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दुर्ग । शौर्यपथ । दुर्ग निगम खेतर में 20 से 30 सितंबर तक लॉक डाउन है ऐसे में जहाँ प्रशासन द्वारा लॉक डाउन के नियमों को पालन करने की अपील की जा रही वही कुछ संचालकों द्वारा अभी भी नियम विरुद्ध व्यापार किया जा रहा है ऐसे स्थिति में दुर्ग निगम बाजार विभाग भी सक्रिय हो गया । आज दुर्ग निगम बाजार विभाग द्वारा लॉक डाउन के नियमो का कड़ाई से पालन करवाने निगम आयुक्त के निर्देश पर निरीक्षण के दौरान कई दुकानदारों द्वारा व्यापार संचालन किया जा रहा था जिसे बन्द करवाया गया और जुर्माना वसूला गया । इस कार्यवाही में गायत्री मंदिर के समीप संचालित मुकेश मोबाइल शॉप को निगम प्रशासन के बाजार विभाग द्वारा सीलबंद की कार्यवाही की साथ ही सांझा चूल्हा , शिमला टायर्स , दीपक ट्रेडर्स , शांति किराना स्टोर्स , एसके जैन , भिलाई बेकरी , सुखदेव पंजवानी सहित अन्य लोगो से लॉक डाउन का उल्लंघन करने पर जुर्माने की कार्यवाही की और जुर्माना राशि 10500 रुपये वसूला गया । बाजार विभाग की इस कार्यवाही में निगम के अधिकारी थानसिंग यादव एवम उनकी टीम शशिकांत यादव , संजय यादव , भूषण साहू , ईश्वर वर्मा , भारती आदि मौजूद थे । निगम आयुक्त बर्मन ने शहर की जनता और व्यापारियों से अपील की कि लॉक डाउन के नियमो का पालन करे बाजार विभाग की कार्यवाही व जुर्माने से बचे लॉक डाउन शहर को सुरक्षित रखने की दिशा में एक प्रयास है जिसमे सफलता आम जनों और व्यापारियों के सहयोग से ही मिलेगी साथ ही आयुक्त ने बताया कि अगले 30 सितंबर तक यह कार्यवाही निरंतर चलेगी किसी को भी लॉक डाउन के उल्लंघन करने पर बख्शा नही जाएगा और शासन के नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी ।
दुर्ग । शौर्यपथ । दुर्ग शहर मध्य ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अलताफ अहमद ने कृषि विधेयक को लेकर केंद्र सरकार के दावे को झूठा करार दिया है। अलताफ ने कहा कि यह विधेयक पूरी तरह किसान विरोधी है। केंद्र सरकार की नीतियों से देश के करोड़ों किसानों का विश्वास उठ चुका है। कृषि प्रधान देश में पूरी खेती की व्यवस्था को मोदी सरकार ने कार्पोरेट जगत के हवाले कर दिया है। केंद्र सरकार अगर वास्तव में किसानों का हित चाहती है तो पूरे देश में भूपेश सरकार की नीतियों को लागू करना चाहिए। अलताफ ने कहा कि मोदी सरकार के इस बिल से किसान तबाह हो जाएंगे। विधेयक लागू होने के बाद देश के किसान फसल की पैदावार के लिए जी-तोड़ मेहनत करेंगे और इसका मुनाफा बड़े औद्योगिक-व्यवसायिक घराने कमाएंगे। अलताफ ने सवाल किया कि अगर यह बिल किसानों के फायदे के लिए है तो हरियाणा, पंजाब, मप्र सहित अन्य राज्यों में किसान बिल के विरोध में सड़कों पर आंदोलन किसलिए कर रहे हैं। अलताफ ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों से कर्जमाफी और 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी का वादा किया था। यह वादा सरकार बनाने के दो दिनों के भीतर लागू कर दिया गया। दूसरी ओर मोदी सरकार ने 6 साल पहले लोकसभा चुनाव में किसानों की आय दोगुना करने का वादा किया था। यह वादा आज तक पूरा नहीं किया गया। केंद्र सरकार के किसान विरोधी फैसलों के कारण बड़े राज्यों में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। अलताफ ने कहा कि मोदी सरकार अगर किसानों का भला चाहती है तो धान, गेहूं, मक्का,जौ सहित सभी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने का फैसला करे। केंद्र सरकार को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की किसान नीतियों को पूरे देश में लागू करना चाहिए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के फैसलों से छत्तीसगढ़ के किसान बेहद खुश हैं। केंद्र सरकार को भी भूपेश सरकार की नीतियों को फालो करना चाहिए। -0-0-0-0-
सेहत / शौर्यपथ / क्या आप टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे हैं? अगर हां तो मुमकिन है कि आपका अग्नाशय 25 फीसदी तक सिकुड़ गया हो। इससे न सिर्फ आपको ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में परेशानी होती है, बल्कि हाजमा भी बिगड़ जाता है। हालांकि, ब्रिटेन स्थित न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के हालिया अध्ययन की मानें तो डायबिटीज रोगी वजन घटाकर सिकुड़े अग्नाशय को दोबारा सामान्य आकार में ला सकते हैं। इसके लिए उनका न सिर्फ डाइटिंग और एक्सरसाइज करना, बल्कि नींद पर भी ध्यान देना बेहद जरूरी है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक अग्नाशय में सिकुड़न टाइप-2 डायबिटीज की बड़ी वजह है। शरीर में अत्यधिक चर्बी जमने के कारण टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के अग्नाशय के आकार में स्वस्थ लोगों के मुकाबले 25 फीसदी तक की कमी दर्ज की गई है। इससे उनमें इंसुलिन के उत्पादन में तो कमी आती ही है, साथ ही पाचन क्रिया को बढ़ावा देने वाले एनजाइम का स्त्राव भी घट जाता है।
खास बात यह है कि डायबिटीज रोगी अगर वजन में 10 से 15 किलो तक की कटौती करें तो उनका अग्नाशय सामान्य आकार में लौट जाता है। मोटापे पर काबू पाने के लिए उनका स्वस्थ खानपान और व्यायाम अपनाना ही काफी नहीं है। आठ घंटे की मीठी नींद लेना भी बेहद अहम है।
मुख्य शोधकर्ता प्रोफेसर रॉय टेलर कहते हैं, 2018 में हमारी टीम ने पाया था कि जो प्रतिभागी सूप और जूस से लैस डाइट लेकर दिनभर में 850 से ज्यादा कैलोरी का सेवन न करने का लक्ष्य तय करते हैं, उनके वजन में दो से तीन महीने में ही 10 से 15 किलो की कमी आती है। इससे वे धीरे-धीरे डायबिटीज को मात देने की दिशा में भी आगे बढ़ने लगते हैं।
ताजा अध्ययन में हमने देखा कि इन प्रतिभागियों के अग्नाशय में दो साल में 20 से 25 फीसदी तक की वृद्धि होती है। यानी वह सामान्य आकार में लौट आता है। इससे शरीर में इंसुलिन का उत्पादन बढ़ना और ब्लड शुगर नियंत्रित होना लाजिमी है। अध्ययन के नतीजे ‘द लांसेट डायबिटीज एंड एंडोक्राइन जर्नल’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।
हफ्ते में चार बार गुनगुने पानी से नहाएं-
रात में बिस्तर पर जाने से पहले गुनगुने पानी से नहाते हैं? अगर हां तो आपकी यह आदत टाइप-2 डायबिटीज और हृदयरोगों से बचाव में खासी मददगार साबित हो सकती है। जापान स्थित कोह्नोदाई यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 1300 प्रतिभागियों में गुनगुने पानी के स्नान का फायदा आंकने के बाद यह दावा किया है। उन्होंने पाया कि जो लोग हफ्ते में चार बार गुनगुने पानी से नहाते हैं, उनका न सिर्फ बीएमआई (वजन और कद का अनुपात), बल्कि ब्लड शुगर का स्तर और रक्तचाप भी नियंत्रित रहता है। स्ट्रेस हार्मोन के स्तर में कमी आना और फील गुड हार्मोन का स्त्राव बढ़ना इसकी मुख्य वजह है।
सेहत /शौर्यपथ / कोरोना से ठीक होने के तुरंत बाद अगर आप सामान्य दिनचर्या में लौटना चाहते हैं तो व्यायाम जैसे मेहनत वाले काम करने से पहले दिल की जांच करा लें। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक शोध में पाया कि बीमारी से ठीक होने पर भी मरीजों का हृदय क्षतिग्रस्त हो जाता है, ऐसे लोग अगर जिम जाकर व्यायाम करने लगेंगे तो उनकी जान भी जा सकती है।
अरिजोना राज्य की बैनर यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स मेडिसिन के निदेशक डॉ. स्टीवन एरिकसन के शोधदल ने यह पता लगाया है। उनका कहना है कि बीमारी से ठीक हुए लोगों को वर्कआउट करने या किसी खेल आयोजन में भाग लेने से पहले कार्डियक स्क्रीनिंग जरूर करा लेनी चाहिए। उनका कहना है कि मरीज याद रखें कि कोरोना वायरस महज श्वसन तंत्र से जुड़ा रोग नहीं है बल्कि यह शरीर के हर अहम हिस्से को लंबे वक्त तक क्षति पहुंचाता है। इसके कारण हृदय पर चकत्ते और सूजन आ सकती है।
निगेटिव होने के 14 दिन बाद ही ट्रेनिंग करें-
शोध दल की सलाह है कि कोई भी जिम करने वाला व्यक्ति या खिलाड़ी संक्रमित होने के बाद ठीक हो जाता है तो उसे निगेटिव रिपोर्ट आने के 14 दिन बाद ही अपनी ट्रेनिंग शुरू करनी चाहिए। साथ ही वह अपने हृदय की जांच कराए और शरीर में हो रहे बदलावों पर निगाह रखे। शोधकर्ता एरिकसन कहते हैं कि अगर किसी ऐसे खिलाड़ी को जल्द ही किसी खेल आयोजन में भाग लेना है तो वह पहले किसी हृदयरोग विशेषज्ञ से अपनी जांच करा ले।
इसलिए वायरस से खराब होते दूसरे अंग-
शोधकर्ता व अरिजोना कॉलेज ऑफ मेडिसिन के प्रो. क्रिस ग्लेमबोटस्की का कहना है कि शरीर में वायरस के घुसने पर वह कई दूसरे अंगों और ऊतकों में भी प्रवेश करता है, जिससे इंफ्लेमेशन प्रतिक्रिया होने लगती है। यानी उस अंग को काम करने के लिए अपनी क्षमता से अधिक शक्ति लगानी पड़ती है जिससे उस पर बुरा असर पड़ता है।
बिना लक्षण वालों को कम खतरा-
शोधदल ने पाया कि बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों में हृदय क्षति की संभावना कम है। वे मरीज इस बात को लेकर ज्यादा सतर्क रहें जिनके शरीर में कोरोना के लक्षण दिख रहे थे और उन्हें वायरस ने कम से कम तीन दिन तक चपेट में लिया। ऐसे लोगों विशेषकर जिम जाने वालों और खिलाड़ियों को अपनी ट्रेनिंग शुरू करने से पहले दिन की जांच करा लेनी चाहिए।
ये जांच कराएं-
वैज्ञानिकों ने ऐसे लोगों को इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम और खून की जांच कराने की सलाह दी है। पहली जांच के जरिए हृदय में इलेक्ट्रिकल सिग्नल मापते हैं। वहीं, रक्त जांच से ट्रॉपोनिन प्रोटीन की मात्रा पता की जाती है जो कि सामान्यत: हृदय की मांसपेशियों में रहता है पर हृदय में क्षति होने पर इसका रिसाव खून में होने लगता है।
संक्रमित खिलाड़ियों को हुई दिल की बीमारी -
प्रतिष्ठित जामा जर्नल में छपे शोध में दावा किया गया कि संक्रमण से ठीक होकर खेल प्रतिस्पर्धा में भाग लेने वाले 15% एथलीटों में मायकार्डिटिस के लक्षण दिखाई दिए। यह हृदय की मांसपेशियों से जुड़ा रोग है, जिसमें अचानक हार्टफेल के कारण मौत हो सकती है। ओहियो राज्य विश्वविद्यालय ने शोध में पाया कि 26 महिला व पुरुष एथलीटों में से चार के शरीर में इस बीमारी के लक्षण दिखे।
शौर्यपथ / अखरोट का नाम सबसे पसंदीदा ड्राई फ्रूट्स में लिया जाता है। सेहत से जुड़े फायदों के साथ स्किन केयर के लिए भी अखरोट बेहद फायदेमंद है। आप अगर चेहरे पर नेचुरल ग्लो पाने के लिए महंगे प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, तो आप इन्हें छोड़कर अखरोट को स्किन केयर रूटीन में शामिल कर सकते हैं।आइए, जानते हैं अखरोट के फायदे-
फेसपैक बनाकर करें इस्तेमाल
एक चम्मच अखरोट का पाउडर, एक चम्मच ओलिव ऑयल, दो चम्मच गुलाब जल व आधा चम्मच शहद मिलाकर पेस्ट बना लें।
इस पैक को अपने चेहरे पर 15 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें।
फिर सूखने पर पानी से मुंह धो लें।
बेहतर परिणाम के लिए आप यह फेसपैक सप्ताह में दो से तीन बार लगा सकते हैं।
डार्क सर्कल के लिए
अखरोट का तेल आपकी आंखों के नीचे आई सूजन को दूर करता है और डार्क सर्कल कम करने में मदद करता है।
आप थोड़ा-सा अखरोट का तेल लें। तेल को गुनगुना करके इसे आंखों के नीचे काले घेरे वाले भाग पर लगाकर सो जाएं। फिर सुबह सामान्य तरीके से चेहरा धो लें। आप इस प्रक्रिया को रोज रात को तब तक दोहराएं, जब तक असर दिखना न शुरू हो जाए।
आंखों ने नीचे की सिलवटों को दूर करें
आप नींबू का रस, शहद, ओटमील और अखरोट का पाउडर एक साथ मिलाकर पेस्ट बना लें।
इस पेस्ट को आंखों के नीचे लगाएं और 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें।
फिर पानी से धो लें।
इस प्रक्रिया को आप सप्ताह में तीन से चार बार दोहरा सकते हैं।
धर्म संसार / शौर्यपथ वैदिक धर्म ग्रन्थों के अनुसार वासुदेव द्वादशी व्रत पर्व द्वारकाधीश भगवान श्री कृष्?ण के नाम से प्रसिद्ध है। यह वासुदेव द्वादशी व्रत पर्व चतुर मास के शुरुआत आषाढ़ के महीने में देवसयानी एकादशी के एक दिन बाद बड़े ही धूम-धाम से मनाई जाती है। इस दिन श्रीकृष्?ण के साथ भगवान विष्?णु और माता लक्ष्?मी की पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जो भी भक्त इस अदभुत वासुदेव द्वादशी पर्व को अषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और अश्विन मास में वासुदेव द्वादशी की विधि विधान से पूजा करता है उसे मोक्ष की प्राप्?ति होती है। यह व्रत आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वादशी पर मनाना विशेष फलदायी माना जाता है। इसमें देवता वासुदेव की पूजा, और वासुदेव के विभिन्न नामों एवं उनके व्यूहों के साथ पाद से सिर तक के सभी अंगों का पूजन होता है।
नारद मुनि द्वारा कथा का वृतांत :- धर्म ग्रन्थों व वैदिक ब्राह्मणों के आधार पर वासुदेव द्वादशी के दिन वासुदेव की पूजन का विधान इस तरह से है की उस दिन किसी जलपात्र वासुदेव भगवान की प्रतिमा रखकर रक्त व पीत वस्त्रों से ढककर वासुदेव की स्वर्णिम प्रतिमा का पूजन किया जाता है तथा साथ ही उस दिन दान करने का विशेष विधान है । इस व्रत का विधान नारद मुनि द्वारा वसुदेव एवं देवकी को बताया गया था कि जो भक्त इस व्रत को विधि विधान से रखता है तो उनके सारे पाप कट जाते हैं। उसे पुत्र की प्राप्ति होती है या नष्ट हुआ राज्य पुन: मिल जाता है।
इस प्रकार से इस व्रत का पालन वसुदेव और देवकी ने रखा और उनको हर प्रकर से मुक्ति व खोया हुआ राज्य प्राप्त हुआ इस व्रत का नियम सुबह सबसे पहले नहाने के बाद साफ कपड़े पहनने चाहिये। और पूरे दिन निराहार व्रत रहना होता। भगवान को आप हाथ के पंखे, लैंप के साथ फल फूल चढ़ाने चाहिये। भगवान विष्?णू की पंचामृत से पूजा करनी चाहिये। उन्?हें भोग लगाना चाहिये। इस दिन विष्?णु सहस्?त्रनाम का जाप करने से आप की हर समस्?या का समाधान होगा। और भक्त सदैव सुख पूर्वक सम्पन्न व अपनी सभी मनोकामनां को सुख पूर्वक जीता है
धर्म संसार / शौर्यपथ / हिंदू पंचांग में हर माह आने वाली आठवीं तिथि को अष्टमी कहा जाता है। यह तिथि मास में दो बार आती है। एक बार पूर्णिमा के बाद और दूसरी बार अमावस्या के बाद यह तिथि आती है। पूर्णिमा के बाद आने वाली अष्टमी को कृष्ण पक्ष की अष्टमी और अमावस्या के बाद आने वाली अष्टमी को शुक्ल पक्ष की अष्टमी कहा जाता है। इस तिथि पर मां दुर्गा की उपासना की जाती है। इस दिन मां दुर्गा का व्रत, पूजन करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। सुख, समृद्धि, संपन्नता की प्राप्ति होती है। अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन दुर्गा चालीसा का पाठ अवश्य करें।
हिंदू पंचांग की आठवीं तिथि अष्टमी का विशेष नाम कलावती है। इस तिथि में कई तरह की कलाएं और विधाएं सीखना लाभकारी होता है। मान्यता है कि इस तिथि में अभिनय, नृत्य, गायन आदि कला सीखने के लिए प्रवेश लेना शुभ होता है। यह तिथि चंद्रमा की आठवीं कला है। अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव माने गए हैं लेकिन अष्टमी तिथि मां दुर्गा की शक्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। शुक्ल पक्ष की अष्टमी में भगवान शिव का पूजन करना वर्जित है, लेकिन कृष्ण पक्ष की अष्टमी में भगवान शिव का पूजन करना उत्तम माना गया है। किसी भी पक्ष की अष्टमी तिथि में नारियल का सेवन नहीं करना चाहिए। इस पावन तिथि पर लाल फूल, लाल चंदन, दीया, धूप आदि से विधि-विधान से मां की उपासना करें। इस दिन तामसिक भोजन का सेवन न करें। भोग विलासिता से दूर रहें। रात्रि में जमीन पर शयन करें।
मनोरंजन / शौर्यपथ / पॉप्युलर टीवी शो 'ये रिश्ते हैं प्यार के' जल्द ही बंद होने वाला है। हाल ही में इसकी जानकारी दी गई। शो के ऑफएयर होने से फैन्स काफी निराश हैं। यहां तक कि फैन्स ने चैनल और मेकर्स से शो के एक्सटेंशन की अपील की थी। अब इस शो को लेकर नई खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि शो का दूसरा सीजन लाया जाएगा, जो अगले साल लॉन्च हो सकता है। हालांकि अभी तक इसकी ऑफिशियल घोषणा नहीं की गई है।
पिकंविला ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्र के आधार पर बताया, कम टीआरपी के चलते शो को बंद करने का फैसला किया है। इस बीच आईपीएल, बिग बॉस 14 और केबीसी 12 जैसे शुरू होने वाले हैं। ऐसे में आपसी सहमति से पाया गया कि शो की टीआरपी में उछाल के बेहद कम चांस है। यह वजह है कि मेकर्स ने शो को ऑफ एयर करने का निर्णय लिया गया है।
गौरतलब है कि ये रिश्ते हैं प्यार के में शहीर शेख, रिया शर्मा, कावेरी प्रियम, अविनाश मिश्रा समेत अन्य सितारे अहम भूमिका निभा रहे हैं। शहीर शेख, रिया और कावेरी ने शो के बंद होने की खबरों पर हैरानी जाहिर की थी। सभी स्टार्स इस महीने तक शो के लिए शूट करेंगे।
शो ये रिश्ते हैं प्यार के का लास्ट एपिसोड 17 अक्टूबर को टेलीकास्ट किया जाएगा। इस शो की जगह अब फैंस साथ निभाना साथिया 2 देख पाएंगे। जानकारी के अनुसार, यह शो 19 अक्टूबर से शुरू हो सकता है। मालूम हो कि ये रिश्ते हैं प्यार के मार्च 2019 में शुरू हुआ था। शो को लोगों ने खूब पसंद किया।
मनोरंजन / शौर्यपथ / बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद लोगों की मदद करने के लिए सबसे आगे रहते हैं। एक्टर से गुहार लगाने वाले जरूरतमदों तक उनकी मदद न पहुंचे ऐसा हो ही नहीं सकता है। अब सोनू सूद ने एक बच्चे को मोबाइल दिया है ताकि वह ऑनलाइन क्लास अटेंड कर पाए। दरअसल, हाल ही में सोनू सूद से एक यूजर ने ट्वीट करते हुए एक बच्चे को ऑनलाइन क्लास के लिए स्मार्टफोन देने का आग्रह किया था। इस इस सोनू ने रिप्लाई करते हुए कहा था कि अगर वह मुझसे वादा करे कि वह मुझे पॉपकॉर्न की पार्टी देगा तो मैं जरूर उसे फोन दूंगा।
अब सोनू सूद ने अपना वादा पूरा कर दिया है। उन्होंने बच्चे तक मोबाइल पहुंचा दिया है। यूजर ने फिर से ट्वीट करते हुए लिखा, 'सर हैप्पी को मोबाइल तो मिल गया, अब वह बच्चा ऑनलाइन क्लास कर पाएगा। सर आपने तो अपना वादा 10 घंटे में ही पूरा कर दिया। अब हमारी बारी है, तो सर कब आ रहे हैं पॉपकॉर्न खाने।Ó इसके जवाब में सोनू सूद ने लिखा, 'अरे वाह। हीरो लग रहा है हैप्पी। पॉपकॉर्न तैयार रख जल्दी आता हूं खाने।Ó
हाल ही में एक्टर सोनू सूद ने नेपोटिज्म को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि करियर के शुरुआती दिनों में फिल्म इंडस्ट्री में उन्होंने भी पक्षपात का सामना किया। उन्हें फिल्मों के पोस्टर्स से उन्हें हटा दिया जाता था।
सोनू सूद ने जी न्यूज के साथ इंटरव्यू में कहा, 'मैं फिल्म फैमिली से नहीं हूं। जब मैंने इंडस्ट्री में प्रवेश किया तो ऐसी कई फिल्में थीं, जिनके पोस्टर्स में मुझे होना चाहिए थे लेकिन मुझे हटा दिया गया। ऐसे में सिर्फ दो ही रास्ते हैं, या तो मैं पोस्टर पर नहीं होने, रोल में कटौती के बारे में शिकायत कर सकता हूं कि या फिर कड़ी मेहनत करके मैं इस योग्य बन जाऊं कि लोग कहें कि मैं पोस्टर्स में होने का हकदार हूं।Ó
एक्टर ने आगे कहा कि जिसके पास पावर होता है वह हमेशा इसका इस्तेमाल करेगा। चाहे वह बॉलीवुड हो, कॉर्पोरेट वल्र्ड या फिर क्लॉथ शॉप। शक्तिशाली शख्स हमेशा नीचे वालों को दबाने की कोशिश करेगा। ऐसे में आपको इससे उबरने के लिए पावर की जरूरत है।
शौर्यपथ लेख / शहर में लॉक डाउन की घोषणा हुई और इस घोषणा से पहले जिला प्रशासन ने आम जनता की राय ली ऐसा सुनने में आया जब इस बात की गहराई तक गए तो पता जला कि एक बैठक हुई और शहर के जनप्रतिनिधि , व्यापारी संगठन और जिला प्रशासन के बड़े अधिकारियों ने मिल कर ये फैसला लिया कि शहर में एक बार फिर लॉक डाउन होना चाहिए और बहुत ही सख्त इतना सख्त कि हवा भी इधर से उधर ना हो सके सभी दुकाने बंद रहेंगी , सभी पेट्रोल पम्प बंद रहेंगे , सब्जी दूकान बंद रहेगी , राशन दूकान बंद रहेगी . सुनकर अच्छा लगा कि चलो शासन ने कोई सख्त कदम उठाया और जनता के हित की बात सोंची . पर क्या किसी ने भी यह सोंचा कि इन १० दिनों के सख्त लॉक डाउन और उसमे भी ७ दिनों का अति सख्त लॉक डाउन का क्या परिणाम निकलेगा . और आम जनता मिडिल क्लास जनता , गरीब तबके के लोगो पर इसका क्या असर पड़ेगा . गरीब और मध्यम वर्ग की पीड़ा क्या जनप्रतिनिधि समझते है , क्या अधिकारी समझते है , क्या व्यापारिक संगठन के मठाधीश समझते है . मेरे नजर से तो कोई भी नहीं समझता इनमे से .
चलिए आप ही अपने दिल पर हाँथ रखकर बताइये फैसले लेने वाले महोदय १० दिन तो क्या अगर १०० दिन भी लॉक डाउन रहेगा तो भी शहर के किसी भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को कोई परेशानी नहीं आएगी ना ही उनके घर में राशन की दिक्कत होगी और ना ही किसी अन्य तरह की परेशानी १०० दिन भी अगर घर पर रहेंगे तो भी उनकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा . ऐसी ही हालत व्यापारी संगठन की है शहर के व्यापारी संगठन वालो में से कोई ऐसा व्यापारी हो तो हमे जरुर बताइए जिसे १० तो क्या अगर १०० दिन भी लॉक डाउन रहे और घर के अंदर रहना पड़े तो कितने होंगे जिन्हें दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज़ होना होगा . यहाँ बात नफ़ा नुक्सान की नहीं दो वक्त की भूख मिटाने की हो रही है . ऐसी ही हालत बड़े बड़े पद में विराजमान शासकीय अधिकारी की ही बात करे तो एक भी ऐसा अधिकारी बता दीजिये जिन्हें दो वक्त पेट की आग शांत करने की चिंता होगी . मेरी नजर में इनमे से कोई नहीं है .

क्या शहर में सिर्फ गणमान्य नागरिक ही रहते है जिनकी राय ली जाती है क्या शहर की आम जनता के जीवन का कोई मोल नहीं है ये वही गणमान्य नागरिक है जो अपने व्यापर में कई बार शासन के नियमो की धज्जी उड़ाते हुए व्यापार करते है और ये देते है अपनी राय कि शहर में लॉक डाउन होना चाहिए क्या कोई ऐसा जनप्रतिनिधि है जो गरीब जनता की बात सुने तकलीफ सुन कर समस्या का हल करे यहाँ तो स्थिति इसी है कि जनप्रतिनिधि ज्ञान पेलने पर माहिर है क्योकि पेट के आग की इन्हें चिंता नहीं है अपनी नाकामी हुपाने और झूठी वाहवाही लुटने में ही इन्हें आत्म संतुष्टि मिलती है .
क्या फैसला लेने वाले मठाधिशो ने कभी सोंचा है कि १० दिन के लॉक डाउन में उस परिवार का क्या होगा जो रोज मजदूरी करता है और रोज घर में दो वक्त का खाना खाता है क्या उस परिवार का सोंचा है जो घर में बेरोजगार बैठा है , क्या उस व्यक्ति की पीड़ा का आभास है इन्हें जो अपनी तकलीफों के बावजूद इस लिए काम करता है कि रात को अपने परिवार को दो वक्त की रोटी दे सके . साहब पेट की आग क्या होती है फैसले लेने वाले को कभी अहसास ही नहीं है छोटी छोटी जरुरत को भी ना पूरी करने वाला इन १० दिनों में कैसे एक एक दिन गुजारेगा इस बात का अहसास एसी कमरे में हॉट काफी और कोल्ड काफी पीने वालो को यक़ीनन नहीं होगा इनके लिए तो १० दिन एक टार्गेट है क्योकि सारी सुविधाए , सारी शक्तियों के बाद भी ये महामारी से लड़ने के लिए कोई रास्ता तो नहीं निकाल रहे जिसे जनता का हित हो अपितु यही रास्ता निकाल लिए कि १० दिन घर में आराम करो . अरे साहब कौन १० दिन घर में आराम करेगा गरीब व्यक्ति १० दिन ऐसे बिताएगा जैसे एक एक पल सजा काट रहा हो और नजरो के सामने परिवार के सदस्यों की जरुरत को पूरी न कर पाने की पीड़ा सहन करते हुए ११ वे दिन का इंतज़ार करते हुए एक एक पल गिनता रहेगा और दिल से उन लोगो को बद्दुआ देगा जो जो इसके कारण है क्योकि १० दिन शासन के नियम को मानने वाला यही गरीब परिवार होता है इन १० दिनों की पीड़ा का अहसास अगर करना है तो आप रहो अपने आलिशान बंगले में किन्तु साथ यह भी करो कि घर से दो वक्त की रोटी के सारे इंतजाम हटा दो और देखो फिर कैसे आपको भी ये १० दिन १० साल जैसे लगेंगे .

चलिए साहब आप लोगो का फैसला सर आँखों पर ये १० दिन आपके आदेश अनुसार घर पर किन्तु क्या इन दस दिनों के बाद आने वाला समय सामान्य हो जाएगा क्या १० दिनों बाद जो भीड़ बाजार में उतरेगी उसे नियंत्रण कर पायेंगे , १० दिनों बाद जो वातावरण निर्मित होगा उससे क्या कोरोना और विस्फोट नहीं लेगा क्या १० दिनों के लॉक डाउन के बाद सब सामान्य हो जायेगा अगर ऐसा है तो १० क्या आप १५ दिन कर दो लॉक डाउन किन्तु उसके बाद भी अगर स्थिति सामान्य नहीं होगी तो क्या फैसले लेने वाले गणमान्य शहर की जनता के सामने ये कबुल करेंगे कि हमारा फैसला गलत था . हमे मालूम है नहीं करेंगे क्योकि आप लोगो से गलती नहीं होती साहब गलती तो गरीबो से होती है कानून तो गरीबो के लिए है , सारे नियम गरीबो के लिए है अगर आप के फैसले को सफलता मिलेगी तो बड़े बड़े प्रोपोगंडा करके अपनी कामयाबी बताएँगे किन्तु असफल होते ही सारा दोष एक बार फिर गरीब जनता के उपर लगा कर अपनी बुद्धिमता का परिचय देंगे क्योकि आप तो धरती के भगवन बन गए है किन्तु साहब कभी दिल से सोंचना इस दुनिया के बाद भी एक दुनिया है जहा आपका रुतबा नहीं आपके कर्म काम आते है और जिसके दरबार में कोई राजा नहीं होता कोई रंक नहीं होता सब एक सामान होते है और कर्मो का हिसाब देते है उस दरबार में ही सबका निष्पक्ष फैसला होता है . साहब आप लोगो के फैसले शिरोधार्य बस फैसले लेते समय आम जनता की तकलीफों के बारे में आम जनता से ही सवाल कीजिये ख़ास जनता क्या जाने आम जनता की तकलीफ अब तो बस यही दुआ है कि ये १० दिन पल पल के हिसाब से निकल जाए क्योकि पल पल का हिसाब ऍम जनता और गरीब जनता को ही करना है और करेगा भी क्योकि यही वो जनता है जो कानून का सम्मान करती है नियमो का पालन करती है लोकतंत्र की रक्षा करती है एक समाज के निर्माण में अपना अहम् योगदान देती है और वैश्विक महामारी से कही ज्यादा इस बात की चिंता में लीन रहती है कि परिवार को दो वक्त की रोटी कैसे नसीब हो ...( शरद पंसारी - संपादक दैनिक शौर्यपथ समाचार पत्र )

Feb 09, 2021 Rate: 4.00
