August 04, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 2015 से नवंबर 2019 के बीच कुल 58 देशों की यात्रा की और इन यात्राओं पर कुल 517.82 करोड़ रुपये खर्च हुए. यह जानकारी मंगलवार को संसद में दी गई. राज्यसभा को एक सवाल के लिखित जवाब में विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री के इन दौरों से द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण के बारे में अन्य देशों की समझ बढ़ी तथा संबंधों में मजबूती आई है.
    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की फौजिया खान ने सरकार से जानना चाहा था कि वर्ष 2015 से आज की तारीख तक प्रधानमंत्री ने कितने देशों का दौरा किया और इन दौरों पर कुल कितना व्यय हुआ. इसके जवाब में मुरलीधरन ने बताया, ‘‘2015 से प्रधानमंत्री ने 58 देशों की यात्रा की. इन यात्राओं पर कुल 517.82 करोड़ रुपए व्यय हुआ.''
    विदेश राज्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के दौरान उनके द्वारा किए गए पारस्परिक विचार-विमर्शों से द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण के बारे में अन्य देशों की समझ बढ़ी है और इन वार्ताओं से व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, सामुद्रिक सहयोग, अंतरिक्ष, रक्षा सहयोग और लोगों के बीच परस्पर संपर्कों सहित अनेक क्षेत्रों में उनके साथ संबंध मजबूत हुए हैं. उन्होंने कहा, ‘‘संबंधों में आई इस मजबूती ने हमारे आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और हमारे नागरिकों की भलाई के लिए भारत के राष्ट्रीय विकास एजेंडे में योगदान दिया है.''
    मुरलीधरन ने कहा कि भारत अब जलवायु परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय अपराध और आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और परमाणु अप्रसार सहित बहुपक्षीय स्तर पर वैश्विक एजेंडे को मूर्तरूप देने के लिए बढ़-चढ़कर योगदान दे रहा है और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा समर्थ अवसंरचना के लिए गठबंधन जैसे वैश्विक मुद्दों के लिए दुनिया को अपनी अनूठी पहलों की पेशकश कर रहा है.

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / दिल्ली दंगों में भड़काऊ भाषण देने और दंगों में भूमिका को लेकर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बीजेपी नेता कपिल मिश्रा के 27 जुलाई को बयान दर्ज किए थे. यह बयान सवाल और जबाब के रूप में दर्ज किए गए. पुलिस ने कपिल मिश्रा के बयान को दंगों की चार्जशीट का हिस्सा बनाया है. दिल्ली पुलिस के सवाल और कपिल मिश्रा के जबाब ये हैं-
    सवाल-उत्तर पूर्वी दिल्ली का दौरा क्यों किया?
    जवाब-यमुना विहार में मेरा घर है. मेरा घर नार्थ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट में ही आता है. दंगाइयों ने दंगे के दौरान जो पेट्रोल पंप जलाए वे मेरे घर के पास ही थे.
    सवाल- तुमने उत्तर पूर्वी दिल्ली का किस दिन और किस तारीख में दौर किया?
    जवाब-क्योंकि मेरा घर उसी इलाके में है, मेरा जाने-आने का कोई वक़्त तय नहीं है.

    सवाल-क्या तुम खुद मौजपुर गए थे?
    जवाब-जी हां, मैं अपनी पर्सनल कैपेसिटी में 3 से 3.30 बजे मौजपुर पहुंच गया था.

    सवाल-तुम्हारे जाने का उद्देश्य क्या था?
    जवाब-क्योंकि कुछ लोग फेसबुक पर 2-3 दिन से मुहिम चला रहे थे कि रोड ब्लॉक होने की वजह से उन्हें बहुत ज़्यादा समस्याओं का सामने करना पड़ रहा है, लोग आफिस नहीं जा पा रहे हैं, बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, ज़रूरी सुविधाएं लोगों तक नही पहुंच पा रही हैं, इसलिए मैं उन लोगों की समस्याओं को पुलिस तक पहुंचाने और पुलिस की मदद से बंद रोड को खुलवाने की पेशकश करने वहां गया था. जाने से पहले मैंने डीसीपी सूर्या साहब से फ़ोन पर बात की थी.

    सवाल-क्या तुमने उत्तर पूर्वी दिल्ली में 23 फरवरी की कोई भाषण दिया था, उस भाषण में क्या था?
    जवाब-नहीं मैंने कोई स्पीच नहीं दी. मैंने केवल पुलिस को तीन दिनों में रोड खुलवाने के लिए कहा था और ये भी कहा था कि अगर तीन दिन में रोड नहीं खुली तो हम रोड खुलवाने के लिए धरने पर बैठेंगे.

    सवाल-इस स्पीच का उद्देश्य क्या था?
    जवाब-मैंने पहले ही कहा, मैंने कोई स्पीच नहीं दी. मेरा मकसद केवल रोड खुलवाना था जिससे लोगों की समस्याओं का निपटारा हो सके.

    सवाल-क्या तुम्हारे पास स्पीच की कोई कॉपी है?
    जवाब-मैंने पहले ही कह दिया, मैंने कोई स्पीच नहीं दी.

    सवाल-क्या तुम किसी दूसरे धरना स्थल पर गए थे?
    जवाब-नहीं मैं किसी धरना स्थल पर नहीं गया.

    सवाल-क्या तुम वहां अकेले गए थे?
    जवाब-हां, मैं अकेले ही मौजपुर चौक गया था. वहां पर मेरे पहुंचने से पहले ही भीड़ जमा थी. लोकल होने के नाते मैं वहां के कई दुकानदारों और लोगों को जानता था.

    सवाल-तुम्हारी उस इलाके के बारे में निजी राय क्या है?
    जवाब-मैंने वहां जाने से पहले डीसीपी सूर्या साहब से बात की थी. लोगों ने बताया वहां पर करीब दो बजकर 45 मिनट पर पथराव शुरू हो चुका था. मेरे सामने भी लोग दौड़ दौड़कर आ रहे थे और कह रहे थे कि भीड़ पथराव कर रही है. जाफराबाद की तरफ व बेरिकेड के पास काफी भीड़ थी जिसको पुलिस बड़ी मुश्किल से रोक पा रही थी. अगर पुलिस न होती तो वे लोग आगे आ जाते. मैं वहां करीब साढ़े चार बजे तक रुका. मुस्लिम भीड़ पथराव कर रही थी और भीड़ को पुलिस ने हमसे 300 मीटर पहले रोका हुआ था. मुझे लोगों ने बताया कि लोग रोड खुलवाने के लिए करीब दो बजे से इकट्ठे होना शुरू हो गए थे. मेरे सामने उस वक़्त 50-60 लोगों की भीड़ थी. दूसरी तरफ मुस्लिमों की 500 से 700 की भीड़ थी. मैंने स्थानीय लोगों से 3.30 से 4.3० बजे तके बात की और रोड खुलवाने के लिए पुलिस से बार-बार आग्रह किया. लोगों की परेशानी से अवगत कराया. ये रोड पिछले 2-3 महीने से मुस्लिम लोगों द्वारा ब्लॉक किया हुआ था. ये लोग कभी सर्विस रोड तो कभी मेन रोड बंद कर देते थे जिस वजह से लोगों को अपने काम धंधे पर जाने में, बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी हो रही थी. लोगों का जीना दूभर हो गया था. मुस्लिम लोगों ने डर का और आतंक का माहौल बना रखा था. मरीजों को हॉस्पिटल ले जाने व लोगों को हॉस्पिटल ले जाने एम्बुलेंस की दिक्कत हो रहा थी. इसी वजह से स्थानीय लोगों के फ़ोन कॉल्स आने लगे. लोगों की फेसबुक पोस्ट पढ़कर मैं पुलिस से रोड खुलवाने का आग्रह करने वहां गया था. बातचीत में मैंने डीसीपी साहब से कहा कि अब हम जा रहे हैं, आप रोड खुलवा दें नहीं तो हम रोड खुलवाने के लिए धरने पर बैठ जाएंगे. उसके बाद चार बजकर 35 मिनट पर मैं वहां से निकल गया.

    सवाल- तुमने वहां कितना टाइम व्यतीत किया?
    जवाब-मैं वहां करीब एक घंटा, 3.30 से 4.30 तक रुका था.

    सवाल-क्या वहां तुम्हारा कोई इनविटेशन था?
    जवाब-मैं फेसबुक की पोस्ट पढ़कर गया था.

     

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / दुनिया के अलग-अलग देशों में रह रहे 373 भारतीय नागरिकों की कोविड-19 से मौत हुई है. लोकसभा में सवालों का जवाब देते हुए विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि 10 सितंबर 2020 तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक विदेशों में रह रहे 11,616 भारतीय कोरोना से संक्रमित हुए.
    अलग-अलग देशों में भारत के मिशनों ने इनकी मदद के लिए करीब 22.5 करोड़ रुपये खर्च किए. संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक सउदी अरब में सबसे ज्यादा 284 भारतीयों की मौत कोविड से हुई. हालांकि यहां संक्रमित कितने थे इसका आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.
    सबसे ज्यादा संक्रमित सिंगापुर में 4618 थे. हालांकि यहां मौत सिर्फ एक भारतीय नागरिक की हुई. बहरीन में 2639 भारतीय कोविड से संक्रमित हुए और 30 की मौत हुई. वहीं कुवैत में 1769 भारतीय कोविड संक्रमित हुए लेकिन जान किसी की नहीं गई. अमेरिका में 24 भारतीय संक्रमित हुए और 13 की मौत हो गई.

    नई दिल्ली / शौर्यपथ/ सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आमतौर पर उत्तर प्रदेश और हरियाणा में ऑनर किलिंग होती हैं लेकिन तमिलनाडु में यह कैसे हो सकता है ? चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने आश्चर्य जताते हुए कहा, 'ऑनर किलिंग यूपी और हरियाणा में होती है. तमिलनाडु में ऑनर किलिंग कैसे हो सकती है?' दरअसल, चीफ जस्टिस की बेंच एक ऑनर किलिंग मामले में ट्रायल पूरा करने की समयसीमा बढ़ाने की राज्य की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, उसी दौरान CJI ने यह टिप्‍पणी की.
    तमिलनाडु में ओबीसी समुदाय के नेता युवराज ऑनर किलिंग की हत्या का मुख्य आरोपी है. उस पर दलित इंजीनियरिंग के छात्र गोकुलराज का अपहरण और हत्या करने का आरोप है, जो अपनी सहपाठी और एक गैर-दलित लड़की से प्यार करता था. तमिलनाडु के तिरुचेनगोडे में उसकी हत्या कर दी थी. उसे मद्रास हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत दे दी थी. बाद में शीर्ष अदालत ने उसकी जमानत रद्द कर दी थी और मुकदमे को पूरा करने के लिए 18 महीने की समय सीमा निर्धारित की थी. चूंकि ट्रायल पूरा नहीं हुआ था, अधिकारियों ने समय सीमा बढ़ाने के लिए शीर्ष अदालत की अनुमति मांगी है.
    मंगलवार को सुनवाई के दौरान युवराज के वकील ने जमानत मांगी तो चीफ जस्टिस ने कहा-आपके मुवक्किल को जेल में रहना होगा. आप लोगों की जिंदगी छीन लेंगे.क्या किसी ने कोई अपराध किया है? किसी ने शादी की और आपने उसे मार दिया. वे (दंपति) लंबे समय तक जीवित रहना चाहते थे और वे आत्महत्या नहीं करना चाहते थे. वकील ने कहा कि युवराज 2015 से जेल में है और उसकी लंबित जमानत याचिका पर अदालत द्वारा विचार किया जा सकता है क्योंकि ट्रायल में लंबा समय लग रहा है. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि उसके जैसे व्यक्तियों को जेल में होना चाहिए.आपने धरती से किसी को हटा दिया है.
    युवराज के वकील ने कहा कि यह एक दुर्घटना थी और उसके मुवक्किल ने लड़के की हत्या नहीं की तो मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम समझते हैं कि आप अपने मुवक्किल को निराश नहीं कर सकते.हम सभी जानते हैं कि क्या होता है.शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु में निचली अदालत द्वारा मुकदमे को पूरा करने के लिए 6 महीने की और अवधि बढ़ा दी और जमानत याचिका खारिज कर दी.गोकुलराज का शव इरोड के पास रेलवे पटरियों पर पाया गया था. अक्टूबर 2015 में युवराज ने सरेंडर कर दिया. मई 2016 में मद्रास हाई कोर्टने जमानत दे दी थी, जिसे बाद में शीर्ष अदालत ने रद्द कर दिया था.

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / बेंगलुरु बेंगलुरु में 2008 में हुए सीरियल ब्लास्ट का भगोड़ा आरोपी 12 साल बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा. आरोपी धमाके के बाद विदेश में जाकर छुप गया था. लेकिन ख़ुफ़िया एजेंसियों ने पिछले साल उसे ढूंढ निकाला और जैसे ही वो देश लौटा सोमवार को उसे तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया.
    शोएब पिछले 12 सालों से पुलिस को चकमा देता रहा लेकिन आखिरकार सोमवार को तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया जैसे ही वो दुबई से वापस लौटा. संदीप पाटिल संयुक्त आयुक्त क्राइम बेंगलुरु पुलिस ने बताया, " एक आरोपी जिसने सीरियल ब्लास्ट में अहम भूमिका निभाई थी वह 2008 में धमाके के बाद विदेश भाग गया था. पिछले साल सेंट्रल एजेंसी से हमें पता चला था कि वह कहां है.''
    पुलिस ने शोएब को रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी है. शोएब पर आरोप है कि उसने 2008 में बेंगलुरु में हुए सीरियल ब्लास्ट की प्लानिंग के साथ साथ ना सिर्फ आतंकियों को असलहा, बारूद और रहने का ठिकाना मुहैय्या कराया बल्कि उनके भाग निकलने के लिए मदद की. कुल 32 में से 22 आरोपी पकड़े गए जो शोएब को मिलाकर 23 हो गए हैं.
    बता दें कि 25 जुलाई 2008 में दोपहर डेढ़ बजे पहला धमाका हुआ था और इसके बाद शहर के अलग अलग हिस्सों में 6 और यानी कुल 7 धमाके हुए थे और बाद में एक ज़िंदा बम कोरमंगला में निष्क्रिय किया गया था. रिमोट डिवाइस से किए गए इन लो इंटेनसिटी धमाकों में 20 लोग घायल हुए थे और एक की मौत हुई थी.
    मामला 12 साल पुराना है शोएब की फ़ाइल पुलिस के पास तो है लेकिन समस्या ये है कि जांच से जुड़े ज़्यादातर अधिकारी रिटायर हो चुके हैं. ऐसे में पुरानी कड़ियों को नए सिरे से जोड़ने की चुनौती पुलिस के सामने है.

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / गुवाहाटी केंद्र सरकार की ओर से जारी कोविड-19 गाइडलाइंस के तहत देशभर में स्कूल-कॉलेजों को आंशिंक रूप से खोलने की अनुमति दे दी गई है, जिसके बाद सोमवार से असम में कई स्कूल-कॉलेज खुल गए हैं. कोविड-19 महामारी के चलते देश में पिछले छह महीनों से सभी शिक्षण संस्थान बंद थे. अब सोमवार से इन्हें आंशिक रूप से खोलने की इजाज़त मिल गई है. हालांकि, कई राज्यों ने अभी भी संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का फैसला किया है.
    बता दें कि स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी किए गए SOP (Standard of Procedure) के तहत कहा गया है कि 21 सितंबर से देशभर के स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक के बच्चों और 50 फीसदी स्टाफ के लिए स्कूल खोले जा सकते हैं. इसमें कहा गया है कि कक्षा 9 से कक्षा 12वीं तक के बच्चों को स्कूल आने की अनुमति होगी. हालांकि, कंटेनमेंट ज़ोन के तहत आने वाले स्कूल बंद ही रहेंगे. स्कूल आने वाले बच्चों को अपने टीचरों का निर्देशन और अभिभावकों की लिखित इजाजत लेनी होगी.
    असम की राजधानी गुवाहाटी में स्कूल और कॉलेज खुलने के बाद बहुत से छात्र-छात्राएं स्कूल लौटे. यहां के एसबी देवरा कॉलेज कैंपस में छात्र मास्क पहने और सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का पालन करते दिखे. यहां पर परवीना रॉय नाम की एक छात्रा ने बताया कि यहां पर छात्रों को सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों और दूसरे प्रोटोकॉल्स का पालन करने की शर्त पर कॉलेज आने की अनुमति है.
    परवीना ने कहा, 'कॉलेज कैंपस में फिर आकर अच्छा लग रहा है. हमने ऑनलाइन क्लासेज़ से अपनी पढ़ाई जारी रखी थी लेकिन मुझे पारंपरिक तरीके से क्लासरूम में पढ़ाई करना बहुत याद आया. मैं बहुत खुश हूं कि मैं अपने दोस्तों से मिल सकती हूं. मुझे लगता है कि हम जब तक सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का पालन करेंगे, मास्क पहनेंगे और हाथ सैनिटाइज़ करते रहेंगे, तबतक हम संक्रमण से बचे रहेंगे और कॉलेज आते रह पाएंगे.'
    बता दें कि असम में कोरोनावायरस के मामलों में लगातार तेजी आ रही है. यहां पर पिछले 24 घंटों में संक्रमण के 829 नए केस सामने आए हैं. फिलहाल राज्य में कुल एक्टिव मामलों की संख्या 29,609 है. राज्य में अभी तक वायरस से कुल 578 लोगों की मौत हो चुकी है और 1,29,133 लोग इससे ठीक हो चुके हैं.

    दुर्ग / शौर्यपथ /कृषि विधेयक को किसानों के लिए विनाशकारी बताते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री राजेंद्र साहू ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला है। राजेंद्र ने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार अगर सचमुच किसानों की हितैषी हैं तो पूरे देश में धान और गेहूं का समर्थन मूल्य 25 सौ रुपए घोषित करे। राजेंद्र ने कहा कि गेहूं का समर्थन मूल्य मात्र 50 रुपए बढ़ाने वाले भाजपा नेता किस मुंह से कांग्रेस पर स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं।
    राजेंद्र ने सवाल किया कि 6 साल से केंद्र में भाजपा सत्तारूढ़ है। मोदी सरकार ने 6 साल तक स्वामीनाथन रिपोर्ट क्यों दबाए रखा? सच ये है कि कांग्रेस ने आयोग की रिपोर्ट को कभी अनदेखा नहीं किया, बल्कि किसानों के हित में फैसले लिए हैं। छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार ने आयोग और किसान हित को ध्यान में रखकर 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा, जिसका मोदी सरकार ने खुला विरोध किया।
    राजेंद्र ने कहा कि अगर मोदी सरकार में हिम्मत है तो भूपेश सरकार की तरह पूरे देश में धान और गेहूं का समर्थन मूल्य 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल घोषित करे। किसानों के हितैषी बनने का दावा कर रही मोदी सरकार ने रबी की उपज के समर्थन मूल्य में मात्र 3 से 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है जो किसानों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा के बराबर है। किसान हित में कोई भी फैसला न करने वाले भाजपा नेताओं का स्वामीनाथन आयोग की दुहाई देना हास्यास्पद है। राजेंद्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता देश को बताएं कि कृषि विधेयक से आखिर किसानों को क्या फायदा होगा? वास्तविकता ये है कि देश के किसान समझ चुके हैं कि कृषि विधेयक कार्पोरेट घराने को फायदा पहुंचाने के लिए लाया गया है। भाजपा सरकार इस विधेयक के माध्यम से किसानों के साथ छल कर रही है।
    राजेंद्र ने कहा कि कोरोना संकट काल में अचानक लॉकडाउन से लाखों असंगठित मजदूरों, छोटे उद्योगों, छोटे व्यवसाइयों को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। कई लोगों की अकाल मौत हो गई। लोगों के सामने जबर्दस्त आर्थिक संकट है। लोगों को राहत देने केंद्र सरकार ने 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा की, लेकिन देश की जनता को पैकेज का लाभ नहीं मिला है। 20 लाख करोड़ का पैकेज शायद भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।
    राजेंद्र ने कहा कि मोदी सरकार हर मामले में जुमला सरकार साबित हुई है। 2014 के चुनाव में भाजपा ने 2 करोड़ लोगों को हर साल रोजगार देने, महंगाई कम करने, किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था। बीते 6 साल में बेरोजगारी, महंगाई लगातार बढ़ी है। किसानों की आय दोगुनी करना तो दूर देश के अधिकांश राज्यों में किसानों की हालत बदतर है। सारे मुद्दे जुमले साबित हुए।
    राजेंद्र ने कहा कि नोटबंदी के समय भाजपा नेताओं ने नोटबंदी के फायदे गिनाए थे, लेकिन नोटबंदी के बाद बेरोजगारी बढ़ी और व्यवसाय चौपट हो गए। जीएसटी लागू करते समय एक देश एक टैक्स की बात कहते हुए महंगाई कम होने का दावा किया गया जो पूरी तरह फ्लाप साबित हुआ। अब कृषि विधेयक के फायदे बताए जा रहे हैं। यह विधेयक भी किसानों के लिए छलावा साबित होगा। यह सरकार पूरी तरह जुमलेबाज सरकार साबित हो चुकी है।

     

    सेहत / शौर्यपथ चिपचिपाती गर्मी और उमस भरे मौसम में एक गिलास ठंडी छाछ का मिल जाए तो पूरे शरीर में ठंडक पड़ जाती है। लेकिन कैसा हो, अगर आपको पता चले कि आपकी पसंदीदा छाछ न सिर्फ स्वाद में टेस्टी है बल्कि आपकी इम्युनिटी और आपके मोटापे का भी ध्यान रखेगी। जी हां ऐसी ही एक छाछ का नाम है- खीरे की छाछ। खीरा शरीर में डिटॉक्सिफिकेशन को बढ़ावा देने के साथ कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने, इम्युनिटी बढ़ाने, रक्तचाप को कंट्रोल करने के साथ मोटापा घटाने में भी मदद करता है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है ये कूल-कूल कुकुम्बर मसाला छाछ।

    कुकुम्बर मसाला छाछ बनाने के लिए सामग्री-
    -1 कप दही
    -आधा कप कद्दूकस किया हुआ खीरा
    -2 चम्मच पुदीने की पत्तियां
    -1 चम्मच मोटा पिसा हुआ भुना जीरा
    -आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
    -काला नमक, स्वादानुसार
    -ताजी कटी हरी धनिया, गार्निश करने के लिए
    कुकुम्बर मसाला छाछ बनाने का आसान तरीका-
    कुकुम्बर मसाला छाछ बनाने के लिए सबसे पहले एक ब्लेंडिंग जार में दही और कसा हुआ खीरा और पुदीने की पत्तियां डालकर एकसाथ अच्छे से ब्लेंड कर लें। इस मिश्रण को जूस जैसा बनाने के लिए अगर आवश्यकता हो तो पानी मिला सकते हैं। अब इस मिश्रण को एक ग्लास जग में डालकर इसमें जीरा , लाल मिर्च पाउडर और काला नमक डालकर एक साथ मिला दें। अब इस पेय को धनिया पत्ती से गार्निश करके सर्व करें।

    खाना खाजाना / शौर्यपथ / कोकोनट राइस एक साउथ इंडियन लंच या डिनर में बनाई जाने वाली रेसिपी है। इस रेसिपी को आमतौर पर नारियल के तेल में बनाया जाता है। कोकोनट राइस खास पोंगल और ओणम के अवसर बनाए जाते हैं। इस रेसिपी की खासियत यह है कि ये खाने में टेस्टी होने के साथ फैट बर्न के लिए भी अच्छी मानी जाती है। जिन लोगों को कम समय में ज्यादा वजन घटाने की इच्छा है, उनके लिए यह केटो डाइट सबसे अच्छा ऑप्शन हो सकती है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं दक्षिण भारतीय स्वाद के पिटारों में से निकाली हुई रेसिपी- कोकोनट फ्राइड राइस कैसे बनाए जाते हैं।

    कोकोनट राइस रेसिपी बनाने के लिए सामग्री-
    -कद्दूकस की हुई गोभी- 4 कप
    -कद्दूकस की हुई नारियल- 2 कप
    -नारियल का तेल- 2 बड़ा चम्मच
    -करी पत्ते- 6-8
    -सरसों और जीरा- 1-1 चम्मच
    -उड़द और चना दाल- 1 बड़ा चम्मच
    -मूंगफली- 2 बड़े चम्मच
    -साबुत लाल मिर्च- 1
    -हरी मिर्च- 2
    -नमक- स्वादानुसार
    -नीबू का रस- स्वादानुसार

    कोकोनट राइस रेसिपी बनाने का आसान तरीका-
    कोकोनट राइस रेसिपी बनाने के लिए सबसे पहले कद्दूकस की हुई गोभी को तब तक सुखा लें जब तक उसकी नमी पूरी तरह खत्म न हो जाए। अब मूंगफली को भूनकर अलग रख लें। अब एक पैन में तेल गर्म करके उसमें लाल मिर्च, सरसों, जीरा , चना और उड़द दाल डालकर हल्का भूरा- होने तक भूनें।

    अब पैन में करी पत्ता,हरी मिर्च डालकर आधा मिनट और भूनें। इसके बाद मूंगफली, भुनी हुई गोभी, नमक, नींबू का रस डालकर सभी चीजें एक साथ भून लें। आखिर में चावल में कसा हुआ नारियल डालकर सभी चीजों को एक साथ मिलाकर चला लें। आपके कोकोनट राइस बनकर तैयार हैं।

     

    धर्म संसार /शौर्यपथ /त्रेता युग में हैहय वंश में कृतवीर्य नाम के राजा महिष्मतिपुरी में राज्य करते थे। इनकी एक हजार पत्नियां थीं किन्तु सन्तान कोई नहीं थी, जो राज्य संभाल सके। देवताओं, पितरों व साधुओं के निर्देशानुसार विभिन्न व्रतों के अनुष्ठान करने से भी उन्हें पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई। तब राजा ने तपस्या करने का निश्चय किया। वे अपने मंत्री को सम्पूर्ण राज्य-भार देकर, राजसी वेष त्याग कर तपस्या करने चले गए। महाराज के साथ उनकी बड़ी रानी, जो की इक्ष्वाकुवंश में उत्पन्न महाराज हरिश्चन्द्र की कन्या पद्मिनी थी ने भी उनका अनुसरण किया। उन दोनों ने मन्दराचल पर्वत पर जाकर दस हज़ार वर्ष तक घनघोर तपस्या की।
    तपस्या करने से महाराज का शरीर एकदम कमज़ोर हो गया। इधर महारानी पद्मिनी ने महासाध्वी अनुसूयाजी से विनीत होकर पूछा कि हे साध्वी! मेरे पति ने दस हज़ार वर्ष तक तपस्या की परन्तु फिर भी सर्व-दु:ख विनाशकारी भगवान केशवदेव अब तक प्रसन्न नहीं हुए। आप कृपा करके मुझे किसी ऐसे व्रत का उपदेश दीजिए कि जिसके पालन करने से भगवान श्रीहरि प्रसन्न हो जाएं एवं हमें राजचक्रवर्ती की तरह कीर्तिमान श्रेष्ठ पुत्र की प्राप्ति हो सके। पतिपरायणा साध्वी अनुसूया, रानी पद्मिनी की प्रार्थना सुनकर बड़ी प्रसन्न हुईं एवं रानी से बोलीं – 32 महीने बाद एक बार अधिक मास आता है। इस महीने में पद्मिनी एवं परमा नाम की दो एकादशियां आती हैं, इन एकादशियों के व्रत का पालन करने पर पुत्रदाता भगवान बहुत शीघ्र प्रसन्न होते हैं। अनुसूया देवी जी के कथनानुसार रानी पद्मिनी ने विधिपूर्वक एकादशी व्रत का पालन किया। तब भगवान केशवदेव गरुड़ पर स्वार होकर रानी के समीप आए और उन्होंने रानी से वरदान मांगने के लिए कहा। रानी ने बड़ी श्रद्धा से भगवान की स्तुति-वन्दना की तथा पतिदेव की अभिलाषा पूर्ण करने के लिए निवेदन किया। भगवान ने कहा- हे भद्रे! मैं तुम पर अति प्रसन्न हूं।
    अधिक मास को मेरे नाम पर ही पुरुषोत्त्म मास कहते हैं। इस पवित्र महीने के समान अन्य कोई महीना मेरा प्रिय नहीं है। इस महीने की एकादशी भी मुझे अत्यन्त प्रिय है। आप लोगों ने इस व्रत का सही विधि-विधान से पालन किया है। अत: आपके पतिदेव को उनका अभिलषित वरदान अवश्य दूंगा। राजा को इच्छानुसार वरदान देकर भगवान अन्तर्हित हो गए। कालान्तर में उसी रानी के गर्भ से महाराज कृतवीर्य का पुत्र कार्तवीर्यार्जुन का जन्म हुआ। तीनों लोकों में कार्तवीर्यार्जुन के समान कोई बलवान नहीं था। इसी कार्तवीर्यार्जुन ने रावण को युद्ध में पराजित कर बन्दी बना लिया था।
    कमला एकादशी (पद्मिनी एकादशी) व्रत वाले दिन क्या करे
    वरुण मंत्र को जपकर पवित्र तीर्थों के अभाव में उनका स्मरण करते हुए किसी तालाब में स्नान करना चाहिए ।
    अधिक मास की शुक्लपक्ष की 'पद्मिनी एकादशीÓ का व्रत निर्जल करना चाहिए ।
    यदि मनुष्य में निर्जल रहने की शक्ति न हो तो उसे जल पान या अल्पाहार से व्रत करना चाहिए ।
    इस दिन ब्रम्हचर्य का पालन करते हुए भूमि पर सोना चाहिए।
    स्नान करने के पश्चात् स्वच्छ और सुन्दर वस्त्र धारण करके संध्या, तर्पण करके मंदिर में जाकर भगवान की धूप, दीप, नैवेघ, पुष्प, केसर आदि से पूजा करनी चाहिए ।
    इस व्रत को करने के लिए दशमी के दिन कांसे के बर्तन में भोजन करना चाहिए और नमक नहीं खाना चाहिए।
    प्रति पहर मनुष्य को भगवान या महादेवजी की पूजा करनी चाहिए ।
    इसके पश्चात सफेद वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु का पूजन-अर्चन करें और कथा का पाठ करें।भक्तजनों के साथ भगवान के सामने पुराण की कथा सुने ।
    रात्रि में जागरण करके नाच और गान करके भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए ।
    पहले पहर में भगवान को नारियल, दूसरे में बिल्वफल, तीसरे में सीताफल और चौथे में सुपारी, नारंगी अर्पण करना चाहिए ।
    इस तरह से सूर्योदय तक जागरण करना चाहिए और स्नान करके ब्राह्मणों को भोजन करना चाहिए ।
    स्नान में तिल, मिट्टी, कुश व आंवले के चुर्ण भी शामिल करें।

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