August 02, 2026
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    मेलबॉक्स / शौर्यपथ / पड़ोसी देश नेपाल जिस तरह से चीन की जुबान बोल रहा है, उससे लगता है कि चीन कोई राजनीतिक चाल चलने की तैयारी कर चुका है। भारत की चेतावनी के बाद भी नेपाल ने लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा इलाके को अपने नए नक्शे में शामिल कर लिया और उस पर राजनीतिक मुहर लगा दी। इससे लगता है कि वह पूरी तरह से भारत के साथ अपने रिश्तों को भूल चुका है। सीमा पर बेवजह का विवाद खड़ा करके वह चीन के हाथों की कठपुतली बन गया है। इस विवाद से निरंतर नेपाल और भारत के संबंध बिगड़ रहे हैं। अच्छी बात है कि भारत ने अब भी बातचीत करके मसले को सुलझाने का भरोसा दिया है। इससे नेपाल को भारत की भलमनसाहत का एहसास हो जाना चाहिए।
    तनुज कुमार, मेरठ

    अफवाहों को रोकें
    जब हमारा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है और सरकार-प्रशासन समेत सभी संवेदनशील नागरिक अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं, तब कुछ लोग सोशल मीडिया पर अनाप-शनाप जानकारी साझा कर रहे हैं, जबकि इसके माध्यम से सरकारी अधिकारी भी आम लोगों के लिए दिशा-निर्देश जारी करते रहते हैं। दिक्कत यह है कि जागरूकता के अभाव में कई लोग इन भ्रामक जानकारियों में फंस जाते हैं। इन अराजक तत्वों पर जल्द से जल्द कार्रवाई होनी चाहिए। यह संबंधित विभाग का दायित्व है कि वह स्वत: संज्ञान लेकर उन लोगों पर कार्रवाई करे, जो गलत सूचनाएं साझा करते हैं और लोगों को भ्रमित करते हैं। आज जब देश एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है,तब सोशल मीडिया के माध्यम से हम कई अच्छे काम कर सकते हैं। एकांतवास के इस दौर में आभासी तौर पर लोगों को जोड़ना वक्त की मांग है। रिश्तों को तोड़ने की कोशिश करना अक्षम्य अपराध माना जाना चाहिए।
    अभिनव त्रिपाठी
    बेल्थरा रोड, बलिया

    चिंता बढ़ाते हालात
    अनलॉक-1 में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। माना कि अपने यहां रिकवरी रेट, यानी मरीजों के ठीक होने की दर लगातार सुधर रही है, लेकिन संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ना चिंता की बात है। यह स्थिति तब है, जब सरकार अपनी तरफ से हालात संभालने की पूरी कोशिश कर रही है। ऐसे में, नागरिकों को चाहिए कि वे कहीं ज्यादा गंभीर हो जाएं। दो गज की दूरी का हरसंभव पालन करें और बेवजह घर से बाहर न निकलें। सरकार सजग है, तो हम भी सतर्क रहें। ऐसा करने पर ही हम कोरोना-मुक्त देश बन सकते हैं।
    महेश नेनावा
    इंदौर, मध्य प्रदेश

    खुदकुशी उपाय नहीं
    बिहार के छोटे से कस्बे से ताल्लुक रखने वाले एक आम इंसान ने चांद को छू लेने जैसे सपने देखे और उसे पूरा करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। इंजीनिर्यंरग की पढ़ाई करके भारतीय फिल्म जगत में अपनी अलग पहचान बनाना और कामयाबी की बुलंदियों की ओर बढ़ना सिर्फ सुशांत सिंह राजपूत की कठिन परिश्रम का नतीजा था। अचानक उनकी खुदकुशी ने सभी को चकित कर दिया। आत्महत्या की यह खबर तथाकथित विकसित समाज की त्रासद तस्वीर को उजागर करती है। आज तमाम ऐशो-आराम होने के बाद भी मानसिक तनाव और अवसाद जैसी समस्याएं विराट हैं। यही कारण है कि आत्महत्या की खबरें अब रोजाना आने लगी हैं। मगर यह याद रखना चाहिए कि सभी के जीवन में संघर्ष का एक दौर आता है। यह कभी लंबा होता है, तो कभी छोटा। लेकिन संघर्ष के बाद ही हमें सफलता मिलती है, इसलिए जीवन के इस बदलते परिवेश में खुद को ढालना चाहिए और जीवन के हर एक पल को जीना चाहिए। यह समझना चाहिए कि हार के बाद ही जीत है।
    अभिषेक सिंह, जौनपुर

     

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