
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
शौर्यपथ लेख / क्रिस्टोफर पाल और नजरुल खान ये दो ऐसे बेवकूफ इंसान है जो शिक्षा के लिए आज लड़ाई जमीनी स्तर पर लड़ रहे है और समझदार पालक सोशल मिडिया पर ज्ञान पेल रहे है . मुझे इनकी शिक्षा और निजी स्कूल की लड़ाई देख कर एक किस्सा याद आया . आज से तीन साल पहले की बात थी मेरे निक्की का स्कूल फीस समय पर नहीं दे पाने के कारण डीएवी स्कूल हुडको से बार बार फोन आ रहे थे जब भी फोन आता मई कॉल पर अपनी मज़बूरी बता कर कुछ दिनों बाद फीस जमा करने की बात बता देता किन्तु मेरे बताये समय का इंतज़ार भी नहीं हो रहा था स्कूल प्रबंधन को रोज रोज के काल और मेरे निक्की द्वारा फीस जमा करने के लिए स्चूओल से मेसेज आना बंद नहीं हुआ तब मैंने स्कूल के प्राचार्य से मुलाकात की और अपनी समस्या राखी तथा ये भी बताया कि मेरे द्वारा समय माँगा गया किन्तु इसके बावजूद भी लगातार मेसेज किया जा रहा है . मुझे मेसेज किया जा रहा है यहाँ तक तो सही है किन्तु मेरे बेटे के द्वारा मेसेज कर मेरे लाल के बाल मन में क्यों जहर घोला जा रहा है उसे क्यों सबके सामने शर्मिंदा किया जा रहा है प्रिंसिपल द्वारा इतनी बड़ी बात होने पर भी नियमो की दुहाई देने और फीस जमा करने की बात कही गयी जबकि शासन के नियमानुसार फीस के लिए बच्चो को परेशां करना मानसिक आघात पहुँचाना अपराध की श्रेणी में आता है किन्तु लालच से भरपूर स्कूल प्रबंधन को किसी से कोई मतलब नहीं मतलब है तो फीस से खैर मैंने जो समय माँगा था उस तय समय पर मेरे द्वारा फीस भर दी गयी पुरे पेनाल्टी सहित . पेनाल्टी सहित फीस भरने के बाद जब प्रिंसिपल से मुलाकात की और कहा की सर मेरे द्वारा देर से फीस भरने के कारण आपने जो पेनाल्टी तय की थी उसे भी भर दिया गया अब आपकी बारी है पेनाल्टी भरने की प्रिंसिपल के शब्द थे कि हम कौन सी पेनल्टी भरे तब मैंने कहा कि इतने दिनों आपने जो बच्चे को मानसिक पीड़ा दी उसकी पेनाल्टी कौन भरेगा मुझे अच्छे से याद है कि प्रिन्सिपल के वो वाक्य देर आपने की हमने हमारा काम किया . अगर आपको अच्छा नहीं लगता तो आप बच्चो को स्कूल से निकाल सकते है हम हर मामले में सही है . हालंकि प्रिंसिपल को समझ में आया की गलती उसकी भी है किन्तु बच्चो के भविष्य के लिए हमने बात खत्म की .
लेकिन उसके कुछ दिनों बाद ही एक वाकया हुआ तब वार्षिक उत्सव की तैयारी चलने लगी जिसके लिए जो जो प्रतिभागी था उसे समय समय पर स्कूल बुलाया जाता था मेरा लाल भी इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और निर्धारित समय पर स्कूल बस से जाने लगा लगातार १० दिनों तक जाने के बाद जिस दिन फाइनल सलेक्शन होना था उस दिन जाने का समय परिवर्तन हुआ जिसकी सुचना स्कूल से मिलनी चाहिए थी किन्तु मुझे समय पर नहीं मिली और मेरा लाल फाइनल सलेक्शन के दिन नहीं जा पाया इस तरह वो आयोजन में प्रतिभागी नहीं बन पाया जिसके कारण काफी उदास हो गया रोया भी मुझे इस बात का पता चलते ही मई अपने बेटे को स्कूल लेकर गया और प्रिंसिपल से मुलाक़ात की सारी बात राखी तब प्रिंसिपल का दो शब् मुझे स्तभ कर गया सॉरी स्टाफ से गलती हो गयी . किन्तु मुझे सार्री मंजूर नहीं था जिस तरह फीस की देरी की सजा मुझे मिली मेरे बच्चे को मिली उसी तरह इस लापरवाही की सज़ा भी जिम्मेदार को मिलनी ही चाहिए मई प्राचार्य के सामने अड़ गया कि जिसकी भी गलती के कारण मेरा बेटा प्रतिभागी नहीं बन पाया उसे सजा मिलनी ही चाहिए क्योकि मेरे द्वारा आपके स्कूल का हर नियम का पालन किया गया अब ये स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि जिसने भी गलती की है उसे सजा मिले काफी बहस और तर्क वितर्क के बाद स्कूल के प्राचार्य ने जिम्मेदार लोगो को जिसमे बस कंडक्टर जिसने फोन पर सूचित नहीं किया , मेसेज भेजने वाले स्टाफ जिसने समय पर मेसेज नहीं भेजा , नहीं आने का कारण नहीं पूछने वाले टीचर पर कार्यवाही की बात स्व्वेकार की तब मैंने कहा की इन सबके जिम्मेदार आप भी है जिनके अंडर में ये सारा कार्य हो रहा है मुखिया होने के नाते गलती आपकी भी है आखिर कार स्कूल के प्राचार्य ने भी माफ़ी मांगी इन सब वाक्य में मैंने अपने बेटे को साथ रखा . जब स्कूल से बाहर निकले तब मैंने बेटे को बताया कि बेटा स्कूल फीस किसी मज़बूरी वश देर से देने के बाद भी सजा के तौर पर पेनाल्टी भरी क्योकि गलती हमारी थी कि हमने स्कूल फीस समय पर जमा नहीं कराई और इस गलती के लिए पेनाल्टी भरने के साथ स्कूल प्रबंधन से देर से फीस जमा करने के लिए माफ़ी भी मांगी उसी तरह इस बार तुम वार्षिक उत्सव में प्रतिभागी नहीं बने इसमें गलती तुम्हारी नहीं स्कूल प्रबंधन की थी और इस लिए स्कूल प्रबंधन से न्याय के लिए लड़ाई लड़ी उनके माफ़ी मांगने से जीत नहीं हुई जीत इस लिए हुई कि तुम कही गलत नहीं थे वो गलत थे इसलिए मन में ये ना सोंचो की वार्षिक उत्सव में भाग नहीं ले पाए अगले साल फिर मेहनत करना और भाग लेना . किन्तु भगवान को शायद मंजूर नहीं था अगले साल मेरा बेटा ही इस दुनिया में नहीं रहा उसे तो इश्वर ने सभी प्रतियोगिता से मुक्त कर दिया स्कूल की भी और जिन्दगी की भी .
आज उन्ही बच्चो पर अन्याय ना हो और बच्चो का हक उन्हें मिले इस लिए शहर के दो पागल इंसान क्रिस्टोफर पाल और नजरुल खान निजी स्कूल की मनमानी निति के खिलाफ लड़ रहे है और कुछ पालक तो साथ है किन्तु बहुतेरे पालक दुर से सोशल मिडिया से ज्ञान दे रहे है किन्तु साथ नहीं आ रहे है . अरे समझदार पालको नजरुल खान और क्रिस्टोफर पाल जैसे लोग अपने बच्चो के लिए नहीं लड़ रहे है आपके लिए लड़ रहे है उन निजी स्कूल वालो से जो सालो पहले एक छोटे से घर में रहते थे एक छोटी सी किराए की बिल्डिंग में स्कूल चलाते थे आज लाखो की गाडियों में घूम रहे है करोडो की बिल्डिंग के मालिक है लाखो रूपये घुमने फिरने में खर्च करते है लखपति से करोडपति हो गए है किन्तु वैश्विक महामारी के समय भी ऐसे पेश आ रहे है कि अगर फीस नहीं मिली तो बर्बाद हो जायेंगे बस एक बार दिल में हाँथ रखकर ये सोंचो कि जो आज स्कूल के मालिक है वो कुछ साल पहले कैसी जिन्दगी जी रहे थे और कितनी संपत्ति थी और अब कितनी है . नजरुल खान और क्रिस्टोफर पाल जैसे लोग बेवकूफ नहीं है बेवकूफ तो वो है जो अपने बच्चो के साथ हो रहे अन्याय के बाद भी मौन है शिक्षा पर सबका अधिकार है किन्तु शिक्षा को बेचने वाले को ये बात तभी समझ आएगी जब आप लोग संगठित हो जाओगे नहीं तो आज नहीं तो कल आपके बच्चो के कंधो का सहारा लेकर ये निजी स्कूल वाले लालची प्रवित्ति के लोग आपको बेइज्जत करते रहेंगे साथ ही बच्चो के बालमन के साथ खिलवाड़ मै तो बेवकूफ नजरुल खान के साथ हु मै तो बेवकूफ क्रिस्टोफर के साथ हूँ क्योकि मै बेवकूफ हूँ लेकिन एक पिता हूँ जो अपने बच्ची के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता और लालची लोगो का साथ नहीं दे सकता समझदारी से अच्छा बेवकूफ कहलाना पसंद करूँगा क्योकि अपने बच्ची के साथ अन्याय नहीं होने दूंगा . हाँ मै क्रिस्टोफर और नजरुल जैसे लोगो के साथ हूँ जो शिक्षा के लिए लड़ाई लड़ रहे है . आप किसके साथ है ये आपके ऊपर है क्योकि बच्चे आपके है उनके भविष्य की चिंता आपको ज्यादा है सबसे ज्यादा .... ( शरद पंसारी - सम्पादक , दैनिक शौर्यपथ समाचार पत्र )
राजनांदगांव / शौर्यपथ / भारत का संविधान की अनुच्छेद 21 (ए) के अनुसार राज्य के द्वारा सभी बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराया जायेगा। नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुच्छेद 8 (व्याख्या) (1) व (2) के अनुसार राज्य सभी बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने और अनिवार्य दाखिले, उपस्थिति और प्राथमिक शिक्षा पूर्ण करने को सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है।
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि संविधान या आरटीई कानून सिर्फ कमजोर तबका को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराया करने की बात नहीं करते है, बल्कि यह सार्वभौमिक है। कोई बच्चा जो भारत का नागरिक है, अमीर या गरीब, लड़का या लड़की, किसी भी जाति का हो, उसे नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा पाने का अधिकार प्राप्त है।
पॉल का कहना है कि प्रदेश में स्कूली बच्चों के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है। कोरोना महामारी में अब मंदी के कारण लोगों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुका है, जिसके कारण कई पालक अपने बच्चों की ट्यूशन फीस जमा करने की स्थिति में नहीं है। मात्र ऊंची फीस नहीं देने के कारण प्रायवेट स्कूलों के द्वारा बच्चों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। इस सत्र 2020-21 में लगभग 2 लाख बच्चे प्रायवेट स्कूल छोड़ कर जा चुके है। सरकार शिक्षा को लेकर गंभीर नहीं है, शालात्यागी बच्चों का आकड़ा सरकार के पास नहीं है।
पॉल का कहना है कि प्रदेश के 8 हजार प्राईवेट स्कूलों में अध्ययनरत् 10 लाख बच्चों की नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा की चिंता करना भी सरकार का दायित्व है। शिक्षा पाना बच्चों का मौलिक अधिकार है और यह सरकार का दायित्व है कि सभी बच्चे नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करे। लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रायवेट स्कूल छोड़ रहे बच्चों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए दिनांक 20 सिंतबर 2020 को पत्र जारी किया है, लेकिन ज्यादातर बच्चे अंग्रेजी मिडियम स्कूलों से बाहर किये जा रहे है और सरकार इन बच्चों को किस सरकारी अंग्रेजी मिडियम स्कूल में प्रवेश दिलाने का प्रयास कर रही है यह समझ से परे है, क्योंकि ज्यादातर सरकारी स्कूल तो हिन्दी मिडियम के है। पॉल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रायवेट स्कूलों में अध्ययनरत् 10 लाख बच्चों की इस सत्र 2020-21 की ट्यूशन फीस वहन करने की मांग की है।
भिलाई नगर / शौर्यपथ / संपत्तिकर दाताओं के द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली स्व विवरणी जो उनके स्वयं के द्वारा भरकर प्रस्तुत की जाती है इसके आधार पर संपत्तिकर की राशि जमा की जाती है! स्व विवरणी प्रस्तुतकर्ता की रेंडम जांच के लिए आयुक्त श्री ऋतुराज रघुवंशी ने निर्देश दिए थे! आयुक्त के निर्देश पर उपायुक्त एवं संपत्तिकर प्रभारी तरुण पाल लहरें ने जोन क्रमांक 1 के सहायक राजस्व अधिकारी को छत्तीसगढ़ नगर पालिका भवनों/भूमियों के वार्षिक भाड़ा मूल्य का अवधारण नियम 1997 के अधीन सूर्या ट्रेजर आईलैंड जुनवानी द्वारा 18 मई 2018 को प्रस्तुत संपत्ति कर स्व विवरणी की स्थल पर सत्यता जांच कर माप एवं गणना सहित प्रतिवेदन देने के लिए दिनांक 30 जुलाई 2020 को पत्र प्रेषित किया था!
पत्र प्राप्त होते ही नगर पालिक निगम भिलाई के जोन क्रमांक 1 की तीन सदस्यीय टीम जोन आयुक्त सुनील अग्रहरि के साथ 4 अगस्त 2020 को सूर्या ट्रेजर आईलैंड पहुंची और प्रबंधन से दस्तावेज प्राप्त कर सूर्या मॉल भवन की नाप जोख कर स्व विवरणी के अनुसार स्थल पर सत्यापन किया और सत्यापन कार्य पूर्ण कर सहायक राजस्व अधिकारी शरद दुबे ने पूरी विस्तृत रिपोर्ट संपत्ति कर अधिकारी को सौंप दी है! तीन सदस्यीय टीम में उप अभियंता अरविंद शर्मा, आलोक पसीने एवं सहायक राजस्व अधिकारी शरद दुबे ने जांच की कार्रवाई शुरू की थी! सुबह से शाम तक सूर्या मॉल में नक्शा के अनुसार नापजोख किया गया था इस दौरान भवन निर्माण अधिकारी हिमांशु देशमुख, सहायक राजस्व अधिकारी संजय वर्मा, बाल कृष्ण नायडू भी मौजूद थे! भवन के पूरे मंजिलों का स्वीकृत मानचित्र के आधार पर सत्यापन करने के बाद स्व विवरणी के राशि गणना की सत्यता परखने के लिए सहायक अभियंता अनिल सिंह को जिम्मेदारी दी गई !
सहायक अभियंता ने अपने रिपोर्ट में बताया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में कुल संपत्ति कर 4410436 रुपए गणना की गई थी परंतु जांच उपरांत 4924456 रुपए देय राशि पाया गया है जिसमें 514020 रुपए का अंतर है यानी कि इस अंतर की राशि की 5 गुणा राशि को सूर्या ट्रेजर आईलैंड के प्रबंधन को जमा करना होगा!
करो के भुगतान के लिए स्क्वायर फिट में भी अंतर जांच में यह भी पाया गया है कि सूर्या ट्रेजर आईलैंड के द्वारा कुल 432086.31 वर्ग फीट के अनुसार से कर का भुगतान किया जाता रहा है परंतु जांच के उपरांत 493644.70 वर्ग फीट स्थल पर पाया गया है और इसके अंतर की बात करें तो 61558.39 वर्ग फीट है जो कि 10त्न से अधिक का अंतर है!
अब प्रतिवर्ष अंतर की राशि के साथ जमा करना होगा संपत्ति कर सूर्या ट्रेजर आइलैंड के द्वारा पूर्व में 4410436 रुपए संपत्तिकर का भुगतान किया जा रहा था! अब 4924455.82 रुपए संपत्तिकर प्रतिवर्ष जमा करना होगा! जांच के उपरांत इन दोनों की राशि का अंतर की बात करें तो 514020 रुपए की राशि निकलती है!यह भी पाया गया जांच में इसलिए 2570100 रुपए की होगी वसूली
पूर्व में हुई गणना में ग्राउंड फ्लोर पर आर्टियम का एरिया नहीं लिया गया था एवं प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पंचम एवं षष्टम तल पर भवन पूर्णता प्रमाण पत्र के आधार पर गणना किया गया था! जबकि गणना कुल निर्मित क्षेत्र के आधार पर की जानी थी! अब सही गणना के अनुसार 514020 रुपए का अंतर प्राप्त हुआ है! छत्तीसगढ़ नगर पालिका नियम 1997 की कंडिका 11 के अनुक्रम में कंडिका एक में उल्लेखित है कि पुन:निर्धारण में किसी ओर 10त्न की फेरफार को ध्यान में नहीं लिया जाएगा परंतु फेरफार 10त्न से अधिक हो वहां पर भूमि/भवन का स्वामी ऐसे शक्ति का भुगतान करने के दायित्वाधीन होगा जो ऐसे स्वामी द्वारा किए गए स्व निर्धारण तथा नगर पालिका द्वारा किए गए पुन:निर्धारण के अंतर की राशि के 5 गुणा के बराबर होगी! इस आशय से अब अंतर की राशि 514020 का 5 गुणा राशि 2570100 सूर्या ट्रेजर आईलैंड जुनवानी से वसूली की जाएगी!
राजनांदगांव / शौर्यपथ / बीती रात शहर के बसंतपुर स्थित नवीन कृषि उपज मंडी थोक सब्जी बाजार में एक युवक की सामूहिक रूप से मिलकर आधा दर्जन युवकों ने हत्या कर दी। घटना के बाद चार युवकों ने बकायदा पुलिस के समक्ष समर्पण कर दिया हैए वहीं तीन आरोपी फरार हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक बीती रात लगभग 12 बजे बसंतपुर वार्ड नंबर 43 के रहने वाले गोल्डी मरकाम की मोहल्ले के ही आधा दर्जन युवकों ने मिलकर धारदार हथियार से हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि आरोपियों और मृतक के बीच अवैध कारोबार को लेकर मनमुटाव चल रहा था। मृतक और मुख्य आरोपी राजा निकोसे के बीच पहले गहरी दोस्ती थी। बाद में मतभेद के चलते दोनों के बीच आपसी दुश्मनी ठन गई।
पिछले कुछ दिनों से मृतक लगातार आरोपियों के साथ मारपीट कर रहा था।
मुख्य आरोपी राजा निकोसे का अपने साथियों पंकज यादव, विष्णु यादव, विकास वैष्णव, खेमू यादव तथा छीन यादव के साथ मृतक से आमना-सामना हो गया। दोनों में कहा-सुनी होते ही मृतक पर सभी ने ताबड़तोड़ धारदार हथियार से कई वार किए। जिसके चलते वह लहुलुहान हो गया। वहीं मृतक के साथ मौजूद कौरिनभाठा के प्रतीक ताम्रकार को भी आरोपियों ने वार कर घायल कर दिया। बताया जा रहा है कि मृतक को अस्पताल में जब लाया गया तब तक उसकी जान चली गई। वहीं साथी प्रतीक का इलाज चल रहा है।
इधर बीते तीन दिन के भीतर हुए हत्या की दो घटनाओ ं से शहर में फिर से गैंगबाजों के सिर उठाने की चर्चा से लोग सहमे हुए हैं। बीते 21 सितंबर को भी एक निगरानीशुदा बदमाश परवेज कुरैशी की कंचनबाग में आपसी रंजिश के चलते भी आधा दर्जन युवकों ने धारदार हथियार से वार कर हत्या कर दी थी।
इस संबंध में बसंतपुर थाना प्रभारी व प्रशिक्षु डीएसपी रूचि वर्मा ने बताया कि फरार आरोपियों की खोजबीन की जा रही है। घटना की वजह आपसी रंजिश है। उधर हत्या से गुस्साए वार्ड के लोगों ने आरोपियों के वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया। बताया जा रहा है कि आरोपियों को मारने की नियत से मृतक के परिवार के लोग भी हथियार बंद होकर पहुंचे थे। पुलिस की दखल से मामले को संभाला गया।
बीती रात हुई गोल्डी मरकाम की हत्या की घटना के दौरान मौके पर मौजूद बसंतपुर थाना में पदस्थ एक आरक्षक मुकेश कुर्रे को तत्काल एसपी डी. श्रवण ने निलंबित कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि वारदात से पहले आरक्षक कुर्रे मृतक के साथ शराब का सेवन कर रहा था। इसी बीच मौके पर चाकू-छुरी चली। किसी तरह आरक्षक वहां से भागने में कामयाब हो गया। जिसके चलती उसकी जान बच गई। चर्चा है कि मृतक के साथ आरक्षक का रोज का उठना-बैठना था। मृतक भी कई अवैध कारोबार में शामिल था। बताया जा रहा है कि एसपी श्रवण ने आरक्षक के आचरण को सिविल सेवा अधिनियम के विपरीत मानते हुए निलंबित किया है।
मुंबई / शौर्यपथ / मुबंई पुलिस ने मंगलवार को फिल्म डायरेक्टर अनुराग कश्यप के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की है. डायरेक्टर पर एक्ट्रेस पायल घोष ने 2013 में अपने साथ यौन दुराचार करने का आरोप लगाया था. कश्यप ने इन आरोपों को आधारहीन बताकर खारिज कर दिया था. एक अधिकारी ने बताया है कि घोष और उनके वकील नितिन सातपुते पुलिस में पहुंचे जिसके बाद मंगलवार देर रात वर्सोवा पुलिस स्टेशन कश्यप के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई.
कश्यप के खिलाफ आईपीसी की 376 (I) (रेप), 354 (महिला की शीलता भंग करने के इरादे के साथ उसका शोषण करना या आपराधिक दबाव डालना), 341 (गलत तरीके से नियंत्रण करना) और 342 (गलत तरीके से रोकना) धाराओं में केस दर्ज किया गया है. अधिकारी ने बताया कि मामले की आगे जांच हो रही है. उन्होंने कहा कि कश्यप को सात साल पुराने इस मामले में पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा.
अपनी शिकायत में एक्ट्रेस ने आरोप लगाया है कि कश्यप ने 2013 में वर्सोवा में यारी रोड की एक जगह पर उनका रेप किया था. अधिकारी ने बताया कि घोष और उनके वकील पहले सोमवार को ओशीवारा पुलिस स्टेशन गए थे लेकन वहां से उन्हें वर्सोवा आने को बोला गया क्योंकि कथित घटना उसी न्यायिक क्षेत्र की थी. वो ओशीवारा पुलिस के पास इसलिए गए थे क्योंकि कश्यप का ऑफिस इसी इलाके में है.
नितिन सातपुते ने मंगलवार देर रात ट्वीट कर बताया था कि 'आरोपी के खिलाफ आखिरकार एफआईआर दर्ज कर लिया गया है.' बता दें कि शनिवार को पायल घोष ने ट्विटर पर एक ट्वीट करते हुए दावा किया था कि कश्यप ने उनसे अनुचित यौन व्यवहार किया था. उनके इस आरोप को कश्यप ने खारिज करते हुए कहा था कि उन्हें उनके मुखर विचारों के चलते निशाना बनाए जाने की कोशिश की जा रही है.
कश्यप के वकील की ओर से एक बयान भी जारी किया गया था, जिसमें कहा गया था कि 'मेरे क्लाइंट, अनुराग कश्यप को इन झूठे आरोपों से तकलीफ हुई है. यह बिल्कुल गलत, बेईमान और अपमानजनक आरोप हैं.' उनकी तरफ से यह भी कहा गया था कि इन आरोपों से मी टू मूवमेंट की सार्थकता और विश्वसनीयता कम की जा रही है. कश्यप के समर्थन में उनकी पहली दो बीवियां आरती बजाज और कल्कि कोचलिन भी सामने आई थीं और इन आरोपों के खिलाफ लड़ने के लिए हौसला बढ़ाया था.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / आगरा उत्तर प्रदेश के आगरा में एक ऐसी घटना हुई है, जिसने एक बार फिर 'जाको रखे साईंया, मार सके न कोई' वाली बात को सच साबित कर दिया. यहां पर मंगलवार को एक छोटे बच्चे को ट्रेन की चपेट में आने से रोक लिया गया. दरअसल, घटना 21 सितंबर को दोपहर 2 बजे के आसपास हुई आगरा डिवीजन की है. यहां से एक मालगाड़ी दिल्ली से आगरा जा रही थी, तभी एक छोटे बच्चे को पटरी पर फेंक दिया गया लेकिन चमत्कारिक रूप से बच्चे को वक्त रहते देख लिया गया और बच्चा सही-सलामत बचा लिया गया.
बच्चे को थोड़ी बड़ी उम्र के एक दूसरे बच्चे ने ही पटरी पर फेंका था. बल्लभगढ़ स्टेशन से आ रही मालगड़ी ट्रेन, शुक्र है कि 15 की स्पीड से चल रही थी. तभी लोको पायलट दीवान सिंह और अतुल आनंद ने देखा कि एक 12-13 साल के बच्चे ने दो साल के एक बच्चे को चलती मालगाड़ी के आगे फेंक दिया. पायलट ने ब्रेक लगाया लेकिन इंजन आगे निकल गई. बच्चा तो बच गया लेकिन वो इंजन के बीच में फंस गया.
पायलट की सतर्कता से इंजन में फंसे बच्चे को निकाल लिया गया. पीछे से बच्चे की मां आ रही थी, जिसे बच्चे को सौंप दिया गया. वहीं बड़े बच्चे को आगरा के GRP पुलिस को सौंप दिया गया है. माना जा रहा है कि दोनों भाई हैं. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
नई दिल्ली / शौर्यपथ /वाराणसी भारतीय वायु सेना में महिला फाइटर पायलटों की भर्ती शुरू होने के बाद राफेल को उड़ाने का मौका बनारस की शिवांगी को मिला है. बीएचयू से एनसीसी करने के बाद शिवांगी ने भारतीय वायु सेना की राफेल स्क्वाड्रन की पहली महिला फाइटर पायलट बनने का सौभाग्य हासिल किया है.
फ्रांस से राफेल विमानों का बेड़ा भारत आने के बाद से ही चर्चा थी कि आखिर कौन फाइटर पायलट इसे उड़ाएगा. इसमें पुरुषों के साथ महिला पायलट भी होंगी या नहीं जैसी चर्चा हो रही थी. अब इस चर्चा पर बनारस में पली बढ़ीं और बीएचयू से एनसीसी करने वाली शिवांगी ने विराम लगा दिया है. शिवांगी भारतीय वायु सेना की राफेल स्क्वाड्रन की पहली महिला फाइटर पायलट बनने का सौभाग्य हासिल किया है.
शिवांगी को महिला लड़ाकू पायलटों के दूसरे बैच के हिस्से के रूप में 2017 में भारतीय वायु सेना में कमीशन मिला था. वाराणसी जिले की मूल निवासी फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिवांगी सिंह फिलहाल प्रशिक्षण के दौर में हैं. जल्द ही शिवांगी अंबाला में 17 स्क्वाड्रन गोल्डन एरो में शामिल होंगी. भारतीय वायु सेना में वर्ष 2017 में शामिल होने के बाद शिवांगी सिंह मिग -21 बाइसन उड़ा रही हैं. वह अंबाला में भारत के सर्वश्रेष्ठ फाइटर पायलटों में से एक विंग कमांडर अभिनंदन के साथ भी काम कर चुकी हैं.
शिवांगी के पिता शिवांगी की इस उपलब्धि पर बताते हैं कि उसका सपना था कि वह विमान उड़ाए. हम लोगों को गर्व है कि हमारी बेटी बनारस के साथ ही देश का नाम रोशन करेगी. शिवांगी ने 2013 से 2016 तक बीएचयू के एनसीसी का प्रशिक्षण लिया था और सनबीम भगवानपुर से बीएससी किया था.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / दिल्ली विधानसभा के पैनल के नोटिस के खिलाफ फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजीत मोहन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने सुनवाई की. दिल्ली के दंगों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की कथित भूमिका से संबंधित कार्यवाही में दिल्ली विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति ने फेसबुक को नोटिस जारी किया है. समिति ने अब फेसबुक इंडिया के अजीत मोहन को 23 सितंबर को समिति के समक्ष पेश होकर गवाही सुनिश्चित करने के लिए एक नया नोटिस जारी किया है. समिति द्वारा रविवार को जारी बयान में चेतावनी दी गई है कि नोटिस को न मानना समिति को ‘संवैधानिक रूप से प्रदत्त विशेषाधिकार का उल्लंघन' माना जाएगा.
अपनी याचिका में अजीत मोहन ने नोटिस को खारिज करने की मांग की है. याचिका में यह भी कहा गया है कि दिल्ली विधानसभा की समिति उसे पेश होने के लिए मजबूर नहीं कर सकती. यह मुद्दा संसद के समक्ष है. मोहन संसदीय पैनल के सामने पेश हुए हैं. दिल्ली में पुलिस और पब्लिक ऑर्डर केंद्र के पास है. आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि फेसबुक पहली नजर में दोषी है और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जानी है. 'आप' ये यह कैसे कह सकती है? वह अदालत नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट में अजीत मोहन की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि एक डिप्टी सेकेट्ररी यह तय नहीं कर सकता कि विशेषाधिकार का उल्लंघन क्या होता है. अनुच्छेद 19 के तहत मेरा अधिकार है और उसमें भी, मुझे न बोलने का अधिकार है. मैं एक बाहरी व्यक्ति हूं और मैं समिति की कार्यशैली में हस्तक्षेप नहीं कर रहा हूं, ना ही मैंने विधायी कर्तव्यों में हस्तक्षेप किया है. ये मुद्दा राजनीतिक फेरबदल का है. नोटिस से मेरे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है.
हरीश साल्वे ने दलील दी कि कमेटी को इस तरह के समन जारी करने का विशेषाधिकार हासिल नहीं है. मुझे दो समन मिले हैं. इस बात की जानकारी नहीं है कि वो मेरी बतौर गवाह पेशी चाहते हैं या एक्सपर्ट के तौर पर. हमने 13 सिम्बर को इस बारे में कमेटी को लिखा भी है कि वह समन को वापस ले, लेकिन अजीत मोहन के पेश न होने पर कमेटी ने इसे विशेषाधिकार हनन मानते हुए समन जारी कर दिया, जबकि विशेषाधिकार का मसला विधानसभा तय करती है, कमेटी नहीं.
हरीश साल्वे ने कहा कि आर्टिकल 19 के तहत अभिव्यक्ति की आजादी के अंर्तगत ही किसी मसले पर न बोलने का अधिकार भी निहित है. यह मसला राजनीतिक रंग ले चुका है. मैं इसका हिस्सा नहीं बनना चाहता. लेकिन मुझे कमेटी के सामने पेश होने के लिए मज़बूर करना और ऐसा न करने की सूरत में दंड भुगतने की धमकी देना मेरी अभिव्यक्ति की आजादी के मूल अधिकार का हनन है.
हरीश साल्वे ने कहा कि सांप्रदायिक दंगों से जुड़े मुद्दे दिल्ली विधानसभा के अधिकार में नहीं आते हैं. पुलिस तथा सार्वजनिक व्यवस्था दिल्ली विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में नहीं है. समिति को इन मुद्दों से निपटने के लिए कानून का कोई अधिकार नहीं है. विधानसभा चाहे, वो फैसला लेने या कमेटी के गठन के लिए स्वतंत्र है. लेकिन आप समझने की कोशिश कीजिए मैं अमेरिकी की एक कंपनी के लिए काम करता हूं, लेकिन अगर मैं राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मसले पर अगर कमेटी के सामने कोई राय नहीं रखता, तो मुझे इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.
फेसबुक इंक की ओर से मुकुल रोहतगी ने दो टूक कहा कि वो समन पूरी तरह असंवैधानिक है. अजीत मोहन हमारे अधिकारी हैं. हम कतई नहीं चाहते कि इस पचड़े में वो पड़ें. केन्द्र सरकार और सदन को हम जवाब दे चुके हैं. साल्वे ने कहा कि अजीत मोहन कमेटी के समक्ष पेश नहीं होते तो कोई कार्रवाई ना हो, अदालत ये आदेश जारी करे.
मुकुल रोहतगी ने कहा कि विधायी समिति को न्याय निर्णय की कोई शक्ति नहीं है. विधायिका न्याय की अदालत नहीं होती. कमेटी केअध्यक्ष का कहना है कि फेसबुक दोषी है. उनका कहना है कि समिति ने पहले ही कहा है कि FB का दिल्ली दंगों में हाथ है. वह यह कहने वाले कौन होते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा कि हम नोटिस जारी करने के इच्छुक हैं. क्या सरंक्षण आदेश दिया जा सकता है?
दिल्ली विधानसभा पैनल के वकील सिंघवी ने अदालत को बताया उनके खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा.अजीत मोहन को गवाह के रूप में बुलाया गया है. फेसबुक को आरोपी नहीं कहा गया है. हम सुरक्षा उपाय चाहते हैं ताकि फेसबुक का दुरुपयोग न हो. सिंघवी ने कहा कि हम फेसबुक को संशोधित नेटिस भेजने को तैयार हैं. फेसबुक को आरोपी के रूप में नहीं बुलाया गया, लेकिन उसका दुरुपयोग हुआ है.
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विधानसभा सचिव, केंद्र, राज्यसभा और लोकसभा महासचिव और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. दिल्ली विधानसभा सचिव ने अदालत को पैनल की बैठक नहीं करने का आश्वासन दिया है. समिति की आज की बैठक टाल दी गई है. मामले की 15 अक्टूबर को अगली सुनवाई होगाी.
सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा सचिव के बयान को रिकॉर्ड पर लिया कि फिलहाल समिति की बैठक को टाल दिया गया है. दिल्ली विधानसभा की शांति और सौहार्द समिति की बैठक टाली गई है. समिति के अध्यक्ष राघव चड्ढा ने बैठक को सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के मद्देनजर टालने की घोषणा की
नई दिल्ली / शौर्यपथ / शारजाह आईपीएल-2020 के अंतर्गत मंगलवार को महेंद्र सिंह धोनी की चेन्नई सुपरकिंग्स के खिलाफ युवा बल्लेबाज संजू सैमसन मानो कहर बरपाने को आमादा थे. राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेल रहे संजू ने अपनी 74 रनों की ताबड़तोड़ पारी के दौरान चेन्नई के किसी भी गेंदबाज को नहीं बख्शा. उनके आगे सभी विपक्षी बल्लेबाज सहमे नजर आए. संजू ने मात्र 32 गेंदों पर 9 छक्कों और एक चौके की मदद से 74 रन ठोक डाले और CSK को हराने में अहम भूमिका निभाई. उनका स्ट्राइक रेट 231.25 का रहा.यह संजू की तूफानी पारी का ही कमाल था कि राजस्थान रॉयल्स निर्धारित 20 ओवर्स में 216 रन बनाने में सफल रही. जवाब में चेन्नई की टीम 20 ओवर में छह विकेट पर 200 रन ही बना पाई और 16 रन से मैच हार गई.
मैच में इस शानदार पारी के लिए संजू को मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार तो मिला ही, साथ ही इससे भी एक 'बड़ा अवार्ड' मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर की तारीफ के रूप में मिला. यह मैच शारजाह क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया.
संजू की धमाकेदार पारी की तारीफ करते हुए 'क्रिकेट के भगवान' कहे जाने वाले सचिन ने ट्वीट किया, 'संजू की ओर से साफसुथरे स्ट्रोक्स (Clean striking). ये प्रापर क्रिकेट शॉट्स थे, स्लॉग नहीं. लुंगी एंगिडी ने चतुराई से बॉलिंग की. उन्होंने गेंदों को थोड़ा वाइड और स्लो रखा #CSKvsRR' सचिन से मिली इस प्रशंसा को बढ़कर भला क्या हो सकता है. उनके ट्वीट के जवाब में संजू ने लिखा, 'थैंक्स ए लाट सर.' सचिन के अलावा तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने भी संजू की बैटिंग की जमकर प्रशंसा की. उन्होंने लिखा- तिरुवनंतपुरम के अपने संजू सैमसन की बेहतरीन पारी. कल उन्होंने देश और दुनिया को दिखाया कि अपने प्रापर क्रिकेटिंग शॉट से वे क्या कर सकते हैं.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / बिहार में विधानसभा चुनाव सिर पर है. सभी सियासी दल तैयारियों में जुटे हैं. सीट बंटवारे से लेकर कैंडिडेट के चयन तक सभी दलों के अंदर मंथन चल रहा है. सत्ता पक्ष की तरफ से खुद सीएम नीतीश कुमार ने कमान संभाल रखी है. पीएम नरेंद्र मोदी भी उनका साथ दे रहे हैं. अब तक कई शिलान्यास, उद्घाटन कार्यक्रम के बहाने पीएम मोदी आधा दर्जन सभाओं को वर्चुअली संबोधित कर चुके हैं. इन सभाओं में वो नीतीश कुमार की तारीफों के पुल बांध चुके हैं लेकिन ये पहली बार है, जब बीजेपी और जेडीयू का चुनाव प्रचार इतना आक्रामक रुख अपनाए हुए है.
उधर, विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव अभी भी चुनावी सभाओं के मामले में पीछे पड़े हुए हैं. इनके अलावा नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार जैसे सियासी दिग्गजों और धुरंधर के सामने 31 वर्षीय तेजस्वी के लिए लंबी लकीर खींचना भी मुश्किल हो सकता है क्योंकि मौजूदा वक्त में उनके सामने ये पांच बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं-
वर्चुअल चुनाव प्रचार
कोरोना वायरस की वजह से इस बार चुनावी प्रक्रिया से लेकर चुनाव प्रचार का तरीका बदल चुका है. बीजेपी और जेडीयू ने मौके की नजाकत को देखते हुए न सिर्फ डिजिटल मंच तैयार किया है बल्कि उसके जरिए सीएम नीतीश कुमार और पीएम मोदी सीधे जनता से संवाद कर रहे हैं, जबकि तेजस्वी यादव इस मामले में काफी पीछे हैं. हालांकि, सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता पहले से और तेज हुई है.
7 सितंबर को सीएम नीतीश ने वर्चुअली निश्चय संवाद रैली की. इसे देशभर के करीब 40 लाख लोगों ने देखा. पार्टी के मुताबिक बिहार के करीब 12.82 लाख लोगों ने उस दिन नीतीश को द्खा और सुना. नीतीश से भी तीन महीने पहले बीजेपी की तरफ से अमित शाह ने बिहार की वर्चुअल रैली को संबोधित करने की शुरुआत की थी. बीजेपी ने भी दावा किया था कि 40 लाख से ज्यादा लोगों ने उस रैली को देखा-सुना. शाह को राज्य की सभी 243 विधान सभा सीटों के 72,000 बूथों पर एलईडी के जरिए देखा-सुना गया. राजद इस मोर्चे पर एनडीए से काफी पीछे है. वैसे राजद नेता दावा करते हैं कि उनका जोर वर्चुअल नहीं एक्चुअल रैलियों पर है.
लालू का जेल के अंदर होना
1980 के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव होगा जब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव शारीरिक तौर पर इसमें शामिल नहीं होंगे. यानी लोकसभा चुनाव 2019 की तरह ये विधान सभा चुनाव भी बगैर लालू के लड़ा जाएगा. ऐसे में राजद को खासकर ग्रामीण मतदाताओं को लुभाने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. 2015 में लालू यादवे ने कुल 252 चुनावी सभाओं को संबोधित किया था. उनका गंवई अंदाज और ग्रामीण वोटरों को लुभाने का अंदाज निराला होता है. चुनाव में किस समय पर कौन सा कार्ड फेंकना है, इस सियासी खेल के वो माहिर रहे हैं, लेकिन उनकी गैर हाजिरी में अब सारा बोझ तेजस्वी पर आ चुका है.
पारिवारिक कलह
राजद मुखिया लालू यादव के परिवार में कलह नई बात नहीं है. लोकसभा चुनाव में तेजस्वी के बड़े भाई तेज प्रताप यादव ने अपने मनमुताबिक कई उम्मीदवार उतारे थे जिससे राजद कैंडिडेट की हार हुई थी. सूत्र बता रहे हैं कि तेजप्रताप विधानसभा चुनावों में भी अपने समर्थकों को टिकट दिलाने की जुगत में लगे हैं. अगर पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो 2019 के लोकसभा चुनाव जैसा हाल भी हो सकता है. तेजप्रताप के तलाक और ससुर चंद्रिका राय के जेडीयू में जाने का भी खामियाजा राजद को छपरा में भुगतना पड़ सकता है.
महागठबंधन नेताओं की मजबूरी
महागठबंधन के तहत ही राजद चुनाव लड़ेगा. इस गठबंधन में राजद के अलावा कांग्रेस, उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा, मुकेश साहनी की वीआईपी और लेफ्ट दलों में सीपीआई, सीपीएम और सीपीआई (एमएल) शामिल है. जीतनराम मांझी पहले ही महागठबंधन को टाटा-बाय-बाय बोल चुके हैं. गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है. तेजस्वी के लिए सबसे बड़ी समस्या सहयोगी दलों के साथ सीटों का बंटवारा और उपयुक्त कैंडिडेट की तलाश है. वैसे माना जा रहा है कि तेजस्वी सवर्णों को भी लुभाने के लिए कई सीटों पर उस समुदाय के लोगों को टिकट दे सकते हैं.
असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री
महागठबंधन खासकर राजद माय (MY) समीकरण यानी मुस्लिम-यादव वोटबैंक के सहारे राज्य में राजनीति करता रहा है. नीतीश भी मुस्लिम वोटों में सेंधमारी करते रहे हैं लेकिन केंद्र की बीजेपी सरकार द्वारा हालिया कुछ फैसलों से माना जा रहा है कि मुसलमान जेडीयू से मुंह मोड़ सकते हैं. ऐसे में उनका विकल्प सिर्फ राजद बचता है. लेकिन हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने बिहार में चुनाव लड़ने का फैसला किया है.
उनकी पार्टी AIMIM 22 जिलों की 32 सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है। इनमें से अधिकांश मुस्लिम और यादव बहुल इलाके हैं. माय समीकरण में ही सेंधमारी करते हुए ओवौसी ने पिछले दिनों पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र यादव को पार्टी में शामिल करवाया है.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
