August 02, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    शौर्यपथ लेख / डॉ. सिद्धार्थ शर्मा की कलम से ../ सनातन धर्म या वैदिक धर्म का आधार ही ये छोटा सा निशान ? है, जिसने महाकाव्यों की रचना करवा दी। जब भगवान कृष्ण से अर्जुन ने सवाल पूछा तो विश्व को गीता मिली। जब माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा तो शिवपुराण का प्रादुर्भाव हुआ। एक अंधविश्वास को विश्वास से अलग ये सवाल ही तो करता है। सिर्फ ये सवाल ही तो है जो न्यूटन के सर पर सेब ने पूछा था। इसी सवाल के जवाब ने तो हमें गति के सिद्धांत तक पहुचा दिया। गुरुत्वाकर्षण की खोज हुई। हम उनमें से तो नही जिनपर सवाल उठाया जाए तो तलवारें निकल आती है? भारत का लोकतंत्र चाइना की डेमोक्रेसी से अलग कैसे है? इस सवाल पूछने के अधिकार पर हम आज लोकतांत्रिक हैं।
    पर आज कुछ धर्म के ठेकेदार हमसे हमारा लोकतांत्रिक अधिकार ही छीन लेना चाहते हैं। रियलिटी शो में अपनी अंधी माँ और विधवा बहन पर रोता प्रतिभागी संगीत को पीछे छोड़ते हुए अपनी दुखद स्थिति पर संगीत का सिरमौर बन जाता है। जनता भावुक है और कमजोर का साथ देने एकजुटता भी दिखती है पर किस कीमत पर? आज समय अलग है। कभी कहा जाता था जात न पूछो साधु की पूछ लीजिये ज्ञान। पर अब के साधु ज्ञान पूछने पर जात बताने लगे हैं। जब ईश्वर सवालों से परे नही तो व्यक्ति कैसे? पतंजलि के दावे पर सवाल उठना पतंजलि पर उंगली उठाना और पतंजलि पर उंगली उठाना आयुर्वेद पर उंगली उठाना? क्या ये सवाल पूछने के उस मौलिक अधिकार का हनन नही? बाबा ने सवाल पूछने वाले बुद्धिजीवियों को आयुर्वेद,भगवा,सनातन का विरोधी बता दिया साथ ही अपनी जाति का भी। बाबाजी आयुर्वेद आपके पहले भी था और आपके बाद भी होगा। हम सब आयुर्वेद के लाभार्थी हैं इसके ठेकेदार नही। आज भी हाथ कट जाए तो हमारी माताजी हल्दी ढूंढने लगती है। चाहे आपकी महत्वकांशा हो पर राजनीति को आयुर्वेद से दूर रखिये।
    बाबा रामदेव का इंटरव्यू विरोधियों को घेरता हुआ जाती,आयुर्वेद, सनातन के आसपास घूमता रहा पर मजे की बात थी कि उन्होंने एक बार भी कोरोनिल के कोरोना की दवा होने का दावा इस घंटे भर चले इंटरव्यू में नही किया। साथ ही शब्दों की जादूगरी दिखाते हुए आयुष मंत्रालय की तारीफ के कसीदे पढ़े और कोरोना के इलाज की ओर बढ़ता कदम बताया। ध्यान दीजिए कदम। शुरुवात। हालांकि 23 तारीख को ये कदम चांद की धरती पर था।।
    बालकृष्ण जी के इंटरव्यू ने साफ किया कि उन्होंने कोरोना इलाज का न कभी दावा किया न प्रचार, हालांकि दिव्य कोरोना किट की क्लोजप फ़ोटो और बाबाजी के 100% सफलता के दावे को दरकिनार करते हुए उन्होंने सिर्फ ट्रायल में कोरोना रोगियों के ठीक होने की बात को माना पर कोरोनिल को इसका कारण बताने से इनकार कर दिया। अब इस फजीहत के बाद आखरी हथियार बचा था जो बाबाजी ने आज निकाल लिया। आयुर्वेद का नाम और सनातन की साख।।
    बाबाजी ने जिस युग और आनंद हॉस्पिटल में ट्रायल का दावा किया उसका सच भी सामने आ गया कि 2 कोरोना मरीजों के पाये जाने के बाद 65 मरीजों को quaranteen किया गया उनमें से कोई भी कोरोना पॉजिटिव कभी था ही नही। आयुष मंत्रालय ने भी बताया कि सिर्फ असिम्प्टोमैटिक मरीजों पर ट्रायल हुआ था जो वैसे भी बिना दवा 3 दिन में ठीक हो रहे थे। आयुष मंत्रालय से सर्दी का लायसेंस लेकर ये दवा कोरोना की कब और कैसे बनी इसपर विश्व आश्चर्यचकित है और अब तो बाबा भी।
    रातों रात गिरता शेयर मार्केट के बीच supporters ने सोशल मीडिया ने कभी नकली लायसेंस दिखाया कभी फर्जी Dr मुजाहिद हुसैन को बाहर का रास्ता दिखाया। लेकिन सच छुपता नही। दर्ज होते fir और प्रदेशों में लगते बैन ने सच को फिर सबके सामने ला दिया।
    सच ही तो है कि
    #बिना विचारै जो करे सो पाछे पछताए, काम बिगड़ौ आपनो जग मा होत हँसाये

    अब तक 15 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक कोरबा लौटे, चार हजार 829 अभी भी प्रवासी क्वारेंटाइन में
    सेंटरों में आवास एवं भोजन सहित सभी बुनियादी सुविधाएं, स्वास्थ्य की भी नियमित जांच , साढ़े आठ हजार से अधिक प्रवासियों की हुई कोरोना जांच ,लगभग आठ हजार दो सौ की रिपोेर्ट निगेटिव, 282 संक्रमित मिले

        कोरबा / शौर्यपथ / कोरोना संकट के कारण हुए लाॅक डाउन से कामकाज की तलाश में कोरबा जिले से देश के विभिन्न हिस्सों में गये लगभग 15 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक वापस लौट आये हैं। जिले में लौटे प्रवासी श्रमिकों से कोरोना संक्रमण का जिले में फैलाव रोकने के लिए सभी श्रमिकों को 14 दिनों के लिए 260 क्वारेंटाइन सेंटर्स में अवलोकन में रखा गया हैं। इन क्वारेंटाइन सेंटरों से अब तक दस हजार 686 प्रवासी श्रमिक क्वारेंटाइन अवधि पूरी होने के बाद अपने घर पहुंच गये है। जिले के क्वारेंटाइन सेंटरों में अभी चार हजार 829 लोग रह रहे हैं। अलग-अलग राज्यों से वापस आए इन सभी प्रवासियों को कोविड प्रोटोकाॅल का पालन करते हुए उनके परिजनों और स्वयं के साथ-साथ अन्य लोगों में कोरोना संक्रमण को रोकने और स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए 14 दिनों तक क्वारेंटाइन में रहने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में 211 क्वारेंटाइन सेंटर ग्रामीण क्षेत्रों में बनाये गये हैं। इन सभी क्वारेंटाइन सेंटर्स का संचालन एवं नियंत्रण संबंधित जिला प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। इनके संचालन में ग्राम पंचायतें, जनपद पंचायतें और जिला पंचायतें सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।
    कोविड प्रोटोकाॅल और समय-समय पर शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुसार इन क्वारेंटाइन सेंटरों में आकर रूके प्रवासी श्रमिकों में से अब तक आठ हजार 627 श्रमिकों की कोरोना जांच कराई जा चुकी है, जिनमें से आठ हजार 176 श्रमिकों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। दो सोै ब्यासी प्रवासियों को जांच में कोरोना संक्रमित पाया गया है। जिन्हे ईलाज के लिए कोरबा, रायपुर, बिलासपुर के कोविड अस्पतालों और एम्स रायपुर भेजा गया है।
    ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित क्वारेंटाइन सेंटर्स में रह रहे प्रवासी मजदूरों को आवास और भोजन सहित सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। स्थायी-अस्थायी शौचालयों, पुरूषों एवं महिलाओं के लिए अलग-अलग स्नानगृहों, स्वच्छ पेयजल, लाइट एवं पंखों की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देश पर कई सेंटर्स में प्रवासी श्रमिकों के लिए मनोरंजन के साधनों की भी व्यवस्था की गई है। क्वारेंटाइन सेंटर्स में रह रहे लोगों के स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। अस्वस्थ लोगों को ईलाज और दवाईयां मुहैया कराई जा रही है। संक्रमण की संभावना और लक्षण वाले व्यक्तियों के तत्काल सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जा रहा है। वृद्ध, गर्भवती महिलाओं और डायबिटीज, ब्लड पे्रशर जैसी बिमारियों से पहले से ही ग्रसित व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। कोरबा जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक 77 क्वारेंटाइन सेंटर पाली विकासखंड में बनाये गये हैं। करतला विकासखंड में 40, कटघोरा विकासखंड में 36, कोरबा विकासखंड में 34 और पोंड़ीउपरोड़ा विकासखंड में 24 क्वारेंटाइन सेंटर हैं। इन सभी क्वारेंटाइन सेंटरों में अब तक लगभग 12 हजार प्रवासी श्रमिकों को ठहराया जा चुका है। इनमें से सात हजार 790 श्रमिक क्वारेंटाइन अवधि पूरी कर अपने घर जा चुके हैं। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र के क्वारेंटाइन सेंटरों में चार हजार 161 श्रमिक रूके हैं।
    कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल गांवों में क्वारेंटाइन सेंटर्स के सुचारू संचालन के लिए लगातार व्यवस्था की समीक्षा कर रही हैं। क्वारेंटाइन सेंटरों के लगातार निरीक्षण के लिए जोनल अधिकारियों सहित सभी एसडीएम, तहसीलदार और अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। कलेक्टर के निर्देष पर सेंटर्स की कमियों-खामियों को तत्परता से दूर किया गया है। उन्होंने क्वारेंटाइन सेंटर्स में रह रहे लोगों की सेहत की लगातार निगरानी और संक्रमण के लक्षण वाले लोगों के तत्काल सैंपल जांच के निर्देष स्वास्थ्य विभाग को दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के 211 क्वारेंटाइन सेंटरों में रूके लगभग 12 हजार प्रवासी श्रमिकों में से कोविड प्रोटोकाॅल और समय-समय पर स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार छह हजार 247 का कोरोना टेस्ट कराया गया है, जिसमें से छह हजार की रिपोर्ट निगेटिव आई है। 189 प्रवासी मजदूर ग्रामीण क्षेत्रों के क्वारेंटाइन सेंटरों में कोरोना संक्रमित मिले हैं। जिनका ईलाज कोविड अस्पतालों में कराया गया है और इनमें से भी कई स्वस्थ्य होकर वापस लौट आये हैं। क्वारेंटाइन अवधि पूरी कर अपने घर वापस लौट चुके प्रवासी श्रमिकों के लिए जिला स्तर पर मनरेगा के तहत जष्ब-कार्ड बनाकर रोजगार दिया जा रहा है। अन्य योजनाओं के माध्यम से भी उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं। मजदूरों की स्किल-मैपिंग कर जिले के सार्वजनिक उपक्रमों, निजी औद्योगिक संस्थानों, भवन निर्माण और अन्य क्षेत्रों में उन्हें काम दिलाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
    कोरबा के शहरी क्षेत्रों में 49 क्वारेंटाइन सेंटर बनाये गये हैं। शहरी क्षेत्रों में लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए दस, छात्रों, व्यापारियों, पर्यअकों और अन्य लोगों के लौटने पर क्वारेंटाइन के लिए 21 सेंटर स्ािापित है। जिले में स्थित सार्वजनिक उपक्रमों ने भी अपने-अपने कामगारों और उनके परिजनों के बाहर से कोरबा लौटने पर क्वारेंटाइन के लिए 18 सेंटर बनाये हैं। इन क्वारेंटाइन सेंटरों में अभी तक साढ़े तीन हजार से अधिक लोग बाहर से कोरबा लौटकर ठहर चुके हैं। इनमें से दो हजार 900 लोग अपनी 14 दिन की क्वारेंटाइन अवधि पूरी कर वापस अपने घर जा चुके हैं। शहरी क्षेत्रों के क्वारेंटाइन सेंटरों में अभी साढ़े छह सौ से अधिक लोगों को क्वारेटाइन में रखा गया है। शहरी क्षेत्रों के क्वारेंटाइन सेंटरों में रूके प्रवासी श्रमिकों में से कोविड प्रोटोकाॅल और समय-समय पर स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार दो हजार 374 का कोरोना टेस्ट कराया गया है, जिसमें से दो हजार 216 की रिपोर्ट निगेटिव आई है। 87 प्रवासी शहरी क्षेत्रों के क्वारेंटाइन सेंटरों में कोरोना संक्रमित मिले हैं।
    क्वारेंटाइन सेंटर्स में खाने-पीने के लिए प्र्याप्त संख्या में दोना-पत्तल, डिस्पोजेबल थाली- गिलासों के इंतजाम किए गए हैं। बार-बार हाथ धोने के लिए साबुन और पानी के साथ ही हैंड-सेनिटाइजर भी उपलब्ध कराया जा रहा है। मुंह ढंकने के लिए मास्क एवं गमछा भी दिया गया है। कई क्वारेंटाइन सेंटर्स में भोजन बनाने के सभी इंतजामों के साथ सोने के लिए गद्दा, दरी और चादर उपलब्ध कराया जा रहा है। इन सेंटर्स में साफ-सफाई की भी अच्छी व्यवस्था की गई है। इसके लिए सभी सेंटरों को प्र्याप्त मात्रा में डस्ट-बिन, झाड़ू, फिनाइल एवं बाल्टियां दी गई हैं। लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कई क्वारेंटाइन सेंटर्स में योग और प्राणायाम कराए जा रहे हैं। महिलाओं को माहवारी स्वच्छता के लिए सेनेटरी पैड भी वितरित किए जा रहे हैं। कचरे और बायो-मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निपटान के लिए सभी सेंटरों में समुचित व्यवस्था की गई है। क्वारेंटाइन सेंटर्स की व्यवस्था राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी आपदा राहत निधि तथा ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराए गए चैदहवें वित्त आयोग व मूलभूत की राषि से की जा रही है।

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में अतिरिक्त चावल से एथेनॉल उत्पादन करने की अनुमति देने के संबंध में केन्द्र सराकर से आग्रह किया था। मुख्यमंत्री के आग्रह पर राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति की 24 अप्रैल 2020 की बैठक में भारतीय खाद्य निगम में उपलब्ध सरप्लस चावल से एथेनॉल उत्पादन करने की अनुमति प्रदान की गई है। इसी परिप्रेक्ष में प्रदेश के खाद्य सचिव ने भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव को पत्र लिख कर छत्तीसगढ़ में अतिशेष 4 लाख मिट्रिक टन चावल से एथेनॉल बनाने की अनुमति देने का अनुरोध किया है।
    केन्द्रीय सचिव को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में प्रदेश के किसानों से समर्थन मूल्य पर 83 लाख 94 हजार मिट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। इसमें से बनाए गए कुल चावल से केन्द्रीय पूल एवं राज्य पूल में राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में आवश्यक मात्रा तथा 28.1 लाख मिट्रिक चावल केंद्रीय पूल में भारतीय खाद्य निगम को देने के बाद राज्य में लगभग 4 लाख मिट्रिक टन चावल अधिशेष रहेगा। इस अधिशेष चावल के लम्बे समय तक भण्डारित रहने के कारण खाद्यान्न की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में कोरोना वायरस महामारी की नियंत्रण के लिए डिस्टलरी से एथेनॉल आधारित सैनिटाइजर एवं ईबीपी कार्यक्रम के तहत अतिरिक्त 4 लाख मिट्रिक टन चावल को एथेनॉल बनाने वाले प्लांट को आपूर्ति की जा सकती है। खाद्यान्न से एथेनॉल बनाने वाले प्लांटों की स्थापना के संबंध में राज्य की औद्योगिक नीति 2019-24 से इस संबंध में आवश्यक प्रावधान किए गए हैं। खाद्य सचिव ने छत्तीसगढ़ राज्य को लगभग 4 लाख मिट्रिक टन चावल से एथेनॉल बनाने की शीघ्र अनुमति देने का अनुरोध किया है।

    रायपुर / शौर्यपथ / महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को रोजगार प्रदान करने में छत्तीसगढ़ पूरे देश में अव्वल रहा है। कबीरधाम जिला वित्तीय वर्ष 2020-21 में अब-तक सर्वाधिक परिवारों को 100 दिनों का रोजगार देने में राज्य में प्रथम स्थान पर है, वहीं बिलासपुर और राजनांदगांव जिले क्रमशः दूसरे व तीसरे स्थान पर है। पूरे राज्य में जून माह तक 55 हजार 981 परिवारों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से कबीरधाम जिला में सर्वाधिक 6 हजार 139 परिवारों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराए गए है, जो कि पूरे प्रदेश का 11 प्रतिशत है।
    मनरेगा अंतर्गत जिले में बड़ी संख्या पर रोजगार मूलक कार्य कराए जा रहे है। लॉकडाउन के समय कार्य के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पूरा पालन किया गया। कबीरधाम जिले में इस वित्तीय वर्ष में 1 लाख 47 हजार 862 परिवारों को रोजगार देते हुए अब तक 63.49 लाख से अधिक मानव दिवस रोजगार का सृजन किया जा चुका है।
    जिले के अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष लगभग 77 लाख मानव दिवस का लक्ष्य रखा गया था, उसके विरूद्ध इस वित्तीय वर्ष के तीन माह में ही 63 लाख से अधिक के मानव दिवस रोजगार का सृजन कर लिया गया है। जो कि लक्ष्य का 82 प्रतिशत है। इस तरह आने वाले समय में मनरेगा के तहत लक्ष्य से और अधिक ग्रामीणों को रोजगार प्राप्त हो जाएगा।

    रायपुर / शौर्यपथ / राज्य शासन की मंशा के अनुरूप वनवासियों एवं किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में कांकेर जिले के सिंगारभाट स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र में कोदो, कुटकी व रागी के प्रोसेसिंग के लिए संयत्र स्थापित किया जायेगा। इस संयंत्र के लग जाने से कोदो, कुटकी और रागी की खेती करने वाले किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य मिलेगा।

    विधायक शिशुपाल शोरी, मुख्यमंत्री के संसदीय सलाहकार राजेश तिवारी, कलेक्टर के.एल. चौहान तथा वन मण्डाधिकारी अरविंद पी.एम. की उपस्थिति में आज इस संबंध में जिला कार्यालय में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। कोदो, कुटकी और रागी के प्रोसेसिंग व विपणन के लिए किसानों, महिला स्व-सहायता समूह एवं युवा समूहों को दायित्व सौंपा जायेगा। कृषक उत्पादक संगठन बनाकर उसके माध्यम से कोदो, कुटकी और रागी फसलों का उत्पादन एवं संग्रहण किया जायेगा। महिला और युवा समूह के माध्यम से इसका प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन का कार्य कर कृषकों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि प्रभारी मंत्री गुरू रूद्रकुमार के मार्गदर्शन में कांकेर विकासखण्ड के अंतर्गत ग्राम पंचायत मर्दापोटी सर्कल के ग्राम इच्छापुर में हर्रा लघु वनोपज के प्रसंस्करण के लिए भी एक पृथक प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की तैयारी पूर्व से की जा रही है। इस प्रकार कांकेर में लघु धान्य और लघु वनोपज आधारित दो प्रोसेसिंग यूनिट लग रहे हैं।

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्य सचिव आर.पी. मण्डल की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की राज्य स्तरीय बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में बिलासपुर स्मार्ट सिटी परियोजना के विविध कम्पोनेंट्स पर विस्तार से विचार विमर्श और रायपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत किए गए कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में बस्तर में प्रस्तावित बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना के संबंध में चर्चा हुई। बैठक में अपर मुख्य सचिव वित्त अमिताभ जैन एवं मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू भी शामिल हुए।
    मुख्य सचिव ने बिलासपुर स्मार्ट सिटी परियोजना पूरी गुणवत्ता और तकनीकी से करने के निर्देश नगरीय प्रशासन विभाग को दिए। बिलासपुर नगर निगम के आयुक्त ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के कम्पोनेंट्स के संबंध में प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बिलासपुर स्मार्ट सिटी के लिए 163 करोड़ 48 लाख रूपए की योजना तैयार की गई है। मुख्य सचिव ने रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के कार्यो की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्ट्रीटलाईट के लिए टाईमर निर्धारित करने के निर्देश दिए है। नगरीय विकास विभाग की सचिव श्रीमती अलरमेल मंगई डी. ने बताया कि रायपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 190 करोड़ रूपए व्यय किए जा चुके है। रायपुर नगर निगम के आयुक्त ने बताया कि रायपुर में पेयजल आपूर्ति के तहत वाटरमीटर लगाए जाने की योजना है। उन्होंने बताया रायपुर में मोतीबाग और गंज मंडी क्षेत्र में उच्च क्षमता की पानी टंकियां बनायी गयी है। जल संसाधन विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत ने बताया कि बस्तर क्षेत्र में बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना के तहत सर्वे का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी, उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ, लोक निर्माण विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, आवास एवं पर्यावरण विभाग की सचिव श्रीमती संगीता पी. सहित अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्य सचिव आर.पी. मंडल की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की 47वीं बैठक सम्पन्न हुई। प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सेक्टर-13 नवा रायपुर अटल नगर में मंडल द्वारा अत्याधुनिक केन्द्रीय पर्यावरणीय प्रयोगशाला लोक निर्माण विभाग के माध्यम से तैयार की जाएगी। विभिन्न पर्यावरणीय पैरामीटर्स को मापने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य की यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला होगी, जिसमें जन-जागरूकता के लिए विभिन्न पर्यावरणीय विषयों पर मॉडल्स की प्रदर्शनी भी रहेगी।
    बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य के उद्योग जैसे स्पंज आयरन संयंत्र, स्टील प्लांट, सीमेंट प्लांट आदि में बड़ी मात्रा में लगने वाले कच्चे माल आयरन ओर, जिप्सम, कोयला, स्पंज आयरन, सीमेंट आदि का परिवहन सड़क मार्ग से मेकेनिकली कव्हर्ड वाहनों से ही किए जाने का निर्णय लिया गया आदि एवं वाहनों मेकेनिकली कव्हर्ड वाहनों की अनुपलब्धता की स्थिति में उद्योगों को एक वर्ष का समय इस शर्त के साथ प्रदान किया गया कि उद्योगों द्वारा कच्चे माल/उत्पादों का परिवहन तारपोलिन अथवा उपयुक्त मटेरियल से उचित एवं पर्याप्त रूप से ढंककर किया जाए। बैठक में गंभीर प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्र रायपुर के सिलतरा एवं उरला तथा अन्य प्रदूषित क्षेत्र कोरबा एवं भिलाई में प्रदूषण के मुख्य स्त्रोतों का अनुपात एवं उसे वहन करने की क्षमता का अध्ययन ख्यातिलब्ध संस्थाओं जैसे आई.आई.टी., एनआईटी अथवा नीरी नागपुर से कराए जाने का निर्णय लिया गया। बैठक में नेशनल क्लीन एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसी प्रकार प्रदेश की 5 प्रदूषित नदियों में अपस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम में 10 कंटीन्यूअस वाटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
    बैठक में निर्णय लिया गया कि पर्यावरण संरक्षण हेतु मंडल रायपुर, भिलाई-दुर्ग एवं बिलासपुर के ऐतिहासिक महत्व के कुछ तालाबों में पर्यावरणीय सुधार एवं उनके जीर्णोद्धार का कार्य भी करेगा। इसके लिए कार्य प्रस्ताव तैयार करने का निर्णय लिया गया। बैठक में प्रबंध संचालक वन विकास निगम श्री राजेश गोवर्धन, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ अधोसंरचना विकास निगम अनिल राय, आयुक्त नगर पालिक निगम बिलासपुर प्रभाकर पाण्डेय एवं सदस्य सचिव छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल आर.पी. तिवारी उपस्थित थे।

    राज्यपाल से खादी और ग्रामोद्योग आयोग के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी त्रिभुवन ने भेंट की

    रायपुर / शौर्यपथ / राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके से यहां राजभवन में खादी और ग्रामोद्योग आयोग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के छत्तीसगढ़ के राज्य कार्यालय के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री एस.एस. त्रिभुवन ने सौजन्य मुलाकात की। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आत्मनिर्भर अभियान की शुरूआत की है। उन्होंने इसके लिए आवश्यक है कि युवा स्वरोजगार से जुड़े, इससे वे स्वयं अपने पैरों पर खड़े होंगे और दूसरों को भी रोजगार देंगे। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में महिलाएं भी स्वयंसहायता समहू बनाकर स्वयं का उद्यम शुरू कर सकते हैं। इससे महिलाएं जागरूक और सशक्त होंगी। इस कोरोना काल में बड़ी संख्या में श्रमिक प्रदेश में आए हैं। उन्हें खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग द्वारा संचालित योजना सहित अन्य योजनाओं से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि वे अपना जीवनयापन कर सके। श्रमिकों एवं किसी भी व्यक्ति को स्वरोजगार का ऋण देने से पहले उन्हें संबंधित रोजगार का प्रशिक्षण देना चाहिए, जिससे तकनीकी रूप से दक्ष होने पर वह व्यक्ति योजना के तहत दिये जाने वाले सहयोग का सदुपयोग कर सकेगा।
    सुश्री उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार की एक अति महत्वपूर्ण योजना है, प्रदेश के बेरोजगार युवक-युवती इसका लाभ उठाएं। श्री त्रिभुवन ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत इस योजना के तहत स्वयं के उद्यम शुरू करने के लिए रू. 25 लाख तक का ऋण बैंक के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है, जिसमें 35 प्रतिशत तक सब्सिडी हितग्राही को प्राप्त होता है। एस.टी.एस.सी. एवं महिला वर्ग को ग्रामीण क्षेत्रों में 35 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत तक छूट दी जाती है तथा 5 प्रतिशत तक स्वयं का अंशदान होता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 1 लाख रू. पर एक व्यक्ति को रोजगार देना अनिवार्य होता है। इच्छुक युवक-युवतियां खादी ग्रामोद्योग के कार्यालय के संपर्क कर सकते हैं और इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि हमारे कार्यालय का दूरभाष क्रमांक 07712886428 है और वेबसाईट www.pmegpeportal.gov.in है।
    इस अवसर पर राज्यपाल ने खादी और ग्रामोद्योग आयोग के निर्देशिका का विमोचन किया। आयोग की तरफ से राज्यपाल को कोसे की बनी शाल और साड़ी भेंट की गई।

    / 19 एकड़ में विकसित ऑक्सीजोन में 4 हजार से अधिक पौधे
    // शहरवासी अब बीच शहर में शुद्ध आबो-हवा के साथ लेंगे सैर का आनंद

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राजधानी रायपुर के हृदय स्थल में 19 एकड़ में बनाए गए ऑक्सीजोन का आज लोकार्पण किया। करीब 11 करोड़ की लागत से बने इस ऑक्सीजोन से नगरवासी अब बीच शहर में शुद्ध आबो-हवा के साथ सैर और भ्रमण का भरपूर आनंद उठा सकेंगे। यह नगर के रौनक के साथ ही पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर की हरियाली बढ़ाने की दिशा में ऑक्सीजोन एक महत्वपूर्ण कदम है। लोकार्पण के अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यहां सफेद चंदन का पौधा लगाया।
    कलेक्टोरेट परिसर के समीप बनाए गए इस ऑक्सीजोन में 12 एकड़ में अब तक 4 करोड़ रूपए की राशि व्यय कर 75 प्रजातियों के 4 हजार से अधिक पेड़-पौधे लगाए गए हैं। इस ऑक्सीजोन के बनने से शहर के पर्यावरण में सुधार के साथ ही युवाओं, बुजुर्गो बच्चों सहित शहरवासियों को सुबह-शाम सैर और मनोरंजन के लिए बेहतर स्थान मिलेगा। इस अवसर पर वन मंत्री मोहम्मद अकबर, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, राज्यसभा सांसद श्रीमती छाया वर्मा, नगर निगम रायपुर के महापौर एजाज ढेबर, रायपुर उत्तर के विधायक कुलदीप सिंह जुनेजा सहित जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा है कि शहरों में भी ज्यादा से ज्यादा हरियाली हो। यह राज्य सरकार का प्रयास है। रायपुर का ऑक्सीजोन इस दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। हमें सबकी भागीदारी से ऑक्सीजोन की हरियाली को बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा कि रायपुर शहर के लोगों को लंबे समय से ऑक्सीजोन की प्रतिक्षा थी। आज उनका यह इंतजार पूरा हुआ। ऑक्सीजोन सुबह और शाम की सैर करने वालों के लिए एक बहुत बढिय़ा स्थान है। ऑक्सीजोन में प्रदेश के वनों में पाये जाने वाली वृक्षों की प्रजातियों के पौधे भी रोपे गए हैं। पुराने वृक्षों को बचाकर रखा गया है। बरसात में वन विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने में वृक्षारोपण किया जा रहा है। जो लोग घर में पौधे लगाना चाहते हैं उनकों घर पहुंचाकर पौधे दिए जा रहे हैं। नदी, नालों के किनारे खाली जगह पर भी वृक्षारोपण किया जा रहा है।
    ऑक्सीजोन में बच्चों के खेलने के लिए झूले, फिसलपट्टी और ओपन एयर जिम के उपकरण लगाए गए हैं। ऑक्सीजोन में पौधरोपण और संरक्षण के प्रयासों के कारण एक वर्ष में ही यहां हरियाली दिखने लगी है और पक्षी तथा तितलियां बड़ी संख्या में अपना बसेरा बनाने लगे हैं। इसकी सुन्दरता और हरीतिमा देखते ही बनती है। ऑक्सीजोन में लॉन विकसित किए गए हैं और छोटा गुलाब गार्डन भी लगाया गया है।
    मॉर्निंग और इविनिंग वाक के लिए ऑक्सीजोन में 3 किलोमीटर से अधिक लम्बाई में पाथवे और पगड़ंडियां तैयार की गई हैं। इसके अलावा यहां दो वाटर बॉडी है, जिसमें से एक प्राकृतिक और दूसरी निर्मित की गई है। वर्षा का सारा पानी चैनल से होकर इसमें इकठ्ठा होता है और इससे पौधों की सिंचाई की व्यवस्था की गई है। यहां एक प्राकृतिक वाटर फॉल भी बनाया गया है, जो रात में लाईट्स में बड़ा सुन्दर दिखता है। यहां बांस निर्मित 8 पगौडा बनाए गए हैं और जगह-जगह छोटी चट्टानों और पत्थरों से संरचनाएं भी तैयार की गई है। युवाओं के लिए आकर्षक सेल्फी जोन भी बनाया गया है।
    ऑक्सीजोन में आम, जामुन, सीताफल, आंवला तथा अमरूद जैसे फलदार वृक्ष और तितलियों को आकर्षित करने के लिए जारूल, अमलतास, कचनार, मौलश्री, आकाशनीम जैसे फूलदार पौधे लगाए गए हैं। यहां 503 पुराने वृक्षों को संरक्षित किया गया है और पार्किंग पाथवे वाटर बॉडी में आने वाले पेड़ों को भी नहीं काटा गया है। इस अवसर पर मुख्य सचिव आर. पी. मण्डल, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, कमिश्नर जी. आर. चुरेन्द्र, कलेक्टर डॉ. एस. भारतीदासन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के पीसीसीएफ राजेश गोवर्धन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय यादव और आयुक्त नगर निगम रायपुर सौरभ कुमार सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

    जीएसटी संग्रहण पिछले वर्ष के मुकाबले 22 प्रतिशत बढ़ा
    वाहन रजिस्ट्रेशन में मई माह की तुलना में साढ़े तीन गुना वृद्धि
    संकट के इस काल में छत्तीसगढ़ ने दिखाई राह: मुख्यमंत्री बघेल

    रायपुर / शौर्यपथ / कोरोना वायरस (कोविड-19) के चलते पूरे देश में जहां आर्थिक मंदी का माहौल है, वहीं अनलॉक के बाद छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था पूरी रफ्तार से चल पड़ी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए गए सकारात्मक प्रयासों से राज्य में जीएसटी, आटोमोबाईल, कृषि सहित अन्य क्षेत्रों में तेेजी देखी जा सकती है। राज्य में जीएसटी संग्रहण पिछले वर्ष की तुलना में जहां 22 प्रतिशत अधिक बढ़ा है, वहीं वाहनों के रजिस्ट्रेशन में मई माह की तुलना में जून माह में साढ़े तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही मनरेगा के तहत लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने और वनवासियों को राहत पहंुचाने के लिए वनोपजों के संग्रहण में छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर है।
    लॉकडाउन के दौरान भी छत्तीसगढ़ में जीएसटी में इजाफा हुआ है। पिछले साल जून महीने के मुकाबले इस साल जून में 22 फीसदी ज्यादा जीएसटी का संग्रह हुआ है। वर्ष 2019 में जहां 2,093 करोड़ रूपए जीएसटी संग्रह हुआ था, वहीं 2020 में 2,549 जीएसटी प्राप्त हुआ है। लॉकडाउन के दौरान छत्तीसगढ़ में ऑटोमोबाइल इंड्रस्ट्री में भी बेहतर कारोबार देखने को मिला है। जून 2020 में जयपुर (राजस्थान) के बाद रायपुर (छत्तीसगढ)़ में सर्वाधिक कार और बाइक की बिक्री हुई है। रायपुर में मई माह में जहां 7 हजार 603 बाइक बिकी थी, वहीं जून माह में यह संख्या बढ़कर 27 हजार हो गई। इसी तरह मई माह में एक हजार 107 कार बिकी थी, वहीं जून में यह संख्या बढ़कर 2 हजार 889 हो गई। आरटीओ कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार लॉकडाउन अवधि में छत्तीसगढ़ में अप्रैल माह में 891 वाहन, मई माह में 9681 वाहन और जून माह में 32 हजार 982 वाहनों का रजिस्ट्रेशन परिवहन कार्यालयों में हुआ है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना की प्रथम किस्त प्राप्त होने के बाद राज्य में किसानों ने 3 हजार नये टेªक्टर भी खरीदे हैं।
    छत्तीसगढ़ राज्य महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में जॉब कॉर्डधारी परिवारों को 100 दिनों का रोजगार देने में देश में शीर्ष स्थान पर है। इसी प्रकार लक्ष्य के विरूद्ध रोजगार सृजन में देश में दूसरे स्थान पर है। पहली तिमाही में ही राज्य में 8.85 करोड़ मानव दिवस का रोजगार सृजन किया गया है। अब तक 55,981 परिवारों ने 100 दिनों का रोजगार प्राप्त कर लिया है। देश में 100 दिनों का रोजगार हासिल करने वाले कुल परिवारों में अकेले छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ ने रोजगार सृजन के मामले में सालभर के लक्ष्य का 66 प्रतिशत पूरा कर लिया है। इसमें लक्ष्य का 70 प्रतिशत से अधिक काम का लक्ष्य हासिल करने में नक्सल प्रभावित जिले आगे हैं।
    मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने राज्य में समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए वनोपजों की संख्या 7 से बढ़ाकर 31 कर दी है। इससे प्रदेश के वनवासी परिवारों को काफी राहत मिली है। लॉकडाउन अवधि में छत्तीसगढ़ प्रदेश लघु वनोपजों के संग्रहण में देश में पहले नम्बर पर है। छत्तीसगढ़ ने वनोपज संग्रहण के सालाना लक्ष्य को 6 माह में पूरा कर लिया है। राज्य में अब तक 104 करोड़ के डेढ़ लाख क्विंटल लघु वनोपजों का संग्रहण किया गया है।
    वैश्विक महामारी कोविड-19 की वजह से उत्पन्न कठिन परिस्थितियों के बावजूद छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गयी है। सीएमआईई के सर्वेक्षण में प्रदेश में बेरोजगारी की दर अप्रैल माह में 3.4 प्रतिशत रही, जो 12 महीने के सबसे निचले स्तर पर थी। यह उसी अवधि में राष्ट्रीय बेरोजगारी की दर (23.5 प्रतिशत) से काफी कम रही। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में लॉकडाउन के दौरान छत्तीसगढ़ में कृषि और उससे सम्बंधित कार्यों में बनी तेजी को सराहा। उसने अपनी रिपोर्ट में बताया कि देश व्यापी लॉकडाउन में भी छत्तीसगढ़ ने तेजी से आर्थिक वृद्धि दर्ज की है।
    मुख्यमंत्री ने कहा है कि संकट के इस समय में भी छत्तीसगढ़ प्रदेश ने देश को राह दिखाई है। इस दौरान राज्य ने जो उपलब्धियां हासिल कीं वह शासन के संकल्प का परिणाम तो है ही, छत्तीसगढ़ के लोगांे के अनुशासन का भी परिणाम है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी को नियंत्रित करने और उपचार की सुविधाएं मुहैया कराने के मामले में भी हमारी स्थिति बेहतर है। इसी संकल्प और अनुशासन के साथ हम न सिर्फ इस संकट से पार पाएंगे, बल्कि नवा छत्तीसगढ़ गढ़ने के अपने लक्ष्य को समय पर हासिल भी कर लेंगे।

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