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April 03, 2026
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हमारी डिजिटल अर्थव्यवस्था को चाहिए मजबूत बुनियाद

  • hanumaan janmotsav

नजरिया / शौर्यपथ / जैसे-जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था डिजिटल होती जा रही है, वैसे-वैसे रोजगार बाजार का परिदृश्य भी बदलता जा रहा है। स्थिति यह है कि भविष्य में कई रोजगार ऐसे भी होंगे, जिनके नाम हमने अब तक सुने भी नहीं हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले वर्ष में देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में 18 फीसदी की वृद्धि हुई और देश तेजी से डिजिटलीकरण की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में, डिजिटल होती भारतीय अर्थव्यवस्था के तहत स्थानीय एवं वैश्विक, दोनों ही स्तरों पर कौशल प्रशिक्षित भारतीय युवाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ गए हैं।
यह स्पष्ट दिख रहा है कि कोविड-19 के बीच भी वैश्विक डिजिटल कंपनियां भारत में डिजिटलीकरण के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि व खुदरा क्षेत्र के ई-कॉमर्स में बड़ी मात्रा में निवेश करती दिखाई दे रही हैं। कोविड-19 के बीच भारत में डिजिटल भुगतान उद्योग, ई-कॉमर्स तथा डिजिटल मार्केटिंग जैसे सेक्टर तेजी से आगे बढे़ हैं और इनमें रोजगार के मौके भी बढ़े हैं। यदि हम डिजिटल भुगतान उद्योग की ओर देखें, तो पाते हैं कि नोटबंदी में भी डिजिटल भुगतान उतनी तेजी से नहीं बढ़ा था, जितनी ऊंची छलांग उसने कोरोना महामारी के पिछले चार महीनों में लगाई है।
नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर ऐंड सर्विसेज कंपनीज (नैसकॉम) की अध्यक्ष देवयानी घोष द्वारा डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारतीय प्रतिभाओं के रोजगार मौकों पर हाल ही में दी गई टिप्पणी का उल्लेख करना उपयुक्त होगा। देवयानी ने कहा है कि इस समय प्रतिभा के संदर्भ में भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था में लाभ की स्थिति में है, लेकिन कोरोना महामारी के बाद की दुनिया में मौजूदा आईटी प्रतिभाओं को उभरते तकनीकी कौशल से फिर से लैस करने और दुनिया में खुद को खड़ा रखने के लिए नवाचार यानी इनोवेशन पर जोर देना होगा। निस्संदेह, सरकारी कदमों से डिजिटलीकरण को बढ़ावा मिला है, पर अभी इस दिशा में बहुआयामी प्रयासों की जरूरत बनी हुई है। हमें डिजिटलीकरण के लिए आवश्यक बुनियादी जरूरत संबंधी कमियों को दूर करना होगा। चूंकि बिजली डिजिटल अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण जरूरत है, अत: ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की पर्याप्त पहुंच और आपूर्ति जरूरी है।
चूंकि हमारी आबादी का एक बड़ा भाग अब भी डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था की दृष्टि से पीछे है, अत: उसे डिजिटल बैंकिंग की ओर आगे बढ़ाना होगा। खासतौर से अभी ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों के पास डिजिटली भुगतान के लिए बैंक-खाते, इंटरनेट की सुविधा वाले मोबाइल फोन या क्रेडिट-डेबिट कार्ड जैसी सुविधाएं नहीं हैं, इसलिए ऐसी सुविधाएं बढ़ाने का अभियान जरूरी होगा। फिर ऑनलाइन धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं के कारण बड़ी संख्या में ग्रामीणों का ऑनलाइन लेन-देन में अविश्वास बना हुआ है, इसलिए ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार को अपनी साइबर सुरक्षा मजबूत करनी पड़ेगी।
देश में डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाने के लिए मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में देश को आगे बढ़ाना जरूरी है। मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड टेस्ट करने वाली वैश्विक कंपनी ओकला के मुताबिक, अप्रैल 2020 में मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में 139 देशों की सूची में भारत 132वें पायदान पर है। ओकला के मुताबिक, अप्रैल 2020 में भारत की औसत मोबाइल ब्रॉडबैंड डाउनलोड स्पीड 9.81 एमबीपीएस रही, वहीं इसकी औसत अपलोड स्पीड 3.98 एमबीपीएस थी। मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में दक्षिण कोरिया, कतर, चीन, यूएई, नीदरलैंड, नॉर्वे बहुत आगे हैं। इतना ही नहीं, स्पीड के मामले में भारत को पाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों ने भी पीछे छोड़ रखा है। ऐसे में, भारत को डिजिटल अर्थव्यवस्था में रोजगार के मौकों का फायदा लेने के लिए इंटरनेट स्पीड बढ़ाने के अधिकतम प्रयास करने होंगे।
डिजिटल अर्थव्यवस्था के आधार को मजबूत करने की जरूरत है, तभी यह क्षेत्र ज्यादा से ज्यादा रोजगार देने की स्थिति में होगा। उम्मीद है कि देश की नई पीढ़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था के पीछे छिपे अवसरों को तलाशेगी और देश-दुनिया की नई जरूरतों के मुताबिक अपने आप को सुसज्जित करेगी।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) जयंतीलाल भंडारी, अर्थशास्त्री

 

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