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मेलबॉक्स / शौर्यपथ / फिल्म ‘दामिनी’ में सनी देओल वकील की भूमिका निभाते हुए एक डायलॉग कहते हैं, तारीख पे तारीख-तारीख पे तारीख, पर इंसाफ नहीं मिलता... ठीक इसी तरह सरकार सिर्फ योजनाएं लाती है, उनकी सफलता या विफलता का विवेचन नहीं किया जाता। कहीं-कहीं तो योजनाएं भ्रष्टाचार के तहखाने में दब जाती हैं और जनता मुंह ताकती रह जाती है। आज का सच यही है कि सरकारें जनता को लुभाने के लिए या सीधे शब्दों में कहें, तो राष्ट्र-हित के लिए योजनाएं लाती हैं, लेकिन वे कहां तक सफल हो पाती हैं, इस पर कभी मनन नहीं किया जाता। मौजूदा सरकार जब सत्ता में आई थी, तब कुछ योजनाएं लेकर आई, जिनको 2020 में काफी हद तक पूरा हो जाना था। इनमें प्रमुख हैं, नमामि गंगे योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना, स्वच्छ भारत अभियान, सांसद आदर्श ग्राम योजना, मिशन इंद्रधनुष आदि। बावजूद सरकार नित्य नई योजना बनाने के लिए तत्पर दिख रही है। सवाल है, पुरानी योजनाओं का मूल्यांकन किए बिना नई योजनाएं भला कितनी सार्थक होंगी?
उदय कुमार आजाद
अश्लीलता और वेब सीरीज
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर वेब सीरीज में जिस तरह से गाली-गलौज और नग्नता परोसी जा रही हैं, उससे देश के युवाओं की मानसिकता तो बुरी तरह प्रभावित हो ही रही है, सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर क्यों इन वेब सीरीज को फिल्म एवं सेंसर बोर्ड के दायरे से बाहर रखा गया है? एक तरफ तो सरकार पोर्न वेबसाइट्स व अश्लील फिल्मों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा चुकी है, जबकि दूसरी तरफ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इनके खुलेआम प्रसारण की अनुमति दी जा रही है। इसका नतीजा दुष्कर्म और हिंसा की बढ़ती घटनाओं के रूप में देखने को मिल रहा है। हैरत की बात यह है कि बडे़-बडे़ प्रोडक्शन हाउस और नामचीन कलाकार भी ऐसे दृश्यों को करने से परहेज नहीं कर रहे हैं। ऐसे में, जिस तरह से सरकार द्वारा पोर्न साइट्स पर पाबंदी लगाई गई है, उसी तरह से वेब सीरीज पर भी सख्ती बरतने की आवश्यकता है।
प्रत्यूष आनंद, नवादा, बिहार
योग शामिल करें
हमारी शिक्षा-नीति में चरित्र-निर्माण काफी पीछे छूट गया है। इसके लिए शिक्षा-व्यवस्था में योग को शामिल किया जाना अनिवार्य था। इसका कोई विकल्प नहीं है। योग मात्र आसन या प्राणायाम तक सीमित नहीं है, नई शिक्षा-व्यवस्था के अंतर्गत इसके अष्टांग रूप (यम, नियम, आसन, प्रत्याहार, प्राणायाम, धारणा, ध्यान और समाधि) का विधिवत अभ्यास कराया जाना चाहिए, तभी हमारे देश के नौजवानों का चारित्रिक और मानसिक विकास हो सकेगा। स्वस्थ तन और मन वाला कुशल नागरिक ही देश की पूंजी होता है।
सत्य प्रकाश, लखीमपुर खीरी
इंस्टाग्राम पर क्यों
पिछले तीन दिनों से महेंद्र सिंह धौनी की महानता बताते हुए खूब लिखा जा रहा है। लंबी-लंबी तकरीरें हो रही हैं। उनके जैसा न कोई था, न कोई आगे होगा का एहसास कराया जा रहा है। यहां तक कि बीसीसीआई से जुड़े लोग भी धौनी को महानतम खिलाड़ी की संज्ञा दे रहे हैं। वाकई, धौनी की महानता पर किसी को कोई संदेह नहीं है, लेकिन क्या किसी ने यह सोचने की जहमत उठाई कि इस महान खिलाड़ी को आखिर क्यों मैदान की जगह इंस्टाग्राम पर अपने संन्यास की घोषणा करनी पड़ी? ऐसा इसलिए, क्योंकि उन्हें मालूम चल गया था कि बीसीसीआई अब उन्हें मैदान पर उतरने का मौका नहीं देने वाला है। आशीष नेहरा ने धौनी के बारे में एक बात बताई थी कि उनके अंदर वह क्षमता है कि वह विरोधी खिलाड़ियों का दिमाग तुरंत पढ़ लेते हैं। धौनी ने बीसीसीआई के कर्ता-धर्ताओं का दिमाग पढ़ लिया था, इसलिए उन्होंने मैदान के बाहर ही अपने संन्यास की घोषणा कर दी।
जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
