August 04, 2026
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    “राजस्व बढ़ा, विकास घटा! दुर्ग निगम की गिरती व्यवस्था पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव और सुमित अग्रवाल की कार्यशैली पर उठे गंभीर प्रश्न” Featured

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    दुर्ग (शौर्यपथ)। जनवरी–फरवरी के निगम चुनावों में सुशासन का वादा कर जीत का दावा करने वाली ट्रिपल-इंजन सरकार का दुर्ग नगर निगम पर दिखता चेहरा अब सवालों के घेरे में है। स्थानीय नागरिकों, पार्षदों और विकास कार्यों से जुड़े ठेकेदारों का आरोप है कि निगम प्रशासन में भेदभाव और निष्क्रियता ऐसी चरम सीमा पर पहुंच चुकी है कि शहर की रोज़मर्रा की समस्याएँ — अतिक्रमण, खुले नाले-पानी और अधूरे काम — सामान्य हो गए हैं।

    नागरिकों का कहना है कि नगर आयुक्त सुमित अग्रवाल केवल कपड़ा लाइन पर बार-बार कार्रवाई कर के अपनी रिपोर्ट-कार्ड चमकाने में लगे हैं, जबकि गणेश मंदिर के सामने सड़क पर खुलेआम कब्जा और चर्च रोड पर बिना अनुमति लगा अवैध बाजार, समृद्धि बाजार में अवैध अतिक्रमण जैसे मामलों पर पर निगम आयुक्त का मौन रहना चिंता बढ़ाने वाला है। विभागीय सूत्रों की माने तो निगम के पास पिछले वर्ष से राजस्व वसूली में भारी वृद्धि हुई — लगभग ढाई गुना — और तमाम सरकारी राशि उपलब्ध होने के बाबजूद शहर के विकास कार्य रुकावटों का शिकार हैं।

    ठेकेदारों व कर्मियों का आरोप है कि भुगतान महीनों तक रुके रहने से परियोजनाओं की रफ्तार ठप पड़ जाती है; इसके परिणामस्वरूप आम जनता को जहरीले पानी, अधूरी सड़कें , सड़कों पर आवारा पशुओं की फौज और अतिक्रमण वाली समस्याओं का दंश सहना पड़ रहा है। कई कर्मचारी व अधिकारी भी प्रशासनिक दमन व असमंजस की शिकायत करते हैं — “कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं, अधिकारी और कर्मचारी दहशत में हैं।”

    एक ओर जहाँ स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि ठेके व अनुबंधों में अनियमितताएँ हैं — खासकर ‘लॉलीपॉप’ अनुबंध से जुड़े मामलों में जिसमेंखुलेआम राजस्व की हानि हुई बावजूदइसकेजिम्मेदार अधिकारी पर निगम प्रशासन द्वारा कार्यवाही न होने से “नैतिकता और जवाबदेही की कमी” के सन्देश जनता तक जा रहे हैं। निगम कार्यालय में कंप्यूटरों की अदला-बदली और अन्य व्यवस्थागत गड़बड़ियों के कारण विभागीय जवाबदेही भी प्रश्नचिह्न के नीचे आ चुकी है — नागरिकों का मत है कि जहरीले पानी मामले में प्लेसमेंट-कर्मचारी पर कार्रवाई कर के कागजी कार्यवाही दिखाई जा रही है, असल जिम्मेदारी अनछुई रह जाती है।

    इन सभी आरोपों व शिकायतों के बीच सबसे अहम सवाल यह उठता है कि जब नगरीय निकाय विभाग उपमुख्यमंत्री अरुण साव के पास है तो क्या मंत्रालय स्तर पर किसी सख्त हस्तक्षेप की जरूरत नहीं दिखती? चुनावी मंचों पर सुशासन की बातें करने वाले उपमुख्यमंत्री के पास विभाग होने के बावजूद दुर्ग में प्रशासनिक बदहाली जारी रहना सीधे तौर पर उनकी नीतिगत जवाबदेही पर भी प्रश्न खड़ा करता है।

    नगर पालिक निगम के मौजूदा आयुक्त को स्थानीय गतिविधियों व शिकायतों से अवगत कराया जा चुका है — लेकिन हालात में कोई ठोस सुधार न होना जनता के मन में यह आशंका पैदा कर रहा है कि क्या प्रशासन कुछ खास लोगों के प्रति नरम रवैया अपनाकर समग्र जनता की समस्याओं को अनदेखा कर रहा है। पार्षदों और नागरिक समूहों की मांग है कि या तो तुरंत सघन निरीक्षण कर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए या फिर स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि शहर के विकास और सुशासन की बातें सिर्फ चुनावी बयानों तक सीमित न रहें।

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