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मनोरंजन / शौर्यपथ / बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर समेत मैनेजर करिश्मा प्रकाश का बयान दर्ज कर लिया गया है, एमए जैन, डिप्टी डायरेक्टर जनरल, एनसीबी ने शनिवार को दिए स्टेटमेंट में कहा। इसके अलावा उन्होंने जानकारी दी कि रविवार को किसी को भी दोबारा पूछताछ के लिए नहीं बुलाया गया है। खबरों के मुताबिक, दीपिका पादुकोण पूछताछ के दौरान तीन बार रोईं। रिपोर्ट्स के अनुसार, एनसीबी के अधिकारी ने उनसे कहा कि वह ‘इमोशनल कार्ड’ न खेलें और सवालों का जवाब दें। बता दें कि दीपिका, कोलाबा स्थित एनसीबी के दफ्तर शनिवार सुबह 10 बजे के करीब पहुंची थीं और करीब साढ़े तीन बजे वहां से घर के लिए निकलीं। दीपिका पादुकोण से लगभग 5.30 घंटे, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर से करीब 4 घंटे तक सवाल-जवाब किए गए।
टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक दीपिका ने यह कबूल किया कि करिश्मा से उनकी ड्रग्स को लेकर चैट हुई थी। हालांकि उन्होंने इस बात से इनकार किया है कि उन्होंने ड्रग्स लिए हैं। वहीं, धर्मा प्रोडक्शन के एग्जिक्यूटिव प्रोड्यूसर श्रितिज रवि प्रसाद को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने गिरफ्तार कर लिया है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सारा ने एनसीबी को बताया कि फिल्म ‘केदारनाथ’ की शूटिंग के वक्त वह सुशांत के क्लोज आई थीं। सारा ने इस बात को भी कबूला कि वह सुशांत के फार्महाउस में पार्टीज के लिए जाती थीं। हालांकि, वह ड्रग्स नहीं लेती थीं। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, सारा ने कबूल किया कि वह सुशांत के साथ थाईलैंड ट्रिप पर भी गई थीं।
धर्म संसार / शौर्यपथ / कोविड-19 के कारण काशी विश्वनाथ को माला-फूल चढ़ाने पर लगी रोक हटा ली गई। मंदिर प्रबंधन के इस निर्णय से न सिर्फ भक्तों, बल्कि माला-फूल विक्रेताओं में भी प्रसन्नता है। उल्लेखनीय है कि विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में 17 मार्च से ही प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद 21 मार्च से मंदिर में भक्तों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया था। इसी महीने की सात तारीख से भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति पुन: प्रदान की गई थी। माला फूल विक्रेताओं ने मंदिर प्रबंधन के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि माला-फूल चढ़ाने पर प्रतिबंध से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी।
वृंदावन में अब जल्द ही भक्तों को होंगे ठा. बांकेबिहारी के दर्शन
विश्वविख्यात ठा. बांकेबिहारी मंदिर में चल रहे जीर्णोद्धार एवं फर्श निर्माण कार्य तेजी पकड़ रहा है। मंदिर के आंगन में फर्श की ढलाई कर सीलिंग कम्पाउंड बिछाया जा रहा है। इसके बाद कर्नाटका से मंगवाए गए संगमरमर पत्थर फर्श में लगाया जाएगा।
बता दें कि ठा. बांकेबिहारी मंदिर के आंगन में करीब चार माह पूर्व फर्श में तीन फुट से अधिक गहरा गड्ढा हो गया था। जिसे गंभीरता से लेते हुए मंदिर प्रबंधन द्वारा भवन निर्माण से जुड़ी सरकारी एवं गैर सरकारी कंपनियों के इंजीनियरों से परिसर की गहनता से जांच कराई गई थी। सभी संस्थाओं की जांच रिपोर्ट के आधार काम की शुरुआत कराई गई। मंदिर के फर्श एवं मंदिर भवन की मजबूती को बनाए रखने के उद्देश्य से फर्श में 65 स्थानों पर पाइलिंग कराई गई। साथ ही नींव को भूकम्प रोधी बनाने के लिए अत्याधुनिक तरीके से सुरक्षित किया गया। अब आंगन के फर्श पर लोहे की सरियाओं का जाल बिछाने जाने के बाद ढलाई कराई गई है। साथ ही सीलन से मुक्ति के लिए सीलिंग कम्पाउंड बिछाया जा रहा है। जल्द दी कर्नाटका से मंगवाए गए संगमरमर पत्थर को फर्श में लगाया जाएगा। मंदिर के प्रबंधक मुनीष कुमार शर्मा ने बताया कि मंदिर के फर्श का निर्माण जल्द ही पूर्ण होने को है। फर्श की ढलाई के बाद अब पत्थर लगाने की तैयारी की जा रही है। ताकि कार्य पूर्ण होते ही पिछले करीब सात माह से अपने आराध्य से दूर भक्तों को उनके दर्शन सुलभ हो सकें।
सेहत / शौर्यपथ / फिनलैंड में कोरोना से संक्रमित मरीजों की पहचान के लिए खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है। हेलिंस्की हवाईअड्डे पर हाल ही में चार प्रशिक्षित खोजी कुत्तों की तैनाती की गई है। शोधकर्ताओं का दावा है कि खोजी कुत्ते संक्रमितों की पहचान के लिए कोविड-19 जांच का सस्ता और प्रभावशाली विकल्प साबित हो सकते हैं।
हेलिंस्की यूनिवर्सिटी से जुड़ी एना हेल्म-बोर्कमैन ने बताया कि खोजी कुत्ते दस सेकेंड के भीतर सार्स-कोव-2 वायरस की मौजूदगी भांप सकते हैं। हवाईअड्डों से लेकर अस्पतालों, होटल-रेस्तरां, स्टेडियम, थिएटर और सांस्कृति केंद्रों तक में आगंतुकों में संक्रमण की पुष्टि करने के लिए इनकी मदद ली जा सकती है। खोजी कुत्तों से किसी भी व्यक्ति की स्क्रीनिंग की प्रक्रिया औसतन एक मिनट में पूरी हो जाती है।
बोर्कमैन ने बताया कि हेलिंस्की हवाईअड्डे पर उतरने वाले यात्रियों को सामान लेने के बाद एक टिश्यू पेपर दिया जाता है। यात्री टिश्यू पेपर से अपनी त्वचा पोंछकर कांच के एक कंटेनर में डालते हैं। कंटेनर को पास के एक ही बूथ पर रख दिया जाता है, जहां अन्य गंध से लैस टिश्यू पेपर वाले डिब्बे भी रखे होते हैं।
खोजी कुत्ते एक-एक कर सभी डिब्बों में रखे टिश्यू पेपर को सूंघते हैं। अगर कुत्ते जम्हाई लेकर, लेटकर या गुर्राकर वायरस की मौजूदगी का संकेत देते हैं तो संबंधित यात्री की स्वैब जांच की जाती है, ताकि कुत्ते के इशारे पर चिकित्सकीय मुहर लग जाएगा। स्वैब जांच की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर यात्री को क्वारंटाइन कर दिया जाता है।
सौ फीसदी सटीक नतीजे-
-हेलिंस्की हवाईअड्डे पर उन कुत्तों की तैनाती की गई है, जो मरीज में कैंसर और डायबिटीज जैसी जानलेवा बीमारियों के प्रति अलर्ट करने में सफल रहे हैं। परीक्षण के दौरान ये कुत्ते सार्स-कोव-2 वायरस की मौजूदगी के सौ फीसदी सटीक नतीजे देने में कारगर रहे हैं।
पसीने की दुर्गंध अलग-
-जून में प्रकाशित एक फ्रांसीसी अध्ययन में दावा किया गया था कि सार्स-कोव-2 वायरस से संक्रमित मरीजों के पसीने की दुर्गंध स्वस्थ लोगों से अलग होती है। खोजी कुत्ते महज 10 से 100 अणुओं की मौजूदगी होने पर भी कोरोना संक्रमण की पोल खोलने में सक्षम हैं।
16 कुत्ते तैयार हो रहे-
-कुत्तों को गंध पहचानने की विधा में पारंगत बनाने वाले संगठन ‘वाइज नोज’ ने बताया कि वह कोरोना संक्रमितों की पहचान के लिए 16 खोजी कुत्ते तैयार कर रहा है। इनमें से दस एयरपोर्ट पर तैनात होंगे। चार ने हेलिंस्की हवाईअड्डे पर सेवाएं देनी शुरू भी कर दी हैं।
सेहत /शौर्यपथ / उच्च रक्तचाप की समस्या से परेशान हैं? नमक के सेवन में कटौती से लेकर योग-व्यायाम तक सब आजमा लिया, पर ब्लड प्रेशर काबू में ही नहीं आ रहा है? अगर हां तो हफ्ते में तीन से चार बार गुनगुने पानी से नहाना शुरू कर दें। ‘यूरोपियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज एंड हार्ट डिजीजेज’ के हालिया अध्ययन में ‘हॉट बाथ’ को रक्तचाप घटाने में खासा असरदार करार दिया गया है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक गुनगुने पानी से नहाने पर शरीर में ‘वैसोडिलेशन’ की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है। इससे रक्त धमनियां खुलती हैं और खून के बहाव के दौरान हृदय पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। नतीजतन ब्लड प्रेशर काबू में रहता है। अध्ययन में गुनगुने पानी के स्नान को हृदय के लिए व्यायाम जितना ही फायदेमंद भी पाया गया। शोधकर्ता एंडी कॉर्बले ने बताया कि ‘हॉट बाथ’ के दौरान दिल 150 बीट प्रति मिनट की दर से धड़कने लगता है। आमतौर पर मध्यमगति की एक्सरसाइज में ऐसा देखने को मिलता है। इससे हृदय की कोशिकाएं मजबूत होती हैं और रक्तचाप नियंत्रण में आता है।
कार्बले और उनके साथियों ने 1500 वयस्कों को तीन समूह में बांटा। पहले समूह में शामिल प्रतिभागियों को लगातार दो महीने तक हफ्ते में एक बार गुनगुने पानी से स्नान करवाया। वहीं, दूसरे समूह को दो से चार मरतबा, जबकि तीसरे समूह को चार से अधिक बार गुनगुने पानी से नहलवाया।
सभी प्रतिभागियों को औसतन 16 मिनट गुनगुने पानी के संपर्क रखा गया। उनके वजन, रक्तचाप और ग्लाइकेटेड हिमोग्लोबीन (ब्लड शुगर का सूचक) की समय-समय पर जांच की गई। इस दौरान हफ्ते में चार से अधिक बार ‘हाथ बाथ’ लेने वाले प्रतिभागियों के डायस्टॉलिक ब्लड प्रेशर में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। उनका वजन और ग्लाइकेटेड हिमोग्लोबीन का स्तर भी औरों की तुलना में ज्यादा घटा।
स्ट्रोक से बचाव में कारगर-
-हार्ट अटैक का खतरा ‘हॉट बाथ’ लेने से 28% घट जाता है
-स्ट्रोक से मौत की आशंका में 26% तक की कमी आती है
-30 हजार वयस्कों पर 20 वर्ष चले जापानी शोध से निकला निष्कर्ष
टाइप-2 डायबिटीज का खतरा भी घटेगा-
-रात में बिस्तर पर जाने से पहले गुनगुने पानी से नहाने की आदत टाइप-2 डायबिटीज से बचाव में खासी मददगार साबित हो सकती है। जापान स्थित कोह्नोदाई यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाल ही में 1300 प्रतिभागियों में गुनगुने पानी के स्नान का फायदा आंकने के बाद यह दावा किया था। उन्होंने पाया था कि जो लोग हफ्ते में चार बार गुनगुने पानी से नहाते हैं, उनका न सिर्फ बीएमआई (वजन और कद का अनुपात), बल्कि ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी नियंत्रित रहता है। स्ट्रेस हार्मोन के स्तर में कमी आना और फील गुड हार्मोन का स्त्राव बढ़ना इसकी मुख्य वजह है।
खाना खजाना / शौर्यपथ / गार्लिक नान खाने के शौकीन इसे बार-बार खाना चाहते हैंं लेकिन मार्केट से गार्लिक नान खाने से बेहतर है कि आप मन चाहे जायकों के साथ घर में गार्लिक नान बनाएं। इसे गर्मा-गरम दाल मखनी के साथ पनीर बटर मसाला के साथ सर्व कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं इसकी रेसिपी
सामग्री
मैदा - एक कप
आटा - आधा कप
ड्राई यीस्ट - आधा बड़ा चम्मच
चीनी - आधा छोटा चम्मच
दही - 1 बड़ा चम्मच
दूध - एक तिहाई कप
तेल - एक बड़ा चम्मच
नमक - स्वादानुसार
आधा कप गुनगुना पानी
लहसुन - बारीक कटे हुए 3-4 बड़े चम्मच
धनियापत्ती - बारीक कटे हुए 3 बड़े चम्मच
मक्खन
विधि
नान का आटा तैयार करने के लिए सबसे पहले यीस्ट का मिश्रण तैयार कर लें। इसके लिए एक कटोरे में ड्राई यीस्ट और चीनी डालकर 1/2 कप गुनगुना पानी डालें। चम्मच से मिश्रण को हिलाकर 10 से 15 मिनट के लिए ढककर रख दें। अगर 15 मिनट बाद मिश्रण में झाग होता है तो यीस्ट कारगर है। लेकिन झाग नहीं होने पर समझ जाएं यीस्ट निष्क्रीय है या आप बहुत ज्यादा गर्म पानी का इस्तेमाल कर चुके हैं। ऐसे में ये मिश्रण इस्तेंमाल न करें और दूसरा मिश्रण तैयार करें।
अब परात में मैदा और आटा छानें। फिर इसमें दही, तेल और नमक डालकर मिक्स कर लें। फिर इसमें यीस्ट का मिश्रण और एक कप दूध डालकर अच्छी तरह से मिलाएं और नरम आटा गूंथ लें।
अब आटे को तेल से चिकना करें और गीले कपड़े से ढक कर 1 से 2 घंटे के लिए रख दें। आटे को फिर से 2-3 मिनट तक या नरम होने तक गूंथ लें।
इसे 5-6 बराबर भागों में बाट लें और गोले बना लें। इन गोलों को गीले कपड़े से ढककर 30 मिनट के लिए फिर रख दें। 30 मिनट बाद आटे का एक गोला लें और उसे हथेलियों के बीच दबाकर लोई के जैसा आकार दें। सूखे आटे की सहायता से इसे चकले में लंबा बेल लें। अब ऊपर से थोड़ा कटा हुआ लहसुन और कटा हुआ हरा धनिया छिड़कें और हाथ या बेलन से धीरे से दबा दें।
अब नान को पलटें (लहसुन वाली सतह नीचे की तरफ रखें) और सादी वाली सतह में ब्रश या हाथ से पानी लगाकर गीला करें।
फिर लोहे के तवे को मध्यम आंच पर गर्म करें (नान बनाने के लिए नॉन-स्टिक तवे का उपयोग न करें)। जब तवा गर्म हो जाए तो पानी वाले नान की सतह को तवे पर रखें। 1 मिनट में आपको रोटी पर बुलबुले से दिखने लगेंगे।
तवे का हैंडल पकड़ें और उल्टा करके सीधे गैस पर रखें। तवे को इधर-उधर घुमाते हुए नान की सतह पर हल्के भूरे रंग के धब्बे आने तक सेकें। अब नान को आसानी से कड़छी के सहारे निकाल लें। अब आप पाएंगे की निचली सतह भी सुनहरी हो गई है। इसे मक्खन लगाकर सर्व करें।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / जब भागती-दौड़ती जिंदगी से थक जाओ, तो थमने के लिए घूमने-फिरने के लिए निकल जाओ।पर्यटन के शौकीन इस बात को बखूबी समझते होंगे।घूमने फिरना सेहत के लिहाज से किसी रिफ्रेशिंग टॉनिक से कम नहीं है।इससे आप शारीरिक रूप से फिट तो बनते ही है, साथ ही इससे आप मानसिक रूप से मजबूत भी बनते हैं।आप में सकारात्मकता का संचार होता है।पर्यटन को समर्पित आज ऐसा ही दिन है विश्व पर्यटन दिवस।आइए, जानते हैं इससे जुड़ीं खास बातें।
क्यों मनाया जाता है विश्व पर्यटन दिवस
पर्यटन से रोजगार की संभावनाएं बढ़ती हैं। विश्व पर्यटन दिवस लोगों में पर्यटन के प्रति जागरूकता लाने और अधिक से अधिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। पर्यटन से किसी भी देश को आर्थिक स्थिति को भी ऊपर ले जाने में मदद करता है। कुछ देशों की आर्थिक स्थिति पर्यटन पर ही निर्भर करती है। पर्यटन दिवस का उद्देश्य देश-विदेश के सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करना भी होता है।
क्या है इस साल की थीम
हर साल पर्यटन दिवस की एक अलग थीम होती है। इस बार की पर्यटन की थीम पर्यटन और ग्रामीण विकास है। इससे ग्रामीण इलाकों को युवाओं और लोगों को रोजगार प्रदान करना है। पर्यटन से कई लोगों को रोजगार प्राप्त होता है। किसी भी देश की सांस्कृतिक विरासत को भी पर्यटन से बढ़ावा मिलता है।
कब हुई विश्व पर्यटन दिवस की शुरुआत
विश्व पर्यटन दिवस उन लोगों के लिए बहुत खास होता है जो लोग पर्यटन से जुड़े हुए हैं। इस दिन देश, राज्य और दूसरे देश पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई कार्य करते हैं। विश्व पर्यटन दिवस की शुरुआत सन् 1970 में विश्व पर्यटन संस्था के द्वारा की गई थी। सन् 1980 में 27 सितंबर को पहली बार विश्व पर्यटन दिवस मनाया गया।
लाइफस्टाइल/शौर्यपथ / वो शाख है ना फूल,
अगर तितलियां ना हों,
वो घर भी कोई घर है
जहां बच्चियां ना हों.
आज घर की रौनक और गर्व का दिन यानी बेटी दिवस है। बदलते परिवेश में भारत में बेटियों के प्रति नजरिए को लेकर बहुत बदलाव आया है लेकिन अभी भी भार त को बेटी के महत्व को समझने के लिए एक लम्बा रास्ता तय करना है।केवल आज के दिन ही नहीं, बल्कि आज से आप बेटियों के महत्व को समझते हुए उनके सपनों को उड़ने के लिए पंख दे सकते हैं।कोशिश करें, कि आप बेटियों के अस्तित्व को तलाशने में उनकी मदद करें। आइए, जानते हैं डॉटर्स डे पर कुछ जरूरी बातें-
क्यों मनाया जाता है डॉटर्स डे
बेटियों के लिए खास प्यार जताने के लिए डॉटर्स डे मनाया जाता है। सिर्फ बेटियों के लिए ही नहीं, बेटा , मां , पिता और यहां तक की दादा-दादी के लिए भी साल में एक खास दिन रखा गया है।
भारत में क्यों मनाया जाता है डॉटर्स डे
हालांकि, भारत में बेटी दिवस मनाने की एक खास वजह बेटियों के प्रति लोगों को जागरुक करना। इस दिन बेटी को न पढ़ाना, उन्हें जन्म से पहले मारना, घरेलू हिंसा, दहेज और दुष्कर्म से बेटियों को बचाने के लिए भारतीयों को जागरुक करना है। उन्हें यह समझाना कि बेटियां बोझ नहीं होती, बल्कि आपके घर का एक अहम हिस्सा होती हैं।
बेटी दिवस के संदेश
खिलती हुई कलियां है बेटियां
मां बाप का दर्द समझती है बेटियां
घर को रोशन करती है बेटियां
लड़के आज हैं तो आने वाला कल है बेटियां
Happy Daughters Day 2020
सूरज बनने के बाद भगवान के पास जो रौशनी बची
उसे बेटी बना कर हमारे घर भेज दिया
Happy Daughters Day 2020
बेटियां बाप की आंखों में छिपे ख्वाब को पहचानती हैं,
और कोई दूसरा इस ख्वाब को पढ़ ले तो बुरा मानती हैं
Happy Daughters Day 2020
बेटी की हर ख्वाहिश पूरी नहीं होती,
फिर भी बेटियां कभी भी अधूरी नहीं होतीं
दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के कांकेर में एक पत्रकार के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा की जा रही मारपीट का विरोध करने पहुँचे वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला के साथ मारपीट की गई। यह घटना बेहद निंदनीय कृत्य है, दुर्ग जिला प्रेस क्लब इसकी कड़ी निंदा करता है। साथ ही हम सब कड़ी कार्यवाही की मांग करते है। इस घटना को लेकर दुर्ग जिला प्रेस क्लब के अध्यक्ष शमशेर खान ने कहा कि छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार पर हमला लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर हमला है। पत्रकार विषम परिस्थितियों में अपने दायित्व का निर्वहन करते हैं। जनहित में समस्याओं को उठाते हैं। पत्रकारों पर आए दिन फर्जी मुकदमे लादकर पत्रकारों को दबाया जा रहा है। उनके साथ मारपीट की जा रही हैं। पत्रकारों का संरक्षण सरकार और प्रशासन का नैतिक कर्तव्य है। इस तरह की घटनाओं में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में शीघ्र पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करे। जिसका उल्लेख कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में किया था।
दुर्ग जिला प्रेस क्लब के समस्त सदस्य सर्वश्री रवि सोनकर , पवन केशवानी , सौरभ शर्मा , सुरेन्द्र , राजेन्द्र , प्रहलाद दुबे , शरद पंसारी , अभिषेक सांवल , मनीष चरक , येनु देवांगन , मनोज देवांगन सही दुर्ग जिला प्रेस क्लब के सदस्य जिला कलेक्टर से मिलकर प्रदेश के राज्यपाल , मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री के नाम ज्ञापन सौपेंगे और जिम्मेदार लोगो पर कार्यवाही की मांग करेंगे .
भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई की जनता को ठगने वाले, झूठी वाहवाही लूटने वाले, विकास कार्यों में छोटी सोच रखकर दलगत राजनीती करने वाले नेता अब अपने आप को बड़ा पाकसाफ बता रहे हैं। पहले वे खुद अपने बारे में सोचें अपने कार्यकाल में भाजपाई वार्डों में हुए एकतरफा बंदरबाट और कांग्रेसी वार्डों और वहाँ की जनता को झुनझुना पकड़ाया है इसलिए पहले वे देखें कि उन्होंने अपने कार्यकाल में क्या किया है। वोट मांगने लोगों को भरमाते रहे, विकास कार्य के नाम में सिर्फ भूमिपूजन करते रहे। यही नहीं टाउनशिप में एलईडी लाइन लगाने के नाम पर सरकार का लाखों रूपए का भ्रष्टाचार किया जिसका कोई माई-बाप नही है और स्थिति यह कि आज टाउनशिप के वार्डों जगह जगह में सिर्फ अंधेरा छाया रहता है।
यही नहीं जब पूरे शहर में डेंगू महामारी छाई थी। बच्चों सहित कई लोगों की जान चली गई थी पूरे शहर में मातम छाया था। तब पूर्व मंत्री अपने सेक्टर 9 बंगले में एसो आराम से नगर निगम पर आरोप लगाने की राजनीति कर रहे थे। तब उन्हें जनता का दुख नहीं दिखा। आज भी जब कोरोना महामारी का दौर चल रहा है ऐसे में भी मंत्री को कभी फुर्सत नहीं मिली की वे एक दिन भी जनता के सहयोग के लिए अपने बंगले से बाहर निकले और गरीबों की मदद करें।
कोरोना काल में अपने दल के पार्षदों तक को जनता के पास न जाने और घर पर रहने की सलाह देने वाले पूर्व मंत्रीजी का पार्षदों पर बयान देना उनकी गिरती लोकप्रियता और खत्म होती साख को दर्शाता है जिससे वे अपना आपा खो बैठे हैं और इस तरह के बयानबाजी करने को मजबूर हो गए हैं।
ऐसे वोट लोभी, स्वार्थी नेता के अंध भक्त आज उनकी बढ़ाई कर रहे हैं। पर वे भूल रहे हैं कि कोरोनाकाल में पूर्व मंत्रीजी स्वयं लुप्त हैं। जो अन्य भक्त पार्षद अपने नेता की बढ़ाई रहे हैं उसने भी इस कोरोना काल में उनकी कोई मदद नहीं की बल्कि भिलाई के युवा महापौर ने पूरे शहर की जनता को अपना परिवार माना और वे खुद लगातार जुटे रहे। कोरोना से अपने टीम के साथ निरंतर लड़ते रहे। युवा महापौर और विधायक ने एक कोरोना से लड़ाई में एक दिन भी घर पर ना बैठकर लगातार आमजन, अधिकारियों-कर्मचारियों और पार्षदों से संवाद बनाये रखा और तो और कोरोना से जंग के दौरान कोरोना संक्रमित भी हुए। जनता के लिए अपनी जांन तक जोखिम में डाली। लेकिन जनता के आर्शीवाद और प्यार ने उन्हें फिर से स्वस्थ्य कर दिया और वे फिर से कोरोना की जंग जीतने जनता के साथ खड़े है। पार्टी भेदभाव के परे दलगत राजनीति से कोसो दूर केवल भिलाई और भिलाई की जनता के लिए समर्पित होकर नि:स्वार्थ भाव से महापौर ने हर क्षेत्र में संभव सकारात्मक प्रयास किया है चाहे सभी 70 पार्षदों को पार्षद-निधि की राशि कोराेना वायरस से लड़ने खर्च करने की स्वीकृति शासन से मांग कर लाए,चंदूलाल को 800 बिस्तर का कोविड अस्पताल बनाना हो या फिर शंकराचार्य को संक्रमितों के लिए आरक्षित करवाना हो या फिर बीएसपी से अतिरिक्त वेंटीलेटर की व्यवस्था करने के लिए आदेशित किया, मुख्यमंत्री जी से माँग कर डोनेशन आन व्हील्स की शुरुवात की समाज के सबसे निचले क्रम तक हर जरूरतमंद के लिए राशन व सामग्री जुटाना हो या अन्य मदद की व्यवस्था करना हो महापौर जी सदैव आगे रहे। लेकिन महापौर ने इस बात का कभी बखान नहीं किया।
राजनांदगांव/शौर्यपथ / ऐसा समय जिसमें व्यक्ति एवं परिवार व्यापार से, सामाजिक व्यवहार से, शारीरिक व्याधियों से ,आर्थिक संसाधनों की कमी से लगातार संघर्षरत है
ऐसे में शहर राजनांदगांव जिले एवं प्रदेश की निजी स्कूलों द्वारा जो मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण दिया गया है उसे राजनांदगांव एवं प्रदेश के पालक कभी नहीं भूलेंगे ।
शहर की मुख्यतः दो शिक्षण संस्थाएं जिसमें एक व्यक्तिगत नाम से चार स्कूलों का संचालन हो रहा है एवं दूसरी जो धार्मिक संस्था की आड़ में दुर्जनो को प्रबंधन प्रमुख बनाकर पालको को प्रताड़ित करने के अपने असीम ज्ञान एवं क्षमताओं का बेहूदा प्रदर्शन कर रहे हैं ।
बच्चों ने स्कूलों का दरवाजा तक नहीं देखा किंतु पालकों के दरवाजे तक स्कूलों का नोटिस जरूर आ गया जैसे पालक अनुबंधित है (स्कूल प्रबंधन को बिना सेवा लिए भी भुगतान करना ही होगा)
निजी स्कूल प्रबंधन टीचर्स के वेतन को आधार बनाकर उनकी वेतन लागत से भी 10 गुना ज्यादा शिक्षण शुल्क की मांग कर रहे हैं ऑनलाइन शिक्षा के मानक शिक्षा विभाग द्वारा तय किए जाएं
(केवल फोटो और वीडियो अपलोड करके ऑनलाइन शिक्षा कारगर सिद्ध नहीं हो सकती)
राजनांदगांव में स्कूलों की इन मनमानियां के चलते कोरोना पीड़ित पालक मंच बन गया है जिसमें पालकों को हो रही परेशानी की आवाज जिला प्रशासन एवं प्रदेश प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है इस कोरोना पीड़ित पालक मंच के संयोजक श्री विकास बाफना ने बताया कि निजी स्कूलों ने इस कोरोना काल में मानवता से परे मनमानियों की सारी हदें पार कर दी हैं ।
1 सर्वप्रथम पालकों की अनुमति के बिना बिना स्तरहीन ऑनलाइन शिक्षा का दिखावा
2 उसके बाद माननीय हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए शिक्षण शुल्क को बढ़ाकर मांगना
3 उसके बाद फीस जमा नहीं करने पर ऑनलाइन शिक्षा से वंचित करने की धमकी देना
4 उसके बाद बच्चों को भी मैसेज कर पालकों पर भावनात्मक दबाव बनवाना
5 फिर ऑनलाइन शिक्षा से वंचित करना
6 ड्रॉप करने का विकल्प देना
7 ड्रॉप करने का विकल्प चुनने के बाद यदि पुनः प्रवेश मांगा जाएगा तो पूरे सत्र की मनमानी फीस देना ही होगा ऐसी शर्त रखना
8 स्कूलों से टीसी लेने की बात कहना
9 और तो और दो मुख्य निजी स्कूलों का आपसी सहमति ऐसी भी एक दूसरे की टीसी को एडमिशन भी नहीं देने की योजना बनाई।
इन्हीं मनमानीयों के विरोध में 21 सितंबर को कोरोना पीड़ित पालक मंच राजनांदगांव द्वारा जयस्तंभ चौक से जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय तक जिला प्रशासन ,माननीय मुख्यमंत्री, एवं माननीय महामहिम राज्यपाल छत्तीसगढ़ को ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम बारिश के कारण स्थगित हो गया था जो आगे प्रस्तावित है । और जल्द ही पालकों का भीषण विरोध शहर की सड़कों पर दिखेगा....
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
