
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
Google Analytics —— Meta Pixel
दुर्ग / शौर्यपथ।
दुर्ग नगर निगम की राजनीति एक बार फिर शहर के मुख्य बस स्टैंड की बेशकीमती जमीन को लेकर गरमा गई है। आरोप है कि पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल के कार्यकाल के अंतिम दिनों में बस स्टैंड की कीमती जमीन का आवंटन कथित रूप से नियमों के विपरीत किया गया, और अब वर्तमान महापौर श्रीमती अलका बाघमार के कार्यकाल में भी इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि महिला आरक्षण लागू होने से ठीक पहले, जब तत्कालीन महापौर धीरज बाकलीवाल को यह स्पष्ट हो गया था कि आगामी परिषद में उनकी भूमिका सीमित हो सकती है, तब एमआईसी परिषद की अंतिम बैठकों में बस स्टैंड क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण जमीन का अनुबंध चतुर्भुज राठी से जुड़े संचालन के लिए कर दिया गया। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि यह अनुबंध नगर निगम के स्थापित नियमों और शर्तों के अनुरूप नहीं था।
अनुबंध की अवधि समाप्त, लेकिन ढांचा बरकरार
जानकारी के अनुसार जिस अनुबंध के तहत जमीन का उपयोग दिया गया था, उसकी अवधि समाप्त हुए कई महीने बीत चुके हैं। इसके बावजूद बस स्टैंड परिसर के एक बड़े हिस्से में अभी भी ढांचा मौजूद है और वहां “राम रसोई” का संचालन किया जा रहा है।
आलोचकों का कहना है कि अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं होने के बावजूद नगर निगम प्रशासन की ओर से अब तक कोई सख्त कार्रवाई सामने नहीं आई है।
मंच साझा करने पर भी उठे सवाल
राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि नगर निगम की महापौर अलका बाघमार द्वारा संबंधित संचालक के साथ सार्वजनिक मंच साझा करने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी और कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि अनुबंध और जमीन आवंटन में अनियमितताएं हैं तो निगम प्रशासन को पहले उसकी जांच और कार्रवाई करनी चाहिए।
300 करोड़ के दावे बनाम जमीनी हकीकत
दुर्ग नगर निगम की महापौर अलका बाघमार द्वारा पिछले एक वर्ष में शहर के लिए लगभग 300 करोड़ रुपये की राशि लाने का दावा भी सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि शहर में विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को देखते हुए यह राशि जमीन पर उतनी स्पष्ट दिखाई नहीं दे रही, जितनी प्रचार में दिखाई जा रही है।
शहर के कई क्षेत्रों में गंदगी, अव्यवस्थित बाजार, अतिक्रमण और अवैध बाजार संचालन की समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। कपड़ा लाइन क्षेत्र में किए गए सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर भी स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ स्थानों पर अभी भी अव्यवस्था के कारण सौंदर्यीकरण की छवि प्रभावित हो रही है।
बुलडोजर कार्रवाई पर भी सवाल
नगर निगम द्वारा समय-समय पर अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की जाती रही है, लेकिन आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि प्रभावशाली लोगों के मामलों में प्रशासन अपेक्षाकृत नरम रवैया अपनाता है।
जांच की मांग तेज
बस स्टैंड की बेशकीमती जमीन, अनुबंध की वैधता और उसकी शर्तों के पालन को लेकर अब स्थानीय स्तर पर स्वतंत्र जांच की मांग उठने लगी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि इस मामले की पारदर्शी जांच होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन आवंटन प्रक्रिया में वास्तव में क्या हुआ और वर्तमान प्रशासन की जिम्मेदारी क्या बनती है।
फिलहाल यह मामला शहर की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है, और आने वाले दिनों में इस पर निगम प्रशासन या संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
