August 02, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me
    • rounak group

    सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / भारत-चीन सीमा पर सैनिकों का शहीद होना जितना दुखद है, उतना ही चिंताजनक है। जिसकी आशंका पिछले दिनों से लगातार बन रही थी, वही हुआ। अब दोनों ही देशों को ऐसे विवाद से बचने और तनाव को आगे बढ़ने से रोकने के हरसंभव प्रयास करने चाहिए। जो भी सैनिक इस टकराव में मारे गए हैं, उनके शव गिनने की बजाय दोनों ही देशों को अपनी उन विफलताओं को गिनना चाहिए, जिनकी वजह से सीमा पर तनाव बढ़ता जा रहा है। सन 1975 के बाद पहली बार भारत-चीन सीमा पर झड़प की वजह से सैनिक शहीद हुए हैं। 45 साल से जो सामरिक समझदारी दोनों देशों के बीच बनी हुई थी, उसे घुटने टेकते देखना कुछ ही समय की बात या एक हादसा भर होना चाहिए।
    जब दोनों देश गलवान घाटी में पीछे हटने पर सहमत थे, तब ऐसा क्यों हुआ? इसकी ईमानदार पड़ताल सेना और विदेश मंत्रालय के उच्चाधिकारियों को करनी चाहिए। उच्च स्तर पर अगर पहले ही पहल होती, तो शायद सीमा विवाद इस ऐतिहासिक दाग तक नहीं पहुंचता। दोनों देश 1962 की बड़ी लड़ाई के बाद 1967 और 1975 में भी सीमित झड़पें देख चुके हैं। झड़प के उस दौर में नहीं लौटना ही समझदारी है। जाहिर है, विदेश मंत्री की जिम्मेदारी सर्वाधिक बढ़ी है। काफी कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि चीन का रवैया कैसा रहता है? चीन में ऐसे तत्व होंगे, जो 45 साल बाद हुई हिंसा पर भड़केंगे। भारत के प्रति उनका लहजा बिगडे़गा। संभव है कि भारत की ओर से भी बयानबाजी हो, लेकिन कुल मिलाकर, दोनों की समझदारी इसी में है कि आधिकारिक स्तर पर दोनों देश संयम से काम लें। भारत सरकार की आधिकारिक नीति रही है कि हमें किसी से जमीन नहीं चाहिए, हम भलमनसाहत में जमीन छोड़ने के लिए जाने जाते हैं, जमीन हड़पने के लिए नहीं। जबकि हमारे कुछ पड़ोसियों की नीति हमसे उलट है। उनकी रणनीति भी रहती है कि भारत को उलझाए रखा जाए, निश्चिंत न होने दिया जाए। भारत में अगर पूरी शांति हो जाएगी, तो यहां संपन्नता निखर उठेगी। कभी चीन की जमीन पर भारत ने दावा नहीं किया और न चीन के मामलों में कभी पड़ा है। यह बात बेशक चुभती है कि चीन के विकास में भारत की जो परोक्ष भूमिका है, उसे चीन ने कभी नहीं माना है। अब समय आ गया है कि भारत बार-बार अपनी भूमिका का एहसास कराए।
    हमें सीमा पर तनाव की जड़ों को उखाड़ फेंकने की ओर बढ़ना होगा। चीन ने लगभग हरेक पड़ोसी के साथ अपने सीमा विवाद सुलझा लिए हैं, जबकि भारत के साथ लगती विशाल सीमा को वह बिजली के तार की तरह खुली रखना चाहता है। सीमा विवाद को सुलझा लेने में उसे अपना कोई हित नहीं दिखता है। यह भारत की जिम्मेदारी है कि वह चीन को बार-बार एहसास कराए। भारत एक उदार देश है। अपनी मर्जी थोपने की बीजिंग की कोशिश 1962 में भले चल गई थी, लेकिन अब नहीं चलेगी। भारत की ताकत को लगभग पूरी दुनिया मान रही है, तो चीन को भी विचार करना चाहिए। भारत का अपना विशाल आर्थिक वजूद है, जिससे चीन विशेष रूप से लाभान्वित होता रहा है। साथ ही, चीनियों को भारत में अपनी बिगड़ती छवि की भी चिंता करनी चाहिए। गलवान घाटी की झड़प से सबक लेते हुए हमें संवाद के रास्ते सहज संबंधों की ओर बढ़ना होगा।

     

    Rate this item
    (0 votes)

    Leave a comment

    Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision