August 02, 2026
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    सावधानी और परीक्षण ही कारगर हथियार

    • rounak group

    नजरिया / शौर्यपथ / ‘जान है, तो जहान है’ से होते हुए हमारी लड़ाई अब ‘जान भी, जहान भी’ तक पहुंच गई है। कोविड-19 के खिलाफ इस लड़ाई में सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएं एकजुट होकर जो काम कर रही हैं, वह अपने आप में प्रशंसनीय है। ऐसे में, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् यानी आईसीएमआर की भूमिका स्वत: महत्वपूर्ण हो गई है। यह संस्था अपनी पूरी शक्ति से इस प्रयास में लगी हुई है कि जल्द से जल्द इस महामारी से निजात पाई जा सके। शुरुआत में वायरस संक्रमण पूरी तरह काबू में था, मगर लॉकडाउन खुलने की वजह से मामलों में वृद्धि हो गई। लॉकडाउन का एक मकसद यह भी था कि दूरदराज के इलाकों में चिकित्सा और जांच की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। लिहाजा, अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं मुहैया करवाई गईं, जरूरी उपकरणों और ऑक्सीजन का इंतजाम किया गया। विभिन्न इलाकों में आइसोलेशन और क्वारंटीन की व्यवस्था की गई। इन सबसे संक्रमण को रोकने में काफी मदद मिली। मगर, सच यह भी है कि कोरोना ने गांव, गरीब और मजदूरों को सबसे अधिक प्रभावित किया है, जिसके कारण प्रवासियों का जो पलायन शुरू हुआ, उसमें कामगार, श्रमिकों की संख्या काफी अधिक रही। प्रवासियों के कारण संक्रमण का दायरा और संक्रमितों की संख्या, दोनों ही बढ़े। ऐसे में, यह जरूरी था कि देश के हर शहर में कोरोना का टेस्ट हो।
    हालात की गंभीरता का संज्ञान लेकर ही प्रधानमंत्री ने शीघ्र फैसला लेते हुए एक के बाद एक राहत पैकेज की न केवल घोषणा की, बल्कि उन्हें हकीकत की जमीन पर उतारा भी। केंद्र के राहत अभियान को राज्य सरकारों ने अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मसलन, उत्तर प्रदेश में, जो आबादी के हिसाब से देश का सबसे बड़ा राज्य है, एक लाख बेड तैयार कर लिए गए हैं। मार्च की शुरुआत में वहां मात्र एक लेबोरेटरी थी, जो आज बढ़कर 33 हो गई हैं और जिनको आईसीएमआर की देख-रेख में संचालित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में अब हर रोज 15 हजार से भी अधिक टेस्ट हो रहे हैं, जिनको जून के अंत तक 20 हजार प्रतिदिन कर लिया जाएगा। मध्य प्रदेश सरकार ने भी इन योजनाओं को एक अभियान का रूप देकर कोरोना के खिलाफ जंग में अपना अहम योगदान दिया है। आज की तारीख में देश भर में 50 लाख से अधिक लोगों की कोरोना जांच हो चुकी है और अब प्रतिदिन करीब 1.40 लाख लोगों की जांच की जा रही है।
    आईसीएमआर ने कोविड-19 के खिलाफ जंग लड़ने के लिए देश को मजबूत बनाया है। देश के सुदूर इलाकों तक कोरोना टेस्टिंग लैब की स्थापना की गई है। लेह में 18 हजार फीट की ऊंचाई पर कोरोना टेस्टिंग लैब की स्थापना करके आईसीएमआर ने अपनी कार्य-क्षमता का बेहतर नमूना पेश किया है। इस संस्था ने देश में अब तक 877 कोरोना टेस्टिंग लैब की स्थापना की है, जिनमें वे इलाके भी शामिल हैं, जहां पर यात्रा करना भी कठिन है। हर जिले में कोरोना टेस्टिंग लैब स्थापित किए जाने के लक्ष्य को आईसीएमआर का साथ मिलने से प्रदेश स्तर पर टेस्टिंग क्षमता में विस्तार हुआ है। हालांकि, मीडिया में कुछ ऐसी खबरें भी हैं कि लोगों में आरटी-पीसीआर और एलाइजा टेस्ट को लेकर भ्रांतियां हैं। एलाइजा टेस्ट दरअसल जांच के लिए नहीं, बल्कि सर्वे के लिए है। यह सर्वे इस बात के लिए किया जा रहा है कि किसी समुदाय या किसी क्षेत्र में किस हद तक बीमारी फैल चुकी है, या 15 दिन पहले तक कितनी बीमारी फैली थी। एलाइजा टेस्ट शरीर में एंटीबॉडी की जांच करता है। जिनका यह टेस्ट पॉजिटिव होता है, उनके बारे में यह कह सकते हैं कि वह व्यक्ति बीमार हुआ था, पर उसके दूसरी बार बीमार होने की आशंका नहीं है। और जो आरटी-पीसीआर टेस्ट है, वह काफी संवेदनशील है। हमने सभी परीक्षणशालाओं को दिशा-निर्देश जारी किए हैं, और उन्हीं के हिसाब से देश भर में टेस्ट हो रहे हैं।
    जाहिर है, टेस्टिंग के लिए लेबोरेटरी तैयार करने में आईसीएमआर की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इस संस्था द्वारा प्लाज्मा थेरेपी, दवा आदि पर भी शोध किए जा रहे हैं। दवा की खोज के लिए भी हम प्रयासरत हैं। हमने वायरस को आइसोलेट करके वैक्सीन पर काम शुरू कर दिया है। बीमारी से लड़ने का काम हर स्तर पर हो रहा है और हमें लगातार इसमें सफलता भी मिल रही है।
    (ये लेखक के अपने विचार हैं) बलराम भार्गव, महानिदेशक, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद्

     

     

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