August 02, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    *दुर्ग पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे शहीद के ग्राम पाहन्दा, किया शहीद की माता और उनके बड़े भाई का सम्मान*

     

    दुर्ग । शौर्यपथ । पुलिस अधीक्षक महोदय दुर्ग प्रशांत ठाकुर के मार्गदर्शन में वीर शहीदों की सम्मान की परंपरा का निर्वहन करते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण लखन पटले एवं पुलिस अनुविभागीय अधिकारी पाटन आकाश राव गिरेपुंजे आज थाना रानीतराई क्षेत्र में ग्राम पाहन्दा में निवासरत शहीद मनोज वर्मा के परिजनों से मुलाकात की। आज ही के दिन 12 जुलाई 2009 को राजनांदगांव के मानपुर में पुलिस नक्सली मुठभेड़ मे राजनांदगांव के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक श्री विनोद चौबे समेत पुलिस विभाग के 29 वीर सपूत शहीद हुए थे। ग्राम पाहन्दा निवासी शहीद मनोज वर्मा उसी घटना में शहीद हुए थे।

      उनकी शहादत को अक्षुण्ण रखने आज शहीद के निज निवास ग्राम पाहन्दा जाकर उनकी माताजी और उनके बड़े भाई से सौजन्य भेंट की गई तथा उन्हें सम्मानित किया गया साथ ही ग्राम में निर्मित शहीद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनकी शहादत को याद किया गया। थाना प्रभारी रानीतराई निरीक्षक सीताराम ध्रुव उप निरीक्षक दुर्गेश वर्मा समेत थाना रानीतराई का समस्त स्टाफ इस अवसर पर उपस्थित रहा

    शौर्य की बात । 8 जुलाई से तबियत कुछ ठीक नही लग रही थी ऐसे लग रहा जिंदगी थम जाएगी । 9 जुलाई को तबियत ज्यादा बिगड़ी और एम्स में पहुंच गए इलाज शुरू साथ ही डर व घबराहट शुरू किया होगा कैसे होगा । इसी उधेड़बुन में डॉ ने कहा दिया 48 घण्टे महत्त्वपूर्ण है । अभी तक ये शब्द फिल्मों में सुना अब जब जिंदगी में सामना हुआ तो मेरे साथ ही । खैर मुझे तो दोनों फैसले में खुशी थी । और मन मे ये बात आ गयी या तो शौर्य के पास या सिद्धि के पास । मैं तो शौर्य के पास रहूंगा या सिद्धि के पास दोनो हालातो में अपने किसी एक बच्चे के साथ रहूंगा लेकिन मेरी दोस्त, मेरी साथी , मेरी हमसफ़र , मेरी माँ , मेरी बहन सभी का रूप निभाने वाली रत्ना का क्या होगा ऐसा अन्याय क्यो यही सब सोंचते हुए 48 घण्टे बीत गए और ईश्वर का फैसला हुआ सिद्धि के पास रत्ना के पास ही रहना है शौर्य से मिलने में और वक्त है । पर जिंदगी की सच्चाई वार्ड में ऐसे रूप में नजर आई जिससे फैसला करना बहुत आसान है कि साथी बिना जिंदगी अधूरी बेमानी , दुनिया की सारी दौलत हो या तकलीफ अगर साथी नही तो कुछ भी नही । हमसफ़र नही तो सफर का कोई मतलब नही । मेरे बेड के सामने दो बुजुर्ग एक सी बीमारी से ग्रस्त है दोनो बुजुर्ग की एक एक औलाद बेटे के रूप में है एक बुजुर्ग के बेटे को चिंता नही की उसके पिता की हालत कैसी है बुजुर्ग की हमसफ़र दुखी है और पति की सेवा कर रही । दूसरे बुजुर्ग का बेटा साथ है पूरी तरह मददगार है किंतु उनकी हमसफर का भी दुख के कारण बुरा हाल । दोनो के दुख में रत्तीभर भी फर्क नही दिखा इतने में मेरी रत्ना आई नजरे चार हुई और मन ही मन कहा अब अगर शौर्य से मिलने जाएंगे तो दोनो साथ जाएंगे . शौर्य हम दोनों का बेटा है ....

               दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग निगम क्षेत्र में इन दिनों अमृत मिशन के कार्यो के कारण जगह जगह गड्डे नजर आ रहे है .नई बनी सडको को भी पाइप के कार्य के लिए खोद दिया गया . यहाँ तक तो सब ठीक चल रहा कार्य भी गति पर है किन्तु इस कार्य में एक कार्य ऐसा है जो निगम के बजट को कुछ सालो में बढ़ा देगा और जिम्मेदार अधिकारी ऑफिस में बैठे बैठे नए कार्य की राह देखेंगे .
    निगम क्षेत्र में पाइप बिछाने के बाद फिलिंग का कार्य भी अमृत मिशन के द्वारा तय मानको में किया जाना है किन्तु वर्तमान में अमृत मिशन इस कार्य को कई हिस्सों में छोटे छोटे ठेकेदारों से करा रहा है और यह ठेकेदार दिल खोल कर मिलावट कर रहे है जिसके कारण फिलिंग के कार्य की गुणवत्ता निम्न स्तर की हो रही है और दूसरी तरफ अमृत मिशन से जुड़े अधिकारी निगम के इंजिनियर भीम राव , ईई बाबर मौन है जानकारी प्राप्त होने के बाद भी सिर्फ जाँच की बात करते नजर आते है वही अमृत मिशन के जिम्मेदार कपिश भी जानकारी के बाद चुप्पी साधे बैठे है शायद उन्हें भी मालुम चल गया होगा कि दुर्ग निगम के इंजिनियर की जाँच की सीमा कहा तक है और क्या कार्यवाही कर सकते है . केंद्र सरकार की इस महत्तवपूर्ण योजना में निगम के इंजीनियरों की लापरवाही किसी बड़े भ्रष्टाचार की तरफ इशारा कर रही है क्योकि कार्य भी लाखो का नहीं करोडो का है और करोडो के कार्य में हो रहे भ्रष्टाचार में मौन रहने से कइयो के वारे न्यारे हो सकते है और वारे न्यारे भी ऐसे की जिन्दगी भर ऐश से गुजर सकती है शायद यही मंशा लेकर निगम के जिम्मेदार अधिकारी खुले आम हो रहे भ्रष्टाचार पर मौन धारण किये हुए है .
    छोटे छोटे ठेकेदारों के निर्माण को तुड़वाकर नया बनाने का आदेश देने वाले आयुक्त क्या इस पर कार्यवाही करेंगे
         बीते हफ्ते एक निर्माण में शिकायत मिलने के बाद आयुक्त बर्मन द्वारा ठेकेदार को निर्माण को तोड़ कर फिर से किये जाने का आदेश दिया था जो एक अच्छी पहल है . अब देखना यह है कि आयुक्त बर्मन इंदिरा मार्केट जैसे व्यस्तम मार्ग में स्तरहीन निर्माण पर कार्यवाही करेंगे या फिर मौन रहकर अमृत मिशन के करोडो के भ्रष्टाचार युक्त कार्य में साथ देंगे .क्योकि उनके अधिनस्त ईई बाबर सिर्फ जाँच की बात करते रह गए वही सब इंजिनियर द्वारा भी सुचना देने पर जाँच की बात कहकर पल्ला झाड़ते नजर आरहे है .
    ऐसे हो रहा भ्रष्टाचार ...
    अमृत मिशन द्वारा पाइप लाइन बिछाने के बाद फिलिंग का कार्य भी किया जाना है और फिलिंग के कार्य में ईस्तमाल होने वाला कंक्रीट एक निश्चित मापदंड के अनुसार ही होना चाहिए जिसे अगर सरल भाषा में कहा जाए तो एक तगाड़ी सीमेंट में तीन तडागी रेत और ६ तगाड़ी गिट्टी ९ इसकी जानकारी (कपिश द्वारा दी गयी ) अमृत मिशन के साइड इंजिनियर द्वारा दी गयी किन्तु ठेकेदार द्वारा यह रेशो १/8/९ का है अर्थार्त अत्यधिक निम्न स्तर का फिलिंग कार्य हो रहा है जो कुछ समय बाद एक बार फिर शहर के जनता के लिए परेशानी का कारण बनेगा और एक बार फिर निगम इसे मरम्मत के नाम पर लाखो करोडो खर्च करेगा इस तरह जनता के पैसे की बंदरबाट होगी सिर्फ चंद ऐसे इंजीनियरों और अधिकारियों की लापरवाही के कारण जो जनता की सेवा के लिए निगम में जिम्मेदार पद पर आसीन है और शासन से मोटी मोटी तनखा पाते है क्या ऐसे लोगो पर आयुक्त बर्मन द्वारा कोई कार्यवाही होगी .
    शौर्यपथ समाचार पत्र ने ऐसे जगहों के विडिओ बनाए है जिसमे मिलावट का खेल चल रहा है अब उम्मीद करते है कि निगम के आयुक्त बर्मन और महापौर बाकलीवाल मामले को संज्ञान में लेंगे एवं सम्बंधित अधिकारियों पर उचित कार्यवाही करेंगे क्योकि निगम के सम्बंधित प्रभारी ( जल विभाग )संजय कोहले को इस कार्य से कोई मतलब नहीं जैसा कि उन्होंने फोन पर जानकारी दी .
    स्तरहीन कार्य सुधारने विधायक वोरा भी कह चुके है अधिकारियों को
         अमृत मिशन के कार्यो कारण हो रही परेशानी और स्तरहीन कार्य पर दुर्ग विधायक वोरा भी काफी नाराजगी जाहिर कर चुके है अब अगर प्रमाण होने के बाद भी कार्यवाही करने का अधिकार रखने वाले आयुक्त मौन रहते है तो शहर को तैयार हो जाना होगा आगे फिर से इसी तरह की परेशानी का सामना करने के लिए क्योकि स्तरहीन कार्य की उम्र ज्यादा नही होती . अमृत मिशन वाले तो हाथ झाड़ते हुए निकल जायेंगे किन्तु निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा आम जनता को ही भुगतना पड़ेगा .

    किस स्तर पर हो रहा है मिलावट देखिये विडिओ पर

    शौर्यपथ लेख ( सुशिल आनंद शुक्ला ) / छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री निवास में बड़ी आश्चर्य जनक घटना घटी ।राष्ट्रीय स्वयं सेवक के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का अभिनन्दन करने पहुचे थे।राजनीतिक प्रेक्षकों के लिए यह सहज स्वीकार करने वाली घटना नही है।
    आरएसएस इतनी सहिष्णु नही है कि वो एक कांग्रेसी मुख्यमंत्री विशेष तौर पर भूपेश बघेल का अभिनन्दन करने पहुँच जाय।वो भूपेश बघेल जिन्होंने राहुल गांधी के बाद पिछले कुछ सालों में आरएसएस पर सबसे ज्यादा तीखा और चुभने वाला हमला किया हो ।वे भूपेश बघेल जिन्होंने वीर सावरकर ,श्यामा प्रसाद मुखर्जी ,दीनदयाल उपाध्याय जैसे संघ के प्रतिमानों पर अनेको बार न जाने कितनो प्रहार किया हो उनका अभिनन्दन यदि संघ के लोग करने को आतुर है यकीन मानिए यह संघ की बड़ी मजबूरी और भूपेश बघेल की बड़ी कामयाबी है ।

    नरवा गरवा घुरवा बारी के बाद गो धन न्याय योजना के निहितार्थ को संघ बहुत अच्छी भांति समझता है उसे मालूम है यह योजना फलीभूत होते ही भूपेश बघेल न सिर्फ गांव के सबसे निचले तबके तक पहुच जायेगे बल्कि सही मायने में छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भर बनाने में कामयाब भी होंगे ।गाय ,गोबर गो मूत्र जिसके माध्यम से संघ दशको से भारत के गांव गांव में अपनी पैठ बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करते रहा हो ।
    जिस गाय के नाम पर संघ देश के एक बड़े वर्ग को भावनात्मक और धार्मिक रूप से भड़काती रही हो जिस गाय के नाम पर देश मे अनगिनत मॉब लिंचीग की घटनाएं हुई हो उस गाय के गोबर को आर्थिक उन्नति का आधार बना कर यदि भूपेष बघेल प्रस्तुत कर रहे है तो इससे गाय के नाम पर वर्षो से ठेकेदारी करने वालो की जमीन खिसकना स्वाभाविक है । गो धन न्याय योजना का सीधा विरोध करते है तो दशको से किये गए अपने ही एजेंडे का विरोध होगा और फिर इस विरोध का आधार और जन स्वीकार्यता भी नही रहेगी। लेकिन चुप चाप बैठ कर इतने बड़े हथियार को हाथ से निकलते भी तो नही देखा जा सकता ।इसीलिए जब विरोध नही कर सकते तो चुप रहो या समर्थन करो ।संघ की फितरत चुप रह कर तमाशा देखने वाली नही है विशेष कर जब मसला गाय से जुड़ा हो तब तो बिल्कुल भी नही । यहाँ तो वर्षो से एकाधिकार कर रखे मसला हाथ से निकलते दिख रहा।
    भूपेश बघेल ने साबित किया की असली गो सेवा गाय के नाम पर नारेबाजी करने ,लक्षेदार भाषण से नहीं गाय के नाम पर उन्माद फैला कर मॉब लीचिंग में नही ।गाय और गो वंश को जन जीवन से जोड़ कर उसकी उपयोगिता को प्रासंगिक बनाने में है। उपयोगिता और प्रासंगिकता के इसी सिद्धांत के कारण द्वापर में भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पूजा की शुरुआत किया था।

    साम्प्रदायिकता पर कड़े प्रहार के साथ राम लीला का मंचन करवाना और छत्तीसगढ़ में भगवान राम वन गमन पथ को पावन पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने वाले भूपेश बघेल ने गो वंश संरक्षण की योजना ला कर यह भी साबित किया कि उनके लिए संवैधानिक मूल्य और धार्मिक आस्था दोनों महत्व पूर्ण हैं।
    ऐसे में छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार की गांव और गो वंश केंद्रित योजना नरवा गरवा घुरवा बाड़ी तथा गो धन न्याय योजना का समर्थन कर इस योजना से प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष तौर से मन मसोस कर भी खुद को जुड़े होना दिखाने की संघ की मजबूरी है।
    (लेखक छ ग कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता है)

    गेजेट्स /शौर्यपथ / लॉकडाउन को दौरान कई लोग समय काटने के लिए अपने दोस्तों से बात-चीत करते रहते हैं और अगर आपको लगता है कि कुछ बातों को आप अपनें परिजन या भाई-बहनों से छिपाना चाहते हैं तो उसके लिए एक एप का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो आपकी स्क्रीन पर लिखे टेक्स्ट को दूसरों को पढ़ने से रोकता है।

    गूगल प्लेस्टोर पर मौजूद MaskChat - Hides Whatsapp Chat एक शानदार एंड्रॉयड एप है जिसे यूजर की चैटिंग को प्राइवेट रखने के लिए बनाया गया है। जब आप अपने स्मार्टफोन पर प्राइवेट चैट करते हैं, तब यह एप आपके चैट के उपर की स्क्रीन को डिजिटल पर्दे से छिपा देता हैं। इससे आपके आसपास के झांकने वाले पड़ोसी से आपके मैसेज प्राइवेट रखने में मदद मिलती हैं।

    अन्य चैटिंग एप के लिए भी कारगर
    MaskChat - Hides Whatsapp Chat एप सिर्फ व्हाट्सएप तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसका इस्तेमाल फेसबुक मैसेंजर, वीचैट,हाइक और स्नैपचेट के लिए भी किया जा सकता है। इसके साथ ही पासवर्ड टाइप करते समय या बैंक की इनफॉर्मेशन टाइप करते समय अपनी स्क्रीन को हाइड करने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

    कैसे करें इस्तेमाल
    इस एप को डाउनलोड करने के बाद यूजर को स्क्रीन पर एक फ्लोटिंग मास्क चैट आइकॉन दिखाई देगा, जिस स्क्रीन को आप दूसरों से हाइड करना चाहते हैं, उस स्क्रीन पर इस आइकॉन को ऊपर से नीचे की ओर ड्रैग करें। अब एक डिजिटल पर्दा नीचे आ जाएगा, जो आपकी स्क्रीन को छिपा देगा और आप किसी भी शर्मिंदा पलों से बच सकते है जब आपके माता-पिता या बड़े आपके आसपास होते हैं।

    पर्दे की बढ़ा सकते हैं डार्कनेस
    इस एप में कंपनी की तरफ से दिए गए पर्दे की मोटाई औसतन होती है, जो आपको कम लग सकती है। इसके लिए आप पर्दे के दाईं ओर दिए गए तीन लाइन वाले विकल्प पर क्लिक कर सकते हैं। इससे स्क्रीन के बीच में तीन नए विकल्प आएंगे। उनमें से बीच वाले विकल्प की मदद से आप पर्दे की ब्राइटनेस को नियंत्रित कर सकते हैं। बंद करने के लिए क्रॉस आइकॉन पर क्लिक कर आप पर्दे को क्लोज कर सकते हैं, लेकिन फ्लोटिंग मास्केचैट आइकॉन को पीछे छोड़ देगा। गियर आइकॉन पर टैप कर आप थीम को बदल भी सकते हैं। थीम को सिलेक्ट करने के बाद उसके नीचें के Apply theme बटन पर टैप कर अप्लाई करें।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / श्रावण गणेश चतुर्थी व्रत है। गणेश जी का व्रत करने वाले यह ध्यान रखें कि कृष्ण पक्ष में चतुर्थी रात में चंद्रोदय के समय रहनी चाहिए और शुक्लपक्ष में मध्याह्न में। इसमें उदया तिथि नहीं ली जाती है। हां, तृतीया के साथ चतुर्थी ले सकते हैं, लेकिन चतुर्थी के साथ पंचमी तिथि नहीं होनी चाहिए। समस्त देवी-देवताओं में प्रथम पूज्य गणेश जी की लीलाएं अत्यंत प्रसिद्ध हैं। उन्होंने ही माता-पिता को सर्वाधिक प्रतिष्ठा प्रदान की।

    दूर्वा गणेश जी को उसी तरह प्रिय है, जिस तरह से शिवजी को बेलपत्र और नारायण को तुलसी। गणेश विवेक हैं। विद्यावरिधि बुद्धिविधाता हैं। असल में जिसके पास विवेक होगा, उसी को सनातन धर्म के अनुसार आदिशक्ति दुर्गा, सूर्य, शिव और श्री हरि आदि पंचदेवों की अक्षुण्ण ऊर्जा प्राप्त होगी। गणेश हैं, तभी तो सृष्टि रची जा सकी। ब्रह्मा जी ने सृष्टि रचने से पहले उनकी पूजा की। विघ्न का डर तो रहा ही होगा, पर सकारात्मक ऊर्जा, विवेक संपन्नता की इच्छा भी रही होगी। इसलिए जहां गणेश हैं, वहीं समस्त देवी-देवता विराजमान हैं।

    कैसे करें गणेश चतुर्थी व्रत-
    लाल रंग के वस्त्र गणेश जी को पहनकर उन्हें बेलपत्र, अपामार्ग, शमीपत्र, दूर्वा अपर्ण करना चाहिए। धन की अच्छी स्थिति होने पर 21 लड्डू , 21 दूब, जामुन आदि के साथ फल, पंचमेवा, पान आदि तो होना ही चाहिए। 10 लड्डूओं का दान करना चाहिए। आरती आदि करके 'गणेश्वरगणाध्यक्ष गौरीपुत्र गजानन। व्रतं संपूर्णता यातु त्वत्प्रसादादिभानन।।' श्लोक का उच्चारण करते हुए प्रार्थना करें। गणेश चतुर्थी का व्रत करने वाले को उदय हुए चंद्रमा, श्री गणेश और चतुर्थी माता को गंध, अक्षत आदि के साथ अध्र्य अवश्य देना चाहिए। इसके बाद मीठा भोजन कर सकते हैं।

    गणेश चतुर्थी व्रत का महत्व-
    इस श्रावण कृष्ण चतुर्थी व्रत के बारे में कहा जाता है कि माता पार्वती जब शिव जी को पति के रूप में पाने के लिए तप कर रही थीं और शिवजी प्रस्न्न नहीं हो रहे थे, तब उन्होंने यह व्रत किया। व्रत करने के पश्चात उनका शिव से विवाह संपन्न हुआ। हनुमान ने सीता की खोज में जाने पर यह व्रत किया। रावण को जब राजा बलि ने पकड़ कर कैद कर लिया, तब रावण ने यह व्रत किया था। गौतम की पत्नी अहिल्या ने भी इस व्रत को किया था।

    गणेश चतुर्थी व्रत संकटों से बचाता है-
    यह व्रत कम से कम एक या तीन वर्ष करें। जिनका विवाह नहीं हो पा रहा है, उन्हें तो यह व्रत अवश्य करना चाहिए। शनि की साढे साती से पीड़ित राशियों-धनु, मकर, कुंभ और शनि की ढैया वाली राशियों -मिथुन और तुला वाले लोगों को भी यह व्रत संकटों से बचाता है।

     

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / तपती गर्मी के बाद बारिश का मौसम तन और मन दोनों को सुकून देता है। लेकिन मानसून का मजा तब किरकिरा हो जाता है जब इस समय घरों में सीलन, फंगस और तरह-तरह के इंफेक्शन लोगों के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं। इस समय लोग वैसे ही कोरोना महामारी की वजह से बेहद डरे हुए हैं। ऐसे में खुद को सेहतमंद रखने के साथ अपने घर को भी संक्रमणमुक्त रखना बेहद जरूरी है। तो आइए जानते हैं आखिर कैसे बारिश के मौसम में अपने घर को सीलन और फंगस से रखें दूर।

    क्यों होती है घरों में सीलन-
    बरसात के मौसम में कीटाणु और सूक्ष्मजीव की संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। इसका मुख्य कारण थर्मल इंसुलेशन न होना, साफ-सफाई की कमी, घर में धूप-हवा का ठीक से न आना सीलन और नमी पैदा करता है। जिससे फंगस की समस्या भी देखने को मिलती है।

    सेहत को नुकसान-
    घर में सीलन होने की वजह से अल्टरनारिया, एस्परजिलस, पेनिसिलियम और क्लोडोस्पोलियम जैसी फंगल प्रजातियां पनपने लगती हैं। जिससे व्यक्ति को दमा, एलर्जी, डर्मिटाइटिस और राइनाइटिस के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

    सीलन और फंगस से घर को ऐसे रखें दूर-
    -सीलन की समस्या मानसून में अक्सर ज्यादा देखने को मिलती है। ऐसे में बाथरूम, टॉयलेट, बंद पड़े कमरे में, जहां फंगस, सीलन और कीट आसानी से पनप सकते हैं कीटनाशक छिड़काव और फ्यूमिगेशन करवाकर कीट और मच्छर,मक्खियों से छुटकारा पा सकते हैं।
    -किचन और बाथरूम जहां पानी का इस्तेमाल अधिक होता है और धूप नहीं पहुंच पाती, ऐसी जगह को सूखा रखने की कोशिश करें।
    -हफ्ते में एक दिन किचन की किसी अच्छे कीटनाशक से सफाई करें।
    -नमी , सीलन वाले कमरे में न सोएं।
    -प्राकृतिक रूप से घर में धूप को आने दें। घर की खिड़कियों को कुछ देर के लिए जरूर खोलकर रखें।

    -सीलन से पहले ही खराब हो चुकी दीवारों को ठीक करने के लिए दरारों में वॉटरप्रूफ चूना भरें। ऐसा करने से दोबारा उस जगह सीलन नहीं आएगी।

    -लौंग का इस्तेमाल करके भी आप घर की सीलन से निजात पा सकते हैं। इसके लिए आप लौंग और दालचीनी को करीब आधा घंटा पानी में डालकर छोड़ दें। आधे घंटे बाद इस पानी को उबालकर इसे रूम प्रेशनर की तरह प्रयोग करें।

     

    खाना खजाना / शौर्यपथ / राजस्थान दुनियाभर में न सिर्फ अपनी रंग-बिरंगी संस्कृति बल्कि अपने तीखे-चटपटे खानपान के लिए भी काफी फेमस है। राजस्थान का भोजन तीखा और मसालेदार होने के बावजूद विदेशी लोगों में भी काफी पसंद किया जाता है। मानसून का महीना चल रहा है तो क्यों न ट्राई की जाए राजस्थान की ट्रेडिशनल रेसिपी राजस्थानी बंजारा गोश्त।

    राजस्थानी बंजारा गोश्त बनाने के लिए लगने वाली सामग्री-
    मटन, सरसों का तेल, प्याज, लहसुन का पेस्ट, अदरक का पेस्ट, देगी मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर, गाढ़ा दही, धनिया बीज पीसकर भुना हुआ, लौंग, साबुत काली मिर्च, सूखी लाल मिर्च, दालचीनी छड़ी, काला नमक

    राजस्थानी बंजारा गोश्त बनाने की वि​धि-
    1- सबसे पहले कड़ाही में सरसों का तेल गर्म कर लें। अब उसमें करी पत्ता, काली मिर्च, लौंग, दालचीनी और सूखी लाल मिर्च डालकर एक मिनट के लिए चलाएं।
    2- अब कड़ाही में कटा हुआ प्याज डालकर उसे अच्छी तरह पका लें।
    3-प्याज पकने के बाद अब इसमें अदरक और लहसुन का पेस्ट डालकर उसे भी 5 मिनट के लिए अच्छी तरह से पका लें।
    4- कड़ाही में अब देगी मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर और काला नमक डालकर उसे 5 मिनट तक अच्छी तरह पकाएं।
    5- मटन के टुकड़ों को अब इस मसाले में डालकर 10-15 मिनट के लिए ढक्कन से कवर करके अच्छी तरह पकने दें।
    6-अब मटन में दही मिलाकर इसे और 10 मिनट तक पकाएं, जब तक कि मांस पककर तैयार न हो जाए।
    7- अब मटन को हरी मिर्च और अदरक के साथ गार्निश करके सर्व करें।

     

    खाना खजाना / शौर्यपथ / मानसून में हल्की-हल्की बारिश के बीच आपके हाथों में गर्म मसाला चाय के साथ कुरकुरे प्याज के पकौड़े से भरी एक प्लेट रखी हो, तो वाकई किसी के भी मुंह में देखकर पानी आ जाए। प्याज के पकौड़े ज्यादातर हर भारतीय घर में पंसद और बनाए जाते हैं। यह एक पॉपुलर स्ट्रीट फूड है, जो अचानक घर आए मेहमानों के लिए या फिर मानसून का मजा लेने के लिए अक्सर घरों में बनाएं जाते हैं। लेकिन कई बार लोगों की यह शिकायत रहती है कि उनके पकौड़े क्रिस्पी नहीं बनते, तो देर किस बात की आज आपको बताते हैं कैसे बनाएं जाते हैं मार्केट स्टाइल में क्रिस्पी प्याज के पकौड़े।

    प्याज के पकौड़े के लिए सामग्री-
    -2 प्याज-
    -¼ बाउल- बेसन
    -1½ टी स्पून-लाल मिर्च का पाउडर
    -1 टेबिल स्पून-चावल का आटा
    -¾ कप-हरा धनिया
    -¼ टी स्पून-हींग
    -स्वादानुसार-नमक
    -½ कप-पानी
    -2 टेबिल स्पून- तेल तलने के लिए

    प्याज के पकौड़े बनाने की विधि-

    प्याज के पकौड़े बनाने बनाने के लिए सबसे पहले दो प्याज लेकर उनके ऊपर और नीचे का हिस्सा काट लें। अब प्याज को छीलकर उसका ऊपरी सख्त हिस्सा भी काट लें। अब प्याज को दो टुकड़ों में कांट कर आधा-आधा करके पतले और लंबे टुकड़ों में कांट लें।

    अब कटे प्याज को एक बाउल में निकालकर इसकी लेयर्स निकाल लें। इसी बाउल में अब बेसन लेकर इसमें लाल मिर्च पाउडर, चावल का आटा, हिंग, नमक और कटा हुआ हरा धनिया डालकर सभी चीजों को अच्छे से मिक्स कर लें। अब बाउल में थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर इसका एक गाढ़ा घोल बना लें।

    अब एक पैन में तेल गर्म करें। गर्म तेल के दो चम्मच इस बेसन के घोल में डालकर अच्छे से मिक्स करें। तेल गर्म होने पर अपने हाथों की मदद से, एक एक कर पकौड़े बना कर तेल में डालते जाएं। पकौड़ों को 2 मिनट तक मध्यम आंच पर तलने के बाद उन्हें पलट दें। पकौड़ों को तब तक तले जब तक यह दोनों ओर से गोल्डन ब्राउन न हो जाए। पकौड़ों को तेल से निकालकर, गर्मा-गर्म सर्व करें।

     

    खेल / शौर्य पथ / अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनु साहनी ने वेस्टइंडीज के खिलाफ बुधवार (8 जुलाई) से शुरू हो रही टेस्ट सीरीज के दौरान जैविक रूप से सुरक्षित वातावरण तैयार करने के लिए इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के प्रयासों की सराहना की। इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच साउथम्पटन के एजिस बाउल में दर्शकों की गैरमौजूदगी में तीन टेस्ट मैचों की सीरीज की शुरुआत के साथ 117 दिन बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी होगी।

    कोरोना वायरस महामारी के कारण दुनिया भर में मार्च में खेल गतिविधियां बंद कर दी गईं थी, जिन्हें धीरे-धीरे शुरू किया जा रहा है। साहनी ने बयान में कहा, ''प्रतिभागियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाने के ईसीबी के प्रयासों के लिए हम उन्हें धन्यवाद देना चाहते हैं।''

    117 दिन बाद आज होगी इंटरनैशनल क्रिकेट की वापसी, जानें सभी Facts

    बता दें कि कोरोना वायरस महामारी के बीच इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच शुरू हो रही टेस्ट सीरीज के जरिये अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बहाल होगा, जो भविष्य में क्रिकेट की दशा और दिशा भी तय करेगा। क्रिकेट के सबसे पारंपरिक प्रारूप के जरिये खेल के नए युग का सूत्रपात होने जा रहा है। ऐसा युग जिसमें मैदान पर खिलाड़ियों में जोश भरने वाले दर्शक नहीं होंगे। खिलाड़ी गले नहीं मिल सकेंगे। हफ्ते में दो बार कोरोना जांच होगी और खिलाड़ी होटल से बाहर नहीं जा सकेंगे।

     

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