July 30, 2026
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    मुख्यमंत्री ( सफलता की कहानी )

    मुख्यमंत्री ( सफलता की कहानी ) (252)

    घर में आया जल-जीवन, चौघड़ा गांव में जल क्रांति की कहानी

    रायपुर / जल जीवन मिशन के माध्यम से भारत के प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध करना है, ताकि सभी घरों, स्कूलों और आंगनवाडी केन्द्रों तक नल से पानी पहुंच सके।इसी परिप्रक्ष्य में ग्रामीण जीवन में बदलाव की एक प्रेरक और सशक्त कहानी ग्राम पंचायत चौघड़ा के लोहारपारा से सामने आई है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला के विकासखंड मनेन्द्रगढ़ की निवासी दीपा के लिए स्वच्छ पेयजल कभी एक सपना हुआ करता था, जिसे पूरा करने के लिए रोज़ाना लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। घर से दूर स्थित कुएँ से पानी लाने में उनका काफी समय और मेहनत खर्च हो जाता था, जिससे दैनिक जीवन के अन्य कार्य प्रभावित होते थे।

    हर घर नल से जल योजना के लागू होने के बाद दीपा और उनके परिवार का जीवन पूरी तरह बदल गया है। अब उनके घर पर ही शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध है। पानी के लिए भटकने की मजबूरी खत्म हो गई है और समय की बचत होने से दीपा अब परिवार, बच्चों और अन्य घरेलू कार्यों पर बेहतर ध्यान दे पा रही हैं। सबसे बड़ा बदलाव स्वास्थ्य के क्षेत्र में देखने को मिला है, जहां स्वच्छ पानी के कारण परिवार की सेहत में स्पष्ट सुधार हुआ है। दीपा बताती हैं कि नल से जल मिलने के बाद जीवन में सुविधा, सम्मान और सुरक्षा का एहसास बढ़ा है। उन्होंने इस जनकल्याणकारी योजना के लिए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना केवल पानी नहीं, बल्कि बेहतर जीवन की गारंटी लेकर आई है। उनके शब्दों में यह पहल हमारे जीवन को ही नहीं, बल्कि पूरे गांव के भविष्य को बदल रही है।

    जल जीवन मिशन की यह पहल आज ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सुधार का सशक्त उदाहरण बन चुकी है। चौघड़ा गांव की दीपा की कहानी यह साबित करती है कि जब योजनाएं ज़मीन पर उतरती हैं, तो वे सिर्फ नल से पानी नहीं, बल्कि लोगों की ज़िंदगी में खुशहाली और आत्मसम्मान भी पहुंचाती हैं।

    आवास और बिजली एक साथ, देश में पहली बार योजनाओं का अभिसरण

    रायपुर ।
    छत्तीसगढ़ सरकार और छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी ने अत्यंत पिछड़ी जनजाति के परिवारों के लिए रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने की पहल की है। कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम गुडरूमुड़ा में आठ पहाड़ी कोरवा परिवार अब घर बैठे निःशुल्क बिजली का लाभ उठा रहे हैं।

    यह पहल प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, प्रधानमंत्री जनमन योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के अभिसरण से संभव हुई है। इससे न केवल ग्रामीण परिवारों को स्थायी बिजली सुविधा मिली, बल्कि घरेलू बिजली के खर्च से पूरी तरह मुक्ति भी मिली है।

    कैसे हुआ यह नवाचार संभव

    एक किलोवाट के सोलर प्लांट पर लगभग 60 हजार रुपये का खर्च आता है। इसमें केन्द्र और राज्य सरकार की सब्सिडी लगभग 45 हजार रूपए और शेष 15 हजार रुपये डीएमएफ से वहन किए गए। इस समन्वित प्रयास में केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनी और जिला प्रशासन का योगदान शामिल है।

    हितग्राहियों की खुशी

    मंगलू राम और उनके परिवार ने कहा,

    "हमारा जीवन संवर जाएगा। अब हमें निरंतर बिजली मिलेगी और बिल का झंझट नहीं रहेगा। विद्युत कंपनी के लोग हर कदम में मदद कर रहे हैं।"

    अधिकारियों की सोच और योजना

    छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी के अध्यक्ष डॉ. रोहित यादव ने कहा,

    "मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शिता में योजनाओं के अभिसरण का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह पहल पहाड़ी कोरवा परिवारों के लिए स्थायी लाभ लेकर आई है।"

    मैनेजिंग डायरेक्टर भीम सिंह ने कहा,

    "प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और डीएमएफ के समन्वय से हमने देश में एक नई मिसाल कायम की है। यह पायलट प्रोजेक्ट भविष्य में कई अन्य परिवारों के लिए मार्गदर्शक बनेगा।"

    राह में एक उदाहरण

    गुडरूमुड़ा का यह प्रोजेक्ट अब न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए सोलर ऊर्जा और ग्रामीण सशक्तिकरण का मॉडल बन गया है। भविष्य में इसे कई अन्य पिछड़ी और जरूरतमंद जनजाति परिवारों तक विस्तार देने की योजना है।


    अगर आप चाहें तो मैं इसे और “ब्रेकिंग न्यूज़ / सोशल मीडिया फ्रेंडली” संस्करण भी बना दूँ, जिसमें छोटे पैराग्राफ, इमोजी और बुलेट के साथ मोबाइल पढ़ने वालों के लिए आकर्षक बन जाएगा।

           रायपुर / शौर्यपथ / धुन के पक्के लोग जब ठान लेते हैं, तो परिस्थितियां भी रास्ता दे देती हैं। राजनांदगांव के वैशाली नगर निवासी श्री प्रदीप कुमार रामराव देशपांडे ने अपने दृढ़ संकल्प और परिश्रम से यह साबित कर दिया है कि सही योजना और निरंतर मेहनत से आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव रखी जा सकती है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) उनके लिए न केवल आर्थिक संबल बनी, बल्कि एक नई पहचान और स्थायी आजीविका का माध्यम भी बनी।
    प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना भारत सरकार की एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों को सशक्त बनाना, उन्हें औपचारिक स्वरूप देना और प्रतिस्पर्धी बनाना है। इस योजना के अंतर्गत नए एवं मौजूदा उद्यमों को 35 प्रतिशत तक ऋण आधारित सब्सिडी (अधिकतम 10 लाख रुपये), ब्रांडिंग, मार्केटिंग सहायता, प्रशिक्षण एवं बुनियादी ढांचे का सहयोग प्रदान किया जाता है, जिससे वे आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल की भावना के अनुरूप आगे बढ़ सकें।
    इसी योजना के अंतर्गत श्री प्रदीप देशपांडे ने स्वरोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपना लघुवनोपज आधारित प्रोसेसिंग उद्योग प्रारंभ किया। उन्होंने प्रदेश में उपलब्ध चिरौंजी, हर्रा एवं बहेरा जैसे लघुवनोपज की संभावनाओं को पहचानते हुए इन पर आधारित प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की। इस उद्योग के लिए मशीन एवं शेड निर्माण हेतु कुल 5 लाख 50 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिसमें से 2 लाख 13 हजार 500 रुपये का अनुदान प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अंतर्गत प्राप्त हुआ।
    उद्योग की स्थापना के साथ ही श्री देशपांडे ने कौरिनभाठा स्थित संस्कारधानी महिला कृषक अभिरुचि स्वसहायता समूह की महिलाओं को रोजगार से जोड़ा। इससे महिलाओं को स्थायी आय का साधन मिला और वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हुईं, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ा।
    योजना से प्राप्त सहायता राशि से उन्होंने आईटीआई मुंबई निर्मित चिरौंजी डिकॉल्डीकेटर मशीन क्रय की। इस आधुनिक मशीन के माध्यम से चिरौंजी का छिलका अलग कर गिरी निकाली जाती है, जबकि छिलकों से चारकोल का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा चिरौंजी, हर्रा एवं बहेरा की गिरी से तेल निष्कर्षण तथा हर्रा-बहेरा डिकॉल्डीकेटर मशीन द्वारा छाल पृथक्करण का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे मूल्य संवर्धन और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
    ग्रामीण और वनीय क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की चुनौतियों को देखते हुए श्री देशपांडे ने अपनी प्रोसेसिंग यूनिट को सोलर ऊर्जा से संचालित किया है। सोलर प्लांट के उपयोग से उनका बिजली खर्च शून्य हो गया है और उत्पादन कार्य बिना रुकावट जारी है, जिससे लागत में भी भारी कमी आई है।
    चिरौंजी, हर्रा और बहेरा उत्पादों की लगातार बढ़ती मांग के चलते उनका व्यवसाय अब छत्तीसगढ़ तक सीमित न रहकर महाराष्ट्र, झारखंड और ओडिशा तक विस्तारित हो चुका है। इस उद्योग से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 4 लाख रुपये की आय हो रही है, जिससे उनका जीवनस्तर बेहतर हुआ है।
    यह पहल न केवल आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल बनी है, बल्कि वनों के संरक्षण, लघुवनोपज के सतत संग्रहण और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी सहायक सिद्ध हो रही है। स्वसहायता समूह से जुड़ी महिलाएं आज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।
    श्री प्रदीप कुमार रामराव देशपांडे ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना को स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली अत्यंत प्रभावी योजना बताते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की इस पहल ने उनके सपनों को नई उड़ान दी है और आत्मनिर्भर बनने का रास्ता प्रशस्त किया है।

       मुंगेली / शौर्यपथ / शासन द्वारा प्रत्येक घरों में छत पर सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाकर ऊर्जा के लिए आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का संचालन किया जा रहा है। जिले में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम साबित हो रही है। यह योजना न केवल आम लोगों को बिजली बिल के बोझ से राहत दिला रही है, बल्कि स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा रही है।
    इसी कड़ी में दाउपारा मुंगेली निवासी श्री बसंत कुमार ने योजना के तहत अपने घर की छत पर 03 किलोवाट का सोलर पैनल स्थापित कराया है। अब वह हर महीने बिजली बिल के बोझ से मुक्त होकर, अपनी ही सौर ऊर्जा से अपने घर की बिजली जरूरतें पूरी कर रहे हैं। श्री बसंत कुमार ने बताया कि पहले उनके घर में बिजली की आपूर्ति अनियमित रहती थी और बिजली बिल भी अधिक आता था, लेकिन जब उन्हें पीएम सूर्य घर योजना की जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत आवेदन किया। योजना के तहत उन्हें सब्सिडी पर सोलर पैनल मिले और कुछ ही दिनों में उनके घर की छत पर सिस्टम इंस्टॉल कर दिया गया। अब उनके घर में नियमित रूप से बिजली रहती है।
    पीएम सूर्य घर योजना के तहत उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने पर केन्द्र और राज्य शासन द्वारा 30 हजार रूपए से 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। 01 किलोवाट का रूफटॉप लगवाने पर 45 हजार रूपए, 02 किलोवाट में 90 हजार रूपए और 03 किलोवाट का रूफटॉप लगवाने पर 01 लाख 08 हजार रूपए की सब्सिडी प्रदान की जाती है।

     

          रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य 3,100 रुपए प्रति क्विंटल तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी का निर्णय किसानों के लिए बड़ी राहत बनकर आया है। इसका सकारात्मक प्रभाव जिलेभर के किसानों के चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा है।
          अंबागढ़ चौकी विकासखण्ड के ग्राम कलकसा के किसान श्री धनेश राम आज कौड़ीकसा उपार्जन केंद्र में 52 क्विंटल धान विक्रय के लिए पहुंचे थे। उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि इस वर्ष उन्होंने धान विक्रय टोकन स्वयं मोबाइल ऐप के माध्यम से प्राप्त किया, जिससे प्रक्रिया आसान और सुविधाजनक हो गई।
    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार लागू किए गए इस डिजिटल नवाचार ने किसानों के लिए धान विक्रय की पारंपरिक जटिलताओं को काफी कम कर दिया है। अब किसान अपने मोबाइल फोन पर कुछ ही मिनटों में धान विक्रय के लिए टोकन काट सकते हैं और निर्धारित समय पर उपार्जन केंद्र पहुंचकर बिना किसी बाधा के अपना धान बेच सकते हैं।
         कृषक श्री धनेश राम ने बताया कि उपार्जन केंद्र में कर्मचारियों का व्यवहार सहयोगपूर्ण था, तौल-कांटे सही थे, बारदाना पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध था तथा साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर थी। इसके कारण किसान निश्चिंत होकर अपनी उपज बेच पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष उनकी फसल की पैदावार भी अच्छी हुई है, जिससे परिवार की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने धान का उचित मूल्य उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।

     

    रायपुर/ शौर्यपथ / 

    खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा धान उपार्जन को सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए शुरू किया गया तुंहर टोकन मोबाइल ऐप किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। धान खरीदी तिहार के बीच इस डिजिटल नवाचार ने उपार्जन केंद्रों में लगने वाली भीड़, समय की बर्बादी और पारंपरिक जटिलताओं को काफी हद तक कम कर दिया है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रदेशभर में लागू की गई इस व्यवस्था से किसान अब अपने मोबाइल से कुछ ही मिनटों में धान विक्रय हेतु टोकन निकाल पा रहे हैं और निर्धारित समय पर आसानी से केंद्र पहुंचकर धान बेच रहे हैं।

    शुक्रवार को 52 किसानों ने मोबाइल से काटा टोकन

    अम्बिकापुर जिले के उपार्जन केंद्रों में शुक्रवार को 52 किसानों ने तुंहर टोकन ऐप का उपयोग कर घर बैठे धान का टोकन काटा। बढ़ती लोकप्रियता यह दर्शाती है कि डिजिटल सुविधा ने किसानों का विश्वास तेजी से जीता है।

    अम्बिकापुर विकासखंड के आदिमजाति सेवा सहकारी समिति मेड्राकला में पहुंचने वाले ग्राम भिट्ठीकला के कृषक श्री श्याम राजवाड़े और श्री मिलन राम ने बताया कि मोबाइल ऐप से टोकन काटने के बाद केंद्र में किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।

    श्री श्याम राजवाड़े ने कहा कि उन्होंने 26 क्विंटल धान का टोकन कुछ ही मिनटों में घर बैठे निकाल लिया। पूर्व में केंद्र में जाकर टोकन लेने में समय और श्रम दोनों लगते थे, पर अब आते ही बारदाना मिला और धान की तौल भी तत्काल हो गई। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य देने के निर्णय की सराहना की।

    इसी तरह किसान श्री मिलन राम ने बताया कि उन्होंने 62 क्विंटल धान का टोकन मोबाइल ऐप से काटा। बार-बार केंद्र नहीं आना पड़ा और पहुंचते ही बारदाना व तौल की प्रक्रिया बिना किसी बाधा पूरी हुई। उन्होंने कहा कि इस बार की खरीदी व्यवस्था पूरी तरह किसान-मित्र साबित हो रही है।

    डिजिटल नवाचार से बढ़ी पारदर्शिता और सुविधा

    तुंहर टोकन ऐप के जरिए किसानों को अब लंबी लाइनों से मुक्ति,समय और श्रम की बचत,टोकन प्रक्रिया में पारदर्शिता,भीड़-भाड़ और अव्यवस्था में कमी
    जैसे सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। किसानों की संतुष्टि यह साबित करती है कि राज्य सरकार की यह डिजिटल पहल सफल रही है और धान विक्रय को अधिक सरल, तेज और भरोसेमंद बनाकर किसानों को बड़ी राहत दी है।

       रायपुर / शौर्यपथ /  प्रदेशभर की तरह धमतरी जिले में भी खरीफ उपार्जन वर्ष 2025-26 की शुरुआत 15 नवंबर से सुचारू रूप से हो चुकी है। खरीदी केंद्रों में जहाँ किसानों के चेहरों पर संतोष और प्रसन्नता दिखाई दे रही है, वहीं गांवों में श्रमिक परिवारों के बीच भी खुशी का माहौल है। धान खरीदी से जुड़े कार्यों ने ग्रामीण श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं के लिए रोजगार एवं अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ा दिए हैं, जिससे गांवों की अर्थव्यवस्था में नई जान आई है।

    संबलपुर गांव के खरीदी केंद्र में काम कर रहीं ईश्वरी यादव और विद्या मरकाम जैसी महिलाएँ इस बदलाव का सशक्त उदाहरण हैं। धान के कट्टों की सिलाई और भराई में व्यस्त ये महिलाएँ बताती हैं कि खरीफ सीजन उनके लिए उम्मीद और आत्मनिर्भरता का समय बन गया है। गांव की 5-6 महिलाएँ मिलकर प्रतिदिन 400 से 500 कट्टे तैयार करती हैं, जिससे प्रत्येक महिला को सीजन के दौरान लगभग 20 से 22 हजार रुपये की आय हो जाती है। यह राशि उनके परिवार की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहारा साबित होती है।

    इन महिलाओं का कहना है कि पहले उन्हें मजदूरी के लिए गांव से बाहर जाना पड़ता था, लेकिन अब धान खरीदी केंद्रों में मिल रहा स्थानीय कार्य उन्हें सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध करा रहा है। भुगतान समय पर होता है और कार्य के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे उनमें आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

    धान खरीदी प्रक्रिया किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ हमालों, परिवहनकर्ताओं, तौलदारों, डेटा-एंट्री ऑपरेटरों और सहायक कर्मचारियों के लिए भी व्यापक रोजगार सृजित करती है। सुगम व्यवस्था और पारदर्शी प्रक्रिया ने इस सीजन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बना दिया है।

    सरकार द्वारा समय पर समर्थन मूल्य भुगतान, सुरक्षित भंडारण व्यवस्था और खरीदी केंद्रों में बेहतर प्रबंधन ने ग्रामीण जनता के भरोसे को और मजबूत किया है। खरीफ उपार्जन 2025-26 न केवल कृषि उत्पादन का महत्वपूर्ण चरण है, बल्कि यह महिलाओं को रोजगार से जोड़कर, गांवों को सशक्त बनाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला प्रेरक माध्यम भी बनकर उभरा है।

    रायपुर / शौर्यपथ /  प्रधानमंत्री आवास योजना ने देशभर के लाखों जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक और सुरक्षित आवास का अधिकार देकर उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है। इसी कड़ी में अबूझमाड़ के सुदूर वनांचल क्षेत्र ओरछा में भी यह योजना बदलाव की नई कहानी लिख रही है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत ओरछा एवं ब्लॉक समन्वयक के मार्गदर्शन में आवास निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जा रहे हैं।

    पीएम जनमन आवास योजना विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) के लिए शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका लक्ष्य तीन वर्षों के भीतर लाभार्थियों को सुरक्षित घर, स्वच्छ पेयजल, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जोड़ना है। दूरस्थ क्षेत्रों में रहने के कारण जो पीवीटीजी परिवार सरकारी योजनाओं से वंचित रह गए थे, इस योजना के माध्यम से उन्हें स्थायी घर के साथ-साथ मनरेगा के तहत रोजगार और आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

    इसी योजना ने विकासखण्ड ओरछा के ग्राम कोहकामेटा की निवासी मोड्डे बाई, पति मसिया के जीवन में भी बड़ा बदलाव लाया है। मोड्डे बाई पहले अपने परिवार के साथ एक कच्चे और जर्जर घर में रहती थीं। हर मौसम की मार उनके जीवन को और कठिन बना देती थी। परिवार का भरण-पोषण मजदूरी से करने वाली मोड्डे बाई के लिए पक्का मकान बनवाना मात्र एक सपना बनकर रह गया था।

    जब उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी मिली, तो उन्होंने आवेदन किया। सर्वेक्षण के उपरांत उनके खाते में मकान निर्माण हेतु 2 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। अपने सपनों को हकीकत में बदलने के लिए मोड्डे बाई ने स्वयं भी निर्माण कार्य में हाथ बंटाया। आज उनका परिवार पक्के, सुरक्षित और सुखद घर में रह रहा है।

    भावुक होते हुए मोड्डे बाई ने कहा कि यह सिर्फ एक मकान नहीं, मेरे सपनों और आत्मसम्मान की दीवार है। इस मकान ने मुझे वह सम्मान दिया है, जो मुझे जीवन में कभी नहीं मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना उनके परिवार के लिए वरदान साबित हुई है।

    RAIPUR / SHOURYAPATH /
    प्रदेश में किसानों की समृद्धि और कृषि को नई दिशा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा लागू की गई समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था अब और अधिक पारदर्शी, सरल एवं किसान-केंद्रित बन चुकी है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए धान खरीदी का शुभारंभ 15 नवंबर से पूरे छत्तीसगढ़ में हो चुका है, जिसके उत्साहजनक परिणाम सामने आ रहे हैं।

    धमतरी जिले में धान खरीदी के प्रति किसानों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। जिले के 100 उपार्जन केंद्रों में 19 नवंबर तक 3 हज़ार 431 किसानों से कुल 1 लाख 56 हज़ार 761 क्विंटल धान खरीदा जा चुका है। यह व्यवस्था किसानों के बढ़ते भरोसे को और मजबूत करता है।

    इसी भरोसे की आवाज बने ग्राम संबलपुर उपार्जन केंद्र में धान बेचने पहुंचे किसान दीपेश कुमार देवांगन। उन्होंने बताया कि इस वर्ष धान बेचने की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक सुगम और पारदर्शी है। ऑनलाइन टोकन सिस्टम ने उनके लंबे इंतजार की समस्या को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। निर्धारित समय पर टोकन मिलने से न भीड़ होती है और न ही अव्यवस्था का सामना करना पड़ता है।

    दीपेश ने इस बार 76 क्विंटल धान बेचा है, जो पिछले वर्ष की मात्रा के लगभग बराबर है। उनका कहना है कि पिछले वर्ष समय पर भुगतान मिलने से खेती के कार्यों में बड़ा लाभ हुआ था, और इस वर्ष भी उन्हें शीघ्र भुगतान की उम्मीद है। धान बेचकर प्राप्त धन को वे कृषि सुधार, बीज-खाद की खरीदी और पारिवारिक आवश्यकताओं में उपयोग करते हैं।

    केंद्र की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए दीपेश ने कहा कि अब हमें बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। यहाँ व्यवस्था अनुकरणीय है और कर्मचारियों का सहयोग प्रशंसनीय। हमारी मेहनत का सही मूल्य मिल रहा है।

    दीपेश की तरह हंसराज, शत्रुघन सहित अन्य किसानों ने भी खरीदी व्यवस्था में आए सकारात्मक बदलावों की प्रशंसा की। उनका मानना है कि इस वर्ष प्रशासन द्वारा किए गए सुधारों के कारण प्रक्रिया अत्यंत सहज हो गई है—बेहतर व्यवस्थापन, त्वरित मापन, ऑनलाइन पारदर्शिता और अधिकारियों की सतत निगरानी ने किसानों का भरोसा कई गुना बढ़ाया है।

    सरकार और जिला प्रशासन के ये प्रयास न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित हो रहे हैं। किसानों ने अपेक्षा जताई कि ऐसी पारदर्शी और विश्वसनीय व्यवस्था आगे भी इसी तरह जारी रहेगी।

     

    प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से सपना हुआ साकार

    जिंदगी में आया बदलाव, योजना बनी उम्मीद की नई किरण

    रायपुर / शौर्यपथ /

    प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत भारत का हर घर ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर हो जाएगा और इसका फायदा भारत को होगा। इस योजना के वजह से  रोजगार के अवसर भी ज्यादा बढ़ेंगे और इसकी वजह से नई नौकरियां भी निकलेगी। पीएम सूर्य घर योजना के तहत जिस घर में सोलर पैनल लगाए जाएंगे, उस घर की बिजली 24 घंटे रहेगी । इस घर में बिजली की कोई भी कटौती नहीं होगी।  प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने रायगढ़ के कृष्णा वाटिका निवासी रामेश्वर सिंह के जीवन में बड़ा बदलाव ला दिया है। जहाँ पहले उन्हें हर माह 3,000 रुपए से अधिक का बिजली बिल चुकाना पड़ता था, वहीं अब उनके घर का बिजली खर्च लगभग शून्य हो गया है। 

    पीएम सूर्य घर योजना के लिए सब्सिडी का प्रावधान
    मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखने वाले रामेश्वर सिंह के लिए बिजली का बढ़ता खर्च हमेशा चिंता का कारण था। गर्मी के दिनों में कूलर और पंखों की अधिक खपत से बिजली बिल 3,000 रुपए से ऊपर पहुँच जाता था, जिससे उनके घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था। इसी बीच उन्हें प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के बारे में पता चला। इस योजना के तहत शासन छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए आकर्षक सब्सिडी दे रही है। उन्होंने बताया कि एक किलोवाट सोलर प्लांट पर 45 हजार, 2 किलोवाट पर 90 हजार और 3 किलोवाट पर एक लाख 8 हजार रुपए की अनुदान राशि दी जा रही है।  यह जानकारी उनके लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आई और उन्होंने तुरंत इस योजना के लिए आवेदन किया।

    बिजली विभाग पर निर्भर नहीं रहकर पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो गया
    आवेदन के बाद टीम ने रामेश्वर सिंह के घर का निरीक्षण किया, बिजली की खपत का आकलन किया और उनकी ज़रूरत के हिसाब से सोलर सिस्टम लगाने की सलाह दी। सरकारी सब्सिडी और आसान प्रक्रिया के कारण कुछ ही हफ्तों में उनके घर की छत पर सोलर पैनल लग गए। यह सोलर पैनल रामेश्वर सिंह के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ। जहां पहले हर महीने बिजली का बिल 3,000 रुपए से ज़्यादा आता था, अब यह खर्च लगभग शून्य हो गया है। इस बचत का उपयोग वे अब अपने परिवार की अन्य ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कर पा रहे हैं। रामेश्वर सिंह अब बिजली विभाग पर निर्भर नहीं हैं और पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो गए हैं। उनके घर की छत पर लगे ये सोलर पैनल न केवल उनकी बिजली की जरूरतें पूरी कर रहे हैं, बल्कि स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा का उपयोग करके वे पर्यावरण संरक्षण में भी अपना योगदान दे रहे हैं।

    रामेश्वर सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुक्त बिजली योजना ने हमारे जीवन की सबसे बड़ी चिंता को खत्म कर दिया। अब हम बिना किसी परेशानी के बिजली का उपयोग कर रहे हैं और पर्यावरण की रक्षा में भी सहयोग दे रहे हैं। रामेश्वर सिंह की यह कहानी इस बात का एक और उदाहरण है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना कैसे लोगों को बिजली के भारी-भरकम बिल से राहत देकर उन्हें आत्मनिर्भर और पर्यावरण-हितैषी बनने में मदद कर रही है। यह योजना कई जिंदगियों में बड़ा बदलाव ला रही है।

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