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दुर्ग / शौर्यपथ / कल ग्रीन चौक केवल भवन में एक वाक्य देखने को मिला . हजारो की तादाद में हिन्दुओ की फौज अस्थाई चर्च में प्रार्थना करने एवं अपनी तकलीफों को दुर्ग करने के भाव से सभा में सम्मलित हुई थी . सिर्फ चंद हिन्दूवादी कार्यकर्ताओ के आक्रोश के आगे हजारो की संख्या में उपस्थित लोग खौफ में आ गए . भारत एक स्वतंत्र अभिव्यक्ति को पालन करने वाला राष्ट्र है यहाँ सभी धर्मो का सम्मान किया जाता है . ऐसे में सिर्फ चंद हिंदूवादी लोगो के आक्रोश के आगे हजारो लोग इस सभा को छोड़ कर जाने को आतुर दिखने लगे . सोशल मिडिया में प्रसारित वीडियो को ही अगर देखा जाए तो मांग में सिन्दुर् गले में मंगल सूत्र पहने महिलाये अपने परिवार के साथ निकलते दिखी ऐसे में यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि जितनी संख्या में यहाँ इसाई समुदाय के लोग थे उससे कही ज्यादा संख्या में हिन्दू समुदाय के लोग थे . किन्तु इस विरोध के आगे वो भी मौन दिखे .
संख्या में अधिक होने के बावजूद अगर कोई किसी विरोध के स्वर को चुपचाप सुनता और सहन कर अमल करता है तो यह माना जा सकता है कि उनके मन में भी कही ना कही ये ज़रूर रहा होगा कि हम गलत है वरना अगर सही होते तो वो भी विरोध करते जैसा कुछ लोगो द्वारा किया जा रहा था एवं सक्रियता से सभा सही होने की बात कर रहे थे . ऐसे कई लोग भी उस स्थान पर मौजूद थे जो अपने आप को सही एवं सभा को सही मान रहे थे तथा विरोध करने वालो को गलत ठहरा रहे थे .
किन्तु वही ऐसा भी देखने में आया कि इनमे से कुछ लोग अपना नाम एवं जाति तो हिन्दू धर्म का बता रहे है किन्तु धर्म को मानने से इनकार करते है . ऐसे ही एक राधिका नगर भिलाई निवासी नन्द कुमार निर्मलकर जी निकले जो अपना नाम तो नन्द कुमार निर्मलकर बता रहे थे किन्तु हिन्दू देवी देवताओ को मानने से इनकार कर रहे थे . वही यह भी कह रहे थे कि हिन्दू धर्म तो नहीं बदलूँगा किन्तु हिन्दू देवी देवताओ को नहीं मानता मेरे लिए प्रभु ही सब कुछ है . प्रभु और ईश्वर एक है . अभिव्यक्ति की आज़ादी सभी धर्म का आदर यही मानवता है . फिर वो किसी भी नाम से परमेश्वर को याद करे कोई फर्क नहीं पड़ता . परन्तु यहाँ एक दूसरी बात ही सामने आये जिसमे यह सुनने को मिला कि अगर कोई हिन्दू अपना धर्म परिवर्तन क़ानूनी रूप से करा लेता है तो उसे आरक्षण ( सरकारी सुविधाओ से वंचित ) लाभ नहीं मिलेगा ऐसे में लोग धर्म को छोड़ कर अन्य धर्म को अपना रहे है किन्तु क़ानूनी रूप से अपने नाम को अपने धर्म को नहीं छोड़ रहे है क्योकि सरकारी लाभ से वंचित होना पड़ेगा .
क्या ऐसे लोग लालची नहीं है जो संविधान और धर्म दोनों को ही मजाक बना कर शासन और आम जनता के साथ साथ धर्म का भी माखौल उड़ा रहगे है . अगर आपकी आस्था जिस धर्म में है तो उस धर्म और इश्वर में भी अटूट विश्वास रखना चाहिए कि इश्वर /प्रभु/अल्लाह/परमेश्वर आपकी मदद करेगा और आपके जीवन में बदलाव आएगा सिर्फ सरकारी सुविधा के लिए एक धर्म का नाम और प्रभु के करीब आने के लिए दुसरे धर्म का नाम लेकर शासन को तो बेवकूफ बना रहे है साथ ही उस परमपिता परमेश्वर के साथ भी छल करने की मानसिकता के साथ जी रहे है जिन्होंने इस सृष्टि की रचना की जबकि इन सब के दुष्परिणाम और तकलीफ के जिम्मेदार स्वयं वो है जो धर्म को भी लालच की नजर से परख रहे है . सभी धर्म सर्वश्रेष्ठ है अगर हिम्मत है और विश्वास है तो खुलकर ये बताइए कि आप किस धर्म के अनुयायी है . भारत ही नहीं दुनिया में भी ये सर्वविदित है कि आपकी पहचान आपके धर्म और जाति की पहचान आपके नाम से हो जाति है किन्तु भारत में विगत सालो से यह सब मिथ्या रूप धारण कर रही है . सरकारी दस्तावेजो में फायदे के अनुसार धर्म और नाम किन्तु यथार्थ में अपनाये हुए धर्म और नाम में भेद नजर आने लगा है . क्या यही समाज है क्या इस पर सरकार कभी सख्त होगी और ऐसे बहरूपिये लोगो पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी क्या एक राधिका नगर निवासी निर्मलकर ही इस समाज में है या इनकी गिनती सक्दो ,हजारो , लाखो में है ....
यह लेख किसी धर्म विशेष मानने वालो को ठेस पहुँचाने की नहीं है सिर्फ वर्तमान में जो हालात नजर आ रहे है उसका ही एक छोटा सा अंश है .
शरद पंसारी ( संपादक - शौर्यपथ दैनिक समाचार )
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
