August 02, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

       शौर्यपथ / काशी के दशाश्वमेध घाट पर होने वाली दैनिक गंगा आरती की भव्यता और यहां होने वाली भीड़ दुनिया में चर्चित है। अनलॉक टू में गंगा आरती पूरी दुनिया में लाइव दिखने जा रही है। आयोजक संस्था-https://www.gangasevanidhi.org/ की वेबसाइट से इसे ऑनलाइन किया जाएगा। प्रसारण का ऑनलाइन ट्रायल मंगलवार को हुआ।

    संस्था के अध्यक्ष सुशांत मिश्र ने कहा कि गत 18 मार्च से सात की जगह सिर्फ एक ब्राह्मण से गंगा पूजन और आरती की परंपरा का निर्वाह हो रहा है। आने वाले दिनों में दैनिक गंगा आरती में आस्था रखने वालों को घाट पर मौजूद होने की अनुभूति कराने के लिए आरती का प्रसारण छह अलग-अलग कोणों से एक साथ होगा। लाइव के लिए संस्था की वेवसाइट में कुछ बदलाव हो रहे हैं। संस्था की साइट के लिंक से लोग फेसबुक, इंस्टाग्राम पर भी लाइव आरती देख सकेंगे।

    गंगोत्री सेवा समिति भी तैयारी में
    माता शीतला मंदिर के सानिध्य में दशाश्वमेध घाट पर गंगोत्री सेवा समिति की ओर से होने वाली दैनिक गंगा आरती को भी लाइव करने की तैयारी है। संस्था के संस्थापक अध्यक्ष पं. किशोरी रमण दुबे (बाबू महाराज) ने बताया कि आरती के डिजिटल संस्करण की तैयारी की जा रही है।

    काशी में दैनिक गंगा आरती
    काशी में दैनिक गंगा आरती का क्रम बहुत पुराना है। गंगा महासभा की ओर से काशी में 1970 तक दैनिक गंगा आरती कराई जाती रही। बीच में यह क्रम बाधित हो गया। 13 नवंबर-1997 को बाबू महाराज और मुन्नन मिश्रा ने मिलकर पुन: भव्य तरीके से गंगा आरती की शुरुआत गंगोत्री सेवा समिति के बैनर तले की। कुछ समय बाद मुन्नन महाराज ने घाट के दूसरे हिस्से में गंगा सेवा निधि की ओर से आरती शुरू कराई।

     

    खेल / शौर्यपथ / भारतीय तेज गेंदबाज श्रीसंत ने अपने करियर में कई दिग्गज क्रिकेटरों को देखा है। वह उन कुछ चुनिंदा क्रिकेटरों में से एक हैं, जिन्होंने अपने देश के लिए टी-20 और वनडे विश्वकप दोनों जीते हैं। वह 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 के वनडे वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का हिस्सा थे। टी-20 वर्ल्ड कप के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच हुए मैच में वह सेंटर में थे। इस मैच में श्रीसंत ने चार ओवर में 44 रन देकर सोहैल तनवीर का विकेट झटका था। श्रीसंत ने हाल ही में बताया कि 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल मैच में उनका सबसे ज्यादा दबाव वाला लम्हा कौन-सा था।

    2007 टी-20 वर्ल्ड कप के भारत और पाकिस्तान के फाइनल मैच में उनकी गेंदबाजी से ज्यादा चर्चा उनकी फील्डिंग की हुई थी। खासतौर पर मिसबाह उल हक के उस कैच की, जिसकी वजह से भारतीय क्रिकेट टीम इंतिहास रच पाई। पाकिस्तान को चार गेंदों पर छह रन की जरूरत थी। मिसबाह ने शॉट खेला और श्रीसंत ने फाइन लेग पर शानदार कैच लपक कर टीम इंडिया की इतिहास रचने में मदद की।

    हालांकि कई लोग आज भी उस कैच को नहीं भूले हैं, लेकिन 37 वर्षीय श्रीसंत के मुताबिक मिसबाह के कैच से ज्यादा वह शाहिद अफरीदी के कैच के दौरान दबाव में थे। उस वाकये को याद करते हुए श्रीसंत ने क्रिकट्रेकर के साथ बातचीत में कहा कि इरफान पठान को पता था कि शाहिद अफरीदी गेंद को हवा में मारेंगे और पहले ही उन्होंने मुझसे कैच लेने के लिए तैयार रहने को कह दिया था।

    श्रीसंत ने बताया, ''मेरे लिए शाहिद अफरीदी का कैच ज्यादा मुश्किल था। इरफान पठान ने मुझसे कहा था कि अफरीदी जरूर सिक्स के लिए हिट करेंगे, बॉल लॉन्ग ऑफ के लिए आएगी और पहली ही गेंद में वह आउट हो जाएंगे। तू पकड़ लेना। उन्होंने पहले ही देख लिया था कि क्या होने वाला है।वह कई बार अफरीदी का विकेट ले चुके थे। किस्मत से गेंद हवा में ऊपर चली गई, और मैंने उसे पकड़ लिया।''

    श्रीसंत की तरह और भी कई हैं, जो आज भी मिसबाह के कैच को याद करते हैं। मिसबाह के कैच के बारे में श्रीसंत ने कहा कि जब गेंद मेरी तरफ आ रही थी, मैं सचमुच उस वक्त कैच के बारे में नहीं सोच रहा था, बल्कि मैं उन्हें दो रन लेने से रोकने की तरफ सोच रहा था।

    उन्होंने कहा, ''मिसबाह के विकेट के समय, मैं दाएं या बाएं डाइव कर गेंद को रोकने के बारे में सोच रहा था, ताकि मिसबाह दो रन न ले सकें। मैं गेंद को कैच करने के बारे में नहीं सोच रहा था। यहां तक कि धोनी भाई ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि मिसबाह का कैच भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे दबाव वाला कैच था। लेकिन मेरे लिए उस मैच में अफरीदी का कैच मेरे करियर का सबसे दबाव वाला कैच था।''

     

    मनोरंजन / शौर्यपथ / अपने विवादित बयानों को लेकर अकसर सुर्खियों में रहने वाली स्वरा भास्कर इन दिनों अपनी नई वेब सीरीज 'रसभरी' को लेकर खूब चर्चा में बनी हुई हैं, जो 25 जून से अमेजॉन प्राइम पर स्ट्रीम हुई है। इस सीरीज को लेकर वह काफी ट्रोल भी हो रही हैं तो वहीं कुछ लोगों को यह बहुत पसंद आ रही है। इस वेब सीरीज में स्वरा एक हॉट इंग्लिश टीचर की भूमिका में नजर आ रही हैं जहां उन्होंने कई सारे बोल्ड सीन भी दिए हैं, जिसे सोशल मीडिया यूजर्स पोर्न वेब कहकर ट्विटर पर स्वरा ट्रोल कर रही हैं और यही कारण है कि स्वरा ट्विटर ट्रेंड कर रही हैं। काफी विरोध के बाद अब स्वरा के फैंस #Rasbhari और #RasbhariOnPrime हैशटैग लिखकर इसका इस वेब सीरीज का सपोर्ट कर रहे हैं। अपने सीरीज का सपोर्ट होता देखकर अब स्वरा का रिएक्शन सामने आया है।

    स्वरा भास्कर ने एक यूजर के सवाल का जवाब देते हुए लिखा है कि रसभरी में कोई भी सेक्स या न्यूड सीन नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कई सारी इमोजी भी शेयर किया है। इस पोस्ट में यूजर ने एक ट्रैफिक शेयर किया है। अपनी इस पोस्ट से पहले एक न्यूज वेबसाइट से बातचीत करते हुए स्वरा ने अपनी वेब सीरीज के साथ-साथ ट्रोलर्स को जवाब देते हुए कहा था कि इस देश में करोड़ों लोग रहते हैं, सबकी अलग-अलग सोच है। मैं जो कुछ भी बोलती हूं, वो मैं पैसे लेकर नहीं बोलती। वो मेरी मान्यता है, मेरे सिद्धांत है। मैं विश्वास करती हूं उन चीजों पर इसलिए मैं खड़ी हूं उस विश्वास के साथ। अगर आप किसी चीज पर विश्वास करते हैं तो आप बेशक उस चीज के लिए लड़ेंगे।'

    स्वरा ने आगे मजाक में ये भी कहा था कि 'मेरे ट्रोल्स मुझे जितनी शिद्दत से प्रेम करते हैं इतना तो मुझे कभी किसी बॉयफ्रेंड ने भी नहीं किया होगा।' हालांकि स्वरा ने फिर बाद में कहा कि 'हां, मझे बुरा लगता है जब कोई मुझे गाली देता है क्योंकि हम इतनी मेहनत से काम करते हैं।' 'रसभरी' के कंटेंट पर हो रहे विवादों को लेकर स्वरा कहती हैं कि 'रसभरी को लोग पसंद कर रहे हैं और अच्छी बातें भी कर रहे हैं। लोकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जो बुरी चीजें कह रहे हैं। लेकिन जब मैं उनकी बातें सुनती हूं तो उससे यह साफ हो जाता है कि उन्होंने शो देखा नहीं है, वो बस मुझे गाली देना चाहते हैं।

    गौरतलब है कि वेब सीरीज रसभरो को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष और लेखक प्रसून जोशी ने 'रसभरी' के एक सीन पर अपनी नाराजगी जाहिर किया था। उन्‍होंने ट्वीट किया,' दुःख हुआ ...वेब सिरीज़ #rasbhari में असंवेदनशीलता से एक छोटी बच्ची को पुरुषों के सामने उत्तेजक नाच करते हुए एक वस्तु की तरह दिखाना निंदनीय है। आज रचनाकारों और दर्शक सोचें बात मनोरंजन की नहीं,यहाँ बच्चियों प्रति दृष्टिकोण का प्रश्न है,यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है या शोषण की मनमानी।

     

    नजरिया / शौर्यपथ / बिजली गिरने या वज्रपात की परिस्थिति सामान्यत: दक्षिण-पश्चिमी मानसून के पहले दौर और उत्तराद्र्ध में बहुतायत में बनती है, किंतु पूरे मानसून के दौरान वज्रपात की आशंका बन सकती है। पश्चिमी विक्षोभ की विशेष परिस्थितियों में यह घटना ठंड के मौसम (नवंबर से मार्च) में भी कुछ जगहों में हो सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पश्चिमी और मध्य भारत में वज्रपात का प्रकोप अधिक है। पूरे देश में 12 ऐसे राज्यों की पहचान की गई है, जहां वज्रपात की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। इनमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा प्रमुख हैं।
    अभी मानसून की शुरुआत ही हुई कि बिहार और उत्तर प्रदेश में वज्रपात का कहर टूट पड़ा। दोनों प्रदेशों में ऐसी घटनाओं की निगरानी के लिए ‘भारत मौसम विज्ञान विभाग’ ने उन्नत किस्म के यंत्र इन प्रदेशों की राजधानियों में लगा रखे हैं और करीब ढाई से तीन घंटे पूर्व यह ऐसी घटनाओं की जानकारी संबंधित राज्य सरकारों को उपलब्ध कराता है। इस सबके बावजूद इस प्रकार की घटनाओं का होना दुखद है और दर्शाता है कि वज्रपात से होने वाली क्षति से बचने के प्रबंधन में कहीं न कहीं कमी हो रही है। वास्तव में, इस क्षेत्र में ज्यादा काम हुआ ही नहीं है। वज्रपात से खतरा सामान्यत: खुले में, पानी से भरे खेतों में काम करने वाले किसानों, मजदूरों, लंबे पेड़ों के नीचे शरण लिए लोगों को ज्यादा होता है। अत: अगर आपको वज्रपात करने वाले बादलों की सही समय पर जानकारी मिल जाए और आस-पास के किसी पक्के घर में चले जाएं, तो आप सुरक्षित रह सकते हैं।
    वज्रपात कर सकने वाले बदलों का आधार काफी गहरे काले रंग का होता है। बादलों की ऊपरी सतह समतल होती है। ऐसे बादलों के अंदर से रुक-रुककर बिजली के चमकने से एक लंबी लकीर जैसी बनती रहती है तथा गर्जना की आवाज आती रहती है। बिजली की चमक और आवाज के बीच के अंतराल को मापकर बादल की दूरी ज्ञात की जा सकती है। जैसे, अगर अंतराल 18 सेकंड है, तो बादल की दूरी (18/3=6) छह किलोमीटर है, अगर अंतराल 30 सेकंड है, तो बादल की दूरी (30/3=10) दस किलोमीटर होगी। अत: प्रत्येक तीन सेकंड के अंतराल की दूरी करीब एक किलोमीटर होगी। वज्रपात के समय पैदा चमक की लंबाई औसतन छह मील के करीब होती है। ऐसे बादल करीब 10 किलोमीटर की दूरी तक प्रभाव डाल सकते हैं। अगर इस प्रकार का बादल पास है और आप घर से बाहर खुली जगह पर हैं, तो आस-पास के घर में जाकर खुद को सुरक्षित कर सकते हैं, क्योंकि वज्रपात से बचने हेतु सबसे सुरक्षित स्थान घर ही होता है।
    मौसम विभाग ने लखनऊ और पटना में जो रडार लगा रखे हैं, वे करीब 200-300 किलोमीटर की दूरी से ही वज्रपात वाले बादलों को चिन्हित कर सूचना दे सकतन इलाकों में ज्यादा वज्रपात होते हैं, उनमें विशेष चेतावनी और विशेष टावर निर्माण जैसे उपाय किए जा सकते हैं। तात्कालिक जरूरत को देखते हुए लोगों को अलर्ट करने हेतु सभी ग्राम पंचायतों में लोकल हूटर का प्रबंध किया जा सकता है। लोगों की जान बचाने के लिए अगर पूरे जिले में एक-दो घंटे काम बंद रहता है, तो कोई हर्ज नहीं है।
    मानसून सीजन के शुरू होते ही भारी वर्षा की वजह से वज्रपात की समस्या के अलावा बाढ़ की समस्या भी बढ़ जाती है। अभी मानसून के शुरू होते ही पूर्वोत्तर राज्यों, खासकर असम और पूर्वी बिहार जलभराव या बाढ़ की समस्या से जूझने लगे हैं, जिससे करीब 10 लाख लोगों के प्रभावित होने तथा करीब 15 लोगों के मारे जाने की खबर है। यह समस्या आने वाले दिनों दिनों में निश्चित तौर पर बढ़ेगी।
    अत्यधिक वर्षा की समस्या वायु प्रदूषण, पेड़ों को काटे जाने, भूमि के उपयोग में परिवर्तन की वजह से हो रहे जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हुई है। ऐसी घटनाएं पिछले दशकों में काफी बढ़ी हैं। मौसम विभाग एक से पांच दिन पहले ही भविष्यवाणी करने की क्षमता रखता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का तंत्र पूरे देश में फैला है। यह लोगों की भी जिम्मेदारी है कि आपदा के समय चेतावनियों पर विशेष ध्यान दें। सतर्क रहने के साथ ही बचाव के तमाम जरूरी इंतजामों पर भी ध्यान देना चाहिए।
    (ये लेखक के अपने विचार हैं)अतींद्र कुमार शुक्ला, मौसम विज्ञानी

     

     

    सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / लद्दाख सीमा पर भारत और चीन के बीच जो समस्या खड़ी हुई है, उसके फौरी निदान की कोशिशें जारी हैं, मगर इससे इतर भी कई मोर्चे हैं, जिन पर दोनों देशों के बीच तल्खियां बढ़ सकती हैं। डिजिटल क्षेत्र में 59 चीनी एप को प्रतिबंधित करके नई दिल्ली ने बीजिंग को यह साफ कर दिया है कि अब वह उससे बहुत सदाशयता की उम्मीद न रखे। इस बीच एक खबर यह आ रही है कि चीनी कंपनियां तीसरी पार्टी के जरिए भारतीय बाजार में अपना निवेश और उत्पादों का प्रवाह बढ़ाने में जुटी हैं। और इसके लिए वे सिंगापुर व हांगकांग जैसे देशों के व्यापारिक-मार्ग का इस्तेमाल कर रही हैं। जाहिर है, इन देशों के साथ हमारा मुक्त व्यापार समझौता है और इसके अलावा भी अनेक द्विपक्षीय करार हैं। यदि ऐसा है, तो यह न सिर्फ अवैध कारोबार है, बल्कि यह हमारे घरेलू उद्योगों के हितों को नुकसान पहुंचाने वाली धूर्तता है।
    फेडरेशन ऑफ इंंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स के आंकडे़ भी इस बात के साफ संकेत दे रहे हैं। इसके मुताबिक, पिछले साल चीन के साथ अपने व्यापार घाटे को भारत ने जितना पाटा था, लगभग उतना ही हांगकांग के साथ उसका व्यापार घाटा बढ़ गया। यानी भारत का सारा लाभ शून्य हो गया। सिंगापुर के मामले में भी आंकडे़ ऐसे ही इशारे कर रहे हैं। उम्मीद है, वाणिज्य मंत्रालय नई पृष्ठभूमि में इसका संज्ञान लेगा और सरकार समुचित कार्रवाई करेगी। यह कोई ढकी-छिपी बात नहीं है कि पिछले कई वर्षों से दुनिया के बड़े बाजारों पर कब्जा करने के लिए चीन हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। एशिया और अफ्रीका के छोटे-छोटे देशों को बड़े कर्ज देकर या तरह-तरह की परियोजनाओं में निवेश के जरिए वह पहले ही अपना आर्थिक उपनिवेश बना चुका है, पर बडे़ बाजारों में उसकी दाल नहीं गल रही। अमेरिका ने ‘टैरिफ-वॉर’ छेड़कर उसे काफी हद तक झुकने को बाध्य भी किया है। ऐसे में, भारतीय बाजार में यदि चीन चोर दरवाजे से घुसने में कामयाब हुआ, तो हमारे घरेलू उद्योग-धंधों को वह काफी आघात पहुंचा सकता है। खासकर लघु एवं मध्यम श्रेणी के उद्योगों के लिए उसके उत्पादों का सामना करना असंभव हो जाएगा। बडे़ पैमाने पर रोजगार पैदा करने की चुनौती झेल रहा देश इस स्थिति से निपटने के लिए तैयार नहीं है।
    अंतरराष्ट्रीय राजनय के अपने तकाजे होते हैं। हम कई बार मित्र देश के साथ भी कुछ मसलों पर इत्तफाक नहीं रखते और अपनी अलग राह चुनते हैं। चीन पड़ोसी है, मित्र देश नहीं। वह हमारे लिए लगातार चुनौतियां खड़ी कर रहा है। न सिर्फ वैश्विक मंचों पर, बल्कि प्रकारांतर से करीबी पड़ोसियों के मामले में भी। अब हमारे आर्थिक हितों को चोर दरवाजे से नुकसान पहुंचाने की बातें आ रही हैं। इसलिए वक्त आ गया है कि उससे जुड़े तमाम मोर्चों पर पैनी निगाह रखने और त्वरित फैसले में समर्थ एक मुकम्मल विंग का गठन किया जाए। भौगोलिक सीमाओं के अलावा डिजिटल दुनिया व अन्य आर्थिक क्षेत्रों में भी बेकाबू हो रही चीनी महत्वाकांक्षाओं को लगाम लगाने का यही सबसे मुफीद वक्त है। चीन के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करने की कवायदों को गति देने के अलावा हमें उन छिद्रों को भी बंद करने की जरूरत है, जिधर से हमारे हितों को हानि पहुंच रही है। बीजिंग को समझना ही होगा कि भारत अब उसके किसी छल का शिकार नहीं बन सकता।

     

    मेलबॉक्स / शौर्यपथ / आज की युवा पीढ़ी काफी ऊर्जावान है। वह न केवल सपने देखती है, बल्कि उनको पूरा करने का हौसला भी रखती है। मगर दुख की बात यह है कि वह बहुत जल्दी विफलताओं के आगे घुटने टेक देती है और अपना जीवन खत्म कर लेती है। नौजवानों को समझना चाहिए कि विफलता तो सफलता की पहली सीढ़ी है। जीवन रहेगा, तो उन्नति के अवसर भी मिलेंगे। जिस प्रकार चलते-चलते थकने पर हम विश्राम कर लेते हैं और फिर नई ऊर्जा के साथ चलना आरंभ करते हैं, उसी प्रकार असफलता भी इंसान के जीवन का विश्राम है, अंत नहीं। आज के महानायक ने भी लगातार अपनी ग्यारह फिल्मों की असफल वैतरणी को पार किया है। बस, हमें खुद पर विश्वास रखकर सब्र और धैर्य के साथ बुरे वक्त के गुजरने का इंतजार करना चाहिए। सामने आई मुश्किलों का हंसकर स्वागत करना ही जीवन है।
    विभा गुप्ता, बेंगलुरु

    रोकना होगा विस्तार
    वैश्विक स्तर पर आज चीन जिस गति से विस्तार कर रहा है, उससे दुनिया परेशान है। भारत, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, जापान, अमेरिका जैसे देश अब गंभीरता से उसकी नीतियों के विरुद्ध एकजुट हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में चीन ने जो दबदबा हासिल कर लिया है, वह अन्य देशों की संप्रभुता और निजता के लिए खतरा बनकर उभरा है। आज कई देशों के बाजार पर चीन का कब्जा है। चिंता की बात यह भी है कि कई देशों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चीन पर निर्भर हो गई है। ऐसे में, चीन की चुनौतियों का मिलकर मुकाबला करना होगा। समय रहते अगर उसकी चाल पर लगाम नहीं लगाई गई, तो दुनिया गहरे संकट में फंस सकती है।
    रोहित गुप्ता, मयूर विहार, दिल्ली

    घरेलू कामगारों का दर्द
    बेशक हम अनलॉक-2 में अब प्रवेश कर चुके हैं। रोज कमाने-खाने वाले लोगों की जिंदगी पटरी पर आने लगी है। ज्यादातर मजदूर अपने कामों पर लौट चुके हैं। मगर अब भी कुछ वर्ग ऐसे हैं, जिनकी मुसीबतें कम नहीं हुई हैं। जैसे, घरों में काम करने वाले कामगार। इन्हें अब भी लोग बुलाने से हिचक रहे हैं। लोगों में अब भी उनको लेकर डर पसरा हुआ है। इसलिए घरेलू कामगार काफी तंगी से जूझ रहे हैं। जहां वे पहले औसतन चार-पांच घरों में काम करके गुजारा कर लिया करते थे, आज उन्हें दोनों वक्त का खाना भी बमुश्किल नसीब हो पा रहा है। लोगों को सतर्कता और सावधानी बरतते हुए इन लोगों को भी काम पर बुला लेना चाहिए। कोरोना से बचना आवश्यक है, पर कोई जान-बूझकर यह बीमारी नहीं फैलाता।
    अंकिता प्रकाश, रुड़की

    अपनी-अपनी राजनीति
    प्रधानमंत्री के संबोधन से अपेक्षा थी कि वह कोरोना के कारण आए संकट और सीमा पर बढ़ते तनाव से निपटने में सरकार के प्रयासों की जानकारियां साझा करेंगे, परंतु उनका पूरा भाषण पीएम गरीब कल्याण योजना नवंबर तक बढ़ाने और जन-धन खातों में नकदी जमा कराने तक सीमित रहा। दूसरी ओर, राहुल गांधी कह रहे हैं कि सरकार के पास धन की कोई कमी नहीं है, गरीबों को कमाने की जरूरत नहीं होगी, यदि उनके खाते में प्रतिमाह 7.5 हजार रुपये जमा कराए जाएं। मगर जहां-जहां कांग्रेस सत्ता में है, वहां भी राहुल ऐसी योजना शायद ही लागू करा पाए हैं। हालांकि इसमें यह सवाल शेष रह गया कि शेष 30 करोड़ राशनकार्ड विहीन लोगों और ईमानदार करदाताओं ने आखिर कौन सा गुनाह किया है कि उन्हें इस तरह के लाभों से वंचित कर दिया गया है? यदि सरकारों के पास पैसे हैं, तो आधारभूत ढांचे के निर्माण, राष्ट्र के सशक्तीकरण, विकास-कार्य आदि तेज गति से चलाए जाने चाहिए। क्या यह वक्त नीतियों को बदलने का नहीं है?
    राधेश्याम ताम्बटकर, इंदौर, मध्य प्रदेश

     

    ओपिनियन / शौर्यपथ / पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों में हुए ताजा संघर्ष और पहले के तनावों में अंतर यह है कि इस बार पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए), यानी चीन की फौज पूरी तैयारी के साथ आई है। पीएलए की कई डिवीजन नजदीकी इलाकों में तैनात हैं, साथ ही भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में भी एक-दूसरे के करीब बड़ी संख्या में फौजी डटे हुए हैं। भारतीय सेना ने भी इलाके में और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के आसपास समान तैयारी कर रखी है। जिस तरह से यहां सैनिकों का भारी जमावड़ा किया गया है और असलहा व तोप मंगवाए जाने की खबरें हैं, उसे देखकर स्पष्ट है कि पीएलए ने पूरी तैयारी और योजना के साथ इस खूनी संघर्ष को अंजाम दिया है। इसका मकसद चीनी सैनिकों का उस सीमा-रेखा की तरफ बढ़कर जमीन हथियाना है, जिसे वे वास्तविक नियंत्रण रेखा कहते हैं।
    ऐसा करके चीन दरअसल, भारत के साथ किसी भी तरह की द्विपक्षीय बातचीत के बिना वास्तविक नियंत्रण रेखा का एकतरफा निर्धारण का प्रयास कर रहा है। इससे वह अपनी सीमा तय कर सकेगा और उस पर नियंत्रण की तरफ अपने कदम बढ़ाएगा। मगर भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों को रोक दिया है और भारतीय क्षेत्र की अखंडता बनाए रखने के लिए मुस्तैद हो गई है। नतीजतन, इस संघर्ष से पीएलए को जो तमगा हासिल हुआ, वह यह कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति व स्थिरता बनाए रखने के लिए पिछले 25 वर्षों में मजबूत किए गए तमाम सिद्धांतों, मानदंडों व मानक-प्रक्रियाओं का उसने उल्लंघन कर दिया। उसने यह साबित कर दिया है कि खुद उसकी सरकार द्वारा हस्ताक्षरित समझौतों के प्रति उसका क्या नजरिया है?
    कूटनीतिक रूप से भारत और बाकी दुनिया को चीन यह संकेत दे रहा है कि वह एशिया की सबसे बड़ी शक्ति है और अपनी मनमर्जी से कुछ भी कर सकता है, फिर चाहे वह दक्षिण चीन सागर में हो या भारत-चीन सीमा पर। वह चाहता है कि भारत यह समझे और स्वीकार करे कि चीन की समग्र राष्ट्रीय ताकत उससे कहीं अधिक है और नई दिल्ली को एशिया में उसकी सर्वोच्चता मान लेनी चाहिए, लिहाजा उसे पीछे हट जाना चाहिए। उसके मुताबिक, भारत को यह भी समझ लेना चाहिए कि 21वीं सदी एशिया की नहीं, बल्कि चीन की है।
    मगर पूर्वी लद्दाख में भारतीय सैनिकों द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई से चीन को यह संदेश साफ-साफ मिल गया है कि भारत उसके आधिपत्य को स्वीकार नहीं करता और उसकी उकसाने वाली कार्रवाइयों को बर्दाश्त नहीं करेगा। नई दिल्ली अपनी स्थिति से कतई समझौता नहीं करेगी। हमारे देश के बहादुर सैनिकों ने 15 जून की रात गलवान घाटी में ठीक यही किया। यहां पर हमें यह भी याद रखना चाहिए कि बाकी दुनिया साफ-साफ देख रही है। यहां पर चीन ने चुनौती दी है, जिसको भारत ने स्वीकार किया है।
    फौज भेजने का सीधा संकेत है कि हम चीन का मुकाबला करने और भारत सहित अन्य राष्ट्रों पर धौंस जमाने के उसके आक्रामक तरीकों का विरोध करने के लिए तैयार हैं। भारत और चीन का रिश्ता अब पहले की तरह आगे नहीं बढ़ सकता। पुरानी लकीर अब व्यवहार में नहीं लाई जा सकती है। क्यों? अगर भारत सरकार को ऐसा ही करना होता, तो वह अपनी सैन्य कार्रवाई का खंडन कर रही होती। इसीलिए भारत को नीतिगत फैसलों के माध्यम से अपने सैन्य संदेश को मजबूत करने और दोहराने की जरूरत है, जो आगे चलकर इस राष्ट्रीय सहमति को स्पष्ट करेगा कि हमें चीन का बड़े भाई जैसा रवैया पसंद नहीं है। इसी वजह से भारत को ऐसे संकेत देने होंगे कि यदि सीमा पर शांति नहीं होती है, तो चीन के साथ सामरिक के अलावा अन्य रिश्ते भी नकारात्मक रूप से प्रभावित होंगे। इस संदेश को स्पष्ट तौर पर दिखाने के लिए हमें अपनी चीन-नीति का फिर से मूल्यांकन करना होगा।
    इसी दिशा में हमारा पहला कदम था 59 चीनी एप पर पाबंदी। भारत ने तो सिर्फ शुरुआत की है। देश में 5-जी तकनीक के परीक्षण और उसे लागू करने की प्रक्रिया से चीन की कंपनियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर प्रतिबंधित करना नई दिल्ली की इस सोच को और मजबूत करेगा।
    चीन की कार्रवाइयों का एक जवाब यह भी हो सकता है कि भारत अपने रिश्ते अमेरिका, जापान, फ्रांस, दक्षिण कोरिया और संभवत: इंडोनेशिया जैसे लोकतंत्रों के साथ मजबूत बनाए। भारत को ताइवान के साथ भी अब अपने संबंधों को विस्तार देना चाहिए। दिल्ली अपनी चीन-नीति संयत होकर तैयार करे। बिना सोचे-समझे प्रतिक्रिया जाहिर करने की कतई जरूरत नहीं है। अपने तमाम विकल्पों पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही हमें आगे बढ़ना चाहिए। मगर हां, इसकी समय-सीमा तय होनी चाहिए। नई नीति इसी साल लागू हो जानी चाहिए।
    विशेषकर आर्थिक क्षेत्र में भारत की नई चीन-नीति खुद को कुछ दर्द दिए बिना तैयार नहीं की जा सकती है। हालांकि, जब हमने यह तय कर लिया है कि चीन को सख्त संदेश देने की जरूरत है, तो हमें कष्ट सहने के लिए भी तैयार रहना होगा। भारतीय सैनिकों ने ऐसा ही सीमाओं पर किया है, और अब आम भारतीयों के लिए यह दिखाने का वक्त आ गया है कि वे भी ऐसा करने के लिए तैयार हैं। यह कष्ट कई रूपों में मिल सकता है- कुछ उत्पादों की उपभोक्ता कीमतें बढ़ सकती हैं, कुछ कंपनियों के मुनाफे घट सकते हैं, तो कुछ कारोबारियों के राजस्व में कमी आ सकती है। अगर हम खुद के मजबूत व एकजुट होने का संदेश देना चाहते हैं, जिसे चीन ने समझने में गलती की है, तो हमें इस तरह के दर्द सहने ही होंगे। भारत को अपना यह चरित्र पूरी मजबूती से चीन के सामने रखना ही होगा कि हम लकीर के फकीर नहीं हैं।
    (ये लेखक के अपने विचार हैं)गौतम बम्बावाले, चीन में नियुक्त रहे भारतीय राजदूत

     

      दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग के वार्ड नंबर 9-10 की शासकीय उचित मूल्य की दूकान में फर्जी तरीके से राशन अहरण करने के मामले को खाद्य विभाग दुर्ग द्वारा मामूली सी रकम के जुर्माने से निपटा दिया गया और इस तरह अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिला खाद्य अधिकारी ने मामले में 5000 की मामूली रकम का जुर्माना लगा कर माँ शीतला सहायता समूह द्वारा संचालित शासकीय उचित मूल्य की दुकान को पाक साफ़ कर दिया . जबकि शौर्यपथ समाचार पत्र द्वारा पूर्व में भी कम समय में फोटो से राशन आहरण मामले की जाँच करने का निवेदन जिला खाद्य अधिकारी और क्षेत्र की अधिकारी श्रीमती नेहा तिवारी से किया गया किन्तु अधिकारियों द्वारा सभी मामले की शिकायत मिलने पर ही जाँच की बात कही जाती रही और एक बार फिर फर्जी फोटो से राशन आहारं के मामले में संचालिका श्रीमती सुनीता मिश्रा को राहत मिल गयी जबकि वार्ड के पार्षदों द्वारा खाद्य अधिकारी से मामले की जांच एवं पूर्व में हुए बल्क में फोटो से राशन आहरण की सूक्ष्म जांच के लिए निवेदन किया गया था किन्तु मामला जुर्माना के साथ खत्म हुआ .
             एक मामला अभी थमा नहीं कि दूसरा मामला सामने आ गया जिसमे वार्ड नंबर 11 में संचालित उचित मूल्य की दूकान (उ.मू.दु : 431001013 ) में संचालक द्वारा हितग्राही संतोष यादव को 40 किलो चावल दिया गया किन्तु चावल की बिक्री शासकीय रिकार्ड में 50 किलो दिखाई गयी मजे की बात यह है कि चावल की बिक्री 40+5+5) तीन हिस्सों में दी गयी है और राशन कार्ड में 40 किलो ही अंकित की गयी यही नहीं संतोष यादव की माता के राशन कार्ड में भी राशन के आहरण और देय गलत अंकित की गयी . इस बारे में जब संतोष यादव ने वार्ड पार्षद से संपर्क किया तो राशन दूकान के संचालक का कहना है कि आकर कभी भी बची हुई खाद्य सामग्री ले जाए . कम राशन मिलने की जानकारी संतोष यादव ने कार्यालय में जा कर ली तब जानकारी हुई कि राशन कम मिला . किन्तु हर हितग्राही ऐसा नहीं कर पाता जिससे राशन दूकान के संचालको के हौसले बुलंद हो जाते है और जब कभी एकाध बार चोरी पकड़ी भी जाती है तो मामूली जुर्माना से बरी हो सकते है जैसा कि पूर्व में फर्जी तरीके से वार्ड 9-10 के राशन दूकान की संचालिका का हुआ .
    क्या कर रही है क्षेत्र की खाद्य अधिकारी
                      वार्ड नंबर 9-10-11 में खाद्य विभाग ने श्रीमती नेहा तिवारी को तैनात कर रखा है शौर्यपथ संचार पत्र खाद्य विभाग से निवेदन करता है कि इन दुकानों के पूर्व के खरीदी बिक्री की प्रक्रिया की सूक्ष्मता से जाँच करे और दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करे ताकि आम जनता का हक़ ना मारा जाए .

    // माडमसिल्ली में वाटर स्पोर्टस और माना-तूता में बढ़ाएं पर्यटक सुविधाएं
    // होटल प्रबंधन संस्थान में इसी सत्र से शुरू होगा पाठ्यक्रम
    // पर्यटन मण्डल के संचालक मण्डल की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में लोकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के प्रमुख बांधों और वाटर बॉडी में वाटर स्पोर्ट, कैफेटेरिया सहित विभिन्न सुविधाएं विकसित की जाएगी। स्थानीय युवाओं को पर्यटन से जोडऩे के लिए भी इस सत्र से नवा रायपुर स्थित होटल मेनेजमेंट संस्थान में पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया गया। पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल के संचालक मंडल की बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने बैठक में कहा कि कोरोना संकट काल में राज्य के पर्यटन स्थलों में स्थानीय पर्यटकों को आकर्षित करने की रणनित बनायी जाए। पर्यटन स्थलों में बेहतर सुविधाएं विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि पहले चरण में धमतरी जिले के माडम सिल्ली बांध में वाटर टूरिज्म के लिए शीघ्र कार्ययोजना तैयार की जाए।
    बैठक में मंत्री साहू ने रायपुर स्थित जोहार छत्तीसगढ़ होटल में साज सज्जा कर इसे नया रूपरूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस होटल के परिसर में कामर्शियल दृष्टिकोण से पर्यटन भवन का निर्माण किया जाए ताकि इसका बहुउद्देशीय उपयोग हो सके। उन्होंने अधिकारियों को इस सबंध में जल्द प्रस्तार तैयार करने भी कहा। मंत्री साहू ने राजधानी के निकट स्थित माना-तूता में पर्यटक सुविधाओं के विकास के लिए योजना बनाने के निर्देश दिए।
    छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के संचालक मंडल की बैठक में पर्यटन विकास से संबंधित कार्यों को त्वरित गति से संपन्न करने के लिए प्रदेश के सभी पर्यटन क्षेत्रों को दो या तीन जोन में विभाजित करने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान पर्यटन से संबंधित विभिन्न होटल, मोटल, रिसॉर्ट के संचालन, पर्यटन की पोस्ट कोविड तैयारियों, पर्यटन के प्रचार प्रसार, वॉटर टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, राम वन पाथ गमन के विकास कार्य सहित विभिन्न बिन्दुओं पर चर्चा की गई। बैठक में पर्यटन विभाग के सचिव अन्बलगन पी., प्रबंध संचालक इफ्फत आरा, महाप्रबंधक सुनील अवस्थी सहित वाणिज्य, वित्त, परिवहन, वन, संस्कृति, रेलवे, एयरपोर्ट अथॉरिटी, इंडियन एयरलाइंस कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    // स्वास्थ्य मंत्री टी. एस. सिंहदेव ने जो कहा वह जनता से किए वादा के प्रति प्रतिबद्धता और वचनबद्धता को दर्शाता है भाजपा तो चुनाव में किए वादों को चुनावी जुमला बताकर जनता से धोखा बाजी कर रही
    // मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार की ओर उंगली उठाने से पहले डॉ रमन सिंह को अपने बैंक खाता में आये न्याय योजना की पहली किश्त का आंकलन करना चाहिए
    // मोदी द्वारा जनता से की गई वादा को चुनावी जुमला बताने वाली भाजपा और रमन सिंह को स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव के बयान को पूरा पढऩा चाहिए
    // मोदी-भाजपा देश से की हुई वादों को पूरा करने में असफल रमन सिंह भाजपा से इस्तीफा देने की नैतिक साहस करें

         रायपुर /शौर्यपथ / पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के बयान पर कांग्रेस ने तीखा जवाब दिया। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार की ओर उंगली उठाने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को अपने बैंक खाता में आए न्याय योजना की पहली किस्त की राशि का आकलन करना चाहिए। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से 5700 करोड़ रुपए किसानों को धान की अंतर राशि चार किस्तों में मिलेगी। प्रदेश के किसानों के खाते में 1500 करोड़ की पहली किस्त जमा हुई है। लोकसभा चुनाव में मोदी के द्वारा जनता से की गई वादा को चुनावी जुमला बताने वाले भाजपा और डॉ रमन सिंह को स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव के बयान को पढऩा चाहिए।
    रमन सिंह और भाजपा के नेताओं ने तो निरंतर प्रदेश और देश की जनता को गुमराह करने का काम किया है। 2013 के विधानसभा चुनाव में रमन सिंह ने सरकार बनने पर किसानों को धान के कीमत ?2100 क्विंटल और ?300 बोनस प्रति क्विंटल देने का वादा किया था। ठीक वैसे ही लोकसभा चुनाव के दौरान भी मोदी-भाजपा ने दो करोड़ युवाओं को प्रतिवर्ष रोजगार, 15 लाख रुपए जनता के खाते में आएंगे, महंगाई कम होगी अच्छे दिन आएंगे, पेट्रोल-डीजल ?30-?35 लीटर में मिलेगा, रसोई गैस के दाम कम होंगे, बेटियां सुरक्षित होगी, पाकिस्तान को करारा जवाब देंगे, भारत की ओर आंख दिखाने वाले दुश्मनी को ईट का जवाब पत्थर से देंगे, आतंकवाद खत्म होगा सहित अनेक लोक लुभावने वादा मोदी ने लच्छेदार भाषणों के माध्यम से जनता से किया था। मोदी ने नोटबंदी के दौरान 50 दिन जनता से मांगे थे 50 दिनों में अगर नोटबंदी फेल होती है तो किसी भी चैराहा में आकर जनता के द्वारा दिए हुए सजा को भुगतने का वादा किया था। बीते 6 साल में मोदी-भाजपा-रमन जनता से किये वादा को पूरा करने में असफल रही है।
    प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार 36 बिंदुओं में जनता से किए वादों में से 22 बिंदुओं से अधिक में काम करने में सफल हुई है किसानों का कर्ज माफी, बिजली बिल हाफ, धान की कीमत ?2500, आदिवासियों की जमीन लौटाना, जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों को जेल से बाहर निकालना बस्तर में मक्का प्रोसेसिंग प्लांट लगाना, 25 से अधिक वनोपज को समर्थन मूल्य में खरीदना, तेंदूपत्ता का मानक दर 2500रुपया से बढ़ाकर 4 हजार प्रति बोरा करना, एनएमडीसी में बस्तर में स्थानीय स्तर पर परीक्षा आयोजित करना, 15,000 से अधिक शिक्षकों की भर्ती, ढाई हजार से अधिक पुलिस विभाग में भर्ती, 3000 नर्सों की भर्ती सहित नरवा, गरवा, घुरवा, बारी के माध्यम से 22 सौ से अधिक गोठानो का निर्माण, राजीव गांधी न्याय योजना के माध्यम से धान के अंतर राशि के अलावा गन्ना एवं मक्का उत्पादकों को भी लाभ देना और आने वाले दिनों में दलहन-तिलहन सहित भूमिहीन किसानों को भी न्याय योजना के माध्यम से करना, यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम राइट टू फूड मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक मुख्यमंत्री शहरी स्लम क्लीनिक, शिक्षककर्मियों का संविलियन, पुलिस विभाग के भत्ता में बढ़ोत्तरी, छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री, शराबबंदी हेतु राजनीतिक सामाजिक और प्रशासनिक कमेटी का गठन 60 से अधिक शराब दुकानों को बंद करना, कोरोना संकटकाल में प्रवासी मजदूरों के सकुशल घर वापसी उनके रहने खाने का प्रबंध उनके रोजगार की व्यवस्था सहित अनेक जन हितेषी कार्य किए हैं।
    प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार के जनहितैषी कार्यो के आगे भाजपा मुद्दाविहीन हो चुकी है। भाजपा किसानों और मजदूरों के नाम से झूठ बोलकर स्तरहीन मंगढ़तन बात कर गुमराह कर जो राजनीति कर रही है। इससे दुखी होकर टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि अगर 20 अगस्त को न्याय योजना की दूसरी किस्त किसानों को नहीं मिलेगी तो वह इस्तीफा दे देंगे। ये जनता से किए वादों के प्रति कांग्रेस नेताओं की प्रतिबद्धता और वचनबद्धता का जीता जागता प्रमाण है।
    भाजपा के नेताओं को टी.एस. सिंहदेव से सीख लेनी चाहिए और मोदी-भाजपा ने जनता के साथ जो वादा खिलाफी किया है इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, भाजपा के 9 सांसद और विधायक को तत्काल अपने पद से और भाजपा से इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि भाजपा नेताओं में वादा निभाने में असफल नरेंद्र मोदी से इस्तीफा मांगने की क्षमता नहीं है।

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