August 02, 2026
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    साजिशों को जवाब

    • rounak group

    सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / विश्व मंच पर चीन की भारत विरोधी हरकतें जितनी पुरानी हैं, उतनी ही दुखद और निंदनीय भी। संयुक्त राष्ट्र के मंच पर चीन फिर एक बार इस साजिश में लगा था कि पाकिस्तान के पक्ष में और परोक्ष रूप से भारत के खिलाफ एक निंदा प्रस्ताव पारित हो जाए। पाकिस्तान की ओर से चीन द्वारा पेश प्रस्ताव में विगत दिनों कराची में हुए आतंकी हमले के लिए भारत को इशारों में ही घेरने की साजिश थी। यह प्रस्ताव खुद चीन ने तैयार किया था। वैसे तो किसी भी आतंकी हमले की संयुक्त राष्ट्र के मंच से निंदा सही है, लेकिन इस मंच का नाजायज फायदा किसी को उठाने नहीं देना चाहिए। खुशी की बात है, भारत के समर्थक देश सजग थे और पहले जर्मनी ने इस प्रस्ताव को रोका और फिर अमेरिका भी आगे आया, इससे चुपचाप इस प्रस्ताव को पारित करा ले जाने की चीनी-पाकिस्तानी साजिश नाकाम हो गई। भारत के लिए चिंता की बात यह थी कि पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी कराची आतंकी हमले के लिए भारत को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। इसलिए ऐसे आतंकी हमले की निंदा का चुपचाप प्रस्ताव करना और उसके लिए किसी निर्दोष देश की ओर इशारा करना चीन जैसे कथित वीटो पावर प्राप्त देश को कतई शोभा नहीं देता।
    बहरहाल, चीन की ऐसी हरकतों के प्रति केवल भारत ही नहीं, अब दुनिया के अन्य महत्वपूर्ण देश भी सजग हो गए हैं। दुनिया में कहीं भी आतंकी हमला हैवानियत से कम नहीं, लेकिन ऐसे किसी हमले के जरिए कूटनीति और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश भी हैवानियत से कम नहीं है। अपने यहां जायज आवाज उठाने वालों को भी आजीवन करावास देने वाला चीन न जाने कैसे पाकिस्तानी आतंकियों का खुलकर बचाव करता रहा है? जमीनी रूप से आतंकवाद के पोषण में पाकिस्तान की हरसंभव मदद करने से लेकर संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की पक्षधरता तक चीन का कोई भी पहलू दुनिया से छिपा नहीं है। अब खबर आई है कि म्यांमार में अरकान नामक हथियारबंद संगठन को चीन धन और हथियार दे रहा है, ताकि वे भारतीय इलाकों में अशांति फैला सकें।
    यह बात भी छिपी नहीं है कि हम चुपचाप उसकी साजिशें झेलते रहे हैं। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है, जब भारत ने मजबूर होकर अपनी नीतियों में परिवर्तन शुरू किया है। लंबे अरसे बाद भारत की खामोशी टूटी है और उसने जेनेवा में मानवाधिकार संबंधी परिषद की बैठक में हांगकांग का मुद्दा उठाया है। हांगकांग में भारतीय मूल की आबादी भी बड़ी संख्या में रहती है, अत: भारत ने कहा है कि वह इस मामले पर नजर रखे हुए है। भारत का इतना कहना भी पर्याप्त है। चीन को समझ लेना चाहिए कि आम तौर पर तिब्बत से ताइवान और यहां तक कि भारतीय इलाकों में चीनी दावों के प्रति भी अपेक्षाकृत शालीनता बरतने वाला भारत अब नई दिशा में बढ़ चला है। भारत के खिलाफ लगातार साजिशें करने की चीनी नीति को अब जवाब मिलने लगा है। दुनिया का सबसे विशाल लोकतांत्रिक देश भारत अपनी कूटनीति के प्रति सजग है। चीन के प्रति केवल भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका और ब्रिटेन में भी बड़ी नाराजगी है। कोई भी देश चीन की अतार्किक मनमानी या हस्तक्षेप को झेलना नहीं चाहेगा। विश्व मंच पर चीन को वह फसल अब काटनी पडे़गी, जो वह भारत और अन्य देशों में बोता रहा है।

     

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