क्यों बढ़ रही है, इन घटनाओं की रोकथाम के लिए क्या किया जा सकता है, बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए है, इन घटनाओं को रोकने के लिए कौने से कदम उठाए जा सकते हैं? रमन ने भी लिखा था राज्यपाल को पत्र पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने प्रदेश में नक्सल घटनाओं में बढ़ोत्तरी को लेकर तीन दिन पहले ही राज्यपाल को पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने कहा था कि प्रदेश में बीते कुछ महीनों में नक्सलवादी बस्तर संभाग में दहशत और आतंक का माहौल बनाने में सफल हुए हैं। पिछले कुछ महीनों में ही बस्तर संभाग में ही नक्सलियों ने 76 लोगों की हत्याएं की हैं इनमें ग्रामीण तथा पुलिस कर्मी शामिल हैं। उन्होंने ये भी लिखा था कि पूर्व में भाजपा सरकार ने नक्सलियों की कमर तोड़ना का प्रयास कर बस्तर को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए विकास किया था,वह अब रुक गया है। बताया गया है कि डॉ.रमन के अलावा कई अन्य लोगों ने भी पत्र लिखकर नक्सल घटनाओं पर चिंता जताते हुए राज्यपाल से कार्रवाई का आग्रह किया था।

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / कोहिमा सरकार के साथ शांति वार्ता कर रहे नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (आईएम) ने सोमवार को कहा कि उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फरवरी में पत्र लिखा था और कहा था कि यदि "भारत में उसकी मौजूदगी का स्वागत नहीं है" तो विदेश में बातचीत की जानी चाहिए. आठ पन्ने के "गोपनीय" पत्र में वार्ताकारों, नागालैंड के गवर्नर आरएन रवि और गृह मंत्रालय की कड़ी आलोचना करते हुए समूह ने अलग झंडे और संविधान की भी मांग की है. संगठन का कहना है कि पत्र पर प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है.
    NSCN के बयान के मुताबिक, सात महीने पहले, संगठन के राष्ट्रीय महासचिव टी मुईवाह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था. हमने अब तक चिट्ठी को सार्वजनिक नहीं किया था क्योंकि हमें उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री मोदी सकारात्मक जवाब देंगे. आज, NSCN (IM) ने नागा लोगों के प्रति जवाबदेह होने के कारण भारतीय प्रधानमंत्री के कार्यालय की ओर से जवाब नहीं मिलने और देरी होने के बारे में जानकारी देने के लिए पत्र जारी किया."
    समूह ने पत्र में आरोप लगाया है कि शीर्ष स्तर के राजनीतिक संवाद को कम करने की कोशिश की गई है.
    टी मुईवाह ने चिट्ठी में लिखा था, "आज, हम आपके संज्ञान में गृह मंत्रालय (एमएचए) और उसकी एजेंसियों एनआईए और असम राइफल्स सहित अन्य की गतिविधियां लाना चाहते हैं, जो भी गंभीर चिंता का विषय है. जैसा की आप जानते हैं कि 22 साल से चल रही वार्ता शीर्ष स्तर से शुरू हुई थी. प्रधानमंत्री स्तर की वार्ता बिना किसी पूर्व शर्ष और भारत से बाहर किसी दूसरे देश में शुरू हुई थी. हम भारत सरकार के बुलावे पर भारत आए थे. हम पूरी तरह से हैरान और आश्चर्यचकित हैं कि दो दशक से अधिक की राजनीतिक वार्ता के बाद भी, गृह मंत्रालय और उसकी एजेंसियां का रुख निंदनीय है."
    उन्होंने आगे कहा, "गृह मंत्रालय के हालिय घटनाक्रम ने हमारी दीमापुर में मौजूदगी पर सवाल उठाए हैं. हम नागालैंड में अपने लोगों से मिलने के लिए और शांति प्रक्रिया के लिए हैं... यदि हमारे भारत में रहने का अब स्वागत नहीं तो हमारे भारत छोड़ने के सभी जरूरी इंतेजाम किया जाए और राजनीतिक वार्ता किसी तीसरे देश में शुरू की जाए."
    समूह ने दावा किया कि भारत सरकार की ओर से नागा मुद्दे को राजनीतिक मुद्दे के रूप में मान्यता देने और इसे आंतरिक कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं मानने के बाद ही 1997 में वार्ता के लिए उसने सहमति जताई थी.

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / Mp के धार जिले में सोमवार रात इंदौर-अहमदाबाद मार्ग पर दर्दनाक हादसे में छह मजदूरों की मौत हो गई. दुर्घटना के वक्त खेतों से कटाई कर टांडा लौट रहे मजदूर गाड़ी पंक्चर होने के बाद टायर बदल रहे थे, तभी तेज गति से आ रहे टैंकर ने उसमें जोरदार टक्कर मार दी. इस घटना में 20 से ज्यादा मजदूर घायल भी हुए हैं, जो पिकअप के अंदर बैठे थे. मरने वालों में तीन नाबालिग भी शामिल है.
    जानकारी के मुताबिक, तिरला थानाक्षेत्र के अंतर्गत रात करीब 12.30 बजे इस हादसे के वक्त मजदूर पिकअप वाहन से केसूर से सोयाबीन कटाई कर अपने क्षेत्र टांडा जा रहे थे. तभी फोरलेन पर मजदूरों से भरा पिकअप पंक्चर हो गया. ड्राइवर और कुछ मजदूर उतरकर टायर बदल रहे थे, जबकि बाकी वाहन में ही बैठे थे. इस दौरान टैंकर ने जोरदार टक्कर मार दी. टक्कर इतनी तेज थी कि कुछ मजदूर कई मीटर दूर जाकर गिरे, पिकअप वाहन में महिलाएं और बच्चे भी थे.
    हादसे में चार लोगों की मौके पर मौत हो गई. जबकि दो मजदूरों को जिला अस्पताल में मृत डॉक्टरों ने घोषित कर दिया. दुर्घटना के बाद दो एंबुलेंस सहित करीब छह से ज्यादा वाहनों से घायलों को जिला अस्पताल लाया गया. जबकि गंभीर हालत में वाले मरीजों को इंदौर भेजा गया. मृतकों में दो महिलाएं शामिल हैं. हादसे में मरने वाले सभी टांडा कोदी के हैं, इसमें तीन लड़के हैं.
    अस्पताल की लापरवाही सामने आई
    हादसे में धार के जिला अस्पताल की लापरवाही भी सामने आई. आरोप है कि घायलों को उचित समय पर उपचार नहीं मिल पाने से दो मरीजों की मौत हो गई. अस्पताल में धार एसपी और डीएसपी सहित पुलिस के कई अधिकारी भी पहुंचे परंतु जिला प्रशासन का अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा. कलेक्टर ने आर्थिक सहायता की घोषणा की.

    भुवनेश्वर / शौर्यपथ / ओडिशा के भुवनेश्वर में रेडिमेड गारमेंट बेचने वाले बिजनेसमैन को दो बैंकों से 12 लाख की रकम लूटने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने सोमवार को बताया कि 25 साल के इस शख्स ने लॉकडाउन के दौरान हुए घाटे की भरपाई के लिए ये योजना बनाई थी और इसके लिए उसने यूट्यूब पर वीडियोज़ देखकर आइडिया लिया था.
    आरोपी की पहचान सौम्यरंजन जैन उर्फ तुलु के रूप में हुई है, वो शहर से लगे हुए गांव तंगीबंता में रहता है. पुलिस ने बताया कि उसने पिछले महीने टॉय गन के बल पर इंडियन ओवरसीज़ बैंक और बैंक ऑफ इंडिया में डाका डाला था.
    मीडिया से बातचीत में भुवनेश्वर-कटक के पुलिस कमिश्नर एस सारंगी ने बताया कि आरोपी ने इन दोनों बैंकों से लोन लिया था और कोविड-19 के चलते लगे लॉकडाउन में आर्थिक घाटा सह रहा था.
    एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कमिश्नर ने बताया, 'वो घाटे की भरपाई करना चाहता था और इसके लिए भुवनेश्वर में उसने दो बैंकों से 12 लाख लूटे. उसने 7 सितंबर को इन्फोसिटी इलाके के पास स्थित इंडियन ओवरसीज़ बैंक को लूटा फिर उसने 28 सितंबर को मंचेश्वर के बरीमुंडा में बैंक ऑफ इंडिया के ब्रांच को लूटा. उसे चोरी का आइडिया यूट्यूब वीडियोज़ देखकर मिला था. उसने एक टॉय गन के सहारे लूट को अंजाम दिया था. पुलिस ने अब तक 10 लाख की रकम और अपराध में इस्तेमाल की गई गाड़ी और टॉय गन को जब्त किया है.'
    कथित रूप से सौम्यरंजन जैन, जब बैंक में कम स्टाफ मौजूद था, तभी हेलमेट पहनकर बैंक में घुसा था और उसने कैश हैंडओवर करने की मांग की थी.
    पुलिस कमिश्नर ने बताया कि 'आरोपी के दोनों बैंकों में अकाउंट हैं और उसने लगभग 19 लाख का लोन लिया था. उसने चोरी के बाद लगभग 6 लाख की रकम बैंक को चुका भी दी था. उसे तब पकड़ा गया, जब वो लूट के पैसों से 60,000 लेकर बैंक में फिर जमा कराने पहुंचा था. उसने सोचा था कि अगर वो थोड़ी-थोड़ी रकम करके लोन चुकाएगा, तो कोई उसपर शक नहीं करेगा.'

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / दिल्ली की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को पूर्व केन्द्रीय मंत्री दिलीप रे को वर्ष 1999 में झारखंड में एक कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमितताओं से संबंधित कोयला घोटाले मामले में दोषी ठहराया. विशेष न्यायाधीश भारत पारसकर ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में राज्य मंत्री (कोयला) रहे रे को एक आपराधिक साजिश और अन्य अपराधों को लेकर दोषी ठहराया है. सजा पर सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी.
    अदालत ने कोयला मंत्रालय के तत्कालीन दो वरिष्ठ अधिकारी, प्रदीप कुमार बनर्जी और नित्या नंद गौतम, कैस्ट्रोन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (सीटीएल), इसके निदेशक महेंद्र कुमार अग्रवाल और कैस्ट्रॉन माइनिंग लिमिटेड (सीएमएल) को भी दोषी ठहराया. अदालत सजा के संबंध में 14 अक्टूबर को दलीलें सुनेगी. यह मामला 1999 में झारखंड के गिरिडीह में ‘ब्रह्मडीह कोयला ब्लॉक' के आवंटन से जुड़ा है.

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में बहुत ज्यादा वक्त नहीं रह गया है और वहां चुनावी मैदान की तस्वीर भी कुछ-कुछ साफ हो गई है. हालांकि, आखिरी तस्वीर थोड़ी अलग बन रही है. बात गठबंधन की हो रही है. एनडीए गठबंधन का चेहरा यहां थोड़ा टेढ़ा हो गया है. इसे लेकर कुमार विश्वास ने चुटकी ली है.
    उन्होंने एक ट्वीट कर लिखा, 'भई ! राजनीति के मामलों में, मैं तो निरा अल्पबुद्धि हूं और भाई लोगों ने मेरी मूर्खता को सिद्ध भी कर दिया है, पर आप गुणी-ज्ञानी मित्रों को अगर कुछ समझ आ रहा हो तो मेरा भी मार्गदर्शन करें ताकि लोकतंत्र के एक नागरिक के नाते, मैं भी बिहार विधानसभा चुनाव के विषय में कुछ तो समझ सकूं.' इस ट्वीट के साथ उन्होंने एक तस्वीर भी शेयर की है, जिसमें एक ही स्विचबोर्ड में ढेर सारे केबल लगे हुए हैं और सबकुछ बिल्कुल उलझा हुआ है.
    इसके पहले एक ट्वीट में उन्होंने लिखा, 'BJP और JDU मिलकर लड़ेंगे. LJP और BJP मिलकर लड़ेंगे. लेकिन LJP, JDU के ख़िलाफ़ लड़ेगी. लेकिन LJP, BJP के साथ गठबंधन में लड़ेगी. हालांकि चुनाव में LJP, JDU के ख़िलाफ़ लड़ेगी पर केंद्र में JDU व BJP के साथ रहेगी. LJP चुनाव बाद BJP और JDU या किसी के भी साथ सरकार बनाएगी. कुछ आया समझ?'
    दरअसल, इस बार चुनावों में नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड फिर बीजेपी के साथ मैदान में उतर रही है, लेकिन चिराग पासवान की पार्टी लोकजनशक्ति पार्टी ने अकेले लड़ने का ऐलान कर दिया है. चिराग पासवान नीतीश के खिलाफ चुनाव में बिगुल बजा रहे हैं, लेकिन केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार में दोनों ही पार्टियां सहयोगी हैं. एलजेपी लगातार अपनी प्रतिबद्धता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दिखाती रहती है लेकिन अब तो वो चुनाव अलग लड़ रही है. चिराग पासवान ने इसके पहले बीजेपी के साथ बैठकें भी की थीं.
    उधर, जेडीयू का भी कहना है कि उसका गठबंधन बीजेपी के साथ था, एलजेपी के साथ नहीं. चिराग पासवान ने भी मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी मजबूरीवश जेडीयू के साथ गठबंधन में थी क्योंकि नीतीश कुमार 2017 में महागठबंधन छोड़कर वापस एनडीए में आ गए थे. वहीं, बीजेपी जेडीयू के साथ गठबंधन कर रही है लेकिन उसका एलजेपी को लेकर भी कोई सख्त रुख नहीं है. ऐसे में कुल मिलाकर कहें तो बिहार में महागठबंधन का पूरा घालमेल हो गया है.

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