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सम्पादकीय / शौर्यपथ / पीएम केयर्स फंड पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल महत्वपूर्ण, बल्कि अनुकरणीय है। इस फंड को लेकर शुरू से ही जो विवाद रहे हैं, उन पर अलग से विचार-विमर्श की जरूरत भले हो, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में जाने का कोई विशेष औचित्य नहीं था। इस मामले में अदालत की भावनाएं कमोबेश पहले ही सामने आ गई थीं। अप्रैल के महीने में ही जब अलग से पीएम केयर्स फंड बनाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, तभी उस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने बिना समय गंवाए खारिज कर दिया था। कोर्ट ने चुनौती देने को खड़े हुए वकील से तब कहा था, ‘आपके पास दो ही विकल्प हैं, या तो आप याचिका वापस ले लीजिए या आप पर हम भारी जुर्माना लगाएंगे।’ जाहिर है, इस फंड को दोबारा चुनौती नहीं दी जा सकती थी, इसलिए इसके फंड को एनडीआरएफ अर्थात राष्ट्रीय आपदा राहत कोष में जमा कराने के लिए याचिका लगाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने अपने रुख को बरकरार रखा है। इससे निश्चित रूप से उन लोगों को निराशा होगी, जिनको यह आशंका है कि इस फंड में गड़बड़ी हुई है या की जाएगी। कहना न होगा, केवल आशंका के आधार पर कोई शिकायत करने से बचना चाहिए। सरकार की किसी भी बड़ी पहल को मजबूत आधार पर ही चुनौती देनी चाहिए। कोर्ट ने अप्रैल में ही फंड के गठन को चुनौती देने वाली याचिका के बारे में कहा था कि इससे राजनीति की बू आ रही है। अब इस मामले का यहीं पटाक्षेप हो जाना चाहिए।
यह हमारे समय का सच है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में केंद्र सरकार ने एक पीएम केयर्स फंड बना रखा है, जिसमें 3,100 करोड़ रुपये से ज्यादा देश और विदेश के लोगों ने स्वेच्छा से जमा किए हैं। इस धन का उपयोग चिकित्सकीय साजो-सामान से लेकर वैक्सीन की खोज तक में हो रहा है। तमाम राज्यों को भी इस फंड के तहत मदद नसीब हो रही है। सरकार के अनुसार, पीएम केयर्स फंड के 3,100 करोड़ में से 2,100 करोड़ रुपये से वेंटिलेटर खरीदने; 1,000 करोड़ रुपये प्रवासी मजदूरों पर; और 100 करोड़ रुपये वैक्सीन बनाने पर खर्च होने हैं।
आज जरूरत यह नहीं कि पीएम केयर्स फंड पर बहस की जाए, जरूरी है कि इस फंड का देश को सेहतमंद बनाने के लिए बेहतर से बेहतर सदुपयोग हो। केंद्र सरकार पहले ही यह इशारा कर चुकी है कि इस फंड का ऑडिट किया जाएगा। जहां तक विपक्षी दलों का प्रश्न है, तो यह उनका दायित्व है कि वे सरकारी व्यवस्था में खामी खोजें और उसका राजनीतिक इस्तेमाल भी करें। कोरोना के लिए जो धन लोगों ने दिया है, उसकी एक-एक पाई सही जरूरतमंदों तक पहुंचनी चाहिए। पीएम केयर्स फंड में धन दान करने वाले सभी लोग यही चाहेंगे कि उनके धन का देशहित में ईमानदारी से सदुपयोग हो जाए। यह हमारी सरकारों के लिए भी चुनौती है कि वे ऐसे किसी विशेष कोष को पूरी ईमानदारी से निचले स्तर तक पारदर्शिता के साथ खर्च करके देश के सामने पूरा खाता रख दें। ऐसे कोषों पर शंका-आशंका नई बात नहीं है, अपने देश में राहत कोषों पर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं, लेकिन महाविपत्ति के समय के इस विशेष फंड को एक आदर्श स्थापित करना चाहिए। पुरानी आशंकाओं को झुठला देना चाहिए। हमारे विशाल विकासशील देश में ऐसे विशेष कोष की सफलता से दान और सेवा का भविष्य भी तय होगा।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
