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ASP कौशलेंद्र पटेल के नेतृत्व में यातायात व्यवस्था सुधारने दिनभर डटे जवान, वहीं बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की कार्रवाई गरीब पसरा दुकानदारों तक सीमित? जनता बूट हाउस, ओम ज्वेलर्स और पन्ना स्वीट्स के सामने सड़क एवं बरामदों तक अतिक्रमण पर कार्रवाई का इंतजार
दुर्ग। त्योहारी सीजन में दुर्ग जिला मुख्यालय के सबसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र इंदिरा मार्केट में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए यातायात विभाग जहां पूरी मुस्तैदी के साथ मैदान में नजर आ रहा है, वहीं बाजार विभाग की कार्यप्रणाली अब गंभीर सवालों के घेरे में है। एक ओर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात कौशलेंद्र पटेल के नेतृत्व में यातायात विभाग के जवान सुबह से देर रात तक बाजार की सड़कों, पार्किंग स्थलों और प्रमुख प्रवेश मार्गों पर तैनात रहकर आवागमन को व्यवस्थित करने में जुटे हैं, तो दूसरी ओर बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की कार्रवाई में कथित असमानता को लेकर व्यापारियों और आम नागरिकों के बीच चर्चा तेज हो रही है। सवाल यह है कि क्या बाजार व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी केवल गरीब पसरा दुकानदारों पर कार्रवाई करने तक सीमित है, या फिर सड़क और बरामदों तक दुकानें फैलाकर कारोबार करने वाले बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भी समान रूप से नियम लागू होंगे?
मंगलवार को इंदिरा मार्केट में बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा जेसीबी और निगम के अमले के साथ पसरा दुकानदारों के विरुद्ध कार्रवाई करने पहुंचे। कार्रवाई के दौरान अतिक्रमण हटाने के लिए निगम का पूरा अमला सक्रिय दिखाई दिया। लेकिन इसी बाजार में बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों द्वारा बरामदों और सड़क के हिस्सों तक दुकानें फैलाकर कारोबार किए जाने की शिकायतें लंबे समय से उठ रही हैं। जनता बूट हाउस, बजाज बूट हाउस, ओम ज्वेलर्स सहित अन्य प्रतिष्ठानों के सामने सार्वजनिक आवागमन के लिए निर्धारित स्थान पर सामान और दुकान का विस्तार किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि जब गरीब पसरा दुकानदारों के विरुद्ध तत्काल जेसीबी पहुंच सकती है, तो बड़े प्रतिष्ठानों के कथित अतिक्रमण पर बाजार विभाग की कार्रवाई आखिर क्यों दिखाई नहीं देती? क्या इन प्रतिष्ठानों को भी अतिक्रमण हटाने के लिए उसी तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, जैसी कार्रवाई छोटे दुकानदारों के विरुद्ध की जा रही है?
इसी तरह हटरी बाजार में पन्ना स्वीट्स के सामने मार्ग के काफी हिस्से पर अस्थायी रूप से कब्जा कर व्यापार किए जाने की शिकायत सामने आ रही है। यह क्षेत्र पहले से ही अत्यधिक व्यस्त रहता है। ऐसे में सड़क के हिस्से का व्यावसायिक उपयोग आम नागरिकों के आवागमन और यातायात के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। इंदिरा मार्केट और हटरी बाजार में यदि सार्वजनिक मार्गों तथा बरामदों पर अतिक्रमण की शिकायतें मौजूद हैं, तो बाजार विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि वह मौके का निरीक्षण कर निष्पक्ष कार्रवाई करे। आखिर सार्वजनिक स्थान पर अतिक्रमण करने वाले व्यक्ति की आर्थिक हैसियत देखकर नियमों का स्वरूप तो नहीं बदला जा सकता।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बड़े दुकानदारों के विरुद्ध बरामदों और सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण की लिखित शिकायतें किए जाने की बात भी सामने आई है। इसके बावजूद धरातल पर प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देना बाजार विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। नोटिस जारी करना और दस्तावेजों में कार्रवाई दर्ज करना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन आम जनता को राहत तभी मिलेगी जब अतिक्रमण वास्तव में हटाया जाएगा और सार्वजनिक मार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। केवल कागजी कार्रवाई से बाजार की व्यवस्था नहीं सुधर सकती।
एक तरफ यातायात विभाग की सक्रियता, दूसरी तरफ बाजार विभाग की जवाबदेही का सवाल
त्योहारी सीजन में इस बार यातायात विभाग की सक्रियता निश्चित रूप से उल्लेखनीय दिखाई दे रही है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात कौशलेंद्र पटेल के नेतृत्व में इंदिरा मार्केट में यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए जवानों की तैनाती की गई है। पार्किंग स्थलों की व्यवस्था, बड़े वाहनों के प्रवेश पर नियंत्रण, प्रमुख मार्गों पर निगरानी और बाजार के भीतर सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए यातायात विभाग का अमला सुबह से रात तक अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। जिला मुख्यालय के सबसे व्यस्त बाजार क्षेत्र में पुलिस जवानों की यह सक्रियता आम नागरिकों को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।
लेकिन यातायात विभाग की इस मेहनत का पूरा लाभ तभी मिल सकता है, जब बाजार विभाग भी अपनी जिम्मेदारी समान गंभीरता से निभाए। यातायात पुलिस सड़क पर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित कर सकती है, लेकिन दुकानों के सामने बरामदों और सार्वजनिक मार्गों पर फैले व्यावसायिक अतिक्रमण को स्थायी रूप से हटाने की जिम्मेदारी बाजार विभाग और नगर निगम प्रशासन की है। यदि एक विभाग सड़क पर यातायात सुगम बनाने में जुटा रहे और दूसरा विभाग दुकानों के सामने अतिक्रमण हटाने में प्रभावी कार्रवाई न करे, तो यातायात व्यवस्था को पूरी तरह सुचारु बनाना संभव नहीं होगा।
क्या बाजार अधिकारी की कार्रवाई में दोहरा मापदंड?
बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की कार्यप्रणाली को लेकर यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि हाल ही में नगर निगम की सामान्य सभा में सत्ता पक्ष के पार्षदों द्वारा भी बाजार विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए जाने की चर्चा सामने आई थी। इसके बावजूद बाजार विभाग की कार्रवाई को लेकर असंतोष बना हुआ है। महापौर श्रीमती अलका बाघमार के नेतृत्व वाली शहरी सरकार के सामने भी अब यह सवाल है कि क्या बाजार व्यवस्था में समानता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाएगी? बाजार अधिकारी को नियमों के अनुरूप कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है, न कि छोटे और बड़े व्यापारियों के बीच अलग-अलग मापदंड अपनाने की।
बाजार अधिकारी को महापौर का समर्थन प्राप्त होने संबंधी चर्चाएं भी बाजार में सुनाई दे रही हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है। ऐसे में निगम प्रशासन के लिए आवश्यक है कि वह इन चर्चाओं से परे हटकर बाजार विभाग की कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा करे। यदि किसी बड़े प्रतिष्ठान ने सार्वजनिक मार्ग अथवा बरामदे पर अतिक्रमण किया है, तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। प्रशासनिक व्यवस्था में निष्पक्षता का अर्थ ही यही है कि नियम सभी के लिए समान हों।
अब निगम प्रशासन की परीक्षा, यातायात विभाग की मेहनत पर बाजार विभाग कितना खरा उतरेगा?
त्योहारी सीजन में इंदिरा मार्केट की व्यवस्था सुधारने के लिए यातायात विभाग ने अपनी सक्रियता से एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है। अब नगर निगम के बाजार विभाग की परीक्षा है कि वह भी इसी तत्परता और निष्पक्षता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाता है या नहीं। क्या पवन ज्वेलर्स, ओम ज्वेलर्स और हटरी बाजार स्थित पन्ना स्वीट्स के सामने कथित अतिक्रमण की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई होगी? क्या बरामदों और सड़कों पर दुकानें फैलाकर कारोबार करने वाले बड़े प्रतिष्ठानों को भी अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए जाएंगे? और क्या बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा गरीब पसरा दुकानदारों के साथ-साथ बड़े व्यापारियों के विरुद्ध भी समान रूप से कार्रवाई करने का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे?
दुर्ग की जनता को जेसीबी के साथ होने वाली चुनिंदा कार्रवाई का प्रदर्शन नहीं, बल्कि ऐसा बाजार चाहिए जहां हर दुकानदार के लिए एक समान नियम हों, पैदल चलने वालों को रास्ता मिले और यातायात विभाग के जवानों की मेहनत सार्थक हो। अब देखना यह है कि महापौर अलका बाघमार और निगम प्रशासन इस गंभीर विषय पर क्या निर्णय लेते हैं तथा बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा अपनी कार्यप्रणाली में निष्पक्षता और जवाबदेही का कितना परिचय देते हैं।
क्योंकि सुचारु बाजार व्यवस्था केवल गरीबों के पसरे हटाने से नहीं, बल्कि सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर हर तरह के अतिक्रमण को समान रूप से हटाने से ही संभव है।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
