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May 23, 2026
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छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 : जीत कांग्रेस प्रत्याशी की हो या भाजपा प्रत्याशी की , 3 दिसंबर के बाद दुर्ग विधानसभा क्षेत्र को मिलेगा एक नया नेता Featured

 छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 : जीत कांग्रेस प्रत्याशी की हो या भाजपा प्रत्याशी की , 3 दिसंबर के बाद दुर्ग विधानसभा क्षेत्र को मिलेगा एक नया नेता छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 : जीत कांग्रेस प्रत्याशी की हो या भाजपा प्रत्याशी की , 3 दिसंबर के बाद दुर्ग विधानसभा क्षेत्र को मिलेगा एक नया नेता
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DURG / SHOURYAPATH / छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव 2023 का मतदान 17 नवंबर को संपूर्ण हो चुका है अब सभी प्रत्याशियों को इंतजार है 3 दिसंबर का जब दुर्ग विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश के विधानसभा क्षेत्र के परिणाम आ जाएंगे . इस बार प्रदेश में किसकी सरकार बन रही है इस पर भी चर्चा परिचर्चा लगातार जारी है वहीं सभी प्रत्याशियों के समर्थक जीत के दावे कर रहे हैं . वही कहीं भाजपा की सरकार बनने की बात कही जा रही है तो कहीं कांग्रेस की सरकार बनने की बात कही जा रही है. सरकार जिसकी भी बने वह जनहित के कार्यों और अपने घोषणाओं को किस तरह और कैसे पूरा करती है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा किंतु वही दुर्ग विधानसभा क्षेत्र इस बार एक ऐसे विधानसभा क्षेत्र के रूप में सामने आया है जहां 50 साल से वोरा परिवार का दबदबा रहा और पिछले 30 सालों से वोरा परिवार से ही कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में अरुण वोरा चुनावी मैदान में रहे है . वही इस बार भारतीय जनता पार्टी ने एक नए प्रत्याशी गजेंद्र यादव को मैदान में उतर कर सभी को अचंभित कर दिया शुरू-शुरू में तो ऐसा लग रहा था कि गजेंद्र यादव कमजोर प्रत्याशी साबित होंगे लेकिन धीरे-धीरे गजेंद्र यादव ने अपने प्रचार प्रसार में जो तेजी लाई और आखिरी के दिनों में प्रचार प्रसार में उनकी तेजी से जनता को भी आभास होने लगा कि कांग्रेस प्रत्याशी अरुण वोरा पिछड़ते रहे .  स्थिति तो यहां तक पहुंच गई की आखिरी के दो दिन कांग्रेस प्रत्याशी अरुण वोरा के बंगले में लोगों की भीड़ जमा रही परंतु विधायक बंगले का द्वार बंद कर दिया गया और बाहर यह खबर भिजवा दी गई थी बंगले में विधायक महोदय एवं उनके पुत्र जो चुनावी संचालन में महत्वपूर्ण निबंध निभा रहे हैं वह नहीं है स्थित 11:30 तक के इतनी विकट हो गई की पुलिस प्रशासन को हल्का बल का प्रयोग करना पड़ा.जिसकी चर्चा ने कही ना कही कांग्रेस प्रत्याशी को इस चुनाव में दो कदम पीछे ठकेल दिया .
 दोनों ही दलों को आपसी गुटबाजी का काफी सामना करना पड़ा इस बार विधायक अरुण वोरा के विरुद्ध कई कांग्रेसी जनप्रतिनिधि व कार्यकर्ता खुलकर काम करने लगे वही विधायक अरुण वोरा को पहली बार अपने स्वर्गीय पिताजी की कमी दिल से महसूस हुई ऐसी स्थिति कार्यकर्ताओं की भी रही .
  विधायक अरुण वोरा के पिछले चुनाव में स्वर्गीय मोतीलाल वोरा जी के सिर्फ 15 दिनों तक शहर में रहने मात्र से ही वोटो का प्रतिशत और कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का जोश एक अलग ही रूप में नजर आता था किंतु इस बार भीतरी घात और गुटबाजी अपनी चरम सीमा पर थी . विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान लगातार 15 दिनों तक कांग्रेस प्रत्याशी अरुण वोरा जनसंपर्क करते रहे वही चुनावी संचालन में तरह-तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ा इस सब के बावजूद भी विधायक वोरा शांत मन से अपने कार्यों के प्रति सजग रहे बिना किसी वाद विवाद के प्रचार प्रसार करते रहे . कुछ ऐसी स्थिति भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी गजेंद्र यादव के साथ भी थी गजेंद्र यादव के साथ भी भारतीय जनता पार्टी के कई जिम्मेदार सदस्य व कार्यकर्ताओ ने भी इस चुनाव से अपनी अपरोक्ष दूरी बना रखी थी परंतु इन सबके बावजूद भी भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी गजेंद्र यादव अपने प्रचार प्रसार में इतने मग्न रहे कि इन सब बातों को दरकिनार करते हुए आम जनता के बीच अपनी बात को रखने में सफल हुए और अंतिम दिनों में प्रचार प्रसार में तेजी में कांग्रेस प्रत्याशी से काफी आगे निकल गए.
  अब दोनों ही प्रत्याशियों को 3 दिसंबर मतगणना के दिन का इंतजार है इस दिन दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में नया जनप्रतिनिधि कौन बनेगा यह निश्चित हो जाएगा . गजेंद्र यादव भारतीय जनता पार्टी से विधायक के रूप में चुने जाएंगे या अरुण वोरा लगता तीसरी बार विधायक के रूप में कार्य करेंगे.
 भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी गजेंद्र यादव को गुटबाजी का उतना फर्क नहीं पड़ा जितनी गुटबाजी का मंजर कांग्रेस प्रत्याशी अरुण वोरा ने पिछले 30 सालों में पहली बार देखा उसे लिहाज से अगर दुर्ग विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में अरुण वोरा चुनाव जीत जाते हैं और विधायक बनते हैं तो अपने पिछले 15-20 दिनों के चुनावी प्रचार प्रचार के दरमियान मिले अनुभवों के आधार पर एक नए रूप में आम जनता के सामने आयेंगे एवं जो नकाब के पीछे अभी तक छुपे थे उन्हें गले लगाकर यानिश्काषित करवा कर बेनकाब करेंगे ए तो समय और परिणाम ही बताएगा किन्तु जो भी स्थिति हो अपनी पुरानी छवि और कुछ अनजाने में हुई गलतियों से सबक लेते हुए एक नए नेता के रूप में दुर्ग शहर में नजर आएंगे यही उम्मीद आम जनता भी कर रही है .
   शहर में चाहे कांग्रेस प्रत्याशी की जीत हो या भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी की किंतु जो भी जीतेगा उसका एक नया रूप नजर आएगा और काम करने के तरीके में कहीं ना कहीं बदलाव भी नजर आएगा. दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों का भाग्य अब मत पेटी में बंद हो चुकी है जो 3 दिसंबर को खुलेगी और 3 दिसंबर को दुर्ग शहर के लिए एक नई रोशनी भरा दिन होगा जिसमें उनके द्वारा चुने हुए जन प्रतिनिधि दुर्ग शहर विधानसभा के विधायक होंगे और जनता के हित के लिए विकास कार्य को आगे बढ़ते हुए शहर के विकास की दिशा में नई पहल करेंगे . ऐसी ही उम्मीद दुर्ग विधानसभा क्षेत्र के सभी मतदाता जीतने वाले प्रत्याशी से कर रहे हैं .

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